बृजभूषण का टिकट कटा, बेटे को मिला, कितना दौलतमंद है उनका परिवार?

भाजपा ने कैसरगंज लोकसभा सीट से करण भूषण सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है. यह उनका पहला चुनाव है.

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Thursday, 02 May, 2024
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भाजपा ने विवादों में घिरे सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) का टिकट काट दिया है. पार्टी ने उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट से उन्हें मैदान में नहीं उतारने का फैसला लिया है. हालांकि, BJP के इस फैसले से बात-बात पर नाराज होने वाले बृजभूषण के नाराज होने की कोई गुंजाइश नहीं है. क्योंकि पार्टी ने उनकी जगह उनके बेटे करण भूषण को टिकट दिया है. अब करण कैसरगंज लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे. 

नेशनल खिलाड़ी हैं करण
करण भूषण सिंह (Karan Bhushan Singh) बीजेपी के मौजूदा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के छोटे बेटे हैं. 13 दिसंबर 1990 को जन्मे करण एक बेटी और एक बेटे के पिता हैं. वह डबल ट्रैप शूटिंग के नेशनल खिलाड़ी भी रह चुके हैं. करण ने डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से BBA और LLB की डिग्री लेने के बाद ऑस्ट्रेलिया से बिजनेस मैनेजमेंट में डिप्लोमा किया है. वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश कुश्ती संघ के साथ ही सहकारी ग्राम विकास बैंक (नवाबगंज, गोण्डा) के अध्यक्ष हैं. यह करण भूषण का पहला चुनाव है.  

चलाते हैं कई स्कूल-कॉलेज
माना जा रहा है कि करण कल अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं. प्रत्याशियों को नामांकन के साथ एक हलफनामा भी दाखिल करना पड़ता है, जिसमें उनकी संपत्ति का विवरण होता है. लिहाजा, कल यह पता चलेगा कि करण के पास कुल कितनी संपत्ति है. वैसे, कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि करण अपने पिता के 50 से अधिक स्कूल-कॉलेज संभालते हैं. इनमें से कुछ स्कूल-कॉलेज देवी पाटन मंडल के चारों जिले - गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती में हैं. यहां से उन्हें मोटी कमाई होती है. 

पिता के पास अकूत दौलत
वहीं, उनके पिता बृजभूषण शरण सिंह की बात करें, तो उनके पास दौलत का पहाड़ है. साल 2019 में दाखिल चुनावी हलफनामे में बृजभूषण ने बताया था कि उनके पास 10 करोड़ से अधिक की संपत्ति है. BJP सांसद लग्जरी कारों के भी शौकीन हैं. उनके कारों के कलेक्शन में Endevo, महिंद्रा स्पोर्पिंयो जैसी गाड़ियां शामिल हैं. बृजभूषण सिंह की पत्नी के पास 63,444,541 की संपत्ति है. वाइफ के नाम पर 18 लाख की टोयोटा और 20 लाख की फॉर्च्यूनर भी है. बृजभूषण सिंह के पास 1 पिस्टल, 1 राइफल, 1 रैपिटर है. जबकि पत्नी के नाम पर 1 राइफल और 1 रैपिटर है. करण के पिता के पास करीब 1 करोड़ की खेतीहर जमीन और 2 करोड़ की गैर-कृषि भूमि है. उनके नाम पर 25 लाख की एक कॉर्मिशियल बिल्डिंग और 2 करोड़ की रेजिडेंशियल बिल्डिंग भी है.


त्योहारी सीजन में स्मार्टफोन की बिक्री 16% घटी, महंगे फोन और कम डिस्काउंट ने बिगाड़ा ग्राहकों का बजट

AIMRA) के मुताबिक, स्मार्टफोन की कमजोर मांग का असर केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है. नवरात्रि शुरू होने के बाद से ऑफलाइन दुकानों पर स्मार्टफोन की बिक्री में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 15 October, 2026
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Thursday, 15 October, 2026
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त्योहारी सीजन में स्मार्टफोन की बिक्री बढ़ने की उम्मीदों को झटका लगा है. नवरात्रि के दौरान ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर स्मार्टफोन की बिक्री में 16 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि ऑफलाइन बाजार में भी बिक्री करीब 20 फीसदी तक घटी है. फोन की बढ़ती कीमतें, मेमोरी चिप महंगी होने और त्योहारी ऑफर्स में मिलने वाली छूट कम होने से ग्राहक खरीदारी टाल रहे हैं. इसका असर मोबाइल कंपनियों से लेकर रिटेलर्स तक के कारोबार पर पड़ रहा है. कई ग्राहक नया फोन खरीदने के बजाय पुराने फोन की मरम्मत करा रहे हैं या सेकंड हैंड फोन का विकल्प चुन रहे हैं. हालांकि, 45,000 रुपये से अधिक कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग अब भी बनी हुई है.

कम डिस्काउंट और बढ़ती कीमतों से घटी मांग

मार्केट रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक, ई-कॉमर्स कंपनियों की नवरात्रि सेल के दौरान स्मार्टफोन की बिक्री में 16 फीसदी की गिरावट आई है. रिपोर्ट के अनुसार, ग्राहकों में फोन खरीदने की दिलचस्पी है, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण उनका बजट खरीदारी में बाधा बन रहा है. अमेजन, फ्लिपकार्ट और जियोमार्ट जैसे प्लेटफॉर्म के लिए त्योहारी सीजन अहम होता है, लेकिन इस बार स्मार्टफोन की बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं रही.

पहले त्योहारी सेल में ग्राहकों को 25 से 40 फीसदी तक की छूट मिल जाती थी, लेकिन इस बार डिस्काउंट घटकर करीब 10 से 25 फीसदी रह गया है. इसकी प्रमुख वजह स्मार्टफोन बनाने की लागत में बढ़ोतरी है. मेमोरी चिप की कीमतें दो से तीन गुना तक बढ़ने के साथ रुपये की कमजोरी और माल ढुलाई की लागत ने भी कंपनियों पर दबाव बढ़ाया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन वजहों से स्मार्टफोन की कीमतों में औसतन 35 से 40 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. लागत बढ़ने के कारण कंपनियां पहले की तरह भारी छूट देने से बच रही हैं.

ऑफलाइन बाजार में भी बिक्री सुस्त

स्मार्टफोन की कमजोर मांग का असर केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है. ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) के मुताबिक, नवरात्रि शुरू होने के बाद से ऑफलाइन दुकानों पर स्मार्टफोन की बिक्री में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई है. संगठन ने त्योहारी सीजन में कुल रिटेल बिक्री पिछले साल के मुकाबले 15 फीसदी से अधिक घटने की आशंका जताई है.

AIMRA के फाउंडर चेयरमैन कैलाश लख्यानी के मुताबिक, महंगाई के कारण सितंबर में दुकानों पर आने वाले ग्राहकों की संख्या में भी 40 से 50 फीसदी तक की कमी देखी गई थी. कमजोर मांग के चलते कुछ ब्रांड अपने स्टॉक को निकालने के लिए सेल की अवधि बढ़ा रहे हैं.

नया फोन खरीदने के बजाय पुराने से चला रहे काम

स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों का असर ग्राहकों के खरीदारी के फैसलों पर भी दिख रहा है. रिटेल बाजार में बड़ी संख्या में फोन किस्तों यानी कंज्यूमर फाइनेंसिंग के जरिए बेचे जाते हैं, लेकिन बढ़ते खर्च के कारण ग्राहक अब नई खरीदारी को टाल रहे हैं. कई लोग पुराने फोन की मरम्मत कराकर उसका इस्तेमाल जारी रख रहे हैं, जबकि कुछ ग्राहक सेकंड हैंड स्मार्टफोन खरीद रहे हैं. इससे नए स्मार्टफोन की मांग प्रभावित हो रही है.

प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग बरकरार

बाजार में सुस्ती के बावजूद 45,000 रुपये से अधिक कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग बनी हुई है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के शुरुआती आठ महीनों में स्मार्टफोन की कुल बिक्री में 10 फीसदी की गिरावट आई, लेकिन बिक्री के मूल्य में 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. इसकी एक वजह फोन की औसत बिक्री कीमत (ASP) में इजाफा होना है.

रिटेलर्स के अनुसार, एप्पल, सैमसंग, वीवो, ओप्पो और शाओमी जैसे ब्रांड के स्मार्टफोन की औसत कीमत अब 35,000 से 37,000 रुपये के बीच पहुंच गई है. यानी कम संख्या में फोन बिकने के बावजूद बढ़ी हुई कीमतों के कारण कंपनियों की कुल बिक्री के मूल्य में गिरावट सीमित रही है.

दिवाली के बाद महंगे हो सकते हैं स्मार्टफोन

जानकारों को उम्मीद है कि दिवाली के आसपास स्मार्टफोन की बिक्री में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है, लेकिन पूरे त्योहारी सीजन में बिक्री पर दबाव बने रहने की आशंका है. वहीं, मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों और अन्य लागतों के कारण दिवाली के बाद स्मार्टफोन की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हो सकती है. यदि ऐसा होता है, तो बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है.


जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO की तारीख तय, 21 अक्टूबर से लगा सकेंगे दांव; जानें प्राइस बैंड

IPO में पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित किए गए हैं. वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व होंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 15 October, 2026
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Thursday, 15 October, 2026
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रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सर्विसेज कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के बहुप्रतीक्षित आईपीओ की तारीख तय हो गई है. कंपनी का पब्लिक इश्यू 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. इसके जरिए करीब 30,200 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है. आईपीओ में पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये और रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे गए हैं. कंपनी ने 14 अक्टूबर को रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है.

