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‘राई’ जैसी राहत, ‘पहाड़’ जैसी महंगाई: बीते 5 सालों में डबल हुई LPG सिलेंडर की कीमत

मोदी राज में रसोई गैस से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं. लेकिन सरकार विचलित नज़र नहीं आती.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

महंगाई से त्रस्त जनता को 'अच्छे दिन' का सपना दिखाकर भाजपा ने केंद्र में सरकार बनाई थी. अब लगता है जैसे मोदी सरकार अच्छे दिनों की परिभाषा खुद ही भूल गई है. मोदी राज में रसोई गैस से लेकर पेट्रोल-डीजल की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं. लेकिन सरकार विचलित नज़र नहीं आती. उसने दो-तीन बार टैक्स में कमी करके आम जनता को राहत ज़रूर पहुंचाई है, लेकिन जितनी राहत मिली है उससे कई गुना ज्यादा जनता की जेब ढीली हो रही है. ऐसे में इस राहत का होना न होना बराबर है.  

पेट्रोल से गैस तक सब महंगा
महंगाई का सीधा रिश्ता तेल, खासकर डीजल से होता है. जब-जब डीजल बढ़ता है महंगाई का पहियां घूमने लगता है. 2014 यानी जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनें, तब से लेकर अब तक ये पहियां अनगिनत बार फुल स्पीड में घूम चुका है. इसके अलावा, घरेलू रसोई गैस सिलेंडर से लेकर कमर्शियल गैस सिलेंडर भी लगातार महंगा होता आ रहा है. यानी जनता हर मोर्चे पर पिस रही है. हाल ही में LPG सिलेंडर की कीमत में सीधे 50 रुपए बढ़ाए गए हैं. 

 

आंकड़े दे रहे गवाही 
इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर मौजूद आंकड़े बताते हैं कि 1 जुलाई 2017 को 14.2 KG वाले गैस सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 564 रुपए थी. एक साल बाद यानी 1 जुलाई 2018 में यह बढ़कर 754 रुपए हो गई. इसी साल इसने 942 रुपए का आंकड़ा भी छूआ. एक जुलाई 2019 को इसमें कुछ कमी दर्ज की गई. सिलेंडर का दाम घटकर 637 रुपए हो गया. एक जुलाई 2020 को दाम 594 प्रति सिलेंडर आ गए. आम जनता के लिए यह राहत का समय था, लेकिन ये राहत ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रही. एक जुलाई 2021 को यह सीधे 834.50 जा पहुंचे और आज कीमत 1000 के फिगर को पार कर गई है. दिल्ली में वर्तमान कीमत 1053 रुपए है.

बस अपनी कमाई की चिंता  
पेट्रोल की बात करें तो 2017 जुलाई में दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल के दाम 63.19 रुपए थे और आज 96.72 रुपए हो गए हैं. डीजल में भी लगातार इजाफा होता रहा है. पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने की मांग की जाती रही है, ताकि आसमान पर पहुंच चुकीं इनकी कीमतों को जमीन पर लाया जा सके. लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें इसके लिए तैयार नहीं होतीं. सरकार शराब और तेल से ही सबसे ज्यादा कमाई करती है. केंद्र और राज्यों का तेल पर अलग टैक्स होता है. यदि इसे GST के दायरे में लाया जाता है तो उनकी कमाई प्रभावित होगी, इसलिए कोई इसके लिए तैयार नहीं होता.


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