पैसा रखें तैयार, इस हफ्ते लगेगा IPO का पंच, 8 की होगी लिस्टिंग, चेक करें डिटेल्स

अगले हफ्ते शेयर मार्केट में 5 नए आईपीओ खुलेंगे. नए आईपीओ आने के अलावा मार्केट में 8 आईपीओ की लिस्टिंग भी होगी। इसमें मेन बोर्ड से 3 आईपीओ शामिल हैं.

Last Modified:
Monday, 13 January, 2025
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भारतीय शेयर मार्केट में अगले हफ्ते भी हलचल जारी रहेगी. आईपीओ में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए यह सप्ताह एक्शन से भरपूर होने वाला है. 13 से 17 जनवरी के बीच प्राइमरी मार्केट में 5 आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुलने जा रहे हैं, इनमें से एक मैनबोर्ड और 4 SME IPO हैं. इसके अलावा, प्राइमरी मार्केट में 8 कंपनियां भी डेब्यू करेंगी. निवेशकों की नजर इन कंपनियों के शेयरों पर भी रहेंगी. आइए अगले सप्ताह IPO स्पेस में होने वाली सभी प्रमुख घटनाओं पर एक नजर डालते हैं…

खुलने वाला हैं एक मैनबोर्ड आईपीओ

Laxmi Dental IPO: 698 करोड़ रुपये का पब्लिक इश्यू 13 जनवरी को खुल रहा है. IPO में 407-428 रुपये प्रति शेयर के भाव पर पैसे लगा सकेंगे. लॉट साइज 33 शेयर है। इश्यू की क्लोजिंग 15 जनवरी को होगी. शेयरों की लिस्टिंग BSE, NSE पर 20 जनवरी को होगी.

खुलेंगे 4 SME IPO

Kabra Jewels IPO: 40 करोड़ रुपये का इश्यू 15 जनवरी को खुलेगा और 17 जनवरी को बंद होगा. शेयरों की लिस्टिंग NSE SME पर 22 जनवरी को होगी. IPO में बोली लगाने के लिए प्राइस बैंड 121-128 रुपये प्रति शेयर और लॉट साइज 1000 शेयर है.

Rikhav Securities IPO: कंपनी इससे 88.82 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है. यह इश्यू भी 15 जनवरी को खुलकर 17 जनवरी को बंद होगा. शेयर BSE SME पर 22 जनवरी को लिस्ट होंगे. IPO में बोली लगाने के लिए प्राइस बैंड 82-86 रुपये प्रति शेयर और लॉट साइज 1600 शेयर है.

Land Immigration IPO: 40.32 करोड़ रुपये साइज का इश्यू 16 जनवरी को ओपन होगा। इसमें 70-72 रुपये प्रति शेयर के भाव पर बोली लगेगी. लॉट साइज 1600 शेयर है. 20 जनवरी को IPO क्लोज होने के बाद शेयर BSE SME पर 23 जनवरी को लिस्ट होंगे.

EMA Partners IPO: यह 17 जनवरी को खुलेगा और 21 जनवरी को बंद होगा. कंपनी 76.01 करोड़ रुपये हासिल करना चाहती है. शेयरों की लिस्टिंग NSE SME पर 24 जनवरी को होगी. प्राइस बैंड 117-124 रुपये प्रति शेयर और लॉट साइज 1000 शेयर है.

इन कंपनियों की होगी लिस्टिंग 

नए सप्ताह में 13 जनवरी को NSE, BSE पर Standard Glass Lining के शेयर और BSE SME पर Indobell Insulation के शेयर लिस्ट होंगे. 14 जनवरी को BSE, NSE पर Quadrant Future Tek IPO और Capital Infra Trust Invit लिस्ट होगा. इसी दिन NSE SME पर Delta Autocorp IPO और BSE SME पर Avax Apparels And Ornaments IPO, B.R.Goyal IPO लिस्ट होगा. 17 जनवरी को NSE SME पर Sat Kartar Shopping के शेयरों की लिस्टिंग होगी.
 


जनवरी–मार्च तिमाही में शहरी बेरोजगारी में मामूली राहत, ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी चिंता

देश में कुल श्रम बल भागीदारी दर भी थोड़ी कमजोर हुई है और यह घटकर 55.5 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछली तिमाही में 55.8 प्रतिशत थी.

Last Modified:
Tuesday, 12 May, 2026
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार जनवरी–मार्च 2026 तिमाही में भारत के शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि ग्रामीण इलाकों में स्थिति थोड़ी बिगड़ी है. शहरों में रोजगार बाजार में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन ग्रामीण स्तर पर बेरोजगारी में बढ़ोतरी ने चिंता बढ़ा दी है. यह आंकड़े देश की लेबर मार्केट की मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं.

शहरों में बेरोजगारी घटी, ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ोतरी

15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लिए शहरी बेरोजगारी दर जनवरी–मार्च 2026 में घटकर 6.6 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले अक्टूबर–दिसंबर 2025 में 6.7 प्रतिशत थी. इसके विपरीत ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.3 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही में 4.0 प्रतिशत थी.

श्रम भागीदारी दर में भी हल्की गिरावट

देश में कुल श्रम बल भागीदारी दर भी थोड़ी कमजोर हुई है और यह घटकर 55.5 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछली तिमाही में 55.8 प्रतिशत थी. शहरी भागीदारी दर 50.2 प्रतिशत रही, जो पहले 50.4 प्रतिशत थी, जबकि ग्रामीण भागीदारी 58.2 प्रतिशत रही, जो पहले 58.4 प्रतिशत थी.

