कल निवेशकों के डूबे ₹6 लाख करोड़, क्या आज संभलेगा बाजार? इन शेयरों पर रहेगी नजर

सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 1300 अंक से ज्यादा टूट गया, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 24,000 अंक टूटकर बंद हुआ.

Last Modified:
Tuesday, 12 May, 2026
BWHindi

वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार को हिला कर रख दिया. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 1300 अंक से ज्यादा टूट गया, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 24,000 के नीचे फिसल गया और निवेशकों के करीब ₹6 लाख करोड़ स्वाहा हो गए. रुपये ने भी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचला स्तर छू लिया. अब सवाल यह है कि आज बाजार की चाल कैसी रह सकती है. पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक संकेतों के बीच आज निवेशकों की नजर कई बड़े शेयरों और कॉरपोरेट अपडेट्स पर रहने वाली है. वहीं, कई दिग्गज कंपनियों के तिमाही नतीजे आज बाजार में हलचल बढ़ा सकते हैं.

सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स 1,312.91 अंक यानी 1.70 फीसदी गिरकर 76,015.28 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स 360.30 अंक यानी 1.49 फीसदी टूटकर 23,815.85 पर आ गया. बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल देखने को मिला. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 25 लाल निशान में बंद हुए, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा.

रुपये में ऐतिहासिक गिरावट

शेयर बाजार की कमजोरी के बीच भारतीय मुद्रा पर भी भारी दबाव देखने को मिला. रुपया डॉलर के मुकाबले 0.88 फीसदी टूटकर 95.31 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनाया है.

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में

केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी गिरावट का माहौल रहा. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.05 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.13 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई. सेक्टर आधारित इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में रही, जो करीब 4 फीसदी टूट गया. इसके अलावा रियल्टी, पीएसयू बैंक और मीडिया सेक्टर के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली. दूसरी ओर एफएमसीजी, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर ने कुछ राहत दी.

क्यों आई गिरावट
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की ओर से युद्ध खत्म करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिससे पिछले कई हफ्तों से जारी संघर्ष के जल्द समाप्त होने की उम्मीद कमजोर पड़ गई. इस घटनाक्रम के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से उछल गईं. ब्रेंट क्रूड करीब 4 फीसदी बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. तेल की कीमतों में यह तेजी भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए चिंता बढ़ाने वाली मानी जा रही है.

विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी. यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है, तो भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है. फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहने और जल्दबाजी में बड़े निवेश फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है.

आज इन शेयरों पर रखें नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कई बड़ी कंपनियों से जुड़ी खबरें निवेशकों का ध्यान खींच सकती हैं. कहीं बड़े ऑर्डर मिले हैं तो कहीं मैनेजमेंट में बदलाव हुआ है, जबकि कई कंपनियां विस्तार और नई ग्रोथ रणनीतियों पर काम कर रही हैं. घरेलू एडटेक कंपनी Adda247 ने IPO की तैयारी के बीच 200 से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी की है, जो उसकी कुल वर्कफोर्स का करीब 20 फीसदी बताया जा रहा है. वहीं Bajaj Group अपने 100 साल पूरे कर रहा है और 14 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप के साथ देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल हो चुका है. Afcons Infrastructure को यूरोप में 7,544 करोड़ रुपये का बड़ा रेलवे प्रोजेक्ट मिला है, जबकि HFCL को करीब 184 करोड़ रुपये का एक्सपोर्ट ऑर्डर हासिल हुआ है. Munjal Auto Industries को Honda Motorcycle & Scooter India से नया सप्लाई ऑर्डर मिला है. दूसरी ओर Bharat Forge ने ब्राजील की एयरोस्पेस कंपनी Embraer के साथ लंबी अवधि की डील की है और अब वह महत्वपूर्ण लैंडिंग गियर फोर्जिंग कंपोनेंट्स की सप्लाई करेगी. Adani Ports में भी बड़ा नेतृत्व बदलाव हुआ है, जहां CEO Ports प्रनव चौधरी ने इस्तीफा दे दिया है और उनकी जगह नीरज बंसल जिम्मेदारी संभालेंगे. इसके अलावा आज बाजार बंद होने के बाद Dr Reddy’s Laboratories, Tata Power, Berger Paints, Dixon Technologies, Max Financial Services, Nazara Technologies, Pfizer, Torrent Power और V-Guard Industries समेत कई दिग्गज कंपनियां अपने तिमाही नतीजे जारी करेंगी, जिससे इन शेयरों में कारोबार के दौरान तेज हलचल देखने को मिल सकती है.

 

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


कैबिनेट का बड़ा फैसला, 14,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी; 92 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता होगी विकसित

सरकार के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना, बिजली ग्रिड की स्थिरता मजबूत करना और उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे भरोसेमंद एवं किफायती बिजली उपलब्ध कराना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 November, 2026
Last Modified:
Thursday, 05 November, 2026
BWHindia

केंद्र सरकार ने देश में बड़े स्तर पर ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Energy Storage Systems) विकसित करने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता योजना को मंजूरी दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 4 नवंबर को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding - VGF) योजना को स्वीकृति दी गई. इसके तहत देशभर में 92 गीगावॉट घंटे (GWh) की नई ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी. इस योजना की अवधि वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक होगी.

सरकार के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना, बिजली ग्रिड की स्थिरता मजबूत करना और उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे भरोसेमंद एवं किफायती बिजली उपलब्ध कराना है. इससे देश में ऊर्जा भंडारण से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी गति मिलेगी.

97,600 करोड़ रुपये का होगा कुल निवेश

इस योजना के तहत कुल 97,600 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं विकसित की जाएंगी. इसमें 60 GWh क्षमता की हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं (PSP), 30 GWh क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) और उभरती हुई वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों के जरिए 2 GWh क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है.

सरकार की ओर से दी जाने वाली 14,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता से इन परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता बेहतर होगी और इनके निर्माण एवं संचालन को गति मिलेगी.

2031-32 तक 411 GWh क्षमता का लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031-32 तक देश में 411 GWh की ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करना है. इस योजना के तहत तैयार होने वाली 92 GWh की नई क्षमता देश में मौजूदा ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता की तुलना में लगभग 170 फीसदी अतिरिक्त होगी. इससे भविष्य में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को संभालने में मदद मिलेगी.

बैटरी निर्माण में घरेलू कंपनियों को मिलेगा बढ़ावा

योजना का एक अहम उद्देश्य ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करना और आयात पर निर्भरता कम करना है. इसके लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाओं में कम से कम 40 फीसदी घरेलू सामग्री का इस्तेमाल अनिवार्य होगा. इस प्रावधान से देश में बैटरी और उससे जुड़े उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. साथ ही भारतीय कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर और रोजगार सृजन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.

