एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 की शुरुआत में ITC का मार्केट कैप 4.12 लाख करोड़ रुपए था. अब यह बढ़कर 5,52,114.69 करोड़ रुपए पहुंच गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
आईटीसी (ITC) में पैसा लगाने वालों के चेहरे पर खुशी है, क्योंकि कंपनी के शेयर एक नई ऊंचाई पर पहुंच गए हैं. बीते 5 दिनों में इसमें 5.26% की तेजी आई है और एक महीने की बात करें तो ITC ने अपने निवेशकों को 6.72% का रिटर्न दिया है. आज ITC के शेयर करीब 1 फीसदी के उछाल के साथ 443.95 रुपए पर बंद हुए हैं. इसके साथ ही आईटीसी का मार्केट कैप भी 5.5 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है.
इस तरह चढ़े शेयर
ITC के शेयरों में पिछले एक साल में करीब 65 पर्सेंट का उछाल आया है. कंपनी के शेयर 16 जून 2022 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में 261 रुपए पर ट्रेड कर रहे थे और आज यानी 26 मई को इसकी कीमत 443.95 रुपए है. हालांकि, आज कारोबारी सत्र के दौरान एक समय कंपनी के शेयरों ने अपना 52 वीक का हाई लेवल 444.75 रुपए छू लिया था. बीते छह महीनों में ही ITC के शेयर 30 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुके हैं.
इन कंपनियों को पछाड़ा
एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 की शुरुआत में ITC का मार्केट कैप 4.12 लाख करोड़ रुपए था. अब यह बढ़कर 5,52,114.69 करोड़ रुपए पहुंच गया है. इस अवधि में आईटीसी ने मार्केट कैप के मामले में इंफोसिस, SBI, HDFC, भारती एयरटेल, अडानी एंटरप्राइजेज और LIC को भी पीछे छोड़ दिया है. गौरतलब है कि पिछले हफ्ते कंपनी के बोर्ड ने 31 मार्च 2023 को खत्म हुए वित्त वर्ष के लिए हर शेयर पर 6.75 रुपए के फाइनल डिविडेंड और 2.75 रुपए के स्पेशल डिविडेंड की सिफारिश की थी.
बढ़ गया है मुनाफा
आईटीसी ने हाल ही में अपने तिमाही नतीजों (Q4 Result) की घोषणा की थी. मार्च तिमाही में कंपनी को सिगरेट के कारोबार से अच्छा-खासा मुनाफा हुआ. इस तिमाही में कंपनी के स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफे में 21.4 फीसदी का इजाफा हुआ था. सिगरेट की बिक्री में तेजी और कमोडिटी की कीमतों में नरमी के चलते यह ग्रोथ दर्ज हुई थी. बता दें कि आईटीसी कंपनी की गोल्ड फ्लैक सिगरेट और बिंगो चिप्स काफी फेमस हैं. चौथी तिमाही में ITC को 5,086 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ था, जो एक साल पहले के 4,190 करोड़ रुपए से अधिक है.
अमेरिका ने इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोऑपरेशन पहल की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य Quad देशों के बीच समुद्री निगरानी क्षमता को जोड़ना और रियल-टाइम सूचना साझा करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के समूह Quad ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी को और मजबूत करने के लिए कई बड़े कदमों का ऐलान किया है. समूह ने समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, क्रिटिकल मिनरल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर सहयोग से जुड़े नए पहल शुरू किए हैं. Quad देशों ने साफ संकेत दिया है कि अब यह मंच केवल बातचीत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि साझा रणनीतिक लक्ष्यों पर मिलकर ठोस कार्रवाई करेगा.
समुद्री निगरानी और सुरक्षा पर बड़ा फोकस
अमेरिका ने इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम सर्विलांस कोऑपरेशन पहल की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य Quad देशों के बीच समुद्री निगरानी क्षमता को जोड़ना और रियल-टाइम सूचना साझा करना है. इसके तहत महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों पर निगरानी मजबूत की जाएगी, ताकि क्षेत्र में शिपिंग सुरक्षा और समुद्री गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सके.
Quad ने इंडो-पैसिफिक मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस पहल का भी विस्तार किया है, जिससे क्षेत्र के देशों को लगभग रियल-टाइम कमर्शियल शिप ट्रैकिंग की सुविधा मिल सकेगी.
वैश्विक व्यापार के लिए अहम है इंडो-पैसिफिक
अमेरिका ने कहा कि दुनिया के लगभग 60 प्रतिशत समुद्री व्यापार का रास्ता इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से होकर गुजरता है. ऐसे में समुद्री मार्गों की सुरक्षा केवल Quad देशों ही नहीं बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है.
पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में मिलकर करेंगे निवेश
Quad विदेश मंत्रियों ने “Ports of the Future” नाम से नई साझेदारी की शुरुआत की है. इसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बंदरगाह इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और समुद्री कनेक्टिविटी बढ़ाना है.
ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि इस पहल के तहत पहला पायलट प्रोजेक्ट फिजी में शुरू किया जाएगा. यह पहली बार होगा जब Quad देश किसी पोर्ट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर संयुक्त रूप से काम करेंगे.
भारत करेगा अगली Quad-at-Sea मिशन की मेजबानी
भारत अगली Quad-at-Sea मिशन की मेजबानी करेगा, जिसमें चारों देशों के कोस्ट गार्ड शामिल होंगे. इस मिशन का उद्देश्य समुद्री सहयोग, ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन और मानवीय सहायता से जुड़े अभियानों को मजबूत करना है.
