होम / बिजनेस / IOCL का स्पष्ट संदेश : आर्थिक हित सर्वोपरि, रूस से तेल आयात जारी रहेगा
IOCL का स्पष्ट संदेश : आर्थिक हित सर्वोपरि, रूस से तेल आयात जारी रहेगा
जहां एक ओर अमेरिका रूस से तेल आयात को लेकर रणनीतिक दबाव बना रहा है, वहीं भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हित हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिका के बढ़ते दबाव के बीच भारत की प्रमुख तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने दो टूक कह दिया है कि वह चालू तिमाही में भी रूसी कच्चे तेल का आयात जारी रखेगी. कंपनी ने कहा कि इसका निर्णय देश की आर्थिक स्थितियों और वैश्विक बाजार मूल्य पर निर्भर करेगा.
अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत का रुख स्पष्ट
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल आयात करने को लेकर भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही थी. इसके अलावा वॉशिंगटन पहले ही 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा कर चुका है. हालांकि अमेरिका की ओर से अभी तक आधिकारिक रूप से अतिरिक्त टैरिफ लागू करने को लेकर कोई नई अधिसूचना नहीं आई है. लेकिन इसके बावजूद IOCL ने साफ कर दिया है कि सस्ता कच्चा तेल जहां मिलेगा, वहीं से खरीदा जाएगा और इस समय रूस एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है.
रूसी तेल का हिस्सा बढ़ा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार IOCL ने विश्लेषकों से बातचीत में बताया कि वित्त वर्ष 2025 में उसके कुल आयात में रूसी तेल का हिस्सा 22% था, जो वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में बढ़कर 24% हो गया है. कंपनी ने संकेत दिया है कि मौजूदा तिमाही में भी इसी प्रवृत्ति के साथ रूस से खरीद जारी रहेगी.
कंपनी का निवेश और विस्तार योजना
IOCL केवल आयात पर ही नहीं, बल्कि देश के भीतर तेल रिफाइनिंग और वितरण नेटवर्क को भी सशक्त बनाने पर काम कर रही है. वित्त वर्ष 2026 के लिए कंपनी ने 34,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय (CapEx) योजना बनाई है. इसमें से 14,000-15,000 करोड़ रुपये रिफाइनरी संचालन के लिए और 15,000-16,000 करोड़ रुपये पेट्रोकेमिकल्स, मार्केटिंग, पाइपलाइन और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन के लिए खर्च किए जाएंगे.
रिफाइनरी क्षमता में हो रहा बड़ा विस्तार
IOCL कई रिफाइनरी परियोजनाओं के जरिए उत्पादन क्षमता बढ़ा रही है:
- पानीपत रिफाइनरी की क्षमता को 15 से बढ़ाकर 25 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MMTPA) किया जा रहा है. यह कार्य 2025 के अंत तक शुरू होगा.
- गुजरात की कोयली रिफाइनरी की क्षमता 13.7 से 18 MMTPA तक बढ़ाई जाएगी.
- बिहार की बरौनी रिफाइनरी का विस्तार 6 से 9 MMTPA तक अगस्त 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है.
हाल ही में बढ़ी लागत को देखते हुए बरौनी प्रोजेक्ट की लागत 13,779 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 16,724 करोड़ रुपये कर दी गई है, जिसे बोर्ड ने मंजूरी दे दी है.
टैग्स