ऊर्जा भंडारण से चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति संभव

जैक्सन ग्रीन (Jakson Green) के मैनेजिंग डायरेक्टर कन्नन कृष्णन ने कहा कि 92 GWh की ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता के लिए 14,500 करोड़ रुपये की VGF योजना को मंजूरी भारत की ऊर्जा यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है. भारत अब नवीकरणीय ऊर्जा से आगे बढ़कर भरोसेमंद ऊर्जा व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. ऊर्जा भंडारण से सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों से मिलने वाली बिजली को चौबीसों घंटे उपलब्ध कराना संभव होगा.

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण और ऊर्जा भंडारण की व्यवस्था मिलकर स्वच्छ बिजली के पारेषण और उसकी उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करेंगे. वहीं, बैटरी परियोजनाओं में 40 फीसदी घरेलू सामग्री की अनिवार्यता और महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने से घरेलू विनिर्माण मजबूत होगा तथा आयात पर निर्भरता घटेगी. इससे देश की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी.

प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए होगा परियोजनाओं का आवंटन

ऊर्जा भंडारण क्षमता का आवंटन टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा. बैटरी ऊर्जा भंडारण और हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां वित्तीय सहायता पाने की पात्र होंगी. वहीं, वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर आधारित परियोजनाओं को सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियां लागू कर सकेंगी.

सरकार का मानना है कि बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण सुविधाएं विकसित होने से सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से बनने वाली बिजली का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा. इससे बिजली आपूर्ति में स्थिरता आएगी और मांग के अनुसार बिजली उपलब्ध कराने के लिए पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. यह पहल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाएगी.


आज बाजार में आएगी तेजी की सुनामी? गिफ्ट निफ्टी 1.4% चढ़ा, कच्चे तेल में 10% की गिरावट

बुधवार को सेंसेक्स 383.55 अंक चढ़कर 77,301.40 पर और निफ्टी 149.75 अंक बढ़कर 23,960.60 पर बंद हुआ था. बाजार में यह लगातार पांचवें सत्र की तेजी थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 November, 2026
Last Modified:
Thursday, 05 November, 2026
BWHindia

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी के साथ कारोबार शुरू होने के संकेत हैं. गिफ्ट निफ्टी करीब 340 अंक यानी 1.4 फीसदी उछलकर 24,300 के पार पहुंच गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 फीसदी की गिरावट, अमेरिकी बाजारों में तेजी और विदेशी निवेशकों की खरीदारी से घरेलू बाजार को मजबूती मिल सकती है. बुधवार को सेंसेक्स 383.55 अंक चढ़कर 77,301.40 पर और निफ्टी 149.75 अंक बढ़कर 23,960.60 पर बंद हुआ था. बाजार में यह लगातार पांचवें सत्र की तेजी थी.

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 93 डॉलर प्रति बैरल पर फिसल गया है. अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद वैश्विक बाजारों में निवेशकों की धारणा मजबूत हुई है. वहीं, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 7,284 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की.

निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर अहम

तकनीकी संकेतों के मुताबिक, निफ्टी में तेजी का रुझान बना हुआ है. इंडेक्स लगातार पांच सत्रों से बुलिश कैंडल बना रहा है और हायर हाई व हायर लो दर्ज कर रहा है. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी 24,000 के ऊपर टिकता है तो यह 24,400 और फिर 24,700 के स्तर तक पहुंच सकता है. निफ्टी का 200-दिन का सिंपल मूविंग एवरेज करीब 24,003 है. अगर इंडेक्स 24,000 से 24,150 के ऊपर बना रहता है तो तेजी जारी रह सकती है. वहीं, इस स्तर से नीचे फिसलने पर शुरुआती बढ़त कमजोर पड़ सकती है.

अमेरिकी बाजारों में तेजी, एशिया में मिला-जुला रुख

बुधवार को अमेरिकी बाजारों में जोरदार तेजी रही. डाउ जोंस 3 फीसदी, एसएंडपी 500 में 1.58 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 0.91 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. हालांकि, गुरुवार सुबह एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार रहा. जापान का निक्केई करीब 1 फीसदी और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3 फीसदी से ज्यादा नीचे कारोबार कर रहा था.

FIIs ने खरीदे 7,284 करोड़ रुपये के शेयर

विदेशी निवेशकों की वापसी भी घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है. बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 7,284 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की. विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. इसके अलावा विदेशी निवेशकों की खरीदारी से भी बाजार को समर्थन मिल सकता है. हालांकि, कारोबारी सत्र के दौरान यह देखना अहम होगा कि बाजार शुरुआती तेजी को बरकरार रख पाता है या नहीं. अगर प्रमुख इंडेक्स ऊपरी स्तरों पर टिके रहते हैं, तो बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है.

इन शेयरों पर रहेगी नजर

बीएसई, नायका, अरबिंदो फार्मा, अपोलो हॉस्पिटल्स, लेंसकार्ट, डाबर इंडिया और अपोलो टायर्स के शेयर चर्चा में रहेंगे. सितंबर तिमाही में बीएसई का नेट प्रॉफिट 44.9 फीसदी बढ़कर 809.1 करोड़ रुपये, नायका का 206.8 फीसदी बढ़कर 101.2 करोड़ रुपये और अरबिंदो फार्मा का 32.7 फीसदी बढ़कर 1,126.1 करोड़ रुपये रहा. अपोलो हॉस्पिटल्स का मुनाफा 33.5 फीसदी और लेंसकार्ट का 122.1 फीसदी बढ़ा. डाबर और अपोलो टायर्स ने भी मुनाफे में बढ़त दर्ज की.

शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, प्रीमियर एनर्जीज, एक्साइड इंडस्ट्रीज, एनएचपीसी, हुडको, फिजिक्सवाला, टोरेंट पावर और निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस के शेयरों पर भी नजर रहेगी. पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन, जेके लक्ष्मी सीमेंट और एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर के कमजोर नतीजे भी निवेशकों के रडार पर रहेंगे.

अडानी पावर ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन के साथ 1,234 मेगावाट बिजली आपूर्ति के लिए 25 साल का समझौता किया है. एचडीएफसी बैंक को कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम के तहत जमा स्वीकार करने की मंजूरी मिली है. स्विगी ने इंस्टामार्ट के 25 केंद्रों पर बैटरी स्वैपिंग स्टेशन शुरू किए हैं. क्यूपिड, केएसएच इंटरनेशनल, इंडियन होटल्स, पेट्रोनेट एलएनजी, एक्सिस बैंक और मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज भी कारोबारी घोषणाओं के कारण चर्चा में रहेंगे.

