बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों का भरोसा पुरानी और बेहतर प्रदर्शन करने वाली योजनाओं पर बढ़ा, 2026 की पहली छमाही में नए फंड ऑफर का योगदान छह साल के निचले स्तर पर पहुंचा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
साल 2026 की पहली छमाही में इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश का प्रवाह मजबूत बना रहा. निवेशकों ने बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बावजूद इक्विटी फंड्स में जमकर पैसा लगाया, जिससे कुल सकल निवेश ₹4 लाख करोड़ के पार पहुंच गया. हालांकि, नए फंड ऑफर (NFO) को लेकर निवेशकों का उत्साह कमजोर रहा और इनसे जुटाई गई रकम छह साल के निचले स्तर पर आ गई.
आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के दौरान ऐक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में कुल ₹4.07 लाख करोड़ का निवेश आया. यह आंकड़ा 2024 की दूसरी छमाही में दर्ज किए गए रिकॉर्ड ₹4.34 लाख करोड़ के निवेश के काफी करीब रहा. यह दूसरी बार है जब किसी छह महीने की अवधि में इक्विटी फंड्स में निवेश ₹4 लाख करोड़ के पार पहुंचा है.
SIP और एकमुश्त निवेश ने संभाला मोर्चा
इक्विटी फंड्स में निवेश की मजबूती के पीछे लगातार बढ़ता सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) योगदान और मौजूदा योजनाओं में हुआ बड़ा एकमुश्त निवेश प्रमुख कारण रहे. इन दोनों ने NFO से आने वाले निवेश में आई गिरावट की भरपाई कर दी.
2026 की पहली छमाही में NFO के जरिए सिर्फ ₹7,092 करोड़ जुटाए गए, जबकि 2025 की दूसरी छमाही में यह आंकड़ा ₹22,026 करोड़ और 2024 की दूसरी छमाही में ₹53,000 करोड़ से अधिक था.
इसके चलते कुल ऐक्टिव इक्विटी निवेश में NFO की हिस्सेदारी घटकर केवल 1.7 फीसदी रह गई, जो पिछले कम से कम छह वर्षों में सबसे निचला स्तर है.
निवेशकों ने थीमैटिक फंड के बजाय भरोसेमंद योजनाओं को चुना
फंड उद्योग के विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 में निवेशकों ने नई और जोखिम भरी थीमैटिक या सेक्टोरल योजनाओं के बजाय पहले से स्थापित और विविधीकृत फंड्स को प्राथमिकता दी. निवेश का प्रवाह लगातार बना हुआ है, लेकिन अब ज्यादा पैसा मौजूदा योजनाओं में जा रहा है. 2023 और 2024 में लॉन्च हुए कई सेक्टोरल और थीमैटिक NFO उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए, जबकि फ्लेक्सीकैप, मल्टीकैप और मिडकैप जैसी विविधीकृत योजनाओं ने बेहतर प्रदर्शन किया है.
फ्लेक्सीकैप, स्मॉलकैप और मिडकैप फंड में सबसे ज्यादा निवेश
2026 की पहली छमाही में फ्लेक्सीकैप, स्मॉलकैप और मिडकैप फंड निवेशकों की पसंद बने रहे. इन तीनों श्रेणियों ने मिलकर करीब ₹1.8 लाख करोड़ के कुल शुद्ध इक्विटी निवेश में लगभग 60 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की. वहीं, मौजूदा योजनाओं में एकमुश्त निवेश बढ़ने से भी इक्विटी फंड्स में कुल निवेश को मजबूती मिली.
एकमुश्त निवेश ₹2.5 लाख करोड़ तक पहुंचा
SIP, एकमुश्त निवेश और NFO के जरिए इक्विटी फंड्स में आए कुल निवेश के विश्लेषण से पता चलता है कि 2026 की पहली छमाही में अनुमानित एकमुश्त निवेश बढ़कर ₹2.5 लाख करोड़ हो गया. यह किसी भी छह महीने की अवधि के लिए दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है. इससे पहले 2024 की दूसरी छमाही में एकमुश्त निवेश ₹2.6 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था.
वहीं, 2026 की पहली छमाही में शुद्ध इक्विटी निवेश करीब ₹1.8 लाख करोड़ रहा, जो पिछली छह महीने की अवधि के मुकाबले लगभग 5 फीसदी कम है. बावजूद इसके, निवेशकों का भरोसा इक्विटी म्यूचुअल फंड बाजार में कायम रहा है.
गुरुवार को बम्बे स्टक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 21.86 अंक गिरकर 74,314.59 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 53 अंक की बढ़त के साथ 23,270.60 पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत सपाट से हल्की बढ़त के साथ होने के संकेत मिल रहे हैं. गिफ्ट निफ्टी 23,345 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो गुरुवार के निफ्टी बंद स्तर से करीब 13 अंक ऊपर है. अमेरिकी बाजारों में तेजी, एशियाई बाजारों के सकारात्मक रुख और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से घरेलू बाजार को सपोर्ट मिल सकता है. हालांकि, निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक बाजारों के रुझान पर रहेगी.
इससे पहले गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में मिला-जुला कारोबार हुआ. 30 शेयरों वाला बम्बे स्टक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 21.86 अंक यानी 0.03 फीसदी गिरकर 74,314.59 पर बंद हुआ, जबकि 50 शेयरों वाला नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 53 अंक यानी 0.23 फीसदी की बढ़त के साथ 23,270.60 पर पहुंच गया. यानी सेंसेक्स में मामूली कमजोरी रही, जबकि निफ्टी ने लगातार दूसरे सत्र में बढ़त दर्ज की.
एशियाई बाजारों में तेजी
शुक्रवार सुबह एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में खरीदारी देखने को मिली. निवेशकों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से जुड़ी चिंताओं को फिलहाल पीछे रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी कंपनियों में निवेश जारी रखा. जापान का Nikkei 225 करीब 0.56 फीसदी और दक्षिण कोरिया का Kospi करीब 2.06 फीसदी की बढ़त में कारोबार कर रहा था. एशियाई बाजारों की यह तेजी भारतीय बाजार के शुरुआती सेंटीमेंट के लिए अहम संकेत है.