ऊर्जा सुरक्षा पर नई पहल
Quad देशों ने इंडो-पैसिफिक एनर्जी सिक्योरिटी इनिशिएटिव लॉन्च किया है. इसका मकसद ईंधन और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच अधिक सुरक्षित और मजबूत बनाना है. यह पहल टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप, नीति समन्वय, बाजार खुफिया जानकारी और आपातकालीन तैयारियों पर केंद्रित होगी.
ऑस्ट्रेलिया ने कहा कि हालिया वैश्विक घटनाओं और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिमों ने क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा के महत्व को और बढ़ा दिया है.
क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन पर चिंता
Quad देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स की वैश्विक सप्लाई चेन में मौजूद जोखिमों पर भी चिंता जताई. ये खनिज एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, रक्षा तकनीक और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं.
जापान ने आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने और एक्सपोर्ट प्रतिबंधों तथा सप्लाई बाधाओं से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया.
भारत-अमेरिका के बीच अहम समझौता
इसी दौरान भारत और अमेरिका ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस कदम को रणनीतिक सेक्टर्स में सप्लाई चेन को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
मुक्त और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक पर जोर
Quad देशों ने एक बार फिर मुक्त, खुला और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. भारत ने कहा कि Quad समुद्री लोकतांत्रिक देशों के बीच रणनीतिक सहयोग और विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है. समूह ने सुरक्षित समुद्री व्यापार, अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन और निर्बाध नौवहन को वैश्विक स्थिरता के लिए जरूरी बताया.
कंपनी का दावा है कि इस परियोजना से करीब 10 लाख घरों को एक दिन तक स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी. यह परियोजना चीन के बाहर एक ही स्थान पर स्थापित दुनिया की सबसे बड़ी बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं में शामिल है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन को नई रफ्तार देते हुए गुजरात के खावड़ा में अपनी बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) क्षमता बढ़ाकर 3.37 गीगावाट घंटा कर दी है. कंपनी का दावा है कि इस परियोजना से करीब 10 लाख घरों को एक दिन तक स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराई जा सकेगी. यह परियोजना चीन के बाहर एक ही स्थान पर स्थापित दुनिया की सबसे बड़ी बैटरी स्टोरेज परियोजनाओं में शामिल है.
खावड़ा प्रोजेक्ट बना बड़ा ऊर्जा हब
अडानी ग्रीन गुजरात के खावड़ा में 30 गीगावाट क्षमता वाला विशाल नवीकरणीय ऊर्जा पार्क विकसित कर रही है. कंपनी के अनुसार, इसमें से 9.9 गीगावाट क्षमता पहले ही चालू हो चुकी है. मार्च 2026 में 1.37 गीगावाट घंटा अतिरिक्त क्षमता जोड़ने के बाद कंपनी की कुल परिचालन BESS क्षमता अब बढ़कर 3.37 गीगावाट घंटा पहुंच गई है.
10 लाख घरों को मिलेगी क्लीन एनर्जी
कंपनी के मुताबिक, मौजूदा बैटरी स्टोरेज क्षमता करीब 10 लाख घरों को एक दिन तक स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने में सक्षम है. इसके अलावा यह सिस्टम 1.2 करोड़ से अधिक LED बल्बों को लगातार 10 घंटे तक बिजली देने की क्षमता रखता है. इससे नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता और ग्रिड स्थिरता दोनों को मजबूती मिलेगी.
चीन के बाहर सबसे बड़ी परियोजना
AGEL ने कहा कि खावड़ा में स्थापित यह बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजना चीन के बाहर दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल-लोकेशन बैटरी स्टोरेज परियोजना है. कंपनी ने इसे वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से लागू की गई ऊर्जा परियोजनाओं में भी शामिल बताया है.
अगले 5 साल का बड़ा विस्तार प्लान
अडानी ग्रीन आने वाले वर्षों में बैटरी स्टोरेज क्षमता को तेजी से बढ़ाने की तैयारी में है. कंपनी की योजना वित्त वर्ष 2026-27 में 10 गीगावाट घंटा से अधिक नई क्षमता जोड़ने की है. वहीं, अगले पांच वर्षों में इसे बढ़ाकर 50 गीगावाट घंटा तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.
स्वच्छ ऊर्जा बदलाव में स्टोरेज की अहम भूमिका
अडानी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक सागर अडानी ने कहा कि बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के अगले चरण में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे देश में सौर और पवन ऊर्जा क्षमता बढ़ रही है, वैसे-वैसे 24 घंटे भरोसेमंद बिजली आपूर्ति के लिए मजबूत स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी होता जा रहा है.
12 राज्यों में फैला कंपनी का नेटवर्क
अडानी ग्रीन एनर्जी सौर, पवन, हाइब्रिड और ऊर्जा भंडारण आधारित ग्रिड-कनेक्टेड परियोजनाओं के विकास और संचालन में सक्रिय है. कंपनी का कुल परिचालन नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो 19.7 गीगावाट का है, जो देश में सबसे बड़ा माना जाता है. AGEL की परियोजनाएं फिलहाल देश के 12 राज्यों में फैली हुई हैं.
विदेशों में बसे भारतीयों के साथ-साथ विदेशी उपभोक्ताओं के बीच भी भारतीय आमों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. कई देशों में भारतीय आमों को प्रीमियम सीजनल फ्रूट के तौर पर देखा जा रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय आमों की मिठास अब दुनिया भर के बाजारों में छा रही है. खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका, यूरोप और सिंगापुर तक भारतीय आमों की मांग तेजी से बढ़ रही है. बेहतर लॉजिस्टिक्स, मजबूत कोल्ड-चेन नेटवर्क और प्रीमियम क्वालिटी के चलते भारत का आम निर्यात नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है. खासतौर पर महाराष्ट्र का अल्फांसो आम अब भी विदेशी बाजारों में सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है.
