आईटीसी के शेयरहोल्डर्स ने आज यानी गुरुवार को 99.6 प्रतिशत के बहुमत से होटल कारोबार को अलग करने की मंजूरी दे दी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
FMCG सेक्टर की दिग्गज कंपनी आईटीसी (ITC) ने सलाहकारों की सिफारिश के मुताबिक गुरुवार को अपने होटल कारोबार को अलग करने की योजना को मंजूरी दे दी. ITC के शेयरहोल्डर्स ने आज यानी गुरुवार को 99.6 प्रतिशत के बहुमत से होटल कारोबार को अलग करने की मंजूरी दे दी. ITC के बोर्ड ने होटल कारोबार अलग करने की योजना को अगस्त 2023 में मंजूरी दी थी. उसके तहत सिगरेट बनाने वाली इस कंपनी के शेयरधारकों को हर 10 शेयर के बदले ITC होटल्स का 1 शेयर दिया जाना है.
अब किसके पास कितनी हिस्सेदारी?
कारोबार अलग किए जाने के बाद नई कंपनी की 60 फीसदी हिस्सेदारी ITC के शेयरधारकों के पास और 40 फीसदी हिस्सेदारी ITC के पास होगी. NCLT ने ITC की छह जून को बैठक बुलाई थी. इस बैठक के बाद कंपनी ने शेयरहोल्डर्स के मतदान के नतीजों का ऐलान कर दिया है. ITC के बड़े शेयरधारकों में LIC (15.2 फीसदी), सूटी (7.81 फीसदी), मिडलटन इन्वेस्टमेंट (3.9 फीसदी), जीक्यूजी पार्टनर्स (1.69 फीसदी) आदि शामिल हैं.
NSE ने बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, एक ही ट्रेडिंग सेशन में कर डाले इतने करोड़ों ट्रांजैक्शन
शेयर में भी देखी गई तेजी
सिगेरट से लेकर होटल तक का कारोबार करने वाली कंपनी ITC का शेयर आज फोकस में रहा. शेयर में तेजी भी नजर आई. 6 जून को कंपनी के शेयर में 1 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई. सुबह शेयर बीएसई पर बढ़त के साथ 437 रुपये पर खुला. उसके बाद यह 1.6 प्रतिशत तक की तेजी के साथ 437.60 रुपये के हाई पर पहुंच गया. कारोबार बंद होने पर शेयर 1.28 प्रतिशत की मजबूती के साथ 435.80 रुपये पर सेटल हुआ.
2024 में अब तक करीब 7% गिरी शेयर की कीमत
साल 2024 में अब तक शेयर की कीमत करीब 7 प्रतिशत गिरी है. शेयर का 52 सप्ताह का उच्च स्तर 499.60 रुपये और निचला स्तर 399.30 रुपये है. कंपनी की पूरी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी पब्लिक शेयर होल्डर्स के पास है. कंपनी का मार्केट कैप 5.4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है. जनवरी-मार्च 2024 तिमाही में ITC Limited का शुद्ध मुनाफा सालान आधार पर 1.31 प्रतिशत घटकर 5,020 करोड़ रुपये रह गया. इस दौरान रेवेन्यू 1.4 प्रतिशत बढ़कर 17,752 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी ने वित्त वर्ष 2024 के लिए 7.50 रुपये प्रति शेयर के फाइनल डिविडेंड की सिफारिश की है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में 15 से अधिक कंपनियों ने विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
उत्तर प्रदेश ने निवेश आकर्षित करने की दिशा में एक और बड़ी सफलता हासिल की है. बेंगलुरु में आयोजित निवेशक रोडशो के दौरान राज्य को 50,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में 15 से अधिक कंपनियों ने विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के लिए समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए. यह निवेश प्रस्ताव ‘उत्तर प्रदेश ग्लोबल ग्रोथ डायलॉग 2026’ के दौरान सामने आए. राज्य सरकार उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के तहत देश और विदेश के निवेशकों को आकर्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.
रियल एस्टेट और बिजनेस पार्क सेक्टर से सबसे बड़े निवेश प्रस्ताव
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सबसे अधिक निवेश प्रस्ताव रियल एस्टेट, औद्योगिक पार्क और बिजनेस पार्क सेक्टर से मिले हैं. होराइजन (ब्लैकस्टोन) ने 10,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया है. वहीं, एम्बेसी और रहेजा माइंडस्पेस REIT ने 5,000-5,000 करोड़ रुपये निवेश की प्रतिबद्धता जताई है.
प्रेस्टीज ग्रुप ने 15,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना पेश की है, जबकि सत्वा डेवलपर्स ने 4,000 करोड़ रुपये निवेश का प्रस्ताव रखा है. श्रीराम प्रॉपर्टीज ने भी राज्य में निजी औद्योगिक और बिजनेस पार्क विकसित करने के लिए समझौता किया है.
GCC सेक्टर में भी बढ़ी वैश्विक कंपनियों की दिलचस्पी
उत्तर प्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) क्षेत्र में भी नई कंपनियों की रुचि मिली है. एलजी, एऑन, मेटलाइफ और टेबल स्पेस जैसी कंपनियों ने राज्य में निवेश को लेकर समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए. वहीं, टीमलीज ने उत्तर प्रदेश में GCC के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार करने के उद्देश्य से गैर-वित्तीय समझौता किया है. इसका उद्देश्य राज्य में प्रशिक्षित पेशेवरों की मजबूत पाइपलाइन तैयार करना है.
निवेशकों के साथ बंद कमरे में हुई अहम बैठकें
बेंगलुरु दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैश्विक निवेशकों और प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ तीन बंद कमरे की गोलमेज बैठकों में हिस्सा लिया. इन बैठकों में शहरी अवसंरचना, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, आईटी सेवाएं और राज्य में बढ़ते प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने राज्य की औद्योगिक नीतियों, तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशासनिक सुधारों को दीर्घकालिक निवेश के लिए अनुकूल बताया.