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को नरमी देखने को मिली. पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं कुछ कम होने और वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग मिलने की उम्मीद के बीच कच्चे तेल पर दबाव रहा. एशियाई कारोबार के दौरान Intercontinental Exchange पर सितंबर Brent Futures करीब 104.02 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.
इस बीच Gold Futures में 0.32 फीसदी की गिरावट रही, जबकि Silver Futures 0.21 फीसदी की बढ़त में रहा. कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाजार के लिए खास तौर पर अहम हैं, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है.
गुरुवार को सेंसेक्स के 21 शेयरों में तेजी
गुरुवार के कारोबार में सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 21 बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 9 शेयरों में गिरावट रही. टाटा स्टील 2.82 फीसदी की तेजी के साथ टॉप गेनर रहा. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड 2.38 फीसदी, इंडिगो 2.32 फीसदी, इटरनल 2.24 फीसदी, मारुति 1.64 फीसदी और एशियन पेंट्स 1.45 फीसदी चढ़े.
दूसरी ओर, एचडीएफसी बैंक 1.30 फीसदी की गिरावट के साथ प्रमुख लूजर रहा. टाइटन 1.14 फीसदी, आईसीआईसीआई बैंक 1.03 फीसदी, एसबीआई 0.67 फीसदी, भारती एयरटेल 0.52 फीसदी और एक्सिस बैंक 0.47 फीसदी फिसले.
बैंकिंग शेयरों में दबाव
गुरुवार को बैंकिंग शेयरों में दबाव देखने को मिला. बीएसई बैंक इंडेक्स 318.11 अंक गिरकर 63,330.49 पर बंद हुआ. एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और एक्सिस बैंक जैसे प्रमुख बैंकिंग शेयरों में गिरावट रही. निफ्टी में HDFC Life 5.05 फीसदी की तेजी के साथ टॉप गेनर रहा, जबकि ONGC 1.85 फीसदी की गिरावट के साथ प्रमुख लूजर रहा.
आज इन शेयरों पर रहेगी नजर
आज कई कंपनियों से जुड़ी अहम कारोबारी घोषणाओं का असर उनके शेयरों पर देखने को मिल सकता है. Bharat Forge ने QIP के जरिए फंड जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है और इसका फ्लोर प्राइस 1,947.70 रुपये प्रति शेयर तय किया है. Coforge को अलग-अलग बिजनेस वर्टिकल और भौगोलिक क्षेत्रों से रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद है, जबकि कंपनी की बड़ी डील्स की पाइपलाइन मजबूत बनी हुई है. Tata Trusts ने Tata Sons की संभावित लिस्टिंग को लेकर कहा है कि उन्होंने होल्डिंग कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने पर सहमति नहीं दी है और बोर्ड सभी विकल्पों पर विचार करेगा. Zee Entertainment के शेयरधारकों ने AGM में पांच निदेशकों की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दी है.
Bharat Electronics (BEL) को 26 अगस्त के बाद से 648 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऑर्डर मिले हैं, जिनमें लेजर आधारित IR जैमर, कम्युनिकेशन इक्विपमेंट, साइबर सिक्योरिटी सॉल्यूशंस और AI आधारित सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस शामिल हैं. InterGlobe Aviation (IndiGo) ने अतिरिक्त सामान, शिशु टिकट, बिना अभिभावक यात्रा करने वाले बच्चों और Fast Forward सुविधा से जुड़े शुल्क में बदलाव किया है. Gland Pharma में BofA Securities Europe SA ने करीब 42.4 करोड़ रुपये में 1.5 लाख शेयर खरीदे हैं.
Petronet LNG ने Gruner Renewable Energy के साथ 50:50 ज्वाइंट वेंचर बनाने को मंजूरी दी है. इसके तहत देशभर में 10 CBG प्लांट लगाने की योजना है और कुल अनुमानित पूंजीगत खर्च करीब 1,200 करोड़ रुपये बताया गया है. Wipro ने Aramco और SAP के साथ मिलकर एसेट-इंटेंसिव कंपनियों के लिए Wipro STO360 सॉल्यूशन लॉन्च किया है. GPT Infraprojects को RVNL से रेलवे ब्रिज के निर्माण के लिए 483.72 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है. Federal Bank के बोर्ड ने 500 मिलियन डॉलर तक के Medium-Term Note Programme को मंजूरी दी है. वहीं PTC India ने NLC India Renewables के साथ मिलकर NIRL PTC Renewables नाम से ज्वाइंट वेंचर बनाया है, जिसमें PTC India की 26 फीसदी और NLC India Renewables की 74 फीसदी हिस्सेदारी होगी.
आगे बाजार की दिशा किन संकेतों पर निर्भर करेगी?
शुक्रवार को घरेलू बाजार के लिए शुरुआती संकेत सकारात्मक से सपाट हैं. GIFT Nifty में मामूली बढ़त, एशियाई बाजारों में तेजी और अमेरिकी बाजारों की मजबूत क्लोजिंग बाजार को सपोर्ट दे सकती है. दूसरी ओर, कच्चे तेल, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और वैश्विक ब्याज दरों से जुड़े संकेत कारोबार के दौरान बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए शुक्रवार के सत्र में निवेशकों की नजर शुरुआती कारोबार के साथ-साथ सेक्टर और शेयर आधारित गतिविधियों पर भी रहेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
रूस और अमेरिका से आए जन्मदिन संदेश ऐसे समय में आए हैं, जब बदलते वैश्विक आर्थिक संबंधों के बीच भारत रणनीतिक रिश्तों, व्यापार हितों और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन साध रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 76वें जन्मदिन पर गुरुवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुभकामनाएं दीं. दोनों नेताओं के संदेशों में अंतरराष्ट्रीय मामलों में मोदी की भूमिका और भारत के साथ रूस तथा अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को रेखांकित किया गया. प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन 17 सितंबर, 2026 को है.
पुतिन ने अपने संदेश में कहा कि मोदी अपने देशवासियों के बीच “सही मायने में गहरे सम्मान” का आनंद लेते हैं और “वैश्विक मंच पर उनका काफी प्रभाव” है. रूसी राष्ट्रपति ने भारत और रूस के बीच मॉस्को द्वारा “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” के रूप में वर्णित संबंधों को मजबूत करने में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका का भी उल्लेख किया. पुतिन का यह संदेश 11 सितंबर को नई दिल्ली में मोदी के साथ हुई उनकी बैठक के कुछ दिनों बाद आया है. इस बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की थी.
