इंडियन बर्गर किंग ने अमेरिकी बर्गर किंग को दी पटखनी, जीती 13 साल पुरानी नाम की लड़ाई

पुणे का आउटलेट 1992-1993 से नाम का उपयोग कर रहा था और अमेरिकी कंपनी ने 2014 में भारत में प्रवेश किया, लेकिन तब तक नाम का अधिकार पुणे के बर्गर किंग के पास था.

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Monday, 19 August, 2024
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बर्गर किंग दुनिया का दिग्गज ब्रांड है. इसके दुनिया के 100 देशों में लगभग 13 हजार रेस्टोरेंट हैं. मगर, भारत में कंपनी को एक अनूठी समस्या का सामना करना पड़ा था. यहां पुणे शहर में बर्गर किंग (Burger King) के नाम से ही वर्षों पुराना और लोकप्रिय रेस्टोरेंट चल रहा था. इसके बाद अमेरिकी कंपनी ने पुणे की इस कंपनी पर अपने नाम का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए केस ठोक दिया. भारत में बर्गर किंग के नाम पर यह कानूनी लड़ाई 13 साल चली. अब इसमें फैसला पुणे की कंपनी के पक्ष में आया है. यह अमेरिकी एमएनसी बर्गर किंग के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

बर्गर किंग कॉर्पोरेशन की याचिका खारिज की 

पुणे के एक कॉमर्शियल कोर्ट ने शहर के कैंप इलाके में स्थित रेस्टोरेंट के पक्ष में फैसला सुनाया. जिला जज सुनील वेद पाठक ने 16 अगस्त को दिए अपने आदेश में कहा कि अमेरिकी फास्ट फूड कंपनी बर्गर किंग कॉर्पोरेशन (Burger King Corporation) की याचिका खारिज की जाती है. अमेरिकी कंपनी ने ट्रेडमार्क उल्लंघन समेत कई आरोप पुणे स्थित कंपनी पर लगाए थे. कंपनी ने कोर्ट से मांग की थी कि पुणे स्थित कंपनी द्वारा उनका नाम इस्तेमाल करने पर रोक लगाई जाए. साथ ही उनसे मुआवजा भी दिलवाया जाए.

अनाहिता और शपूर ईरानी चलाते हैं पुणे का बर्गर किंग

पुणे का बर्गर किंग रस्टॉरेंट अनाहिता (Anahita) और शपूर ईरानी (Shapoor Irani) चलाते हैं. उनके रेस्टोरेंट कैंप और कोरेगांव इलाके में स्थित हैं. इन्हें काफी पसंद किया जाता है. इस मामले में जज ने कहा कि पुणे का बर्गर किंग 1992-93 से यह नाम इस्तेमाल कर रहा है. अमेरिकी कंपनी इसके काफी बाद भारत में आई. उन्होंने अपने नाम को भी बाद में भारत में रजिस्टर करवाया. उधर, पुणे की कंपनी काफी पहले से इस नाम का इस्तेमाल कर रही थी. ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती है. 

इंडिया में 2014 में आई बर्गर किंग कॉर्पोरेशन

बर्गर किंग की स्थापना 1954 में हुई थी. इसकी शुरुआत जेम्स मैकलमोर (James McLamore) और डेविड एडगर्टन (David Edgerton) ने की थी. यह कंपनी 100 से ज्यादा देशों में 13 हजार रेस्टोरेंट चला रही है. इनमें से 97 फीसदी रेस्टोरेंट की मालिक यह कंपनी ही है. इसे दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी फास्ट फूड हैमबर्गर कंपनी माना जाता है. इसमें लगभग 30,300 लोग नौकरी करते हैं. कंपनी ने एशिया में पहली बार एंट्री 1982 में ली थी. मगर, इंडिया में वो साल 2014 में आए थे. उन्होंने नई दिल्ली, मुंबई और पुणे से ही अपनी शुरुआत की थी.
 


आखिर क्यों बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, SBI रिपोर्ट में सामने आई बड़ी वजह

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया गया है. इससे ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने और रोजमर्रा के सामान महंगे होने की आशंका जताई जा रही है.

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Tuesday, 19 May, 2026
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देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. पांच दिनों में दूसरी बार ईंधन महंगा होने से महंगाई और घरेलू बजट पर असर की आशंका बढ़ गई है. हालांकि, SBI की ताजा रिपोर्ट बताती है कि यह फैसला सिर्फ कीमत बढ़ाने का नहीं, बल्कि तेल कंपनियों को भारी घाटे से बचाने की मजबूरी भी था. रिपोर्ट के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल और स्थिर खुदरा कीमतों के कारण तेल कंपनियां रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही थीं.

पांच दिन में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया गया है. इससे ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने और रोजमर्रा के सामान महंगे होने की आशंका जताई जा रही है. आम उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि ईंधन की कीमतें लगभग हर सेक्टर की लागत से जुड़ी होती हैं.

SBI रिपोर्ट में सामने आई असली वजह

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ‘इकोरैप’ रिपोर्ट के मुताबिक तेल कंपनियों को लंबे समय से भारी वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा था. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई थीं, जबकि घरेलू खुदरा कीमतों में लंबे समय तक बदलाव नहीं किया गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वजह से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हर दिन करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था. सालाना आधार पर यह घाटा करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी कंपनियों के नुकसान को कुछ हद तक कम करने के लिए जरूरी मानी गई.

महंगाई पर पड़ेगा असर

रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोल-डीजल महंगा होने से मई और जून 2026 में खुदरा महंगाई दर यानी CPI में 0.15 से 0.20 फीसदी तक का उछाल आ सकता है. इसी के चलते वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 4.7 फीसदी कर दिया गया है.