2031 तक 500 GCC स्थापित करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख GCC हब बनाने का रोडमैप भी पेश किया. इसके तहत वर्ष 2031 तक 4 करोड़ वर्गफुट ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस विकसित करने और 500 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है. राज्य सरकार का उद्देश्य उत्तर प्रदेश को देश के शीर्ष तीन एफडीआई गंतव्यों में शामिल करना है.
गूगल क्लाउड के साथ AI और डिजिटल तकनीक पर चर्चा
बेंगलुरु प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गूगल क्लाउड के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की. इस दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा आधारित तकनीकों के उपयोग पर चर्चा हुई. बैठक में शासन व्यवस्था, कृषि, एमएसएमई और स्टार्टअप सेक्टर में डिजिटल तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर विचार किया गया. राज्य सरकार का मानना है कि नई तकनीकों के जरिए सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाई जा सकती है और किसानों, युवाओं तथा छोटे कारोबारियों को अधिक लाभ पहुंचाया जा सकता है.
उत्तर प्रदेश को निवेश केंद्र बनाने की रणनीति
राज्य सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक नीतियां, तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेशकों के लिए अनुकूल माहौल उत्तर प्रदेश को देश के सबसे बड़े निवेश केंद्रों में बदल सकते हैं. बेंगलुरु रोडशो में मिले निवेश प्रस्ताव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माने जा रहे हैं.
जुलाई में आने वाले संभावित आईपीओ में सबसे बड़ा इश्यू SBI फंड्स मैनेजमेंट का हो सकता है. कंपनी 12,000 से 13,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर आईपीओ बाजार की रौनक लौटने जा रही है. जुलाई 2026 में एक दर्जन से अधिक कंपनियां अपने पब्लिक इश्यू लॉन्च करने की तैयारी में हैं और इनके जरिए करीब 45,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने का अनुमान है. मजबूत होते बाजार, सुधरते निवेशक भरोसे और वैश्विक अनिश्चितताओं में कमी के बीच कई बड़ी कंपनियां लिस्टिंग की राह पर आगे बढ़ रही हैं.
जुलाई में IPO बाजार में आएगी नई तेजी
पिछले कुछ महीनों की सुस्ती के बाद प्राइमरी मार्केट एक बार फिर सक्रिय होता दिखाई दे रहा है. निवेश बैंकर्स के अनुसार, बाजार की परिस्थितियां अब कंपनियों के पक्ष में हैं और कई सेक्टरों की कंपनियां अपनी लिस्टिंग योजनाओं को अंतिम रूप दे रही हैं. सेंसेक्स और निफ्टी में हालिया मजबूती ने भी निवेशकों के भरोसे को बढ़ाया है, जिससे कंपनियों को बेहतर वैल्यूएशन मिलने की उम्मीद है.
SBI फंड्स, मणिपाल हेल्थ और Zepto पर नजर
जुलाई में आने वाले संभावित आईपीओ में सबसे बड़ा इश्यू SBI फंड्स मैनेजमेंट का हो सकता है. कंपनी 12,000 से 13,000 करोड़ रुपये जुटा सकती है. इसके अलावा मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज का लगभग 11,000 करोड़ रुपये और क्विक कॉमर्स कंपनी Zepto का करीब 8,000 करोड़ रुपये का आईपीओ भी बाजार में आने की संभावना है.
इन तीन बड़े इश्यू के जरिए ही करीब 32,000 करोड़ रुपये जुटाए जाने का अनुमान है. इसके अलावा गाजा कैपिटल, नैक पैकेजिंग और इनोवेटिव व्यू जैसी कंपनियां भी आईपीओ पाइपलाइन में शामिल हैं.
निवेशकों का भरोसा बना सबसे बड़ा सहारा
JM फाइनेंशियल की प्रबंध निदेशक और सीईओ (इन्वेस्टमेंट बैंकिंग) सोनिया दासगुप्ता के अनुसार, आने वाले महीनों में आईपीओ गतिविधियों में और तेजी देखने को मिल सकती है. उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं में धीरे-धीरे कमी आ रही है और भारतीय निवेशकों का भरोसा बाजार में लगातार मजबूत बना हुआ है. यही वजह है कि कंपनियां अब बाजार में उतरने के लिए अनुकूल समय देख रही हैं.
इस साल क्यों धीमा पड़ा था IPO बाजार?
साल 2025 की दूसरी छमाही में आईपीओ बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी, लेकिन 2026 की शुरुआत अपेक्षाकृत धीमी रही. इसकी प्रमुख वजह पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की कमजोर भागीदारी रही.
इस साल अप्रैल तक 18 आईपीओ बाजार में आए, जबकि मई में एक भी नई कंपनी ने लिस्टिंग नहीं की . हालांकि अब वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और निवेशकों की बढ़ती रुचि से बाजार में नई ऊर्जा दिखाई दे रही है .
मजबूत कंपनियों को मिल रहा निवेशकों का साथ
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक अब केवल मजबूत बुनियादी ढांचे, टिकाऊ बिजनेस मॉडल और दीर्घकालिक विकास क्षमता वाली कंपनियों में ही निवेश करना पसंद कर रहे हैं. रिटेल निवेशकों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है, जिससे प्राइमरी मार्केट को अतिरिक्त मजबूती मिल रही है .
173 कंपनियों को मिल चुकी है सेबी की मंजूरी
19 जून तक 173 कंपनियों को सेबी से आईपीओ लाने की मंजूरी मिल चुकी है . इन कंपनियों का लक्ष्य कुल मिलाकर 2.7 लाख करोड़ रुपये जुटाना है . इसके अलावा 64 अन्य कंपनियां अभी नियामकीय मंजूरी का इंतजार कर रही हैं . इनमें एनएसई के लगभग 30,000 करोड़ रुपये के संभावित आईपीओ और जियो प्लेटफॉर्म्स के बहुप्रतीक्षित इश्यू पर भी बाजार की नजर बनी हुई है .
