इस हफ्ते है IPO की बहार, इसलिए पैसा रखें तैयार, निवेश से पहले देखें पूरी डिटेल

अगर आप आईपीओ में निवेश करना पसंद करते हैं तो इस हफ्ते आपके पास कमाई का मौका है. इस हफ्ते 9 कंपनियों के आईपीओ खुलने जा रहे हैं.

Last Modified:
Monday, 24 June, 2024
BWHindi

IPO में निवेश करने वालों के लिए इस हफ्ते बड़ा मौका है. इस सप्ताह एक या दो नहीं पूरे 9 नए आईपीओ खुलने जा रहे हैं. इन आईपीओ में निवेश करके आप अच्छी कमाई कर सकते हैं. यहां हम इन आईपीओ के बारे में आपको पूरी जानकारी देने जा रहे हैं. जिससे आपको किसी तरह की कोई समस्या का सामना न करना पड़े। इन आईपीओ में मेनबोर्ड सेगमेंट के 2 इश्यू हैं. इस सप्ताह शेयर बाजार में 11 कंपनियों के शेयर की लिस्टिंग भी होगी. आईए आपको बताते हैं इस सप्ताह खुलने जा रहे आईपीओ के बारे में.

एलॉइड ब्लेंडर्स IPO

अगले पांच दिनों में लॉन्च होने जा रहे IPO में एलॉइड ब्लेंडर्स का आईपीओ प्रमुख है. यह आईपीओ 25 जून को खुलेगा और 27 जून तक सब्सक्राइब किया जा सकेगा. इस आईपीओ में 1000 करोड़ रुपये के शेयरों का फ्रेश इश्यू और 500 करोड़ रुपये के शेयरों का ऑफर फोर सेल शामिल है. इस तरह यह आईपीओ ओवरऑल 1,500 करोड़ रुपये का होने वाला है. इसका प्राइस बैंड 267 से 281 रुपये का है.

इस सप्ताह आ रहे अन्य आईपीओ

सप्ताह के दौरान लॉन्च होने जा रहे अन्य इश्यू में 171 करोड़ रुपये का Vraj Iron and Steel, 64.32 करोड़ रुपये का Shivalic Power Control आईपीओ, 28.05 करोड़ रुपये का Sylvan Plyboard आईपीओ, 30.46 करोड़ रुपये का Mason Infratech आईपीओ, 16.05 करोड़ रुपये का Visaman Global Sales आईपीओ, 23.11 करोड़ रुपये का AKIKO Global Services आईपीओ, 22.76 करोड़ रुपये का Divine Power एनर्जी आईपीओ, 113.16 करोड़ रुपये का Petro Carbon and Chemicals आईपीओ और 22.08 करोड़ रुपये का Diensten Tech आईपीओ शामिल हैं.


नए IPO 
    •    मेनबोर्ड:
         •    एलाइड ब्लेंडर्स (25 जून – 27 जून)

    •    एसएमई प्लेटफॉर्म:
        •    व्रज आयरन एंड स्टील (26 जून – 30 जून)
        •    शिवालिक पावर कंट्रोल (27 जून – 30 जून)
        •    सिल्वन प्लेबोर्ड (27 जून – 30 जून)
        •    मेसन इंफ्राट्रैक (27 जून – 30 जून)
        •    विसमन ग्लोबल सेल्स (27 जून – 30 जून)
        •    अकीको ग्लोबल सर्विसेज (28 जून – 30 जून)
        •    डिवाइन पावर एनर्जी (28 जून – 30 जून)
        •    पेट्रो कार्बन एंड केमिकल्स (29 जून – 30 जून)

इन शेयरों की होने जा रही है लिस्टिंग

इस सप्ताह के दौरान शेयर बाजार में 11 नए शेयरों की लिस्टिंग भी होने जा रही है. उनमें Stanley Lifestyles, United Cotfab, GP Eco Solutions India, Falcon TechnoProjects India, Durlax Top Surface, GEM Enviro Management, Winny Immigration and Education Services, Dindigul Farm Product और Medicamen Organics आदि शामिल हैं.
 


किसानों के लिए अमित शाह का बड़ा ऐलान, दलहन-तिलहन का एक-एक दाना खरीदेगी NAFED-NCCF

सहकारिता मंत्री ने कहा कि फसल खरीद के बाद किसानों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने निर्देश दिया कि खरीद के 48 घंटे के भीतर किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान किया जाए.

Last Modified:
Wednesday, 24 June, 2026
BWHindia

किसानों की आय बढ़ाने और बिचौलियों की भूमिका खत्म करने के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने नाफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) को निर्देश दिया है कि वे किसानों से दलहन और तिलहन की पूरी उपज सीधे खरीदें. साथ ही, फसल खरीद के 48 घंटे के भीतर किसानों के बैंक खातों में भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है. इसके अलावा नाफेड की चार नई डिजिटल और कल्याणकारी पहलों की भी शुरुआत की गई है.

किसानों से सीधे होगी खरीद

नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि देश की प्रमुख सहकारी संस्थाएं नाफेड और एनसीसीएफ अब किसानों से सीधे दलहन और तिलहन की खरीद करेंगी. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसानों की उपज का एक-एक दाना खरीदा जाए और खरीद प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका को समाप्त किया जाए. उनका कहना था कि इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी.

48 घंटे में खाते में पहुंचेगा पैसा

सहकारिता मंत्री ने कहा कि फसल खरीद के बाद किसानों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने निर्देश दिया कि खरीद के 48 घंटे के भीतर किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान किया जाए. इस व्यवस्था से किसानों की नकदी संबंधी समस्याएं कम होंगी और उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी.

दो साल में देशभर में लागू होगी व्यवस्था

अमित शाह ने इस योजना के लिए दो वर्ष की समयसीमा तय की है. उनका लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों के भीतर देश का हर किसान अपनी दलहन और तिलहन की फसल सीधे नाफेड और एनसीसीएफ को बेच सके. इस प्रक्रिया में किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं होगी और भुगतान सीधे किसानों के खातों में पहुंचेगा.