हालांकि रिपोर्ट यह भी कहती है कि शुरुआती दौर में लोग ईंधन की खपत कम करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद मांग दोबारा सामान्य स्तर पर लौट आती है. यानी लंबे समय में बिक्री पर बहुत बड़ा असर देखने को नहीं मिलता.

3 रुपये की बढ़ोतरी से कितनी राहत?

SBI के मुताबिक हालिया कीमत बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को करीब 52,700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राहत मिल सकती है. हालांकि यह राशि उनके अनुमानित कुल नुकसान का केवल 15 फीसदी हिस्सा ही कवर कर पाएगी, यानी मौजूदा बढ़ोतरी से कंपनियों पर दबाव कुछ कम जरूर होगा, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं होगा.

टैक्स घटाने पर सरकार को होगा भारी नुकसान

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अगर सरकार जनता को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती करती है, तो इसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ेगा. फिलहाल पेट्रोल पर 11.9 फीसदी और डीजल पर 7.8 फीसदी एक्साइज ड्यूटी लगती है. अगर इसे पूरी तरह खत्म कर दिया जाए, तो सरकार को करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है. इससे राजकोषीय घाटा GDP के 0.5 फीसदी तक बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है.

राज्यों की कमाई पर भी पड़ेगा असर

केंद्र सरकार की टैक्स नीति का असर राज्यों की कमाई पर भी पड़ता है. SBI के अनुमान के अनुसार, अगर केंद्र एक्साइज ड्यूटी शून्य कर देता है, तो राज्यों को करीब 80,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है. हालांकि बढ़ी हुई ईंधन कीमतों से राज्यों को वैट के जरिए अतिरिक्त आय भी मिलेगी. इसके बावजूद राज्यों का कुल शुद्ध नुकसान करीब 50,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है.

आम आदमी के लिए क्या मायने?

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि सरकार और तेल कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि एक तरफ उपभोक्ताओं को राहत दी जाए और दूसरी तरफ कंपनियों तथा सरकारी वित्तीय संतुलन को भी बनाए रखा जाए.
 

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युवा निवेशकों के लिए बड़ा दांव: Trackk ने जुटाए 3.7 मिलियन डॉलर, Lightspeed ने किया निवेश

कंपनी का कहना है कि नई फंडिंग के जरिए वह अपनी ब्रोकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगी और युवा निवेशकों के लिए नए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स तैयार करेगी.

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Tuesday, 19 May, 2026
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भारत के युवा निवेशकों को ध्यान में रखकर बनाई गई इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म ट्रैक (Trackk) ने सीड फंडिंग राउंड में 3.7 मिलियन डॉलर जुटाए हैं. इस फंडिंग राउंड की अगुवाई Lightspeed ने की, जबकि Info Edge Ventures और कई चर्चित एंजेल निवेशकों ने भी इसमें हिस्सा लिया. कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल अपनी ब्रोकिंग टेक्नोलॉजी मजबूत करने, नए प्रोडक्ट्स विकसित करने और यूजर बेस बढ़ाने में करेगी.

Lightspeed और बड़े एंजेल निवेशकों का मिला साथ

मुंबई और बेंगलुरुस की स्टार्टअप कंपनी Trackk में Lightspeed के अलावा Info Edge Ventures ने भी निवेश किया है. वहीं एंजेल निवेशकों में गौरव मुंजाल, रोमन सैनी, तनमय भट्ट, वरुण मय्या और गौरव कपूर जैसे नाम शामिल हैं.

कंपनी का कहना है कि नई फंडिंग के जरिए वह अपनी ब्रोकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगी और युवा निवेशकों के लिए नए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स तैयार करेगी. इसके अलावा ग्राहक ऑनबोर्डिंग, यूजर एक्विजिशन और टीम विस्तार पर भी फोकस किया जाएगा.

Gen Z निवेशकों के लिए बनाया गया प्लेटफॉर्म

Trackk की स्थापना वेदांत गुप्ते, सिद्धार्थ ठक्कर और आर्यन जैन ने की है. यह प्लेटफॉर्म खासतौर पर Gen Z यानी युवा निवेशकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. कंपनी AI आधारित स्टॉक डिस्कवरी, पर्सनलाइज्ड यूजर एक्सपीरियंस और आसान निवेश टूल्स के जरिए पहली बार निवेश करने वालों के लिए निवेश प्रक्रिया को सरल बनाने की कोशिश कर रही है.

“युवा निवेशकों की जरूरतें बदल चुकी हैं”

Trackk के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते ने कहा कि आज के युवा निवेशक पहले की पीढ़ियों से अलग तरीके से वित्तीय जानकारी हासिल करते हैं. अब निवेश से जुड़ी जानकारी डिजिटल कम्युनिटी, क्रिएटर्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए तेजी से पहुंच रही है, लेकिन निवेश करने का अनुभव अब भी नए यूजर्स के लिए काफी जटिल है. उन्होंने कहा कि Trackk का मकसद युवा भारतीयों के लिए निवेश को आसान, सहज और ज्यादा सुलभ बनाना है.

“नई पीढ़ी के निवेशकों के लिए अलग सोच जरूरी”

Lightspeed के निवेशक रोमित मेहता ने कहा कि नई पीढ़ी का फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के साथ रिश्ता पहले की तुलना में पूरी तरह बदल चुका है. Trackk की टीम युवा यूजर्स के व्यवहार को अच्छी तरह समझती है और उसी के अनुरूप प्रोडक्ट तैयार कर रही है. वहीं, Info Edge Ventures के पार्टनर चिन्मय शर्मा ने कहा कि युवा भारतीयों को ऐसे निवेश प्लेटफॉर्म्स की जरूरत है, जो उन्हें सही वित्तीय फैसले लेने और लंबे समय में संपत्ति बनाने में मदद करें.