भारतीय आमों की विदेशों में बढ़ी लोकप्रियता
भारत दुनिया का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है और वैश्विक उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत मानी जाती है. घरेलू खपत अधिक होने के बावजूद हाल के वर्षों में आम के निर्यात में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. विदेशों में बसे भारतीयों के साथ-साथ विदेशी उपभोक्ताओं के बीच भी भारतीय आमों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. कई देशों में भारतीय आमों को प्रीमियम सीजनल फ्रूट के तौर पर देखा जा रहा है.
एक्सपोर्ट से हुई रिकॉर्ड कमाई
एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब 29,938 मीट्रिक टन ताजे आमों का निर्यात किया. इससे देश को 470 करोड़ रुपये से अधिक का एक्सपोर्ट रेवेन्यू हासिल हुआ, जो भारतीय आमों की वैश्विक मांग में बढ़ोतरी को दर्शाता है.
सिंगापुर से ओमान तक भारतीय आमों की जबरदस्त मांग
कल यानी 25 मई को भारत में सिंगापुर उच्चायोग की ओर से किए गए एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भारतीय आमों की लोकप्रियता को और चर्चा में ला दिया. पोस्ट में कहा गया कि सिंगापुर के सुपरमार्केट्स में भारतीय आम आते ही तेजी से बिक रहे हैं और अलग-अलग राज्यों के आमों को ग्राहक हाथों-हाथ खरीद रहे हैं.
Guys, #indianmango fever has landed in Singapore. Mangoes from all states of India are flying off the shelves. Thanks to @protosphinx for sharing the story with us. HC Wong#mango #mangoexport @AgriGoI #fruit pic.twitter.com/vQWkjR5jN4
— Singapore in India (@SGinIndia) May 25, 2026
वहीं, ओमान में भारत के दूतावास (मस्कट) ने एक्स पर पोस्ट करके बताया कि राजदूत जी.वी. श्रीनिवास ने कल मस्कट स्थित लुलु हाइपरमार्केट में आयोजित ‘मैंगो मेनिया’ फेस्टिवल के 23वें संस्करण का उद्घाटन किया. इस साल के वार्षिक आयोजन में भारत की 50 से अधिक प्रीमियम आम किस्मों के साथ दुनिया भर के चुनिंदा आम प्रदर्शित किए गए. ताजे फलों के अलावा फेस्टिवल में आम से बने ताजे और प्रोसेस्ड उत्पादों की भी बड़ी श्रृंखला पेश की गई। यह आयोजन भारत-ओमान के मजबूत कृषि और FMCG व्यापार साझेदारी का उत्सव माना जा रहा है.
HE @AmbGVSrinivas inaugurated the 23rd edition of the Mango Mania festival at Lulu Hypermarket in Muscat yesterday. This year, the annual event showcased over 50 premium mango varieties from India, alongside selections from across the globe. In addition to fresh fruit, the… pic.twitter.com/it7ijRisan
— India in Oman (Embassy of India, Muscat) (@Indemb_Muscat) May 25, 2026
UAE बना सबसे बड़ा खरीदार
खाड़ी देशों में भारतीय आमों की मांग सबसे ज्यादा बनी हुई है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भारतीय आमों का सबसे बड़ा आयातक बनकर उभरा है. APEDA के मुताबिक, केवल 2024 में भारत ने UAE को 12,000 मीट्रिक टन से अधिक आम निर्यात किए, जिनकी कीमत करीब 20 मिलियन डॉलर रही.
इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, कतर और कुवैत जैसे देशों में भी भारतीय आमों की मांग लगातार बढ़ रही है.
अल्फांसो का जलवा बरकरार
महाराष्ट्र का अल्फांसो आम अपनी खास खुशबू, स्वाद और मखमली बनावट के कारण अब भी विदेशी बाजारों में सबसे लोकप्रिय किस्म बना हुआ है. यही वजह है कि इसे 'आमों का राजा' कहा जाता है. हालांकि अब दूसरी भारतीय किस्मों की भी मांग बढ़ने लगी है. गुजरात का केसर, दक्षिण भारत का तोतापरी और उत्तर भारत के लंगड़ा व चौसा आम भी विदेशी उपभोक्ताओं को खूब पसंद आ रहे हैं.
GI टैग वाले आमों पर बढ़ा फोकस
भारत अब GI-टैग्ड प्रीमियम आमों की अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग पर भी जोर दे रहा है. जुलाई 2025 में अबू धाबी में आयोजित 'इंडियन मैंगो मेनिया 2025' कार्यक्रम के जरिए भारतीय प्रीमियम आमों को वैश्विक बाजार में प्रमोट किया गया. इस तरह के आयोजनों से भारतीय आमों की ब्रांड वैल्यू और पहचान दोनों मजबूत हो रही हैं.
आधुनिक हुआ एक्सपोर्ट सिस्टम
पिछले एक दशक में भारत का आम निर्यात इकोसिस्टम काफी बदल गया है. अब निर्यातक बेहतर पैकेजिंग, आधुनिक पकाने की सुविधाएं और पश्चिमी देशों के सख्त फाइटोसैनिटरी नियमों का पालन कर रहे हैं. कोल्ड-चेन और इरेडिएशन सुविधाओं में सुधार से भी एक्सपोर्ट को बड़ी मदद मिली है.