19 अक्टूबर को एंकर निवेशकों के लिए खुलेगी बोली

जियो प्लेटफॉर्म्स ने अहमदाबाद स्थित गुजरात के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास आरएचपी जमा किया है. आईपीओ में एंकर निवेशक 19 अक्टूबर को बोली लगा सकेंगे. करीब 30,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित आकार के साथ यह इश्यू भारत के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है. फिलहाल यह रिकॉर्ड हुंडई मोटर इंडिया के नाम है, जिसने अक्टूबर 2024 में अपना आईपीओ पेश किया था.

₹1,065 से ₹1,119 होगा प्राइस बैंड

कंपनी ने आईपीओ के लिए प्रति शेयर 1,065 से 1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है. एक लॉट में 12 शेयर होंगे. ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से एक लॉट के लिए निवेशकों को 13,428 रुपये लगाने होंगे. यह राशि पात्र कर्मचारियों को मिलने वाली छूट से पहले की है. आईपीओ में पात्र कर्मचारियों को प्रति शेयर 54 रुपये की छूट दी जाएगी. प्रत्येक शेयर का फेस वैल्यू 10 रुपये है.

रिलायंस के शेयरधारकों के लिए ₹2,500 करोड़ तक रिजर्व

आईपीओ में पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित किए गए हैं. वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व होंगे. इस तरह दोनों श्रेणियों के लिए कुल 3,000 करोड़ रुपये तक के शेयर रखे गए हैं.

रिलायंस इंडस्ट्रीज के वे व्यक्तिगत निवेशक और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) इस श्रेणी के लिए पात्र हो सकते हैं, जिनके पास 14 अक्टूबर को कंपनी के शेयर थे. हालांकि, पात्रता के लिए आईपीओ में निर्धारित शर्तों और नियामकीय नियमों का पालन करना होगा.

27 करोड़ तक नए शेयर जारी करेगी कंपनी

रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ के तहत 27 करोड़ तक नए शेयर जारी करेगी. यह फ्रेश इश्यू होगा, यानी कंपनी नए शेयर जारी करके पूंजी जुटाएगी. कंपनी ने 19 जून को अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया था. इसके बाद 28 अगस्त को उसे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से ऑब्जर्वेशन लेटर मिला.

जियो के कारोबार पर निवेशकों की नजर

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि, जियो प्लेटफॉर्म्स के तहत रिलायंस जियो का टेलीकॉम और डिजिटल सर्विसेज कारोबार आता है. यह रिलायंस इंडस्ट्रीज की उपभोक्ता-केंद्रित कंपनियों के कारोबार की वैल्यू सामने लाने की रणनीति का अहम हिस्सा है. आईपीओ के आरएचपी में कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार से जुड़े जोखिम, इश्यू की शर्तों और अन्य जरूरी जानकारियों का विवरण दिया गया है. निवेशकों को बोली लगाने से पहले इन जानकारियों का अध्ययन करना चाहिए.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


शेयर बाजार में आज भी गिरावट के संकेत, ग्लोबल बिकवाली से बढ़ी चिंता; इन शेयरों पर रहेगी नजर

बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में मुनाफावसूली के चलते गिरावट दर्ज की गई.सेंसेक्स 251.89 अंक यानी 0.34 फीसदी गिरकर 72,781.89 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 99.25 अंक यानी 0.44 फीसदी टूटकर 22,622.70 पर रहा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 15 October, 2026
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Thursday, 15 October, 2026
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घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. अमेरिकी और एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली, उम्मीद से ज्यादा अमेरिकी महंगाई और गिफ्ट निफ्टी में गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. इससे पहले बुधवार को सेंसेक्स 252 अंक और निफ्टी करीब 99 अंक टूटकर बंद हुए थे, जबकि मंगलवार को सेंसेक्स में 1,109 अंकों की जोरदार तेजी आई थी. आज निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के रुख, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजों पर रहेगी. रिलायंस इंडस्ट्रीज, IDBI बैंक, BHEL, ICICI लोम्बार्ड और टाटा टेक्नोलॉजीज समेत कई कंपनियों के शेयर भी कारोबारी गतिविधियों के लिहाज से अहम रहेंगे.

गिफ्ट निफ्टी से कमजोर संकेत, एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली

गुरुवार, 15 अक्टूबर को गिफ्ट निफ्टी करीब 40 अंक गिरकर 22,600 के आसपास कारोबार कर रहा था. इससे घरेलू बाजार में कमजोर शुरुआत की आशंका है. एशियाई बाजारों में भी सुबह तेज गिरावट देखने को मिली. जापान का निक्केई करीब 4 फीसदी और दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 8 फीसदी तक फिसल गया, जबकि हांगकांग और चीन के बाजार भी दबाव में रहे.

इससे पहले बुधवार को अमेरिकी बाजारों में भी बिकवाली देखने को मिली थी. अमेरिका में सितंबर की उपभोक्ता महंगाई दर सालाना आधार पर बढ़कर 3.7 फीसदी पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 3.4 फीसदी थी. यह बाजार के 3.6 फीसदी के अनुमान से अधिक रही. इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनाए रखने की आशंका बढ़ गई है. इसका असर खासकर टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा. बुधवार को नैस्डैक 1.88 फीसदी और S&P 500 इंडेक्स 1.11 फीसदी गिरकर बंद हुआ, जबकि डाओ जोन्स में 0.09 फीसदी की गिरावट रही.

सेंसेक्स 252 अंक टूटा, निफ्टी भी गिरावट के साथ बंद

बुधवार, 14 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में मुनाफावसूली के चलते गिरावट दर्ज की गई. कारोबार के दौरान निफ्टी 22,558.95 के निचले स्तर तक फिसल गया, हालांकि आईटी और एफएमसीजी शेयरों में खरीदारी से नुकसान कुछ कम हुआ. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 251.89 अंक यानी 0.34 फीसदी गिरकर 72,781.89 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 99.25 अंक यानी 0.44 फीसदी टूटकर 22,622.70 पर रहा.

सेंसेक्स और निफ्टी के टॉप गेनर्स-लूजर्स

बुधवार को सेंसेक्स के टॉप गेनर्स में इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, TCS, हिंदुस्तान यूनिलीवर और NTPC शामिल रहे. इन्फोसिस का शेयर 2.51 फीसदी, टेक महिंद्रा का 2.20 फीसदी, TCS का 1.54 फीसदी, हिंदुस्तान यूनिलीवर का 1.15 फीसदी और NTPC का 0.87 फीसदी चढ़ा. दूसरी ओर, बजाज फाइनेंस 2.55 फीसदी गिरकर सेंसेक्स का टॉप लूजर रहा. महिंद्रा एंड महिंद्रा में 2.24 फीसदी, बजाज फिनसर्व में 1.99 फीसदी, इटरनल में 1.68 फीसदी और ICICI बैंक में 1.54 फीसदी की गिरावट आई.

निफ्टी में नेस्ले इंडिया 3.69 फीसदी की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा. टाटा कम्युनिकेशंस में 2.91 फीसदी, इन्फोसिस में 2.44 फीसदी, TCS में 2.11 फीसदी और कोल इंडिया में 2.08 फीसदी की तेजी रही. वहीं, श्रीराम फाइनेंस 3.85 फीसदी गिरकर टॉप लूजर रहा. HDFC लाइफ में 2.85 फीसदी, बजाज फाइनेंस में 2.62 फीसदी, महिंद्रा एंड महिंद्रा में 2.47 फीसदी और SBI लाइफ में 2.20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.

कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी नजर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतें बाजार के लिए अहम बनी हुई हैं. हालांकि, गुरुवार सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 104 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जिससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है. भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आयात बिल और महंगाई बढ़ा सकती है. इसके अलावा कंपनियों की लागत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहेंगी.

RIL, IDBI बैंक और BHEL समेत इन शेयरों पर रहेगी नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज रिलायंस इंडस्ट्रीज, IDBI बैंक, BHEL, ICICI लोम्बार्ड, बजाज कंज्यूमर केयर और टाटा टेक्नोलॉजीज के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का 30,187.6 करोड़ रुपये का IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. इसके लिए 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है. वहीं, IDBI बैंक में सरकार और LIC की कुल 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए 52,878 करोड़ रुपये के सौदे को मंजूरी मिली है. इस सौदे के तहत सरकार अपनी 30.48 फीसदी और LIC अपनी 30.24 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी.

BHEL का सितंबर तिमाही में मुनाफा सालाना आधार पर 375 करोड़ रुपये से बढ़कर 821 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी की आय 23.8 फीसदी बढ़कर 9,300 करोड़ रुपये रही. ICICI लोम्बार्ड का मुनाफा 15.5 फीसदी बढ़कर 946.4 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि शुद्ध अर्जित प्रीमियम आय 17.7 फीसदी बढ़कर 6,651.87 करोड़ रुपये रही. कंपनी ने प्रति शेयर 7 रुपये का अंतरिम लाभांश देने की भी घोषणा की है. बजाज कंज्यूमर केयर का मुनाफा 65.9 फीसदी बढ़कर 70.2 करोड़ रुपये रहा और आय 25.5 फीसदी बढ़कर 333 करोड़ रुपये पहुंच गई. दूसरी ओर, टाटा टेक्नोलॉजीज का मुनाफा पिछली तिमाही के मुकाबले 5.2 फीसदी घटकर 171 करोड़ रुपये रह गया, हालांकि कंपनी की आय 2 फीसदी बढ़कर 1,699 करोड़ रुपये रही.