MSP मिलने से बढ़ेगी दलहन की खेती

अमित शाह ने कहा कि किसानों को जब न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बेचने का भरोसा मिलेगा तो दलहन और तिलहन की खेती का रकबा भी बढ़ेगा. उन्होंने विश्वास जताया कि इससे देश दालों के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी.

नाफेड की चार नई पहलों की शुरुआत

किसानों और सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अमित शाह ने नाफेड की चार नई डिजिटल और कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की.

1. NAFEX.in पोर्टल- यह डिजिटल ऑक्शन प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए खरीदी गई दलहन और तिलहन की पारदर्शी और ऑनलाइन नीलामी की जा सकेगी.

2. DRISHTI पोर्टल- यह रियल-टाइम इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम है. इसके माध्यम से देशभर में दालों और तिलहन के स्टॉक, भंडारण और उपलब्धता की निगरानी की जा सकेगी.

3. ERP पोर्टल- यह पोर्टल नाफेड के आंतरिक कामकाज और संसाधन प्रबंधन को मजबूत करेगा. इससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा.

4. NAFED-KALYAN फंड-इस योजना के तहत नाफेड अपने शुद्ध लाभ का एक प्रतिशत हिस्सा किसान परिवारों के बच्चों की उच्च शिक्षा और छात्रवृत्ति पर खर्च करेगा.

नाफेड की बदली तस्वीर

अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2014 में नाफेड आर्थिक संकट से जूझ रहा था और बंद होने की स्थिति में पहुंच गया था. लेकिन सरकार के प्रयासों से संस्था ने मजबूत वापसी की है. उन्होंने बताया कि नाफेड का वार्षिक कारोबार अब 30,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जबकि शुद्ध लाभ 405 करोड़ रुपये को पार कर गया है. वर्तमान में 74 लाख से अधिक किसान इससे जुड़े हुए हैं.

50,000 करोड़ रुपये टर्नओवर का लक्ष्य

सरकार ने नाफेड के लिए 50,000 करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार का लक्ष्य तय किया है. सरकार का मानना है कि डिजिटल सुधार, पारदर्शी खरीद व्यवस्था और किसानों से सीधे जुड़ाव के जरिए यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.

 


भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे आकर्षक बिजनेस डेस्टिनेशन: WEF रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका 65 प्रतिशत समर्थन के साथ पहले स्थान पर रहा. वहीं भारत 56 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर रहा.

Last Modified:
Wednesday, 24 June, 2026
BWHindia

भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और सप्लाई चेन में बदलाव के दौर में भारत दुनिया की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए दूसरा सबसे आकर्षक कारोबारी बाजार बनकर उभरा है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ताजा रिपोर्ट में भारत को अमेरिका के बाद दूसरा स्थान मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक, तेज आर्थिक वृद्धि, विशाल घरेलू बाजार और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियां भारत को वैश्विक कंपनियों की पहली पसंद बना रही हैं.

WEF रिपोर्ट में भारत को बड़ी कामयाबी

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘चीफ इकोनॉमिस्ट्स आउटलुक मई 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए दुनिया का दूसरा सबसे आकर्षक कारोबारी माहौल बनकर उभरा है. रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब दुनिया भू-राजनीतिक संघर्ष, महंगाई और सप्लाई चेन में बदलाव जैसी चुनौतियों से जूझ रही है. सर्वे में शामिल प्रमुख वैश्विक संस्थानों के 38 मुख्य अर्थशास्त्रियों में से 56 प्रतिशत ने भारत को अगले 12 महीनों के लिए अपनी शीर्ष तीन पसंदीदा कारोबारी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया.

अमेरिका पहले, भारत दूसरे स्थान पर

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका 65 प्रतिशत समर्थन के साथ पहले स्थान पर रहा. वहीं भारत 56 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर रहा. दक्षिण-पूर्व एशिया को 50 प्रतिशत, यूरोप को 44 प्रतिशत और चीन को 35 प्रतिशत समर्थन मिला. इस तरह भारत ने कई प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ते हुए निवेशकों का भरोसा हासिल किया है.

भारत की विकास कहानी बना रही आकर्षण का केंद्र

WEF ने कहा कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, विशाल उपभोक्ता बाजार और नीतिगत सुधारों ने उसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत लगातार व्यापार और निवेश के नए रास्ते खोल रहा है तथा आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा रहा है. नई व्यापारिक साझेदारियों और वैश्विक आर्थिक एकीकरण की दिशा में भारत के प्रयासों ने भी निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है.

भू-राजनीतिक तनाव बदल रहे निवेश के फैसले

रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने निवेश गंतव्यों पर दोबारा विचार कर रही हैं. कंपनियां अब केवल तेज विकास दर ही नहीं, बल्कि स्थिरता, सप्लाई चेन की मजबूती और रणनीतिक लचीलापन भी देख रही हैं. WEF ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने में सक्षम अर्थव्यवस्थाओं को कंपनियां अधिक प्राथमिकता दे रही हैं और भारत इस मामले में मजबूत स्थिति में दिखाई देता है.

सप्लाई चेन बदलाव से दक्षिण-पूर्व एशिया को भी फायदा

रिपोर्ट में कहा गया है कि सप्लाई चेन के विविधीकरण से दक्षिण-पूर्व एशिया को भी लाभ मिल रहा है. करीब आधे अर्थशास्त्रियों ने अगले एक वर्ष में क्षेत्र में मध्यम वृद्धि की उम्मीद जताई है, जबकि 21 प्रतिशत ने मजबूत वृद्धि की संभावना व्यक्त की.

हालांकि ऊर्जा और खाद्य आयात से जुड़ी महंगाई तथा सस्ते चीनी उत्पादों के बढ़ते आयात को क्षेत्र के लिए चुनौती बताया गया है.

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल

WEF ने चेतावनी दी है कि जारी वैश्विक संघर्ष और व्यापार मार्गों में व्यवधान कई क्षेत्रों में आर्थिक जोखिम बढ़ा रहे हैं. मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के लिए आर्थिक दृष्टिकोण काफी कमजोर हुआ है.