तेजी से बढ़ती मांग के बावजूद भारतीय आम निर्यातकों के सामने कई चुनौतियां मौजूद हैं. आम का सीमित सीजन, हवाई माल ढुलाई की ऊंची लागत और कुछ देशों के कड़े आयात नियम कारोबार को प्रभावित करते हैं. फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय आमों की वैश्विक मांग और निर्यात दोनों में मजबूत बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने युगांडा और DRC में फैले इबोला प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति (PHEIC) घोषित किया है. इसके बाद भारत ने भी एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इबोला वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने हवाई यात्रा से जुड़े नियम सख्त कर दिए हैं. नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि युगांडा और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) जैसे इबोला प्रभावित देशों से आने वाले या वहां से ट्रांजिट करने वाले सभी यात्रियों के लिए सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म भरना अनिवार्य होगा. सरकार का मकसद संभावित संक्रमण को समय रहते रोकना है.
उड़ान से पहले और बाद में होगी कड़ी निगरानी
DGCA ने एयरलाइंस को निर्देश दिया है कि विमान में यात्रा के दौरान विशेष स्वास्थ्य घोषणाएं की जाएं ताकि इबोला के संभावित मामलों की जल्दी पहचान हो सके. भारत पहुंचने पर यात्रियों और क्रू सदस्यों को सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म भरकर इमिग्रेशन या स्वास्थ्य अधिकारियों के पास जमा करना होगा. यह नियम सभी यात्रियों पर लागू होगा, चाहे उनकी राष्ट्रीयता कुछ भी हो.
WHO की चेतावनी के बाद बढ़ी सतर्कता
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने युगांडा और DRC में फैले इबोला प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति (PHEIC) घोषित किया है. इसके बाद भारत ने भी एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं. DGCA के 22 मई को जारी आदेश में दक्षिण सूडान समेत DRC और युगांडा से जुड़े क्षेत्रों को हाई-रिस्क जोन माना गया है.
इन लक्षणों पर तुरंत देनी होगी जानकारी
यात्रियों को निर्देश दिए गए हैं कि अगर उन्हें बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, त्वचा पर चकत्ते या रक्तस्राव जैसे लक्षण महसूस हों तो वे तुरंत विमान क्रू को सूचित करें. भारत पहुंचने के बाद भी ऐसे लक्षण दिखाई देने पर इमिग्रेशन और मेडिकल अधिकारियों को जानकारी देना जरूरी होगा.
21 दिनों तक स्वास्थ्य पर नजर रखने के निर्देश
DGCA ने एयरलाइंस से कहा है कि यात्रियों को जागरूक किया जाए कि भारत आने के 21 दिनों के भीतर इबोला जैसे लक्षण दिखने पर वे तुरंत निर्धारित अस्पतालों में जांच कराएं और एयरपोर्ट स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचित करें.
एयरलाइंस और क्रू के लिए भी विशेष नियम
नई SOP के तहत इबोला प्रभावित क्षेत्रों में उड़ान भरने वाली एयरलाइंस को विमान में एक विशेष केबिन क्रू सदस्य नियुक्त करना होगा, जो केवल संदिग्ध मरीज की देखभाल करेगा. इसके अलावा विमान के लैंड होने के बाद पूरी तरह सैनिटाइजेशन अनिवार्य किया गया है. क्रू सदस्यों को संक्रमण रोकने और सार्वजनिक सुरक्षा उपायों को लेकर विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा.
संक्रमण रोकने पर सरकार का फोकस
सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के जरिए संक्रमण फैलने का खतरा अधिक रहता है. ऐसे में एयरपोर्ट स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य निगरानी और एयरलाइंस प्रोटोकॉल को मजबूत बनाकर किसी भी संभावित खतरे को शुरुआती स्तर पर ही रोकने की कोशिश की जा रही है.
EOW के अनुसार, यह अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ दर्ज दूसरी एफआईआर है. इससे पहले मार्च 2026 में भी इसी तरह के आरोपों को लेकर मामला दर्ज किया गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अनिल धीरुभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) से जुड़ी कंपनियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक्सिस बैंक से जुड़े ₹150 करोड़ के कथित लोन फ्रॉड मामले में समूह की कंपनियों के तत्कालीन निदेशकों और अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. आरोप है कि बैंक से लिया गया लोन तय उद्देश्य के बजाय दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया और बाद में भुगतान में डिफॉल्ट किया गया.
एक्सिस बैंक की शिकायत पर दर्ज हुआ मामला
यह मामला एक्सिस बैंक के उपाध्यक्ष प्रकाश प्रभाकर राव की शिकायत पर मुंबई के कफ परेड पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है. EOW के अनुसार, यह अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों के खिलाफ दर्ज दूसरी एफआईआर है. इससे पहले मार्च 2026 में भी इसी तरह के आरोपों को लेकर मामला दर्ज किया गया था.
किन लोगों पर लगा आरोप?
एफआईआर में रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) के तत्कालीन पूर्णकालिक निदेशकों, ADAG समूह की लाभार्थी कंपनियों के पूर्व निदेशकों और संबंधित कंपनी अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है. जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन लोगों ने बैंक को गुमराह कर वित्तीय नुकसान पहुंचाने के लिए साजिश रची और फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोन हासिल किया.
2010 से 2019 के बीच हुआ कथित घोटाला
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा मामला जनवरी 2010 से नवंबर 2019 के बीच का है. आरोप है कि कंपनियों ने RHFL की वित्तीय स्थिति को लेकर गलत और भ्रामक जानकारी दी ताकि बैंक से बड़ा लोन मंजूर कराया जा सके. जांच में यह भी सामने आया कि लोन की रकम मिलने के बाद उसे समूह से जुड़ी अन्य कंपनियों के खातों में डायवर्ट कर दिया गया.
फर्जी दस्तावेज और लोन डायवर्जन का आरोप
EOW के अनुसार, आरोपियों ने लोन स्वीकृत कराने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज जमा किए और कंपनी की वित्तीय स्थिति को वास्तविकता से बेहतर दिखाया. इसके बाद लोन राशि का इस्तेमाल मूल उद्देश्य के बजाय अन्य संबद्ध कंपनियों में किया गया. बैंक का दावा है कि इससे उसे भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा.
