जियो ब्लैकरॉक इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड का गठन 6 सितंबर को किया गया था, जिसका मुख्य व्यवसाय निवेश परामर्श सेवाएं प्रदान करना होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
देश की सबसे बड़ी टेलकॉम ऑपरेटर जियो अब ब्रोकरेज बिजनेस में कदम रखने जा रही है. जियो फाइनेंशियल सर्विसेज (Jio Financial Services) ने बताया कि जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और ब्लैकरॉक एक ज्वाइंट वेंचर के तहत, जियो ब्लैकरॉक इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स नाम से ब्रोकिंग बिजनेस में एंट्री करने को तैयार है. जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड और उसके संयुक्त उद्यम साझेदार अमेरिका स्थित ब्लैकरॉक ने म्यूचुअल फंड कंपनी में 117 करोड़ रुपये का निवेश किया है.
एक्सचेंज फाइलिंग में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज ने कहा, “जियो ब्लैकरॉक इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड, जो कंपनी का ज्वाइंट वेंचर है, ने 20 जनवरी 2025 को ‘जियो ब्लैकरॉक ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से एक नई सहायक कंपनी बनाई है. यह कंपनी ब्रोकिंग समेत अन्य व्यवसायों को शुरू करेगी. हालांकि कंपनी को अभी मार्केट रेगुलेटर सेबी से मंजूरी नहीं मिली है.”
कंपनी 3 करोड़ रुपये का निवेश करेगी
रिपोर्ट्स के अनुसार, जियो ब्लैकरॉक इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड का गठन 6 सितंबर को किया गया था, जिसका मुख्य व्यवसाय निवेश परामर्श सेवाएं प्रदान करना होगा. कंपनी 30,00,000 इक्विटी शेयरों (प्रति शेयर 10 रुपये के फेस वैल्यू) की प्रारंभिक सब्सक्रिप्शन (initial subscription) के लिए 3 करोड़ रुपये का निवेश करेगी.
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज ने 2024 में ब्लैकरॉक इंक और ब्लैकरॉक एडवाइजर्स सिंगापुर प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया था. इसके तहत ब्लैकरॉक के साथ 50:50 का ज्वाइंट वेंचर स्थापित किया गया. इस कदम के जरिए, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा समर्थित इस कंपनी का उद्देश्य वेल्थ मैनेजमेंट और ब्रोकिंग बिजनेस शुरू करना है.
Jio ने हाल ही में म्युचुअल फंड बिजनेस में रखा है कदम
जियो फाइनेंशियल ने म्युचुअल फंड कारोबार में कदम रखने के बाद अब स्टॉक ब्रोकिंग बिजनेस में भी एंट्री को तैयार है. पिछले महीने, जियो ब्लैकरॉक एसेट मैनेजमेंट कंपनी ने जॉर्ज हेबर जोसेफ को नए ज्वाइंट वेंचर कंपनी का पहला चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) नियुक्त किया था. गौरतलब है कि यह 50:50 का ज्वाइंट वेंचर अक्टूबर 2024 में म्युचुअल फंड कारोबार शुरू करने के लिए बाजार नियामक सेबी से सैद्धांतिक मंजूरी प्राप्त कर चुका है.
Jio Financial Services का Q3 रिजल्ट
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) के नेतृत्व वाले NBFC जियो फाइनेंशियल सर्विसेज ने शुक्रवार, 17 जनवरी को चालू वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही के नतीजों का ऐलान किया. Q3FY25 में कंपनी का नेट प्रॉफिट 295 करोड़ पर स्थिर रहा. पिछले वित्तीय वर्ष की समान तिमाही में, कंपनी ने 294 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था. जियो फाइनेंशियल सर्विसेज का रेवेन्यू 438 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्तीय वर्ष की इसी तिमाही में 413 करोड़ रुपये से 6.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है.
ऑर्गनन के अधिग्रहण के बाद सन फार्मा दुनिया की शीर्ष 25 फार्मास्युटिकल कंपनियों में शामिल हो गई है. इसके साथ ही कंपनी बायोसिमिलर दवाओं के क्षेत्र में दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी कंपनी बन गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की सबसे बड़ी दवा कंपनी सन फार्मास्युटिकल्स ने अमेरिकी दवा कंपनी ऑर्गनन एंड कंपनी के 11.75 अरब डॉलर के अधिग्रहण के लिए वित्तीय व्यवस्था पूरी कर ली है. इस ऐतिहासिक सौदे के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) समेत 11 वैश्विक बैंकों ने 10 अरब डॉलर से अधिक का सिंडिकेटेड लोन उपलब्ध कराया है. यह हाल के वर्षों में किसी भारतीय कंपनी द्वारा किए गए सबसे बड़े विदेशी अधिग्रहणों में शामिल है और इससे वैश्विक फार्मा बाजार में सन फार्मा की स्थिति और मजबूत होगी.
11 बैंकों ने मिलकर उपलब्ध कराया फंड
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस अधिग्रहण के लिए भारतीय स्टेट बैंक, एचएसबीसी, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक, आईएनजी बैंक, डीबीएस बैंक, क्रेडिट एग्रीकोल कॉरपोरेट एंड इन्वेस्टमेंट बैंक, सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉरपोरेशन (SMBC) समेत 11 बैंकों ने मिलकर 10 अरब डॉलर से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया है. इस सिंडिकेटेड लोन में सिटी, जेपी मॉर्गन और एमयूएफजी बैंक ने भी अहम भूमिका निभाई. प्रत्येक बैंक ने करीब 1 अरब डॉलर तक की वित्तीय प्रतिबद्धता दी.
अप्रैल में हुआ था सौदा, 30 जून को पूरी हुई फंडिंग
सन फार्मा ने अप्रैल 2026 में अमेरिकी कंपनी ऑर्गनन एंड कंपनी का 11.75 अरब डॉलर में पूरी तरह नकद अधिग्रहण करने का समझौता किया था. इस सौदे की फंडिंग प्रक्रिया 30 जून को पूरी हुई. अधिग्रहण के लिए आवश्यक शेष राशि कंपनी ने अपने आंतरिक संसाधनों से जुटाई. एक सूत्र के अनुसार, शुरुआत में जेपी मॉर्गन, सिटी और एमयूएफजी ने फाइनेंसिंग की जिम्मेदारी ली थी. बाद में निर्धारित योजना के तहत आठ अन्य बैंकों को शामिल कर सिंडिकेट पूरा किया गया.