इसके अलावा हुंडई मोटर इंडिया ने महाराष्ट्र के तालेगांव में अपना नया वाहन निर्माण कारखाना शुरू किया है. कंपनी इस परियोजना में अलग-अलग चरणों में करीब 11,000 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बना रही है. ट्राइडेंट ने राहुल रूंगटा को दोबारा समूह का मुख्य वित्त अधिकारी नियुक्त किया है.

आज इन कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी नजर

गुरुवार को एंजेल वन, HDFC AMC, HDFC लाइफ, DB कॉर्प, IIFL, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, इंडियन बैंक, IRFC, पॉलीकैब, नेस्ले इंडिया, ओरिएंट इलेक्ट्रिक और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स समेत कई कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. निवेशकों की नजर इन कंपनियों की आय, मुनाफे, मार्जिन और भविष्य के कारोबारी अनुमानों पर रहेगी. इसके अलावा आनंद राठी वेल्थ के शेयर भी अंतरिम लाभांश की एक्स-डेट पर कारोबार करेंगे. कंपनी ने 5 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक शेयर पर 4 रुपये का अंतरिम लाभांश घोषित किया है.

कुल मिलाकर, गुरुवार को घरेलू बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, अमेरिकी महंगाई और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की धारणा, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों से तय हो सकती है. ऐसे में कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


IDBI बैंक पर Fairfax का होगा नियंत्रण, ₹52,878 करोड़ की डील को कैबिनेट की हरी झंडी

प्रस्तावित शर्तों के मुताबिक, IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री का सौदा मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है. हालांकि, इसकी अंतिम प्रक्रिया संबंधित मंजूरियों और नियामकीय आवश्यकताओं पर निर्भर करेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 14 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 14 October, 2026
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केंद्र सरकार ने IDBI बैंक के निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को बैंक की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी Fairfax Financial Holdings को 52,878.08 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दे दी. इस सौदे के तहत केंद्र सरकार अपनी 30.48 फीसदी और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अपनी 30.24 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगा. Fairfax ने प्रति शेयर 81 रुपये की बोली लगाई है, जो स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर तय 75.99 रुपये के मानक मूल्य से अधिक है.

सरकार और LIC के पास कितनी हिस्सेदारी बचेगी?

इस सौदे के पूरा होने के बाद केंद्र सरकार के पास IDBI बैंक की 15 फीसदी हिस्सेदारी बनी रहेगी, जबकि LIC के पास 19 फीसदी हिस्सेदारी होगी. इस तरह दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी घटकर 34 फीसदी रह जाएगी. बिक्री प्रक्रिया से पहले सरकार और LIC के पास बैंक की कुल 94.71 फीसदी हिस्सेदारी थी.

इस सौदे के जरिए Fairfax को बैंक का बहुमत स्वामित्व हासिल होगा, जबकि सरकार और LIC की इसमें अल्पमत हिस्सेदारी बनी रहेगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस लेनदेन को रणनीतिक विनिवेश के बजाय रणनीतिक पुनर्गठन बताया है.

2022 में शुरू हुई थी बिक्री प्रक्रिया

IDBI बैंक की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया वर्ष 2022 में शुरू हुई थी. हालांकि, शुरुआती बोलियां तय आरक्षित मूल्य पर खरी नहीं उतरने के कारण इस प्रक्रिया में देरी हुई. बाद में सरकार ने बिक्री प्रक्रिया को दोबारा आगे बढ़ाया. जुलाई 2026 में Fairfax और Emirates NBD ने संशोधित बोलियां जमा की थीं. इनमें Fairfax सफल बोलीदाता के रूप में उभरी.

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब यह सौदा पूरा होने की दिशा में आगे बढ़ेगा. इसके लिए बाकी प्रक्रियागत और नियामकीय औपचारिकताओं को पूरा करना होगा.

मार्च 2027 तक पूरा हो सकता है सौदा

प्रस्तावित शर्तों के मुताबिक, IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री का सौदा मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है. हालांकि, इसकी अंतिम प्रक्रिया संबंधित मंजूरियों और नियामकीय आवश्यकताओं पर निर्भर करेगी.

रिपोर्ट्स के अनुसार, Fairfax को सौदे की शर्तों के तहत कम से कम तीन साल तक IDBI बैंक का नाम बनाए रखना होगा. यह लेनदेन भारत के वित्तीय क्षेत्र में होने वाली बड़ी रणनीतिक हिस्सेदारी बिक्री में से एक है.


केनरा बैंक का मुनाफा 8.4% बढ़कर ₹5,175 करोड़, शेयर में तेजी

बैंक की ओर से स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के मुताबिक, सितंबर तिमाही में कुल आय सालाना आधार पर 6.04% बढ़कर ₹40,931 करोड़ हो गई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 14 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 14 October, 2026
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केनरा बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है. सितंबर तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 8.40% बढ़कर ₹5,175 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह ₹4,774 करोड़ था. बैंक की शुद्ध ब्याज आय में भी 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई. बेहतर नतीजों के बीच शेयर बाजार में केनरा बैंक के शेयर इंट्राडे कारोबार के दौरान 5% से अधिक चढ़ गए. 

बैंक की ओर से स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के मुताबिक, सितंबर तिमाही में कुल आय सालाना आधार पर 6.04% बढ़कर ₹40,931 करोड़ हो गई. पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में बैंक ने ₹38,598 करोड़ की कुल आय दर्ज की थी. वहीं, शुद्ध ब्याज आय (NII) 20.39% बढ़कर ₹11,005 करोड़ पहुंच गई, जो एक साल पहले ₹9,141 करोड़ थी.

बैंक का वैश्विक कारोबार भी मजबूत हुआ है. सितंबर 2026 के अंत तक कुल वैश्विक कारोबार 15.88% की सालाना बढ़ोतरी के साथ ₹30.72 लाख करोड़ हो गया. इसमें वैश्विक जमा ₹16.97 लाख करोड़ और वैश्विक कर्ज ₹13.75 लाख करोड़ रहा.

खराब कर्ज में आई कमी

केनरा बैंक के एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर भी सुधार देखने को मिला. सितंबर 2026 में बैंक का ग्रॉस एनपीए अनुपात घटकर 1.33% रह गया, जबकि जून 2026 में यह 1.57% और सितंबर 2025 में 2.35% था. इसी तरह, नेट एनपीए अनुपात एक साल पहले के 0.54% से घटकर 0.30% पर आ गया.

बैंक का ग्रॉस एनपीए सितंबर तिमाही में ₹18,299 करोड़ रहा, जो जून तिमाही में ₹20,354 करोड़ और पिछले साल की समान अवधि में ₹27,040 करोड़ था. हालांकि, खराब कर्ज में आई पूरी कमी को नकद वसूली नहीं माना जा सकता. इसमें ₹719 करोड़ की नकद वसूली, ₹452 करोड़ के खातों का दोबारा सामान्य होना और ₹2,800 करोड़ के कर्ज को बट्टे खाते में डालना भी शामिल है.

तिमाही के दौरान ₹1,844 करोड़ के नए कर्ज खराब कर्ज की श्रेणी में आए. जून तिमाही में यह आंकड़ा ₹1,781 करोड़ था. वहीं, प्रोविजन कवरेज रेश्यो बढ़कर 95.34% हो गया, जो पिछले साल सितंबर में 93.59% था.

कर्ज और जमा में कितनी बढ़ोतरी?

बैंक के वैश्विक कर्ज में सालाना आधार पर 19.46% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹13.75 लाख करोड़ पर पहुंच गया. दूसरी ओर, वैश्विक जमा 13.13% बढ़कर ₹16.97 लाख करोड़ हो गई. इससे स्पष्ट है कि बैंक के कर्ज में बढ़ोतरी जमा की तुलना में तेज रही.

खुदरा कर्ज में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली. यह सालाना आधार पर 31.61% बढ़कर ₹3.31 लाख करोड़ हो गया. आवास कर्ज 17.35% बढ़कर ₹1.35 लाख करोड़ और वाहन कर्ज 25.50% बढ़कर ₹29,326 करोड़ पर पहुंच गया. छोटे एवं मझोले कारोबारों को दिया गया कर्ज 15.49% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ रहा, जबकि कृषि और संबंधित क्षेत्रों का कर्ज 14.26% बढ़कर ₹3.04 लाख करोड़ हो गया.

कर्ज की तेज वृद्धि के बीच बैंक का वैश्विक क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात बढ़कर 81.01% हो गया. जून तिमाही में यह 80.25% और पिछले साल सितंबर में 76.72% था.

शुद्ध ब्याज मार्जिन में भी सुधार

सितंबर तिमाही में बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) बढ़कर 2.55% हो गया. जून तिमाही में यह 2.52% और पिछले वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में 2.50% था. शुद्ध ब्याज मार्जिन बैंक की ब्याज से होने वाली कमाई और ब्याज पर किए जाने वाले खर्च के बीच के अंतर को दर्शाता है.

हालांकि, कम लागत वाली जमा के मोर्चे पर बैंक को अभी और सुधार करना है. घरेलू चालू और बचत खातों की जमा (CASA) सालाना आधार पर 4.85% बढ़कर ₹4,48,889 करोड़ हो गई. घरेलू जमा में इसकी हिस्सेदारी 29% रही, जबकि बैंक ने मार्च 2027 तक इसे 30-32% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है.

