एसबीआई रिसर्च का अनुमान, FY27 में भारत का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स 50 अरब डॉलर के सरप्लस में रह सकता है; मजबूत विदेशी पूंजी प्रवाह से बाहरी मोर्चे पर अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है. एसबीआई रिसर्च के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत का बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (BoP) करीब 50 अरब डॉलर के सरप्लस में रह सकता है. इसका मतलब है कि देश में बाहर जाने वाली विदेशी मुद्रा के मुकाबले आने वाली विदेशी मुद्रा अधिक रहेगी. रिपोर्ट के मुताबिक, इससे चालू खाता घाटा (CAD) जीडीपी के करीब 1 फीसदी तक सीमित रह सकता है और भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति मजबूत बनी रहेगी.
विदेशी मुद्रा का बढ़ता प्रवाह
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए किए गए उपायों से देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ा है. FCNR(B) डिपॉजिट से जुड़े उपायों के तहत अब तक करीब 57 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई जा चुकी है.
रिपोर्ट का अनुमान है कि अगस्त के बाकी दिनों में 25 से 30 अरब डॉलर का अतिरिक्त प्रवाह हो सकता है. ऐसे में कुल राशि करीब 85 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है. RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) भी भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के मजबूत प्रवाह का उल्लेख कर चुकी है. इससे देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूती मिली है.
विदेशी मुद्रा जुटाने की लागत कितनी?
विदेशी मुद्रा जुटाने के साथ उसकी हेजिंग और प्रबंधन की लागत भी जुड़ी होती है. इसको लेकर बाजार में चिंता जताई जा रही थी, लेकिन एसबीआई रिसर्च के मुताबिक यह लागत भारत के लिए बड़ी चिंता नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, पांच साल की कुल हेजिंग लागत करीब 10.5 अरब डॉलर हो सकती है. यह भारत के करीब 700 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 1.45 फीसदी है. यानी विदेशी मुद्रा भंडार के मुकाबले यह लागत सीमित है.
रुपये को मिल सकता है सहारा
विदेशी मुद्रा के मजबूत प्रवाह का असर रुपये की स्थिति पर भी पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, FCNR(B) से जुड़े उपायों के बाद रुपये में करीब 0.1 फीसदी की मजबूती आई है. एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि अगस्त के अंत तक रुपया 95 से 95.5 रुपये प्रति डॉलर के दायरे में रह सकता है. रुपये में स्थिरता से आयात लागत को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है. खासकर कच्चे तेल और अन्य जरूरी आयात महंगे होने की स्थिति में मजबूत रुपया अर्थव्यवस्था पर दबाव कम करने में मददगार हो सकता है.
कच्चे तेल की कीमत बनी चुनौती
हालांकि, वैश्विक स्तर पर कई जोखिम अभी भी बने हुए हैं. अमेरिका में 30 साल की ट्रेजरी यील्ड करीब 5.3 फीसदी तक पहुंच गई है. वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का जोखिम बना हुआ है. ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है. भारत अपनी जरूरत के बड़े हिस्से के लिए कच्चे तेल का आयात करता है. ऐसे में तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से देश के आयात बिल और चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है.
विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की बढ़ी हिस्सेदारी
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता पर भी जोर दे रहा है. इसी रणनीति के तहत विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ी है. वित्त वर्ष 2025-26 में विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 16.7 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थी. 7 अगस्त तक यह करीब 15.38 फीसदी रही. सोने का बढ़ता भंडार वैश्विक आर्थिक और वित्तीय संकट की स्थिति में भारत के लिए सुरक्षा कवच का काम कर सकता है.
कुल मिलाकर, मजबूत विदेशी पूंजी प्रवाह, बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार और बैलेंस ऑफ पेमेंट्स में संभावित सरप्लस भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव जैसे जोखिमों पर भी नजर बनाए
अमेजन सेलर सर्विसेज ने पहली बार दर्ज किया 172 करोड़ रुपये का सकारात्मक PBIT, टैक्स के बाद घाटा भी घटा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अमेजन के भारत में मार्केटप्लेस कारोबार ने वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में अहम उपलब्धि हासिल की है. अमेजन सेलर सर्विसेज ने इस दौरान पहली बार ब्याज और टैक्स से पहले मुनाफा (PBIT) दर्ज किया है. कंपनी का PBIT 172 करोड़ रुपये रहा. वहीं, कंपनी की कुल आय सालाना आधार पर 15.5 फीसदी बढ़कर 35,574 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष में 30,805 करोड़ रुपये थी.
