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अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग PMI बढ़कर 54.7 पर, लेकिन पश्चिम एशिया संकट का दबाव जारी

अप्रैल में नए ऑर्डर और उत्पादन में मामूली सुधार दर्ज किया गया, लेकिन वृद्धि दर अब भी 2022 के बाद दूसरी सबसे कमजोर रही. प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों द्वारा ऑर्डर में देरी के कारण गति सीमित रही.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में अप्रैल महीने के दौरान सुधार देखने को मिला है. हालांकि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. निर्यात में बढ़ोतरी ने सेक्टर को सहारा दिया, लेकिन लागत और महंगाई का दबाव भी लगातार बना हुआ है.

PMI में सुधार, लेकिन रफ्तार अब भी धीमी

पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अप्रैल में बढ़कर 54.7 पर पहुंच गया, जो मार्च में 53.9 था. यह डेटा S&P Global और HSBC की रिपोर्ट में जारी किया गया है. हालांकि यह पिछले महीने के फ्लैश अनुमान 55.9 से कम रहा. PMI का 50 से ऊपर रहना विस्तार (growth) को दर्शाता है. यह लगातार 54वां महीना है जब भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर विस्तार के क्षेत्र में बना हुआ है.

पश्चिम एशिया संकट का असर जारी

अर्थशास्त्रियों के अनुसार पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब महंगाई और सप्लाई चेन पर साफ दिखने लगा है. कच्चे माल की लागत बढ़ने से उद्योगों पर दबाव बढ़ा है, जिससे उत्पादन लागत में तेज वृद्धि दर्ज की गई है.

नए ऑर्डर और उत्पादन में हल्का सुधार

अप्रैल में नए ऑर्डर और उत्पादन में मामूली सुधार दर्ज किया गया, लेकिन वृद्धि दर अब भी 2022 के बाद दूसरी सबसे कमजोर रही. प्रतिस्पर्धा और ग्राहकों द्वारा ऑर्डर में देरी के कारण गति सीमित रही.

हालांकि, निर्यात ऑर्डर में तेज उछाल देखने को मिला और यह सात महीनों के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

लागत और महंगाई में तेज बढ़ोतरी

अप्रैल में एल्यूमिनियम, केमिकल्स, इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स, ईंधन, चमड़ा और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण इनपुट कॉस्ट में तेज इजाफा हुआ. सर्वे में इसे सीधे तौर पर पश्चिम एशिया संकट से जोड़ा गया है.

इनपुट लागत अगस्त 2022 के बाद सबसे तेज गति से बढ़ी, जबकि आउटपुट कीमतों में भी पिछले छह महीनों में सबसे तेज वृद्धि देखी गई.

महंगाई 2022 के बाद उच्चतम स्तर पर

सर्वे के अनुसार कुल महंगाई दर अगस्त 2022 के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है. इसके चलते कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतों में भी तेजी से बढ़ोतरी की है. उपभोक्ता वस्तुओं के क्षेत्र में लागत में थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन कुल मिलाकर दबाव अभी भी बना हुआ है.

रोजगार में बढ़ोतरी का सकारात्मक संकेत

रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल में रोजगार सृजन की दर 10 महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. कंपनियां विस्तार योजनाओं के तहत नई भर्ती कर रही हैं, जो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती को दर्शाता है.

कुल मिलाकर भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लगातार विस्तार के रास्ते पर बना हुआ है, लेकिन पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी महंगाई और लागत का दबाव इसकी रफ्तार को प्रभावित कर रहा है. निर्यात में मजबूती फिलहाल इस सेक्टर के लिए सबसे बड़ा सहारा बनी हुई है.
 


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