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जानिए कैसे एक डॉक्‍टर के संघर्ष से यूनिकॉर्न क्‍लब में शामिल हुई उनकी कंपनी

अपने संघर्ष के बारे में बताते हुए डॉक्‍टर वैभव कपूर कहते हैं कि जब कभी भी आप कुछ करने की सोचते हैं तो आपको उसे करने के लिए अपना प्रयास शुरु कर देना चाहिए.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

वैसे तो हमारे देश में कईं स्‍टार्टअप ऐसे हैं जो यूनिकॉर्न हो चुके हैं लेकिन आज हम आपको लुधियाना के रहने वाले डॉक्‍टर की कंपनी के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी कंपनी आज यूनिकॉर्न क्‍लब में शामिल हो चुकी है. ये है प्रिस्टिन केयर के को फाउंडर डॉक्‍टर वैभव कपूर जिनकी कंपनी आज यूनिकॉन क्‍लब में शामिल है. अपने संघर्ष के बारे में बताते हुए डॉक्‍टर वैभव कपूर कहते हैं कि जब कभी भी आप कुछ करने की सोचते हैं तो आपको उसे करने के लिए अपना प्रयास शुरु कर देना चाहिए. शायद उनकी इसी सोच का नतीजा है कि कोविड के बुरे समय के बावजूद आज उनकी कंपनी यूनिकॉर्न क्‍लब में शामिल हो चुकी है. 


कैसे शुरू हुआ सफर   
मूल रुप से लुधियाना के रहने वाले हैं डॉक्‍टर वैभव कपूर. उनकी बेसिक शिक्षा वहीं से पूरी हुई. पिता भी एक डॉक्‍टर है तो माहौल परिवार में उन्‍होंने  बचपन से ही देखा था. लेकिन बाद में उन्‍होंने मेहनत की और डॉक्‍टर का बेटा भी डॉक्‍टर बनने में कामयाब हो गया. वो चाहते तो किसी भी बड़े अस्‍पताल में नौकरी कर एक अच्‍छा पैकेज ले सकते थे लेकिन उन्‍होंने  अपनी कंपनी के जरिए हेल्‍थकेयर में उतरने का फैसला किया और अपना स्‍टार्टअप शुरू कर दिया. 


कैसा रहा संघर्ष 

BW healthcare के कार्यक्रम में पहुंचे डॉक्‍टर वैभव कपूर ने अपने संघर्ष के बारे में BW Hindi से बात करते हुए कहा कि आपको कभी भी ये नहीं सोचना है कि आपको किसी यूनिकॉर्न क्‍लब में शामिल होना है. आप बस अपना काम ईमानदारी से करें. अपने मरीज के विश्‍वास को कभी मत टूटने दीजिए जब आप ईमानदारी से काम करते हैं तो आपको सफलता जरूर मिलती है. ऐसा नहीं है कि वैभव गुप्‍ता के इस संघर्ष में कठिन समय नहीं आया. उनके स्‍टार्ट अप ने जैसे ही उड़ान भरनी शुरु की तो वैसे ही कोरोना का कठिन समय आ गया. उसके बारे में बताते हुए वो कहते हैं कि नतीजा ये हुआ कि उन्‍हें सर्वाइवल के लिए मास्‍क और सेनेटाइजर तक बेचना पड़ा. लेकिन उन्‍होंने धैर्य के साथ परिस्थितियों का सामना किया, और आज नतीजा सामने है.

क्‍या होता है यूनिकॉर्न 
किसी भी स्‍टार्ट अप का कारोबार जब 1 बिलियन डॉलर या 100 करोड़ हो जाता है तो उसे यूनिकॉर्न कहा जाता है. भारत में मौजूदा समय में 100 कंपनियां ऐसी हैं जिनका कॉरोबार 1 बिलियन डॉलर तक हो चुका है. उन्‍हीं में एक है डॉक्‍टर वैभव कपूर और उनके पार्टनर की कंपनी. जो आज भारत की प्रतिष्ठित कंपनियों में से एक है.
 


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