फाइलिंग एक्सचेंज के अनुसार, वर्तमान में इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज के पास इंटरग्लोब एविएशन में 37.75 प्रतिशत हिस्सेदारी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
शेयर बाजार में बड़ी ब्लॉक डील देखने को मिल सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo) में ये डील देखने को मिल सकती है. जानकारी के अनुसार भाटिया फैमिली की यूनिट इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज ब्लॉक डील के जरिए कंपनी में 2 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी. ब्लॉक डील के जरिए 3293 करोड़ रुपये मूल्य के 77 लाख शेयर बेचे जाएंगे. इस डील का बेस प्राइस 4266 रुपये प्रति शेयर रह सकता है, जो 7 फीसदी के डिस्काउंट पर है.
Interglobe Enterprises के पास 37.75% हिस्सेदारी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह डील शुरू हो चुकी है और भाटिया लगभग 2 फीसदी हिस्सेदारी बेचना चाह रहे हैं. कई सालों में यह पहली बार है कि वह वैल्यू अनलॉक करने और कुछ रिटर्न प्राप्त करने की सोच रहे हैं. एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड के पास वर्तमान में इंटरग्लोब एविएशन में 37.75 प्रतिशत हिस्सेदारी है. पिछले छह महीनों में कंपनी के शेयरों में 55.66 फीसदी की तेजी आई है.
किसके पास कितनी हिस्सेदारी
शेयर होल्डिंग पैटर्न के अनुसार इंटरग्लोब एविएशन में इंटरग्लोब एंटरप्राइजेज की वर्तमान में 37.75 फीसदी हिस्सेदारी है. The Chinkerpoo Family Trust की कंपनी में 13.49 फीसदी हिस्सेदारी है. प्रमोटर्स ने मार्च 2024 तिमाही में अपनी हिस्सेदारी 63.13 फीसदी से घटाकर 57.29 फीसदी कर ली है. म्यूचुअल फंडों ने अपनी हिस्सेदारी 12.30 फीसदी से बढ़ाकर 12.38 फीसदी कर ली है.
शेयर का प्रदर्शन
सोमवार को Interglobe Aviation का शेयर 4.13 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 4,553.80 रुपये पर बंद हुआ. पिछले एक साल में कंपनी के शेयर में 4,553.80 फीसदी की बढ़ोतरी देखने को मिली है. शेयर का 52 वीक हाई 4,609.80 रुपये है. इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड ने मार्च तिमाही में मुनाफे में साल-दर-साल 106 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की,जो बढ़कर 1,894.80 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 919.20 करोड़ रुपये था.
विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर 20% नकद जमा की अनिवार्यता और 20 लाख डॉलर की सीमा को लेकर बैंकों ने RBI से नियमों में बदलाव की मांग की है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय बैंकों ने विदेशी मुद्रा से जुड़े नए नियमों में राहत के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का रुख किया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंकों ने कुछ करेंसी डेरिवेटिव सौदों पर 20% नकद जमा करने की अनिवार्यता के बदले वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव दिया है. इसके साथ ही उन्होंने 20 लाख डॉलर की सीमा हटाने और विदेशी मुद्रा में लिए गए कर्ज के ब्याज भुगतान की हेजिंग पर नियमों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है.
RBI ने 10 अक्टूबर को रुपये पर दबाव कम करने के उद्देश्य से ये उपाय घोषित किए थे. ऊंची तेल कीमतों और विदेशी पूंजी की निकासी के बीच कंपनियों की ओर से भविष्य में डॉलर खरीदने की बढ़ती मांग रुपये पर दबाव डाल रही थी.
20% कैश जमा के बदले सीधे शुल्क का प्रस्ताव
नए नियमों के तहत बैंकों को चालू खाते से जुड़े जोखिमों की हेजिंग के लिए किए जाने वाले कुछ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के अनुमानित मूल मूल्य (नॉशनल वैल्यू) का 20% नकद जमा के रूप में अलग रखना होगा.
बैंकों ने उद्योग संगठन फॉरेन एक्सचेंज डीलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FEDAI) के माध्यम से इस व्यवस्था में बदलाव का प्रस्ताव दिया है. वे चाहते हैं कि नकद जमा की अनिवार्यता के बजाय कंपनियों से एक निश्चित शुल्क लिया जाए, जो फॉरवर्ड डॉलर या अन्य डेरिवेटिव के जरिए हेजिंग करती हैं.
बैंकों का तर्क है कि सीधे शुल्क से हेजिंग की लागत तो बढ़ेगी, लेकिन उनकी ट्रेजरी गतिविधियों में नकदी नहीं फंसेगी. इस अतिरिक्त लागत का बोझ कंपनियों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि बैंक इसे अपने कॉरपोरेट ग्राहकों से वसूल सकते हैं.
20 लाख डॉलर की सीमा हटाने की मांग
बैंकों ने 20 लाख डॉलर की उस सीमा को हटाने की भी मांग की है, जिसके ऊपर संबंधित सौदों पर नकद जमा की शर्त लागू होती है. उनका कहना है कि कंपनियां बड़े हेजिंग सौदों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर इस सीमा से बचने की कोशिश कर सकती हैं.
ऐसे मामलों की निगरानी करना बैंकों के लिए मुश्किल हो सकता है. रॉयटर्स के मुताबिक, बैंक अधिकारियों ने कहा कि कई छोटे सौदों के जरिए नियमों से बचने की कोशिश की पहचान करना आसान नहीं होगा. इसलिए बैंक इस सीमा को लागू करने के तरीके पर भी स्पष्टता चाहते हैं.
विदेशी मुद्रा कर्ज के ब्याज भुगतान पर भी स्पष्टीकरण मांगा
बैंकों ने RBI से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि विदेशी मुद्रा में लिए गए कर्ज पर ब्याज भुगतान के जोखिम से बचाव के लिए किए गए हेजिंग सौदे भी नए नियमों के दायरे में आएंगे या नहीं.
नियमों में विदेशी कर्ज के मूलधन के भुगतान से जुड़ी हेजिंग को शामिल नहीं किया गया है. हालांकि, ब्याज भुगतान के लिए की जाने वाली हेजिंग पर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण बैंक केंद्रीय बैंक से मार्गदर्शन चाहते हैं.