भारत और रूस ने 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को करीब 70 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है.
अमेरिका के साथ रिश्तों पर नजर
ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं अमेरिकी दूतावास के माध्यम से दी गईं. दूतावास ने संदेश में कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देते हैं.” संदेश में आने वाले वर्ष के लिए मोदी के अच्छे स्वास्थ्य और खुशियों की भी कामना की गई.
यह संदेश ऐसे समय आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर बातचीत जारी है और वॉशिंगटन रूस से भारत की ऊर्जा खरीद को लेकर दबाव बना रहा है. हालिया अमेरिकी विधायी कार्रवाई के बाद रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों से जुड़े अतिरिक्त टैरिफ की संभावना भी सामने आई है.
आर्थिक रिश्तों पर बढ़ा फोकस
कारोबारी क्षेत्र के लिए इन घटनाक्रमों का व्यापक महत्व इस बात में है कि भारत अपनी ऊर्जा और व्यापारिक प्राथमिकताओं को सुरक्षित रखते हुए दोनों प्रमुख शक्तियों के साथ आर्थिक संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.
उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि आपूर्ति श्रृंखलाओं, ऊर्जा बाजारों और टैरिफ नीतियों में लगातार बदलाव के बीच भारत की विभिन्न देशों के साथ विविध साझेदारियां बनाए रखने की क्षमता महत्वपूर्ण बनी रहेगी.
भारत-रूस संबंधों में ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है, जबकि अमेरिका भारत के लिए एक अहम बाजार और निवेश साझेदार बना हुआ है. ऐसे में कारोबारी जगत राजनयिक घटनाक्रमों के साथ-साथ टैरिफ में बदलाव, ऊर्जा के प्रवाह और सीमा-पार निवेश से जुड़े घटनाक्रमों पर भी नजर रख रहा है.
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने कहा- चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल नहीं लेने का फैसला पहले ही स्वीकार किया जा चुका था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने गुरुवार को कंपनी की बोर्ड बैठक में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का विरोध किया. उन्होंने तर्क दिया कि चंद्रशेखरन का पहले दूसरा कार्यकाल नहीं लेने का फैसला बहुमत शेयरधारक द्वारा पहले ही स्वीकार किया जा चुका था और अब उत्तराधिकार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए.
बोर्ड के समक्ष पेश किए गए एक बयान में नोएल टाटा ने कहा कि चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को बोर्ड को सूचित किया था कि 20 फरवरी, 2027 को उनका मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे.
नोएल टाटा ने कहा, “यह उनका अपना फैसला था. यह स्वतंत्र रूप से लिया गया था और स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया था.” उन्होंने कहा कि “यह फैसला इस बोर्ड ने उनसे नहीं मांगा था, न ही यह इस बोर्ड के किसी प्रस्ताव का विषय था और न ही यह किसी समीक्षा प्रक्रिया का परिणाम था.”
इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन के फैसले को स्वीकार कर लिया और टाटा संस से कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार उत्तराधिकारी नियुक्त करने के लिए एक चयन समिति गठित करने को कहा.
नोएल टाटा ने कहा कि इस फैसले को सार्वजनिक भी किया गया था और “ग्रुप के कर्मचारियों, उसके ऋणदाताओं, उसके कारोबारी साझेदारों और बाजार ने इसी आधार पर आगे कदम बढ़ाया है. बहुमत शेयरधारक ने भी ऐसा ही किया है. अब पिछला पन्ना पलट चुका है.”
नोएल टाटा ने दोबारा नियुक्ति पर उठाई आपत्ति
नोएल टाटा ने कहा, “इस बैठक में दोबारा नियुक्ति के लिए अब कोई प्रस्ताव लाना इस बोर्ड से एक साथ तीन चीजों को दरकिनार करने के लिए कहेगा: चेयरमैन का खुद का स्पष्ट रूप से बताया गया फैसला, बहुमत शेयरधारक द्वारा उस फैसले की स्वीकृति और वह आगे की प्रक्रिया जिसे उस शेयरधारक ने इस कंपनी को शुरू करने के लिए कहा है.”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या बोर्ड चेयरमैन पद पर विचार कर सकता है, जबकि टाटा संस के निदेशक के रूप में चंद्रशेखरन की स्थिति का समाधान अभी नहीं हुआ है. उनके बयान के अनुसार, जिस आम बैठक में इस सवाल का फैसला होना था, वह कोरम पूरा नहीं होने के कारण आगे नहीं बढ़ सकी.
नोएल टाटा ने यह भी कहा कि अगर बाद में यह पाया गया कि चंद्रशेखरन के निदेशक पद की स्थिति अनसुलझी रहने के दौरान चेयरमैन पद पर फैसला लिया गया था, तो यह फैसला “गंभीर कानूनी चुनौती के दायरे में आ सकता है.”
बाद में टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के लिए लाया गया बोर्ड प्रस्ताव “कानूनी रूप से शून्य” था. ट्रस्ट्स ने कहा कि चार निदेशकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि नोएल टाटा ने इसके खिलाफ वोट दिया. ट्रस्ट्स ने तर्क दिया कि आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार चेयरमैन की नियुक्ति या दोबारा नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों के बहुमत का समर्थन जरूरी है.
ट्रस्ट्स ने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन का दिया हवाला
ट्रस्ट्स के बयान के अनुसार, संबंधित प्रक्रिया चेयरमैन की पहली नियुक्ति और मौजूदा चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति, दोनों पर लागू होती है. इसमें आगे कहा गया कि बोर्ड द्वारा ऐसे प्रस्ताव पर विचार किए जाने के समय दोनों ट्रस्ट नामित निदेशकों का मौजूद रहना जरूरी है और प्रस्ताव को वैध होने के लिए दोनों का पक्ष में मतदान करना आवश्यक है.
नोएल टाटा ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ से प्राप्त एक कानूनी राय भी बोर्ड के समक्ष पेश की, जिसमें ट्रस्ट्स के रुख की शुद्धता से संबंधित राय दी गई थी. टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि बोर्ड ने इस राय पर ध्यान नहीं दिया.