मार्च में भी दर्ज हुआ था मामला
मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 12 मार्च 2026 को भी इसी तरह के आरोपों के आधार पर ADAG से जुड़ी कंपनियों और उनके अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. अब दूसरी एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है.
जांच एजेंसियों की नजर में ADAG
हाल के वर्षों में अनिल अंबानी समूह की कई कंपनियां कर्ज, भुगतान डिफॉल्ट और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर जांच एजेंसियों के रडार पर रही हैं. ताजा मामला समूह की वित्तीय गतिविधियों पर बढ़ती निगरानी को दर्शाता है.
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब सिर्फ प्रयोग के स्तर पर नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर डिजिटल टेक्नोलॉजी को अपनाने लगी हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्मार्ट फैक्ट्री टेक्नोलॉजी में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं. बढ़ती लागत, श्रमिकों की कमी और साइबर खतरों के बीच कंपनियां डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए जरूरी मान रही हैं. यह जानकारी रॉकवेल ऑटोमेशन की नई रिपोर्ट में सामने आई है.
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन अब मजबूरी
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर की मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अब सिर्फ प्रयोग के स्तर पर नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर डिजिटल टेक्नोलॉजी को अपनाने लगी हैं. सर्वे में शामिल 90 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी के दौर में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जरूरी हो गया है. रिपोर्ट 17 बड़े मैन्युफैक्चरिंग देशों के 1,560 निर्णय लेने वाले अधिकारियों के जवाबों पर आधारित है, जिसमें भारत भी शामिल है.
बढ़ती लागत और साइबर खतरे बड़ी चुनौती
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले 12 महीनों में ऊर्जा लागत, साइबर सुरक्षा जोखिम और कुशल कर्मचारियों की कमी कंपनियों की ग्रोथ के सामने सबसे बड़ी बाधा बन सकती है. इन चुनौतियों का जिक्र 34 प्रतिशत प्रतिभागियों ने किया. वहीं 33 प्रतिशत कंपनियों ने महंगाई और आर्थिक अस्थिरता को बड़ा खतरा बताया. इसके अलावा सप्लाई चेन में रुकावट और कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी चिंता का विषय बने हुए हैं.
भारत में स्मार्ट फैक्ट्री मॉडल को बढ़ावा
भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, केमिकल और इंडस्ट्रियल गुड्स जैसे सेक्टर्स में उत्पादन बढ़ाने की कोशिश हो रही है. ऐसे में कंपनियां उत्पादकता बढ़ाने, लागत घटाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए स्मार्ट फैक्ट्री मॉडल की ओर तेजी से बढ़ रही हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियां अब केवल पायलट प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं हैं. लगातार दूसरे साल ऑपरेटिंग बजट का करीब एक-तिहाई हिस्सा इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी अपनाने पर खर्च किया जा रहा है. सिर्फ 18 प्रतिशत कंपनियां अभी शुरुआती परीक्षण चरण में हैं, जबकि 59 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग टेक्नोलॉजी पहले से उनके ऑपरेशन में सक्रिय रूप से इस्तेमाल हो रही है.
AI बना सबसे बड़ा गेमचेंजर
रिपोर्ट में AI और मशीन लर्निंग को सबसे प्रभावी टेक्नोलॉजी बताया गया है. करीब 48 प्रतिशत प्रतिभागियों ने AI और मशीन लर्निंग को बिजनेस रिजल्ट सुधारने वाला सबसे बड़ा कारक माना. रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल 34 प्रतिशत औद्योगिक ऑपरेशन AI आधारित सिस्टम से जुड़े हुए हैं और 2030 तक यह आंकड़ा बढ़कर 54 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.
कंपनियों का कहना है कि AI का इस्तेमाल क्वालिटी सुधारने, साइबर सुरक्षा मजबूत करने और उत्पादन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने में तेजी से बढ़ रहा है.
क्वालिटी और लागत पर सबसे ज्यादा फोकस
भारतीय कंपनियां घरेलू और निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए डिजिटल निवेश को सीधे बिजनेस लक्ष्यों से जोड़ रही हैं. सर्वे में 46 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि उनका सबसे बड़ा लक्ष्य उत्पाद की गुणवत्ता सुधारना है. वहीं 40 प्रतिशत कंपनियां लागत कम करने और 36 प्रतिशत जोखिम घटाने पर फोकस कर रही हैं.
डेटा का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रहीं कंपनियां
हालांकि रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कंपनियां डिजिटल निवेश का पूरा फायदा नहीं उठा पा रही हैं. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जुटाए गए डेटा का सिर्फ 43 प्रतिशत हिस्सा ही प्रभावी तरीके से इस्तेमाल हो रहा है. कई कंपनियों को अलग-अलग सिस्टम से आने वाले डेटा को जोड़ने और उसका सही विश्लेषण करने में दिक्कत हो रही है.
साइबर हमलों का खतरा बढ़ा
डिजिटल फैक्ट्रियों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा भी बड़ी चिंता बनती जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल में 46 प्रतिशत मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां किसी न किसी साइबर हमले का शिकार हुईं. सबसे ज्यादा खतरा IT सिस्टम, एंटरप्राइज नेटवर्क और IT तथा ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी के इंटीग्रेशन पॉइंट्स पर देखा गया.
