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भारत के लिए भी आई बुरी खबर! इसके पीछे की बड़ी वजह महंगाई और युद्ध

जून के महीने में भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी की थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

नई दिल्लीः देश भर में विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) की गतिविधियां 9 माह के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं. इसका कारण है पिछले महीने महंगाई और युद्ध के जारी रहने से हुई, जिसकी वजह से कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी हो गई थी. यह पिछले साल सितंबर के मुकाबले गिरी है, हालांकि अभी तक सूचकांक 50 से ऊपर है. वहीं दूसरी तरफ नौकरियों में वृद्धि देखने को मिली है.

एसएंडपी ग्लोबल इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जून में गिरकर 53.9 पर आ गया है. यह मई में 54.6 पर था. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कुल बिक्री और उत्पादन में भारी कीमतों के दबाव के बीच कमी आई है.

सुधार की ओर किया इशारा
जून के महीने में भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) ने बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी की थी. इससे कर्ज लेना तो महंगा हुआ था, लेकिन इकोनॉमी को सही ढंग पर लाने के लिए यह करना जरूरी भी था, क्योंकि कोरोनाकाल में रिजर्व बैंक ने रेट को बढ़ाया नहीं था.  जून पीएमआई डेटा ने लगातार बारहवें महीने के लिए समग्र परिचालन स्थितियों में सुधार की ओर इशारा किया. पीएमआई की भाषा में, 50 से ऊपर का मतलब विस्तार होता है जबकि 50 से नीचे का स्कोर संकुचन को दर्शाता है.

पहली तिमाही के नतीजे संतुष्ट करने वाले
एस एंड पी ग्लोबल मार्केट इंटेलिजेंस में एसोसिएट डायरेक्टर व इकोनॉमिस्ट पोलियाना डी लीमा ने कहा, "भारतीय मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री ने वित्तीय वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही को एक ठोस आधार पर समाप्त कर दिया है. रुपये पर दबाव, बढ़ती ब्याज दरों, रुपये में गिरावट और एक चुनौतीपूर्ण भू-राजनीतिक परिदृश्य के चेहरे पर उत्साहजनक लचीलापन प्रदर्शित किया."

इन सेक्टर पर पड़ा असर
निगरानी की गई फर्मों में केमिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, एनर्जी, मेटल्स और टेक्सटाइल्स जैसे सेक्टर्स ने इनपुट कॉस्ट में वृद्धि की सूचना दी, जिससे कंपनियों को आंशिक रूप से ऊंची कीमतों पर ग्राहकों को बेचना पड़ा. लीमा ने आगे कहा कि फैक्टरी ऑर्डर, उत्पादन, निर्यात, इनपुट खरीद और रोजगार जैसे कई उपायों में व्यापक आधार वाली मंदी थी क्योंकि ग्राहकों और व्यवसायों ने महंगाई के चलते खर्चों पर रोक लगा दी थी.

ग्रोथ कम हुई
फैक्ट्री ऑर्डर और उत्पादन जून में लगातार बारहवें महीने बढ़ा, लेकिन दोनों ही मामलों में ग्रोथ की दर नौ महीने के निचले स्तर पर आ गई. सर्वेक्षण में कहा गया है कि वृद्धि को आमतौर पर मजबूत ग्राहक मांग के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था, हालांकि कुछ सेक्टर्स ने संकेत दिया है कि विकास महंगाई के दबाव से प्रतिबंधित था. बढ़ती महंगाई और रुपये में कमजोरी की चिंताओं ने व्यापार विश्वास को कम किया, जो 27 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया. कोविड -19 की शुरुआत के बाद पहली बार इनपुट डिलीवरी का समय छोटा हुआ.

नौकरियां में हुई मामूली वृद्धि
नौकरी के मोर्चे पर, रोजगार में लगातार चौथे महीने वृद्धि हुई, हालांकि यह मामूली गति से थी जो मोटे तौर पर इस अवधि में देखा जाता है.

अभी कम नहीं होगी महंगाईः RBI
 भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को जारी अपनी वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में कहा कि वैश्विक स्तर पर लगातार उच्च मुद्रास्फीति दर का अनुमान है और यह अधिक समय तक बनी रहेगी क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से जारी प्रतिबंधों की वजह से वैश्विक व्यापार की मात्रा में और मंदी का खतरा है.


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