यह प्रदर्शन भारत में अमेजन के मुख्य मार्केटप्लेस कारोबार में लगातार हो रही वृद्धि को दर्शाता है. कंपनी ने FY25 में पहली बार सकारात्मक EBITDA दर्ज किया था और अब FY26 में सकारात्मक PBIT हासिल किया है.
टैक्स के बाद घाटा भी हुआ कम
अमेजन सेलर सर्विसेज ने FY26 में टैक्स के बाद अपने घाटे को भी कम किया है. कंपनी का घाटा घटकर 389.9 करोड़ रुपये रह गया, जबकि FY25 में यह 408.2 करोड़ रुपये था. खास बात यह है कि कंपनी ने यह सुधार ऐसे समय में दर्ज किया है, जब अमेजन भारत में ई-कॉमर्स के साथ-साथ क्विक कॉमर्स, क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है.
PBIT में मुनाफे और टैक्स के बाद घाटे में कमी से संकेत मिलता है कि भारत में अमेजन के मार्केटप्लेस कारोबार की परिचालन स्थिति में सुधार हो रहा है. हालांकि, कंपनी अभी भी विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को प्राथमिकता दे रही है.
भारत में 48 अरब डॉलर निवेश की योजना
अमेजन ने 2026 से 2030 के बीच भारत में 48 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई है. इसके साथ ही 2010 से भारत में कंपनी का कुल निवेश दशक के अंत तक 88 अरब डॉलर से अधिक पहुंचने की उम्मीद है. यह निवेश मुख्य रूप से अमेजन के ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स फुलफिलमेंट नेटवर्क के विस्तार के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता बढ़ाने में किया जाएगा.
क्विक कॉमर्स पर बढ़ा फोकस
अमेजन भारत के तेजी से बढ़ते क्विक-कॉमर्स बाजार में भी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रही है. कंपनी ‘अमेजन नाउ’ के जरिए इस क्षेत्र में विस्तार कर रही है. कंपनी के मुताबिक, अमेजन नाउ भारत में उसका सबसे तेजी से बढ़ने वाला ई-कॉमर्स बिजनेस यूनिट है और लॉन्च के बाद से इसके ऑर्डर हर तिमाही दोगुने हो रहे हैं. कंपनी इस सेवा का विस्तार 300 से अधिक शहरों में कर रही है.
इसके जरिए अमेजन किराना और रोजमर्रा की जरूरत के सामान के बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जहां उसे पहले से मौजूद क्विक-कॉमर्स कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिल रही है.
सेलर्स के लिए कम की फीस
अमेजन अपने प्लेटफॉर्म पर विक्रेताओं की लागत कम करने पर भी ध्यान दे रही है. मार्च में कंपनी ने 1,000 रुपये से कम कीमत वाले 12.5 करोड़ से अधिक उत्पादों पर जीरो रेफरल फीस का दायरा बढ़ाया था. यह सुविधा 1,800 से अधिक कैटेगरी में लागू की गई.
इसके अलावा 300 रुपये से कम कीमत वाले उत्पादों के लिए ईजी शिप फीस में 20 फीसदी से अधिक की कटौती की गई. अमेजन के अनुसार, इन बदलावों से विक्रेताओं को फीस में 70 फीसदी तक की बचत हो सकती है.
एआई से सेलर्स को मिलेगी मदद
कंपनी ने भारत में एआई आधारित सेलर असिस्टेंट भी पेश किया है. यह टूल विक्रेताओं को प्रोडक्ट लिस्टिंग, इन्वेंट्री मैनेजमेंट, बिजनेस इनसाइट्स और ग्लोबल एक्सपेंशन जैसे कामों में मदद करता है. यह टूल अंग्रेजी और हिंग्लिश में उपलब्ध है और अमेजन के एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित है.