गैर-ब्याज आय में गिरावट

कुछ मोर्चों पर बैंक का प्रदर्शन कमजोर भी रहा. गैर-ब्याज आय सालाना आधार पर 18.17% घटकर ₹5,772 करोड़ रह गई. ट्रेजरी आय में 68.48% की गिरावट आई और यह ₹499 करोड़ रही. निवेश बेचने से होने वाला मुनाफा भी पिछले साल के ₹1,217 करोड़ से घटकर ₹153 करोड़ रह गया.

वहीं, शुल्क आधारित आय 6.54% बढ़कर ₹2,755 करोड़ पहुंच गई. कुल प्रावधान और कर संबंधी मदों का आंकड़ा सालाना आधार पर 6.06% घटकर ₹3,583 करोड़ रहा.

पूंजी की स्थिति मजबूत, पूरे साल के लक्ष्य से आगे कारोबार

सितंबर 2026 में बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 17.19% रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 16.20% था. मुख्य इक्विटी पूंजी अनुपात 12.80% दर्ज किया गया.

बैंक का वैश्विक कारोबार, कर्ज और जमा में वृद्धि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तय लक्ष्यों से आगे चल रही है. मार्च 2027 तक वैश्विक कारोबार में 10-11%, वैश्विक कर्ज में 11-12% और वैश्विक जमा में 9-10% वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है. सितंबर तक इनकी सालाना वृद्धि दर क्रमशः 15.88%, 19.46% और 13.13% रही.

खराब कर्ज के मामले में भी बैंक की स्थिति तय लक्ष्यों से बेहतर है. मार्च 2027 तक ग्रॉस एनपीए 1.50%, नेट एनपीए 0.40% और क्रेडिट कॉस्ट 0.75% तक रखने का लक्ष्य है. सितंबर तिमाही में ये आंकड़े क्रमशः 1.33%, 0.30% और 0.47% रहे.

नतीजों के बाद शेयर में तेजी

केनरा बैंक के तिमाही नतीजों के बाद शेयर में खरीदारी बढ़ी. खबर लिखे जाने तक शेयर 3.55% की तेजी के साथ ₹124.72 पर कारोबार कर रहा था, जबकि इंट्राडे कारोबार के दौरान इसमें 5% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. बैंक के मुनाफे, शुद्ध ब्याज आय और एसेट क्वालिटी में सुधार ने निवेशकों का ध्यान खींचा. खबर लिखे जाने के दौरान यह 3.19 प्रतिशत की तेजी पर कारोबार कर रहा था.
 


ईंधन महंगा, खाद्य वस्तुओं पर दबाव; चार साल बाद थोक महंगाई 11% के पार

सितंबर के थोक महंगाई के आंकड़े संशोधित सूचकांक सीरीज के तहत जारी किए गए हैं. इस सीरीज में 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है, ताकि अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सके.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 14 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 14 October, 2026
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देश में खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई ने भी चिंता बढ़ा दी है. सितंबर 2026 में थोक महंगाई दर बढ़कर 11.39% हो गई, जो अगस्त में 9.92% थी. सितंबर 2022 के बाद पहली बार थोक महंगाई दोहरे अंकों में पहुंची है. कच्चे तेल, ईंधन और बिजली की कीमतों में तेजी के साथ खाद्य पदार्थों और विनिर्मित उत्पादों की महंगाई ने भी इस बढ़ोतरी में योगदान दिया है.

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर सालाना आधार पर 11.39% रही. यह अर्थशास्त्रियों के 10.18% के अनुमान से भी अधिक है. इससे पहले अगस्त में थोक महंगाई दर 9.92% दर्ज की गई थी. वहीं, इस सप्ताह जारी आंकड़ों के अनुसार, खुदरा महंगाई दर भी अगस्त के 4.83% से बढ़कर सितंबर में 5.54% पर पहुंच गई. खाद्य पदार्थों, खासकर सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी को इसकी प्रमुख वजह माना गया.

चार साल के उच्च स्तर पर पहुंची थोक महंगाई

सितंबर 2022 के बाद पहली बार थोक महंगाई दर 10% के पार पहुंची है. उस समय यह 10.70% दर्ज की गई थी. सितंबर 2026 का आंकड़ा पिछले चार वर्षों में थोक महंगाई का सबसे ऊंचा स्तर है. इसके साथ ही थोक महंगाई में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

इससे पहले नवंबर 2025 से जून 2026 तक थोक महंगाई में लगातार इजाफा हुआ था, जबकि जुलाई में मामूली गिरावट आई थी. अब एक बार फिर महंगाई में तेजी ने अर्थव्यवस्था और आम लोगों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है.

ईंधन और बिजली की महंगाई में सबसे ज्यादा तेजी

आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में ईंधन और बिजली की महंगाई दर बढ़कर 25.85% हो गई, जो अगस्त में 22.93% थी. इसी तरह, विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर अगस्त के 8.37% से बढ़कर सितंबर में 9.76% पर पहुंच गई.

प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर भी 7.76% से बढ़कर 8.67% हो गई. इस श्रेणी में खाद्य पदार्थों के अलावा गैर-खाद्य वस्तुएं और खनिज शामिल हैं. वहीं, खाद्य पदार्थों और विनिर्मित खाद्य उत्पादों को मिलाकर तैयार थोक खाद्य सूचकांक की महंगाई दर सितंबर में 8.66% रही, जबकि अगस्त में यह 7.05% थी.

मंत्रालय के मुताबिक, थोक महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में खनिज तेल, खाद्य पदार्थ, कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस, कोयला, लिग्नाइट, बुनियादी धातुएं, रसायन, कपड़ा, रबर एवं प्लास्टिक उत्पाद और बिजली के उपकरण शामिल रहे.

कच्चे तेल की कीमतें कैसे बढ़ा रही हैं महंगाई?

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता. इससे परिवहन, खेती, सिंचाई और माल ढुलाई की लागत भी बढ़ सकती है. जब कंपनियों की उत्पादन और परिवहन लागत बढ़ती है, तो उसका असर उत्पादों की थोक कीमतों पर पड़ सकता है.

इसके अलावा, प्राकृतिक गैस की ऊंची कीमतों से उर्वरकों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है. भारत खाद्य तेलों के आयात पर भी काफी निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है. पैकेजिंग, फसल सुरक्षा और माल ढुलाई की बढ़ती लागत भी खाद्य पदार्थों की कीमतों को प्रभावित कर सकती है.

इस तरह ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंच सकता है. यदि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालती हैं, तो आने वाले समय में खुदरा कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है.

खाद्य महंगाई पर अल नीनो और कमजोर मानसून का खतरा

अर्थशास्त्रियों ने खाद्य महंगाई के लिए अल नीनो और मानसून की असमान बारिश को प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है. मौसम में बदलाव से खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित होने और रबी की बुआई में देरी की आशंका बढ़ सकती है.

ICRA की अदिति नायर और ANZ के धीरज निम के मुताबिक, जलाशयों में पानी का स्तर औसत से कम रहना सर्दियों की फसलों के लिए चिंता का विषय है. हालांकि, खाद्य पदार्थों की कीमतों पर इसका वास्तविक असर फसल उत्पादन और आगे मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा.

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा और अन्य जिंसों की कीमतें बढ़ने से भी खाद्य पदार्थों की लागत पर दबाव पड़ सकता है. ऐसे में आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा तय करने में घरेलू फसल उत्पादन और वैश्विक कमोडिटी कीमतों की अहम भूमिका रहेगी.

महंगाई के मोर्चे पर RBI की चुनौती बढ़ी

थोक और खुदरा, दोनों तरह की महंगाई में बढ़ोतरी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए भी चुनौती बढ़ा सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर की शुरुआत में RBI ने बेंचमार्क रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% कर दिया था. फरवरी 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी बताई गई है. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी संकेत दिया था कि महंगाई और उसके अनुमान पिछले साल की तुलना में उतने अनुकूल नहीं हैं.

हालांकि, थोक महंगाई में बढ़ोतरी का खुदरा कीमतों पर कितना और कब असर पड़ेगा, यह कंपनियों की लागत, मांग और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. यदि कच्चे तेल और अन्य इनपुट की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो उत्पादन लागत के साथ उपभोक्ताओं पर भी महंगाई का दबाव बढ़ सकता है.

नई आधार वर्ष वाली सीरीज में जारी हुए आंकड़े

सितंबर के थोक महंगाई के आंकड़े संशोधित सूचकांक सीरीज के तहत जारी किए गए हैं. इस सीरीज में 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है, ताकि अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सके.

नई सीरीज में वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है. इसमें सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा जैसे ऊर्जा के नए स्रोतों को भी शामिल किया गया है. इससे थोक कीमतों में होने वाले बदलावों का आकलन पहले की तुलना में अधिक व्यापक आधार पर किया जा सकेगा.
 


