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रेयर अर्थ मैगनेट संकट के बीच महिंद्रा का बड़ा फैसला: चीन पर नहीं रहेगी निर्भरता
चीन पर निर्भरता घटाना भारतीय ऑटो सेक्टर के लिए दीर्घकालिक स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम है. महिंद्रा जैसे बड़े ब्रांड्स का वैकल्पिक रास्ता अपनाना न केवल उद्योग की मजबूती दिखाता है, बल्कि खरीदारों के भरोसे को भी बनाए रखता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
चीन द्वारा रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्यात पर लगाई गई पाबंदियों ने वैश्विक ऑटोमोबाइल उद्योग को नई चुनौतियों के सामने ला खड़ा किया है. भारत में भी वाहन निर्माता कंपनियां इस संकट से जूझ रही हैं, लेकिन अब वे चीन पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाश रही हैं. इसी कड़ी में महिंद्रा ने एक ठोस कदम उठाते हुए साफ कर दिया है कि वह इस संकट का समाधान घरेलू स्तर पर तलाशेगी, जिससे न सिर्फ सप्लाई चेन को स्थिरता मिलेगी बल्कि ग्राहकों की चिंता भी कम होगी.
महिंद्रा ने चुना वैकल्पिक रास्ता
देश की प्रमुख SUV निर्माता महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) ने रेयर अर्थ मैग्नेट संकट से निपटने की तैयारी कर ली है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी आने वाले 9 महीनों तक रेयर अर्थ मैग्नेट की आपूर्ति वैकल्पिक स्रोतों से पूरी करेगी. इसके साथ ही इंजीनियरिंग स्तर पर भी दीर्घकालिक समाधान की दिशा में काम शुरू हो चुका है. महिंद्रा ग्रुप के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर अमरज्योति बरुआ ने कहा, “हमने जो कदम उठाए हैं, उनके आधार पर वित्त वर्ष 2025-26 की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है. अब हमें मीडियम और लॉन्ग टर्म के लिए काम करना होगा.”
तकनीक से निकलेगा हल
बरुआ के अनुसार, कंपनी की मौजूदा रणनीति सफल रही है और फिलहाल किसी बड़े संकट की आशंका नहीं है. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि दीर्घकालिक विकास योजनाओं को देखते हुए इंजीनियरिंग स्तर पर गहरी मेहनत जरूरी होगी. कंपनी के इंजीनियर नई तकनीकों और समाधानों पर सक्रियता से काम कर रहे हैं.
अन्य कंपनियां भी इसी राह पर
महिंद्रा अकेली कंपनी नहीं है जो इस दिशा में कदम उठा रही है. हाल ही में मारुति सुजुकी और हुंडई मोटर इंडिया ने भी संकेत दिए हैं कि वे रेयर अर्थ की कमी को लेकर सतर्क हैं. दोनों कंपनियों के मुताबिक अभी तक उनके उत्पादन पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन इंजीनियर समाधान खोजने में जुटे हैं.
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