अजमेरा रियल्टी में निवेशक मुकुल अग्रवाल ने अपनी पूरी 1.93 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी है. वहीं, गणेश कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में पीजीआईएम इंडिया फंड ने अतिरिक्त 0.6 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है.

आज इन कंपनियों के आएंगे नतीजे

ओएनजीसी, भारती एयरटेल, टाइटन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया, एलआईसी, भारत फोर्ज, फोर्टिस हेल्थकेयर, ग्लेनमार्क फार्मा, एम्फैसिस और संवर्धन मदरसन समेत कई कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करेंगी. निवेशकों की नजर इनके मुनाफे, रेवेन्यू और मार्जिन पर रहेगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


मोबावेन्यू के रेवेन्यू में 48.6% की बढ़ोतरी, पहली छमाही में मुनाफा 72.2% उछला

एडटेक कंपनी मोबावेन्यू ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (H1 FY27) के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 04 November, 2026
Last Modified:
Wednesday, 04 November, 2026
BWHindia

एडटेक कंपनी मोबावेन्यू (Mobavenue) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है. इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 48.6 फीसदी बढ़कर 149.6 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, कंपनी के शुद्ध मुनाफे (PAT) में 72.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) बढ़कर करीब 22.9 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह इससे कम था. इस दौरान कंपनी का EBITDA भी 59.6 फीसदी बढ़कर करीब 31.6 करोड़ रुपये हो गया.

कंपनी ने वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में भी मजबूत प्रदर्शन किया. इस दौरान उसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 41 फीसदी बढ़ा. वहीं, EBITDA में करीब 47 फीसदी और PAT में लगभग 55 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. तिमाही के दौरान कंपनी का EBITDA मार्जिन 20 फीसदी से ऊपर बना रहा.

कंपनी के आउटकम-बेस्ड रेवेन्यू मॉडल में भी सुधार देखने को मिला. इसके तहत प्रति आउटकम रेवेन्यू में सालाना आधार पर करीब 10.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. यह कंपनी के विज्ञापन और कंज्यूमर ग्रोथ सॉल्यूशंस से मिलने वाली वैल्यू में वृद्धि को दर्शाता है.

अंतरराष्ट्रीय बाजारों से बढ़ा योगदान

मोबावेन्यू के कारोबार की वृद्धि में अंतरराष्ट्रीय बाजारों की अहम भूमिका रही. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कंपनी के कुल रेवेन्यू में विदेशी बाजारों की हिस्सेदारी 22.3 फीसदी रही. वहीं, दूसरी तिमाही में यह बढ़कर 23.8 फीसदी हो गई, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 12.3 फीसदी थी.

फिलहाल कंपनी 13 देशों में अपने ग्राहकों को सेवाएं दे रही है. दक्षिण-पूर्व एशिया में सिंगापुर को कंपनी ने अपना प्रमुख केंद्र बनाया है. इसके अलावा, अमेरिका समेत उभरते और विकसित बाजारों में अपनी टीम का विस्तार किया जा रहा है.

कंपनी भारत में अपने टेक्नोलॉजी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) को भी मजबूत कर रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय कारोबार को बेहतर तकनीकी सहयोग मिल सके.

AI आधारित विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर फोकस

आने वाले समय में मोबावेन्यू का लक्ष्य खुद को वैश्विक स्तर पर AI आधारित विज्ञापन और कंज्यूमर ग्रोथ प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करना है. इसके लिए कंपनी प्रति आउटकम रेवेन्यू बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करने और मुनाफे के साथ कारोबार की वृद्धि बनाए रखने पर ध्यान दे रही है.

कंपनी का आउटकम-बेस्ड विज्ञापन मॉडल डिजिटल मार्केटिंग इंडस्ट्री में बदलते रुझानों को भी दर्शाता है. अब विज्ञापनदाता अपने मीडिया निवेश के बदले केवल पहुंच और व्यूज के बजाय मापने योग्य कारोबारी नतीजों को अधिक महत्व दे रहे हैं.

मोबावेन्यू ने कहा है कि वह कारोबार के विस्तार के साथ अनुशासित क्रियान्वयन और शेयरधारकों, ग्राहकों तथा भागीदारों के लिए लंबी अवधि में वैल्यू तैयार करने पर अपना ध्यान बनाए रखेगी.


सोने पर अभी और बढ़ेगी मंदी की मार, 11% तक गिर सकते हैं दाम: रिपोर्ट

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का अनुमान है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव गिरकर 3,500 डॉलर प्रति औंस तक आ सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 04 November, 2026
Last Modified:
Wednesday, 04 November, 2026
BWHindia

सोने की कीमतों में तेजी के बाद अब गिरावट का दौर जारी है. साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड तेजी के साथ 5,500 डॉलर प्रति औंस का स्तर पार करने वाला सोना अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया है. इस साल अब तक सोने की कीमतों में 8 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है. बाजार में लगातार हो रही मुनाफावसूली के बीच अब ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने सोने की कीमतों में और गिरावट का अनुमान जताया है.

11% तक और सस्ता हो सकता है सोना

नोमुरा ने अपने ताजा रिसर्च नोट में अनुमान लगाया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत गिरकर 3,500 डॉलर प्रति औंस तक आ सकती है. फिलहाल सोना करीब 3,947 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा है. इस लिहाज से मौजूदा स्तर से कीमतों में करीब 11 फीसदी की और गिरावट की संभावना है.

भारतीय बाजार के लिहाज से देखें तो फिलहाल 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 1.39 लाख रुपये है. अगर नोमुरा का अनुमान सही साबित होता है और कीमतों में 11 फीसदी की गिरावट आती है, तो सोना करीब 15,290 रुपये तक सस्ता हो सकता है. ऐसे में 10 ग्राम सोने का भाव घटकर लगभग 1.23 लाख रुपये के स्तर पर आ सकता है.

मुनाफावसूली से सोने की कीमतों पर दबाव

सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे लगातार हो रही मुनाफावसूली को एक बड़ी वजह माना जा रहा है. एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी और रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली किए जाने से सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. भारी बिकवाली के चलते सोना अब ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है.

उनका कहना है कि सोने की कीमतों में टिकाऊ रिकवरी के लिए बाजार में नई खरीदारी जरूरी है. इसके साथ ही वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संकेतों का अनुकूल होना भी अहम रहेगा.

अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर

आने वाले दिनों में सोने की दिशा तय करने में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की अहम भूमिका हो सकती है. जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, बाजार की नजर अमेरिका के चुनाव, बेरोजगारी के आंकड़ों और नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर रहेगी. इन आंकड़ों से अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं.