सितंबर में FII ने दो महीने की खरीदारी का 84% बेचा, वित्तीय क्षेत्र में हुए न्यूट्रल

घरेलू म्यूचुअल फंड में निवेश 25% बढ़कर ₹59,200 करोड़ पहुंचा, सितंबर में निफ्टी 50 में 6.1% की गिरावट

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 14 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 14 October, 2026
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विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सितंबर में भारतीय शेयर बाजार से 4.1 अरब डॉलर की निकासी की. इसके साथ ही उन्होंने पिछले दो महीनों के दौरान की गई खरीदारी का करीब 84% हिस्सा वापस निकाल लिया. उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय शेयर बाजार के कमजोर प्रदर्शन के बीच विदेशी निवेशकों ने यह कदम उठाया. हालांकि, इस दौरान वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में उनकी हिस्सेदारी बढ़ी और इस क्षेत्र को लेकर उनका रुख तटस्थ हो गया. वहीं, घरेलू म्यूचुअल फंड में निवेश सितंबर में 25% बढ़कर ₹59,200 करोड़ पहुंच गया. ब्रोकरेज फर्म CLSA की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है.

सितंबर में 6.1% गिरा निफ्टी 50

सितंबर में निफ्टी 50 इंडेक्स 6.1% की गिरावट के साथ बंद हुआ. अमेरिकी डॉलर के लिहाज से इसका प्रदर्शन उभरते बाजारों और जापान को छोड़कर एशिया के अन्य बाजारों की तुलना में करीब छह प्रतिशत अंक कमजोर रहा. महीने के दौरान सभी सेक्टर गिरावट के साथ बंद हुए. सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और ऑटोमोबाइल शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि दूरसंचार और हेल्थकेयर क्षेत्र के शेयरों में अपेक्षाकृत कम कमजोरी रही.

CLSA की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है. महीने में अब तक वे भारतीय शेयर बाजार से 3.6 अरब डॉलर की निकासी कर चुके हैं.

सितंबर में भारत पर विशेष रूप से निवेश करने वाले सक्रिय फंडों के अलावा अन्य सक्रिय फंडों ने 9 अरब डॉलर के शेयर बेचे. हालांकि, भारत पर केंद्रित नहीं रहने वाले निष्क्रिय फंडों की ओर से 5.8 अरब डॉलर की खरीदारी ने इस बिकवाली के असर को कुछ हद तक कम किया.

वित्तीय क्षेत्र में एफआईआई का रुख हुआ तटस्थ

भारतीय शेयर बाजार में व्यापक बिकवाली के बावजूद विदेशी निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में सेक्टर के हिसाब से बदलाव किए. उन्होंने वित्तीय क्षेत्र में अपनी सापेक्ष हिस्सेदारी 56 आधार अंक बढ़ाई. इसके साथ ही लगातार तीन महीनों तक इस क्षेत्र में कम निवेश रखने के बाद उनका रुख तटस्थ हो गया.

विदेशी निवेशकों ने ऊर्जा क्षेत्र में अपनी कम हिस्सेदारी 35 आधार अंक और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में 20 आधार अंक कम की. वहीं, आईटी सेक्टर में अपनी सापेक्ष हिस्सेदारी 18 आधार अंक बढ़ाई. इससे आईटी क्षेत्र में उनका कम निवेश वाला रुख घटकर 1.2 प्रतिशत अंक के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया.

इन बदलावों के लिए विदेशी निवेशकों ने उपभोक्ता विवेकाधीन क्षेत्र (ऑटोमोबाइल को छोड़कर) और हेल्थकेयर में अपनी अधिक हिस्सेदारी कम की. इन दोनों क्षेत्रों में उनकी सापेक्ष हिस्सेदारी क्रमशः 47 आधार अंक और 30 आधार अंक घटी. इसके अलावा, कम्युनिकेशन सर्विसेज में आठ आधार अंक और यूटिलिटी सेक्टर में छह आधार अंक की कमी आई.

रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक क्षेत्र विदेशी संस्थागत निवेशकों के पोर्टफोलियो में अब भी सबसे अधिक वरीयता वाला सेक्टर बना हुआ है. इसमें उनकी हिस्सेदारी बेंचमार्क से 1.8 प्रतिशत अंक अधिक है.

घरेलू म्यूचुअल फंड में निवेश 25% बढ़ा

विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू म्यूचुअल फंड भारतीय शेयर बाजार को सहारा देते रहे. एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) सहित घरेलू म्यूचुअल फंड में सितंबर के दौरान निवेश मासिक आधार पर 25% बढ़कर ₹59,200 करोड़ हो गया.

सक्रिय फंडों में निवेश 21% बढ़कर ₹40,900 करोड़ रहा, जबकि निष्क्रिय फंडों में निवेश 35% की बढ़ोतरी के साथ ₹18,300 करोड़ पहुंच गया.

एसआईपी निवेश रिकॉर्ड स्तर पर, लेकिन बंद होने वाले प्लान की संख्या बढ़ी

सितंबर में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए मासिक निवेश रिकॉर्ड ₹32,500 करोड़ पर पहुंच गया. हालांकि, एसआईपी बंद करने वाले निवेशकों की संख्या और नए एसआईपी की संख्या के अनुपात में बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है.

अगस्त में यह अनुपात 81% था, जो सितंबर में बढ़कर 116% हो गया. यह पिछले 18 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. इससे संकेत मिलता है कि खुदरा निवेशकों की भागीदारी को लंबे समय तक बनाए रखने की चुनौती बढ़ सकती है.

मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंडों में भी निवेश बढ़ा. सितंबर में मिड-कैप फंडों में ₹7,800 करोड़ और स्मॉल-कैप फंडों में ₹9,000 करोड़ का निवेश आया, जो इन दोनों श्रेणियों के लिए अब तक का उच्चतम स्तर है.

इसके विपरीत, लार्ज-कैप फंडों में केवल ₹860 करोड़ का निवेश आया. इससे पहले लगातार दो महीनों तक इन फंडों से शुद्ध निकासी दर्ज की गई थी.

कुल मिलाकर, आंकड़े दिखाते हैं कि विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेशक बाजार को सहारा दे रहे हैं. हालांकि, एसआईपी बंद होने के अनुपात में बढ़ोतरी पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि यह घरेलू निवेश प्रवाह की स्थिरता और खुदरा निवेशकों के भरोसे का एक अहम संकेतक है.
 


पीएम गतिशक्ति के तहत ₹20.23 लाख करोड़ की 400 परियोजनाएं मंजूरी के लिए विचाराधीन

सड़क, रेलवे समेत कई बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की परियोजनाओं का आकलन कर रहा नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 58 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों समेत सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों का डेटा उपलब्ध

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Published - Wednesday, 14 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 14 October, 2026
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केंद्र सरकार की पीएम गतिशक्ति पहल के तहत ₹20.23 लाख करोड़ की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समीक्षा के दायरे में लाया गया है. इनमें से 400 परियोजनाओं का नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी) मंजूरी के लिए आकलन कर चुका है. इन परियोजनाओं में सड़क, रेलवे और अन्य बुनियादी ढांचा क्षेत्र शामिल हैं. इस पहल का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की योजना को एकीकृत करना, विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना और लॉजिस्टिक्स की लागत कम करना है.

बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की एकीकृत योजना पर जोर

पीएम गतिशक्ति की शुरुआत 13 अक्टूबर 2021 को हुई थी. इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की योजना और विकास को एक साझा ढांचे में लाने पर जोर दिया गया है. इस पहल के अंतर्गत ₹500 करोड़ से अधिक के निवेश वाली लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी संबंधी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप आकलन करता है.

एनपीजी परियोजनाओं की योजना का मूल्यांकन पीएम गतिशक्ति के निर्धारित सिद्धांतों के आधार पर करता है. इसका उद्देश्य अलग-अलग सरकारी विभागों और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, ताकि परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन में समन्वय बढ़ाया जा सके.

हालांकि, ₹20.23 लाख करोड़ की परियोजनाओं को समीक्षा के दायरे में शामिल किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सभी परियोजनाओं को अंतिम मंजूरी या वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है.

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 1,800 से अधिक डेटा लेयर

पीएम गतिशक्ति के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 1,800 से अधिक डेटा लेयर एकीकृत की गई हैं. इसमें 58 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के साथ सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का डेटा शामिल है.

इस प्लेटफॉर्म पर भूमि रिकॉर्ड, बंदरगाहों, जंगलों, स्कूलों, रेलवे स्टेशनों, जल निकायों, दूरसंचार टावरों और राजमार्गों से संबंधित जानकारी उपलब्ध है. इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े विभिन्न आंकड़ों को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है, जिससे परियोजनाओं की योजना और आकलन में मदद मिल सके.

इस व्यवस्था के जरिए परिवहन नेटवर्क, सार्वजनिक सुविधाओं, भूमि रिकॉर्ड और दूरसंचार बुनियादी ढांचे से जुड़ी जानकारियों को एक साथ देखा जा सकता है.

65 से अधिक सॉफ्टवेयर मॉड्यूल और 100 से ज्यादा ऐप विकसित

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, पीएम गतिशक्ति पहल के तहत 65 से अधिक सॉफ्टवेयर मॉड्यूल और टूल विकसित कर एकीकृत किए गए हैं. इसके अलावा 100 से अधिक मोबाइल और वेब एप्लिकेशन भी तैयार किए गए हैं.

ये डिजिटल संसाधन विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और क्षेत्रों से संबंधित बुनियादी ढांचे के आंकड़ों को एक साझा ढांचे में लाने में मदद करते हैं. सरकार की इस पहल का व्यापक उद्देश्य बुनियादी ढांचा विकास में बेहतर समन्वय स्थापित करना और लॉजिस्टिक्स की दक्षता बढ़ाना है.
 