कर्मचारियों के कौशल में बदलाव
ऑटोमेशन और AI बढ़ने के साथ कंपनियां कर्मचारियों के कौशल को भी नया रूप दे रही हैं. रिपोर्ट में कहा गया कि 40 प्रतिशत कंपनियों ने पिछले एक साल में कर्मचारियों को नई तकनीक के अनुसार ट्रेनिंग दी या री-स्किल किया. वहीं, 93 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग आने वाले वर्षों में वर्कफोर्स स्ट्रक्चर को पूरी तरह बदल देगी.
इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन में सबसे बड़ा हिस्सा ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर का रहा. इस सेक्टर में कुल 1,459 परियोजनाएं चल रही हैं, जिनकी संशोधित लागत ₹23.34 लाख करोड़ आंकी गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देशभर में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की लागत लगातार बढ़ती जा रही है. सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ताजा फ्लैश रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2026 तक 150 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले केंद्रीय क्षेत्र के प्रोजेक्ट्स में कुल ₹5.65 लाख करोड़ का कॉस्ट ओवररन दर्ज किया गया है.
1,981 परियोजनाओं की लागत अनुमान से कहीं ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार, देश में 17 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के तहत कुल 1,981 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की निगरानी की जा रही है. इन परियोजनाओं की शुरुआती अनुमानित लागत ₹37,12,662 करोड़ थी, जो अब बढ़कर ₹42,78,402 करोड़ हो गई है. अब तक इन प्रोजेक्ट्स पर करीब ₹20.36 लाख करोड़ खर्च किए जा चुके हैं, जो संशोधित लागत का लगभग 47.59 प्रतिशत है. मंत्रालय का कहना है कि परियोजनाओं पर काम लगातार जारी है और कई प्रोजेक्ट्स तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
40% प्रोजेक्ट्स में 80% से ज्यादा काम पूरा
MoSPI के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 801 परियोजनाओं यानी 40 प्रतिशत प्रोजेक्ट्स में 80 प्रतिशत से अधिक फिजिकल प्रोग्रेस दर्ज की गई है. वहीं 277 परियोजनाएं ऐसी हैं, जिनमें 80 प्रतिशत से ज्यादा वित्तीय कार्य पूरा हो चुका है.
ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर सबसे आगे
इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन में सबसे बड़ा हिस्सा ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर का रहा. इस सेक्टर में कुल 1,459 परियोजनाएं चल रही हैं, जिनकी संशोधित लागत ₹23.34 लाख करोड़ आंकी गई है. इन परियोजनाओं में सड़क, रेलवे, एविएशन, शिपिंग और शहरी परिवहन से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं. इससे साफ है कि सरकार परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने पर लगातार फोकस कर रही है.
ऊर्जा क्षेत्र में भी भारी निवेश
ऊर्जा क्षेत्र दूसरे स्थान पर रहा, जहां 221 परियोजनाओं पर काम चल रहा है. इनकी कुल संशोधित लागत ₹11.30 लाख करोड़ पहुंच गई है. इन प्रोजेक्ट्स में तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर, बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और एनर्जी स्टोरेज से जुड़े कार्य शामिल हैं.
सड़क परिवहन मंत्रालय के पास सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट
मंत्रालयवार आंकड़ों में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय सबसे आगे रहा. इसके तहत 1,137 परियोजनाएं चल रही हैं, जो कुल प्रोजेक्ट्स का 57 प्रतिशत हिस्सा हैं. इनकी संशोधित लागत ₹10.81 लाख करोड़ बताई गई है. वहीं, रेलवे मंत्रालय 260 परियोजनाओं पर काम कर रहा है, जिनकी संशोधित लागत ₹8.69 लाख करोड़ है. इसके अलावा कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, बिजली, आवास एवं शहरी मामलों और जल संसाधन मंत्रालयों की भी बड़ी हिस्सेदारी रही.
मंगलवार 26 मई की सुबह 6 बजे से नई कीमतें लागू हो गई हैं. ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG की कीमत 81.09 रुपये से बढ़कर 83.09 रुपये प्रति किलो हो गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक ऊर्जा कीमतों में लगातार उछाल का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है. राजधानी दिल्ली समेत कई शहरों में एक बार फिर CNG महंगी कर दी गई है. पिछले 15 दिनों में चौथी बार हुई इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG की कीमत 83 रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गई है. पेट्रोल-डीजल के बाद अब CNG के दाम बढ़ने से ऑटो, टैक्सी और निजी वाहन चलाने वालों का खर्च और बढ़ सकता है.
दिल्ली में CNG के दाम फिर बढ़े
मंगलवार 26 मई की सुबह 6 बजे से नई कीमतें लागू हो गई हैं. ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में CNG की कीमत 81.09 रुपये से बढ़कर 83.09 रुपये प्रति किलो हो गई है. इससे पहले 23 मई को 1 रुपये और 15 मई को 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई थी. यानी मई महीने में अब तक CNG कुल 6 रुपये प्रति किलो महंगी हो चुकी है.
NCR और मुंबई में भी बढ़े दाम
दिल्ली-एनसीआर के कई शहरों में भी CNG के रेट बढ़ाए गए हैं. नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में अब CNG 88.70 रुपये प्रति किलो मिल रही है. वहीं मुंबई में इसकी कीमत बढ़कर 84 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है.
आम लोगों की जेब पर बढ़ेगा असर
CNG महंगी होने का सीधा असर ऑटो, टैक्सी और निजी वाहनों के खर्च पर पड़ेगा. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में किराए और ट्रांसपोर्ट लागत भी बढ़ सकती है, जिससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा.
पेट्रोल-डीजल भी लगातार हो रहे महंगे
इससे पहले सोमवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली थी. सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया था. इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है.
सबसे अहम बात यह है कि बीते दो हफ्तों से भी कम समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह चौथी बढ़ोतरी रही है. 15 मई से अब तक दोनों ईंधनों के दाम करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं.