रुपये को स्थिर करने के लिए RBI के कदम
RBI के नए उपायों का उद्देश्य कुछ प्रकार की करेंसी हेजिंग को महंगा बनाकर कंपनियों की फॉरवर्ड डॉलर की मांग कम करना और रुपये पर दबाव घटाना है. केंद्रीय बैंक की घोषणा के बाद सोमवार को रुपये में करीब 1% की मजबूती दर्ज की गई.
इसके अलावा, RBI ने तीन सरकारी तेल विपणन कंपनियों को केंद्रीय बैंक के जरिए सीधे डॉलर खरीदने की सुविधा देने के लिए एक विशेष व्यवस्था भी शुरू की है. इससे इन कंपनियों की डॉलर खरीद का कुछ हिस्सा हाजिर विदेशी मुद्रा बाजार से हटाया जा सकेगा. बैंकों की मांग पर RBI का फैसला अहम होगा, क्योंकि इससे कंपनियों के लिए मुद्रा जोखिम से बचाव की लागत और बैंकों की नकदी प्रबंधन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.
घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती से भारत की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलने का अनुमान है. IMF ने वित्त वर्ष 2027 के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% किया, जबकि वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया संघर्ष और महंगाई का जोखिम बरकरार है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर अपना अनुमान बढ़ा दिया है. ताजा वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 और 2028 में भारत की GDP ग्रोथ 7% रहने की उम्मीद है. पहले FY27 के लिए 6.4% और FY28 के लिए 6.7% वृद्धि का अनुमान था. IMF के इस आकलन को घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से समर्थन मिला है. इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में FY27 के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 7.1% किया था. विश्व बैंक ने भी पिछले सप्ताह इसी वित्त वर्ष के लिए 7.1% वृद्धि का अनुमान जताया था.
घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र से सहारा
IMF के अनुसार, भारत की आर्थिक रफ्तार मजबूत बनी हुई है. बड़े घरेलू बाजार, अनुकूल जनसांख्यिकीय स्थिति और लगातार हो रहे संरचनात्मक सुधारों से भी विकास की संभावनाओं को बल मिल रहा है. घरेलू मांग और सेवा क्षेत्र की मजबूती आर्थिक गतिविधियों को सहारा दे सकती है.
वैश्विक ग्रोथ के अनुमान में मामूली बढ़ोतरी
IMF ने 2026 के लिए वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर का अनुमान 3% से बढ़ाकर 3.1% किया है. हालांकि, 2027 के लिए इसे 3.4% पर बरकरार रखा गया है. 2026 में विकसित अर्थव्यवस्थाओं की ग्रोथ 2.1% रहने का अनुमान है, जो पहले 1.7% था. इसके उलट, उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए अनुमान 3.8% से घटाकर 3.7% कर दिया गया है.
देशों की बात करें तो जर्मनी की ग्रोथ का अनुमान 0.7% से बढ़ाकर 1.3% और ब्रिटेन का 1% से बढ़ाकर 1.3% किया गया है. चीन के लिए 2026 और 2027 के अनुमान क्रमशः 4.5% और 4% हैं. वहीं, 2026 में ब्राजील की अर्थव्यवस्था 2.2% और रूस की 0.9% बढ़ने का अनुमान है.
पश्चिम एशिया संघर्ष से महंगाई का खतरा
IMF ने चेताया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. तनाव लंबा खिंचने पर महंगाई बढ़ने और वैश्विक आर्थिक विकास धीमा पड़ने का जोखिम है.
रिपोर्ट के मुताबिक, बहरीन, इराक, कुवैत और कतर की अर्थव्यवस्थाओं पर ऊर्जा उत्पादन और ढुलाई में रुकावटों का गंभीर असर पड़ सकता है. इन देशों में 2026 के दौरान आर्थिक संकुचन का अनुमान है. सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था के लिए भी अनुमान कमजोर हुआ है. जुलाई में 1.7% वृद्धि की उम्मीद के मुकाबले अब 3.3% गिरावट का अनुमान जताया गया है.
IMF की मुख्य अर्थशास्त्री सिलवाना टेनरेरो के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव लंबा चलने से महंगाई बढ़ सकती है और ग्रोथ पर दबाव पड़ सकता है. सरकारों की कमजोर वित्तीय स्थिति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से मिलने वाले संभावित लाभ को लेकर अनिश्चितता और गंभीर मौसमी घटनाएं भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम हैं.
नीति-निर्माताओं के सामने दोहरी चुनौती
IMF के मुताबिक, संकट का असर देशों पर उनकी ऊर्जा निर्भरता और संघर्ष से दूरी के आधार पर अलग-अलग हो सकता है. ऐसे में सरकारों को महंगाई, कर्ज और वित्तीय जोखिमों से निपटने के साथ बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने पर भी ध्यान देना होगा.
भारत के लिए बढ़ा हुआ ग्रोथ अनुमान घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं आगे भी आर्थिक प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं.
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी बिकवाली देखने को मिली. सेंसेक्स 547 अंक टूटकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में भी 157 अंकों की गिरावट दर्ज की गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार मंगलवार, 13 अक्टूबर को कई घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच कारोबार करेगा. सोमवार को बाजार में शुरुआती तेजी के बावजूद आखिरी घंटों में बिकवाली हावी रही. आज गिफ्ट निफ्टी में तेजी से बाजार को शुरुआती सहारा मिलने की उम्मीद है, लेकिन वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों की सतर्कता बनी रह सकती है. इसके अलावा, सितंबर में खुदरा महंगाई बढ़कर 5.54 फीसदी पहुंचने से भी बाजार की धारणा प्रभावित हो सकती है. ऐसे में निवेशकों की नजर गिफ्ट निफ्टी, एशियाई बाजारों, कच्चे तेल, विदेशी निवेशकों के रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी.
गिफ्ट निफ्टी में तेजी, क्या आज हरे निशान में खुलेगा बाजार?
मंगलवार सुबह गिफ्ट निफ्टी करीब 22,423 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. यह पिछले संदर्भ स्तर से करीब 40-50 अंक ऊपर था. इससे भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक शुरुआत के संकेत मिले. हालांकि, शुरुआती संकेतों के बावजूद बाजार में तेजी टिकेगी या नहीं, यह वैश्विक बाजारों के रुख और घरेलू निवेशकों की खरीदारी पर निर्भर करेगा. बाजार के लिए चिंता की बात यह है कि एशियाई बाजारों में मंगलवार सुबह तेज गिरावट देखने को मिली. वहीं, अमेरिकी बाजारों में सोमवार को मिला-जुला कारोबार रहा. पश्चिम एशिया में तनाव, महंगे कच्चे तेल और महंगाई से जुड़ी चिंताओं के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.