Gen Z यूजर्स में तेजी से बढ़ रही लोकप्रियता

कंपनी के मुताबिक उसके करीब 90 फीसदी यूजर्स Gen Z कैटेगरी से आते हैं और प्लेटफॉर्म पर औसत यूजर की उम्र 20 से 24 साल के बीच है. Trackk भविष्य में मल्टी-एसेट फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म बनाने की दिशा में काम कर रही है, जिसमें निवेश, वेल्थ क्रिएशन और अन्य वित्तीय सेवाएं शामिल होंगी.

भारत के सबसे युवा रजिस्टर्ड ब्रोकर में शामिल

अक्टूबर 2025 में Trackk भारत के सबसे युवा रजिस्टर्ड ब्रोकर्स में शामिल बनी थी. उस दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO सुंदररमन आर ने कंपनी को सम्मानित भी किया था.
 


आइसक्रीम बाजार में अनंत अंबानी की एंट्री, जानिए भारत में कितने करोड़ का है ये कारोबार

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत का आइसक्रीम बाजार 2026 से 2034 के बीच करीब 16 फीसदी की CAGR से बढ़ सकता है.

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Tuesday, 19 May, 2026
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भारत में बढ़ती गर्मी, बदलती लाइफस्टाइल और क्विक-कॉमर्स के तेजी से विस्तार ने आइसक्रीम कारोबार को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है. देश का आइसक्रीम बाजार अब सिर्फ गर्मियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह रोजमर्रा की लाइफस्टाइल का हिस्सा बनता जा रहा है. इसी तेजी से बढ़ते बाजार में अब अनंत अंबानी की एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है. अनुमान है कि आने वाले कुछ वर्षों में भारत का आइसक्रीम कारोबार 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकता है. दरअसल, अनंत अंबानी ने हाल ही में अपना आइसक्रीम ब्रांड वंतारा क्रीमैरी (Vantara Creamery)  लॉन्च किया है, जिससे इस कारोबार में तेजी की उम्मीद जताई जा रही है. 

5 साल में दोगुना हुआ आइसक्रीम बाजार

देश में आइसक्रीम इंडस्ट्री ने पिछले पांच वर्षों में जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में भारत का आइसक्रीम बाजार करीब 14,800 करोड़ रुपये का था, जो 2025 में बढ़कर 31,276 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. यानी महज पांच साल में यह कारोबार दोगुने से ज्यादा हो गया. विशेषज्ञों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में भी यही रफ्तार बनी रह सकती है. अनुमान है कि 2030 तक भारत का आइसक्रीम बाजार 65,780 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा.

2034 तक 1.19 लाख करोड़ रुपये का होगा कारोबार

रिपोर्ट के अनुसार, भारत का आइसक्रीम बाजार 2026 से 2034 के बीच करीब 16 फीसदी की CAGR से बढ़ सकता है. इसी रफ्तार से आगे बढ़ते हुए 2034 तक यह इंडस्ट्री 1.19 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंचने का अनुमान है. इस तेज ग्रोथ के पीछे कई बड़े कारण हैं. इनमें बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम, तेजी से हो रहा शहरीकरण, क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स का विस्तार, टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ती मांग और मजबूत कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं.

अब सिर्फ मौसमी नहीं रहा आइसक्रीम कारोबार

पहले आइसक्रीम को सिर्फ गर्मियों का प्रोडक्ट माना जाता था, लेकिन अब यह पूरे साल पसंद की जाने वाली फूड कैटेगरी बन चुकी है. ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स और क्विक-कॉमर्स कंपनियों ने इसकी पहुंच को काफी आसान बना दिया है. किराना दुकानों और लोकल स्टोर्स पर फ्रीजर नेटवर्क के विस्तार ने भी आइसक्रीम कंपनियों की बिक्री बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है.

इंपल्स आइसक्रीम का सबसे ज्यादा दबदबा

बाजार में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी इंपल्स आइसक्रीम सेगमेंट की है. 2025 में इसकी हिस्सेदारी करीब 59.62 फीसदी रही. चलते-फिरते आइसक्रीम खाने का बढ़ता ट्रेंड और हर जगह इसकी आसान उपलब्धता इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है.

फ्लेवर की बात करें तो चॉकलेट फ्लेवर सबसे ज्यादा पसंद किया जा रहा है. कुल बाजार में इसकी हिस्सेदारी 31.05 फीसदी है. इसके बाद वनीला 28.42 फीसदी और फ्रूट फ्लेवर 24.63 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं.

महाराष्ट्र सबसे बड़ा बाजार

राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा आइसक्रीम बाजार बनकर उभरा है. कुल कारोबार में इसकी हिस्सेदारी करीब 12 फीसदी है. मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में प्रीमियम और ब्रांडेड आइसक्रीम की मजबूत मांग इसकी प्रमुख वजह मानी जा रही है. इसके अलावा महाराष्ट्र का मजबूत कोल्ड-चेन नेटवर्क भी इस सेक्टर की ग्रोथ को बढ़ावा दे रहा है.

PLI स्कीम से मिल रही सरकारी मदद

भारत सरकार भी फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है. PLI स्कीम के तहत फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के आधुनिकीकरण के लिए करीब 10,900 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना हुआ है. 2023-24 में देश में करीब 236.35 मिलियन मीट्रिक टन दूध का उत्पादन हुआ. यही मजबूत डेयरी बेस आइसक्रीम उद्योग को सस्ता और स्थिर कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद कर रहा है.