SBI इकलौता भारतीय बैंक
इस पूरे ऋण सिंडिकेट में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) एकमात्र भारतीय बैंक है. सिंडिकेटेड लोन व्यवस्था में कई बैंक मिलकर किसी बड़े सौदे के लिए ऋण उपलब्ध कराते हैं, जिससे जोखिम एक ही बैंक पर केंद्रित नहीं रहता.
वैश्विक फार्मा बाजार में और मजबूत होगी सन फार्मा
ऑर्गनन के अधिग्रहण के बाद सन फार्मा दुनिया की शीर्ष 25 फार्मास्युटिकल कंपनियों में शामिल हो गई है. इसके साथ ही कंपनी बायोसिमिलर दवाओं के क्षेत्र में दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी कंपनी बन गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा सन फार्मा की वैश्विक मौजूदगी को मजबूत करेगा और चीन समेत कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार की रणनीति को गति देगा.
रैनबैक्सी के बाद सबसे बड़ा रणनीतिक कदम
सन फार्मा इससे पहले 2014 में करीब 4 अरब डॉलर में रैनबैक्सी लैबोरेटरीज का अधिग्रहण कर चुकी है, जिसे कंपनी के इतिहास का सबसे बड़ा परिवर्तनकारी सौदा माना जाता है. अब ऑर्गनन का अधिग्रहण उससे भी बड़ा कदम साबित हो सकता है.
विदेशी अधिग्रहणों में लौट रही तेजी
हाल के महीनों में भारतीय कंपनियां एक बार फिर बड़े विदेशी अधिग्रहणों की ओर बढ़ रही हैं. विश्लेषकों के अनुसार, सन फार्मा का यह सौदा न केवल भारतीय फार्मा उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर भारतीय कंपनियों की बढ़ती वित्तीय क्षमता और विस्तार रणनीति का भी संकेत देता है.
UNCTAD की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत में एफडीआई प्रवाह बढ़कर 38.89 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो 2024 में 27.09 अरब डॉलर था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (UNCTAD) की वर्ल्ड इन्वेस्टमेंट रिपोर्ट 2026 में भारत के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है. वर्ष 2025 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में 44% की मजबूत बढ़ोतरी के साथ भारत दुनिया का 11वां सबसे बड़ा एफडीआई गंतव्य बन गया है. सप्लाई चेन विविधीकरण, मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल इकोनॉमी और नीतिगत सुधारों का फायदा भारत को मिला है, जबकि चीन और अमेरिका जैसे बड़े बाजारों में विदेशी निवेश घटा है.
दो पायदान की छलांग, 11वें स्थान पर पहुंचा भारत
UNCTAD की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत में एफडीआई प्रवाह बढ़कर 38.89 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो 2024 में 27.09 अरब डॉलर था. इसके साथ ही भारत वैश्विक एफडीआई रैंकिंग में 13वें से 11वें स्थान पर पहुंच गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने सक्रिय नीतियों, सेवाओं से आगे बढ़कर एडवांस मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस और सप्लाई चेन को मजबूत करने के प्रयासों के दम पर खुद को वैश्विक निवेशकों के लिए प्रमुख निवेश केंद्र के रूप में स्थापित किया है.
चीन और अमेरिका में विदेशी निवेश घटा
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में चीन में एफडीआई घटकर 104.66 अरब डॉलर रह गया, जबकि एक साल पहले यह 116.24 अरब डॉलर था. हालांकि, चीन अभी भी एफडीआई प्राप्त करने वाले देशों में चौथे स्थान पर बना हुआ है. दुनिया के सबसे बड़े एफडीआई गंतव्य अमेरिका में भी विदेशी निवेश 2% घटकर 277 अरब डॉलर रह गया. इसके उलट भारत ने मजबूत वृद्धि दर्ज कर वैश्विक निवेशकों का भरोसा और मजबूत किया.
दक्षिण एशिया में भी भारत की अहम भूमिका
भारत में बढ़ते निवेश का असर पूरे दक्षिण एशिया पर भी दिखाई दिया. 2025 में दक्षिण एशिया में कुल एफडीआई बढ़कर 46 अरब डॉलर पहुंच गया, जबकि 2024 में यह 34 अरब डॉलर था. रिपोर्ट के मुताबिक, जहां विकासशील देशों में एफडीआई केवल 2% और एशिया के विकासशील देशों में 3% बढ़ा, वहीं भारत ने इससे कहीं बेहतर प्रदर्शन किया.
निवेश के बावजूद नई परियोजनाओं में आई सुस्ती
हालांकि कुल एफडीआई प्रवाह बढ़ा है, लेकिन रिपोर्ट नई परियोजनाओं को लेकर कुछ सतर्क संकेत भी देती है. 2025 में भारत में घोषित ग्रीनफील्ड परियोजनाओं का मूल्य घटकर 74.12 अरब डॉलर रह गया, जो 2024 में 111.14 अरब डॉलर था.
UNCTAD का कहना है कि वैश्विक व्यापार में शुल्क संबंधी अनिश्चितता, सप्लाई चेन में बदलाव और कमजोर वैश्विक निवेश माहौल के कारण नई मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की गति प्रभावित हुई है.
गूगल के डेटा सेंटर समेत कई बड़े निवेश
रिपोर्ट के अनुसार, भारत को 2025 में सबसे अधिक नई एफडीआई परियोजनाएं भी प्राप्त हुईं. इनमें सबसे प्रमुख निवेश अमेरिकी कंपनी Alphabet Inc. की ओर से भारत में 14.5 अरब डॉलर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट की घोषणा रही, जो वर्ष की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में शामिल है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का विशाल बाजार, तेजी से बढ़ती डिजिटल मांग, तकनीकी प्रतिभा और क्लाउड सेवाओं का विस्तार उसे वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बना रहा है.