कल शेयर बाजार में क्या हुआ था?
सोमवार, 12 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ. कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स करीब 400 अंक चढ़ा था, लेकिन बाद में बिकवाली बढ़ने से बाजार की बढ़त खत्म हो गई. बीएसई का सेंसेक्स 547.65 अंक यानी 0.76 फीसदी गिरकर 71,924.68 पर बंद हुआ. कारोबार के दौरान यह अपने दिन के उच्चतम स्तर से करीब 950 अंक नीचे आ गया. वहीं, एनएसई का निफ्टी 50 भी 157.10 अंक यानी 0.70 फीसदी फिसलकर 22,363.35 पर बंद हुआ.
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से केवल 7 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 23 में गिरावट दर्ज की गई. निफ्टी 50 के 13 शेयरों में तेजी रही, 36 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए और एक शेयर में कोई बदलाव नहीं हुआ.
पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली बाजार पर दबाव डालने वाले प्रमुख कारक रहे. आईटी और एफएमसीजी शेयरों में कमजोरी ने भी प्रमुख सूचकांकों की गिरावट में योगदान दिया.
एशियाई बाजारों में गिरावट, कोस्पी और निक्केई दबाव में
मंगलवार सुबह एशियाई बाजारों में बिकवाली देखने को मिली. दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती कारोबार में करीब 4.3 फीसदी गिर गया, जबकि जापान का निक्केई 225 करीब 2.3 फीसदी नीचे कारोबार करता दिखा. दक्षिण कोरिया के कोस्डैक में भी तेज गिरावट दर्ज की गई.
अमेरिकी टेक शेयरों में कमजोरी का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया. जापान और दक्षिण कोरिया की कई टेक्नोलॉजी तथा सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली. क्षेत्रीय बाजारों में कमजोरी के बीच भारतीय निवेशक भी सतर्क रह सकते हैं.
कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती महंगाई बनी चिंता
कच्चे तेल की कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए अहम जोखिम बनी हुई हैं. सोमवार को ब्रेंट क्रूड करीब 1.8 फीसदी बढ़कर 106.65 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था. मंगलवार सुबह इसमें कुछ नरमी आई और ब्रेंट क्रूड करीब 106.10 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा.
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. ऐसे में तेल की कीमतें ऊंची रहने से आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव पड़ सकता है और कंपनियों की लागत में इजाफा हो सकता है. इससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंताएं भी बढ़ सकती हैं. महंगाई के मोर्चे पर भी बाजार के लिए संकेत उत्साहजनक नहीं हैं. भारत में सितंबर की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54 फीसदी हो गई, जो अगस्त में 4.83 फीसदी थी. महंगाई में इस बढ़ोतरी से रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ सकती हैं.
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार इस समय एक अहम मोड़ पर है. हालिया रिकवरी के बाद निवेशकों को आगे खरीदारी की उम्मीद थी, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण बाजार में तेजी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. विशेषज्ञों ने विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली को बाजार के लिए बड़ी चिंता बताया. उनके मुताबिक, केवल एक या दो कारोबारी सत्रों में तेजी आने से बाजार में ट्रेंड बदलने की पुष्टि नहीं की जा सकती.
आज किन शेयरों पर रहेगी नजर?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मंगलवार, 13 अक्टूबर को HCL टेक्नोलॉजीज, RBL बैंक, ICICI प्रूडेंशियल AMC, IRCON इंटरनेशनल और नजारा टेक्नोलॉजीज समेत कई शेयर फोकस में रह सकते हैं. HCL टेक्नोलॉजीज ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 5,132 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान तिमाही से 21.2 फीसदी अधिक है. कंपनी ने 12 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड की घोषणा की है और AI कंपनी Anthropic के साथ साझेदारी भी की है. RBL बैंक का सितंबर तिमाही का नेट प्रॉफिट तीन गुना से अधिक बढ़कर 481.7 करोड़ रुपये रहा. वहीं, ICICI प्रूडेंशियल AMC ने मुनाफे में 6.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की और 30 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड का ऐलान किया. IRCON इंटरनेशनल को ईस्ट सेंट्रल रेलवे से 862.46 करोड़ रुपये का EPC कॉन्ट्रैक्ट मिला है. नजारा टेक्नोलॉजीज में वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर हुए बदलावों के कारण भी निवेशकों की नजर रह सकती है. इन कंपनियों से जुड़े नतीजों और घोषणाओं के आधार पर शेयरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
JIO के इश्यू का आकार करीब ₹37,000 करोड़ से घटकर ₹30,000 करोड़ रह गया है, वैल्यूएशन ₹10.3 लाख करोड़ और ग्रे-मार्केट प्रीमियम ₹50 पर आ गया है. मस्क के चार दिनों तक चले हमले में रिलायंस ग्रुप के प्रमुख को ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ कहे जाने के बाद, भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बनने की तैयारी में लगा यह इश्यू हुंडई से आगे निकलने के लिए संघर्ष कर रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
एंकर निवेशक निभा रहे हैं अहम भूमिका, वैश्विक फंड छूट की मांग कर रहे हैं. भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक निर्गम (IPO) का आकार घटा दिया गया है. हालांकि, इसकी कीमत अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी से कम नहीं रखी जा रही है.
सौदे से परिचित लोगों के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स (JIO) 21 अक्टूबर को अपना इश्यू खुलने पर आम निवेशकों से करीब ₹26,000 करोड़ जुटाएगी. बैंकरों को ₹36,000-38,000 करोड़ जुटाए जाने की उम्मीद थी, जबकि पहले की रिपोर्टों में इश्यू का आकार ₹37,700 करोड़ बताया गया था. इस आकार के साथ यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता था. इश्यू के आकार में ₹6,000 करोड़ से ₹7,000 करोड़ तक की कटौती की गई है, जो कुल इश्यू का करीब 20% है.
कर्मचारी और शेयरधारक कोटे को जोड़ने के बाद कुल राशि लगभग ₹30,200 करोड़ या करीब 3.1 अरब डॉलर बैठती है. यह आंकड़ा सोच-समझकर चुना गया है. इससे जियो यह दावा कर सकती है कि उसका इश्यू अक्टूबर 2024 में आए हुंडई मोटर इंडिया के ₹27,870 करोड़ के आईपीओ से थोड़ा बड़ा है, जिसे भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बताया गया था.