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार की मौजूदा मजबूती और निवेशकों का भरोसा बना रहता है तो जुलाई भारतीय आईपीओ बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण महीना साबित हो सकता है . हालांकि निवेशकों को किसी भी आईपीओ में निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति, वैल्यूएशन और बिजनेस मॉडल का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करना चाहिए .
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
नई गाइडलाइंस से बड़ी एनबीएफसी होंगी ‘अपर लेयर’ में शामिल, हर तीन साल में होगी समीक्षा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के शैडो बैंकिंग सेक्टर पर निगरानी और सख्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है . केंद्रीय बैंक ने एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक परिसंपत्ति (एसेट) वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) को ‘अपर लेयर’ श्रेणी में रखने का फैसला किया है . इस श्रेणी की कंपनियों पर अधिक कड़े नियामकीय मानदंड लागू होंगे ताकि वित्तीय प्रणाली में किसी तरह का जोखिम पैदा न हो और सिस्टम की स्थिरता बनी रहे .
₹1 लाख करोड़ एसेट वाली NBFC होंगी ‘अपर लेयर’ में शामिल
आरबीआई के नए नियमों के मुताबिक, जिन एनबीएफसी का एसेट साइज नवीनतम वित्तीय विवरण के आधार पर एक लाख करोड़ रुपये या उससे अधिक होगा, उन्हें ‘एनबीएफसी-अपर लेयर’ श्रेणी में रखा जाएगा . ऐसी कंपनियों पर अतिरिक्त नियामकीय निगरानी और अनुपालन संबंधी नियम लागू होंगे .
केंद्रीय बैंक का मानना है कि बड़ी एनबीएफसी वित्तीय प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और इनमें किसी प्रकार की गड़बड़ी व्यापक वित्तीय जोखिम पैदा कर सकती है . इसलिए इनके लिए अधिक सख्त नियमों की आवश्यकता है .
चार-स्तरीय रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत होगा वर्गीकरण
आरबीआई ने स्केल बेस्ड रेगुलेशन (Scale Based Regulation) के तहत एनबीएफसी को चार श्रेणियों में बांटा है .
1. एनबीएफसी-बेस लेयर
2. एनबीएफसी-मिडिल लेयर
3. एनबीएफसी-अपर लेयर
4. एनबीएफसी-टॉप लेयर
केंद्रीय बैंक कंपनियों के आकार, जोखिम प्रोफाइल और वित्तीय प्रणाली में उनकी अहमियत के आधार पर उनका वर्गीकरण करता है . अपर लेयर में आने वाली कंपनियों के लिए पूंजी, गवर्नेंस, जोखिम प्रबंधन और निगरानी से जुड़े नियम अधिक सख्त होंगे .
हर तीन साल में होगी सीमा की समीक्षा
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि एनबीएफसी-अपर लेयर में शामिल करने के लिए तय की गई एक लाख करोड़ रुपये की सीमा की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी . इसके लिए हर तीन साल में मानदंडों की समीक्षा की जाएगी ताकि बदलते आर्थिक और वित्तीय परिदृश्य के अनुसार नियमों को अपडेट किया जा सके .
केंद्रीय बैंक का मानना है कि वित्तीय क्षेत्र के आकार और जोखिम में बदलाव के साथ नियामकीय ढांचे में भी लचीलापन जरूरी है .
बैंक समूह की NBFC पर भी लागू होंगे नियम
आरबीआई ने कहा कि जो एनबीएफसी किसी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक की समूह इकाई हैं, उन पर भी ये नियम लागू होंगे . यदि कोई व्यवसाय या गतिविधि बैंक और उसकी समूह एनबीएफसी दोनों संचालित कर रहे हैं, तो संबंधित नियामकीय मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा . इससे बैंकिंग और शैडो बैंकिंग के बीच संभावित जोखिमों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी .
वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई का यह कदम वित्तीय प्रणाली की स्थिरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण है . बड़ी एनबीएफसी अब बैंकिंग प्रणाली की तरह ही व्यापक प्रभाव रखती हैं, इसलिए उनकी निगरानी और जोखिम प्रबंधन को मजबूत करना जरूरी हो गया है . नए नियमों से न केवल शैडो बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि किसी बड़े वित्तीय संकट की स्थिति में पूरे सिस्टम पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा .
उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से 26 जून को भारतीय व्यापारियों का पहला दल तिब्बत के लिए रवाना होगा. प्रशासन ने पहले चरण में 26 व्यापार पास जारी किए हैं, जिनमें 17 व्यापारी और 9 सहायक शामिल हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
करीब छह साल के लंबे अंतराल के बाद भारत और चीन के बीच उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से सीमापार व्यापार एक बार फिर शुरू होने जा रहा है. 26 जून से भारतीय व्यापारियों का पहला दल तिब्बत के लिए रवाना होगा. कोविड महामारी और सीमा तनाव के बाद रुका यह पारंपरिक व्यापार अब फिर बहाल हो रहा है, जिसे सीमावर्ती अर्थव्यवस्था, स्थानीय कारोबार और भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. हालांकि, इस फैसले के साथ नेपाल ने एक बार फिर लिपुलेख क्षेत्र को लेकर अपनी आपत्ति भी दोहराई है.
26 जून को रवाना होगा पहला व्यापारी दल
उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से सीमापार व्यापार की बहाली के तहत 26 जून को भारतीय व्यापारियों का पहला दल तिब्बत के लिए रवाना होगा. प्रशासन ने पहले चरण में 26 व्यापार पास जारी किए हैं, जिनमें 17 व्यापारी और 9 सहायक शामिल हैं. व्यापारियों ने अपना सामान लिपुलेख दर्रे के पास स्थित गोदामों तक पहुंचाना शुरू कर दिया है. साथ ही गुंजी में कस्टम कार्यालय भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि व्यापारिक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित किया जा सके.