अनंत अंबानी की एंट्री से बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

मुकेश अंबानी के परिवार की ओर से लॉन्च की गई वंतारा क्रीमैरी (Vantara Creamery) अब इस तेजी से बढ़ते बाजार में नई चुनौती पेश कर सकती है. कंपनी ने 17 फ्लेवर के साथ अपनी शुरुआत की है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह रिलायंस ने कैंपा के जरिए सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में बड़ी कंपनियों को चुनौती दी, उसी तरह आइसक्रीम कारोबार में भी क्वालिटी वॉल्स, क्रीमबेल और बास्किन रॉबिंस जैसी कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है. आने वाले वर्षों में भारत का आइसक्रीम बाजार सिर्फ बड़ा ही नहीं होगा, बल्कि इसमें प्रतिस्पर्धा भी पहले से कहीं ज्यादा तेज दिखाई दे सकती है.


पैरामोटर डिजिटल टेक्नोलॉजी का IPO की ओर बड़ा कदम, सेबी के पास जमा किए दस्तावेज

RewardOn प्लेटफॉर्म कंपनियों को डिजिटल रिवॉर्ड प्रोग्राम डिजाइन, मैनेज और वितरित करने की सुविधा देता है.

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Tuesday, 19 May, 2026
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भारत की फिनटेक और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी कंपनी पैरामोटर डिजिटल टेक्नोलॉजी (Paramotor Digital Technology Limited) ने प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Sebi) के पास गोपनीय तरीके से ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया है. कंपनी की ओर से जारी सार्वजनिक सूचना में यह जानकारी दी गई.

2016 में हुई थी स्थापना

साल 2016 में स्थापित पैरामोटर डिजिटल टेक्नोलॉजी उपभोक्ताओं और कारोबारों के लिए फिनटेक तथा एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी सेवाएं उपलब्ध कराती है. कंपनी का कारोबार कंज्यूमर स्पेंड मैनेजमेंट, रिवॉर्ड और लॉयल्टी सॉल्यूशंस, डिजिटल गिफ्टिंग और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी सेवाओं तक फैला हुआ है.

कंपनी का नेतृत्व एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन सोनिया अशर और मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल आनंद कर रहे हैं. दोनों के पास बैंकिंग, पेमेंट्स और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र का व्यापक अनुभव है.

कई डिजिटल प्लेटफॉर्म का संचालन

कंपनी के पोर्टफोलियो में SpendPro, RewardOn, yayyy.shop और DevStack जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं. SpendPro एक प्रीपेड कार्ड आधारित स्पेंड मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म है, जबकि RewardOn एंटरप्राइज रिवॉर्ड और लॉयल्टी मैनेजमेंट सॉल्यूशन उपलब्ध कराता है. वहीं yayyy.shop सीधे उपभोक्ताओं के लिए डिजिटल गिफ्टिंग मार्केटप्लेस के रूप में काम करता है. DevStack कंपनी की एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट सेवाओं से जुड़ी इकाई है.

डिजिटल अपनाने के बढ़ते ट्रेंड से फायदा मिलने की उम्मीद

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी का एसेट-लाइट और टेक्नोलॉजी आधारित बिजनेस मॉडल भारत में तेजी से बढ़ रही डिजिटल स्वीकार्यता का लाभ उठा सकता है. खासतौर पर कंज्यूमर स्पेंडिंग, एंटरप्राइज एंगेजमेंट और बिजनेस प्रोसेस डिजिटाइजेशन में बढ़ती मांग कंपनी के लिए अवसर पैदा कर सकती है. कंपनी का yayyy.shop प्लेटफॉर्म ग्राहकों को विभिन्न श्रेणियों में प्रीपेड कार्ड और ब्रांडेड गिफ्ट कार्ड की सुविधा देता है, जिससे डिजिटल कॉमर्स क्षेत्र में उसकी मौजूदगी मजबूत हुई है.

एंटरप्राइज ग्राहकों पर भी फोकस

RewardOn प्लेटफॉर्म कंपनियों को डिजिटल रिवॉर्ड प्रोग्राम डिजाइन, मैनेज और वितरित करने की सुविधा देता है. इसके जरिए कंपनियां कर्मचारी जुड़ाव, ग्राहक लॉयल्टी और चैनल इंसेंटिव कार्यक्रमों को अपनी जरूरत के अनुसार कस्टमाइज कर सकती हैं.

वहीं DevStack कारोबारों के लिए कस्टमाइज्ड और स्केलेबल डिजिटल सॉल्यूशंस विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करता है, जिससे कंपनियों को बिजनेस-क्रिटिकल सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन तैयार करने में मदद मिलती है.

निवेशकों की नजर टेक-आधारित कंपनियों पर

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ता खर्च, रिवॉर्ड, डिजिटल गिफ्टिंग और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी जैसे विविध क्षेत्रों में फैला पैरामोटर का डिजिटल इकोसिस्टम उसे भारतीय शेयर बाजार में उभरती टेक कंपनियों की श्रेणी में मजबूत दावेदार बना सकता है. खासकर ऐसे समय में जब निवेशकों का रुझान तेजी से बढ़ने वाली टेक्नोलॉजी-आधारित कंपनियों की ओर बढ़ रहा है.
 


5 दिन में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, आम आदमी पर बढ़ेगा महंगाई का बोझ

नई बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. इससे पहले पेट्रोल 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर था.

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Tuesday, 19 May, 2026
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, महंगे कच्चे तेल और कमजोर रुपये का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर दिखने लगा है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पिछले पांच दिनों में दूसरी बार बढ़ोतरी की गई है. नई कीमतों के बाद ईंधन करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है, जिससे रोजाना सफर करने वालों से लेकर ट्रांसपोर्ट और कैब सेवाओं तक की लागत बढ़ने की आशंका है.