महिला श्रम भागीदारी लगभग स्थिर

महिलाओं की श्रम भागीदारी में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया. कुल महिला श्रम भागीदारी दर 34.7 प्रतिशत रही, जो पहले 34.9 प्रतिशत थी. ग्रामीण क्षेत्रों में यह 39.2 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह लगभग स्थिर रहकर 25.4 प्रतिशत पर पहुंची.

वर्कर पॉपुलेशन रेशियो में मामूली गिरावट

रोजगार की स्थिति को दर्शाने वाला वर्कर पॉपुलेशन रेशियो घटकर 52.8 प्रतिशत रह गया, जो पहले 53.1 प्रतिशत था. शहरी क्षेत्रों में यह लगभग स्थिर 46.9 प्रतिशत पर रहा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह घटकर 55.7 प्रतिशत पर आ गया, जो पहले 56.1 प्रतिशत था.

ग्रामीण रोजगार की गुणवत्ता में सुधार के संकेत

ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गुणवत्ता में सुधार देखा गया है. नियमित वेतन और मजदूरी वाले रोजगार की हिस्सेदारी बढ़कर 15.5 प्रतिशत हो गई, जो पहले 14.8 प्रतिशत थी. वहीं स्वरोजगार की हिस्सेदारी घटकर 62.5 प्रतिशत रह गई, जो पहले 63.2 प्रतिशत थी.

कृषि से अन्य क्षेत्रों की ओर बढ़ता रोजगार

ग्रामीण रोजगार में संरचनात्मक बदलाव भी देखने को मिला है. कृषि क्षेत्र में रोजगार की हिस्सेदारी घटकर 55.8 प्रतिशत रह गई, जो पहले 58.5 प्रतिशत थी. इसके विपरीत सेकेंडरी सेक्टर में यह बढ़कर 22.6 प्रतिशत हो गई, जबकि टर्शियरी सेक्टर की हिस्सेदारी भी बढ़कर 21.7 प्रतिशत पर पहुंच गई.

देश में 57 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार

सर्वे के अनुसार जनवरी–मार्च 2026 तिमाही में देशभर में औसतन 57.4 करोड़ लोग रोजगार में थे, जिनमें 40.2 करोड़ पुरुष और 17.2 करोड़ महिलाएं शामिल हैं. कुल मिलाकर आंकड़े बताते हैं कि शहरी रोजगार बाजार में हल्का सुधार हुआ है, लेकिन ग्रामीण बेरोजगारी में बढ़ोतरी और श्रम भागीदारी में गिरावट चिंता का संकेत है. रोजगार संरचना में बदलाव जरूर दिख रहा है, लेकिन संतुलित और स्थिर वृद्धि अभी भी एक चुनौती बनी हुई है.
 


ईरान युद्ध का बढ़ता असर, मूडीज ने घटाया भारत का ग्रोथ अनुमान, अगले 6 महीने रहेंगे चुनौतीपूर्ण

मूडीज के मुताबिक आने वाले छह महीनों में वैश्विक ऊर्जा संकट का असर अलग-अलग देशों पर उनकी आयात निर्भरता और आर्थिक क्षमता के आधार पर पड़ेगा.

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Tuesday, 12 May, 2026
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पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध अब केवल भू-राजनीतिक संकट नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर भी साफ दिखने लगा है. भारत में भी इसके संकेत मिलने शुरू हो गए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ईंधन बचाने और गैर-जरूरी खर्च कम करने की अपील के बीच अब ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटा दिया है. एजेंसी का कहना है कि महंगे कच्चे तेल, बढ़ती ऊर्जा लागत और कमजोर पड़ती औद्योगिक गतिविधियों का असर अगले छह महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था पर और ज्यादा दिखाई दे सकता है.

मूडीज ने घटाया भारत का ग्रोथ अनुमान

ग्लोबल क्रेडिट रेटिंग एजेंसी Moody's Ratings ने 2026 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 0.8 प्रतिशत अंक घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया है. एजेंसी ने अपनी ‘ग्लोबल मैक्रो आउटलुक’ रिपोर्ट में कहा कि बढ़ती ऊर्जा कीमतें, कमजोर निजी खपत और औद्योगिक सुस्ती भारत की आर्थिक रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं. इसके साथ ही मूडीज ने 2027 के लिए भी भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया है. पहले एजेंसी इससे अधिक ग्रोथ की उम्मीद जता रही थी.

छह महीने में दिख सकता है बड़ा असर

मूडीज के मुताबिक आने वाले छह महीनों में वैश्विक ऊर्जा संकट का असर अलग-अलग देशों पर उनकी आयात निर्भरता और आर्थिक क्षमता के आधार पर पड़ेगा. भारत जैसे देशों पर दबाव ज्यादा हो सकता है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है. एजेंसी ने कहा कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो ईंधन और उर्वरकों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर महंगाई और उत्पादन लागत पर पड़ेगा.

पीएम मोदी ने भी जताई चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ईरान युद्ध को कोरोना महामारी के बाद दुनिया का सबसे बड़ा संकट बताया था. उन्होंने लोगों से पेट्रोल-डीजल की बचत करने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने और गैर-जरूरी विदेशी यात्राओं से बचने की अपील की थी.