महाराष्ट्र के किसानों को दिवाली से पहले मिलेंगे ₹5,000, सूखे से राहत के लिए सरकार का बड़ा फैसला

राज्य सरकार ने सूखे से संबंधित ताजा रिपोर्टों के आधार पर 40 नए तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है. इन क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण खेती प्रभावित हुई है और किसानों को फसल नुकसान की आशंका का सामना करना पड़ रहा है.

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Published - Wednesday, 14 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 14 October, 2026
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महाराष्ट्र में बारिश की कमी और सूखे की मार झेल रहे किसानों को दिवाली से पहले आर्थिक राहत मिलेगी. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने प्रभावित किसानों के बैंक खातों में ₹5,000 की अग्रिम सहायता राशि ट्रांसफर करने का फैसला किया है. इसके साथ ही राज्य के 40 नए तालुकों को भी सूखाग्रस्त घोषित किया गया है. सरकार ने इस बार नवंबर के बजाय अक्टूबर में ही सूखे को लेकर सरकारी आदेश जारी किया है, ताकि किसानों तक जल्द राहत पहुंचाई जा सके.

दिवाली से पहले किसानों को मिलेगी आर्थिक मदद

महाराष्ट्र के कई हिस्सों में बारिश की कमी के कारण फसलों पर असर पड़ा है. इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है. त्योहारी सीजन को देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है. मुंबई के सह्याद्रि गेस्ट हाउस में हुई कैबिनेट बैठक में सूखे से प्रभावित किसानों को ₹5,000 की अग्रिम राशि देने पर सहमति बनी. सरकार का उद्देश्य राहत राशि को जल्द से जल्द किसानों के खातों तक पहुंचाना है, ताकि सूखे के कारण आर्थिक परेशानी झेल रहे किसान दिवाली के खर्चों को पूरा कर सकें.

अक्टूबर में ही सूखा घोषित, जारी हुआ सरकारी आदेश

महाराष्ट्र में आमतौर पर सूखे की आधिकारिक घोषणा नवंबर के आखिर तक की जाती है. हालांकि, इस साल हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने अक्टूबर में ही सूखा घोषित कर दिया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि इस संबंध में सरकारी आदेश (जीआर) भी जारी कर दिया गया है.

सरकार का मानना है कि सूखे से राहत देने की प्रशासनिक प्रक्रिया में समय लग सकता है. ऐसे में पूरी प्रक्रिया का इंतजार करने के बजाय किसानों को पहले अग्रिम सहायता देने का फैसला किया गया है. इससे प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक मदद मिल सकेगी.

40 नए तालुका भी सूखाग्रस्त घोषित

राज्य सरकार ने सूखे से संबंधित ताजा रिपोर्टों के आधार पर 40 नए तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है. इन क्षेत्रों में बारिश की कमी के कारण खेती प्रभावित हुई है और किसानों को फसल नुकसान की आशंका का सामना करना पड़ रहा है.

सरकार ने प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया है, ताकि किसानों को समय पर सहायता मिल सके. ₹5,000 की अग्रिम राशि के अलावा फसल नुकसान की भरपाई के लिए आगे भी आर्थिक मदद दिए जाने की बात कही गई है.

एकनाथ शिंदे बोले- किसानों की दिवाली फीकी नहीं होने देंगे

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि सरकार किसानों से किए गए वादे को पूरा कर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले ही तय किया था कि किसानों की दिवाली फीकी नहीं होने दी जाएगी. इसी प्रतिबद्धता के तहत किसानों के बैंक खातों में ₹5,000 की अग्रिम सहायता राशि भेजने का फैसला किया गया है.

शिंदे ने यह भी स्पष्ट किया कि यह तत्काल राहत है और आने वाले समय में किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता देने पर भी कदम उठाए जाएंगे.
 


बॉम्बे रेयॉन: प्रमोटर परिवार का समानांतर साम्राज्य

बॉम्बे रेयॉन पर ₹7,358 करोड़ का सार्वजनिक धन बकाया रहते हुए कंपनी का अंत हो गया. तारापुर में एक समानांतर कपड़ा साम्राज्य अब भी चल रहा है. क्या बॉम्बे रेयॉन के कर्जदाताओं, परिसमापक और जांच एजेंसियों को इसकी जानकारी है?

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 14 October, 2026
Last Modified:
Wednesday, 14 October, 2026
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पलक शाह

तारापुर में कपड़ा साम्राज्य

बॉम्बे रेयॉन के परिसमापक के पास नीलामी के लिए फ्लैट, दो कारें और 196 लूम कार्ड बचे थे. कंपनी के कर्मचारियों को प्रति रुपये के दावे पर सिर्फ 14 पैसे मिले. लेकिन उसी औद्योगिक क्षेत्र में कपड़ा कारोबार की एक दूसरी कंपनी चल रही है. इसमें 41.13% हिस्सेदारी रखने वाली निजी कंपनी ने कभी कंपनी रजिस्ट्रार के पास बॉम्बे रेयॉन के अपने ईमेल पते का इस्तेमाल करते हुए दस्तावेज दाखिल किए थे.

बॉम्बे रेयॉन फैशंस लिमिटेड खुद को भारत की सबसे बड़ी शर्ट निर्माता कंपनी बताती थी. इसके 13 प्लांट थे. कंपनी हर साल 10 करोड़ मीटर कपड़ा बनाती थी और इसमें करीब 38,000 कर्मचारी काम करते थे. एक समय इसके शेयर ₹400 से ऊपर कारोबार करते थे.

2013 से 2017 के बीच भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अगुवाई वाले सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एक समूह ने कंपनी को तीन बार संकट से उबारा. अगस्त 2018 में एसबीआई ने ₹2,260.79 करोड़ के अपने कर्ज एक्सपोजर को ₹900 करोड़ में बेच दिया. जून 2022 में ₹1.61 करोड़ का बकाया रखने वाले एक धागा कारोबारी की याचिका पर कंपनी को दिवाला प्रक्रिया में शामिल किया गया. 9 नवंबर 2023 को ₹7,358.95 करोड़ के स्वीकार किए गए दावों के साथ कंपनी को परिसमापन में भेजने का आदेश दिया गया.

बैंकों की ओर से कंपनी को बचाने की ये तीनों कोशिशें सामान्य प्रक्रिया नहीं थीं. 2013 में एसबीआई के नेतृत्व वाले कर्जदाताओं के समूह ने कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग (सीडीआर) व्यवस्था के तहत बॉम्बे रेयॉन के करीब ₹4,000 करोड़ के कर्ज का पुनर्गठन किया. 2016 में मामला ज्वाइंट लेंडर्स फोरम के पास पहुंचा. 2017 में एक खबर आई कि कंपनी ने कर्मचारियों के भविष्य निधि (पीएफ) अंशदान का दुरुपयोग किया है. इसके बाद एसबीआई ने कंपनी को स्ट्रेस्ड एसेट्स के सस्टेनेबल स्ट्रक्चरिंग की योजना (एस4ए) के तहत रखा. इस व्यवस्था में प्रमुख बैंक को प्रमाणित करना होता है कि मौजूदा नकदी प्रवाह से कम से कम आधे कर्ज का भुगतान किया जा सकता है.

इस प्रमाणन के 14 महीने बाद एसबीआई ने ₹1,361 करोड़ के डिस्काउंट पर कर्ज बेच दिया. पांच साल बाद कंपनी का परिसमापन हो गया.

2,027 कर्मचारियों ने कुल ₹29.93 करोड़ का दावा किया था, लेकिन इनमें से सिर्फ ₹4.10 करोड़ स्वीकार किए गए.

जुलाई 2024 में परिसमापक ने पूरी बची हुई कंपनी को चालू कारोबार के रूप में ₹18.32 करोड़ के आरक्षित मूल्य पर बेचने की पेशकश की. इसके बाद से वह बेंगलुरु में फ्लैट, एक टोयोटा इनोवा, एक स्कोडा कोडियाक, बेल्लारी में एक पवनचक्की और 196 इलेक्ट्रिकल लूम कार्ड की नीलामी करता रहा है. रिकॉर्ड में सबसे हालिया नोटिस 10 जून 2026 का है.

बॉम्बे रेयॉन का अंत यहीं हो गया

लेकिन कॉरपोरेट पतन का एक ऐसा पहलू भी है, जिसकी कोई जांच नहीं करता.

बैंक अपने नुकसान को बट्टे खाते में डाल देता है, कर्मचारियों को प्रति रुपये पर 14 पैसे मिलते हैं, फाइल परिसमापक के पास चली जाती है और कहानी खत्म हो जाती है. लेकिन इस मामले में सार्वजनिक रिकॉर्ड बताते हैं कि कहानी खत्म नहीं हुई. बॉम्बे रेयॉन से जुड़े लोग और उसके आसपास की संरचनाएं कंपनी के साथ गायब नहीं हुईं.

प्रमोटर परिवार के उपनाम वाली एक कंपनी, जिसमें बॉम्बे रेयॉन के अपने वित्त प्रमुख और कर्मचारी हिस्सेदार हैं, उसी औद्योगिक क्षेत्र में एक चालू स्पिनिंग मिल को नियंत्रित करती है. इस तथ्य को साबित करने वाले सभी दस्तावेज सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं. कोई भी बैंक अधिकारी, समाधान पेशेवर या जांचकर्ता इन्हें देख सकता है. इनके लिए किसी विशेष वारंट या समन की जरूरत नहीं है.

गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) ने जांच शुरू कर दी है. फाइलों में उसे क्या मिलेगा, यह इस रिपोर्ट में बताया गया है.

समानांतर साम्राज्य: लिनेन आर्ट

मुंबई से 80 किलोमीटर उत्तर में एमआईडीसी तारापुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित है. इसी क्षेत्र में बॉम्बे रेयॉन का प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स था. यहां एक दूसरी कपड़ा कंपनी भी चल रही है.

लिनेन आर्ट प्राइवेट लिमिटेड प्लॉट डी-8 में 12,544 स्पिंडल संचालित करती है. एक क्रेडिट रेटिंग आकलन में इसे भारत का तीसरा सबसे बड़ा लिनेन यार्न निर्माता बताया गया है. इसका परिचालन लाभ 2020-21 में ₹24.64 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में ₹35.21 करोड़ हो गया. कंपनी के पास मशीनरी, कर्मचारी और ऑडिट किए गए खाते हैं.

लिनेन आर्ट का गठन 27 दिसंबर 2013 को हुआ था. यह बॉम्बे रेयॉन के बोर्ड द्वारा 19 जुलाई 2013 को पहले कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग को मंजूरी दिए जाने के पांच महीने बाद की बात है.

कंपनी के रिकॉर्ड में इसके संस्थापक निदेशकों के रूप में प्रशांत जनार्दन अग्रवाल और अमन अग्रवाल के नाम दर्ज हैं. उस समय दोनों बॉम्बे रेयॉन फैशंस के निदेशक थे.

31 मार्च 2023 की स्थिति के अनुसार, लिनेन आर्ट के सदस्यों का रजिस्टर 11 नामों का है. कुल 3.89 करोड़ शेयरों में से सबसे बड़ी हिस्सेदारी एशवेल टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड के पास है. इसके पास 1.60 करोड़ शेयर यानी 41.13% हिस्सेदारी है.

इसके अतिरिक्त 21.98% हिस्सेदारी छह कंपनियों के पास है. इन सभी कंपनियों का पंजीकृत पता एक ही है: रूम नंबर 5, सातवीं मंजिल, 2ए गणेश चंद्र एवेन्यू, कोलकाता 700013.

लेकिन इस कहानी में एशवेल टेक्सटाइल्स सबसे महत्वपूर्ण है.

8 दिसंबर 2007 को एशवेल टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड, जिसका सीआईएन U17299MH2006PTC163103 है, ने कंपनी रजिस्ट्रार के पास फॉर्म 20बी पर अपना वार्षिक रिटर्न दाखिल किया.

कंपनी के वैधानिक ईमेल पते वाले कॉलम में, जिसके माध्यम से कंपनी रजिस्ट्रार उससे संपर्क करता है, यह पता दर्ज था: [mail@bombayrayon.com]

इस रिटर्न पर निदेशक चंद्रेश कल्याणजी देधिया ने डिजिटल हस्ताक्षर किए थे. उनका डीआईएन 01436487 है. हस्ताक्षर के साथ जुड़े प्रमाणपत्र में ईमेल पता [chandresh.dedhia@bombayrayon.com]दर्ज है.

उस वर्ष की शेयरधारिता एक ही श्रेणी में दर्ज की गई थी: “निदेशक या निदेशकों के रिश्तेदार — 100.00”. दो शेयरधारक थे. चुकता पूंजी ₹1,00,000 थी, जबकि अधिकृत पूंजी ₹3.5 करोड़ थी.

यानी प्रमोटर परिवार के उपनाम वाली एक निजी कंपनी कंपनी रजिस्ट्रार से उसी सूचीबद्ध कंपनी के ईमेल डोमेन के जरिए संपर्क कर रही थी.

बारह साल बाद एशवेल टेक्सटाइल्स के पास 29,19,150 शेयर और 21 शेयरधारक थे. इनमें से चार नाम सामान्य निवेशकों के नहीं हैं.

ए. आर. मुंद्रा — आशाराम मुंद्रा, डीआईएन 00019234 — बॉम्बे रेयॉन फैशंस के कार्यकारी निदेशक (वित्त) और मुख्य वित्त अधिकारी थे. वह 31 दिसंबर 2021 तक इस पद पर रहे. कंपनी के पतन के दौरान उसके खातों पर हस्ताक्षर करने वाले इस व्यक्ति के पास उस कंपनी के 23,450 शेयर हैं, जो लिनेन आर्ट को नियंत्रित करती है.

5.93% हिस्सेदारी रखने वाले गंगाधर कोटियन बॉम्बे रेयॉन के कर्मचारी हैं. उनका नाम 5 अगस्त 2026 के एसएफआईओ समन में भी है, जिसने इस जांच की शुरुआत की. बॉम्बे रेयॉन की दिवाला प्रक्रिया के दौरान उन्होंने खुद ₹28,64,199 का दावा दाखिल किया, जिसे पूरी तरह स्वीकार कर लिया गया. उन्होंने 33 कर्मचारियों के दावों के लिए अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में भी काम किया. इनमें कंपनी के चेयरमैन अमन जनार्दन अग्रवाल का ₹2,15,15,008 का दावा भी शामिल था. पूरी फाइल में यह एकमात्र कर्मचारी दावा था, जिस पर “संबंधित पक्ष: हां” का निशान लगा था. इसे भी पूरी तरह स्वीकार किया गया.

सुधीर गोयल और स्मिता गोयल के पास नवी मुंबई के ऐरोली स्थित एक ही फ्लैट के पते पर दर्ज हिस्सेदारी है. दोनों के पास मिलाकर 8.54% हिस्सेदारी है. सुधीर गोयल ने बॉम्बे रेयॉन के खिलाफ कर्मचारी के रूप में ₹22,81,041 का दावा किया था, जिसे पूरा स्वीकार कर लिया गया. वह प्राध्वी मल्टीट्रेड और ग्रीन शील्ड एंटरप्राइजेज के निदेशक भी हैं. ये उन चार कंपनियों में शामिल हैं, जिनके बॉम्बे रेयॉन के खिलाफ ₹162 करोड़ के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया था.

चंद्रेश देधिया और नाजिम खान, जो 2007 में मूल शेयरधारक थे और जिन्होंने बॉम्बे रेयॉन के ईमेल पते वाले दस्तावेज दाखिल किए थे, अब भी शेयरधारकों के रजिस्टर में मौजूद हैं.

बाकी शेयरधारकों के पते सामान्य आवासीय इलाकों के हैं. इनमें कांदिवली, बोरीवली, मलाड, मुलुंड, ठाणे, वसई और गोरेगांव के फ्लैट शामिल हैं. एक शेयरधारक, जिसके पास 5.20% हिस्सेदारी है, ने घाटकोपर पश्चिम में एक चॉल का पता दिया है.

21 में से 19 शेयरधारकों की हिस्सेदारी 3.6% से 7.0% के बीच है. किसी की भी हिस्सेदारी 7.04% से अधिक नहीं है. रजिस्टर में किसी भी कॉरपोरेट इकाई का नाम नहीं है. कागजों पर कोई भी कंपनी को नियंत्रित नहीं करता.

एशवेल टेक्सटाइल्स ने अपने 2019 के लेटरहेड पर पंजीकृत कार्यालय का पता 402, चौथी मंजिल, कमला हब, एन.एस. रोड नंबर 1, जुहू स्कीम, विले पार्ले (पश्चिम) दर्ज किया है. यही पता एपिक यार्न्स प्राइवेट लिमिटेड ने कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय को दिया है. एपिक यार्न्स का गठन अगस्त 2019 में प्रशांत अग्रवाल के बेटों आयुष और अक्षत अग्रवाल ने किया था.

दोनों रजिस्टरों पर हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति

31 मार्च 2019 की तारीख वाली एशवेल टेक्सटाइल्स के 21 शेयरधारकों की सूची के निचले हिस्से में निदेशक शितांशु बिपिन वोरा के हस्ताक्षर हैं.

लिनेन आर्ट के सदस्यों का रजिस्टर, जिसकी तारीख 9 अगस्त 2023 है और जिसमें एशवेल टेक्सटाइल्स की 41.13% हिस्सेदारी दर्ज है, उस पर भी उसी व्यक्ति ने उसी पदनाम से हस्ताक्षर किए हैं.

वह इस हिस्सेदारी के दोनों पक्षों में मौजूद हैं. वह प्रमाणित करते हैं कि लिनेन आर्ट की मालिक कंपनी का मालिक कौन है और यह भी प्रमाणित करते हैं कि उसी कंपनी के पास लिनेन आर्ट की हिस्सेदारी है.

शितांशु वोरा खुद भी लिनेन आर्ट के दूसरे सबसे बड़े शेयरधारक हैं. उनके नाम पर 19.52% हिस्सेदारी है. माटुंगा के उसी पते पर रहने वाली शीतल वोरा के पास अतिरिक्त 5,000 शेयर हैं. लिनेन आर्ट की 15.42% हिस्सेदारी रखने वाली मेयूबेन वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक भी वोरा दिसंबर 2012 से हैं.

उनकी व्यक्तिगत हिस्सेदारी और जिन दो कंपनियों के बोर्ड में वह हैं, उनकी हिस्सेदारी को जोड़ने पर लिनेन आर्ट की करीब 76% हिस्सेदारी शितांशु वोरा या उनके द्वारा निर्देशित कंपनियों के नियंत्रण में आती है.