भारत से विदेशों में निवेश भी बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत केवल विदेशी निवेश आकर्षित ही नहीं कर रहा, बल्कि विदेशों में निवेश भी तेजी से बढ़ा रहा है. 2025 में भारत का आउटवर्ड एफडीआई 47% बढ़कर 35.66 अरब डॉलर पहुंच गया, जिससे भारत शीर्ष निवेश स्रोत देशों की सूची में दो पायदान चढ़कर 18वें स्थान पर पहुंच गया.
भारतीय कंपनियों द्वारा घोषित विदेशी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं का मूल्य भी 41% बढ़कर 25.29 अरब डॉलर हो गया. इनमें राणा ग्रुप की संयुक्त अरब अमीरात में ऑटोमोटिव कंपोनेंट निर्माण के लिए 10 अरब डॉलर की निवेश योजना वर्ष की पांच सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड परियोजनाओं में शामिल रही.
आगे भी मजबूत रह सकता है भारत का प्रदर्शन
UNCTAD का मानना है कि वैश्विक कंपनियां अब पूंजी निवेश के मामले में अधिक चयनात्मक हो गई हैं और वे उन देशों को प्राथमिकता दे रही हैं, जहां नीतिगत स्थिरता, मजबूत सप्लाई चेन और भरोसेमंद कारोबारी माहौल उपलब्ध है.
रिपोर्ट के अनुसार, चीन+1 रणनीति और सप्लाई चेन विविधीकरण का लाभ भारत को लगातार मिल रहा है. हालांकि, आने वाले वर्षों में इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए वैश्विक निवेश माहौल और भू-राजनीतिक परिस्थितियां अहम भूमिका निभाएंगी.
मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स 104.35 अंक यानी 0.13% गिरकर 78,180.72 अंक पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 31.65 अंक यानी 0.13% की गिरावट के साथ 24,398.70 अंक पर आ गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
लगातार चार कारोबारी सत्रों की तेजी के बाद मंगलवार को शेयर बाजार में मुनाफावसूली हावी रही और सेंसेक्स-निफ्टी गिरावट के साथ बंद हुए. ट्रेंट के शेयरों में बड़ी गिरावट देखने को मिली, जबकि आईटी शेयरों ने बाजार को सहारा दिया. अब बुधवार के कारोबार में निवेशकों की नजर कई प्रमुख शेयरों पर रहेगी. एचसीएल टेक, अडानी एंटरप्राइजेज, एक्सिस बैंक, सन फार्मा, रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया और आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी समेत कई कंपनियों से जुड़े अहम घटनाक्रम आज इन शेयरों में उतार-चढ़ाव की वजह बन सकते हैं.
चार दिन की तेजी के बाद फिसला बाजार
मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत मजबूती के साथ हुई, लेकिन कारोबार के अंतिम घंटे में मुनाफावसूली और रियल्टी व मेटल शेयरों में बिकवाली बढ़ने से बाजार लाल निशान में बंद हुआ. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 104.35 अंक यानी 0.13% गिरकर 78,180.72 अंक पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 भी 31.65 अंक यानी 0.13% की गिरावट के साथ 24,398.70 अंक पर आ गया.
ट्रेंट में सबसे बड़ी गिरावट, आईटी शेयर बने सहारा
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 19 गिरावट के साथ बंद हुए. टाटा समूह की रिटेल कंपनी ट्रेंट के शेयरों में सबसे बड़ी 12.42% की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (बीईएल), अडानी पोर्ट्स, लार्सन एंड टुब्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक और एनटीपीसी के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली. वहीं, आईटी सेक्टर में खरीदारी बनी रही. एचसीएल टेक 3.08% की बढ़त के साथ सेंसेक्स का शीर्ष गेनर रहा. इसके अलावा टेक महिंद्रा, इंफोसिस, टीसीएस, टाइटन, इटरनल, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयर भी बढ़त के साथ बंद हुए.
ब्रॉडर मार्केट में बनी रही मजबूती
मुख्य सूचकांकों में गिरावट के बावजूद ब्रॉडर मार्केट का प्रदर्शन बेहतर रहा. निफ्टी मिडकैप सूचकांक 0.30% और निफ्टी स्मॉलकैप 0.55% की बढ़त के साथ बंद हुए. सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी आईटी सबसे मजबूत रहा. इसके अलावा कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और एफएमसीजी शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली, जबकि मेटल और रियल्टी सेक्टर दबाव में रहे.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज के कारोबार में कई शेयर निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं. एचसीएल टेक्नोलॉजीज की सॉफ्टवेयर इकाई एचसीएलसॉफ्टवेयर ने जैस्परसॉफ्ट के अधिग्रहण के बाद अपने डेटा एवं एआई पोर्टफोलियो को मजबूत किया है. एक्सिस बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से एन. एस. विश्वनाथन की गैर-कार्यकारी (पार्ट-टाइम) चेयरमैन के रूप में दोबारा नियुक्ति की मंजूरी मिल गई है.
अडानी एंटरप्राइजेज ने अपने क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) के जरिए 15,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं. वहीं, गणेश इन्फ्रावर्ल्ड की सहायक कंपनी टाइकून माइंस जीके को करीब 100 करोड़ रुपये का सब-कॉन्ट्रैक्ट ऑर्डर मिला है.
सन फार्मा के 11.75 अरब डॉलर के ऑर्गेनॉन एंड कंपनी अधिग्रहण को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) समेत 11 वैश्विक बैंकों का वित्तीय समर्थन मिला है. दूसरी ओर, इंस्पिरा ग्लोबल की इकाई लेनेक्सिस फूडवर्क्स ने करीब 2,235 करोड़ रुपये के सौदे के बाद रेस्टोरेंट ब्रांड्स एशिया का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है.