रिपोर्ट के अनुसार, 88 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने इस क्षेत्र में अगले एक वर्ष के दौरान कमजोर या बेहद कमजोर वृद्धि की आशंका जताई है. वहीं, जापान और कई उभरते बाजारों में भी विकास दर को लेकर चिंता बनी हुई है.

निवेश और विस्तार के लिए भारत बना उम्मीद की किरण

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक ऐसे रणनीतिक बाजार के रूप में उभर रहा है, जो उन्हें विकास के अवसरों के साथ-साथ मजबूत सप्लाई चेन और स्थिर कारोबारी माहौल भी उपलब्ध करा सकता है. जैसे-जैसे कंपनियां अपनी वैश्विक रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं, भारत अंतरराष्ट्रीय निवेश और कॉरपोरेट विस्तार का बड़ा केंद्र बनने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है.

 


गौतम अडानी का पावर सेक्टर में ₹2 लाख करोड़ का दांव, 45 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य

पारंपरिक बिजली उत्पादन के अलावा अडानी समूह अब स्वच्छ और दीर्घकालिक ऊर्जा स्रोतों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है.

Last Modified:
Wednesday, 24 June, 2026
BWHindia

देश में तेजी से बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए अडानी समूह ने ऊर्जा क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी निवेश योजनाओं में से एक का ऐलान किया है. समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने बताया कि अडानी पावर अगले पांच वर्षों में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी. इस निवेश के जरिए कंपनी अपनी बिजली उत्पादन क्षमता को 45 गीगावाट तक पहुंचाने के साथ-साथ परमाणु और जलविद्युत ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाएगी.

बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर फोकस

देश में बढ़ती गर्मी, औद्योगिक विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की तेज रफ्तार के बीच बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है. इसी बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए अडानी समूह ने बड़ा विस्तार कार्यक्रम तैयार किया है. समूह की वार्षिक आम बैठक (AGM) में गौतम अडानी ने घोषणा की कि अडानी पावर अगले पांच वर्षों में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी. इस निवेश का मुख्य उद्देश्य कंपनी की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 45 गीगावाट तक पहुंचाना है.

अगले पांच वर्षों के लिए तैयार हुआ मेगा प्लान

अडानी समूह ऊर्जा, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में लगातार विस्तार कर रहा है. हाल ही में समाप्त वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान समूह ने करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) किया है. कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में औद्योगिक गतिविधियों, शहरीकरण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के कारण बिजली की मांग में और तेजी आएगी. ऐसे में उत्पादन क्षमता बढ़ाना उसकी दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा है.

परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ी एंट्री

पारंपरिक बिजली उत्पादन के अलावा अडानी समूह अब स्वच्छ और दीर्घकालिक ऊर्जा स्रोतों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है. गौतम अडानी ने बताया कि समूह ने ‘अडानी एटॉमिक एनर्जी’ के माध्यम से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में कदम रखा है. इसके लिए कंपनी ने उपयुक्त भूमि की पहचान भी कर ली है. कंपनी ने वर्ष 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु बिजली उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है.

भूटान के साथ हाइड्रो पावर परियोजनाएं

अडानी समूह नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है. कंपनी ने भूटान की ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर हिमालयी क्षेत्र में 5,000 मेगावाट की जलविद्युत परियोजनाएं विकसित करने की योजना बनाई है. इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना और क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग को मजबूत करना है.

रिकॉर्ड कमाई से मिली निवेश की ताकत

इतने बड़े निवेश कार्यक्रम के पीछे समूह की मजबूत वित्तीय स्थिति भी बड़ी वजह है. वित्त वर्ष 2025-26 में अडानी समूह का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर 2.92 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इस दौरान समूह का EBITDA 94,834 करोड़ रुपये रहा, जबकि कर भुगतान के बाद मुनाफा करीब 13.9 प्रतिशत बढ़कर 46,376 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी के पास लगभग 67,995 करोड़ रुपये का मजबूत नकदी प्रवाह भी मौजूद है.

भारत के ऊर्जा भविष्य पर बड़ा दांव

अडानी समूह का यह निवेश केवल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है. कंपनी पारंपरिक, परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा के जरिए भारत की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की तैयारी कर रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना तय समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ती है, तो यह देश के बिजली क्षेत्र में निजी निवेश का सबसे बड़ा उदाहरण बन सकती है.
 


सेबी का नया विज्ञापन कोड: सेलिब्रिटी करेंगे ब्रांड प्रमोट, स्कीम बेचने पर रोक

नए नियमों के तहत अब स्टॉक ब्रोकर, म्यूचुअल फंड हाउस, इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और पोर्टफोलियो मैनेजर अपने कॉरपोरेट ब्रांड के प्रचार के लिए सेलिब्रिटी की सेवाएं ले सकेंगे.

Last Modified:
Wednesday, 24 June, 2026
BWHindia

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेश क्षेत्र के विज्ञापन नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है. नए प्रस्ताव के तहत स्टॉक ब्रोकर, म्यूचुअल फंड हाउस, निवेश सलाहकार और पोर्टफोलियो मैनेजर अब अपने ब्रांड के प्रचार के लिए सेलिब्रिटी और ब्रांड एंबेसडर नियुक्त कर सकेंगे. हालांकि, ये हस्तियां किसी विशेष निवेश उत्पाद, स्कीम या शेयर में निवेश की सलाह नहीं दे सकेंगी.

सेबी ने विज्ञापन नियमों में किया बड़ा बदलाव

सेबी ने कॉमन एडवरटाइजमेंट कोड (CAC) के तहत विज्ञापन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है. इसका उद्देश्य विभिन्न वित्तीय संस्थाओं के लिए विज्ञापन संबंधी नियमों को एक समान बनाना, अनुपालन प्रक्रिया को आसान करना और निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है. नए नियमों के तहत अब स्टॉक ब्रोकर, म्यूचुअल फंड हाउस, इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और पोर्टफोलियो मैनेजर अपने कॉरपोरेट ब्रांड के प्रचार के लिए सेलिब्रिटी की सेवाएं ले सकेंगे.