प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद देश में ऊर्जा संकट और महंगाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं. सरकार का मानना है कि वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और ऊर्जा संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है.

भारत पर ज्यादा क्यों है खतरा?

भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. विशेषज्ञों के अनुसार अगर ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो इससे भारत का आयात बिल बढ़ सकता है. साथ ही रुपये पर दबाव, महंगाई में तेजी और चालू खाते के घाटे में बढ़ोतरी जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं.

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी

ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल बना हुआ है. ब्रेंट क्रूड हाल ही में 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री मार्गों पर संकट और गहराता है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ सकता है. इसका असर केवल तेल बाजार ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा.

निवेश और उद्योग पर भी बढ़ सकता है दबाव

ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल आम लोगों तक सीमित नहीं रहेगा. इससे मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्ट, एविएशन और केमिकल सेक्टर की लागत भी बढ़ सकती है. निजी कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ने और निवेश गतिविधियों में सुस्ती आने की आशंका भी जताई जा रही है. हालांकि मूडीज का कहना है कि जैसे-जैसे ऊर्जा सप्लाई सामान्य होगी और शिपिंग नेटवर्क स्थिर होंगे, आर्थिक गतिविधियों में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है.
 


देश में पेट्रोल-डीजल और गैस की कोई कमी नहीं, LPG उत्पादन बढ़ाया गया: हरदीप सिंह पुरी

सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल देश में ईंधन सप्लाई सामान्य है और लोगों को पैनिक बाइंग या अफवाहों से बचना चाहिए. सरकार और तेल कंपनियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जा सकें.

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Tuesday, 12 May, 2026
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है. इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बड़ा बयान देकर राहत देने की कोशिश की है. उन्होंने साफ कहा कि देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है और लोगों को अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है. हालांकि मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि अगर वैश्विक हालात लंबे समय तक खराब रहे तो भविष्य में ईंधन कीमतों में बदलाव संभव है.

देश में ईंधन की कोई कमी नहीं

हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत के पास फिलहाल पर्याप्त मात्रा में कच्चा तेल, एलएनजी और एलपीजी का स्टॉक मौजूद है. उन्होंने बताया कि देश के पास करीब 60 दिनों का कच्चे तेल का भंडार है, जबकि एलएनजी और एलपीजी का भी पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है. मंत्री ने जोर देकर कहा कि किसी भी राज्य या शहर में ईंधन की कमी जैसी स्थिति नहीं बनने दी जाएगी.

LPG उत्पादन में बड़ा इजाफा

सरकार ने एलपीजी उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया है. मंत्री के मुताबिक देश में एलपीजी का उत्पादन पहले लगभग 35 हजार टन प्रतिदिन था, जिसे बढ़ाकर 55 से 56 हजार टन प्रतिदिन कर दिया गया है. सरकार का मानना है कि इससे घरेलू गैस सप्लाई को स्थिर रखने में मदद मिलेगी और बढ़ती मांग को आसानी से पूरा किया जा सकेगा.

क्या बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

हरदीप सिंह पुरी ने यह भी कहा कि सरकार ने पिछले चार वर्षों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भविष्य में कीमतें कभी नहीं बढ़ेंगी. उन्होंने साफ किया कि ईंधन की कीमतों का चुनावों से कोई संबंध नहीं है. मंत्री के बयान से संकेत मिला है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहीं तो आने वाले समय में ईंधन दरों में संशोधन किया जा सकता है.

रोजाना 1000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रहीं कंपनियां

तेल मंत्री ने बताया कि सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव बना हुआ है. उनके अनुसार कंपनियां हर दिन करीब 1000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं. उन्होंने कहा कि अंडर-रिकवरी का आंकड़ा लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और मौजूदा तिमाही में कुल नुकसान 1 लाख करोड़ रुपये तक जा सकता है. मंत्री ने कहा कि कंपनियां उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए यह बोझ उठा रही हैं.

पीएम मोदी की अपील के बाद बढ़ी थी चिंता

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, कार पूलिंग अपनाने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इस्तेमाल की अपील की थी. इसके बाद आम लोगों के बीच यह चिंता बढ़ गई थी कि कहीं देश में ईंधन संकट तो नहीं आने वाला. हालांकि अब पेट्रोलियम मंत्री के बयान के बाद स्थिति को लेकर कुछ राहत जरूर महसूस की जा रही है.

वैश्विक तनाव का असर भारत पर भी

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव का असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर साफ दिखाई दे रहा है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है. ऐसे में अगर वैश्विक संकट लंबा खिंचता है तो महंगाई, परिवहन लागत और आम लोगों के खर्च पर असर पड़ सकता है.

सरकार ने लोगों से घबराने से किया मना

सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल देश में ईंधन सप्लाई सामान्य है और लोगों को पैनिक बाइंग या अफवाहों से बचना चाहिए. सरकार और तेल कंपनियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जा सकें.
 


ईरान युद्ध से दुनिया पर ऊर्जा संकट का खतरा, ओपेक उत्पादन 26 साल के निचले स्तर पर

दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होती है, लेकिन ईरान युद्ध के बाद इस समुद्री मार्ग पर संकट गहराने लगा है.

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Tuesday, 12 May, 2026
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पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है. ईरान युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची हुई है. दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको ने चेतावनी दी है कि कच्चे तेल का वैश्विक स्टॉक तेजी से खतरनाक स्तर की ओर बढ़ रहा है. वहीं, ओपेक देशों का तेल उत्पादन 26 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है, जिससे आने वाले दिनों में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है.