इसके अलावा, पोलुनिन इमर्जिंग मार्केट्स स्मॉल कैप फंड ने आईओएल केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स में 1.5% हिस्सेदारी खरीदी है, जबकि लिप्टस पंच-कार्ड फंड ने कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक में 1.83% हिस्सेदारी का अधिग्रहण किया है. वहीं, आइडियाफोर्ज टेक्नोलॉजी ने अपना क्यूआईपी लॉन्च करते हुए 835.86 रुपये प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है. इन सभी घटनाक्रमों के चलते आज इन शेयरों में अच्छी-खासी हलचल देखने को मिल सकती है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
कंपनी 950 करोड़ रुपये के फ्रेश इश्यू के जरिए पूंजी जुटाएगी, जबकि मौजूदा निवेशक भी ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की प्रमुख फिटनेस और वेलनेस कंपनी Cult.fit ने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है. कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है. कंपनी 950 करोड़ रुपये के फ्रेश इश्यू के जरिए पूंजी जुटाएगी, जबकि मौजूदा निवेशक भी ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे. जुटाई गई राशि का इस्तेमाल नए फिटनेस सेंटर खोलने, ब्रांड विस्तार और कारोबार के विस्तार में किया जाएगा.
950 करोड़ रुपये का होगा फ्रेश इश्यू
ड्राफ्ट दस्तावेज के अनुसार, Cult.fit 950 करोड़ रुपये के नए इक्विटी शेयर जारी करेगी. इसके अलावा, टेमासेक, श्रोडर्स कैपिटल और जर्मनी की फिटनेस कंपनी लाइफफिट ग्रुप समेत मौजूदा निवेशक 17.86 करोड़ इक्विटी शेयरों तक की बिक्री ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए करेंगे. हालांकि कंपनी ने अभी आईपीओ के कुल आकार का खुलासा नहीं किया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इसका कुल आकार 3,500 करोड़ से 4,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकता है.
देशभर में 708 फिटनेस सेंटर, करीब 10 लाख पेड सदस्य
31 मार्च 2026 तक Cult.fit के देशभर में 708 फिटनेस सेंटर संचालित हो रहे थे. कंपनी के करीब 9.87 लाख पेड सदस्य हैं. सदस्यता की बिक्री कंपनी अपनी वेबसाइट, मोबाइल ऐप, कॉर्पोरेट साझेदारियों और फिटनेस सेंटरों के माध्यम से करती है.
विस्तार और ब्रांडिंग पर खर्च होगी जुटाई गई पूंजी
कंपनी ने बताया कि आईपीओ से जुटाई गई राशि का उपयोग नए फिटनेस सेंटर खोलने, ब्रांडिंग और मार्केटिंग गतिविधियों को मजबूत करने तथा कारोबार के विस्तार में किया जाएगा. कंपनी ऐसे समय में बाजार में उतर रही है, जब देश में फिटनेस और प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को लेकर लोगों की जागरूकता तेजी से बढ़ रही है. बढ़ती आय और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की प्रवृत्ति से इस क्षेत्र में विकास की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं.
IPO बाजार में बनी हुई है रौनक
भारतीय आईपीओ बाजार में इस समय काफी हलचल है. आने वाले महीनों में जियो प्लेटफॉर्म्स, एनएसई समेत कई बड़ी कंपनियां भी शेयर बाजार में उतरने की तैयारी कर रही हैं. ऐसे में Cult.fit का आईपीओ भी निवेशकों के लिए प्रमुख आकर्षण बन सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
ASSOCHAM की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के नीतिगत सुधारों, बुनियादी ढांचे में निवेश, पीएलआई योजना और 'चीन+1' रणनीति के चलते भारत दुनिया के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में तेजी से उभर रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक कंपनियों के चीन पर निर्भरता कम करने और सप्लाई चेन में विविधता लाने की रणनीति का भारत को बड़ा फायदा मिल रहा है. उद्योग मंडल एसोचैम (ASSOCHAM) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड-19 महामारी के बाद भारत की विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) वृद्धि वैश्विक औसत से बेहतर रही है. सरकार के नीतिगत सुधारों, बुनियादी ढांचे में निवेश, पीएलआई योजना और 'चीन+1' रणनीति के चलते भारत दुनिया के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में तेजी से उभर रहा है.
महामारी के बाद तेज हुई भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ
एसोचैम की रिपोर्ट 'ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग अंडरगोइंग स्ट्रैटेजिक रिअलाइनमेंट: इंडिया इमर्जेज ऐज अ की बेनिफिशियरी ऑफ सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन' के अनुसार, वर्ष 2022-25 के दौरान भारत की औसत मैन्युफैक्चरिंग वृद्धि दर बढ़कर 4.15% हो गई, जबकि 2016-19 के दौरान यह 3.44% थी. इसके विपरीत, महामारी के बाद वैश्विक औसत मैन्युफैक्चरिंग वृद्धि दर घटकर 2.19% रह गई, जो महामारी से पहले 4.39% थी.
दुनिया के शीर्ष विनिर्माण देशों में मजबूत हुई भारत की स्थिति
रिपोर्ट में दुनिया की 10 सबसे बड़ी विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं का विश्लेषण किया गया है, जिनका वैश्विक विनिर्माण उत्पादन में लगभग 65% योगदान है. अध्ययन के अनुसार, भारत अब 'उभरते हुए विनिर्माण नेताओं' (Emerging Manufacturing Leaders) में शामिल हो गया है और वैश्विक औसत की तुलना में उसका प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है.
वैश्विक औसत से ऊपर पहुंचा भारत
रिपोर्ट के मुताबिक, 2016-19 के दौरान भारत की मैन्युफैक्चरिंग वृद्धि वैश्विक औसत से 0.95 प्रतिशत अंक कम थी. हालांकि, 2022-25 में भारत वैश्विक औसत से 1.96 प्रतिशत अंक ऊपर पहुंच गया. वहीं, दुनिया की सबसे बड़ी विनिर्माण अर्थव्यवस्था चीन का प्रदर्शन इस दौरान कमजोर हुआ है. महामारी से पहले चीन की वृद्धि वैश्विक औसत से 2.40 प्रतिशत अंक अधिक थी, लेकिन अब यह वैश्विक औसत से 2.26 प्रतिशत अंक नीचे आ गई है.
चीन+1 रणनीति से मिला भारत को फायदा
रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के बाद कंपनियां अपनी उत्पादन इकाइयों को केवल चीन तक सीमित रखने के बजाय 'चीन+1', 'नियरशोरिंग' और 'फ्रेंडशोरिंग' जैसी रणनीतियां अपना रही हैं. इसका उद्देश्य सप्लाई चेन को अधिक मजबूत और विविध बनाना है. इस बदलाव से भारत निवेशकों के लिए एक आकर्षक विनिर्माण केंद्र बनकर उभरा है.