दूसरे चरण में और व्यापारियों को मिल सकते हैं पास
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वर्ष 103 से अधिक व्यापारियों ने आवेदन किया है. प्रशासन आने वाले दिनों में दूसरे चरण के तहत करीब 25 और व्यापारियों को व्यापार पास जारी कर सकता है. व्यापार बहाली से सीमावर्ती क्षेत्रों के व्यापारियों में उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि यह कारोबार लंबे समय से स्थानीय लोगों की आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम रहा है.
अब याक और खच्चरों की जगह वाहनों से होगा परिवहन
इस बार व्यापार प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. पहले तिब्बत तक सामान पहुंचाने के लिए खच्चरों और याक का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन अब सड़क संपर्क बेहतर होने के कारण अधिकतर यात्रा और माल परिवहन वाहनों के जरिए किया जाएगा. इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि व्यापारियों की लागत भी कम होगी और कारोबार को नई गति मिलने की उम्मीद है.
नेपाल ने फिर जताई आपत्ति
लिपुलेख दर्रा भारत, चीन और नेपाल के त्रि-जंक्शन क्षेत्र के करीब स्थित है. नेपाल लंबे समय से लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों पर अपना दावा करता रहा है. नेपाल का कहना है कि भारत और चीन ने सीमा व्यापार बहाल करने तथा कैलाश मानसरोवर यात्रा को दोबारा शुरू करने जैसे फैसलों से पहले उससे कोई परामर्श नहीं किया. इससे पहले भी 2015 और 2020 में नेपाल इस मुद्दे पर औपचारिक विरोध दर्ज करा चुका है.
भारत का स्पष्ट रुख
भारत सरकार का कहना है कि लिपुलेख उत्तराखंड का हिस्सा है और सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों का समाधान भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय वार्ता के जरिए होना चाहिए. नई दिल्ली इस व्यापार को एक ऐतिहासिक और पारंपरिक गतिविधि मानती है, जो सीमावर्ती समुदायों की आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़ी हुई है.
भारत-चीन संबंधों में नरमी का संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि लिपुलेख व्यापार की बहाली भारत और चीन के संबंधों में धीरे-धीरे आ रही नरमी का संकेत है. कोविड महामारी और वर्ष 2020 के सीमा तनाव के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों के संपर्क में कमी आई थी. अब सीमापार व्यापार और कैलाश मानसरोवर यात्रा जैसी गतिविधियों की बहाली को दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
सीमावर्ती अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा
लिपुलेख व्यापार के फिर से शुरू होने से उत्तराखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. स्थानीय व्यापारियों, परिवहन सेवाओं और छोटे कारोबारियों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है. हालांकि, नेपाल के क्षेत्रीय दावों और कूटनीतिक संवेदनशीलताओं को देखते हुए लिपुलेख दर्रा आने वाले समय में दक्षिण एशिया की राजनीति और क्षेत्रीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बना रह सकता है.
बुधवार को (BSE) सेंसेक्स 790.54 अंक यानी 1.04 फीसदी की बढ़त के साथ 76,991.22 अंक पर बंद हुआ. वहीं, (NSE) निफ्टी 197.55 अंक चढ़कर 24,021.65 के स्तर पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को आई जोरदार रिकवरी ने निवेशकों का भरोसा फिर मजबूत किया है. सेंसेक्स करीब 800 अंक की छलांग लगाकर 77,000 के करीब पहुंच गया, जबकि निफ्टी 24,000 के अहम स्तर के ऊपर बंद हुआ. अब गुरुवार के कारोबारी सत्र से पहले निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की खरीदारी, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर रहेगी.
बुधवार को दमदार तेजी के साथ बंद हुआ बाजार
बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 790.54 अंक यानी 1.04 फीसदी की बढ़त के साथ 76,991.22 अंक पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 197.55 अंक चढ़कर 24,021.65 के स्तर पर पहुंच गया. एक दिन पहले बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन अगले ही सत्र में निवेशकों ने जोरदार खरीदारी की.
कच्चे तेल में नरमी से मिला सहारा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है. तेल की कीमतें चार महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गई हैं. इससे महंगाई और आयात बिल पर दबाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है.
एफआईआई की खरीदारी ने बढ़ाया भरोसा
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने एक बार फिर खरीदारी का रुख अपनाया है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की वापसी से घरेलू बाजारों को मजबूती मिल सकती है और निवेशकों का सेंटीमेंट बेहतर हो सकता है.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील से बढ़ी उम्मीदें
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं. अगर यह समझौता आगे बढ़ता है तो कई सेक्टरों को फायदा मिल सकता है, जिसका असर शेयर बाजार पर भी दिखाई दे सकता है.
आईटी और बैंकिंग शेयरों में रही खरीदारी
बुधवार के कारोबार में आईटी और निजी बैंकिंग शेयरों ने बाजार को सबसे ज्यादा सहारा दिया. टेक महिंद्रा, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक जैसे शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली. बैंक निफ्टी और आईटी इंडेक्स दोनों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई.
सेंसेक्स के शेयरों में इंडिगो, ट्रेंट, टेक महिंद्रा, बजाज फाइनेंस और आईसीआईसीआई बैंक सबसे ज्यादा बढ़त वाले शेयर रहे. वहीं, एनटीपीसी, टाटा स्टील, मारुति, बीईएल और भारती एयरटेल में दबाव देखने को मिला.
