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साल 2030 तक भारत की सड़कों पर होंगे 5 करोड़ इलेक्ट्रिक व्हीकल: रिपोर्ट
भारत में तेजी से इलेक्ट्रिक व्हीकल में ग्रोथ हो रही है, इसका फायदा EV चार्जिंग कंपनियों को होगा. इस साल मार्च तक देश में 10 लाख इलेक्ट्रिक व्हीकल थे
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल ने रफ्तार पकड़ना शुरू कर दिया है. कंसल्टेंसी फर्म KPMG की एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2030 तक भारत की सड़कों पर 5 करोड़ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स होंगे. इस तेजी का फायदा इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग कंपनियों को होगा.
5 करोड़ होंगे इलेक्ट्रिक व्हीकल्स
KPMG ने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को लेकर अपनी रिपोर्ट जारी की है, जिसका शीर्षक है "इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग - अगला बड़ा अवसर", जिसमें कहा गया है कि इस साल मार्च तक भारतीय सड़कों पर इलेक्ट्रिक व्हीकल की संख्या 10 लाख को पार गई थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2030 तक ये आंकड़ा 4-5 करोड़ इलेक्ट्रिक व्हीकल तक पहुंच जाएगा. ये इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग के इकोसिस्टम के खिलाड़ियों के लिए एक बहुत बड़ा मौका होगा.
चार्जिंग स्टेशन की जरूरत बढ़ेगी
KPMG ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पूरे देश में अभी 1700 इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन हैं, जो फिलहाल काम कर रहे हैं, जो कि इलेक्ट्रिक व्हीकल की तेज ग्रोथ को संभालने के लिए काफी नहीं हैं. रिपोर्ट के मुताबिक "फिर भी, सरकार की ओर से चार्जिंग नेटवर्क की पहुंच बढ़ाने और सार्वजनिक और निजी खिलाड़ियों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश आने की संभावना है. जब EV चार्जिंग क्षेत्र में विकास क्षमता की बात आती है, तो KPMG का कहना है कि साल 2025 तक टू-व्हीलर सेगमेंट में 15-20% की ग्रोथ की उम्मीद है. और 2030 तक यह ग्रोथ 50-60% तक बढ़ने की उम्मीद है. जबकि थ्री व्हीलर्स के लिए 2025 तक 45-50% और 2030 तक 90-95% की ग्रोथ की संभावना है.
चार्जिंग स्टेशनों का मिश्रण जरूरी
KPMG की रिपोट के मुताबिक निजी पैसेंजर फोर-व्हीलर की जहां तक बात है, साल 2025 तक चार्जिंग व्यवसाय 8-10% और 2030 तक 35-40% बढ़ने की उम्मीद है, जबकि फोर व्हीलर कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में साल 2025 तक ये ग्रोथ 15-20 परसेंट होने की संभावना है और 2030 तक 60-65% पहुंचने की उम्मीद है. KPMG का कहना है कि भारत की चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग बिल्कुल अलग है, यह देखते हुए कि यहां दोपहिया और तिपहिया वाहनों का वर्चस्व है, जो कि विकसित देशों के ठीक उलट है जहां फोर- व्हीलर एक बड़ा सेगमेंट है. बिजली की जरूरतें EV सेगमेंट में अलग-अलग होती हैं, एक ही चार्जिंग विधि सभी सेगमेंट के लिए सही नहीं है. बल्कि अलग अलग कस्टमर सेगमेंट के हिसाब से पब्लिक और निजी चार्जिंग स्टेशनों का मिश्रण होना चाहिए.
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