नए फ्रेमवर्क के तहत बाजार में इंट्राडे मूवमेंट के दौरान जरूरत पड़ने पर तुरंत नए स्ट्राइक प्राइस जोड़े जा सकेंगे. इससे ट्रेडर्स को तेजी से बदलते बाजार में भी बेहतर ट्रेडिंग और रिस्क मैनेजमेंट का विकल्प मिलेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में बढ़ती अस्थिरता और तेज उतार-चढ़ाव के बीच बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (SEBI) ने ऑप्शंस ट्रेडिंग को ज्यादा व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सेबी ने नए स्ट्राइक प्राइस फ्रेमवर्क का प्रस्ताव दिया है, जिसका मकसद ट्रेडर्स को हर परिस्थिति में बेहतर हेजिंग विकल्प उपलब्ध कराना और ब्रोकर्स पर तकनीकी दबाव कम करना है. इस प्रस्ताव के लागू होने से इक्विटी, कमोडिटी और करंसी ऑप्शंस सेगमेंट में ट्रेडिंग अनुभव पहले से ज्यादा आसान और व्यवस्थित हो सकता है.
क्या है SEBI का नया प्रस्ताव?
सेबी ने ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए स्ट्राइक प्राइस तय करने और उन्हें लगातार मैनेज करने के लिए नया फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है. इसके तहत बाजार में ‘इन-द-मनी’ और ‘आउट-ऑफ-द-मनी’ कॉन्ट्रैक्ट्स की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी.
इसके अलावा मौजूदा बाजार कीमतों के आसपास उपलब्ध स्ट्राइक प्राइस की रोजाना समीक्षा की जाएगी, ताकि ट्रेडर्स को हर समय जरूरी ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स मिल सकें. वहीं बाजार स्तर से काफी दूर चले गए स्ट्राइक प्राइस को समय-समय पर हटाने का भी प्रावधान होगा.
बड़े उतार-चढ़ाव में ट्रेडर्स को कैसे मिलेगा फायदा?
सेबी के मुताबिक कई बार बाजार में अचानक तेज उतार-चढ़ाव के कारण कीमतें उपलब्ध स्ट्राइक प्राइस की सीमा से बाहर चली जाती हैं. ऐसी स्थिति में ट्रेडर्स के पास हेजिंग या नई पोजीशन लेने के लिए सही ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध नहीं रहते.
नए फ्रेमवर्क के तहत बाजार में इंट्राडे मूवमेंट के दौरान जरूरत पड़ने पर तुरंत नए स्ट्राइक प्राइस जोड़े जा सकेंगे. इससे ट्रेडर्स को तेजी से बदलते बाजार में भी बेहतर ट्रेडिंग और रिस्क मैनेजमेंट का विकल्प मिलेगा.
ब्रोकर्स और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को भी राहत
सेबी ने माना कि स्ट्राइक प्राइस में बार-बार बदलाव होने पर ब्रोकर्स और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स को लगातार सिस्टम अपडेट करने पड़ते हैं, जिससे तकनीकी खर्च बढ़ जाता है. नए प्रस्ताव में इस बात का ध्यान रखा गया है कि इंट्राडे बदलावों के दौरान ब्रोकर्स के सिस्टम में बड़े तकनीकी बदलाव की जरूरत न पड़े. इससे ऑपरेशनल बोझ और लागत दोनों कम हो सकती हैं.
फिलहाल कैसे काम करता है सिस्टम?
अभी लंबी अवधि के इंडेक्स ऑप्शंस के लिए ही सीमित नियामकीय ढांचा मौजूद है. अलग-अलग स्टॉक एक्सचेंज अपने हिसाब से स्ट्राइक इंटरवल मैनेज करते हैं. स्ट्राइक प्राइस वह कीमत होती है, जिस पर ऑप्शंस ट्रेडर को किसी सिक्योरिटी को खरीदने या बेचने का अधिकार मिलता है. वहीं स्ट्राइक इंटरवल दो स्ट्राइक प्राइस के बीच का अंतर होता है, जिसे बाजार में लिक्विडिटी और प्रोडक्ट उपलब्धता के संतुलन के हिसाब से तय किया जाता है.
Nifty ऑप्शंस में अभी क्या स्थिति है?
उद्योग के जानकारों के मुताबिक मौजूदा स्ट्राइक प्राइस सिस्टम बाजार के बड़े उतार-चढ़ाव को काफी हद तक कवर करता है. उदाहरण के तौर पर NSE Nifty 50 ऑप्शंस सीरीज में 26 मई एक्सपायरी के लिए 20,100 से 27,250 तक कुल 144 स्ट्राइक प्राइस उपलब्ध हैं, जबकि निफ्टी का हालिया बंद स्तर करीब 24,032 था.
हालांकि ट्रेडिंग गतिविधियां मुख्य रूप से ‘एट-द-मनी’ और ‘नियर आउट-ऑफ-द-मनी’ कॉन्ट्रैक्ट्स के आसपास ही केंद्रित रहती हैं. सबसे ज्यादा पुट ओपन इंटरेस्ट 24,000 स्ट्राइक के पास देखा गया, जबकि कॉल साइड पर 24,500 और 25,000 स्ट्राइक पर ज्यादा गतिविधि रही.
सभी ऑप्शन सेगमेंट पर लागू होगा फ्रेमवर्क
सेबी का प्रस्तावित फ्रेमवर्क इक्विटी, करंसी और कमोडिटी समेत सभी ऑप्शन सेगमेंट पर लागू होगा. बाजार में लिक्विडिटी और भागीदारी के स्तर के हिसाब से अलग-अलग कैटेगरी में नियम और फॉर्मूले अलग हो सकते हैं. सेबी ने इस प्रस्ताव पर 15 जून तक बाजार प्रतिभागियों और आम लोगों से सुझाव मांगे हैं.