डीआईएन 00054986 के तहत दाखिल उनके कॉरपोरेट रिकॉर्ड में 22 कंपनियों का उल्लेख है. इनमें से तीन संबंध महत्वपूर्ण हैं.

वह जनवरी 2006 से जनवरी 2017 तक क्लिनवेंट रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड के पूर्णकालिक निदेशक थे. नवंबर 2018 तक वह इसके बोर्ड में बने रहे. सार्वजनिक निदेशक रिकॉर्ड के अनुसार, यह कंपनी प्रशांत अग्रवाल से जुड़ी हुई है. यानी लिनेन आर्ट के अस्तित्व में आने से सात साल पहले से वह इस कंपनी में पूर्णकालिक कार्यकारी थे.

वह अगस्त 2019 में एपिक यार्न्स के गठन के दिन से अप्रैल 2021 तक इसके निदेशक रहे. एपिक यार्न्स ने कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के पास जो ईमेल पता दर्ज कराया था, वह [shitanshu.vora@linenart.in] है.

अक्टूबर 2019 में वह स्कॉट्स गारमेंट्स लिमिटेड के बोर्ड में शामिल हुए.** बेंगलुरु की इस कंपनी के पूर्व निदेशकों में प्रशांत और अमन अग्रवाल दोनों शामिल थे. लिनेन आर्ट में उनके सह-निदेशक विमल कुमार गोयनका भी इससे जुड़े थे. अग्रवाल आठ साल पहले इस कंपनी से जा चुके थे. लेकिन यहां एक समान क्रम दिखाई देता है: दो अलग-अलग कंपनियों में पहले अग्रवाल बोर्ड में आते हैं और बाद में वोरा तथा गोयनका.

दिसंबर 2018 से फरवरी 2020 के बीच, यानी बॉम्बे रेयॉन के तारापुर कारोबार को उससे अलग किए जाने से पहले के 18 महीनों में, वोरा ने कपड़ा और उससे जुड़े क्षेत्रों की आठ कंपनियों के बोर्ड में पद संभाले. इनमें एशवेल टेक्सटाइल्स भी शामिल थी.

एशवेल टेक्सटाइल्स की शेयरधारिता, बॉम्बे रेयॉन के ईमेल डोमेन से 2007 में दाखिल दस्तावेज और अग्रवाल परिवार की कंपनियों से उनके संबंधों पर शितांशु बिपिन वोरा और लिनेन आर्ट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक विमल कुमार गोयनका को ईमेल के जरिए विस्तृत सवाल भेजे गए. दोनों ने कोई जवाब नहीं दिया.

एशवेल नाम की दो कंपनियां

एशवेल नाम दो अलग-अलग कंपनियों में दिखाई देता है. इन दोनों के बीच का अंतर इस पूरी कहानी का अहम हिस्सा है.

एशवेल होल्डिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड बॉम्बे रेयॉन की घोषित प्रमोटर इकाई थी, जिसके पास सूचीबद्ध कंपनी की 7.92% हिस्सेदारी थी. 31 मार्च 2016 की स्थिति के अनुसार, इसके शेयरधारकों के रजिस्टर में नीदरलैंड के एम्स्टेलवीन स्थित क्रिज्समैन 15-8 के पते वाली एएए यूनाइटेड बी.वी. के पास इसके कुल 86.38 करोड़ शेयरों में से 85.84 करोड़ शेयर थे. यानी 99.38% हिस्सेदारी. शेष हिस्सेदारी रेनॉल्ड शर्टिंग लिमिटेड के पास थी. अमन अग्रवाल और प्रशांत अग्रवाल के नाम पर भी 25,000-25,000 शेयर थे.

नीदरलैंड की कंपनी एएए यूनाइटेड बी.वी. ने अप्रैल 2009 में ₹333 करोड़ में बॉम्बे रेयॉन की 20.67% हिस्सेदारी खरीदी थी. बाद में उसके पास परिवार की घोषित प्रमोटर इकाई एशवेल होल्डिंग की 99.38% हिस्सेदारी और सूचीबद्ध कंपनी की सीधे अपने नाम पर 13.83% हिस्सेदारी आ गई. इस डच कंपनी के पीछे कौन है और उसने प्रमोटर होल्डिंग कंपनी का नियंत्रण किस कीमत पर हासिल किया, इसका विवरण भारतीय रिकॉर्ड में नहीं है. एसएफआईओ, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय इसकी जांच कर सकते हैं.

दोनों कॉरपोरेट शेयरधारक खुद बॉम्बे रेयॉन के प्रमोटर समूह का हिस्सा थे. एएए यूनाइटेड बी.वी. के पास सूचीबद्ध कंपनी की सीधे 13.83% हिस्सेदारी थी, जबकि रेनॉल्ड शर्टिंग के पास 3.98% हिस्सेदारी थी.

इस तरह एक एशवेल कंपनी का स्वामित्व खुले तौर पर परिवार और एक डच इकाई के पास था. इसी कंपनी के पास उस कंपनी में परिवार की घोषित हिस्सेदारी थी, जो बाद में विफल हो गई.

दूसरी एशवेल कंपनी ने बॉम्बे रेयॉन के ईमेल पते का इस्तेमाल कर दस्तावेज दाखिल किए. इसमें कंपनी के वित्त प्रमुख और कर्मचारी हिस्सेदार हैं और यह उस कारोबार में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी रखती है, जो अब भी चल रहा है.

दोनों कंपनियों के दस्तावेजों पर, जहां जरूरी था, एक ही निदेशक के हस्ताक्षर हैं.

यह जानने के लिए गहन जांच जरूरी है कि क्या बॉम्बे रेयॉन से कोई पैसा दूसरी जगह भेजा गया था, क्या एशवेल टेक्सटाइल्स एक नाममात्र की स्वामित्व संरचना है या इन कंपनियों का संचालन एक इकाई के रूप में किया गया था.

एसएफआईओ बॉम्बे रेयॉन की जांच कर रहा है, लेकिन उसकी प्रक्रिया और कामकाज बेहद धीमा है. जांच को अधिकृत करने वाला एसएफआईओ का आदेश 30 अक्टूबर 2025 का है. रिकॉर्ड में पहला समन नौ महीने से अधिक समय बाद, 5 अगस्त 2026 को जारी किया गया.

रिकॉर्ड एक सवाल खड़ा करते हैं, जिसका जवाब दस्तावेजों में मौजूद है.

एशवेल टेक्सटाइल्स में 21 शेयरधारकों की हिस्सेदारी के लिए पैसा किसने दिया और इसका लाभ किसे मिल रहा है?

2007 में इस कंपनी के दो शेयरधारक और ₹1 लाख की पूंजी थी. 2019 तक इसके 21 शेयरधारक, 29.19 लाख शेयर और तारापुर की एक स्पिनिंग मिल में नियंत्रणकारी हिस्सेदारी थी.

इन दोनों स्थितियों के बीच की दूरी तय करने के लिए किसी ने पैसा लगाया था.

अगली कड़ी: एक ही साल में लिनेन आर्ट में आए ₹100 करोड़, वह कर्जदाता जिसने बॉम्बे रेयॉन का कर्ज ₹1,361 करोड़ के डिस्काउंट पर खरीदा और सप्लायर के ₹483 करोड़ के वे बिल, जिनका हिसाब बॉम्बे रेयॉन की अपनी बहीखातों में नहीं मिल सका.

यह रिपोर्ट कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय, भारतीय दिवाला एवं शोधन अक्षमता बोर्ड और स्टॉक एक्सचेंजों के पास दाखिल रिकॉर्ड तथा बॉम्बे रेयॉन फैशंस लिमिटेड की वार्षिक रिपोर्टों पर आधारित है. शितांशु बिपिन वोरा और विमल कुमार गोयनका को ईमेल के जरिए विस्तृत सवाल भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(BW रिपोर्टर्स पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free की लेखिका हैं. यह एक तीखा खुलासा है, जिसने भारत के वित्तीय बाजारों के छिपे हुए पक्ष को सामने लाया. मुंबई में करीब दो दशकों की जमीनी रिपोर्टिंग के साथ पलक ने पैसे, सत्ता और नियमन के बीच के गठजोड़ की गहराई से पड़ताल करने वाले पत्रकार के रूप में पहचान बनाई है. उनके लेख भारत के प्रतिष्ठित वित्तीय दैनिकों, जिनमें The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line शामिल हैं, में प्रकाशित हुए हैं.

19 वर्ष की उम्र में अपराध रिपोर्टिंग की ओर आकर्षित हुईं पलक ने जल्द ही महसूस किया कि 1980 के दशक के मुंबई के गैंग युद्धों की जगह अब कॉरपोरेट टावरों में चलने वाली सफेदपोश योजनाओं ने ले ली है. इस समझ ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने भारत की ‘व्हाइट मनी’ अर्थव्यवस्था की जटिल गतिविधियों को समझने में वर्षों बिताए हैं. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामकीय खामियों तक, उनका काम हाई फाइनेंस की चमकदार सतह के पीछे छिपे उन समूहों को सामने लाता है जो पर्दे के पीछे से फैसलों को प्रभावित करते हैं. सच्चाई सामने लाने का उनका जुनून और उन कड़ियों को जोड़ने की क्षमता, जिन्हें दूसरे नजरअंदाज कर देते हैं, उन्हें एक मजबूत पत्रकार बनाती है, जो यथास्थिति को चुनौती देने और उन खिलाड़ियों को बेनकाब करने से नहीं डरतीं जो खुद को कानून से ऊपर समझते हैं.)