हालांकि, डॉलर में तस्वीर अलग है. हुंडई ने करीब 3.3 अरब डॉलर जुटाए थे. डॉलर के मुकाबले रुपया करीब ₹97 पर होने के कारण जियो का तथाकथित रिकॉर्ड इससे कम रह जाता है. वैश्विक निवेशकों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पैमाने पर भारत का सबसे बड़ा आईपीओ उस इश्यू से छोटा है, जिसे पीछे छोड़ने का वह दावा कर रहा है.
160 अरब डॉलर से घटकर ₹10.3 लाख करोड़ का वैल्यूएशन
जियो के शेयर का इश्यू प्राइस ₹1,119 तय किया गया है. इससे कंपनी का वैल्यूएशन करीब ₹10.3 लाख करोड़ या लगभग 106 अरब डॉलर बैठता है.
एक समय जियो का वैल्यूएशन 160 अरब डॉलर तक बताया जा रहा था. पिछले सप्ताह तक बाजार की रिपोर्टों में कहा जा रहा था कि जियो, भारती एयरटेल की तुलना में प्रीमियम वैल्यूएशन की मांग करेगी. लेकिन रोडशो से परिचित लोगों के अनुसार, वैश्विक फंडों ने एयरटेल की तुलना में करीब 30% की छूट की मांग की. उन्होंने बैंकरों से कहा कि वे जियो के लिए अधिक कीमत चुकाने के बजाय रिलायंस के शेयर खरीदना पसंद करेंगे. कारोबार शुरू होने से पहले ही वैल्यूएशन में करीब 54 अरब डॉलर की कमी आ चुकी है.
ग्रे मार्केट में भी उत्साह ठंडा पड़ गया है. पहले की रिपोर्टों में ग्रे-मार्केट प्रीमियम करीब ₹160 बताया गया था. अब यह लगभग ₹50 रह गया है, जो इश्यू प्राइस से 5% से भी कम अधिक है.
एंकर निवेशकों के भरोसे आईपीओ
₹26,000 करोड़ के इश्यू में से करीब ₹8,000 करोड़, यानी लगभग एक-तिहाई हिस्सा, सार्वजनिक निर्गम खुलने से पहले एंकर निवेशकों को आवंटित किया जाएगा. संस्थागत निवेशकों से बाकी बुक में केवल करीब ₹5,000 करोड़ की राशि है.
पहले दिन से ही करीब एक-तिहाई राशि के लिए प्रतिबद्धता मिलने के कारण सब्सक्रिप्शन के आंकड़े अच्छे दिखाई देंगे, चाहे खुदरा निवेशक कैसी भी प्रतिक्रिया दें. शेयरधारक कोटे के तहत रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए आरक्षित हिस्सेदारी से भी इश्यू को खरीदारों का एक अतिरिक्त समूह मिल जाता है.
2020 के निवेशकों को फिर नुकसान
2020 में जियो में 20.3 अरब डॉलर का निवेश करने वाले 13 वैश्विक निवेशकों को कम कीमत के कारण एक बार फिर सबसे अधिक नुकसान हो रहा है. इनमें मेटा, गूगल, सऊदी अरब का पीआईएफ, केकेआर, सिल्वर लेक, विस्टा, मुबाडाला, एडीआईए, टीपीजी, जनरल अटलांटिक, एल कैटरटन, इंटेल कैपिटल और क्वालकॉम शामिल हैं.
जियो के ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस में दिए गए आवंटन के विश्लेषण के अनुसार, ₹1,119 प्रति शेयर की कीमत पर उनकी हिस्सेदारी का मूल्य करीब 34 अरब डॉलर है. छह वर्षों में यह उनके निवेश का 1.67 गुना है, यानी डॉलर में सालाना करीब 8.7% का रिटर्न.
केकेआर, पीआईएफ, सिल्वर लेक और विस्टा जैसे फंडों ने ₹549 प्रति शेयर की कीमत पर निवेश किया था. उनके लिए सालाना रिटर्न करीब 7.6% है. रुपये में ₹549 का निवेश लगभग दोगुना होकर ₹1,119 हो गया है. लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपया करीब ₹75 से गिरकर ₹97 पर आ गया है, जिससे उनके डॉलर में मिलने वाले रिटर्न में करीब 10 अरब डॉलर की कमी आई है. वहीं, ₹488 प्रति शेयर की कीमत पर निवेश करने वाले मेटा और गूगल का सालाना रिटर्न करीब 9.5-10% है.
रिलायंस की स्थिति इससे बिल्कुल अलग है. उसके अधिकांश शेयर ₹10 की कीमत पर हासिल किए गए थे. कम की गई कीमत पर भी उसकी हिस्सेदारी का मूल्य करीब ₹6.6 लाख करोड़ या लगभग 69 अरब डॉलर है.
जन्मदिन के करीब इश्यू बंद, बुधवार को होगी लिस्टिंग
यह इश्यू बुधवार, 21 अक्टूबर से शुक्रवार, 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा. इश्यू बंद होने का दिन मुकेश अंबानी के जुड़वां बच्चों आकाश और ईशा का 35वां जन्मदिन है. आकाश रिलायंस जियो इन्फोकॉम के चेयरमैन हैं. शेयरों की लिस्टिंग बुधवार, 28 अक्टूबर को होने की संभावना है.
उस समय तक ऑर्डर बुक की स्थिति कैसी रहती है, इसी पर निर्भर करेगा कि जश्न मनाने की कोई वजह होगी या नहीं.
मस्क का चार दिनों तक हमला
इश्यू के आकार में कटौती ऐसे समय हुई है, जब जियो का रोडशो जारी रहने के दौरान एलन मस्क ने लगातार चार दिनों तक एक्स पर मुकेश अंबानी को निशाना बनाया.
7 अक्टूबर को मस्क ने लिखा कि स्टारलिंक को “कुछ उद्योगपतियों द्वारा भारतीय लोगों पर अपनी एकाधिकारवादी पकड़ बनाए रखने के लिए रोका जा रहा है.” उन्होंने इसे “भारत के लोगों के खिलाफ अपराध” बताया. अगले दिन उन्होंने उस व्यक्ति का नाम लिया, जिसका वह जिक्र कर रहे थे. उन्होंने पूछा, “क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं?”