पीएम मोदी ने बताया कोरोना के बाद सबसे बड़ा संकट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति को कोरोना महामारी के बाद दुनिया का सबसे बड़ा संकट बताया है. उन्होंने लोगों से तेल की बचत करने की अपील करते हुए कहा कि वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और ऊर्जा संसाधनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है. भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं, इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं.

26 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा ओपेक उत्पादन

रॉयटर्स के सर्वे के अनुसार अप्रैल 2026 में तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक का औसत दैनिक उत्पादन घटकर 20.04 मिलियन बैरल रह गया. यह साल 2000 के बाद का सबसे कम स्तर माना जा रहा है. अप्रैल में उत्पादन में करीब 8.3 लाख बैरल प्रतिदिन की गिरावट दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध और सप्लाई रूट पर बढ़ते खतरे के कारण कई देशों का उत्पादन और निर्यात गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है.

होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ी चिंता

दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट के जरिए होती है, लेकिन ईरान युद्ध के बाद इस समुद्री मार्ग पर संकट गहराने लगा है. कुवैत का तेल निर्यात अप्रैल में लगभग शून्य हो गया क्योंकि उसका पूरा निर्यात इसी रास्ते पर निर्भर है. रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद से एक अरब बैरल से अधिक कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है. इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों पर दिखाई दे रहा है.

सऊदी अरब और इराक के उत्पादन में भारी गिरावट

सऊदी अरब के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों के कारण उसका उत्पादन घटकर करीब 7 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया. हालांकि सऊदी अरब लाल सागर के जरिए ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से तेल निर्यात जारी रखने की कोशिश कर रहा है. इराक में भी हालात सामान्य नहीं हैं और उत्पादन प्रभावित हुआ है. इससे ओपेक देशों की कुल क्षमता पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है.

यूएई ने संकट में दिखाई मजबूती

जहां अधिकांश देश उत्पादन घटने से जूझ रहे हैं, वहीं संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई ने अपनी सप्लाई को स्थिर बनाए रखा है. यूएई होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करते हुए फुजैरा पोर्ट से तेल निर्यात कर रहा है.

फिलहाल यूएई प्रतिदिन 3.2 से 3.6 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन कर रहा है. बताया जा रहा है कि देश अगले साल तक इसे बढ़ाकर 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक ले जाने की तैयारी में है.

वेनेजुएला और लीबिया ने बढ़ाया उत्पादन

वेनेजुएला और लीबिया ने अप्रैल में उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन इससे वैश्विक सप्लाई संकट की भरपाई नहीं हो सकी. वेनेजुएला का निर्यात 2018 के बाद सबसे ऊंचे स्तर 1.23 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया, जबकि लीबिया का उत्पादन 10 साल के उच्चतम स्तर 1.43 मिलियन बैरल प्रतिदिन पर पहुंचा. इसके बावजूद वैश्विक बाजार में सप्लाई की कमी बनी हुई है.

कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल

पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद फिलहाल बेहद कमजोर दिखाई दे रही है. इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. ताजा कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 105 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. हाल ही में इसकी कीमत 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है.

भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. ऐसे में वैश्विक कीमतों में तेजी का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है. हालांकि फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अगर संकट लंबा खिंचता है तो आने वाले समय में महंगाई और परिवहन लागत बढ़ सकती है.

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बढ़ा खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में जल्द शांति बहाल नहीं हुई तो दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है. तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से महंगाई, सप्लाई चेन और आर्थिक विकास पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है.


कमजोर नतीजों से JSW Energy का शेयर टूटा, डिविडेंड के बावजूद 7% तक फिसला स्टॉक

कमजोर नतीजों के बावजूद कंपनी ने निवेशकों को राहत देते हुए प्रति शेयर ₹2 का डिविडेंड घोषित किया है. यह प्रस्ताव कंपनी की आगामी 32वीं AGM में मंजूरी के लिए रखा जाएगा.

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Tuesday, 12 May, 2026
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मार्च तिमाही के कमजोर नतीजों का असर जेएसडब्ल्यू (JSW Energy) के शेयर पर साफ देखने को मिला है. कंपनी का शेयर सोमवार, 12 मई को शुरुआती कारोबार में 7 फीसदी से ज्यादा टूट गया, हालांकि बाद में गिरावट कुछ कम हुई. खबर लिखे जाने के दौरान शेयर 6.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 522 रुपये पर कारोबार करता दिखा. कमजोर मुनाफे और बढ़ती लागत ने निवेशकों की धारणा पर दबाव डाला.

मुनाफे में गिरावट, लेकिन रेवेन्यू में मजबूती

कंपनी ने 11 मई को अपने Q4 नतीजे जारी किए थे. इस दौरान JSW Energy का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट साल-दर-साल आधार पर 9 फीसदी घटकर ₹371 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹408 करोड़ था. हालांकि, ऑपरेशनल रेवेन्यू में मजबूत बढ़त देखने को मिली. कोर ऑपरेशंस से रेवेन्यू 41 फीसदी बढ़कर ₹4,498 करोड़ पहुंच गया, जो एक साल पहले ₹3,189 करोड़ था.