अपने बयान में नोएल टाटा ने कहा कि चंद्रशेखरन के फैसले को ट्रस्ट्स की स्वीकृति औपचारिक रूप से कंपनी को बता दी गई थी और अब कंपनी को उत्तराधिकार की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए. उन्होंने कहा, “पन्ना पलट चुका है. अब आगे बढ़ने का समय है.”
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि वह व्यवस्थित नेतृत्व परिवर्तन और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए प्रतिबद्ध हैं.
कृषि, रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर सर्वे और आपदा प्रबंधन तक बढ़ रहा ड्रोन का इस्तेमाल, नीति सुधार, मैन्युफैक्चरिंग, स्किलिंग और उद्यमिता से सेक्टर को मिल रही रफ्तार
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर भारत की विकास यात्रा के उन क्षेत्रों पर नजर डालना महत्वपूर्ण है, जहां तकनीक और उद्यमिता मिलकर नए अवसर पैदा कर रहे हैं. ड्रोन सेक्टर इसका एक प्रमुख उदाहरण है. पिछले एक दशक में भारत में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल केवल उभरती टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर, भूमि सर्वेक्षण, रक्षा, आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक सेवाओं तक इसका दायरा बढ़ा है.
भारत की आर्थिक प्रगति अब केवल अर्थव्यवस्था के आकार से नहीं, बल्कि इनोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में घरेलू कंपनियों और उद्यमियों की बढ़ती भूमिका से भी जुड़ी है. स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक, स्वदेशी मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी आधारित विकास को बढ़ावा देने वाली पहलों ने ऐसी कंपनियों के लिए अवसर तैयार किए हैं, जो देश की बड़ी चुनौतियों के समाधान विकसित करने के साथ वैश्विक बाजारों में भी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं.
कृषि से लेकर रक्षा तक ड्रोन का बढ़ता इस्तेमाल
ड्रोन तकनीक ने भारत में कृषि क्षेत्र में विशेष रूप से अपनी उपयोगिता साबित की है. फसलों पर निगरानी, कीटनाशकों और उर्वरकों के छिड़काव तथा कृषि सर्वेक्षण जैसे कामों में ड्रोन के इस्तेमाल से खेती में तकनीक का दायरा बढ़ा है.
सरकार की ‘नमो ड्रोन दीदी’ पहल के जरिए भी ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक को पहुंचाने और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए नए आजीविका अवसर पैदा करने पर जोर दिया गया है. वहीं, ‘स्वामित्व’ (SVAMITVA) जैसी योजनाओं में ड्रोन के जरिए बड़े पैमाने पर भूमि और संपत्ति का सर्वेक्षण किया गया है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड तैयार करने और संपत्ति के अधिकारों को दर्ज करने में तकनीक के इस्तेमाल का उदाहरण सामने आया है.
‘किसान ड्रोन यात्रा’ से बढ़ा भरोसा
ड्रोन क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों के लिए सरकार की नीतियों और विभिन्न कार्यक्रमों ने बाजार तैयार करने में भूमिका निभाई है. गरुड़ एयरोस्पेस के संस्थापक और सीईओ अग्निश्वर जयप्रकाश के मुताबिक, कंपनी की सरकार के ड्रोन विजन के साथ यात्रा ‘किसान ड्रोन यात्रा’ से शुरू हुई, जब प्रधानमंत्री मोदी ने देशभर में 100 किसान ड्रोन की तैनाती की शुरुआत की थी.
इसके बाद कंपनी ने ‘नमो ड्रोन दीदी’ कार्यक्रम में भी भागीदारी की. कंपनी के अनुसार, उसके द्वारा निर्मित किसान ड्रोन महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को वितरित किए गए ड्रोन में शामिल रहे हैं.
ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ाने के साथ-साथ इस क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है. ड्रोन दीदियों, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और ट्रेन-द-ट्रेनर जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्किलिंग और क्षमता निर्माण की पहल की जा रही है.
तकनीक से आगे रोजगार और उद्यमिता का अवसर
ड्रोन सेक्टर का विस्तार केवल नई तकनीक के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है. इसके साथ मैन्युफैक्चरिंग, ऑपरेशन, ट्रेनिंग, मेंटेनेंस और ड्रोन आधारित सेवाओं में रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी बन रहे हैं.
कृषि के अलावा रक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर, आपदा प्रबंधन, लॉजिस्टिक्स और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में ड्रोन के संभावित इस्तेमाल का दायरा बढ़ रहा है. ऐसे में आने वाले वर्षों में ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़े कारोबार और सेवाओं के लिए नए बाजार विकसित होने की संभावना है.
‘Made in India’ से वैश्विक तकनीक तक
भारत के ड्रोन उद्योग के सामने अगला लक्ष्य केवल देश में ड्रोन का निर्माण करना नहीं, बल्कि ऐसी तकनीक विकसित करना है जिसे वैश्विक बाजारों में भी इस्तेमाल किया जा सके. इसे ‘Made in India’ से आगे बढ़कर ‘Designed, Developed and Deployed from India for the World’ की दिशा में कदम के तौर पर देखा जा रहा है.
भारत के 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य के संदर्भ में टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों की भूमिका अहम हो सकती है. ड्रोन सेक्टर का अनुभव दिखाता है कि नीतिगत समर्थन, उद्यमिता और तकनीकी विकास साथ मिलकर किस तरह किसी उभरते क्षेत्र को व्यापक आर्थिक और सामाजिक इस्तेमाल की दिशा में ले जा सकते हैं.
डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी विचार हैं और जरूरी नहीं कि वे प्रकाशन के विचारों को प्रतिबिंबित करते हों.
अतिथि लेखक: अग्निश्वर जयप्रकाश, फाउंडर और सीईओ, गरुड़ एयरोस्पेस
टाटा संस के बोर्ड की गुरुवार को करीब तीन घंटे तक बैठक हुई. बैठक में कंपनी की लिस्टिंग और चेयरमैन के कार्यकाल से जुड़े अहम प्रस्तावों पर चर्चा हुई. बोर्ड की मंजूरी के बाद टाटा संस के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के भविष्य को लेकर गुरुवार को बोर्ड बैठक में दो अहम फैसले किए गए. बोर्ड ने कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की दिशा में आगे बढ़ने को मंजूरी दे दी है. साथ ही एन चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के लिए चेयरमैन बनाए रखने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल गई है. उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होने वाला है.
लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ेगी टाटा संस
टाटा संस के बोर्ड की गुरुवार को करीब तीन घंटे तक बैठक हुई. बैठक में कंपनी की लिस्टिंग और चेयरमैन के कार्यकाल से जुड़े अहम प्रस्तावों पर चर्चा हुई. बोर्ड की मंजूरी के बाद टाटा संस के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की दिशा में आगे की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है.
टाटा संस लंबे समय से लिस्टिंग को लेकर चर्चा में रही है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के चलते भी कंपनी की लिस्टिंग का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है. टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और समूह की कई बड़ी कंपनियों में इसकी हिस्सेदारी है.
नोएल टाटा की राय से अलग रहा बोर्ड का फैसला
सूत्रों के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा दोनों मुद्दों पर बोर्ड के अन्य सदस्यों से अलग राय रखते थे. वह टाटा संस को निजी कंपनी के तौर पर बनाए रखने के पक्ष में थे. इसके अलावा वह एन चंद्रशेखरन को पांच साल का एक और कार्यकाल दिए जाने के पक्ष में भी नहीं थे. हालांकि, बोर्ड के अन्य सदस्यों के समर्थन के चलते लिस्टिंग और चंद्रशेखरन के कार्यकाल से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी मिल गई.
RBI के नियमों से बढ़ा लिस्टिंग का दबाव
टाटा संस की लिस्टिंग का मुद्दा भारतीय रिजर्व बैंक के नियामकीय ढांचे से भी जुड़ा है. कंपनी ने कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर अपना रजिस्ट्रेशन खत्म करने की मांग की थी, जिसे RBI ने स्वीकार नहीं किया. इसके बाद कंपनी की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग को लेकर चर्चा तेज हुई.
टाटा संस की बाजार में लिस्टिंग इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह टाटा समूह की मुख्य होल्डिंग कंपनी है. कंपनी के पास समूह की कई प्रमुख कंपनियों में हिस्सेदारी है. ऐसे में लिस्टिंग होने पर यह भारतीय शेयर बाजार की बड़ी लिस्टिंग में शामिल हो सकती है.
चंद्रशेखरन को मिलेगा पांच साल का नया कार्यकाल
बोर्ड ने एन चंद्रशेखरन को पांच साल का नया कार्यकाल देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है. उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना है. इससे पहले चंद्रशेखरन ने अगले कार्यकाल के लिए पद पर बने रहने की इच्छा नहीं जताई थी. हालांकि, कंपनी की नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी ने उनसे अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया था.
अब बोर्ड की मंजूरी के बाद चंद्रशेखरन के अगले कार्यकाल और टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग से जुड़े आगे के कदम महत्वपूर्ण होंगे.
टाटा संस की लिस्टिंग क्यों है अहम?
टाटा संस की लिस्टिंग से निवेशकों को टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी में सीधे निवेश का अवसर मिल सकता है. कंपनी की विभिन्न टाटा समूह कंपनियों में हिस्सेदारी को देखते हुए इसकी संभावित लिस्टिंग को बाजार में लंबे समय से करीब से देखा जा रहा है. हालांकि, लिस्टिंग की मंजूरी के बाद भी वास्तविक सूचीबद्धता तक नियामकीय मंजूरियों, प्रक्रिया और अन्य आवश्यक कदमों को पूरा करना होगा.
15 अक्टूबर से लागू होने वाले नए MDR ढांचे में 2,000 रुपये से अधिक के पात्र UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी शुल्क लगेगा. GTRI का कहना है कि कम मार्जिन पर काम करने वाले छोटे कारोबारियों के भुगतान व्यवहार पर इसका असर पड़ सकता है.*
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने से छोटे कारोबारी और कीमत को लेकर संवेदनशील ग्राहक एक बार फिर नकद भुगतान की ओर रुख कर सकते हैं. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने यह चिंता जताई है. नया MDR ढांचा 15 अक्टूबर से लागू होने वाला है.
नए ढांचे के तहत 2,000 रुपये से अधिक के पात्र पर्सन-टू-मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी शुल्क लगेगा. इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय की गई है. इस शुल्क का भुगतान मर्चेंट को करना होगा. वहीं, पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन और 2,000 रुपये तक के UPI भुगतान इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे.
कुछ क्षेत्रों में 5 रुपये का रियायती MDR
रेलवे, टेलीकॉम सेवाओं, बीमा और ईंधन जैसे कुछ निर्धारित क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का रियायती MDR लागू होगा. GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव के मुताबिक, कम मार्जिन पर काम करने वाले कारोबारियों के लिए छोटी सी अतिरिक्त लागत भी भुगतान के तरीके को प्रभावित कर सकती है.
उनका कहना है कि अगर UPI स्वीकार करने पर सीधे तौर पर लागत आने लगती है तो कीमत के प्रति संवेदनशील कारोबारी नकद भुगतान को प्राथमिकता देने पर विचार कर सकते हैं.
UPI को मुफ्त रखने की लागत पर भी सवाल
GTRI ने UPI के रखरखाव की लागत को मर्चेंट से वसूलने के औचित्य पर भी सवाल उठाया है. रिसर्च समूह का अनुमान है कि UPI को मुफ्त रखने पर सरकार को हर साल करीब 2,000-2,500 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं.
GTRI के अनुसार, इस खर्च को डिजिटल पेमेंट से होने वाले व्यापक आर्थिक लाभों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. UPI से नकदी पर निर्भरता कम करने, अर्थव्यवस्था के औपचारिकीकरण और कारोबार के लिए ट्रेस करने योग्य ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड तैयार करने में मदद मिलती है.
वहीं, सरकार का कहना है कि संशोधित ढांचे का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल तैयार करना है, जबकि कम मूल्य वाले ट्रांजैक्शन को सुरक्षित रखा गया है. नए ढांचे में पर्सन-टू-पर्सन भुगतान भी मुफ्त रहेगा.
पेमेंट कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा पर भी चिंता
GTRI ने MDR से मिलने वाले राजस्व के पेमेंट प्लेटफॉर्म के बीच वितरण और इससे प्रतिस्पर्धा पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई है. समूह का कहना है कि मर्चेंट ट्रांजैक्शन से बनने वाला राजस्व बड़े पेमेंट ऐप्स को फायदा पहुंचा सकता है, इसलिए MDR आय के वितरण और बाजार में एकाग्रता पर स्पष्टता जरूरी है.