शुक्रवार को उन्होंने ‘प्रधानमंत्री अंबानी’ के नाम एक काल्पनिक खुला पत्र पोस्ट किया. इसमें लिखा था, “यह न समझ पाने के लिए कृपया मेरी विनम्र माफी स्वीकार करें कि आप ही भारत के असली बॉस हैं.” उन्होंने अंबानी पर “भारत के महान लोगों का एकाधिकारवादी शोषण जारी रखने” को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया. इसके बाद उन्होंने पूछा, “क्या फिर भी आप स्टारलिंक को प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देने पर विचार करेंगे?”
शनिवार को उन्होंने किफायती कीमतों का वादा किया और कहा, “अंबानी का मुनाफा कम होगा, लेकिन उनका कारोबार बंद नहीं होने वाला.” जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इस बहस में शामिल हुए, तो मस्क ने जवाब दिया, “यह वाकई चिंताजनक है.”
सरकार ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है. संचार मंत्रालय ने अपने सैटेलाइट नियमों को “निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण” बताया और आरोपों को “निराधार और गलत धारणा पर आधारित” करार दिया. मंत्रालय ने कहा कि जियो के अपने सैटेलाइट कारोबार सहित लाइसेंस प्राप्त तीनों ऑपरेटर एक ही सुरक्षा मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं. दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत “किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार की अनुमति नहीं देता.” रिलायंस ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
किसी भी निवेशक ने यह नहीं कहा है कि इन पोस्ट से उनका निवेश संबंधी फैसला बदला है. लेकिन लगातार चार दिनों तक, जब जियो के बैंकर वैश्विक फंडों से कंपनी के बाजार में दबदबे के लिए अधिक कीमत चुकाने को कह रहे थे, तब दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एक्स पर सवाल उठा रहे थे कि यह दबदबा हासिल कैसे किया गया.
इसका क्या मतलब है
जियो के आईपीओ की योजना एक बड़े बयान के रूप में बनाई गई थी: भारत की सबसे बड़ी कंपनी, देश के सबसे बड़े आईपीओ के साथ और ऐसा वैल्यूएशन जो वैश्विक टेक कंपनियों को टक्कर दे सके. लेकिन अब बाजार में जो इश्यू आ रहा है, उसका आकार छोटा है, कीमत कम है, ग्रे-मार्केट प्रीमियम सीमित है और बुक को बड़े पैमाने पर एंकर निवेशकों का समर्थन मिला हुआ है.
जियो रुपये के लिहाज से सबसे बड़े आईपीओ का रिकॉर्ड बनाने का दावा अब भी कर सकती है. लेकिन जिन वैश्विक निवेशकों से उसके वैल्यूएशन को मान्यता मिलने की उम्मीद थी, उन्होंने इसके बजाय वैल्यूएशन को नीचे धकेल दिया है.
नोट: रिटर्न शुल्क और करों से पहले के सकल रिटर्न हैं. इनकी गणना जियो प्लेटफॉर्म्स के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (19 जून, 2026) और ईसीबी की डॉलर/रुपया विनिमय दरों के आधार पर की गई है. डॉलर से जुड़े आंकड़ों के लिए ₹96.73 प्रति डॉलर की दर का इस्तेमाल किया गया है.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
नायक ने इस इस्तीफे के पीछे पूर्णकालिक परिचालन भूमिका की व्यस्तताओं और अपनी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर ध्यान देने की इच्छा का हवाला दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
डिजिटल मार्केटिंग कंपनी YAAP Digital के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) राज नायक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इसी साल जुलाई में कंपनी के संस्थापक, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. अतुल हेगड़े के निधन के बाद राज नायक को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी. नायक ने इस्तीफे के पीछे पूर्णकालिक परिचालन भूमिका की व्यस्तताओं और अपनी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर ध्यान देने की इच्छा का हवाला दिया है.
पूर्णकालिक भूमिका की व्यस्तताओं का दिया हवाला
अपने इस्तीफे के पत्र में राज नायक ने कहा कि उन्होंने काफी विचार-विमर्श के बाद पद छोड़ने का फैसला किया है. उनके मुताबिक, पूर्णकालिक परिचालन भूमिका की जिम्मेदारियां और काम का दबाव इस समय उनकी अपेक्षा से अधिक है.
नायक ने इसे एक कठिन निर्णय बताते हुए कहा कि उन्हें कंपनी की टीम के साथ काम करने का अनुभव अच्छा रहा है. उन्होंने YAAP Digital के भविष्य को लेकर भरोसा भी जताया. अब वह अपने उद्यमशीलता से जुड़े प्रयासों और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं पर अधिक ध्यान देना चाहते हैं.
जुलाई में संभाली थी कंपनी की कमान
YAAP Digital Limited ने 7 जुलाई 2026 को संस्थापक, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. अतुल हेगड़े के निधन के बाद राज नायक को चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त करने की घोषणा की थी. नायक की नियुक्ति इसी साल जुलाई में हुई थी. उनके इस्तीफे के बाद कंपनी के नेतृत्व में आगे क्या बदलाव होगा, इस बारे में उपलब्ध जानकारी में कोई घोषणा नहीं की गई है.
रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई को ध्यान में रखते हुए वास्तविक ब्याज दर कम से कम 1 फीसदी बनाए रखने के लिए रेपो रेट को बढ़ाकर 6.5-7 फीसदी तक करना पड़ सकता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में आने वाली तिमाहियों में महंगाई दर बढ़कर 6-7 फीसदी तक पहुंच सकती है. Systematix Institutional Equities की एक रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई पर काबू पाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रेपो रेट में मौजूदा स्तर से 100-150 बेसिस पॉइंट तक की और बढ़ोतरी कर सकता है. रिपोर्ट में कंपनियों की बढ़ती लागत, घरेलू स्तर पर महंगाई की ऊंची उम्मीदों, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों को महंगाई बढ़ने की प्रमुख वजह बताया गया है.
महंगाई बढ़ने का क्यों है खतरा?
Systematix की रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई का जोखिम RBI के मौजूदा आकलन से अधिक हो सकता है. सितंबर 2026 में परिवारों की औसत महंगाई संबंधी उम्मीदें 9.1 फीसदी रहीं, जो मौजूदा महंगाई दर से काफी अधिक हैं. इससे संकेत मिलता है कि लोगों को आने वाले समय में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ने की आशंका है.
RBI का महंगाई प्रसार सूचकांक (Inflation Diffusion Index) भी संकेत देता है कि कीमतों का दबाव अब ज्यादा श्रेणियों में फैल रहा है. इसके अलावा, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में गैर-वित्तीय कंपनियों की इनपुट लागत सालाना आधार पर करीब 40 फीसदी बढ़ी.
रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 45 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. बढ़ती लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पाने के कारण कंपनियों के सकल मार्जिन में 650-800 बेसिस पॉइंट की कमी आई. इससे कंपनियों की लाभप्रदता पर दबाव बढ़ा है.
मानसून और कच्चे तेल की कीमतें भी चिंता
रिपोर्ट में महंगाई बढ़ने के पीछे सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों को भी अहम बताया गया है. दक्षिण-पश्चिम मानसून की कमी, अल नीनो की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है.
इसके अलावा, पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण पैदा हुए महंगाई के असर को कम करने में खाद्य पदार्थों, ऊर्जा और उर्वरकों पर सरकारी सब्सिडी की भूमिका रही है. तेल विपणन कंपनियों को होने वाले नुकसान की भरपाई भी कीमतों के दबाव को सीमित करने में मदद करती है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर सरकार की ओर से मिलने वाली वित्तीय सहायता कम होती है, तो महंगाई और बढ़ सकती है.
रेपो रेट 6.5-7% तक जाने का अनुमान
RBI ने हाल में रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया था. हालांकि, Systematix का मानना है कि महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने के लिए यह बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं हो सकती.
रिपोर्ट के अनुसार, महंगाई को ध्यान में रखते हुए वास्तविक ब्याज दर कम से कम 1 फीसदी बनाए रखने के लिए रेपो रेट को बढ़ाकर 6.5-7 फीसदी तक करना पड़ सकता है. इसके लिए मौजूदा 5.50 फीसदी के स्तर से 100-150 बेसिस पॉइंट की अतिरिक्त बढ़ोतरी की जरूरत हो सकती है.
यह रिपोर्ट का अनुमान है, RBI की ओर से घोषित नीतिगत फैसला नहीं. रेपो रेट को लेकर केंद्रीय बैंक का अगला कदम महंगाई के वास्तविक आंकड़ों और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1% किया गया
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान पहले के 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया है. इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने महंगाई के अनुमान में भी संशोधन किया है. वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में महंगाई दर 6 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि पहले इसके 5.9 फीसदी रहने की संभावना जताई गई थी.
इस तरह आर्थिक विकास की संभावनाओं के साथ महंगाई का जोखिम भी बना हुआ है. यदि कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होती है, तो RBI को ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाना पड़ सकता है.
शेयर बाजार और बॉन्ड यील्ड पर पड़ सकता है असर
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहने और ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी से वित्तीय बाजारों पर दबाव पड़ सकता है. ऊंची ब्याज दरें शेयरों के मूल्यांकन को प्रभावित कर सकती हैं. वहीं, कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा होने और इनपुट लागत बढ़ने से उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है.
भारत की 10 साल की बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड यील्ड करीब 7.24 फीसदी के स्तर पर है. रिपोर्ट के मुताबिक, यदि महंगाई अनुमान से ज्यादा बढ़ती है और RBI मौद्रिक नीति को सख्त करता है, तो बॉन्ड यील्ड 7.5 फीसदी से ऊपर जा सकती है. हालांकि, रेपो रेट में आगे कितनी बढ़ोतरी होगी, यह महंगाई के रुझान और RBI के नीतिगत आकलन पर निर्भर करेगा.
कंपनी इस विस्तार पर 550 करोड़ रुपये खर्च करेगी और 2027 तक प्लांट शुरू करने की योजना है. कारोबारी सत्र के दौरान शेयर में 5 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज हुई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी सुजलॉन ग्रुप तमिलनाडु, गुजरात और कर्नाटक में विंड ब्लेड बनाने के लिए तीन नई फैक्ट्रियां स्थापित करने जा रही है. कंपनी इस विस्तार पर 550 करोड़ रुपये खर्च करेगी और 2027 तक प्लांट शुरू करने की योजना है. इन परियोजनाओं से करीब 3,000 प्रत्यक्ष और 12,000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है. इस घोषणा के बाद सोमवार को सुजलॉन एनर्जी के शेयर में भी तेजी देखने को मिली. कारोबारी सत्र के दौरान शेयर में 5 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज हुई.
तीन राज्यों में होगा निवेश
सुजलॉन ग्रुप की योजना के मुताबिक, तमिलनाडु में नई फैक्ट्री स्थापित करने पर 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. वहीं, गुजरात और कर्नाटक में प्लांट लगाने के लिए कुल 350 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. कंपनी के को-फाउंडर गिरीश टांटी के अनुसार, इस निवेश के लिए आंतरिक संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा.
नई फैक्ट्रियों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीकों की मदद से विंड ब्लेड का उत्पादन किया जाएगा. कंपनी का लक्ष्य उत्पादन प्रक्रिया को बेहतर बनाना, उत्पादों की गुणवत्ता पर नजर रखना और विनिर्माण के दौरान होने वाली गलतियों को कम करना है.
15,000 रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद
इन तीन परियोजनाओं से करीब 3,000 लोगों को सीधे और 12,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की संभावना है. कंपनी के मुताबिक, इनसे पैदा होने वाले लगभग 80 फीसदी रोजगार ग्रामीण क्षेत्रों में हो सकते हैं.
नए प्लांट पवन ऊर्जा परियोजनाओं के नजदीक स्थापित किए जाएंगे. इससे विंड ब्लेड की ढुलाई में लगने वाला समय और लागत कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही, कंपनी को अपने मौजूदा ऑर्डर समय पर पूरे करने में भी सुविधा होगी.
विनिर्माण नेटवर्क का होगा विस्तार
सुजलॉन फिलहाल जैसलमेर, भुज, रतलाम, धुले और अनंतपुर में विंड ब्लेड बनाने वाली पांच फैक्ट्रियां संचालित कर रही है. तीन नए प्लांट शुरू होने के बाद कंपनी अपने विनिर्माण नेटवर्क और उत्पादन क्षमता का विस्तार करेगी. कंपनी के मुताबिक, उसका विनिर्माण नेटवर्क 18 फैक्ट्रियों तक पहुंचने की उम्मीद है.
पवन ऊर्जा उपकरणों की घरेलू मांग को पूरा करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिहाज से भी यह विस्तार अहम है. नई इकाइयों में AI और डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल कंपनी की स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक कदम होगा.