मंगलवार को BSE सेंसेक्स 1073.61 अंक चढ़कर 76,488.96 पर बंद हुआ था. वहीं NSE निफ्टी 312.40 अंक की बढ़त के साथ 24,031.70 के स्तर पर पहुंच गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार रैली देखने को मिली थी. सेंसेक्स 1000 अंकों से ज्यादा उछलकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी ने भी 24,000 का अहम स्तर पार किया था. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीद और मजबूत ग्लोबल संकेतों ने बाजार में खरीदारी को बढ़ावा दिया. अब निवेशकों की नजर 26 मई के कारोबार पर है, जहां तिमाही नतीजे, बड़े कॉर्पोरेट अपडेट्स और ग्लोबल ट्रिगर्स बाजार की दिशा तय कर सकते हैं. तो आइए जानते हैं आज कौन से शेयर फोकस में रहने वाले हैं.
25 मई को सेंसेक्स-निफ्टी में आई थी बड़ी तेजी
सोमवार को कारोबार शुरू होते ही बाजार में खरीदारी का माहौल बन गया था. दिनभर तेजी कायम रही और अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 1073.61 अंक चढ़कर 76,488.96 पर बंद हुआ था. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 312.40 अंक की बढ़त के साथ 24,031.70 के स्तर पर पहुंच गया था. बाजार में आई इस तेजी से बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर करीब 469 लाख करोड़ रुपये हो गया था. निवेशकों को एक ही दिन में लगभग 6 लाख करोड़ रुपये का फायदा हुआ था.
कच्चे तेल में गिरावट से बाजार को मिली राहत
शेयर बाजार की इस तेजी का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट रही थी. 25 मई को सुबह ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड करीब 5 से 6 प्रतिशत तक टूट गए थे. कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड करीब 97.78 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड 91.19 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा था. भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में नरमी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है.
बाजार में तेजी के 5 बड़े कारण
1. अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीद: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए थे कि अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने को लेकर समझौते पर काफी हद तक बातचीत हो चुकी है. इस खबर से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना था.
2. ग्लोबल मार्केट्स में शानदार रैली: एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी जोरदार तेजी देखने को मिली थी. जापान का निक्केई इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर पहली बार 65,000 के पार पहुंच गया था. वहीं चीन और ताइवान के बाजारों में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली थी. अमेरिकी फ्यूचर्स बाजार में मजबूती ने भी भारतीय निवेशकों का भरोसा बढ़ाया था.
3. रुपये में मजबूती: पिछले सप्ताह रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद भारतीय रुपया 25 मई को डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ था. रुपया करीब 0.37 प्रतिशत की मजबूती के साथ 95.34 प्रति डॉलर पर खुला था. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और RBI के हस्तक्षेप से रुपये को सहारा मिला था, जिससे विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ.
4. बॉन्ड यील्ड में नरमी: अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आने से निवेशकों का रुझान फिर शेयर बाजार की ओर बढ़ा था. 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड घटकर 4.558 प्रतिशत पर आ गई थी. विशेषज्ञों के मुताबिक बॉन्ड यील्ड कम होने पर इक्विटी बाजार निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक बन जाता है.
5. घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी: घरेलू निवेशकों ने बाजार में लगातार खरीदारी जारी रखी थी, जिससे बाजार को मजबूत सपोर्ट मिला. बैंकिंग, आईटी, ऑटो और मेटल शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली थी.
FIIs की बिकवाली अब भी चिंता
हालांकि बाजार में तेजी रही, लेकिन विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली चिंता का विषय बनी हुई है. जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजिस्ट V. K. Vijayakumar के मुताबिक 23 मई तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की कुल बिकवाली 2.22 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच चुकी थी. यह आंकड़ा पूरे साल 2025 की कुल बिकवाली से भी अधिक है.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है और वैश्विक तनाव कम होता है, तो भारतीय बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है. हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता अब भी बाजार के लिए बड़े जोखिम बने हुए हैं. मंगलवार के कारोबार में कई बड़े शेयर फोकस में रहने वाले हैं. ONGC, Siemens, IRCTC और Bharat Electronics जैसी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर निवेशकों की नजर रहेगी, वहीं Venus Pipes, Marksans Pharma, Morepen Labs, Gujarat Gas, Senco Gold, Timex Group India और Procter & Gamble Health समेत कई कंपनियां भी अपने Q4 रिजल्ट जारी करेंगी. City Union Bank ने 1:3 बोनस शेयर के लिए 12 जून को रिकॉर्ड डेट तय की है, जबकि Bharat Electronics को 608 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले हैं. Lemon Tree Hotels ने तमिलनाडु के कुंभकोणम में नया होटल साइन किया है. LG Electronics को महाराष्ट्र सरकार से 882 करोड़ रुपये तक के इंसेंटिव पैकेज का फायदा मिल सकता है. Voltas ने डिविडेंड के लिए 12 जून रिकॉर्ड डेट घोषित की है. वहीं NLC India और NPCIL ने न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट्स के लिए जॉइंट वेंचर बनाने का फैसला किया है. Raymond ने प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए 330 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी दी है, जबकि Paytm Europe में 9 मिलियन यूरो का अतिरिक्त निवेश करेगी. दूसरी ओर JSW Energy ने QIP के जरिए 4,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जिसमें SBI Equity Hybrid Fund और GQG Partners जैसे बड़े निवेशकों ने हिस्सा लिया है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)