FY26 के नतीजे अमेजन के भारत में मार्केटप्लेस कारोबार के लिए महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं. आय में मजबूत वृद्धि, पहली बार सकारात्मक PBIT और लगातार बढ़ते निवेश से संकेत मिलता है कि कंपनी भारत में ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
DRDO ने मिसाइल और बम वेपन सिस्टम के लिए निजी कंपनियों से मांगे आवेदन, ‘डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर’ मॉडल के तहत होगा चयन
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने पहली बार रणनीतिक हथियारों और मिसाइल प्रणालियों के निर्माण में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की पहल की है. इसके तहत निजी कंपनियों से मिसाइल और बम वेपन सिस्टम विकसित करने और उत्पादन के लिए आवेदन मांगे गए हैं. इस कदम से आधुनिक हथियारों का विकास और बड़े पैमाने पर उत्पादन तेजी से करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
निजी कंपनियों को मिलेगा रणनीतिक हथियारों के विकास का मौका
DRDO के मिसाइल एवं रणनीतिक सिस्टम विभाग ने भविष्य की महत्वपूर्ण रक्षा परियोजनाओं के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है. इसके तहत अग्नि सीरीज जैसी मिसाइलों से लेकर पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली परमाणु हथियार प्रणालियों के नए वैरिएंट विकसित किए जाने की योजना है.
अब तक इन संवेदनशील हथियार प्रणालियों के निर्माण में सरकारी कंपनियों की प्रमुख भूमिका रही है. भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इनके उत्पादन से जुड़े रहे हैं. नई व्यवस्था में निजी क्षेत्र को भी इन परियोजनाओं में भागीदार बनाया जाएगा. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और सोलर एयरोस्पेस एंड डिफेंस जैसी कंपनियों की इस तरह की परियोजनाओं में भागीदारी की संभावना है.
कंपनियों के लिए तय किए गए सख्त मानक
रणनीतिक हथियारों के निर्माण से जुड़ी इन परियोजनाओं में भाग लेना निजी कंपनियों के लिए आसान नहीं होगा. DRDO ने कंपनियों के लिए तकनीकी और वित्तीय योग्यता से जुड़े कड़े मानक तय किए हैं. आवेदक कंपनियों के पास रक्षा निर्माण से संबंधित इंडस्ट्रियल लाइसेंस होना जरूरी होगा. इसके साथ ही विस्फोटकों के सुरक्षित रखरखाव और संचालन के लिए पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) का लाइसेंस भी अनिवार्य होगा.
कंपनी के लिए न्यूनतम टर्नओवर और नेटवर्थ से जुड़ी शर्तें भी निर्धारित की गई हैं. कंपनी की नेटवर्थ परियोजना की अनुमानित लागत के 5 फीसदी से अधिक होनी चाहिए. इसके अलावा बड़े और जटिल प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक पूरा करने का अनुभव रखने वाली कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी.
हर प्रोजेक्ट में कम से कम दो कंपनियां होंगी
नई व्यवस्था को ‘डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर’ मॉडल के तहत लागू किया जाएगा. प्रत्येक परियोजना के लिए कम से कम दो कंपनियों का चयन किया जाएगा. चयनित कंपनियां DRDO के साथ मिलकर हथियार प्रणालियों के प्रोटोटाइप तैयार करेंगी.
इन प्रोटोटाइप का परीक्षण और मूल्यांकन किया जाएगा. सफल परीक्षण के बाद रणनीतिक बलों की जरूरत और मांग के आधार पर इन्हीं कंपनियों को बड़े पैमाने पर उत्पादन की जिम्मेदारी दी जा सकेगी.
उत्पादन क्षमता की भी होगी कड़ी जांच
हथियारों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता से कोई समझौता न हो, इसके लिए कंपनियों के इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी क्षमताओं का विस्तृत आकलन किया जाएगा. DRDO यह भी जांच करेगा कि कंपनियां 50 से 100 या उससे अधिक हथियारों का थोक उत्पादन करने में सक्षम हैं या नहीं.
इसके लिए विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति कंपनियों की उत्पादन इकाइयों का निरीक्षण करेगी. टीम यह देखेगी कि संबंधित कंपनी के पास जरूरी मशीनरी, तकनीकी विशेषज्ञता, उत्पादन क्षमता और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचा मौजूद है या नहीं.