नीतिगत सुधारों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि वैश्विक विनिर्माण परिदृश्य में धीरे-धीरे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव हो रहा है. कंपनियां अब केवल लागत और दक्षता पर नहीं, बल्कि सप्लाई चेन की मजबूती और विविधता पर भी ध्यान दे रही हैं. उन्होंने कहा कि भारत के बेहतर प्रदर्शन के पीछे लगातार किए गए आर्थिक सुधार और निवेशकों का बढ़ता विश्वास प्रमुख कारण हैं.
इन सरकारी पहलों का मिला फायदा
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की विनिर्माण क्षमता मजबूत होने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं. इनमें घरेलू मांग में वृद्धि, बुनियादी ढांचे का विकास, लॉजिस्टिक्स में सुधार, 'चीन+1' रणनीति के तहत बढ़ा विदेशी निवेश, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना, पीएम गति शक्ति कार्यक्रम और औद्योगिक गलियारों का विकास शामिल हैं.
आगे किन क्षेत्रों पर देना होगा जोर?
एसोचैम का मानना है कि भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत करने के लिए लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक बुनियादी ढांचे में तेजी से निवेश करना होगा. इसके साथ ही घरेलू सप्लायर नेटवर्क को मजबूत करने, कारोबार सुगमता (Ease of Doing Business) में सुधार, इंडस्ट्री 4.0 तकनीकों को बढ़ावा देने और मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का बेहतर उपयोग करने की जरूरत होगी.
निर्मल के. मिंडा ने कहा कि अब अगले चरण में सरकार और उद्योग को मिलकर ऐसे वैश्विक स्तर के विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार करने पर ध्यान देना चाहिए, जो भारत को वैश्विक वैल्यू चेन में और अधिक मजबूत स्थिति दिला सकें.
अडानी ग्रुप और अबू धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) ने 50:50 के संयुक्त उद्यम के तहत ओडिशा में एक एकीकृत एल्युमिनियम परियोजना विकसित करने का फैसला किया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सीमेंट और तांबा कारोबार में विस्तार के बाद अब अडानी ग्रुप ने एल्युमिनियम उद्योग में भी बड़ी एंट्री की तैयारी कर ली है. समूह अबू धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) के साथ संयुक्त उद्यम के जरिए ओडिशा में करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये का एकीकृत एल्युमिनियम परियोजना स्थापित करेगा. यह निवेश भारत के धातु क्षेत्र की सबसे बड़ी परियोजनाओं में शामिल होगा और देश के एल्युमिनियम बाजार में लंबे समय से मजबूत पकड़ रखने वाली हिंडाल्को और वेदांता के लिए नई प्रतिस्पर्धा खड़ी कर सकता है.
IHC के साथ संयुक्त उद्यम में बनेगा मेगा प्रोजेक्ट
अडानी ग्रुप और अबू धाबी की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) ने 50:50 के संयुक्त उद्यम के तहत ओडिशा में एक एकीकृत एल्युमिनियम परियोजना विकसित करने का फैसला किया है. करीब 11.5 अरब डॉलर (लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपये) की इस परियोजना में एल्युमिना रिफाइनरी, एल्युमिनियम स्मेल्टर, कैप्टिव पावर प्लांट और डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग पार्क स्थापित किए जाएंगे.
हिंडाल्को और वेदांता के दबदबे वाले बाजार में नई चुनौती
भारत के एल्युमिनियम उत्पादन का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा फिलहाल हिंडाल्को और वेदांता के पास है. ऐसे बाजार में नए खिलाड़ी के लिए प्रवेश आसान नहीं माना जाता, क्योंकि इसके लिए खनन, रिफाइनिंग, बिजली और लॉजिस्टिक्स का मजबूत नेटवर्क जरूरी होता है. अडानी ग्रुप की प्रस्तावित परियोजना पूरी तरह एकीकृत होगी, जिससे उत्पादन लागत और आपूर्ति श्रृंखला दोनों पर बेहतर नियंत्रण रहेगा.
20 लाख टन एल्युमिनियम उत्पादन क्षमता होगी
परियोजना के तहत सालाना 40 लाख टन क्षमता की एल्युमिना रिफाइनरी, 20 लाख टन क्षमता का एल्युमिनियम स्मेल्टर, 4,000 मेगावाट का कैप्टिव पावर प्लांट और 10 लाख टन क्षमता का डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग पार्क बनाया जाएगा. वित्त वर्ष 2025 में भारत का कुल एल्युमिनियम उत्पादन करीब 42 लाख टन रहा था. ऐसे में अकेले इस परियोजना से देश की उत्पादन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा.
बढ़ती मांग को देखते हुए लगाया जा रहा दांव
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एल्युमिनियम उत्पादक होने के बावजूद अपनी जरूरतों का एक हिस्सा आयात से पूरा करता है. सरकारी अनुमानों के अनुसार वित्त वर्ष 2025 में देश में एल्युमिनियम की मांग करीब 55 लाख टन रही, जो 2030 तक 85 लाख टन और 2047 तक 2.8 करोड़ टन तक पहुंच सकती है. वहीं प्रति व्यक्ति एल्युमिनियम खपत अभी वैश्विक औसत से काफी कम है, जिससे भविष्य में इस धातु की मांग तेज़ी से बढ़ने की संभावना है.
सस्ती बिजली बनेगी सबसे बड़ी ताकत
एल्युमिनियम उत्पादन में ऊर्जा लागत सबसे महत्वपूर्ण होती है. अडानी ग्रुप के पास पहले से बड़ा बिजली उत्पादन पोर्टफोलियो है, जिसका लाभ इस परियोजना को मिलेगा. प्रस्तावित 4,000 मेगावाट के कैप्टिव पावर प्लांट के साथ 400 मेगावाट हरित ऊर्जा क्षमता भी जोड़ी जाएगी. इससे उत्पादन लागत कम रखने और प्रतिस्पर्धी बढ़त हासिल करने में मदद मिलेगी.
ओडिशा क्यों चुना गया?