यह मुद्दा थर्ड-पार्टी UPI ऐप्स के लिए प्रस्तावित 30 फीसदी बाजार हिस्सेदारी की सीमा को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आया है. PhonePe और Google Pay की UPI ट्रांजैक्शन में बड़ी हिस्सेदारी है, जबकि बाजार हिस्सेदारी की सीमा लागू करने को टाल दिया गया है.
GTRI ने UPI और RuPay को मुफ्त रखने की मांग की
GTRI ने UPI और RuPay भुगतान को मुफ्त रखने और डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर की लागत को पूरा करने के लिए वैकल्पिक तरीकों पर विचार करने की मांग की है.
रिसर्च समूह ने कहा है कि भुगतान व्यवस्था में किसी भी तरह के शुल्क संबंधी बदलाव का आकलन छोटे कारोबारियों और डिजिटल भुगतान को अपनाने पर पड़ने वाले संभावित असर को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए.
बुधवार को BSE सेंसेक्स 332.63 अंक यानी 0.45 फीसदी की बढ़त के साथ 74,336.45 पर बंद हुआ. वहीं, NSE निफ्टी 99 अंक यानी 0.43 फीसदी चढ़कर 23,217.60 के स्तर पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार दबाव के बीच खरीदारी देखने को मिली. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 332.63 अंक यानी 0.45 फीसदी की बढ़त के साथ 74,336.45 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 99 अंक यानी 0.43 फीसदी चढ़कर 23,217.60 के स्तर पर पहुंच गया. सेंसेक्स के 30 शेयरों में 18 बढ़त के साथ, जबकि 12 गिरावट में बंद हुए. ITC 2.46 फीसदी की बढ़त के साथ सेंसेक्स का सबसे ज्यादा चढ़ने वाला शेयर रहा. दूसरी ओर, TCS में 2.60 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
एक दिन पहले बड़ी गिरावट के बाद लौटी खरीदारी
16 सितंबर की तेजी से पहले 15 सितंबर को बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली थी. सेंसेक्स दिन के ऊपरी स्तर 75,436.44 से करीब 1,430 अंक फिसलकर 74,003.82 पर बंद हुआ था. निफ्टी भी 23,592.85 के इंट्राडे हाई से नीचे आकर 23,118.60 पर बंद हुआ था. पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली उस समय बाजार के प्रमुख दबाव वाले कारण रहे.
आज किन संकेतों पर रहेगी नजर?
बीते कारोबार में बढ़त के बाद अब आज 17 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर ग्लोबल मार्केट के संकेतों पर रहेगी. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव भारतीय बाजार के लिए अहम रहेगा. इसके अलावा विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, रुपये की चाल और घरेलू बाजार में शुरुआती खरीदारी-बिकवाली भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण संकेत होंगे.
कल किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा हलचल?
16 सितंबर को HDFC Life 2.73 फीसदी की बढ़त के साथ सेंसेक्स के प्रमुख गेनर्स में रहा. SBI Life में 2.65 फीसदी, ITC में 2.46 फीसदी, SBI में 2.24 फीसदी और Axis Bank में 1.93 फीसदी की तेजी रही. वहीं, TCS में 2.76 फीसदी, Wipro में 1.83 फीसदी, Infosys में 1.58 फीसदी, Tech Mahindra में 1.26 फीसदी और L&T में 1.12 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
आज इन शेयरों पर रहेगी नजर
17 सितंबर के कारोबार में Infosys, Alembic Pharmaceuticals, Highway Infrastructure, ITC, Mazagon Dock Shipbuilders, Venus Pipes and Tubes, Gujarat Narmada Valley Fertilizers & Chemicals और Fortis Healthcare समेत कई शेयर फोकस में रह सकते हैं. Infosys ने इंदौर स्थित अपने डेवलपमेंट सेंटर के विस्तार की घोषणा की है, जहां AI, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़ी क्षमताओं को बढ़ाया जाएगा. Alembic Pharmaceuticals की वडोदरा स्थित बायोइक्विवेलेंस फैसिलिटी का USFDA निरीक्षण पूरा हो गया है और Establishment Inspection Report जारी होने के साथ निरीक्षण बंद हो गया है. Highway Infrastructure को UPEIDA से ₹220.66 करोड़ का ऑर्डर मिला है, जिसके तहत कंपनी गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर टोल संचालन और यूजर फीस कलेक्शन करेगी. ITC ने Classic Connect और Gold Flake Superstar सिगरेट की कीमतों में बढ़ोतरी की है. Mazagon Dock Shipbuilders ने महाराष्ट्र के दिघी में प्रस्तावित Greenfield Shipbuilding Industrial Cluster में Anchor Shipyard के तौर पर भागीदारी के लिए NSHIPML के साथ MoU किया है. Venus Pipes and Tubes ने 18 निवेशकों को ₹1,670 प्रति शेयर की कीमत पर 22.27 लाख इक्विटी शेयर आवंटित कर करीब ₹372 करोड़ जुटाए हैं. Gujarat Narmada Valley Fertilizers & Chemicals ने संजीव कुमार को पांच साल के लिए मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है. Fortis Healthcare ने नई दिल्ली के अशोक विहार में 400 बेड वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए 29 साल का समझौता किया है. कंपनी ने Daiichi Sankyo से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया है.
निवेशकों के लिए आज क्या मायने रखेगा?
16 सितंबर की तेजी के बावजूद बाजार के सामने पश्चिम एशिया तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं. ऐसे में 17 सितंबर को ग्लोबल संकेत, तेल की कीमतें, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार के लिए अहम संकेत रहेंगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
रिलायंस इंडस्ट्रीज के इस बॉन्ड इश्यू का बेस साइज 10,000 करोड़ रुपये है. इसके अलावा कंपनी के पास 2,500 करोड़ रुपये का ग्रीनशू ऑप्शन भी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) घरेलू बॉन्ड बाजार से 12,500 करोड़ रुपये जुटाने जा रही है. कंपनी ने 5 साल की अवधि वाले बॉन्ड इश्यू के जरिए फंड जुटाने की योजना बनाई है. इस इश्यू में देश के कई बड़े बैंक निवेश कर रहे हैं, जबकि 2023 के बाद घरेलू बॉन्ड बाजार में रिलायंस का यह पहला बड़ा इश्यू बताया जा रहा है.