केवल ब्रांड प्रमोशन की होगी अनुमति

सेबी के प्रस्ताव के अनुसार, सेलिब्रिटी केवल किसी कंपनी या ब्रांड का प्रचार कर सकेंगे. वे किसी विशेष म्यूचुअल फंड स्कीम, शेयर, निवेश योजना या वित्तीय उत्पाद में निवेश करने की सलाह नहीं दे पाएंगे. यानी कोई सेलिब्रिटी यह नहीं कह सकेगा कि निवेशक किसी विशेष फंड, स्टॉक या स्कीम में पैसा लगाएं. इस तरह सेबी निवेशकों को भ्रामक प्रचार से बचाने की कोशिश कर रहा है.

फिलहाल सिर्फ म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को थी अनुमति

अभी तक केवल म्यूचुअल फंड उद्योग को सीमित दायरे में सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट की अनुमति थी. इसके लिए भी पहले सेबी की मंजूरी लेना जरूरी होता था. नए प्रस्ताव के लागू होने के बाद यह सुविधा अन्य बाजार मध्यस्थों जैसे स्टॉक ब्रोकर, निवेश सलाहकार और पोर्टफोलियो मैनेजर को भी मिल सकती है.

विज्ञापन के लिए पहले मंजूरी की जरूरत नहीं

सेबी ने विज्ञापन प्रक्रिया को सरल बनाने का भी प्रस्ताव दिया है. इसके तहत स्टॉक ब्रोकर, ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म, निवेश सलाहकार और रिसर्च एनालिस्ट को विज्ञापन जारी करने से पहले नियामकीय मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी. हालांकि, विज्ञापन जारी होने के 24 घंटे के भीतर उसकी जानकारी संबंधित संस्था को देनी होगी.

रेटिंग और रैंकिंग पर भी सख्त नियम

नए प्रस्ताव के अनुसार कंपनियां अपने विज्ञापनों में रेटिंग या रैंकिंग का इस्तेमाल तभी कर सकेंगी, जब वह किसी मान्यता प्राप्त संस्था से प्राप्त हुई हो. इसके साथ ही विज्ञापन में स्पष्ट रूप से यह बताना अनिवार्य होगा कि किसी निवेश उत्पाद के चयन के लिए केवल रेटिंग या रैंकिंग ही एकमात्र आधार नहीं हो सकती.

छोटे विज्ञापनों के लिए आसान होंगे नियम

सेबी ने एसएमएस, पॉप-अप, नोटिफिकेशन और अन्य छोटे डिजिटल विज्ञापनों के लिए भी नियमों में राहत देने का प्रस्ताव रखा है. चूंकि इन माध्यमों में जगह सीमित होती है, इसलिए पूरी जोखिम चेतावनी लिखने की बजाय एक लिंक देना पर्याप्त होगा, जिस पर क्लिक करके निवेशक विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेंगे.

निवेशकों की सुरक्षा और पारदर्शिता पर फोकस

सेबी का मानना है कि कॉमन एडवरटाइजमेंट कोड से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी वित्तीय संस्थानों के लिए समान मानक लागू होंगे. साथ ही निवेशकों को प्रचार और वास्तविक निवेश सलाह के बीच स्पष्ट अंतर समझने में भी मदद मिलेगी.

नए नियमों का उद्देश्य कंपनियों को ब्रांड निर्माण की सुविधा देना है, जबकि निवेशकों को भ्रामक या प्रभाव आधारित निवेश निर्णयों से बचाना भी है.
 


यूके कोर्ट से नीरव मोदी को बड़ा झटका, बैंक ऑफ इंडिया को 100 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश

अदालत ने नीरव मोदी को लगभग 10.7 मिलियन डॉलर यानी करीब 100 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है. यह रकम उन कर्जों से जुड़ी है, जिनकी व्यक्तिगत गारंटी नीरव मोदी ने दी थी.

Last Modified:
Wednesday, 24 June, 2026
BWHindia

लंदन (UK) की एक अदालत ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बड़ा झटका देते हुए बैंक ऑफ इंडिया (BOI) के पक्ष में फैसला सुनाया है. अदालत ने उन्हें बैंक ऑफ इंडिया को करीब 10.7 मिलियन डॉलर (लगभग 100 करोड़ रुपये) चुकाने का आदेश दिया है. यह मामला उन कर्जों से जुड़ा है, जिनकी व्यक्तिगत गारंटी नीरव मोदी ने दी थी. इस फैसले के बीच भारत प्रत्यर्पण को लेकर उनकी कानूनी लड़ाई भी जारी है.

डायमंड FZE को दिए गए कर्ज से जुड़ा मामला

यह मामला जुलाई 2012 में बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दुबई स्थित कंपनी डायमंड FZE को दिए गए कर्ज से जुड़ा है. यह कंपनी नीरव मोदी के नियंत्रण में थी. अगस्त 2013 में नीरव मोदी ने इन कर्जों के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी. हालांकि, लंदन सर्किट कमर्शियल कोर्ट में नीरव मोदी ने दलील दी कि यह गारंटी लागू नहीं की जा सकती और उन्हें बैंक की ओर से कोई वैध मांग नोटिस नहीं मिला था.

कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के दावे को माना वैध

मामले की सुनवाई करते हुए जज साइमन टिंकलर ने बैंक ऑफ इंडिया के दावे को वैध और लागू करने योग्य माना. अदालत ने कहा कि नीरव मोदी व्यक्तिगत गारंटी के तहत 4.1 मिलियन डॉलर की मूल बकाया राशि के लिए जिम्मेदार हैं.

कोर्ट ने यह भी कहा कि इस राशि पर ब्याज भी जोड़ा जाएगा. जज ने अपने आदेश में कहा कि नीरव मोदी ऐसा कोई ठोस बचाव पेश नहीं कर सके, जिससे यह साबित हो सके कि बैंक इस रकम का हकदार नहीं है.

भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ जारी है कानूनी लड़ाई

नीरव मोदी को मार्च 2019 में ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया था. वह फिलहाल लंदन की जेल में बंद हैं और भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. भारत सरकार लगातार उनके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है. विदेश मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि भारत सरकार भगोड़े आर्थिक अपराधियों को वापस लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस मामले में ब्रिटिश अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है.

हाई कोर्ट भी खारिज कर चुका है अपील

मार्च 2026 में यूके हाई कोर्ट ने नीरव मोदी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने अपने प्रत्यर्पण मामले को दोबारा खोलने की मांग की थी. अदालत ने भारतीय सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों को पर्याप्त माना था. इसके बाद अप्रैल में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने भी उनके मामले को सार्वजनिक सुनवाई से हटाकर उन्हें गुमनामी की सुविधा प्रदान की थी.

13,000 करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले का आरोपी

55 वर्षीय नीरव मोदी पर अपने मामा मेहुल चोकसी के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक में लगभग 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है. सीबीआई के अनुसार, इस घोटाले में अकेले नीरव मोदी पर करीब 6,498 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है. वर्ष 2021 में उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन इसके बाद से वह विभिन्न कानूनी विकल्पों के जरिए भारत भेजे जाने की प्रक्रिया को चुनौती दे रहे हैं.

 


Meta-CRED डील पर उठे बड़े सवाल, डेटा स्वामित्व और गोपनीयता पर छिड़ी नई बहस

व्हाट्सऐप, क्रेड और भारतीय उपभोक्ताओं के डेटा को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुई चर्चा

Last Modified:
Wednesday, 24 June, 2026
BWHindia

मेटा द्वारा कथित तौर पर 4.5 अरब डॉलर में क्रेड के अधिग्रहण और कुणाल शाह को व्हाट्सऐप का ग्लोबल सीईओ बनाए जाने की खबरों के बाद भारत में डेटा स्वामित्व, गोपनीयता और नियामकीय निगरानी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. मुंबई के उद्यमी अर्नब मित्रा की एक लिंक्डइन पोस्ट ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया और स्टार्टअप जगत में चर्चा के केंद्र में ला दिया है.

अर्नब मित्रा ने उठाए डेटा स्वामित्व से जुड़े सवाल

LIQVD ASIA के प्रबंध निदेशक और DigiBoxx के निदेशक अर्नब मित्रा ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि इस सौदे के जश्न के बीच सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे को नजरअंदाज किया जा रहा है. उनके अनुसार असली सवाल यह है कि मेटा ने आखिर खरीदा क्या है. मित्रा ने कहा कि यह केवल एक कारोबारी अधिग्रहण नहीं हो सकता, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं के बड़े डेटा बेस तक पहुंच का मामला भी हो सकता है. उनका मानना है कि इस सौदे के पीछे डेटा की अहम भूमिका हो सकती है.

फ्रीचार्ज का उदाहरण देकर समझाया अपना पक्ष

अपने तर्क को मजबूत करने के लिए अर्नब मित्रा ने फ्रीचार्ज का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि कंपनी ने 269 करोड़ रुपये खर्च कर केवल 35 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था, लेकिन इसके बावजूद वर्ष 2015 में इसे 2,800 करोड़ रुपये में बेच दिया गया. बाद में यह कंपनी मात्र 370 करोड़ रुपये में एक्सिस बैंक को हस्तांतरित कर दी गई. उनके अनुसार यह दर्शाता है कि कई बार कंपनियों का मूल्यांकन केवल राजस्व के आधार पर नहीं, बल्कि उनके डेटा और उपभोक्ता आधार के आधार पर भी किया जाता है.

क्रेड के 2.5 करोड़ यूजर्स बने चर्चा का केंद्र

मित्रा ने कहा कि क्रेड ने एक अरब डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटाई है और कंपनी ने 1,457 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया है. उनके मुताबिक, क्रेड भले ही क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं के लिए एक लॉयल्टी प्लेटफॉर्म हो, लेकिन इसकी सबसे बड़ी संपत्ति इसके करोड़ों सत्यापित और उच्च आय वर्ग के उपभोक्ताओं का डेटा हो सकता है. उन्होंने दावा किया कि मेटा के लिए क्रेड के 2.5 करोड़ सत्यापित उपभोक्ताओं की क्रेडिट प्रोफाइल सबसे बड़ा आकर्षण हो सकती हैं.

'राष्ट्रीय स्तर पर डेटा आर्बिट्रेज' का लगाया आरोप

अर्नब मित्रा ने इस संभावित अधिग्रहण को "राष्ट्रीय स्तर पर डेटा आर्बिट्रेज" करार दिया. उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में विदेशी कंपनियों द्वारा संवेदनशील तकनीकी कंपनियों के अधिग्रहण पर कड़ी निगरानी रखी जाती है.

उनका मानना है कि भारत में भी इस तरह के सौदों को केवल कारोबारी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.

डेटा प्रोटेक्शन कानून के पालन पर भी उठे सवाल

मित्रा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस सौदे में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के प्रावधानों का पालन किया गया है. उनके अनुसार यदि किसी विदेशी कंपनी को उपभोक्ताओं का वित्तीय डेटा हस्तांतरित किया जाता है तो इसके लिए स्पष्ट सहमति आवश्यक हो सकती है. उन्होंने कहा कि या तो क्रेड ने अपने उपयोगकर्ताओं से ऐसी अनुमति प्राप्त की होगी या फिर इस पहलू की पर्याप्त जांच नहीं हुई होगी.

कुणाल शाह की सराहना, लेकिन व्यवस्था पर सवाल

हालांकि अर्नब मित्रा ने कुणाल शाह की कारोबारी क्षमता की सराहना भी की. उन्होंने कहा कि कुणाल शाह ने अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है और उन्होंने खेल को बेहतरीन तरीके से खेला है. मित्रा ने स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से है जिसमें ऐसे महत्वपूर्ण सवालों पर पर्याप्त चर्चा नहीं होती.