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक संकेत सकारात्मक बने रहते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो गुरुवार को भी बाजार में मजबूती देखने को मिल सकती है. हालांकि, निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
शेयर बाजार में आज कई कंपनियों से जुड़े अहम कॉरपोरेट अपडेट्स के चलते उनके शेयर निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं. Embassy Developments ने उत्तर प्रदेश सरकार के साथ लखनऊ में वाणिज्यिक परियोजना के लिए 1,500 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है, जबकि NLC India Renewables ने ओडिशा में 1,000 मेगावाट की हरित ऊर्जा परियोजनाओं के लिए OREDA के साथ संयुक्त उद्यम किया है. Bharti Airtel की क्रेडिट रेटिंग S&P Global Ratings ने बढ़ाकर BBB+ कर दी है, वहीं HCLTech ने Nokia और Nestlé के साथ एआई आधारित साझेदारियों का विस्तार किया है. ICICI Bank को ICICI Prudential Life Insurance में अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदने के लिए RBI से मंजूरी मिली है. Jubilant Pharmova को कर मामले में राहत मिली है, जबकि Oberoi Realty ने गुरुग्राम परियोजना को लेकर स्थिति स्पष्ट की है. Delhivery में Alpha Wave Ventures ने अपनी हिस्सेदारी घटाई है और IRFC के OFS में सरकार ग्रीन-शू विकल्प का इस्तेमाल करेगी. वहीं Raymond ने जर्मन कंपनी Deharde के संभावित अधिग्रहण संबंधी खबरों को महज अटकल बताया है. इन सभी घटनाक्रमों के कारण आज के कारोबार में इन शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
पर्सनलाइज्ड मार्केटिंग और एआई-आधारित कस्टमर एंगेजमेंट को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ग्राहक जुड़ाव और मार्केटिंग ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म मोएंगेज (MoEngage) ने सैन फ्रांसिस्को स्थित एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Aampe का अधिग्रहण कर लिया है. इस रणनीतिक सौदे के जरिए कंपनी ने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ग्राहक जुड़ाव क्षमताओं को मजबूत करने और पर्सनलाइज्ड मार्केटिंग के क्षेत्र में अपनी पकड़ बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. हालांकि दोनों कंपनियों ने इस सौदे की वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इस अधिग्रहण के तहत Aampe के रिइनफोर्समेंट लर्निंग इंजन को मोएंगेज के प्लेटफॉर्म में एकीकृत किया जाएगा.
हर ग्राहक के लिए अलग रणनीति तैयार करेगा एआई
इस तकनीकी एकीकरण के बाद ब्रांड्स को प्रत्येक ग्राहक के व्यवहार के आधार पर संदेश की सामग्री, समय, संचार माध्यम और संदेश भेजने की आवृत्ति को स्वचालित रूप से तय करने में मदद मिलेगी. कंपनी के अनुसार, इससे मार्केटर्स प्रत्येक उपभोक्ता के लिए व्यक्तिगत स्तर पर बेहतर अनुभव तैयार कर सकेंगे और ग्राहक जुड़ाव को अधिक प्रभावी बना पाएंगे.
मर्लिन एआई प्लेटफॉर्म को मिलेगी नई ताकत
यह अधिग्रहण मोएंगेज के मौजूदा एआई प्लेटफॉर्म ‘Merlin AI’ को भी मजबूती देगा. कंपनी का कहना है कि संयुक्त प्लेटफॉर्म मार्केटर्स को केवल अभियान के लक्ष्य और दिशा-निर्देश तय करने की सुविधा देगा, जबकि एआई एजेंट खुद यह निर्णय लेंगे कि किस ग्राहक से कब, कैसे और किस माध्यम से जुड़ना सबसे प्रभावी रहेगा. साथ ही, ये एआई एजेंट लगातार ग्राहकों की प्रतिक्रिया और परिणामों के आधार पर अपनी सिफारिशों को बेहतर बनाते रहेंगे.
कंपनी ने क्या कहा
मोएंगेज के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवितेजा डोड्डा ने कहा, "हर मार्केटर चाहता है कि वह सही समय पर, सही संदेश के साथ, सही ग्राहक तक पहुंचे. चुनौती हमेशा महत्वाकांक्षा की नहीं बल्कि तकनीकी ढांचे की रही है." उन्होंने कहा कि Aampe की तकनीक व्यक्तिगत स्तर पर कंटेंट, समय, संचार चैनल और संदेशों की आवृत्ति को लगातार बेहतर बनाती रहती है. वहीं, Aampe के सह-संस्थापक और सीईओ पॉल मीनशाउज़ेन ने कहा कि कंपनी की सोच हमेशा "हर उपयोगकर्ता के लिए एक एजेंट" विकसित करने की रही है, न कि केवल ग्राहक समूहों के लिए एक मॉडल बनाने की.
संस्थापक टीम मोएंगेज में होगी शामिल
अधिग्रहण के तहत Aampe की संस्थापक टीम पॉल मीनशाउज़ेन, शॉन व्हीलर और सामी अब्बूद, अब मोएंगेज के साथ जुड़कर कंपनी की एजेंटिक डिसीजनिंग पहल का नेतृत्व करेगी.
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि Aampe के मौजूदा ग्राहकों को बिना किसी व्यवधान के सेवाएं मिलती रहेंगी. साथ ही उन्हें मोएंगेज की इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और कस्टमर सक्सेस टीमों का अतिरिक्त सहयोग भी मिलेगा.
कई बड़े ब्रांड पहले से कर रहे हैं इस्तेमाल
कंपनी के मुताबिक, Aampe के एआई एजेंट्स का उपयोग वर्तमान में ZenBusiness, Taxfix, Grab और Swiggy जैसे ब्रांड कर रहे हैं. यह प्लेटफॉर्म सैकड़ों करोड़ एआई एजेंट संचालित करता है और हर सप्ताह 200 अरब से अधिक निर्णयों को प्रोसेस करता है. मोएंगेज का कहना है कि इस अधिग्रहण के बाद अन्य ग्राहक जुड़ाव प्लेटफॉर्म का उपयोग करने वाले ब्रांड भी बिना अपनी मौजूदा मार्केटिंग व्यवस्था बदले Aampe की एआई क्षमताओं का लाभ उठा सकेंगे.
एआई आधारित मार्केटिंग की ओर बढ़ता उद्योग
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अधिग्रहण ऐसे समय में हुआ है जब कंपनियां ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने के लिए तेजी से एआई और डेटा-आधारित निर्णय प्रणालियों को अपना रही हैं. मोएंगेज और Aampe का यह एकीकरण एआई आधारित पर्सनलाइज्ड मार्केटिंग के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकता है.