18 सितंबर को बंद होगा बॉन्ड इश्यू
रिलायंस इंडस्ट्रीज के इस बॉन्ड इश्यू का बेस साइज 10,000 करोड़ रुपये है. इसके अलावा कंपनी के पास 2,500 करोड़ रुपये का ग्रीनशू ऑप्शन भी है. यानी निवेशकों की मांग अधिक रहने पर कंपनी अतिरिक्त 2,500 करोड़ रुपये तक जुटा सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 3,000 करोड़ रुपये की राशि एंकर निवेशकों के लिए पहले ही तय की जा चुकी है. इस बॉन्ड पर करीब 7.47 फीसदी ब्याज मिलने की उम्मीद है. इश्यू 18 सितंबर को बंद होगा.
एक्सिस समेत 4 बैंकों की भागीदारी
रिलायंस के इस बॉन्ड इश्यू में कई प्रमुख बैंक हिस्सा ले रहे हैं. इनमें एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और यस बैंक शामिल हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इस डील में सबसे बड़ा हिस्सा एक्सिस बैंक का रहने की उम्मीद है. इसके बाद आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और यस बैंक का स्थान है. हालांकि, रिलायंस इंडस्ट्रीज या संबंधित बैंकों की ओर से इस संबंध में अभी आधिकारिक बयान नहीं आया है.
2023 के बॉन्ड इश्यू से इस बार क्या अलग?
रिलायंस ने 2023 में भी रिटेल बॉन्ड जारी किए थे. उस समय बॉन्ड की अवधि 10 साल थी और LIC ने इसमें महत्वपूर्ण भागीदारी की थी. इस बार बॉन्ड की अवधि पांच साल है. रिपोर्ट के अनुसार, LIC की ओर से इस इश्यू में पहले जैसी भागीदारी देखने को नहीं मिल रही है. वहीं, बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध अतिरिक्त फंड भी इस डील के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बैंकों के पास बढ़ी विदेशी मुद्रा जमा
भारतीय बैंकों के पास उपलब्ध फंड में बढ़ोतरी के पीछे विदेशी मुद्रा जमा भी एक वजह है. रिजर्व बैंक की FCNR-B जमा से जुड़ी विशेष सुविधा के तहत बैंकों ने बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा जुटाई है. 31 अगस्त तक भारतीय बैंकों ने FCNR-B के जरिए 127.2 अरब डॉलर जुटाए थे. इनमें ICICI बैंक की हिस्सेदारी 17.88 अरब डॉलर बताई गई है.
बैंक ऑफ अमेरिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी मुद्रा जमा में वृद्धि से भारतीय बैंकों की फंडिंग स्थिति में सुधार हुआ है. पिछले कुछ वर्षों में बैंक डिपॉजिट की धीमी वृद्धि से दबाव में रहे बैंकों के पास अब कॉरपोरेट लोन, प्रोजेक्ट फाइनेंस और बॉन्ड में निवेश के लिए अधिक फंड उपलब्ध है. ऐसे में बैंकों की बढ़ी हुई फंड उपलब्धता से रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों के लिए घरेलू बॉन्ड बाजार से बड़ी रकम जुटाना आसान हो सकता है.
Systematix Institutional Equities का अनुमान है कि अक्टूबर-नवंबर तक खुदरा महंगाई 6% के पार जा सकती है. खाद्य कीमतों, कच्चे तेल और थोक महंगाई में बढ़ोतरी से महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
महंगाई का दबाव लंबे समय तक बना रहा तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रेपो रेट मौजूदा 5.25% से बढ़कर करीब 6.5% तक जा सकती है. Systematix Institutional Equities की एक रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर-नवंबर तक खुदरा महंगाई 6% के पार जा सकती है, जिससे RBI के 4% के महंगाई लक्ष्य के मुकाबले दबाव बढ़ेगा.
Systematix ने ऊंची थोक महंगाई, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और खाद्य आपूर्ति से जुड़े जोखिमों को महंगाई बढ़ने के प्रमुख कारणों में गिनाया है. ब्रोकरेज का कहना है कि इन कारणों से महंगाई पहले के अनुमान से ज्यादा समय तक RBI के लक्ष्य से ऊपर रह सकती है.
अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़ी
भारत में खुदरा महंगाई अगस्त में बढ़कर 4.82% हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.45% थी. यह लगातार तीसरा महीना है जब CPI महंगाई RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर रही है. इस दौरान कोर महंगाई भी बढ़कर 4.2% हो गई, जो जुलाई में 3.86% थी. इससे संकेत मिलता है कि कीमतों का दबाव सिर्फ खाद्य और ईंधन जैसे अस्थिर घटकों तक सीमित नहीं है. अगस्त में खाद्य महंगाई बढ़कर 5.95% हो गई. ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.23% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 4.31% थी.
थोक महंगाई में भी तेजी
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई अगस्त में बढ़कर 9.92% हो गई, जो जुलाई में 9.78% थी. ईंधन और बिजली की कीमतों में सालाना आधार पर 22.93% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं, मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई बढ़कर 8.37% हो गई. Systematix के मुताबिक, खाद्य आपूर्ति से जुड़े जोखिम और वैश्विक कमोडिटी कीमतों में तेजी आने वाले महीनों में महंगाई को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकती है.
6.5% रेपो रेट का अनुमान क्यों?
Systematix का अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए RBI को करीब 1% की वास्तविक ब्याज दर बनाए रखने की जरूरत पड़ सकती है. इसी आधार पर ब्रोकरेज ने महंगाई लंबे समय तक ऊंची रहने की स्थिति में रेपो रेट के करीब 6.5% तक पहुंचने का अनुमान लगाया है. हालांकि, 6.5% का स्तर Systematix का आकलन है. यह RBI की ओर से रेपो रेट बढ़ाने की कोई घोषित योजना नहीं है. केंद्रीय बैंक का फैसला महंगाई, आर्थिक वृद्धि, लिक्विडिटी और अन्य व्यापक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
सरकारी बॉन्ड यील्ड पर भी असर
ब्रोकरेज का अनुमान है कि अगर रेपो रेट बढ़कर 6.5% तक पहुंचती है तो सरकारी बॉन्ड की यील्ड पर भी ऊपर की ओर दबाव पड़ सकता है. Systematix ने 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड के 7.45-7.50% तक जाने का अनुमान जताया है.