डेटा स्वामित्व पर बहस हुई तेज

सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है. अब चर्चा केवल स्टार्टअप वैल्यूएशन, फंडिंग और संस्थापकों की सफलता तक सीमित नहीं रही है. डेटा स्वामित्व, सीमा पार डेटा हस्तांतरण, उपभोक्ता की सहमति और नागरिकों के डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में देखने जैसे मुद्दे अब इस बहस के केंद्र में आ गए हैं. आने वाले समय में यह मुद्दा भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और डेटा नियमन से जुड़ी नीतियों पर भी असर डाल सकता है.
 


शेयर बाजार पर दबाव बरकरार, क्या आज भी जारी रहेगी गिरावट? निवेशकों की नजर ग्लोबल संकेतों पर

मंगलवार को BSE सेंसेक्स 893.39 अंक गिरकर 76,200.68 पर बंद हुआ था. वहीं NSE एनएसई निफ्टी 278.80 अंक टूटकर 23,824.10 के स्तर पर पहुंच गया था.

Last Modified:
Wednesday, 24 June, 2026
BWHindia

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को आई भारी गिरावट के बाद बुधवार को बाजार खुलने से पहले निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और आईटी शेयरों पर बनी हुई है. पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स करीब 900 अंक टूटा था, जबकि निफ्टी भी 23,850 के नीचे फिसल गया था. विशेषज्ञों का मानना है कि आज के कारोबार में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति और आईटी सेक्टर की चाल पर निर्भर करेगी.

मंगलवार को आई थी बड़ी गिरावट

मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 893.39 अंक गिरकर 76,200.68 पर बंद हुआ था. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) एनएसई निफ्टी 278.80 अंक टूटकर 23,824.10 के स्तर पर पहुंच गया था. इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई थी.

ग्लोबल संकेतों पर रहेगी नजर

एशियाई बाजारों में कमजोरी और दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स में आई तेज गिरावट ने वैश्विक बाजारों की धारणा को प्रभावित किया था. ऐसे में आज भी निवेशक एशियाई बाजारों की चाल पर नजर रखेंगे. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो घरेलू बाजार में कुछ राहत देखने को मिल सकती है.

अमेरिकी फेड और कच्चे तेल की कीमतें अहम

मध्य पूर्व में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं. साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि वैश्विक महंगाई का दबाव बना रहता है तो विदेशी निवेशकों की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है.

आईटी शेयरों पर रहेगी नजर

पिछले कारोबारी सत्र में टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक जैसे आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली थी. वैश्विक आईटी खर्च को लेकर चिंताओं के कारण इस सेक्टर पर दबाव बना हुआ है. आज के कारोबार में भी आईटी शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

रुपये और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां महत्वपूर्ण

डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. निवेशकों की नजर आज एफआईआई और डीआईआई के आंकड़ों पर भी रहेगी. विश्लेषकों का मानना है कि मंगलवार की बड़ी गिरावट के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. यदि वैश्विक संकेतों में सुधार आता है तो निचले स्तरों से खरीदारी देखने को मिल सकती है. हालांकि निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और चुनिंदा शेयरों में ही निवेश करने की सलाह दी जा रही है.

इन शेयरों पर रखें नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजार में आज कई बड़ी कंपनियों से जुड़ी अहम कारोबारी घोषणाओं के चलते निवेशकों की नजर चुनिंदा शेयरों पर रहेगी. आईटी कंपनी इंफोसिस ने ग्लोबलफाउंड्रीज के साथ अपनी एआई आधारित साझेदारी को मजबूत किया है, जबकि मामाअर्थ की पैरेंट कंपनी होनासा कंज्यूमर ने फ्लुएंस फार्मा में 58 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदकर न्यूट्रास्यूटिकल्स क्षेत्र में प्रवेश किया है. वहीं सरकार 24 और 25 जून को ऑफर फॉर सेल के जरिए आईआरएफसी में 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने जा रही है. सिटी यूनियन बैंक ने 500 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी दी है. दूसरी ओर वेदांता की प्रमोटर कंपनी ट्विन स्टार होल्डिंग्स ने 6.5 करोड़ शेयर बेचे हैं, जबकि डेल्हीवरी में नेक्सस वेंचर्स ने भी अपनी हिस्सेदारी घटाई है. इसके अलावा स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स के प्रमोटरों ने भी हिस्सेदारी बिक्री की है. इन सभी घटनाक्रमों के कारण आज इंफोसिस, होनासा कंज्यूमर, आईआरएफसी, सिटी यूनियन बैंक, वेदांता, डेल्हीवरी और स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स के शेयर निवेशकों के फोकस में रह सकते हैं.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


महंगाई के दबाव में सुस्त पड़ी रिटेल बिक्री, मई में ग्रोथ घटकर 5% रही: RAI

महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उपभोक्ता खर्च में सतर्कता बढ़ी है, जिससे रिटेल सेक्टर की रफ्तार धीमी हुई है.

Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2026
BWHindia

बढ़ती महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच देश में रिटेल बिक्री की रफ्तार मई 2026 में धीमी पड़ गई. रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (RAI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मई में रिटेल बिक्री वृद्धि दर घटकर 5 प्रतिशत रह गई, जो अप्रैल 2026 में 7 प्रतिशत थी. हालांकि, आवश्यक वस्तुओं से जुड़ी श्रेणियां अब भी उपभोक्ता मांग को सहारा दे रही हैं.

पश्चिम भारत सबसे आगे, पूर्वी भारत की रफ्तार धीमी

RAI के मासिक बिजनेस सर्वे के 71वें दौर के अनुसार, पश्चिम भारत में रिटेल बिक्री में सबसे अधिक 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. उत्तर और दक्षिण भारत में 5-5 प्रतिशत की वृद्धि रही, जबकि पूर्वी भारत में वृद्धि दर 4 प्रतिशत रही, जो उपभोक्ता मांग में अपेक्षाकृत धीमी गति को दर्शाती है.