EPS पर भी पड़ा असर

मुनाफे में गिरावट का असर कंपनी की अर्निंग्स पर भी दिखा. EPS (Earnings Per Share) घटकर ₹2.12 रह गया, जबकि पिछले साल समान अवधि में यह ₹2.34 था. यह संकेत देता है कि लागत दबाव और फाइनेंशियल खर्च बढ़ने से कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी पर असर पड़ा है.

फाइनेंस और फ्यूल कॉस्ट ने बढ़ाया दबाव

कंपनी के खर्चों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली. फाइनेंस कॉस्ट 138 फीसदी बढ़कर ₹1,608 करोड़ पहुंच गया, जबकि फ्यूल कॉस्ट 15 फीसदी बढ़कर ₹1,340 करोड़ रहा. यही बढ़ती लागत मुनाफे में गिरावट की बड़ी वजह बनी.

डिविडेंड का ऐलान, शेयरधारकों को राहत

कमजोर नतीजों के बावजूद कंपनी ने निवेशकों को राहत देते हुए प्रति शेयर ₹2 का डिविडेंड घोषित किया है. यह प्रस्ताव कंपनी की आगामी 32वीं AGM में मंजूरी के लिए रखा जाएगा. कंपनी ने 5 जून 2026 को रिकॉर्ड डेट तय की है. यानी इस तारीख तक जिन निवेशकों के पास शेयर होंगे, वे डिविडेंड के हकदार होंगे.

लंबी अवधि में अब भी पॉजिटिव रिटर्न

हालांकि हालिया गिरावट के बावजूद, पिछले एक साल में JSW Energy का शेयर करीब 8.23 फीसदी का रिटर्न दे चुका है. विशेषज्ञों का मानना है कि रेवेन्यू ग्रोथ मजबूत है, लेकिन बढ़ती लागत फिलहाल मार्जिन पर दबाव बनाए रख सकती है.

बाजार में ओवरऑल कमजोरी का असर

इस दौरान व्यापक शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली. निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में गिरावट रही, जिसका असर पावर और एनर्जी सेक्टर के शेयरों पर भी पड़ा. क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितता ने बाजार सेंटीमेंट को और कमजोर किया, जिससे निवेशकों ने जोखिम कम किया.
 


मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत का बड़ा कदम, तेल-गैस सेक्टर में नई रॉयल्टी व्यवस्था लागू

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा हुआ है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशवासियों से ईंधन की बचत करने की अपील की है.

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Tuesday, 12 May, 2026
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के बीच केंद्र सरकार ने कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस सेक्टर से जुड़ा बड़ा नीतिगत फैसला लिया है. सरकार ने कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और केसिंग हेड कंडेनसेट पर लागू रॉयल्टी दरों और उनकी गणना प्रणाली में बदलाव किया है. इस कदम का मकसद नियमों को सरल बनाना, निवेश को आकर्षित करना और घरेलू उत्पादन को मजबूत करना है.

क्या है सरकार का नया फैसला?

केंद्र सरकार ने तेल और गैस क्षेत्र में रॉयल्टी ढांचे को तर्कसंगत और पारदर्शी बनाने का निर्णय लिया है. अब कच्चे तेल और गैस उत्पादन पर लगने वाली रॉयल्टी की गणना पहले की तुलना में ज्यादा स्पष्ट और एकरूप होगी. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि यह कदम देश के अपस्ट्रीम तेल-गैस सेक्टर के लिए एक नए दौर की शुरुआत करेगा.

निवेश और उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का फोकस

सरकार का मानना है कि नई रॉयल्टी व्यवस्था से लंबे समय से चली आ रही नीतिगत जटिलताएं खत्म होंगी. अलग-अलग अनुबंधों और नियमों में मौजूद अंतर अब कम होंगे, जिससे कंपनियों को काम करने में आसानी होगी. इस बदलाव से घरेलू और विदेशी निवेशकों को अधिक स्थिर और अनुमानित नीति वातावरण मिलेगा, जिससे भारत में तेल और गैस की खोज और उत्पादन गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है.

ऊर्जा क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि रॉयल्टी प्रणाली को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है. इसके तहत जटिल नियमों की जगह एक समान और प्रतिस्पर्धी ढांचा लागू किया जाएगा. इससे भारत के ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा.

वैश्विक तनाव के बीच अहम फैसला

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा हुआ है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन की बचत और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने की अपील की है.

उन्होंने सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग, स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्था पर जोर दिया है, ताकि ईंधन खपत को नियंत्रित किया जा सके.

क्या होंगे इसके मायने?

सरकार के इस कदम का सबसे बड़ा असर तेल और गैस उत्पादन कंपनियों पर देखने को मिलेगा. नई व्यवस्था से रॉयल्टी भुगतान की प्रक्रिया सरल होगी और नीति संबंधी अनिश्चितता कम होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और घरेलू उत्पादन को नई गति मिल सकती है, जिससे आयात पर निर्भरता भी धीरे-धीरे कम हो सकती है.
 


बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद म्युचुअल फंड्स पर भरोसा कायम, अप्रैल में ₹38,440 करोड़ का निवेश फ्लो

अप्रैल में निवेशकों का सबसे ज्यादा रुझान फ्लेक्सीकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स की ओर देखने को मिला. इन तीनों कैटेगरी का कुल एक्टिव इक्विटी निवेश में करीब 61 फीसदी हिस्सा रहा.