इस परियोजना के लिए ओडिशा का चयन रणनीतिक रूप से किया गया है. भारत के आधे से अधिक बॉक्साइट भंडार इसी राज्य में हैं, जो एल्युमिनियम उत्पादन का प्रमुख कच्चा माल है. एल्युमिना रिफाइनरी रायगड़ा जिले में खदानों के निकट स्थापित की जाएगी, जबकि एल्युमिनियम स्मेल्टर सुंदरगढ़ में बनाया जाएगा. परियोजना के लिए कच्चा माल बल्लाडा, कुत्रुमाली समेत अन्य खदानों से आएगा. वहीं तैयार उत्पाद और कच्चे माल के परिवहन के लिए अडानी समूह के धामरा बंदरगाह और विशेष रेल एवं कन्वेयर नेटवर्क का उपयोग किया जाएगा.
मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी और ऑटोमोबाइल, बिजली, निर्माण, रक्षा तथा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों को घरेलू स्तर पर एल्युमिनियम की बेहतर उपलब्धता मिलेगी. साथ ही, अडानी समूह अपने बंदरगाह, डेटा सेंटर और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में भी इस धातु का उपयोग कर आपूर्ति श्रृंखला को और मजबूत कर सकेगा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, शिक्षा, स्वास्थ्य, महत्वपूर्ण खनिजों और बंदरगाह विकास समेत कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, शिक्षा, स्वास्थ्य, महत्वपूर्ण खनिजों और बंदरगाह विकास समेत कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए. इस दौरान इंडोनेशिया ने भारत की स्वदेशी ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलें खरीदने का फैसला किया, वहीं दोनों देशों ने यूपीआई को इंडोनेशिया के भुगतान तंत्र से जोड़ने, सबांग बंदरगाह के संयुक्त विकास और इंडोनेशिया में आईआईएम बेंगलुरु का कैंपस खोलने पर भी सहमति जताई. यात्रा के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बिंतांग आदिपूर्णा' से भी सम्मानित किया.
ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों की खरीद पर बनी सहमति
भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा सहयोग को नई मजबूती देते हुए ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली की खरीद पर सहमति बनाई है. इस समझौते के तहत भारत डायनेमिक्स लिमिटेड इंडोनेशियाई सेना को इन मिसाइल प्रणालियों की आपूर्ति करेगी. दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा आदान-प्रदान, आपदा प्रबंधन और रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई.
सबांग पोर्ट का होगा संयुक्त विकास
दोनों देशों ने इंडोनेशिया के रणनीतिक महत्व वाले सबांग बंदरगाह को संयुक्त रूप से विकसित करने का फैसला किया है. मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित यह बंदरगाह भारत की ग्रेट निकोबार पोर्ट परियोजना के काफी करीब है. माना जा रहा है कि इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री कनेक्टिविटी मजबूत होगी और प्रस्तावित ट्रांसशिपमेंट हब को भी गति मिलेगी.
इंडोनेशिया में भी चलेगा भारत का UPI
दोनों देशों ने भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली से जोड़ने का निर्णय लिया है. इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और सीमा-पार भुगतान पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज हो सकेंगे. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह पहल कारोबार करने में सुगमता बढ़ाने के साथ डिजिटल आर्थिक सहयोग को भी नई दिशा देगी.
इंडोनेशिया में खुलेगा IIM बेंगलुरु का कैंपस
प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की है कि भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) बेंगलुरु इंडोनेशिया में अपना कैंपस स्थापित करेगा. इसका उद्देश्य शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को मजबूत करना है. इसके अलावा दोनों देशों ने विशेष इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के विकास और चुनावी सहयोग पर भी सहमति जताई.
क्रिटिकल मिनरल्स और उद्योगों में बढ़ेगा सहयोग
भारत और इंडोनेशिया ने महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने पर भी सहमति बनाई है. भारत इंडोनेशिया में स्टील, निकल और रेयर-अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण संयंत्रों में निवेश की योजना बना रहा है. इसका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाना और महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है.
स्वास्थ्य, कृषि और सामाजिक योजनाओं में भी साझेदारी
दोनों देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है, जिससे भारतीय दवाओं और चिकित्सा उत्पादों की पहुंच इंडोनेशिया तक आसान होगी. भारत इंडोनेशिया के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण में भी सहयोग करेगा. इसके अलावा कृषि, दूरसंचार, आपदा प्रबंधन और दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच भी कई समझौते हुए. भारत अपनी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और मिड-डे मील जैसी सफल सामाजिक योजनाओं का अनुभव भी इंडोनेशिया के साथ साझा करेगा.
प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण में करेगा सहयोग
सांस्कृतिक सहयोग के तहत भारत और इंडोनेशिया ने इंडोनेशिया के ऐतिहासिक प्रम्बानन हिंदू मंदिर परिसर के संरक्षण और जीर्णोद्धार में सहयोग करने पर भी सहमति जताई. इससे दोनों देशों के सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
प्रधानमंत्री मोदी बोले- भारत-इंडोनेशिया संबंधों का शुरू हुआ 'स्वर्णिम अध्याय'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है. उन्होंने कहा कि दोनों देश रक्षा, सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, समुद्री व्यापार, तकनीक, शिक्षा और संस्कृति सहित हर क्षेत्र में नए अवसरों पर साथ काम कर रहे हैं. प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों के 'स्वर्णिम अध्याय' की शुरुआत साबित होगी, जिसका सकारात्मक प्रभाव पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक व्यवस्था पर पड़ेगा.
एक्ट ईस्ट नीति को मिलेगी नई मजबूती
प्रधानमंत्री मोदी की यह तीन दिवसीय यात्रा भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है. जकार्ता उनके तीन देशों के दौरे का पहला पड़ाव है. इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया सहित कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा की. प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि भारत संवाद, कूटनीति और टू-स्टेट समाधान के माध्यम से स्थायी शांति का समर्थन करता है.