तकनीकी नजरिए से देखें तो भारतीय बाजार में 1,42,000 रुपये का स्तर सोने के लिए अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है. उनके मुताबिक, जब तक सोना इस स्तर के ऊपर टिककर कारोबार नहीं करता, तब तक निकट अवधि में मजबूत तेजी की संभावना सीमित रह सकती है.

अमेरिका और ईरान पर भी रहेगी नजर

कोटक महिंद्रा एएमसी के फंड मैनेजर सतीश डोंडापति का सोने की कीमतों को लेकर कहा, पिछले एक सप्ताह के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में डॉलर के लिहाज से करीब 3 फीसदी की गिरावट आई है. इस दौरान सोना लगभग एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गया. अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर की कमजोरी से सोने की कीमतों को समर्थन मिलना चाहिए, लेकिन फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की आशंका ने कीमतों पर दबाव बना रखा है. वहीं, ईरान में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहे हैं. इससे कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और महंगाई बढ़ने की चिंताएं भी गहरा रही हैं.

भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई से जुड़े जोखिमों के बावजूद सोने की कीमतों को समर्थन नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि बाजार का पूरा ध्यान फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आगे की रणनीति पर है. हालांकि, कीमतों में आई हालिया गिरावट से सोने में लंबी अवधि के निवेश का आधार नहीं बदलता है. खासकर इसलिए क्योंकि ऊंची ब्याज दरों को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो सकता है.

निकट अवधि में सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है और इनमें उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है. ऐसे में निवेशकों को मौजूदा स्तरों पर एकमुश्त पूरी रकम निवेश करने से बचना चाहिए. इसके बजाय कीमतों में गिरावट आने पर चरणबद्ध तरीके से निवेश करने पर विचार करना चाहिए. अनिश्चितता से बचाव और निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिहाज से सोना लंबी अवधि के पोर्टफोलियो का हिस्सा बना रह सकता है.


चार दिन की तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली के संकेत, गिफ्ट निफ्टी टूटा; आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स 1,225.07 अंक यानी 1.62 फीसदी उछलकर 76,917.85 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 370.05 अंक यानी 1.58 फीसदी की बढ़त के साथ 23,810.85 पर पहुंच गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 04 November, 2026
Last Modified:
Wednesday, 04 November, 2026
BWHindia

भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार, 4 नवंबर का कारोबारी सत्र अहम रहने वाला है. मंगलवार को जोरदार तेजी के साथ बंद हुए बाजार में आज मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है. कारोबार शुरू होने से पहले गिफ्ट निफ्टी करीब 60-70 अंक टूटकर 23,700 के आसपास पहुंच गया था. इससे घरेलू बाजार की कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं.

दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर 103 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गई है. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक मानी जा रही है. इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और रुपये की मजबूती से भी बाजार को समर्थन मिल सकता है.

सेंसेक्स 1,225 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,800 के पार

मंगलवार को शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही. बीएसई सेंसेक्स 1,225.07 अंक यानी 1.62 फीसदी उछलकर 76,917.85 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 370.05 अंक यानी 1.58 फीसदी की बढ़त के साथ 23,810.85 पर पहुंच गया.

मिडकैप इंडेक्स में 0.8 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.3 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. सेक्टोरल इंडेक्स में एफएमसीजी 2.5 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा. रियल्टी, प्राइवेट बैंक और ऑटो शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली. दूसरी ओर, पीएसयू बैंक और एनर्जी इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए.

आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बुधवार को सितंबर तिमाही के नतीजों और कारोबारी घोषणाओं के चलते एमसीएक्स, ल्यूपिन, लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी, बाटा इंडिया और मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर के शेयर फोकस में रहेंगे. एमसीएक्स का मुनाफा 130.2 फीसदी बढ़कर 454.6 करोड़ रुपये रहा, जबकि ल्यूपिन के मुनाफे में 22.2 फीसदी की गिरावट आई. लॉयड्स मेटल्स का मुनाफा 88 फीसदी और मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर का 42.7 फीसदी बढ़ा. इसके अलावा जेएनके इंडिया को 300-600 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है, जबकि हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को 198.3 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, हिंदुस्तान जिंक और पतंजलि फूड्स की कॉरपोरेट घोषणाओं पर भी निवेशकों की नजर रहेगी. बल्क डील के चलते एसएफसी एनवायरनमेंटल टेक्नोलॉजीज, वुमनकार्ट और वर्धमान पॉलीटेक्स के शेयरों में हलचल रह सकती है.

आज इन कंपनियों के आएंगे तिमाही नतीजे

बुधवार को अपोलो हॉस्पिटल्स, लेंसकार्ट, नायका, फिजिक्सवाला, अपोलो टायर्स, अरबिंदो फार्मा, बायोकॉन, डाबर इंडिया, कमिंस इंडिया, टोरेंट पावर और जायडस लाइफसाइंसेज समेत कई कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. निवेशकों की नजर इन कंपनियों के मुनाफे, रेवेन्यू और भविष्य के कारोबारी अनुमानों पर रहेगी.

इन कंपनियों के शेयरों की होगी लिस्टिंग

आज एमके सन्स फाइन ज्वेल्स के शेयर बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे. इसके अलावा एसएमई प्लेटफॉर्म पर कार्वर रोबोवेल्ड और अजवा प्रोजेक्ट्स के शेयरों की भी लिस्टिंग होगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


भारत में कारोबार बढ़ाने की तैयारी में डुमारे, EV और AI टेक्नोलॉजी पर रहेगा फोकस

डुमारे ग्रुप भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने के साथ इंजन की दक्षता बढ़ाने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कंट्रोल सिस्टम और क्लीन मोबिलिटी सॉल्यूशंस पर काम कर रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 03 November, 2026
Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
BWHindia

ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग क्षेत्र की कंपनी डुमारे इंडिया (Dumarey India) ने भारत में अपने नए कारोबार की शुरुआत की है. कंपनी इस नई सुविधा के जरिए भारत के ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग इकोसिस्टम में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के साथ सस्टेनेबल मोबिलिटी के क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहती है. कंपनी का लक्ष्य पारंपरिक इंजन के साथ इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड, हाइड्रोजन और इथेनॉल आधारित तकनीकों में भी अपनी क्षमताएं बढ़ाना है. बिजनेस वर्ल्ड से बातचीत में डुमारे इंडिया के प्रमुख अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि कंपनी ऑटोमोबाइल के अलावा डेटा सेंटर, निर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी तकनीकी समाधान विकसित कर रही है.