सुजलॉन एनर्जी के शेयर में तेजी
नए प्लांट और निवेश की घोषणा के बाद सोमवार को सुजलॉन एनर्जी के शेयर में तेजी दर्ज की गई. खबर लिखे जाने तक शेयर 5.24 फीसदी की बढ़त के साथ 39.57 रुपये पर कारोबार कर रहा था. हालांकि, इस तेजी के बावजूद शेयर के प्रदर्शन को लंबी अवधि के संदर्भ में देखना जरूरी है. खबर में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सुजलॉन एनर्जी के शेयर में इस साल अब तक करीब 25 फीसदी की गिरावट आई थी. नए निवेश और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना से कंपनी के कारोबार पर क्या असर पड़ता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा.
वाणिज्य विभाग ने कंपनियों से वीजा, डेटा ट्रांसफर, लाइसेंस, टैक्स और भुगतान से जुड़ी समस्याओं का ब्योरा मांगा है. इसका मकसद चीन के बड़े सर्विस बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने और निर्यातकों के सामने आने वाली चुनौतियों की पहचान करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत सरकार चीन के साथ व्यापारिक संबंधों में सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने की संभावनाएं तलाश रही है. इसके लिए वाणिज्य विभाग उन नियमों और प्रक्रियाओं की जानकारी जुटा रहा है, जिनसे भारतीय कंपनियों को चीन में कारोबार करने में परेशानी होती है. इस पहल के तहत लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की शर्तों से लेकर डेटा सुरक्षा और पेशेवर कर्मचारियों की आवाजाही तक के मुद्दों पर जानकारी मांगी गई है.
300 अरब डॉलर के बाजार में भारत की हिस्सेदारी कितनी?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन सेवाओं के बड़े वैश्विक आयातकों में शामिल है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में चीन को भारत का सेवा निर्यात 8.95 अरब डॉलर रहा. करीब 300 अरब डॉलर के चीनी सेवा आयात बाजार को देखते हुए भारतीय कंपनियों के लिए विस्तार की संभावनाएं मौजूद हैं. भारत की मजबूत मौजूदगी सूचना प्रौद्योगिकी (IT), आईटी आधारित सेवाओं और डिजिटल समाधानों जैसे क्षेत्रों में है. हालांकि, चीन के नियामकीय नियम और बाजार में प्रवेश से जुड़ी शर्तें भारतीय कंपनियों के लिए कारोबार बढ़ाने में चुनौती बन सकती हैं.
वीजा से लेकर डेटा ट्रांसफर तक की चुनौतियां
वाणिज्य विभाग ने उद्योग जगत से चीन में लागू डेटा लोकलाइजेशन, साइबर सुरक्षा और सीमा पार डेटा ट्रांसफर के नियमों से जुड़ी समस्याओं की जानकारी मांगी है. इसके अलावा वीजा मिलने में देरी, वर्क परमिट की शर्तें और भारतीय पेशेवरों की योग्यताओं को मान्यता देने जैसे मुद्दे भी शामिल हैं.
कंपनियों को टैक्स, भुगतान प्राप्त करने, रकम दूसरे देश में भेजने और कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने की प्रक्रिया में आने वाली दिक्कतों का ब्योरा भी देना है. सरकार इन जानकारियों के आधार पर उन बाधाओं की पहचान करना चाहती है, जो भारतीय सेवा निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा और कारोबार के विस्तार को प्रभावित करती हैं.
चीन में किस तरह कारोबार करती हैं भारतीय कंपनियां?
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के मुताबिक, भारतीय कंपनियां चीन में काम तो कर रही हैं, लेकिन कई मामलों में वे अंतिम ग्राहकों को सीधे सेवाएं देने के बजाय मध्यस्थ संस्थाओं के जरिए कारोबार करती हैं. इससे उनकी बाजार तक सीधी पहुंच सीमित हो सकती है.
वाणिज्य विभाग ने कंपनियों से सीमा पार डिजिटल माध्यमों से सेवाएं देने, चीन में व्यावसायिक मौजूदगी, मालिकाना हक, स्थानीय साझेदारी और परिचालन संबंधी जरूरतों की जानकारी भी मांगी है. इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि भारतीय कंपनियां चीन में किस तरह काम कर रही हैं और उन्हें सीधे कारोबार करने में किन बाधाओं का सामना करना पड़ता है.
वैश्विक सेवा निर्यात में भारत की बढ़ती हिस्सेदारी
वैश्विक सेवा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी पिछले एक दशक में बढ़ी है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विश्व के सेवा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 2014 में करीब 3 फीसदी थी, जो 2024 में बढ़कर 4.3 फीसदी हो गई. इसी अवधि में चीन की हिस्सेदारी 4.2 फीसदी से बढ़कर 5.1 फीसदी हो गई.
भारत में सेवा निर्यात की वृद्धि को आईटी, डिजिटल सेवाओं और अन्य पेशेवर सेवाओं की वैश्विक मांग से समर्थन मिला है. ऐसे में चीन जैसे बड़े बाजार में कारोबार की बाधाओं को समझना भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर तलाशने की दिशा में अहम कदम हो सकता है. हालांकि, चीन में भारतीय सेवा निर्यातकों की वास्तविक संभावनाएं वहां के नियमों, बाजार तक पहुंच और स्थानीय प्रतिस्पर्धा पर भी निर्भर करेंगी. सरकार की ओर से जुटाई जा रही जानकारी इन चुनौतियों का आकलन करने और आगे की व्यापार रणनीति तय करने में उपयोगी हो सकती है.
कंपनी इन परियोजनाओं में 26 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी की पेशकश कर रही है. इसका उद्देश्य उद्योगों को भरोसेमंद और किफायती ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ अपने ऊर्जा समाधान कारोबार का विस्तार करना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश की प्रमुख बिजली उत्पादक कंपनी NTPC लिमिटेड को-जेनरेशन परियोजनाओं के जरिए औद्योगिक ऊर्जा क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रही है. इन परियोजनाओं में बिजली के साथ भाप जैसी तापीय ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा. कंपनी कोयला, नवीकरणीय ऊर्जा और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम को मिलाकर एकीकृत बिजली आपूर्ति समाधान विकसित करने पर भी विचार कर रही है.
क्या है को-जेनरेशन तकनीक?
को-जेनरेशन को कंबाइंड हीट एंड पावर (CHP) भी कहा जाता है. इसमें एक ही ईंधन स्रोत से बिजली और तापीय ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है. पारंपरिक बिजली उत्पादन के दौरान निकलने वाली गर्मी का उपयोग करने से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने में मदद मिलती है.
