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ग्रीन ऑफिस स्पेस की मांग में जबरदस्त उछाल: 2019 से अब तक 65% की बढ़त
भारत में ग्रीन ऑफिस स्पेस अब सिर्फ ट्रेंड नहीं, बल्कि बिजनेस की जरूरत बन चुका है. बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा और पर्यावरणीय लक्ष्यों को देखते हुए, देश के शहरों में तेजी से हरित अवसंरचना का विस्तार हो रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
भारत के वाणिज्यिक रियल एस्टेट सेक्टर में हरित भवनों (ग्रीन बिल्डिंग्स) की मांग तेजी से बढ़ रही है. देश के शीर्ष 7 शहरों में ग्रीन सर्टिफाइड ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस में 2019 के मुकाबले 2025 की पहली छमाही तक 65% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पर्यावरणीय मानकों पर खरा उतरने वाली इन इमारतों को अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों और बड़े कॉर्पोरेट्स की पहली पसंद माना जा रहा है, जिससे यह साफ है कि अब ‘ग्रीन’ होना सिर्फ वैकल्पिक नहीं, बल्कि ज़रूरी बन चुका है.
865 मिलियन वर्ग फुट में से 61% ग्रीन ऑफिस
ANAROCK रिसर्च के मुताबिक, देश के 7 बड़े शहरों में कुल ग्रेड-ए ऑफिस स्टॉक करीब 865 मिलियन वर्ग फुट है, जिसमें से लगभग 530 मिलियन वर्ग फुट यानी 61% ग्रीन सर्टिफाइड हैं. साल 2019 में यह आंकड़ा मात्र 322 मिलियन वर्ग फुट था.
बेंगलुरु बना देश का ‘ग्रीन ऑफिस कैपिटल’
बेंगलुरु में इस समय सबसे ज्यादा – 163 मिलियन वर्ग फुट – ग्रीन सर्टिफाइड ऑफिस स्पेस है, जो कुल ग्रीन ऑफिस स्पेस का 31% हिस्सा है. इसके साथ ही बेंगलुरु का 73% ग्रेड-ए स्टॉक ग्रीन सर्टिफाइड है, जो देश में सबसे ज्यादा है. इसके बाद एनसीआर में 97 मिलियन वर्ग फुट (62%) और हैदराबाद में 87 मिलियन वर्ग फुट (62%) ग्रीन सर्टिफाइड स्टॉक है. वहीं कोलकाता मात्र 17.4 मिलियन वर्ग फुट के साथ सबसे पीछे है.
कंपनियों की प्राथमिकता: ग्रीन बिल्डिंग में ही ऑफिस
2025 की पहली छमाही में देश के 7 बड़े शहरों में कुल 26.8 मिलियन वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लीज़ पर लिया गया. इनमें से 74% (लगभग 19.93 मिलियन वर्ग फुट) ग्रीन सर्टिफाइड इमारतों में था. बेंगलुरु ने सबसे अधिक 80% (5.3 मिलियन वर्ग फुट) ग्रीन लीजिंग दर्ज की.
शहर कुल लीजिंग ग्रीन लीजिंग प्रतिशत
बेंगलुरु 6.6 Mn 5.3 Mn 80%
एनसीआर 5 Mn 3.8 Mn 76%
चेन्नई 2.3 Mn 1.75 Mn 76%
पुणे 3.8 Mn 2.9 Mn 76%
एमएमआर 4.5 Mn 3.25 Mn 72%
हैदराबाद 4.2 Mn 2.9 Mn 69%
कोलकाता 0.45 Mn 0.03 Mn 7%
रेंट महंगे, फिर भी डिमांड ज्यादा
ग्रीन बिल्डिंग्स में किराया 24% तक अधिक है, फिर भी इनकी डिमांड अधिक है क्योंकि कंपनियां पर्यावरणीय मानकों को प्राथमिकता दे रही हैं. उदाहरण के लिए, एमएमआर में ग्रीन बिल्डिंग का किराया ₹177 प्रति वर्ग फुट है, जबकि सामान्य ग्रेड-ए ऑफिस का ₹143 है.
शहर सामान्य ऑफिस रिक्तता ग्रीन ऑफिस रिक्तता
एमएमआर 15.10% 8%
एनसीआर 22.20% 20%
चेन्नई 9.10% 13%
बेंगलुरु 12.40% 12%
पुणे 11.75% 11%
हैदराबाद 26.60% 20%
कोलकाता 17.90% 17%
पैन इंडिया 16.30% 14%
पर्यावरण की दिशा में बड़ा कदम
ANAROCK ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, “भारत ने 2070 तक नेट-जीरो एमिशन का लक्ष्य रखा है और 2030 तक 500 गीगावॉट नॉन-फॉसिल एनर्जी क्षमता हासिल करनी है. ऐसे में ग्रीन ऑफिस बिल्डिंग्स इस मिशन का एक अहम हिस्सा बन गई हैं.” पुरी ने यह भी जोड़ा कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) और ग्लोबल कैप्टिव सेंटर (GCCs) अब ग्रीन सर्टिफिकेशन को एक बुनियादी आवश्यकता मान रहे हैं. इसलिए भारत में डेवलपर्स और निवेशकों के लिए सतत निर्माण को अपनाना अब एक रणनीतिक आवश्यकता बन गई है.
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