ऑटोमोबाइल से डेटा सेंटर तक कारोबार का विस्तार

बिजनेस वर्ल्ड से बातचीत में डुमारे इंडिया के प्रमुख अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि कंपनी का काम केवल पारंपरिक इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) तक सीमित नहीं है. डुमारे इंडिया ट्रैक्टर, ऑफ-हाईवे वाहन और निर्माण क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले वाहनों के लिए भी तकनीक और सेवाएं उपलब्ध कराती है.

उन्होंने कहा कि कंपनी बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और हाइब्रिड वाहनों के लिए भी काम कर रही है. इसके अलावा हाइड्रोजन, फ्लेक्स फ्यूल, इथेनॉल, लिथियम और यूरो-7 से जुड़े एप्लिकेशन पर भी काम किया जा रहा है. कंपनी के ग्राहकों में दोपहिया वाहन निर्माता कंपनियों से लेकर भारी वाणिज्यिक वाहन और निर्माण उपकरण बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं.

अग्रवाल के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर के लिए ऊर्जा समाधान विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं. कंपनी बड़े इंजनों पर काम कर रही है, जिनका इस्तेमाल पहले जहाजों में किया जाता था. अब इन्हें डेटा सेंटर के लिए सीएनजी आधारित ऊर्जा स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने के लिहाज से तैयार किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि कंपनी ऐसे काइनेटिक सिस्टम भी विकसित कर रही है, जो बिजली की मांग में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को संभाल सकें. इसके साथ ही पूरी कम्बशन प्रणाली को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है, ताकि इंजन की दक्षता 50 फीसदी तक पहुंचाई जा सके.

1 लीटर इंजन से 400 हॉर्सपावर तक की ताकत

कंपनी की भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए प्रतिनिधियों ने बताया कि डुमारे का प्रमुख लक्ष्य इंजन की दक्षता के मामले में अपनी तकनीकी क्षमता को बेहतर बनाना है. इसके लिए प्री-चैंबर कम्बशन (Pre-chamber Combustion) तकनीक पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

कंपनी के मुताबिक, उसके ज्यादातर इंजन टर्बोचार्ज्ड होंगे. कुछ इंजन एक लीटर क्षमता में 400 हॉर्सपावर तक की ताकत देने में सक्षम हैं. कंपनी पहले एक सिलेंडर के आधार पर तकनीक विकसित करती है और फिर उसी तकनीक को बड़े इंजनों में इस्तेमाल करती है.

इस तकनीक को औद्योगिक क्षेत्र में 60 लीटर क्षमता वाले V20 इंजन तक और दूसरी ओर 1.6 लीटर क्षमता वाले V6 इंजन तक इस्तेमाल किया जा सकता है. कंपनी का मानना है कि कम्बशन तकनीक में सुधार से अलग-अलग श्रेणियों के इंजनों की दक्षता बढ़ाई जा सकती है.

इंजन मैनेजमेंट और डायग्नोस्टिक्स में AI का इस्तेमाल

डुमारे भविष्य में अपने कंट्रोल सिस्टम और सॉफ्टवेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी कर रही है. कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि आधुनिक इंजन और वाहन लगातार अधिक जटिल होते जा रहे हैं. ऐसे में इंजन की स्थिति, उसकी उम्र, संभावित खराबियों और प्रदर्शन का अनुमान लगाने के लिए उन्नत एल्गोरिदम की जरूरत है.

कंपनी ने इसके लिए एक अलग बिजनेस यूनिट बनाई है, जो पूरी तरह AI पर केंद्रित है. यह यूनिट कंट्रोलर, डायग्नोस्टिक्स, इंजन मैनेजमेंट, कम्बशन और आफ्टर-ट्रीटमेंट जैसे क्षेत्रों में काम करेगी.

इसके अलावा कंपनी अपने ग्राहकों को भी AI आधारित सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है. इन सेवाओं के जरिए ग्राहक वाहनों और इंजनों से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण कर सकेंगे और उनके प्रदर्शन में समय के साथ होने वाले बदलावों का अनुमान लगा सकेंगे.

कंपनी के मुताबिक, इस तकनीक से किसी उत्पाद को बाजार में लाने में लगने वाला समय कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही इंजन की पूरी जीवन अवधि के दौरान उसकी कार्यक्षमता और संभावित खराबियों का पहले से अनुमान लगाया जा सकेगा. इसका इस्तेमाल भारी ट्रकों, बसों और यात्री कारों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है.

इलेक्ट्रिक और पारंपरिक इंजन के बीच तकनीक का मिश्रण जरूरी

भारतीय ग्राहकों के लिए संदेश देते हुए कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि किसी वाहन या इंजन की तकनीक का आकलन केवल उसमें इस्तेमाल होने वाले ईंधन के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए. इसके बजाय यह देखना जरूरी है कि एक किलोमीटर की दूरी तय करने में कितनी ऊर्जा खर्च होती है और पूरे जीवनकाल में उसकी वास्तविक लागत कितनी रहती है.

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में अलग-अलग तकनीकों का मिश्रण देखने को मिलेगा. इलेक्ट्रिफिकेशन को लेकर मौजूदा धारणाओं का भी अगले 10 वर्षों में दोबारा आकलन करना पड़ सकता है.

कंपनी के प्रतिनिधियों ने तकनीक के पूरे जीवन चक्र (Cradle to Cradle) के आधार पर उसके पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने पर जोर दिया. इसमें किसी तकनीक के निर्माण से लेकर उसके इस्तेमाल, कार्बन उत्सर्जन और अंत में रिसाइक्लिंग तक के सभी पहलुओं को शामिल करना जरूरी है.

उन्होंने बैटरी रिसाइक्लिंग को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया. उनके मुताबिक, बाजार में कई तरह की बैटरियां उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें रिसाइकिल करना उतना आसान नहीं है, जितना आमतौर पर माना जाता है. अगर इस चुनौती का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ी मात्रा में बैटरी कचरा लैंडफिल तक पहुंच सकता है.

भारत को बताया अहम ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग बाजार

डुमारे ग्रुप के फाउंडर गुइडो डुमारे ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग बाजारों में से एक है. गुरुग्राम में नए कॉरपोरेट ऑफिस में निवेश कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

उन्होंने कहा कि यूरोप की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को भारत की तकनीकी प्रतिभा और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं के साथ जोड़कर कंपनी स्वच्छ, अधिक कुशल और टिकाऊ पावरट्रेन सॉल्यूशंस की दिशा में काम करेगी. उन्होंने कहा कि भारत में नए ऑफिस की शुरुआत स्थानीय जरूरतों के अनुरूप इंजीनियरिंग समाधान उपलब्ध कराने की कंपनी की प्रतिबद्धता का हिस्सा है. घरेलू स्तर पर कुशल कर्मचारियों और मजबूत सप्लायर नेटवर्क के साथ कंपनी अपने ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEM) पार्टनर्स की बदलती जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम करेगी.