सेबी ने 24 जून 2026 को रिलायंस इंडस्ट्रीज के कंपनी सचिव एवं कंप्लायंस अधिकारी को प्रशासनिक चेतावनी पत्र जारी किया. यह पत्र कंपनी को 6 जुलाई को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के माध्यम से प्राप्त हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने रिलायंस इंडस्ट्रीज को इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों के कथित उल्लंघन के मामले में प्रशासनिक चेतावनी जारी की है. जांच में कंपनी के दो कर्मचारियों और एक कर्मचारी के करीबी रिश्तेदार द्वारा अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी (UPSI) के दौरान शेयरों में ट्रेडिंग करने का मामला सामने आया है. हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एहतियाती चेतावनी है और इससे कंपनी के वित्तीय या परिचालन कामकाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
क्या है पूरा मामला?
सेबी ने 1 जून 2024 से 30 अगस्त 2024 के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में हुई ट्रेडिंग की जांच की थी. इस दौरान नियामक ने सेबी (Prohibition of Insider Trading) Regulations, 2015 के तहत नियमों के अनुपालन की समीक्षा की. जांच में पाया गया कि कंपनी के दो कर्मचारियों और एक कर्मचारी के करीबी रिश्तेदार ने अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी (UPSI) की अवधि के दौरान कंपनी के शेयरों में कारोबार किया, जो इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का उल्लंघन माना गया.
कंपनी को मिला चेतावनी पत्र
सेबी ने 24 जून 2026 को रिलायंस इंडस्ट्रीज के कंपनी सचिव एवं कंप्लायंस अधिकारी को प्रशासनिक चेतावनी पत्र जारी किया. यह पत्र कंपनी को 6 जुलाई को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के माध्यम से प्राप्त हुआ. इसके बाद रिलायंस ने स्टॉक एक्सचेंजों को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह केवल एहतियाती कदम है और इसका कंपनी के कारोबार या वित्तीय स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
किन लोगों के नाम आए सामने?
सेबी ने अपने पत्र के परिशिष्ट (Annexure) में तीन लोगों का उल्लेख किया है.
1. हर्ष जैन ने 5 जुलाई 2024 को 6,385 रुपये में रिलायंस इंडस्ट्रीज के दो शेयर खरीदे.
2. कामिनी जैन, जो एक कर्मचारी की करीबी रिश्तेदार हैं, ने 10 जुलाई 2024 को 35 शेयर 1,09,695.25 रुपये में बेचे और अगले ही दिन 25 शेयर 78,871.25 रुपये में खरीद लिए.
3. हिराई उमंग दोषी ने 18 जुलाई 2024 को 15 शेयर 47,625 रुपये में बेचे.
सेबी ने क्या कहा?
बाजार नियामक के अनुसार, ये लेनदेन सेबी (इनसाइडर ट्रेडिंग निषेध) विनियम, 2015 के विनियम 4(1) तथा सेबी अधिनियम की धारा 12A(d) और 12A(e) का उल्लंघन हैं. सेबी ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि रिलायंस इंडस्ट्रीज को इन लेनदेन की जानकारी तब मिली, जब नियामक ने स्वयं कंपनी को इसकी सूचना दी.
भविष्य के लिए दी सख्त चेतावनी
सेबी ने कंप्लायंस अधिकारी को भविष्य में अधिक सतर्क रहने और इनसाइडर ट्रेडिंग नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने की सलाह दी है. नियामक ने कहा कि यदि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई गईं तो सेबी अधिनियम के तहत उचित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.
रिलायंस इंडस्ट्रीज का जवाब
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा है कि वह सेबी की ओर से उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी. हालांकि, कंपनी ने अभी तक यह नहीं बताया है कि जिन कर्मचारियों और संबंधित व्यक्ति के नाम सामने आए हैं, उनके खिलाफ कोई आंतरिक कार्रवाई की गई है या नहीं.
याप डिजिटल के अलावा अतुल हेगड़े भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे. नवाचार को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी के उद्यमियों को सहयोग देना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के विज्ञापन और डिजिटल मार्केटिंग उद्योग के प्रमुख नामों में शामिल याप डिजिटल (Yaap Digital) के संस्थापक एवं चेयरमैन अतुल हेगड़े का मंगलवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. वह 57 वर्ष के थे. उनके निधन से देश के विज्ञापन, मार्केटिंग और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बड़ा झटका लगा है.
25 वर्षों से अधिक समय तक उद्योग में निभाई अहम भूमिका
अतुल हेगड़े ने विज्ञापन, ब्रांडिंग और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक समय तक काम किया. इस दौरान उन्होंने खुद को एक दूरदर्शी उद्यमी और डिजिटल-फर्स्ट बिजनेस लीडर के रूप में स्थापित किया. उन्होंने रचनात्मकता, प्रौद्योगिकी और नवाचार के मेल से भारत के बदलते मार्केटिंग परिदृश्य को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
याप डिजिटल दिलाई वैश्विक पहचान
हेगड़े ने याप डिजिटल की स्थापना की और इसे एक एकीकृत मार्केटिंग एवं टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में विकसित किया, जिसकी मौजूदगी भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी है. उनके नेतृत्व में कंपनी ने डिजिटल मीडिया, कंटेंट, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग, डेटा एनालिटिक्स और प्रौद्योगिकी आधारित मार्केटिंग समाधानों के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाई.
स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी दिया बढ़ावा
याप डिजिटल के अलावा अतुल हेगड़े भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे. उन्होंने रेनमेकर वेंचर्स (Rainmaker Ventures) की सह-स्थापना की और इसके माध्यम से कई शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स में निवेश किया तथा युवा उद्यमियों का मार्गदर्शन किया. नवाचार को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी के उद्यमियों को सहयोग देना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल था.
विज्ञापन से शुरू हुआ था करियर
अतुल हेगड़े ने अपने करियर की शुरुआत विज्ञापन उद्योग से की थी. उन्होंने ब्रांडिंग, संचार और डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र में व्यापक अनुभव हासिल किया, जिसके बाद याप डिजिटल की स्थापना की. उनका उद्देश्य एक ऐसी स्वतंत्र और प्रौद्योगिकी आधारित एजेंसी नेटवर्क तैयार करना था, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके.
वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का प्रदर्शन रहा मजबूत
हाल के वर्षों में अतुल हेगड़े याप डिजिटल के विस्तार का नेतृत्व कर रहे थे. वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का प्रदर्शन मजबूत रहा और उसका कर-पश्चात लाभ (PAT) लगभग दोगुना हो गया. उन्होंने कंपनी को तकनीक आधारित, पूर्ण-सेवा (फुल-स्टैक) मार्केटिंग कंपनी के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी रणनीति तैयार की थी.
एआई और वैश्विक विस्तार पर था फोकस
हाल ही में उन्होंने कंपनी के अगले चरण के विस्तार की योजना साझा की थी. इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वामित्व वाले प्रौद्योगिकी प्लेटफॉर्म, रणनीतिक अधिग्रहण और अंतरराष्ट्रीय विस्तार को कंपनी की भविष्य की प्रमुख रणनीति बताया गया था. उनका विजन डेटा, रचनात्मकता, कंटेंट और प्रौद्योगिकी को एकीकृत कर ब्रांडों की बदलती जरूरतों के अनुरूप समाधान उपलब्ध कराना था.
उद्योग के सम्मानित विचारक थे अतुल हेगड़े
अतुल हेगड़े को डिजिटल परिवर्तन, उपभोक्ता व्यवहार, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के भविष्य पर उनके विचारों के लिए उद्योग में काफी सम्मान दिया जाता था. वह विभिन्न मंचों पर अपने अनुभव और दृष्टिकोण साझा करते रहते थे. पेशेवर जीवन के अलावा उन्हें स्नीकर्स और समकालीन संस्कृति का भी विशेष शौक था, जो उनकी अलग पहचान का हिस्सा माना जाता था. उनके निधन से भारतीय विज्ञापन और डिजिटल मार्केटिंग उद्योग ने एक दूरदर्शी उद्यमी और मार्गदर्शक को खो दिया.
कंपनी ने 25 मार्च 2026 को IPO के लिए ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल किए थे. प्रस्तावित IPO में 8,000 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
बेंगलुरु स्थित मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल चेन मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Manipal Health Enterprises) को अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से अंतिम मंजूरी मिल गई है. कंपनी ने 25 मार्च 2026 को IPO के लिए ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल किए थे.
8,000 करोड़ रुपये का होगा फ्रेश इश्यू
प्रस्तावित IPO में 8,000 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे. इसके अलावा, प्रमोटर इम्पीरियस हेल्थकेयर इन्वेस्टमेंट्स पीटीई. लिमिटेड और मणिपाल एजुकेशन एंड मेडिकल ग्रुप इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से 4,32,27,668 इक्विटी शेयरों की बिक्री पेशकश (Offer for Sale-OFS) भी शामिल होगी. OFS के तहत TPG SG Magazine Pte. Ltd, Seventy Second Investment Company LLC, Ammar Sdn Bhd, Novo Holdings Invest Asia A/S और Phoenix Bear Investments LLC भी अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे.
जुटाई गई राशि का कहां होगा इस्तेमाल?
कंपनी ने बताया कि फ्रेश इश्यू से जुटाई जाने वाली राशि में से करीब 5,378 करोड़ रुपये का उपयोग उसकी प्रमुख सहायक कंपनी मणिपाल हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड के बकाया कर्ज और उस पर देय ब्याज के पूर्ण या आंशिक भुगतान के लिए किया जाएगा. इसके अलावा, 574 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कंपनी की स्टेप-डाउन सब्सिडियरी सह्याद्री हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड में अल्पांश हिस्सेदारी (Minority Stake) के अधिग्रहण के लिए किया जाएगा. शेष राशि का उपयोग सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए होगा.
प्री-IPO प्लेसमेंट पर भी विचार
कंपनी ने कहा कि वह बुक रनिंग लीड मैनेजर्स के साथ मिलकर 1,600 करोड़ रुपये तक के प्री-IPO प्लेसमेंट पर भी विचार कर सकती है. यदि यह प्लेसमेंट पूरा हो जाता है, तो फ्रेश इश्यू का आकार उसी अनुपात में घटा दिया जाएगा.
देशभर में 38 अस्पतालों का नेटवर्क
मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज देशभर में मल्टीस्पेशियलिटी अस्पतालों का संचालन करती है, जहां बाह्य रोगी सेवाओं (OPD) से लेकर जटिल तृतीयक और चतुर्थक स्तर के उपचार उपलब्ध कराए जाते हैं. 30 सितंबर 2025 तक कंपनी के पास 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 38 अस्पताल (प्रो-फॉर्मा आधार पर 48 अस्पताल) थे, जिनमें 10,761 लाइसेंस प्राप्त बेड (प्रो-फॉर्मा आधार पर 12,367 बेड) उपलब्ध थे.
CRISIL की रिपोर्ट के अनुसार, अस्पतालों की भौगोलिक मौजूदगी के लिहाज से यह भारत की सबसे बड़ी निजी अस्पताल श्रृंखला है. वहीं बेड क्षमता के आधार पर यह देश की सबसे बड़ी पैन-इंडिया मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल नेटवर्क और अस्पतालों की संख्या के आधार पर दूसरी सबसे बड़ी निजी अस्पताल श्रृंखला है.
नवंबर 2025 में शुरू किया 49वां अस्पताल
कंपनी ने नवंबर 2025 में बेंगलुरु में अपना 49वां अस्पताल शुरू किया, जिसके बाद 31 दिसंबर 2025 तक उसकी लाइसेंस प्राप्त बेड क्षमता बढ़कर 12,631 हो गई. वित्त वर्ष 2025 में कंपनी ने प्रो-फॉर्मा आधार पर 9,263.56 करोड़ रुपये का परिचालन राजस्व दर्ज किया, जो भारत की निजी अस्पताल श्रृंखलाओं में दूसरा सबसे अधिक था. वहीं वास्तविक आधार पर कंपनी का परिचालन राजस्व 8,242.25 करोड़ रुपये रहा.
छह महीने में 571.8 करोड़ रुपये का मुनाफा
30 सितंबर 2025 को समाप्त छह महीने की अवधि में कंपनी का परिचालन राजस्व 4,713 करोड़ रुपये रहा, जबकि इसी अवधि में उसका शुद्ध लाभ 571.8 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.