कच्चा तेल और रुपये का दबाव बढ़ा सकता है महंगाई
वैश्विक कमोडिटी बाजार की स्थिति भी महंगाई के लिए जोखिम बनी हुई है. Brent क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है. वहीं, रुपये पर दबाव और आयातित ऊर्जा की बढ़ती लागत घरेलू महंगाई को और प्रभावित कर सकती है. RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए CPI महंगाई का अनुमान 5.1% रखा है. केंद्रीय बैंक ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की अवधि को लेकर अनिश्चितता का भी उल्लेख किया है.
Systematix ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर महंगाई ऊंची बनी रहती है और घरेलू वेतन एवं आय की वृद्धि कमजोर रहती है तो अर्थव्यवस्था में स्टैगफ्लेशन का दबाव बन सकता है. ऐसे में RBI के लिए महंगाई पर काबू पाने और आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. आने वाले समय में RBI की मौद्रिक नीति का रुख इस बात पर काफी हद तक निर्भर करेगा कि हाल में बढ़ी खुदरा और थोक महंगाई अस्थायी है या लंबे समय तक बनी रहने वाली प्रवृत्ति में बदलती है.
हीरो मोटर्स (Hero Motors) के IPO में ₹600 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹400 करोड़ का OFS शामिल है. इश्यू के लिए प्राइस बैंड ₹79-84 प्रति शेयर तय किया गया है और यह 18 सितंबर को बंद होगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ऑटोमोटिव कंपोनेंट और एडवांस्ड मोबिलिटी कंपनी हीरो मोटर्स (Hero Motors) ने अपने ₹1,000 करोड़ के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) से पहले एंकर निवेशकों से करीब ₹300 करोड़ जुटाए हैं. कंपनी ने एंकर निवेशकों को 3.57 करोड़ इक्विटी शेयर ₹84 प्रति शेयर की कीमत पर आवंटित किए हैं, जो IPO प्राइस बैंड की ऊपरी सीमा है. एंकर बुक में ICICI Prudential Life Insurance, Edelweiss Life Insurance, 3P India Equity Fund, Societe Generale और ASAS Global Fund समेत कई संस्थागत निवेशकों ने हिस्सा लिया. म्यूचुअल फंड निवेशकों में ICICI Prudential Smallcap Fund, Kotak MNC Fund और JM Flexi Cap Fund की योजनाएं शामिल हैं.
₹79-84 है IPO का प्राइस बैंड
हीरो मोटर्स ने IPO के लिए ₹79-84 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. ऊपरी कीमत पर कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब ₹3,815 करोड़ बैठता है. IPO का लॉट साइज 178 शेयरों का है, यानी खुदरा निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश ₹14,952 होगा. IPO में ₹600 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹400 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल है. IPO के बाद प्रमोटर की हिस्सेदारी 85.57% से घटकर 61.63% रह जाएगी. कुल इश्यू में 35% हिस्सा खुदरा निवेशकों के लिए, 50% योग्य संस्थागत खरीदारों (QIB) के लिए और बाकी हिस्सा गैर-संस्थागत निवेशकों के लिए आरक्षित है.
GMP करीब 23% पर
हीरो मोटर्स के शेयर का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) करीब ₹19 प्रति शेयर बताया जा रहा है, जो ₹84 के ऊपरी इश्यू प्राइस से लगभग 23% अधिक है. हालांकि, GMP अनौपचारिक बाजार संकेतक है और इसमें तेजी से बदलाव हो सकता है. इसे शेयर की लिस्टिंग कीमत का भरोसेमंद संकेत नहीं माना जाना चाहिए.
कर्ज चुकाने और क्षमता बढ़ाने में होगा फंड का इस्तेमाल
कंपनी फ्रेश इश्यू से मिलने वाली राशि में से ₹190 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी. इसके अलावा ₹200 करोड़ उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर स्थित संयंत्र में क्षमता विस्तार के लिए उपकरण खरीदने पर खर्च किए जाएंगे. बाकी रकम संभावित अधिग्रहण और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जाएगी.
हीरो मोटर्स अमेरिका, यूरोप, भारत और ASEAN क्षेत्र में ऑटोमोटिव ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) के लिए पावरट्रेन सॉल्यूशन डिजाइन और मैन्युफैक्चर करती है. कंपनी का पोर्टफोलियो दोपहिया, ई-बाइक, पैसेंजर और कमर्शियल व्हीकल, ऑफ-रोड व्हीकल और इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) एयरक्राफ्ट से जुड़े इलेक्ट्रिक और पारंपरिक उत्पादों को कवर करता है.
इसके उत्पादों में कंटीन्यूअसली वैरिएबल ट्रांसमिशन (CVT), इलेक्ट्रिक ट्रांसमिशन, इलेक्ट्रिक मोटर, इंटीग्रेटेड ड्राइव यूनिट और गियर सेट शामिल हैं. BMW AG, Ducati Motor Holding, Enviolo International, Formula Motorsport, HUMMINGBIRDEV और HWA AG कंपनी के ग्राहकों में शामिल हैं.
FY26 में मुनाफा 26% बढ़ा
हीरो मोटर्स की FY26 में कुल आय 9% बढ़कर ₹1,216.74 करोड़ रही, जो FY25 में ₹1,111.23 करोड़ थी. इस दौरान कंपनी का कर पश्चात लाभ (PAT) 26% बढ़कर ₹41.17 करोड़ हो गया, जबकि एक साल पहले यह ₹32.80 करोड़ था.
18 सितंबर को बंद होगा IPO
हीरो मोटर्स का IPO 16 सितंबर को खुला है और 18 सितंबर को बंद होगा. शेयरों का अलॉटमेंट 21 सितंबर को होने की उम्मीद है, जबकि NSE और BSE पर लिस्टिंग 23 सितंबर को प्रस्तावित है. IPO के बुक-रनिंग लीड मैनेजर ICICI Securities, DAM Capital Advisors और JM Financial हैं. KFin Technologies IPO का रजिस्ट्रार है.