निजी क्षेत्र की भागीदारी से बढ़ेगी रक्षा उत्पादन क्षमता
रणनीतिक हथियारों के विकास और उत्पादन में निजी कंपनियों को शामिल करने की यह पहल भारत के रक्षा क्षेत्र में सरकारी और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को मजबूत कर सकती है. इससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ हथियार प्रणालियों के विकास और उत्पादन में लगने वाला समय कम करने में मदद मिल सकती है. साथ ही, यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
अधिग्रहण के बाद देशभर में 420 सेंटर और 1,000 से अधिक सेवा प्रदाता जुड़े, 2027 तक 500 सेंटर का लक्ष्य
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
हियरिंग हेल्थकेयर क्षेत्र की कंपनी हियरजैप (Hearzap) ने एम्प्लीफॉन (Amplifon India) के हियरिंग हेल्थकेयर कारोबार के अधिग्रहण को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है. यह सौदा मई 2026 में घोषित किए गए अंतिम समझौते के बाद पूरा हुआ है. कंपनी के मुताबिक, यह अधिग्रहण भारत के संगठित हियरिंग हेल्थकेयर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है.
इस अधिग्रहण के साथ Hearzap का नेटवर्क बढ़कर देशभर में 420 सेंटर का हो गया है. कंपनी के पास अब 1,000 से अधिक सेवा प्रदाता हैं. Hearzap का लक्ष्य 2027 तक 500 हियरिंग केयर सेंटर का नेटवर्क तैयार करना है. कंपनी को उम्मीद है कि इस विस्तार से महानगरों के साथ-साथ टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी गुणवत्तापूर्ण हियरिंग केयर की पहुंच बढ़ेगी.
एम्प्लीफॉन इंडिया के 240 हियरिंग केयर पॉइंट जुड़े
इस सौदे के तहत Amplifon India के करीब 240 हियरिंग केयर पॉइंट्स Hearzap के नेटवर्क में शामिल हुए हैं. इनमें 115 सीधे संचालित केंद्र हैं. इसके अलावा अनुभवी क्लिनिकल टीम और मौजूदा ग्राहकों का आधार भी इस अधिग्रहण का हिस्सा है.
Hearzap को अपने निवेशक 360 ONE Asset Management का समर्थन प्राप्त है. कंपनी का कहना है कि Amplifon India की वैश्विक स्तर की क्लिनिकल विशेषज्ञता और Hearzap के बढ़ते राष्ट्रीय नेटवर्क के एकीकरण से भारत में संगठित हियरिंग हेल्थकेयर के लिए मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार होगा.
'सिर्फ नेटवर्क का विस्तार नहीं, क्लिनिकल विशेषज्ञता को जोड़ने का अवसर'
Hearzap के प्रबंध निदेशक राजा एस. ने कहा कि Amplifon India का अधिग्रहण कंपनी की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. उनके मुताबिक, यह केवल नेटवर्क का विस्तार नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रमाणित क्लिनिकल विशेषज्ञता, ऑपरेशनल एक्सीलेंस और ग्राहक-केंद्रित देखभाल को कंपनी के साथ जोड़ने का अवसर भी है.
उन्होंने कहा कि संयुक्त प्लेटफॉर्म के जरिए लाखों भारतीयों तक बेहतर हियरिंग हेल्थकेयर पहुंचाने की क्षमता मजबूत होगी. कंपनी का फोकस हियरिंग केयर की पहुंच बढ़ाने, क्लिनिकल गुणवत्ता मजबूत करने और आधुनिक तकनीक तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर व्यक्तिगत देखभाल उपलब्ध कराने पर रहेगा.
अगले 12 महीनों में चरणबद्ध एकीकरण
Hearzap अगले 12 महीनों में Amplifon India के कारोबार का चरणबद्ध तरीके से एकीकरण करेगी. कंपनी के मुताबिक, इसका उद्देश्य ग्राहकों और कर्मचारियों के लिए सुगम बदलाव सुनिश्चित करना और क्लिनिकल सेवाओं को बिना किसी बाधा के जारी रखना है.
Amplifon India के मौजूदा पेशेवर भी संगठन का हिस्सा बने रहेंगे. इससे सेवाओं में निरंतरता बनाए रखने के साथ-साथ उनकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल Hearzap की भविष्य की विकास योजनाओं में किया जा सकेगा.
