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अमेरिकी टैरिफ के असर से निपटेगा भारत: केंद्र सरकार की तीन-सूत्री रणनीति तैयार

अमेरिका की टैरिफ नीति ने भारत के प्रमुख निर्यातक राज्यों और श्रम-प्रधान उद्योगों के सामने चुनौती खड़ी कर दी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत पर अमेरिका द्वारा 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने की घोषणा के बाद केंद्र सरकार ने त्वरित कदम उठाए हैं. सरकार ने निर्यात में अहम योगदान देने वाले राज्यों गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु  को श्रम-प्रधान क्षेत्रों में समर्थन देने का फैसला लिया है, जिससे रोजगार पर संभावित असर को रोका जा सके.

निर्यात आधारित राज्यों को मिलेगा निर्देश

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय जल्दी ही इन राज्यों को पत्र भेजेगा, जिसमें श्रम-आधारित सेक्टरों को स्थिर बनाए रखने और वैकल्पिक रणनीतियों पर काम करने को कहा जाएगा. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार निर्यातकों को राहत देने के लिए नए विकल्पों की तलाश में जुटी है. गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्य निर्यात में अग्रणी हैं, लेकिन अमेरिकी शुल्क वृद्धि से इन पर खासा असर पड़ सकता है. केंद्र चाहता है कि ये राज्य जल्दी समाधान की दिशा में कदम उठाएं.

इन राज्यों का निर्यात में वर्चस्व

वित्त वर्ष 2025 में भारत का कुल निर्यात 437 अरब डॉलर रहा, जिसमें तीन-चौथाई हिस्सेदारी सिर्फ पांच राज्यों — गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश — की रही.

1. गुजरात

 - पेट्रोलियम उत्पाद: 43.9 अरब डॉलर
  - अभियांत्रिकी सामान: 16.6 अरब डॉलर
  - रत्न एवं आभूषण: 8.3 अरब डॉलर
  - परिधान: 5.6 अरब डॉलर

2. महाराष्ट्र

  - अभियांत्रिकी सामान: 22.5 अरब डॉलर
  - रत्न एवं आभूषण: 13.7 अरब डॉलर
  - रसायन: 8.1 अरब डॉलर
  - कृषि उत्पाद: 5.4 अरब डॉलर
  - परिधान: 3.8 अरब डॉलर

3. तमिलनाडु

  - अभियांत्रिकी सामान: 18.1 अरब डॉलर
  - इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद: 14.6 अरब डॉलर
  - कपड़ा: 8 अरब डॉलर
  - चमड़ा और उसके उत्पाद: 1.6 अरब डॉलर

खतरे में परिधान और चमड़ा उद्योग

निर्यातकों ने आशंका जताई है कि अमेरिका द्वारा शुल्क बढ़ाए जाने से भारत के कई श्रम-प्रधान सेक्टर जैसे परिधान और चमड़ा उत्पादों के निर्यात पर गंभीर असर पड़ सकता है. इन क्षेत्रों में पहले से ही मार्जिन कम है और वैश्विक प्रतिस्पर्धा तेज़ हो चुकी है.

सरकार की तीन-सूत्री योजना

सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए तीन-स्तरीय रणनीति बनाई है:

1. क्षेत्र आधारित निर्यात संवर्द्धन अभियान -  प्रस्तावित 2,250 करोड़ रुपये के पैकेज के तहत राज्यवार योजनाएं लाई जाएंगी ताकि प्रभावित सेक्टरों को राहत मिल सके.

2. वैकल्पिक विदेशी बाजारों की तलाश -   अधिशेष उत्पादन को अन्य देशों में निर्यात करने के विकल्प खोजे जाएंगे.

3. घरेलू मांग को बढ़ावा - जो उत्पाद विदेशों में नहीं जा पाएंगे, उन्हें घरेलू बाजार में खपाने की योजना बनाई जा रही है.

सरकार की त्वरित प्रतिक्रिया

केंद्र सरकार ने अमेरिका के कदम के बाद तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कपड़ा क्षेत्र के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना को फिर से शुरू कर दिया है. यह कदम शुक्रवार को लिया गया ताकि कपड़ा उद्योग को राहत दी जा सके. वहीं, रविवार को बेंगलुरु में मेट्रो परियोजनाओं के उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकेत दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें इस चुनौती से मिलकर निपटेंगी. उन्होंने कहा, "लोगों की सेवा में केंद्र और राज्य सरकारें साथ काम करेंगी."

 


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