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अपने पीछे कितनी संपत्ति छोड़ गए हैं टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री?
साइरस मिस्त्री के पिता पालोनजी मिस्त्री भी बड़े कारोबारी थे. मिस्त्री ने 1991 में पिता के कारोबार में हाथ बांटना शुरू किया और उसे बुलंदियों तक पहुंचाया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
सड़क हादसे में जान गंवाने वाले बिजनेस टायकून साइरस मिस्त्री उस वक्त तब सुर्ख़ियों में आए थे जब उन्हें टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया. इसके बाद वह टाटा संस से विवादों की वजह से लंबे समय तक चर्चा का केंद्र रहे. साइरस मिस्त्री ने 2012 में कंपनी के चेयरमैन के रूप में कार्यभार संभाला और 2016 में उन्हें इस पद से हटा दिया गया. महज चार साल के कार्यकाल के दौरान उन्होंने टाटा संस में कई बड़े बदलाव कर दिए थे.
70,957 करोड़ रुपए नेटवर्थ
साइरस मिस्त्री के पिता पालोनजी मिस्त्री भी बड़े कारोबारी थे. मिस्त्री ने 1991 में पिता के कारोबार में हाथ बांटना शुरू किया और उसे बुलंदियों तक पहुंचाया. ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक, पालोनजी मिस्त्री ने अपने निधन के समय करीब 29 बिलियन से ज्यादा की संपत्ति अर्जित की थी, जिससे वह भारत के सबसे अमीर व्यक्तियों में शामिल हो गए थे. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 2018 में साइरस मिस्त्री की व्यक्तिगत नेटवर्थ 70,957 करोड़ रुपए थी. जाहिर है अब तक इसमें कई गुना इजाफा हो गया होगा.
आयरलैंड, लंदन में भी घर
साइरस मिस्त्री अपनी पत्नी रोहिका छागला के साथ मुंबई स्थित एक आलीशान घर में रहते थे. मुंबई के अलावा आयरलैंड, लंदन और दुबई में भी उनके घर हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स यह भी कहा गया है कि साइरस मिस्त्री के नाम पर शानदार याट है और उनके पास आयरलैंड की भी नागरिकता थी. मिस्त्री ने 1992 में देश के विख्यात वकीलों में शामिल इकबाल चागला की बेटी रोहिका चागला से शादी रचाई थी. साइरस मिस्त्री टाटा परिवार के काफी करीब रहे हैं. बताया जाता है कि उनकी एक बहन की शादी रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा से हुई थी.
तैयार किया था ये प्रस्ताव
मिस्त्री ने स्कूली पढ़ाई मुंबई के कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से की. इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वह इंग्लैंड चले गए. वहां उन्होंने लंदन के इंपीरियल कॉलेज से इंजीनियरिंग में डिग्री ली और लंदन बिजनेस स्कूल से मैनेजमेंट में मास्टर्स डिग्री हासिल की. बताया जाता है कि टाटा संस में रहने के दौरान व युवाओं को प्रमोट करना चाहते थे. इसके साथ ही उन्होंने घाटे में चल रही कंपनियों को बंद करने का प्रस्ताव दिया था. इस प्रस्ताव में गुजरात स्थित टाटा ग्रुप की कपड़ा कंपनी का भी नाम शामिल था.
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