 

TAGS bw-hindi

बच्चों पर सोशल मीडिया के असर को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मेटा के फेसबुक-इंस्टाग्राम पर उठे सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम के एल्गोरिदम बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन पर सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करते हैं. याचिकाकर्ता ने बच्चों की मानसिक सेहत, निजता और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भारत में विशेष सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 03 November, 2026
Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
BWHindia

बच्चों की मानसिक सेहत और ऑनलाइन सुरक्षा पर सोशल मीडिया के कथित दुष्प्रभावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मेटा (Meta) के प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है. यह याचिका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम और उनके जरिए बच्चों के बीच बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर चिंता जताते हुए दायर की गई है.

संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अधिवक्ता और लीगल-टेक्नोलॉजी उद्यमी श्रीरूपा चौधरी ने यह जनहित याचिका दायर की है. इसमें आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल होने वाले एल्गोरिदम आधारित फीचर्स बच्चों को लगातार कंटेंट देखने और लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.

सोशल मीडिया के किन फीचर्स पर उठाए सवाल?

याचिका में इनफिनिट स्क्रॉलिंग, ऑटोप्ले रील्स, पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन और यूजर्स के व्यवहार की प्रोफाइलिंग जैसे फीचर्स पर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन फीचर्स को इस तरह तैयार किया गया है कि यूजर्स अधिक से अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताएं.

याचिका में कहा गया है कि इसका बच्चों पर गंभीर असर पड़ सकता है. इनमें सोशल मीडिया की लत, चिंता, अवसाद, नींद की कमी, शरीर की छवि को लेकर असंतोष और ऑनलाइन ग्रूमिंग जैसे खतरे शामिल हैं. इसके अलावा बच्चों के चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) के संपर्क में आने की आशंका भी जताई गई है.

भारत में फेसबुक-इंस्टाग्राम के करोड़ों यूजर्स

याचिका में भारत में मेटा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बड़े यूजर बेस का भी उल्लेख किया गया है. DataReportal की रिपोर्ट 'Digital 2026: India' का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत में इंस्टाग्राम के करीब 48.05 करोड़ और फेसबुक के लगभग 40.3 करोड़ यूजर्स हैं.

याचिकाकर्ता के मुताबिक, भारत मेटा का दुनिया में सबसे बड़ा राष्ट्रीय बाजार है. यहां इन दोनों प्लेटफॉर्म के यूजर्स की संख्या अमेरिका के मुकाबले 2 से 2.6 गुना तक है.

याचिका में तर्क दिया गया है कि भारत में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले बच्चों की बड़ी संख्या को देखते हुए देश के लिए अलग और मजबूत चाइल्ड सेफ्टी उपायों की जरूरत है. भारतीय बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा के मामले में पश्चिमी देशों के बच्चों की तुलना में कम संरक्षण नहीं मिलना चाहिए.

बच्चों की सुरक्षा के लिए अलग फंड बनाने की मांग

याचिका में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नेशनल चाइल्ड ऑनलाइन सेफ्टी एंड वेलफेयर फंड बनाने की मांग की गई है. इसके लिए मेटा से कथित नुकसान के अनुपात में मुआवजा लेने का प्रस्ताव रखा गया है.

इसके अलावा याचिकाकर्ता ने नाबालिग यूजर्स की संख्या और बच्चों की सुरक्षा के लिए मौजूदा व्यवस्थाओं से जुड़ी भारत-विशिष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है. इसमें सुरक्षा के डिफॉल्ट विकल्प मजबूत करने, एल्गोरिदम पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने और बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों को रोकने के लिए पर्याप्त सरकारी दिशा-निर्देश बनाने की मांग भी शामिल है.

मेटा से 18 अरब डॉलर के बराबर मुआवजे की मांग

याचिका में मुआवजे की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है. याचिकाकर्ता ने प्रस्तावित फंड में कम से कम उतनी राशि जमा कराने की मांग की है, जितनी मेटा ने अन्य देशों में इसी तरह के मामलों में समझौतों के तहत देने की बात कही है.

इस संबंध में अगस्त 2026 में अमेरिका में कई राज्यों के साथ हुए कम से कम 18 अरब डॉलर के कथित समझौते का हवाला दिया गया है.

याचिकाकर्ता का तर्क है कि भारत में फेसबुक और इंस्टाग्राम का यूजर बेस अमेरिका से काफी बड़ा है. ऐसे में भारतीय बच्चों को हुए कथित नुकसान के लिए मुआवजे की राशि भी यहां के यूजर बेस और भारतीय बाजार से मेटा को होने वाले कारोबारी लाभ के अनुपात में तय होनी चाहिए.

NCPCR से स्वतंत्र जांच की मांग

जनहित याचिका में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) से इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की गई है. साथ ही भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बच्चों की मानसिक सेहत पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर अलग से शोध कराने का अनुरोध किया गया है.

याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि यह मुकदमा जनहित में यानी प्रो बोनो पब्लिको (Pro Bono Publico) के तहत दायर किया गया है. इसमें उनका कोई व्यक्तिगत या व्यावसायिक हित नहीं है.

 


टाटा ग्रुप के विवाद पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सलाह, आपसी बातचीत से सुलझाएं मतभेद

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा ग्रुप के नेतृत्व से आंतरिक मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने और समूह में सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप भारतीय अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है और इस विवाद का सार्वजनिक रूप से जारी रहना ठीक नहीं है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 03 November, 2026
Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
BWHindia

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा ग्रुप में चल रहे विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने की अपील की है. उन्होंने संकेत दिया कि फिलहाल सरकार इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं समझती है. 2 नवंबर को एक कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि विवाद से जुड़े पक्षों को आपसी बातचीत के जरिए अपने मतभेद दूर करने चाहिए.

सीतारमण ने टाटा ग्रुप के नेतृत्व से एक-दूसरे के साथ बातचीत करने और समूह में सामान्य स्थिति बहाल करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. देश के औद्योगिक विकास में समूह के योगदान और इसकी ब्रांड वैल्यू को देखते हुए विवाद का जल्द समाधान जरूरी है.

टाटा संस को लेकर क्या है विवाद?

टाटा ग्रुप में मौजूदा विवाद टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के बीच मतभेदों से जुड़ा है. यह विवाद होल्डिंग कंपनी के संचालन, भविष्य की योजनाओं और गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों पर है. इसमें टाटा संस की संभावित शेयर बाजार में लिस्टिंग और चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का मामला भी शामिल है.