कंपनी के अनुसार, क्विक कॉमर्स की अगली वृद्धि देश के उभरते बाजारों से आ रही है. टियर-2 और टियर-3 शहरों में पिछले एक वर्ष के दौरान 42 गुना वृद्धि दर्ज की गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में क्विक कॉमर्स बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और फ्लिपकार्ट मिनट्स ने इस क्षेत्र में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है. लॉन्च के दो साल से भी कम समय में कंपनी ने 1,000 माइक्रो फुलफिलमेंट सेंटर का नेटवर्क खड़ा कर लिया है. 130 से अधिक शहरों और 8,000 से ज्यादा पिनकोड तक पहुंच बनाने के साथ प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर्स में पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है. खास बात यह है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा जेन-जेड उपभोक्ताओं ने इस तेजी को नई दिशा दी है.
फ्लिपकार्ट मिनट्स ने बनाया नया रिकॉर्ड
बेंगलुरु फ्लिपकार्ट की क्विक कॉमर्स सेवा फ्लिपकार्ट मिनट्स ने लॉन्च के दो साल से भी कम समय में 1,000 माइक्रो फुलफिलमेंट सेंटर स्थापित करने का बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है. कंपनी द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2024 में शुरू हुई यह सेवा अब 130 से अधिक शहरों और 8,000 से ज्यादा पिनकोड तक पहुंच चुकी है. नेटवर्क विस्तार के साथ कंपनी के ऑर्डर्स में सालाना आधार पर पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है.
टियर-2 और टियर-3 शहरों से मिली सबसे बड़ी ताकत
कंपनी के अनुसार, क्विक कॉमर्स की अगली वृद्धि देश के उभरते बाजारों से आ रही है. टियर-2 और टियर-3 शहरों में पिछले एक वर्ष के दौरान 42 गुना वृद्धि दर्ज की गई है. अंबाला, आरा, बोकारो, दरभंगा, जोरहाट, ओंगोल, पूर्णिया, सहरसा और तेनाली जैसे शहरों से मांग में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है. पिछले एक वर्ष में फ्लिपकार्ट मिनट्स ने 90 से अधिक नए शहरों में अपनी सेवाओं का विस्तार किया है, जिससे कंपनी की पहुंच और ग्राहक आधार दोनों तेजी से बढ़े हैं.
जेन-जेड बना सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन
फ्लिपकार्ट मिनट्स का सबसे तेजी से बढ़ने वाला ग्राहक वर्ग जेन-जेड बनकर उभरा है. कंपनी के कुल ग्राहक आधार में इस वर्ग की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है. यह वर्ग केवल दैनिक जरूरतों के सामान तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्यूटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, वेलनेस और लाइफस्टाइल उत्पादों की भी तेजी से खरीदारी कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि जेन-ज़ेड क्विक कॉमर्स को सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि ऑन-डिमांड शॉपिंग की नई आदत के रूप में अपना रहा है.
किराना से आगे बढ़ा क्विक कॉमर्स
फ्लिपकार्ट मिनट्स पर अब ग्राहक केवल किराना सामान ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्यूटी, वेलनेस और लाइफस्टाइल उत्पादों की भी खरीदारी कर रहे हैं. फलों और सब्जियों की औसत ऑर्डर वैल्यू में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि रिपीट परचेज में 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कंपनी के अनुसार, 120 से अधिक नई श्रेणियों में बढ़ती मांग यह संकेत देती है कि क्विक कॉमर्स अब एक मल्टी-कैटेगरी रिटेल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित हो रहा है.
किसानों, ब्रांड्स और रोजगार को भी मिला लाभ
फ्लिपकार्ट मिनट्स करीब 500 डी2सी ब्रांड्स के साथ काम कर रहा है. इसके अलावा कंपनी के ‘समर्थ कृषि’ कार्यक्रम के तहत 3,000 से अधिक किसानों को बाजार से जोड़ने का काम किया गया है. एफपीओ और फार्म-टू-डोर मॉडल के जरिए किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है. साथ ही वेयरहाउसिंग, सप्लाई चेन और लास्ट-माइल डिलीवरी के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं.
ग्रीन डिलीवरी पर भी फोकस
कंपनी ने पिछले एक वर्ष में अपने इलेक्ट्रिक वाहन बेड़े को दोगुना किया है. वर्तमान में 10 प्रतिशत से अधिक डिलीवरी ग्रीन माध्यमों से की जा रही हैं. इसके अलावा 20 प्रतिशत ग्राहकों ने पुन: उपयोग योग्य बैग का विकल्प चुना है, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में मदद मिल रही है. फ्लिपकार्ट का मानना है कि आने वाले समय में टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल डिलीवरी मॉडल क्विक कॉमर्स की नई पहचान बनेंगे.
इस अधिग्रहण के बाद होनासा कंज्यूमर अपनी नई सहायक कंपनी ‘होनासा हेल्थ’ की स्थापना करेगी. इस इकाई के माध्यम से कंपनी उपभोक्ताओं के लिए पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों का पोर्टफोलियो तैयार करेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मामाअर्थ की पैरेंट कंपनी होनासा कंज्यूमर ने विज्ञान-आधारित न्यूट्रास्यूटिकल्स कंपनी फ्लुएंस फार्मा में 58 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने का फैसला किया है. कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि यह सौदा 135 करोड़ रुपये के एंटरप्राइज वैल्यू पर किया जा रहा है. यह रणनीतिक अधिग्रहण होनासा कंज्यूमर की तेजी से बढ़ रहे न्यूट्रास्यूटिकल्स सेक्टर में औपचारिक एंट्री है. कंपनी को उम्मीद है कि अगले दो महीनों में यह सौदा पूरा हो जाएगा.