5 दिन में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर बढ़ोतरी की है. इस बार पेट्रोल 86 पैसे प्रति लीटर और डीजल 83 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ है. इससे पहले 15 मई को दोनों ईंधनों की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी. लगातार दूसरी बार दाम बढ़ने से पांच दिनों में पेट्रोल-डीजल करीब 4 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो गए हैं.

दिल्ली में क्या हो गई नई कीमतें

नई बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 98.64 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है, जबकि डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. इससे पहले पेट्रोल 97.77 रुपये और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर था.

सीएनजी भी हुई महंगी

पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ सीएनजी की कीमतों में भी हाल के दिनों में बढ़ोतरी हुई है. दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी के दाम 1 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए हैं. इससे पहले 15 मई को सीएनजी 2 रुपये प्रति किलो महंगी हुई थी. नई कीमतों के बाद दिल्ली में सीएनजी 80.09 रुपये प्रति किलो और नोएडा में 88.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गई है.

नौकरीपेशा और ड्राइवरों पर बढ़ेगा दबाव

ईंधन की बढ़ती कीमतों का सीधा असर रोजाना सफर करने वाले नौकरीपेशा लोगों, ऑटो-रिक्शा चालकों और ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों पर पड़ेगा. ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से आने वाले दिनों में जरूरी सामानों की कीमतों पर भी असर देखने को मिल सकता है.

कच्चे तेल और कमजोर रुपये का असर

ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा का उछाल आ चुका है. पिछले कई दिनों से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है. वहीं डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 96.23 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया है.

महंगाई बढ़ने की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं और रुपया कमजोर होता गया, तो आने वाले दिनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है. भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए महंगा तेल सीधे अर्थव्यवस्था और आम लोगों के खर्च पर असर डालता है.
 


तेल, रुपये और ग्लोबल संकेतों का दबाव, जानिए आज कैसी रह सकती है शेयर बाजार की चाल

सोमवार को सेंसेक्स 77.05 अंक की बढ़त के साथ 75,315.04 अंक पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी 6.45 अंक की मामूली तेजी के साथ 23,649.95 अंक पर लगभग सपाट बंद हुआ.

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Tuesday, 19 May, 2026
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की लगातार ऊंची कीमतों और रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी ने सोमवार को घरेलू शेयर बाजार को भारी दबाव में ला दिया था. हालांकि शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 1000 अंक से ज्यादा टूटने के बाद आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी से बाजार ने शानदार वापसी की. ऐसे में आज भी निवेशकों को बाजार में उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिल सकता है. निवेशकों की नजर कच्चे तेल की चाल, वैश्विक बाजारों के संकेत, रुपये की स्थिति और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी, जो आज बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.

भारी गिरावट के बाद संभला बाजार

कल दिनभर के उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 77.05 अंक यानी 0.10 फीसदी की बढ़त के साथ 75,315.04 अंक पर बंद हुआ. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 6.45 अंक यानी 0.03 फीसदी की मामूली तेजी के साथ 23,649.95 अंक पर लगभग सपाट बंद हुआ. सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 16 बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि बाकी शेयरों में दबाव देखने को मिला.

आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी

बाजार में रिकवरी की सबसे बड़ी वजह आईटी सेक्टर में आई तेजी रही. टेक महिंद्रा के शेयरों में सबसे ज्यादा 4.97 फीसदी उछाल दर्ज किया गया. इसके अलावा इन्फोसिस, भारती एयरटेल, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, सन फार्मा, एचसीएल टेक और टीसीएस में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली. निफ्टी आईटी इंडेक्स में 2 फीसदी से अधिक की तेजी दर्ज की गई. वहीं फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर ने भी बाजार को सहारा दिया.

दूसरी ओर मेटल और सरकारी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा. टाटा स्टील में सबसे ज्यादा 3.09 फीसदी की गिरावट आई. इसके अलावा पावरग्रिड, एसबीआई, एनटीपीसी, मारुति, ट्रेंट और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर भी लाल निशान में बंद हुए.

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर दबाव

ब्रॉडर मार्केट में कमजोरी बनी रही. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.15 फीसदी गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.26 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. सेक्टोरल इंडेक्स में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और पीएसयू बैंक शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली.

रुपया फिर रिकॉर्ड निचले स्तर पर

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बॉन्ड यील्ड में उछाल का असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा. डॉलर के मुकाबले रुपया शुरुआती कारोबार में 0.2 फीसदी टूटकर 96.18 के स्तर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है. रुपये में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई है. फरवरी के अंत में ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 5.5 फीसदी कमजोर हो चुका है. एशियाई मुद्राओं में इस साल रुपया सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया है.

आज इन शेयरों पर रखें नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज शेयर बाजार में कई बड़े शेयर निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं. जैसे Eicher Motors की सहयोगी कंपनी रॉयल एनफील्ड आंध्र प्रदेश के ताडा में करीब 2,500 करोड़ रुपये के निवेश से नया ग्रीनफील्ड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने जा रही है, जिससे कंपनी की उत्पादन क्षमता बढ़ने की उम्मीद है. वहीं JSW Steel में बड़ी ब्लॉक डील देखने को मिली है, जहां जीक्यूजी पार्टनर्स और एसबीआई म्यूचुअल फंड ने बड़ी हिस्सेदारी खरीदी है. अडानी समूह भी चर्चा में रहेगा, क्योंकि कंपनी ने ईरान से जुड़े एलपीजी आयात मामले में अमेरिकी संस्था ओएफएसी के साथ समझौता करते हुए 275 मिलियन डॉलर भुगतान पर सहमति दी है, हालांकि कंपनी ने किसी भी गलती से इनकार किया है. दूसरी ओर Hyundai Motor Company भारत में FY28 तक सालाना 10 लाख यूनिट उत्पादन क्षमता हासिल करने की तैयारी में है और इसके लिए 7,500 करोड़ रुपये निवेश करेगी. वहीं Vascon Engineers को Reliance Industries से 131.58 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है. इसके अलावा आज Bharat Electronics, Zydus Lifesciences, Bharat Petroleum, Mankind Pharma, PI Industries, PNC Infratech और Zee Entertainment Enterprises जैसी कंपनियां अपने चौथी तिमाही के नतीजे जारी करेंगी, जिनका असर बाजार की चाल पर देखने को मिल सकता है. 