महंगाई और वैश्विक तनाव का असर

RAI के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कुमार राजगोपालन ने कहा, “मई में वृद्धि दर घटकर 5 प्रतिशत रह गई, जबकि अप्रैल में यह 7 प्रतिशत थी. वैश्विक संघर्षों के कारण बढ़े महंगाई के दबाव ने उपभोक्ता भावना को प्रभावित किया है. खुदरा कारोबारी स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि उपभोक्ता खर्च अधिक सतर्क हो गया है.”

QSR और किराना श्रेणी में सबसे अधिक बढ़ोतरी

विभिन्न श्रेणियों में क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और इसमें 9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इसके बाद खाद्य एवं किराना श्रेणी में 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही. फुटवियर श्रेणी में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि परिधान एवं कपड़े, आभूषण और खेल सामग्री की बिक्री में 5-5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई.

मूल्य आधारित खरीदारी की ओर बढ़ रहे उपभोक्ता

रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता अब अधिक सतर्कता के साथ खर्च कर रहे हैं और मूल्य आधारित खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं. इसका असर लगभग सभी श्रेणियों की मांग पर दिखाई दे रहा है. RAI ने कहा कि खुदरा कारोबारियों का फोकस इन्वेंट्री ऑप्टिमाइजेशन, ग्राहक जुड़ाव और परिचालन दक्षता बढ़ाने पर बना हुआ है.

AI और डिजिटल तकनीक का बढ़ रहा इस्तेमाल

रिटेल कंपनियां अब निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने, ग्राहकों के अनुभव को मजबूत करने और लाभप्रदता बनाए रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एनालिटिक्स और डिजिटल तकनीकों का तेजी से इस्तेमाल कर रही हैं.उद्योग जगत का मानना है कि डिजिटल टूल्स और डेटा आधारित रणनीतियां आने वाले समय में रिटेल कारोबार की वृद्धि और प्रतिस्पर्धा को नई दिशा दे सकती हैं.


LiLLBUD ने जुटाए ₹6 करोड़, भारत के अर्ली लर्निंग मार्केट में बढ़ाए कदम

इस फंडिंग राउंड में CRED के संस्थापक कुणाल शाह और Shadowfax के सीईओ अभिषेक बंसल समेत कई एंजेल निवेशकों ने भी निवेश किया है.

Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2026
BWHindia

अर्ली लर्निंग स्टार्टअप LiLLBUD ने ₹6 करोड़ की सीड फंडिंग जुटाई है. यह निवेश Zeropearl VC की अगुवाई में हुआ है. कंपनी 0-3 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए सुरक्षित और BIS-प्रमाणित शैक्षणिक उत्पाद विकसित कर रही है. इस फंडिंग राउंड में CRED के संस्थापक कुणाल शाह और Shadowfax के सीईओ अभिषेक बंसल समेत कई एंजेल निवेशकों ने भी निवेश किया है.

0-3 वर्ष के बच्चों के लिए अर्ली लर्निंग प्रोडक्ट्स बनाने वाले स्टार्टअप LiLLBUD ने ₹6 करोड़ की सीड फंडिंग जुटाई है. इस निवेश दौर का नेतृत्व Zeropearl VC ने किया. व्यक्तिगत क्षमता में निवेश करने वालों में CRED के संस्थापक कुणाल शाह, Shadowfax के सीईओ अभिषेक बंसल और उपभोक्ता एवं सप्लाई चेन क्षेत्र के कई निवेशक शामिल रहे.

100 नए उत्पाद लॉन्च करने की तैयारी

कंपनी ने बताया कि जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही तक 18-36 महीने की आयु के बच्चों के लिए 100 नए उत्पाद लॉन्च करने, क्विक कॉमर्स वितरण नेटवर्क को मजबूत करने, सप्लाई चेन विस्तार और ब्रांड निर्माण पर किया जाएगा.

भारत में तेजी से बढ़ रहा है अर्ली लर्निंग बाजार

भारत में हर साल लगभग 2.3 करोड़ बच्चों का जन्म होता है, जो दुनिया में सबसे बड़ा जन्म समूह है. इसके बावजूद छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित और प्रमाणित शैक्षणिक उत्पादों के विकल्प सीमित हैं. देश का खिलौना बाजार वर्ष 2025 में करीब 2.1 अरब डॉलर का था, जो 2034 तक बढ़कर लगभग 4.7 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. शिक्षा और विकास आधारित खिलौने इस बाजार के सबसे तेजी से बढ़ने वाले वर्गों में शामिल हैं.

सुरक्षा को लेकर बड़ी चुनौती

कंपनी का कहना है कि भारत में खिलौनों के लिए BIS प्रमाणन अनिवार्य होने के बावजूद बाजार में बड़ी संख्या में ऐसे उत्पाद मौजूद हैं, जिनके पास सुरक्षा प्रमाणन नहीं है. ऐसे खिलौनों में भारी धातुएं जैसे सीसा (Lead) पाए जाने के मामले सामने आए हैं, जो बच्चों के मानसिक विकास पर दीर्घकालिक असर डाल सकते हैं. LiLLBUD का पूरा उत्पाद पोर्टफोलियो BIS-प्रमाणित है, जिससे कंपनी माता-पिता की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने की कोशिश कर रही है.

आईआईटी और आईआईएम के पूर्व छात्रों ने की स्थापना

कंपनी की स्थापना अभिषेक शर्मा और आयुष बंसल ने की है. अभिषेक शर्मा आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र हैं और इससे पहले Shadowfax तथा CityMall से जुड़े रहे हैं. वहीं, आयुष बंसल आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद के पूर्व छात्र हैं तथा BCG और BYJU'S में काम कर चुके हैं.

कंपनी मोंटेसरी पद्धति से प्रेरित खिलौने और लर्निंग प्रोडक्ट्स तैयार करती है, जो बच्चों के संज्ञानात्मक, संवेदी और मोटर कौशल के विकास में मदद करते हैं.

तीन साल की उम्र तक होता है 80% मस्तिष्क विकास

कंपनी के अनुसार, वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि बच्चे के मस्तिष्क का लगभग 80 प्रतिशत विकास तीन वर्ष की उम्र से पहले हो जाता है. इसी कारण 0-3 वर्ष की आयु को संज्ञानात्मक और संवेदी विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है.