विनिर्माण क्षेत्र की कई इकाइयों को मशीनों के संचालन और उत्पादन प्रक्रिया के लिए बिजली के साथ भाप की भी जरूरत होती है. को-जेनरेशन प्रणाली इन दोनों जरूरतों को एक साथ पूरा कर सकती है, जिससे ऊर्जा की बर्बादी और परिचालन लागत कम करने में मदद मिल सकती है.
दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति पर जोर
NTPC के मुताबिक, प्रस्तावित परियोजनाओं के जरिए उद्योगों को दीर्घकालिक व्यवस्था के तहत ऊर्जा उपलब्ध कराने की योजना है. इससे कंपनियों को अपनी ऊर्जा जरूरतों, लागत और आपूर्ति की बेहतर योजना बनाने में मदद मिल सकती है.
कंपनी अपनी बिजली उत्पादन संबंधी विशेषज्ञता के आधार पर अलग-अलग उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप आपूर्ति मॉडल विकसित करना चाहती है. औद्योगिक साझेदारों की भागीदारी से NTPC को अपने ऊर्जा समाधान कारोबार का विस्तार करने का अवसर मिलेगा.
2032 तक 149 गीगावाट क्षमता का लक्ष्य
NTPC की स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 91 गीगावाट से अधिक है, जबकि 35 गीगावाट से ज्यादा क्षमता की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं. कंपनी ने 2032 तक अपनी कुल क्षमता बढ़ाकर 149 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा है. इसमें 60 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से हासिल करने की योजना है.
कंपनी की विस्तार रणनीति में तापीय, जलविद्युत, सौर और पवन ऊर्जा के अलावा ऊर्जा भंडारण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, वेस्ट-टू-एनर्जी, परमाणु ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं. को-जेनरेशन परियोजनाओं के लिए औद्योगिक साझेदारों को आमंत्रित करना इसी रणनीति का हिस्सा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने के लिए ‘एनर्जी सीजफायर’ पर सहमत हो गए हैं. हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि वह इन बातचीत में शामिल नहीं थे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने को लेकर एक नए समझौते की घोषणा ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि दोनों देश ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने से रोकने पर सहमत हुए हैं. उन्होंने दोनों पक्षों से समझौते का उल्लंघन नहीं करने की अपील भी की. हालांकि, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस घोषणा पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें इस समझौते की जानकारी नहीं थी और वह इसके लागू होने की तारीख स्पष्ट करना चाहते हैं.
जेलेंस्की बोले- युद्धविराम शुरू होने की तारीख बताएं
जेलेंस्की ने समाचार वेबसाइट एक्सियोस (Axios) से बातचीत में कहा कि अगर ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ इस समझौते पर बातचीत की है, तो उन्हें बताया जाना चाहिए कि युद्धविराम कब से शुरू होगा. उन्होंने कहा कि यूक्रेन इसके लिए तैयार है और प्रस्ताव स्वीकार करेगा.
जेलेंस्की की प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की घोषणा के बावजूद समझौते की शर्तों और समयसीमा को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है. ट्रंप ने भी सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया है कि यह व्यवस्था किस तारीख से लागू होगी और इसे जमीन पर किस तरह लागू किया जाएगा.
रूस के तेल ढांचे पर हमलों को लेकर बढ़ा दबाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिका यूक्रेन पर रूस के तेल ढांचे पर हमले रोकने के लिए दबाव बना रहा है. ट्रंप ने इन हमलों को वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से जोड़ा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन और मॉस्को के बीच ऊर्जा से जुड़ी एक संभावित व्यवस्था को लेकर भी तनाव बढ़ा है. इसके तहत अमेरिका घरेलू ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से रूस से लाखों टन डीजल आयात कर सकता है. नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की कीमतें भी प्रशासन के लिए एक अहम मुद्दा हैं. हालांकि, ऊर्जा से जुड़े इस प्रस्ताव और घोषित युद्धविराम के बीच संबंधों को लेकर ट्रंप ने विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.
यूक्रेन में चुनाव कराने की ट्रंप की मांग पर जेलेंस्की का जवाब
ट्रंप ने शनिवार को यूक्रेन में नए राष्ट्रपति के चुनाव की मांग भी की थी. उनका तर्क था कि युद्ध समाप्त करने के लिए समझौता करने को तैयार नेतृत्व की जरूरत है. इस पर जेलेंस्की ने रविवार को एबीसी न्यूज (ABC News) से बातचीत में कहा कि यूक्रेन का नेतृत्व कौन करेगा, इसका फैसला वहां के नागरिकों को करना है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के सम्मान के बावजूद देश के नेता को चुनने का अधिकार यूक्रेन की जनता के पास है.
जेलेंस्की ने यह भी कहा कि यदि रूस 60 दिनों के युद्धविराम पर सहमत होता है, तो यूक्रेन राष्ट्रपति चुनाव कराने पर विचार करेगा. इस तरह उन्होंने चुनाव की संभावना को लंबे समय तक जारी रहने वाली शत्रुता पर रोक लगाने से जोड़ दिया.
अमेरिका के समर्थन को बताया अहम
ट्रंप के साथ मतभेदों के बावजूद जेलेंस्की ने रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के प्रयासों में अमेरिका की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि युद्ध रोकने और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को आगे बढ़ने से रोकने के लिए यूक्रेन को अमेरिकी समर्थन की जरूरत है.
जेलेंस्की ने यूरोपीय देशों के सहयोग को भी अहम बताया. उन्होंने उम्मीद जताई कि मौजूदा मतभेदों का असर अमेरिका और यूरोप के बीच सहयोग पर नहीं पड़ेगा. हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि इस एकजुटता को बनाए रखना आसान नहीं है.
ईरान के साथ संघर्ष से ऊर्जा बाजारों पर दबाव
ऊर्जा युद्धविराम की यह घोषणा ऐसे समय में आई है, जब अमेरिका पश्चिम एशिया में ईरान के साथ युद्ध में भी उलझा हुआ है. इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ने की आशंका है. ट्रंप ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि ईरान के साथ संघर्ष का तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है और रूस-यूक्रेन के बीच घोषित ऊर्जा युद्धविराम को किस तरह लागू किया जाएगा. फिलहाल, समझौते की शुरुआत की तारीख और उसकी परिचालन शर्तें स्पष्ट नहीं हैं. जेलेंस्की की प्रतिक्रिया से भी पता चलता है कि यूक्रेन इस घोषणा के बारे में अधिक जानकारी का इंतजार कर रहा है.