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


गौतम अडानी को बड़ी राहत, सबूतों के अभाव में अमेरिकी अदालत ने वापस लिए सभी केस

अमेरिकी अभियोजकों ने अदालत में दाखिल दस्तावेज में कहा कि मामले की समीक्षा के बाद विभाग ने यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार और सबूत मौजूद नहीं हैं.

Last Modified:
Tuesday, 19 May, 2026
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भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर सागर अडानी को अमेरिका में बड़ी कानूनी राहत मिली है. अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने न्यूयॉर्क में चल रहे सिक्योरिटीज और वायर फ्रॉड मामले में दोनों के खिलाफ लगाए गए सभी आपराधिक आरोप हमेशा के लिए वापस ले लिए हैं. अदालत ने मामले को “विद प्रेजुडिस” खारिज किया है. यानी अब इस केस को भविष्य में दोबारा नहीं खोला जा सकेगा.

अमेरिकी अभियोजकों ने अदालत में दाखिल दस्तावेज में कहा कि मामले की समीक्षा के बाद विभाग ने यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपों को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार और सबूत मौजूद नहीं हैं. इसके बाद अदालत ने अडानी और अन्य आरोपियों के खिलाफ दायर अभियोग को स्थायी रूप से खारिज करने का आदेश जारी कर दिया. अमेरिकी आपराधिक मामलों में इस तरह “विद प्रेजुडिस” केस बंद होना काफी दुर्लभ माना जाता है.

2024 में लगे थे रिश्वत और धोखाधड़ी के आरोप

यह मामला 2024 के अंत में सामने आया था. जब अमेरिकी न्याय विभाग और अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने आरोप लगाया था कि अडानी समूह ने भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को करीब 26.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई थी. जांच एजेंसियों का दावा था कि इस कथित व्यवस्था की जानकारी अमेरिकी निवेशकों और कर्जदाताओं से छिपाई गई.

हालांकि जांच के दौरान अभियोजकों को अमेरिका से जुड़े स्पष्ट लिंक और आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले. सूत्रों के मुताबिक. इसी वजह से मामला धीरे-धीरे कमजोर पड़ता गया और अंततः डीओजे ने सभी आपराधिक आरोप वापस लेने का फैसला किया.

लगातार बंद होती गईं जांचें

पिछले कुछ दिनों में अडानी समूह से जुड़ी कई अमेरिकी जांचों का निपटारा हुआ है. हाल ही में एसईसी ने निवेशक खुलासों से जुड़े सिविल मामले का समझौते के जरिए निपटारा किया था. अदालत में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार. गौतम अडानी ने 60 लाख डॉलर और सागर अडानी ने 1.2 करोड़ डॉलर के भुगतान पर सहमति जताई थी. हालांकि दोनों ने किसी भी गलत काम को स्वीकार नहीं किया.

इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की संस्था ओएफएसी ने ईरान से एलपीजी आयात से जुड़े प्रतिबंध उल्लंघन मामले में भी समझौता किया. इस मामले में अडानी समूह ने 27.5 करोड़ डॉलर का भुगतान करने और जांच में सहयोग देने पर सहमति दी.

ट्रंप के निजी वकील ने संभाली थी पैरवी

मामले में अडानी पक्ष की ओर से अमेरिका की कई बड़ी लॉ फर्मों ने कानूनी लड़ाई लड़ी. अडानी के प्रमुख वकीलों में शामिल रॉबर्ट गिफ्रा, जो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील भी माने जाते हैं. उन्होंने न्याय विभाग के अधिकारियों के सामने करीब 100 पन्नों की प्रस्तुति दी थी.

बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि मामला अमेरिकी क्षेत्राधिकार से बाहर का है. क्योंकि कथित घटनाएं भारत में हुईं. संबंधित कंपनियां भारतीय थीं और संबंधित प्रतिभूतियां अमेरिकी एक्सचेंजों में सूचीबद्ध नहीं थीं. वकीलों ने यह भी कहा कि अमेरिकी निवेशकों को कोई प्रत्यक्ष नुकसान नहीं हुआ और आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक. अडानी पक्ष ने यह भी दलील दी थी कि जब तक यह मामला चलता रहेगा. तब तक अडानी एंटरप्राइजेज अमेरिका में प्रस्तावित निवेश योजनाओं को आगे नहीं बढ़ा पाएगी. गौरतलब है कि गौतम अडानी ने अमेरिकी चुनावों में ट्रंप की जीत के बाद अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश और करीब 15,000 नौकरियां पैदा करने की घोषणा की थी.