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि शापूरजी पलोनजी ग्रुप की इसमें लगभग 18.4 फीसदी हिस्सेदारी है. शापूरजी पलोनजी ग्रुप लंबे समय से टाटा संस में अपने निवेश का मूल्य हासिल करने के लिए कंपनी की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग का रास्ता तलाश रहा है.

चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर बढ़े मतभेद

यह विवाद 17 सितंबर को हुई टाटा संस के बोर्ड की बैठक के बाद और गहरा गया. इस बैठक में एन चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के कार्यकाल के लिए दोबारा चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी दी गई थी. साथ ही नियामकीय आवश्यकताओं के अनुसार कंपनी की लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला लिया गया था. नोएल टाटा ने इन फैसलों का विरोध किया था.

दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस को अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के रूप में वर्गीकृत किया है. इसके तहत कंपनी पर सख्त नियामकीय नियम लागू होते हैं, जिनमें शेयर बाजार में लिस्टिंग की अनिवार्यता भी शामिल है.

टाटा संस ने इस वर्गीकरण से बाहर निकलने की कोशिश की है, लेकिन आरबीआई ने लिस्टिंग का मुद्दा अभी बरकरार रखा है.

26 नवंबर की बैठक पर नजर

टाटा ग्रुप में मतभेद अब टाटा ट्रस्ट्स के कामकाज और गवर्नेंस तक भी पहुंच गए हैं. ट्रस्टियों ने प्रशासनिक मामलों और नेतृत्व से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए हैं. अब इस मामले में अगला बड़ा घटनाक्रम 26 नवंबर को होने वाली टाटा संस के बोर्ड की बैठक में देखने को मिल सकता है. इस बैठक में होल्डिंग कंपनी के प्रस्तावित पुनर्गठन और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.

 


2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य, 50 हजार करोड़ रुपये के निर्यात पर सरकार की नजर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- सेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर है जोर, रक्षा बजट बढ़कर रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये हुआ

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 03 November, 2026
Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
BWHindia

भारत ने साल 2029 तक रक्षा उत्पादन को बढ़ाकर 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि मौजूदा और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सेना का आधुनिकीकरण तेज करने और देश की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाने की जरूरत है.

राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की 'भारतीय सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण' विषय पर आयोजित सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए राजनाथ सिंह ने ये बातें कहीं. बैठक में युद्ध के बदलते तौर-तरीकों, तकनीकी विकास और थलसेना, नौसेना तथा वायुसेना की परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में छह प्रमुख क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया. इनमें सैन्य क्षमताओं का विकास और आधुनिकीकरण, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, स्वदेशी रक्षा विनिर्माण, उभरती तकनीक, रक्षा अनुसंधान एवं नवाचार और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल शामिल हैं.

राजनाथ सिंह ने कहा कि तकनीक आधारित युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार बजटीय सहायता, रक्षा खरीद, तकनीकी विकास और सैन्यकर्मियों के कौशल पर विशेष ध्यान दे रही है.

रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये हुआ रक्षा बजट

रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट बढ़ाकर रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. इसमें सेना के आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

उन्होंने कहा कि देश का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है. वहीं, वर्ष 2014 में 2,000 करोड़ रुपये से कम रहने वाला रक्षा निर्यात बढ़कर करीब 40,000 करोड़ रुपये पहुंच गया है.

राजनाथ सिंह ने कहा, "हमारा लक्ष्य 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 50 हजार करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करना है."

उन्होंने रक्षा क्षेत्र में विदेशी स्रोतों पर भारत की रणनीतिक निर्भरता कम करने की जरूरत पर भी जोर दिया. इसके लिए घरेलू स्तर पर अनुसंधान, डिजाइन, विकास और विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकार निजी कंपनियों, स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी भी बढ़ा रही है.

रक्षा क्षेत्र में AI और ऑटोनॉमस सिस्टम पर जोर

बैठक में भविष्य के युद्धों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोनॉमस सिस्टम, मानवरहित प्लेटफॉर्म, साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और आधुनिक संचार तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा हुई.

रक्षा मंत्री ने उन्नत हथियारों, मिसाइलों और सैन्य प्रणालियों के विकास में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के योगदान को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि अनुसंधान को सैन्य इस्तेमाल के योग्य क्षमताओं में बदलने के लिए तीनों सेनाओं, DRDO, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना जरूरी है.

सेना के जवानों की तैयारी और कौशल बढ़ाने पर भी जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि सैन्य आधुनिकीकरण का मतलब केवल नए हथियार और उपकरण खरीदना नहीं है, बल्कि सेना के जवानों की क्षमताओं और परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाना भी है.

उन्होंने भारतीय सेना में शुरू की गई नई टुकड़ियों असनी, भैरव और शक्तिबाण प्लाटून का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ये नई टुकड़ियां मौजूदा सैन्य जरूरतों को पूरा करने में प्रभावी साबित हो रही हैं.

बैठक में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, संयुक्त सैन्य योजना और अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध सैन्य क्षमताओं के एकीकृत इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया.

इस विचार-विमर्श में लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों ने भी अपने सुझाव दिए. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बैठक में महत्वपूर्ण सैन्य क्षमताओं को प्राथमिकता देने, विभिन्न पक्षों के बीच समन्वय बढ़ाने, रक्षा खरीद और विकास की प्रक्रियाओं को सरल बनाने और तय लक्ष्यों की समय-समय पर समीक्षा करने का रोडमैप तैयार किया गया.


SBI के मुनाफे में 14.28% की बढ़ोतरी, दूसरी तिमाही में ₹23,038 करोड़ का शुद्ध लाभ

नेट इंटरेस्ट इनकम में 14.69% का उछाल, बढ़कर ₹49,143 करोड़ हुई; बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 03 November, 2026
Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
BWHindia

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के नतीजे जारी कर दिए हैं. बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 14.28 फीसदी बढ़कर ₹23,038 करोड़ हो गया है. पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में बैंक ने ₹20,000 करोड़ के आसपास का शुद्ध लाभ दर्ज किया था. इस दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में भी 14.69 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह ₹49,143 करोड़ पर पहुंच गई.

मंगलवार को घोषित नतीजों के मुताबिक, बैंक की एसेट क्वालिटी में भी सुधार देखने को मिला है. सितंबर 2026 के अंत में ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) अनुपात घटकर 1.39 फीसदी रह गया, जो एक साल पहले 1.73 फीसदी था. हालांकि, बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) मामूली गिरावट के साथ 2.94 फीसदी पर आ गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 2.96 फीसदी था.