Last Modified:
Tuesday, 12 May, 2026
BWHindia

वैश्विक अनिश्चितताओं, बाजार में उतार-चढ़ाव और निवेशकों की सतर्कता के बावजूद म्युचुअल फंड्स (MF) में निवेश का सिलसिला मजबूत बना हुआ है. अप्रैल 2026 में इक्विटी म्युचुअल फंड्स में ₹38,440 करोड़ का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया. हालांकि यह मार्च के रिकॉर्ड स्तर से थोड़ा कम रहा, लेकिन लगातार ऊंचा निवेश यह दिखाता है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अब भी बाजार पर कायम है. खास बात यह रही कि स्मॉलकैप, मिडकैप और फ्लेक्सीकैप फंड्स निवेशकों की पहली पसंद बने रहे.

मार्च के रिकॉर्ड के करीब रहा निवेश

एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में इक्विटी म्युचुअल फंड्स में ₹38,440 करोड़ का शुद्ध निवेश आया. मार्च में यह आंकड़ा ₹40,450 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था. हालांकि अप्रैल में कुल निवेश में करीब 16 फीसदी की गिरावट आई और यह घटकर ₹70,302 करोड़ रह गया, लेकिन रिडेम्प्शन यानी निकासी में 26 फीसदी की बड़ी कमी देखने को मिली. निकासी घटकर ₹31,862 करोड़ पर आ गई, जो पिछले आठ महीनों का सबसे निचला स्तर है.

बाजार की रिकवरी ने बढ़ाया भरोसा

अप्रैल के दौरान भारतीय शेयर बाजार में मजबूत रिकवरी देखने को मिली. अमेरिका-ईरान तनाव को लेकर चिंताएं कुछ कम होने के बाद बाजार ने मार्च में हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई कर ली. महीने के दौरान निफ्टी 50 इंडेक्स में करीब 7 फीसदी की तेजी दर्ज की गई, जबकि व्यापक बाजार ने इससे भी बेहतर प्रदर्शन किया. निफ्टी स्मॉलकैप 250 इंडेक्स करीब 17 फीसदी तक उछल गया. विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया.

स्मॉलकैप और फ्लेक्सीकैप फंड्स बने पसंदीदा विकल्प

अप्रैल में निवेशकों का सबसे ज्यादा रुझान फ्लेक्सीकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स की ओर देखने को मिला. इन तीनों कैटेगरी का कुल एक्टिव इक्विटी निवेश में करीब 61 फीसदी हिस्सा रहा. फ्लेक्सीकैप फंड्स में लगातार दूसरे महीने ₹10,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश आया. वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप फंड्स में संयुक्त निवेश 9 फीसदी बढ़कर ₹13,437 करोड़ तक पहुंच गया. विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशक अब लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी को ध्यान में रखकर छोटे और मिड साइज कंपनियों में निवेश बढ़ा रहे हैं.

SIP निवेश में आई हल्की नरमी

जहां इक्विटी फंड्स में निवेश मजबूत बना रहा, वहीं सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के मोर्चे पर हल्की कमजोरी देखने को मिली. अप्रैल में SIP निवेश 3 फीसदी घटकर ₹31,115 करोड़ रह गया. हालांकि AMFI का कहना है कि SIP खातों की कुल संख्या स्थिर बनी हुई है और यह गिरावट अस्थायी हो सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार मार्च में कुछ ट्रांजैक्शन छुट्टियों की वजह से शिफ्ट हो गए थे, जिसका असर अप्रैल के आंकड़ों पर पड़ा.

डेट और हाइब्रिड फंड्स में भी मजबूत निवेश

केवल इक्विटी ही नहीं, बल्कि अन्य श्रेणियों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही. अप्रैल में डेट फंड्स में सबसे ज्यादा ₹2.5 लाख करोड़ का निवेश आया. वहीं हाइब्रिड और पैसिव फंड्स में भी करीब ₹20,000 करोड़ का निवेश दर्ज किया गया. इसके चलते म्युचुअल फंड इंडस्ट्री की कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में मासिक आधार पर करीब 11 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली.

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का भरोसा कायम रहना भारतीय निवेशकों की परिपक्वता को दर्शाता है. स्मॉलकैप फंड्स में लगातार निवेश यह संकेत देता है कि निवेशकों को भारत की लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा है.

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार में अस्थिरता बनी भी रहती है, तब भी लंबी अवधि के निवेशकों के लिए SIP और म्युचुअल फंड निवेश बेहतर विकल्प बने रह सकते हैं. लगातार मजबूत निवेश यह संकेत दे रहा है कि भारतीय निवेशक अब बाजार की छोटी अवधि की गिरावट से ज्यादा प्रभावित नहीं हो रहे हैं और लंबी अवधि की रणनीति पर भरोसा जता रहे हैं.

(डिस्क्लेमर: म्युचुअल फंड्स शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


कल निवेशकों के डूबे ₹6 लाख करोड़, क्या आज संभलेगा बाजार? इन शेयरों पर रहेगी नजर

सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 1300 अंक से ज्यादा टूट गया, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 24,000 अंक टूटकर बंद हुआ.

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Tuesday, 12 May, 2026
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वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार को हिला कर रख दिया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 1300 अंक से ज्यादा टूट गया, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 24,000 के नीचे फिसल गया और निवेशकों के करीब ₹6 लाख करोड़ स्वाहा हो गए. रुपये ने भी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया. अब सवाल यह है कि आज बाजार की चाल कैसी रह सकती है. पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक संकेतों के बीच आज निवेशकों की नजर कई बड़े शेयरों और कॉरपोरेट अपडेट्स पर रहने वाली है. वहीं, कई दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजे आज बाजार में हलचल बढ़ा सकते हैं.

सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स 1,312.91 अंक यानी 1.70 फीसदी गिरकर 76,015.28 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स 360.30 अंक यानी 1.49 फीसदी टूटकर 23,815.85 पर आ गया. बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल देखने को मिला. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 25 लाल निशान में बंद हुए, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा.

रुपये में ऐतिहासिक गिरावट

शेयर बाजार की कमजोरी के बीच भारतीय मुद्रा पर भी भारी दबाव देखने को मिला. रुपया डॉलर के मुकाबले 0.88 फीसदी टूटकर 95.31 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनाया है.

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में

केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी गिरावट का माहौल रहा. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.05 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.13 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई. सेक्टर आधारित इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में रही, जो करीब 4 फीसदी टूट गया. इसके अलावा रियल्टी, पीएसयू बैंक और मीडिया सेक्टर के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली. दूसरी ओर एफएमसीजी, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर ने कुछ राहत दी.

क्यों आई गिरावट
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से युद्ध खत्म करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिससे पिछले कई हफ्तों से जारी संघर्ष के जल्द समाप्त होने की उम्मीद कमजोर पड़ गई. इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से उछल गईं. ब्रेंट क्रूड करीब 4 फीसदी बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. तेल की कीमतों में यह तेजी भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है.

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी. यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है. फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और जल्दबाजी में बड़े निवेश फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है.

आज इन शेयरों पर रखें नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कई बड़ी कंपनियों से जुड़ी खबरें निवेशकों का ध्यान खींच सकती हैं. कहीं बड़े ऑर्डर मिले हैं तो कहीं मैनेजमेंट में बदलाव हुआ है, जबकि कई कंपनियां विस्तार और नई ग्रोथ रणनीतियों पर काम कर रही हैं. घरेलू एडटेक कंपनी Adda247 ने IPO की तैयारी के बीच 200 से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी की है, जो उसकी कुल वर्कफोर्स का करीब 20 फीसदी बताया जा रहा है. वहीं Bajaj Group अपने 100 साल पूरे कर रहा है और 14 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप के साथ देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल हो चुका है. Afcons Infrastructure को यूरोप में 7,544 करोड़ रुपये का बड़ा रेलवे प्रोजेक्ट मिला है, जबकि HFCL को करीब 184 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट ऑर्डर हासिल हुआ है. Munjal Auto Industries को Honda Motorcycle & Scooter India से नया सप्लाई ऑर्डर मिला है. दूसरी ओर Bharat Forge ने ब्राजील की एयरोस्पेस कंपनी Embraer के साथ लंबी अवधि की डील की है और अब वह महत्वपूर्ण लैंडिंग गियर फोर्जिंग कंपोनेंट्स की सप्लाई करेगी. Adani Ports में भी बड़ा नेतृत्व बदलाव हुआ है, जहां CEO Ports प्रनव चौधरी ने इस्तीफा दे दिया है और उनकी जगह नीरज बंसल जिम्मेदारी संभालेंगे. इसके अलावा आज बाजार बंद होने के बाद Dr Reddy’s Laboratories, Tata Power, Berger Paints, Dixon Technologies, Max Financial Services, Nazara Technologies, Pfizer, Torrent Power और V-Guard Industries समेत कई दिग्गज कंपनियां अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी, जिससे इन शेयरों में कारोबार के दौरान तेज हलचल देखने को मिल सकती है.

 

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


रोजमर्रा की वस्तुओं को लेकर घबराने की जरूरत नहीं, देश में जरूरी सामान की कमी नहीं होगी: राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री ने मंत्रियों के सशक्त समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्थिति स्पष्ट की. इस बैठक में वैश्विक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता पर संभावित असर की समीक्षा की गई.

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Monday, 11 May, 2026
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पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक सप्लाई चेन और कच्चे तेल की कीमतों पर असर की आशंका के बीच देशवासियों के लिए राहत भरी खबर आई है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कहा है कि भारत में किसी भी आवश्यक वस्तु की कमी नहीं होगी और लोगों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार स्थिति पर पूरी तरह नजर बनाए हुए है और आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.

IGoM बैठक के बाद सरकार का आश्वासन

रक्षा मंत्री ने मंत्रियों के सशक्त समूह (IGoM) की पांचवीं बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्थिति स्पष्ट की. इस बैठक में वैश्विक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता पर संभावित असर की समीक्षा की गई. राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार पूरी सतर्कता और मजबूती के साथ काम कर रही है, ताकि देश में सप्लाई चेन पर कोई असर न पड़े.

सप्लाई चेन और जरूरी वस्तुओं पर फोकस

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि किसी भी परिस्थिति में देश में जरूरी सामानों की उपलब्धता बनी रहे. उन्होंने कहा कि रोजमर्रा की वस्तुओं को लेकर जनता को किसी भी तरह की चिंता या घबराहट नहीं करनी चाहिए और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी.

पीएम मोदी की अपील: सोना और ईंधन पर संयम जरूरी

इस पूरे घटनाक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया आर्थिक अपील से भी जोड़ा जा रहा है. पीएम मोदी ने देशवासियों से आग्रह किया है कि वे कम से कम एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचें और पेट्रोल-डीजल के इस्तेमाल में संयम रखें. उन्होंने कहा कि इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी.

विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने पर जोर

सरकार का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की आर्थिक सुरक्षा का आधार होता है. सोने के आयात और ईंधन खपत को नियंत्रित कर देश की आर्थिक स्थिति को और स्थिर किया जा सकता है.

पेट्रोलियम मंत्रालय का स्पष्ट बयान

पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी जनता को आश्वस्त किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी सुजाता शर्मा ने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में सप्लाई बाधित होने या ‘ड्राई आउट’ जैसी कोई स्थिति नहीं है. उन्होंने भी नागरिकों से ईंधन की खपत में संयम बरतने की अपील की है.

सरकार ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए केवल नीतिगत कदम ही नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है. ऊर्जा की बचत और अनावश्यक खर्चों में कटौती से देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी और संकट के समय स्थिरता बनी रहेगी.
 


Q4 में केनरा बैंक को झटका, ₹4,505 करोड़ पर आया मुनाफा, शेयर फिसला

नतीजों के बाद बैंक के शेयरों में दबाव देखने को मिला और स्टॉक दिन के उच्च स्तर से फिसल गया. बढ़ते स्लिपेज और दूसरी आय में गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है.

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Monday, 11 May, 2026
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सरकारी क्षेत्र के केनरा बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 की मार्च तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं. बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर करीब 9.9 प्रतिशत घटकर ₹4,505 करोड़ रह गया है. पिछले साल की समान तिमाही में बैंक ने ₹5,002 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था. नतीजों के बाद बैंक के शेयरों में दबाव देखने को मिला और स्टॉक दिन के उच्च स्तर से फिसल गया. बढ़ते स्लिपेज और दूसरी आय में गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. 

तिमाही नतीजों के बाद केनरा बैंक के शेयरों में दबाव देखने को मिला. खबर लिखे जाने के दौरान शेयर 3.62 प्रतिशत टूटकर ₹129.48 पर ट्रेड करता दिखाई दिया. इस साल अब तक बैंक का शेयर लगभग 15 प्रतिशत कमजोर हो चुका है.

प्रॉफिट में गिरावट की बड़ी वजह क्या रही?

केनरा बैंक का मुनाफा घटने की सबसे बड़ी वजह दूसरी आय (Other Income) में आई तेज गिरावट रही. मार्च तिमाही में बैंक की दूसरी आय घटकर ₹4,824 करोड़ रह गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹6,350 करोड़ थी. हालांकि टैक्स खर्च और प्रावधानों (Provision) में कमी आई, लेकिन इससे मुनाफे में गिरावट को पूरी तरह संतुलित नहीं किया जा सका.

प्रावधानों में आई बड़ी कमी

बैंक के प्रावधान दिसंबर तिमाही के ₹2,414 करोड़ से घटकर मार्च तिमाही में ₹992 करोड़ रह गए. इसके बावजूद नेट प्रॉफिट में गिरावट दर्ज की गई, जिससे संकेत मिलता है कि आय के दूसरे स्रोतों पर दबाव बना हुआ है.

नेट इंटरेस्ट इनकम में हल्की बढ़ोतरी

केनरा बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) यानी मुख्य आय में सालाना आधार पर 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. मार्च तिमाही में बैंक की NII बढ़कर ₹9,809 करोड़ रही, जो पिछले साल इसी अवधि में ₹9,442 करोड़ थी. इससे बैंक की कोर बैंकिंग गतिविधियों में स्थिरता का संकेत मिलता है.

एसेट क्वालिटी में सुधार जारी

बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार देखने को मिला है. मार्च 2026 के अंत तक बैंक का ग्रॉस NPA घटकर 1.84 प्रतिशत रह गया, जो दिसंबर तिमाही में 2.08 प्रतिशत था. वहीं नेट NPA भी 0.45 प्रतिशत से घटकर 0.43 प्रतिशत पर आ गया.

ग्रॉस NPA में ₹2,000 करोड़ से ज्यादा की कमी

एब्सोल्यूट आधार पर देखें तो बैंक का ग्रॉस NPA दिसंबर तिमाही के ₹24,832 करोड़ से घटकर ₹22,740 करोड़ रह गया. वहीं, नेट NPA में मामूली कमी आई और यह ₹5,322 करोड़ से घटकर ₹5,209 करोड़ पर पहुंच गया.

स्लिपेज बढ़ने से बढ़ी चिंता

हालांकि एसेट क्वालिटी में सुधार के बावजूद बैंक के स्लिपेज बढ़े हैं. मार्च तिमाही में स्लिपेज ₹2,000 करोड़ के पार पहुंच गए, जबकि दिसंबर तिमाही में यह करीब ₹1,900 करोड़ थे. बढ़ते स्लिपेज को लेकर बाजार में सतर्कता देखने को मिली.

आगे कैसी रहेगी नजर?

विशेषज्ञों का मानना है कि बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार सकारात्मक संकेत है, लेकिन बढ़ते स्लिपेज और दूसरी आय में कमजोरी निकट अवधि में दबाव बनाए रख सकती है. अब निवेशकों की नजर बैंक की क्रेडिट ग्रोथ, रिकवरी और आने वाली तिमाहियों में मुनाफे की स्थिरता पर रहेगी.