विशेषज्ञों ने भी उठाए थे अधिकार क्षेत्र पर सवाल

कई कानूनी विशेषज्ञों ने भी इस मामले में सवाल उठाए थे कि क्या अमेरिकी एजेंसियां विदेशी कंपनियों और विदेश में हुई गतिविधियों पर अपने कानूनों का दायरा जरूरत से ज्यादा बढ़ा रही हैं. विशेषज्ञों के अनुसार. अडानी और अन्य आरोपियों पर रिश्वतखोरी या विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (FCPA) के तहत गंभीर आरोप नहीं लगाए गए थे. बल्कि मामला मुख्य रूप से सिक्योरिटीज और वायर फ्रॉड तक सीमित था.

अडानी समूह ने शुरुआत से ही सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि समूह वैश्विक कॉरपोरेट गवर्नेंस और अनुपालन मानकों का पालन करता है. अब अमेरिकी अदालत द्वारा मामला स्थायी रूप से बंद किए जाने के बाद समूह को बड़ी प्रतिष्ठात्मक और कानूनी राहत मिली है.
 

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भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी, पीयूष गोयल ने लॉन्च किया भारतीय व्यापार महोत्सव

12 से 15 अगस्त तक भारत मंडपम में देश के सबसे बड़े व्यापार एक्सपो का आयोजन होगा, जिसमें ‘लोकल टू ग्लोबल’ को नई ताकत मिलेगी.

Last Modified:
Monday, 18 May, 2026
BWHindia

भारत को वैश्विक व्यापार और विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को भारत मंडपम, प्रगति मैदान में भारतीय व्यापार महोत्सव (BVM) की आधिकारिक वेबसाइट लॉन्च की.

यह महोत्सव 12 से 15 अगस्त तक भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा. इसका संयुक्त आयोजन आईटीपीओ और कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) द्वारा किया जा रहा है. आयोजन का उद्देश्य भारत को केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक विनिर्माण और निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना है.

भारत तेजी से बन रहा वैश्विक आर्थिक शक्ति

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत आज दुनिया में तेजी से एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है. उन्होंने कहा कि यदि व्यापारी, उद्योग जगत, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और उद्यमी मिलकर काम करें तो भारत आसानी से 1 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का लक्ष्य हासिल कर सकता है. उन्होंने कहा कि भारत कौशल, प्रतिभा और ज्ञान से भरपूर देश है. यदि भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता को और बेहतर बनाया जाए तो दुनिया में ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ सकती है.

‘वोकल फॉर लोकल’ को मिलेगा नया मंच

सांसद और कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भारतीय व्यापार महोत्सव केवल एक एक्सपो नहीं, बल्कि व्यापारियों, एमएसएमई, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और कारीगरों को सशक्त बनाने का राष्ट्रीय अभियान है. उन्होंने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ विजन को नई गति देगा. साथ ही भारतीय उत्पादों और सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा.

प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भारत की पहचान अब सिर्फ एक बड़े उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं, बल्कि एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने की जरूरत है.

देशभर से जुटे व्यापार और उद्योग जगत के प्रतिनिधि

कार्यक्रम के दौरान पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच व्यापार और उद्योग क्षेत्र के लिए रणनीतिक कदमों पर भी चर्चा हुई. सम्मेलन में देश के 27 राज्यों से करीब 150 प्रमुख व्यापारिक नेता, उद्योगपति, निर्यातक, स्टार्टअप्स, महिला उद्यमी और विभिन्न व्यापार संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए. इस दौरान भारत को वैश्विक सप्लाई चेन और सोर्सिंग हब बनाने की रणनीतियों पर भी मंथन किया गया.

भारतीय उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच

आईटीपीओ के अध्यक्ष जावेद अशरफ ने कहा कि भारतीय व्यापार महोत्सव देश के रिटेल व्यापार की छवि बदलने वाला ऐतिहासिक आयोजन साबित हो सकता है. वहीं, आईटीपीओ के प्रबंध निदेशक नीरज खरवाल ने कहा कि यह महोत्सव भारत की उत्पादन क्षमता, पारंपरिक उत्पादों, नवाचार और उद्यमशीलता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का सशक्त माध्यम बनेगा. उन्होंने कहा कि इस पहल से एमएसएमई, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और कारीगरों को नए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक अवसर मिलेंगे.
 


सरकारी संस्थानों में मितव्ययिता मिशन शुरू, विदेशी यात्राओं पर लगाम, EV अपनाने का निर्देश

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों को गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने को कहा गया है.

Last Modified:
Monday, 18 May, 2026
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बढ़ते वैश्विक आर्थिक दबाव और पश्चिम एशिया तनाव के बीच केंद्र सरकार ने सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों में बड़े स्तर पर खर्च कटौती अभियान शुरू कर दिया है. वित्त मंत्रालय ने संस्थानों को विदेशी यात्राएं सीमित करने, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को बढ़ावा देने और पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने के निर्देश दिए हैं.

सरकारी संस्थानों में खर्च नियंत्रण पर फोकस

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा जारी निर्देश के मुताबिक सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों को गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करने को कहा गया है. इस फैसले का असर देश के बड़े सरकारी संस्थानों और लाखों कर्मचारियों पर पड़ेगा. इस अभियान के दायरे में भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) जैसी प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं.

अब ज्यादातर बैठकें होंगी वर्चुअल

सरकार ने निर्देश दिया है कि सभी बैठकें, समीक्षा और कंसल्टेशन अधिकतम स्तर तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित किए जाएं. केवल उन्हीं बैठकों में फिजिकल उपस्थिति अनिवार्य होगी, जहां इसकी वास्तविक जरूरत हो. सरकार का मानना है कि इससे यात्रा और प्रशासनिक खर्चों में बड़ी बचत होगी.

विदेशी यात्राओं पर सख्ती

नए निर्देशों के तहत चेयरपर्सन, प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) समेत शीर्ष अधिकारियों की विदेशी यात्राओं को सीमित रखने को कहा गया है. जहां संभव हो, अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और बैठकों में वर्चुअल माध्यम से भाग लेने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं.

इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने की तैयारी

सरकार ने सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को किराये पर ली गई पेट्रोल और डीजल कारों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का लक्ष्य तय करने को कहा है. आदेश में कहा गया है कि मुख्यालय और शाखा कार्यालयों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से EV में बदला जाए, ताकि ईंधन लागत कम हो और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिले.

पीएम मोदी की अपील के बाद तेज हुआ अभियान

यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने सरकारी विभागों और संस्थानों से मितव्ययिता अपनाने और खर्चों में संयम बरतने को कहा था. सरकार वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के असर को लेकर सतर्क नजर आ रही है.

पश्चिम एशिया तनाव से बढ़ी आर्थिक चिंता

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ने की आशंका है. इसी बीच भारतीय रुपया भी इस साल एशिया की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल हो गया है और डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच चुका है.

राज्यों में भी शुरू हुए बचत के प्रयास

लागत में कटौती के लिए कई राज्य सरकारों ने कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम की अनुमति देने जैसे कदम भी उठाए हैं. सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक खर्चों को नियंत्रित करना और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है.


सोने में निवेश का नया दौर, NSE पर शुरू हुई इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स ट्रेडिंग

### फिजिकल गोल्ड की झंझट से मिलेगी राहत. निवेशकों को मिलेगा सुरक्षित और पारदर्शी डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म

Last Modified:
Monday, 18 May, 2026
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भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने डिजिटल गोल्ड निवेश को नई दिशा देते हुए इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (EGR) की ट्रेडिंग शुरू कर दी है. यह व्यवस्था निवेशकों को डिजिटल माध्यम से सोने में निवेश का अवसर देगी, जबकि इसके पीछे वास्तविक फिजिकल गोल्ड सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाएगा. NSE का यह कदम भारत के गोल्ड मार्केट में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. इसका उद्देश्य गोल्ड ट्रेडिंग को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और आसान बनाना है, ताकि निवेशकों को शुद्धता, स्टोरेज और चोरी जैसी समस्याओं से राहत मिल सके.

18 मई से शुरू हुई ट्रेडिंग

एक्सचेंज के अनुसार EGR ट्रेडिंग की शुरुआत 18 मई से हो गई है. बाजार सोमवार से शुक्रवार सुबह 9 बजे से रात 11:30 बजे तक खुला रहेगा, जबकि अमेरिकी डेलाइट सेविंग टाइम के दौरान यह समय रात 11:55 बजे तक रहेगा. इस प्रणाली में सेटलमेंट T+1 साइकिल के आधार पर होगा, जिससे निवेशकों को तेज और व्यवस्थित सेटलमेंट सुविधा मिलेगी.

देशभर में बढ़ाया जाएगा नेटवर्क

NSE ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स को बाजार से शानदार प्रतिक्रिया मिली है. फिलहाल अहमदाबाद और मुंबई में वैल्यूइंग और कलेक्शन सेंटर शुरू किए जा चुके हैं. इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु में भी नए सेंटर जल्द सक्रिय किए जाएंगे. एक्सचेंज का लक्ष्य आने वाले समय में देशभर में करीब 120 सेंटर स्थापित करने का है.

क्या है इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (EGR)?

इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट यानी EGR, सेबी द्वारा विनियमित वॉल्ट में रखे गए फिजिकल गोल्ड के स्वामित्व का डिजिटल प्रमाण है. प्रत्येक EGR सुरक्षित रूप से संग्रहित सोने की एक निश्चित मात्रा का प्रतिनिधित्व करता है. इस सोने को लाइसेंस प्राप्त वॉल्ट प्रदाताओं द्वारा प्रमाणित और प्रबंधित किया जाता है. निवेशकों की होल्डिंग डीमैट अकाउंट में शेयरों और अन्य प्रतिभूतियों की तरह दिखाई देगी.

छोटे निवेशकों के लिए भी आसान होगा निवेश

EGR की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निवेशक अपनी सुविधा के अनुसार छोटी या बड़ी मात्रा में सोना खरीद सकते हैं. यह 1 किलोग्राम, 100 ग्राम, 10 ग्राम, 1 ग्राम और यहां तक कि 100 मिलीग्राम जैसे विभिन्न आकारों में उपलब्ध होगा. इससे छोटे निवेशकों के लिए भी गोल्ड निवेश आसान और सुलभ बन जाएगा.

फिजिकल गोल्ड की परेशानियों से मिलेगी राहत

भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि परंपरा और संपत्ति का प्रतीक भी माना जाता है. हालांकि फिजिकल गोल्ड खरीदने में शुद्धता की जांच, सुरक्षित स्टोरेज, चोरी का खतरा और दोबारा बेचने पर नुकसान जैसी कई चुनौतियां रहती हैं. EGR सिस्टम इन समस्याओं को कम करने का प्रयास करेगा और निवेशकों को अधिक सुरक्षित डिजिटल विकल्प उपलब्ध कराएगा.

अभी भी मौजूद हैं कुछ चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि EGR भारत के गोल्ड इकोसिस्टम में बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं. फिलहाल सबसे बड़ी चिंता बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी की है. इसके अलावा ब्रोकर प्लेटफॉर्म्स को भी इस सिस्टम के साथ बड़े स्तर पर एकीकृत करने की जरूरत होगी. वहीं भारत में बड़ी संख्या में लोग अब भी फिजिकल गोल्ड को प्राथमिकता देते हैं, जिससे डिजिटल गोल्ड को व्यापक स्तर पर अपनाने में समय लग सकता है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)