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MDAVF ने एटम अलॉयज में किया निवेश, ईंधन सुरक्षा और रक्षा मजबूती की दिशा में बड़ा कदम
MDAVF का एटम अलॉयज में निवेश केवल तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहन नहीं, बल्कि रक्षा और ऊर्जा अवसंरचना को भविष्य के खतरों से सुरक्षित करने का प्रयास भी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत की रक्षा अवसंरचना को अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने के लिए महाराष्ट्र डिफेंस एंड एयरोस्पेस वेंचर फंड (MDAVF) ने एक रणनीतिक निवेश करते हुए एटम अलॉयज़ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में भागीदारी की है. यह कंपनी एक उभरता हुआ डीप-टेक स्टार्टअप है जिसने ड्रोन, आग और विस्फोट प्रतिरोधी ईंधन भंडारण व परिवहन प्रणाली विकसित की है. इस निवेश की व्यवस्था IDBI कैपिटल मार्केट्स एंड सिक्योरिटीज लिमिटेड, जो MDAVF का निवेश प्रबंधक है, के माध्यम से की गई है.
विस्फोटों को रोकने वाली अनोखी तकनीक
एटम अलॉयज की मुख्य तकनीक एक सेंसर-रहित, केमिकल-फ्री, एम्बेडेड मटीरियल सिस्टम है, जो अत्यधिक परिस्थितियों में भी स्वतः विस्फोट के जोखिम को निष्क्रिय कर देती है. यह अगली पीढ़ी की सुरक्षा तकनीक है, जिसे सैन्य और वाणिज्यिक प्लेटफॉर्म्स पर परीक्षण किया गया है. यह तकनीक प्रोजेक्टाइल हमले, तोड़फोड़ या तकनीकी विफलता की स्थिति में भी विस्फोट को होने से रोकती है.
राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त स्टार्टअप
एटम अलॉयज को हाल ही में भारत सरकार द्वारा नेशनल स्टार्टअप अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है. यह पुरस्कार डीप टेक – सेफ्टी एंड सिक्योरिटी कैटेगरी में दिया गया था, जो इस स्टार्टअप की राष्ट्रीय नवाचार क्षमता को दर्शाता है.
रक्षा अवसंरचना में क्रांतिकारी बदलाव
IDBI कैपिटल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अमेय बेलोर्कर ने कहा, "एटम अलॉयज अवसंरचना सुरक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही है. यह केवल निवेश नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की जीवन रेखाओं को सुरक्षित करने की रणनीतिक प्रतिबद्धता है. उनकी विस्फोट-प्रतिरोधी तकनीक भारत को ऊर्जा और रक्षा सुरक्षा में वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जा सकती है."
IDBI कैपिटल के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट विक्रम जैन ने कहा, "हम मानते हैं कि नवाचार उद्देश्य और सटीकता दोनों की सेवा करनी चाहिए. एटम अलॉयज़ की तकनीक न केवल ईंधन सुरक्षा को नया रूप देती है, बल्कि उन समाधानों में निवेश करने के हमारे दृष्टिकोण के साथ भी मेल खाती है जो राष्ट्रीय स्तर की समस्याओं का समाधान देती हैं."
रक्षा विशेषज्ञों ने बताया ‘गेम-चेंजर’
एक प्रमुख राष्ट्रीय रक्षा थिंक टैंक के विश्लेषक ने एटम अलॉयज़ की तकनीक को "गेम-चेंजर" बताया. उन्होंने कहा, "यह तकनीक सिर्फ आग बुझाती नहीं है, बल्कि विस्फोट को होने ही नहीं देती – चाहे हालात कितने भी जोखिम भरे क्यों न हों. यह भारत की सुरक्षा अवसंरचना को नई मजबूती देती है."
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी जरूरत
यह निवेश ऐसे समय में किया गया है जब भारत में ऊर्जा अवसंरचना को सुरक्षा खतरों से बचाने पर राष्ट्रीय स्तर पर जोर दिया जा रहा है. हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आई कमजोरियों ने यह स्पष्ट किया कि देश को ऐसे पैसिव डिफेंस सिस्टम्स की जरूरत है जो तोड़फोड़, हवाई हमलों और युद्ध स्थितियों का सामना कर सकें.
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