LiLLBUD को अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन प्लेटफॉर्म Rocket Learning के सह-संस्थापक अजीज गुप्ता का भी मार्गदर्शन मिल रहा है, जो कंपनी में निवेशक और सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं.

पिता बनने के अनुभव से जन्मा स्टार्टअप का विचार

कंपनी के सह-संस्थापक आयुष बंसल ने बताया कि पिता बनने की तैयारी के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि बाजार में सुरक्षित, वैज्ञानिक आधार वाले और भरोसेमंद अर्ली लर्निंग उत्पादों की कमी है. इसी अनुभव ने LiLLBUD की नींव रखी.

एक साल में 3.5 करोड़ रुपये की रन रेट

मई 2025 में लॉन्च होने के बाद कंपनी ने 3.5 करोड़ रुपये की वार्षिक राजस्व रन रेट हासिल कर ली है. वर्तमान में कंपनी के पास 200 से अधिक उत्पाद हैं, जो उसकी वेबसाइट के अलावा Amazon, Flipkart और Blinkit जैसे प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं.

कंपनी का भविष्य का रोडमैप

LiLLBUD आने वाले समय में क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स चैनलों में अपनी मौजूदगी बढ़ाने, BIS-प्रमाणित उत्पादों की संख्या बढ़ाने और बच्चों के शुरुआती विकास से जुड़े उत्पादों के क्षेत्र में भरोसेमंद ब्रांड बनने की दिशा में काम करेगी. कंपनी का लक्ष्य भारत में अर्ली चाइल्डहुड प्रोडक्ट्स के लिए सुरक्षा और विकास का नया मानक स्थापित करना है.
 


कोलकाता स्टॉक एक्सचेंज फिर बनेगा फाइनेंशियल हब, CSE को पुनर्जीवित करने की कवायद शुरू

राज्य सरकार का मानना है कि एक्सचेंज के दोबारा शुरू होने से कोलकाता को एक बार फिर पूर्वी भारत की आर्थिक राजधानी के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी.

Last Modified:
Tuesday, 23 June, 2026
BWHindia

मुंबई की दलाल स्ट्रीट की तरह अब कोलकाता की ऐतिहासिक लायन्स रेंज भी एक बार फिर शेयर कारोबार की हलचल से गुलजार हो सकती है. पश्चिम बंगाल सरकार ने 118 साल पुराने कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज (CSE) को पुनर्जीवित करने का ऐलान किया है. राज्य सरकार का मानना है कि एक्सचेंज के दोबारा शुरू होने से पूर्वी भारत में पूंजी बाजार को नई ऊर्जा मिलेगी, कंपनियों के लिए पूंजी जुटाना आसान होगा और कोलकाता को फिर से एक प्रमुख वित्तीय केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकेगा.

बजट में सरकार ने किया बड़ा ऐलान

पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने बजट में कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज को पुनर्जीवित करने की मंशा जाहिर की. सरकार ने कहा कि 118 साल पुरानी यह संस्था कानूनी और नियामकीय अड़चनों के कारण बंद होने की कगार पर पहुंच गई है, लेकिन अब इसे दोबारा शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे. सरकार का मानना है कि इससे कोलकाता को एक बार फिर पूर्वी भारत की आर्थिक राजधानी के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी.

क्यों अहम है CSE की वापसी?

कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज देश के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंजों में से एक है. एक समय यह पूर्वी भारत की कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने का बड़ा मंच था. राज्य सरकार के मुताबिक, एक्सचेंज के फिर से सक्रिय होने से क्षेत्रीय कंपनियों को लिस्टिंग और ट्रेडिंग की कम लागत पर सुविधा मिल सकेगी. इसके अलावा नए रोजगार अवसर भी पैदा होंगे और स्थानीय उद्योगों को पूंजी तक आसान पहुंच मिल सकेगी.

उद्योग मंत्री से मिला था CSE का प्रतिनिधिमंडल

हाल ही में कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के उद्योग मंत्री तापस रॉय से मुलाकात की थी. प्रतिनिधिमंडल ने सरकार से एक्सचेंज को बंद होने से बचाने और दोबारा शुरू करने में मदद की मांग की. CSE अधिकारियों ने सरकार को बताया कि वे सेबी को दी गई अपनी स्वैच्छिक निकास (वॉलंटरी एग्जिट) की अर्जी वापस लेना चाहते हैं और दोबारा ट्रेडिंग शुरू करना चाहते हैं. उद्योग मंत्री ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि राज्य सरकार इस मामले में केंद्र सरकार और सेबी से बातचीत करेगी.

2013 से बंद है ट्रेडिंग

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने अप्रैल 2013 में कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग पर रोक लगा दी थी. इसके बाद लगभग एक दशक तक नियामकीय और कानूनी विवाद जारी रहे. फरवरी 2025 में एक्सचेंज ने स्वेच्छा से स्टॉक एक्सचेंज कारोबार से बाहर निकलने के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक सेबी की ओर से अंतिम एग्जिट आदेश जारी नहीं किया गया है.

SEBI और केंद्र से सहयोग की उम्मीद

राज्य सरकार का मानना है कि यदि मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज को मुंबई से परिचालन की अनुमति मिल सकती है, तो पर्याप्त बुनियादी ढांचे, वित्तीय संसाधनों और राष्ट्रीय उपस्थिति वाले कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज को भी दोबारा अवसर मिलना चाहिए. CSE से जुड़े लोगों का कहना है कि एक्सचेंज के पास मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं, जिनका उपयोग दोबारा शेयर कारोबार शुरू करने के लिए किया जा सकता है.

पूर्वी भारत के वित्तीय केंद्र के रूप में उभर सकता है कोलकाता

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज दोबारा शुरू होता है, तो इससे पूर्वी भारत के उद्योगों और निवेशकों को बड़ा फायदा मिल सकता है. इससे क्षेत्रीय कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने के विकल्प बढ़ेंगे और कोलकाता एक बार फिर देश के प्रमुख वित्तीय केंद्रों में अपनी जगह बना सकता है.