2029 तक करीब 500 करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य
एकीकरण के बाद संयुक्त कारोबार का टॉपलाइन राजस्व 230 करोड़ रुपये से अधिक होने की उम्मीद है. Hearzap का लक्ष्य चालू वित्त वर्ष के अंत तक करीब 250 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करना है. कंपनी FY2029 तक इसे लगभग 500 करोड़ रुपये तक पहुंचाने की योजना बना रही है.
इस वृद्धि को समर्थन देने के लिए कंपनी नए हियरिंग केयर सेंटर खोलने, कम सेवा वाले बाजारों में विस्तार करने, एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स और टेली-ऑडियोलॉजी समाधान अपनाने तथा रिहैबिलिटेशन सेवाओं को मजबूत करने में निवेश करेगी. इसके अलावा कर्मचारियों के प्रशिक्षण और क्लिनिकल एक्सीलेंस पर भी निवेश जारी रखा जाएगा.
हेल्थकेयर संस्थानों और बीमा कंपनियों के साथ सहयोग बढ़ाने की योजना
Hearzap की योजना हेल्थकेयर संस्थानों, बीमा प्रदाताओं और सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ सहयोग बढ़ाने की भी है. इसके जरिए हियरिंग से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच और शुरुआती स्तर पर इलाज को बढ़ावा देने तथा लंबे समय तक हियरिंग हेल्थ को बेहतर बनाने पर जोर दिया जाएगा.
भारत में तेजी से बदल रहा हियरिंग हेल्थकेयर सेक्टर
भारत का हियरिंग हेल्थकेयर सेक्टर तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है. बढ़ती जीवन प्रत्याशा, हियरिंग हेल्थ को लेकर बढ़ती जागरूकता, कामकाजी और पर्यावरणीय शोर के बढ़ते संपर्क तथा हियरिंग केयर समाधानों की बढ़ती स्वीकार्यता इसके प्रमुख कारण हैं.
हालांकि, देश के कई हिस्सों में विशेषज्ञ हियरिंग सेवाओं की पहुंच अभी भी सीमित है. Hearzap का मानना है कि Amplifon India का अधिग्रहण इस अंतर को कम करने और अधिक मजबूत, सुलभ तथा आधुनिक हियरिंग हेल्थकेयर इकोसिस्टम तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में बदलाव को मिली मंजूरी, फिलहाल UPI पर जीरो MDR की व्यवस्था बरकरार
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) भुगतान को लेकर सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन से जुड़े विधेयक को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही सरकार को UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव करने का कानूनी अधिकार मिल गया है. हालांकि, फिलहाल UPI पर जीरो MDR की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
नोटिफिकेशन के जरिए तय होगी MDR की व्यवस्था
कानून में संशोधन के बाद अब सरकार नोटिफिकेशन के जरिए यह तय कर सकेगी कि किन डिजिटल पेमेंट्स को MDR से छूट दी जाएगी. मौजूदा व्यवस्था के तहत बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतान पर MDR के रूप में कोई शुल्क नहीं ले सकते हैं.
इस बदलाव से सरकार के पास भविष्य में UPI लेनदेन पर MDR लागू करने का विकल्प खुल गया है. हालांकि, इसके लिए अलग से सरकारी फैसला और नोटिफिकेशन जारी करना होगा. यानी राष्ट्रपति की मंजूरी का मतलब यह नहीं है कि UPI पेमेंट पर तत्काल कोई चार्ज लग गया है.
सरकार को इंसेंटिव पर खर्च घटाने में मिल सकती है मदद
UPI पर जीरो MDR की व्यवस्था के कारण बैंकों और पेमेंट कंपनियों को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए सरकार समय-समय पर इंसेंटिव देती रही है. MDR व्यवस्था में बदलाव की अनुमति मिलने से भविष्य में सरकार को इस तरह के खर्च को कम करने का विकल्प मिल सकता है.