‘होनासा हेल्थ’ के जरिए हेल्थ कैटेगरी में विस्तार
इस अधिग्रहण के बाद होनासा कंज्यूमर अपनी नई सहायक कंपनी ‘होनासा हेल्थ’ की स्थापना करेगी. इस इकाई के माध्यम से कंपनी उपभोक्ताओं के लिए पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों का पोर्टफोलियो तैयार करेगी. कंपनी फ्लुएंस फार्मा की पेटेंट आधारित क्लीनिकल साइंस और डॉक्टरों के बीच स्थापित भरोसे को अपने ब्रांड निर्माण, उपभोक्ता समझ और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के साथ जोड़कर नए उत्पादों को बाजार में उतारेगी.
तेजी से बढ़ रहा है न्यूट्रास्यूटिकल्स बाजार
भारत में न्यूट्रास्यूटिकल्स उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है. उपभोक्ताओं के बीच ‘ब्यूटी फ्रॉम इनसाइड’ यानी भीतर से सुंदरता और समग्र स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ने से इस क्षेत्र में मांग लगातार बढ़ रही है. होनासा कंज्यूमर का मानना है कि स्किन और हेयर केयर के साथ विज्ञान आधारित पोषण उत्पादों का संयोजन आने वाले वर्षों में बड़ा ट्रेंड बनने जा रहा है.
अगले दशक में बढ़ेगी न्यूट्रिशन और ब्यूटी की साझेदारी
होनासा कंज्यूमर के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी वरुण अलाघ ने कहा कि ब्यूटी और पर्सनल केयर उद्योग एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां उपभोक्ता समस्याओं के मूल कारणों को दूर करने वाले समग्र समाधानों की तलाश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि पिछले दशक में टॉपिकल एक्टिव्स का दौर था, जबकि आने वाला दशक विज्ञान आधारित स्किन और हेयर केयर तथा न्यूट्रास्यूटिकल्स के मजबूत संयोजन का होगा.
अगले 5 से 7 वर्षों में खरीदेगी शेष हिस्सेदारी
कंपनी अगले पांच से सात वर्षों के दौरान दो चरणों में फ्लुएंस फार्मा की शेष 42 प्रतिशत हिस्सेदारी भी खरीदेगी. यह प्रक्रिया शेयर खरीद समझौते और शेयरधारक समझौते के तहत पूरी की जाएगी.
फ्लुएंस फार्मा को मिलेगा बड़ा वितरण नेटवर्क
फ्लुएंस फार्मा के सीईओ और सह-संस्थापक अमित भुसारी ने कहा कि कंपनी के वैज्ञानिक शोध और क्लीनिकल समाधानों को बड़े उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत साझेदार की आवश्यकता थी. उन्होंने कहा कि होनासा कंज्यूमर की डिजिटल क्षमता, उपभोक्ता डेटा की समझ और नए ब्रांड्स को तेजी से आगे बढ़ाने का अनुभव कंपनी के विस्तार में मदद करेगा.
40 करोड़ रुपये का राजस्व और मजबूत मुनाफा
फ्लुएंस फार्मा ने पिछले वित्त वर्ष में 40 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया था और कंपनी का एबिटडा मार्जिन 20 प्रतिशत से अधिक रहा. होनासा कंज्यूमर के अनुसार, यह निवेश भारत के 16,000 करोड़ रुपये से अधिक के न्यूट्रास्यूटिकल्स बाजार में कंपनी की मजबूत उपस्थिति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
सहकारिता मंत्री ने कहा कि फसल खरीद के बाद किसानों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने निर्देश दिया कि खरीद के 48 घंटे के भीतर किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान किया जाए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
किसानों की आय बढ़ाने और बिचौलियों की भूमिका खत्म करने के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने नाफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) को निर्देश दिया है कि वे किसानों से दलहन और तिलहन की पूरी उपज सीधे खरीदें. साथ ही, फसल खरीद के 48 घंटे के भीतर किसानों के बैंक खातों में भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है. इसके अलावा नाफेड की चार नई डिजिटल और कल्याणकारी पहलों की भी शुरुआत की गई है.
किसानों से सीधे होगी खरीद
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि देश की प्रमुख सहकारी संस्थाएं नाफेड और एनसीसीएफ अब किसानों से सीधे दलहन और तिलहन की खरीद करेंगी. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसानों की उपज का एक-एक दाना खरीदा जाए और खरीद प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका को समाप्त किया जाए. उनका कहना था कि इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी.
48 घंटे में खाते में पहुंचेगा पैसा
सहकारिता मंत्री ने कहा कि फसल खरीद के बाद किसानों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने निर्देश दिया कि खरीद के 48 घंटे के भीतर किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान किया जाए. इस व्यवस्था से किसानों की नकदी संबंधी समस्याएं कम होंगी और उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी.
दो साल में देशभर में लागू होगी व्यवस्था
अमित शाह ने इस योजना के लिए दो वर्ष की समयसीमा तय की है. उनका लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों के भीतर देश का हर किसान अपनी दलहन और तिलहन की फसल सीधे नाफेड और एनसीसीएफ को बेच सके. इस प्रक्रिया में किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं होगी और भुगतान सीधे किसानों के खातों में पहुंचेगा.
MSP मिलने से बढ़ेगी दलहन की खेती
अमित शाह ने कहा कि किसानों को जब न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बेचने का भरोसा मिलेगा तो दलहन और तिलहन की खेती का रकबा भी बढ़ेगा. उन्होंने विश्वास जताया कि इससे देश दालों के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी.
नाफेड की चार नई पहलों की शुरुआत
किसानों और सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अमित शाह ने नाफेड की चार नई डिजिटल और कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की.
1. NAFEX.in पोर्टल- यह डिजिटल ऑक्शन प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए खरीदी गई दलहन और तिलहन की पारदर्शी और ऑनलाइन नीलामी की जा सकेगी.
2. DRISHTI पोर्टल- यह रियल-टाइम इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम है. इसके माध्यम से देशभर में दालों और तिलहन के स्टॉक, भंडारण और उपलब्धता की निगरानी की जा सकेगी.