ब्याज से होने वाली आय में बढ़ोतरी

एसबीआई की ब्याज से होने वाली आय वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 10.46 फीसदी बढ़कर ₹1,32,019 करोड़ हो गई. वहीं, ब्याज खर्च 8.09 फीसदी बढ़कर ₹82,876 करोड़ रहा. इसके चलते बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के ₹42,847 करोड़ से बढ़कर ₹49,143 करोड़ हो गई.

इस दौरान बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 7.28 फीसदी बढ़कर ₹34,226 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹31,904 करोड़ था. बैंक की कुल आय 8.25 फीसदी बढ़कर ₹1,51,084 करोड़ हो गई. वहीं, कुल खर्च 8.54 फीसदी बढ़कर ₹1,16,859 करोड़ रहा.

गैर-ब्याज आय में 4.94 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह ₹20,056 करोड़ से घटकर ₹19,066 करोड़ रह गई. हालांकि, फीस से होने वाली आय 9.63 फीसदी बढ़कर ₹9,549 करोड़ हो गई. इसमें लोन प्रोसेसिंग चार्ज और अन्य बैंकिंग सेवाओं से होने वाली आय का योगदान रहा.

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट में हिस्सेदारी बेचने से ₹7,288 करोड़ का फायदा

बैंक के दूसरी तिमाही के नतीजों में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट में अपनी हिस्सेदारी बेचने से हुआ ₹7,288 करोड़ का एकमुश्त लाभ भी शामिल है. वहीं, पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में बैंक को यस बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने से ₹4,593 करोड़ का एकमुश्त लाभ हुआ था.

दोनों तिमाहियों में इस एकमुश्त लाभ की रकम में अंतर का असर बैंक के सालाना मुनाफे की वृद्धि पर भी पड़ा है. एसबीआई ने अपनी एनालिस्ट प्रेजेंटेशन में इन दोनों सौदों से होने वाले लाभ का अलग से ब्योरा दिया है.

बैंक के लोन में 17.84% की बढ़ोतरी, जमा में 12.27% का इजाफा

30 सितंबर 2026 तक एसबीआई का कुल ग्रॉस एडवांस 17.84 फीसदी बढ़कर ₹52.08 लाख करोड़ हो गया. इस दौरान बैंक की कुल जमा राशि भी 12.27 फीसदी बढ़कर ₹62.78 लाख करोड़ पर पहुंच गई.

घरेलू बाजार में बैंक का एडवांस 16.94 फीसदी बढ़कर ₹43.77 लाख करोड़ रहा. वहीं, विदेशी शाखाओं का एडवांस 22.86 फीसदी बढ़कर ₹8.31 लाख करोड़ हो गया.

घरेलू एडवांस में 41.7 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले रिटेल पर्सनल लोन में सालाना आधार पर 14.54 फीसदी की वृद्धि हुई. स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइज (SME) को दिए गए कर्ज में 21.97 फीसदी और कृषि क्षेत्र के कर्ज में 22.64 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, कॉरपोरेट एडवांस 16.12 फीसदी बढ़ा.

जमा के मोर्चे पर करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट (CASA) डिपॉजिट 8.13 फीसदी बढ़कर ₹22.97 लाख करोड़ हो गया. वहीं, टर्म डिपॉजिट में 14.26 फीसदी की वृद्धि हुई और यह ₹36.98 लाख करोड़ पर पहुंच गया.

घरेलू नेट इंटरेस्ट मार्जिन में सुधार

एसबीआई का पूरे बैंकिंग कारोबार का नेट इंटरेस्ट मार्जिन वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 2.94 फीसदी रहा. यह पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही के 2.96 फीसदी से कम है. हालांकि, पिछली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 के 2.86 फीसदी के मुकाबले इसमें सुधार हुआ है.

घरेलू कारोबार का नेट इंटरेस्ट मार्जिन बढ़कर 3.11 फीसदी हो गया, जो जून 2026 में समाप्त तिमाही के दौरान 3 फीसदी और पिछले साल की समान तिमाही में 3.08 फीसदी था. इस तरह घरेलू NIM में तिमाही आधार पर 11 बेसिस पॉइंट का सुधार हुआ.

इस सुधार की एक वजह जमा पर बैंक की लागत में कमी आना है. सितंबर 2026 में घरेलू जमा पर लागत घटकर 4.84 फीसदी रह गई, जबकि मार्च 2026 में यह 5.04 फीसदी थी. वहीं, दिए गए कर्ज पर घरेलू यील्ड 8.22 फीसदी रही, जो मार्च 2026 में 8.50 फीसदी थी.

एनपीए में गिरावट से सुधरी एसेट क्वालिटी

एसबीआई की एसेट क्वालिटी में लगातार सुधार जारी है. सितंबर 2026 के अंत में बैंक का ग्रॉस NPA अनुपात घटकर 1.39 फीसदी रह गया, जबकि सितंबर 2025 में यह 1.73 फीसदी और जून 2026 में 1.47 फीसदी था.

बैंक का ग्रॉस NPA घटकर ₹72,529 करोड़ रह गया, जो एक साल पहले ₹76,243 करोड़ था. इसी तरह नेट NPA अनुपात भी 0.42 फीसदी से घटकर 0.36 फीसदी पर आ गया. सितंबर 2026 के अंत में नेट NPA की रकम ₹18,546 करोड़ रही.

दूसरी तिमाही में नए एनपीए यानी स्लिपेज की रकम ₹5,227 करोड़ रही, जबकि पिछली तिमाही में यह ₹7,046 करोड़ थी. वहीं, लोन लॉस प्रोविजन में सालाना आधार पर 33.23 फीसदी की गिरावट आई और यह ₹2,759 करोड़ रह गया.

बैंक की क्रेडिट कॉस्ट दूसरी तिमाही में 0.22 फीसदी रही, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 0.39 फीसदी थी. वहीं, राइट-ऑफ किए गए खातों को छोड़कर प्रोविजन कवरेज रेशियो 74.43 फीसदी रहा.

कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो बढ़कर 16.09% हुआ

एसबीआई का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CRAR) सितंबर 2026 में बढ़कर 16.09 फीसदी हो गया, जो एक साल पहले 14.62 फीसदी था. वहीं, कॉमन इक्विटी टियर-1 (CET1) रेशियो भी सितंबर 2025 के 11.47 फीसदी से बढ़कर 13.34 फीसदी पर पहुंच गया.

बैंक की बैलेंस शीट में भी विस्तार हुआ है. सितंबर 2026 के अंत में यह सालाना आधार पर 12.88 फीसदी बढ़कर ₹78.88 लाख करोड़ हो गई, जबकि पिछले साल की समान अवधि में बैंक की बैलेंस शीट ₹69.87 लाख करोड़ थी.