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क्या होता है Pink Tax, जिसका जिक्र कर किरण मजूमदार-शॉ ने छेड़ दी बहस?

पिंक टैक्स का मुद्दा केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, इस तरह की स्थिति पूरी दुनिया में है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

दिग्गज फार्मास्युटिकल कंपनी बायोकॉन (Biocon) की फाउंडर किरण मजूमदार-शॉ (Kiran Mazumdar-Shaw) ने पिंक टैक्स (Pink Tax) को लेकर बहस छेड़ दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया है, जिसमें पिंक टैक्स का जिक्र करते हुए इस पर आपत्ति जताई है. मजूमदार-शॉ के पोस्ट पर काफी रिएक्शन आ चुके हैं. अब पिंक टैक्स को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है.  

कीमत में अंतर बताया
किरण मजूमदार-शॉ ने अपनी पोस्ट में लिखा है - पिंक टैक्स एक भेदभावपूर्ण प्रथा है, जहां महिला उत्‍पादों की कीमत अक्सर पुरुषों के समान उत्पादों की तुलना में काफी अधिक होती है. इस पोस्ट के साथ उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें महिलाओं और पुरुषों के उत्पादों की कीमतों में अंतर के बारे में बताया गया है. मजूमदार-शॉ का ये पोस्ट वायरल हो गया है. बड़ी संख्या में ट्विटर (अब X) यूजर इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. 

ज्यादा होती है कीमत
वीडियो में बताया गया है कि महिलाओं के लिए मिलने एक लिप बाम की कीमत पुरुषों के इसी प्रोडक्ट की तुलना में 35% अधिक होती है. इसी तरह एक प्‍लेन रेजर 10% और एक साधारण टी-शर्ट 50% तक अधिक महंगी होती है. वीडियो के अनुसार, महिलाओं के लिप बाम की कीमत जहां 250 रुपए है, वहीं पुरुषों के उसी ब्रैंड के बाम की कीमत 150 रुपए है. इस वीडियो के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया है कि महिलाएं, जो पहले से ही सैलरी गैप का सामना कर रही हैं, उन्हें बुनियादी आवश्यकताओं के लिए भी बढ़ी हुई कीमतों का भुगतान करना पड़ रहा है.

हर जगह एक जैसे हाल
पिंक टैक्स का मुद्दा केवल भारत तक ही सीमित नहीं है, इस तरह की स्थिति पूरी दुनिया में है. अमेरिका और ब्रिटेन में हुए अध्ययन से पता चलता है कि महिलाओं की व्यक्तिगत देखभाल की वस्तुएं पुरुषों की तुलना में नियमित रूप से ज्यादा महंगी होती हैं. इतना ही नहीं, ड्राई क्लीनिंग जैसी सेवाओं में भी महिलाओं के कपड़ों पर अधिक शुल्क लगता है. किरण मजूमदार-शॉ का कहना है कि पिंक टैक्स एक शर्मनाक लैंगिक पूर्वाग्रह है. महिलाओं को ऐसे उत्पादों से दूर रहना चाहिए और ऐसा करने वाली कंपनियों का बहिष्कार करना चाहिए.

इस तरह कटती है जेब
पिंक टैक्स किसी व्यवस्था का हिस्सा नहीं है, यह एक अदृश्य लागत है जो महिलाओं को चुकानी पड़ती है. ऐसे उत्पाद जो खासतौर पर महिलाओं के लिए तैयार किए जाते हैं. जैसे कि मेकअप का सामान, आर्टिफिशियल ज्वेलरी, सेनिटरी पैड आदि, इनकी कीमत काफी ज्यादा रखी जाती है. इसके अलावा, जो प्रोडक्‍ट्स पुरुष और महिलाएं दोनों इस्‍तेमाल करते हैं, उदाहरण के तौर पर परफ्यूम, बैग, हेयर ऑयल, रेजर और कपड़े आदि, इनकी कीमतों में भी अंतर होता है. एक ही कंपनी के होने के बावजूद महिलाओं के उत्पाद पुरुषों की तुलना में महंगे होते हैं. इतना ही नहीं सैलून में बाल कटवाने के लिए भी पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा कीमत देनी पड़ती है. पिंक टैक्स इसी तरीके से वसूला जाता है. 


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