3. ERP पोर्टल- यह पोर्टल नाफेड के आंतरिक कामकाज और संसाधन प्रबंधन को मजबूत करेगा. इससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा.
4. NAFED-KALYAN फंड-इस योजना के तहत नाफेड अपने शुद्ध लाभ का एक प्रतिशत हिस्सा किसान परिवारों के बच्चों की उच्च शिक्षा और छात्रवृत्ति पर खर्च करेगा.
नाफेड की बदली तस्वीर
अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2014 में नाफेड आर्थिक संकट से जूझ रहा था और बंद होने की स्थिति में पहुंच गया था. लेकिन सरकार के प्रयासों से संस्था ने मजबूत वापसी की है. उन्होंने बताया कि नाफेड का वार्षिक कारोबार अब 30,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जबकि शुद्ध लाभ 405 करोड़ रुपये को पार कर गया है. वर्तमान में 74 लाख से अधिक किसान इससे जुड़े हुए हैं.
50,000 करोड़ रुपये टर्नओवर का लक्ष्य
सरकार ने नाफेड के लिए 50,000 करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार का लक्ष्य तय किया है. सरकार का मानना है कि डिजिटल सुधार, पारदर्शी खरीद व्यवस्था और किसानों से सीधे जुड़ाव के जरिए यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका 65 प्रतिशत समर्थन के साथ पहले स्थान पर रहा. वहीं भारत 56 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और सप्लाई चेन में बदलाव के दौर में भारत दुनिया की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए दूसरा सबसे आकर्षक कारोबारी बाजार बनकर उभरा है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ताजा रिपोर्ट में भारत को अमेरिका के बाद दूसरा स्थान मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक, तेज आर्थिक वृद्धि, विशाल घरेलू बाजार और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियां भारत को वैश्विक कंपनियों की पहली पसंद बना रही हैं.
WEF रिपोर्ट में भारत को बड़ी कामयाबी
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘चीफ इकोनॉमिस्ट्स आउटलुक मई 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए दुनिया का दूसरा सबसे आकर्षक कारोबारी माहौल बनकर उभरा है. रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब दुनिया भू-राजनीतिक संघर्ष, महंगाई और सप्लाई चेन में बदलाव जैसी चुनौतियों से जूझ रही है. सर्वे में शामिल प्रमुख वैश्विक संस्थानों के 38 मुख्य अर्थशास्त्रियों में से 56 प्रतिशत ने भारत को अगले 12 महीनों के लिए अपनी शीर्ष तीन पसंदीदा कारोबारी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया.
अमेरिका पहले, भारत दूसरे स्थान पर
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका 65 प्रतिशत समर्थन के साथ पहले स्थान पर रहा. वहीं भारत 56 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर रहा. दक्षिण-पूर्व एशिया को 50 प्रतिशत, यूरोप को 44 प्रतिशत और चीन को 35 प्रतिशत समर्थन मिला. इस तरह भारत ने कई प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ते हुए निवेशकों का भरोसा हासिल किया है.
भारत की विकास कहानी बना रही आकर्षण का केंद्र
WEF ने कहा कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, विशाल उपभोक्ता बाजार और नीतिगत सुधारों ने उसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत लगातार व्यापार और निवेश के नए रास्ते खोल रहा है तथा आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा रहा है. नई व्यापारिक साझेदारियों और वैश्विक आर्थिक एकीकरण की दिशा में भारत के प्रयासों ने भी निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है.
भू-राजनीतिक तनाव बदल रहे निवेश के फैसले
रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने निवेश गंतव्यों पर दोबारा विचार कर रही हैं. कंपनियां अब केवल तेज विकास दर ही नहीं, बल्कि स्थिरता, सप्लाई चेन की मजबूती और रणनीतिक लचीलापन भी देख रही हैं. WEF ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने में सक्षम अर्थव्यवस्थाओं को कंपनियां अधिक प्राथमिकता दे रही हैं और भारत इस मामले में मजबूत स्थिति में दिखाई देता है.
सप्लाई चेन बदलाव से दक्षिण-पूर्व एशिया को भी फायदा
रिपोर्ट में कहा गया है कि सप्लाई चेन के विविधीकरण से दक्षिण-पूर्व एशिया को भी लाभ मिल रहा है. करीब आधे अर्थशास्त्रियों ने अगले एक वर्ष में क्षेत्र में मध्यम वृद्धि की उम्मीद जताई है, जबकि 21 प्रतिशत ने मजबूत वृद्धि की संभावना व्यक्त की.
हालांकि ऊर्जा और खाद्य आयात से जुड़ी महंगाई तथा सस्ते चीनी उत्पादों के बढ़ते आयात को क्षेत्र के लिए चुनौती बताया गया है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल
WEF ने चेतावनी दी है कि जारी वैश्विक संघर्ष और व्यापार मार्गों में व्यवधान कई क्षेत्रों में आर्थिक जोखिम बढ़ा रहे हैं. मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के लिए आर्थिक दृष्टिकोण काफी कमजोर हुआ है.
रिपोर्ट के अनुसार, 88 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने इस क्षेत्र में अगले एक वर्ष के दौरान कमजोर या बेहद कमजोर वृद्धि की आशंका जताई है. वहीं, जापान और कई उभरते बाजारों में भी विकास दर को लेकर चिंता बनी हुई है.
निवेश और विस्तार के लिए भारत बना उम्मीद की किरण
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक ऐसे रणनीतिक बाजार के रूप में उभर रहा है, जो उन्हें विकास के अवसरों के साथ-साथ मजबूत सप्लाई चेन और स्थिर कारोबारी माहौल भी उपलब्ध करा सकता है. जैसे-जैसे कंपनियां अपनी वैश्विक रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं, भारत अंतरराष्ट्रीय निवेश और कॉरपोरेट विस्तार का बड़ा केंद्र बनने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है.