टैक्स कानून में भी बदलाव को मंजूरी
राष्ट्रपति ने Taxation and Other Laws (Amendment) Act, 2026 को भी मंजूरी दी है. इसका उद्देश्य देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और कारोबार करना आसान बनाना है. इसके अलावा नए प्रावधानों के तहत फंड मैनेजरों के लिए भारत में कारोबार स्थापित करने की प्रक्रिया आसान करने का प्रयास किया गया है. कुछ परिस्थितियों में भारत में उनकी मौजूदगी को टैक्स नियमों के तहत भारत में कारोबार करने के रूप में नहीं माना जाएगा. इससे भारत को ग्लोबल फंड मैनेजमेंट और निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
वित्तमंत्री ने कहा कि सरकारी बैंक दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों तक अधिक ऋण पहुंचाएं. इसके साथ ही युवाओं को बैंकिंग से जोड़ने के लिए 2 अक्टूबर से विशेष अभियान शुरू करने का सुझाव भी दिया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत को दलहन और तिलहन के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने सरकारी बैंकों को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है. वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों को दिए जाने वाले ऋण में तेजी लाने को कहा है. उनका मानना है कि इससे इन फसलों के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी.
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय ‘पीएसबी कॉन्क्लेव’ के समापन सत्र में सीतारमण ने सरकारी बैंकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि सरकार की कृषि और खाद्य उत्पादन से जुड़ी प्राथमिकताओं को सही रणनीति के साथ किसानों तक वित्तीय सहायता पहुंचाने में बदलना होगा.
दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर
वित्तमंत्री ने कहा कि बैंकों को विशेष रूप से दलहन और तिलहन की खेती करने वाले किसानों को अधिक ऋण देना चाहिए. इससे भारत की आयात निर्भरता कम करने के साथ मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सकता है.
सरकार पहले ही दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष मिशन पर काम कर रही है. वित्त वर्ष 2025-26 के बजट में घोषित दलहन मिशन का लक्ष्य 2031 तक घरेलू उत्पादन को 350 लाख टन तक पहुंचाना और खेती का रकबा 310 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाना है.
धन धान्य कृषि योजना वाले जिलों पर विशेष फोकस
सीतारमण ने बैंकों से प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना के अंतर्गत आने वाले जिलों में ऋण उपलब्धता बढ़ाने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के कृषि ऋण की जरूरत है. इसके अलावा सिंचाई, फसल कटाई के बाद भंडारण और कृषि से जुड़े बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए भी पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया.
प्राथमिकता क्षेत्र ऋण में तेजी लाने की जरूरत
वित्तमंत्री ने बैंकों से प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के तहत अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रयास तेज करने को भी कहा. उन्होंने बैंक प्रमुखों से कहा कि प्राथमिकता क्षेत्र में ऋण की कमी को केवल अन्य संस्थानों के माध्यम से पूरा करने के बजाय बैंक खुद अपनी क्षमता बढ़ाएं.
उन्होंने कहा कि प्राथमिकता क्षेत्र को केवल लक्ष्य पूरा करने के रूप में नहीं, बल्कि औपचारिक ऋण के विस्तार, नए ग्राहकों को जोड़ने, उद्यमों को मजबूत बनाने और व्यापक आर्थिक विकास के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए.
युवाओं के लिए शुरू हो सकता है ‘बैंकिंग फॉर यूथ’ अभियान
बैठक में वित्तमंत्री ने युवाओं को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के लिए भी एक नई पहल का सुझाव दिया. उन्होंने सरकारी बैंकों से 2 अक्टूबर से एक महीने तक चलने वाला ‘बैंकिंग फॉर यूथ’ अभियान शुरू करने का आग्रह किया.
यह अभियान 16 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जा सकता है. सीतारमण ने कहा कि बैंकों को युवाओं के शाखाओं में आने का इंतजार करने के बजाय कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, कौशल विकास संस्थानों और अन्य परिसरों तक पहुंचना चाहिए.
उन्होंने कहा कि खाता खोलने, वित्तीय जागरूकता और बैंकिंग उत्पादों की जानकारी के जरिए युवाओं के साथ सीधा जुड़ाव बढ़ाया जा सकता है. वित्तमंत्री ने बैंक शाखाओं में युवाओं की मदद के लिए समर्पित ‘युवा कियोस्क’ या ‘युवा बैंकिंग मित्र’ जैसी व्यवस्था बनाने का सुझाव भी दिया.
12 सरकारी बैंकों को अलग रणनीति बनाने की सलाह
सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के सभी 12 बैंकों को अपनी क्षेत्रीय मौजूदगी, उत्पादों और संस्थागत क्षमताओं के आधार पर युवाओं को आकर्षित करने और उनसे जुड़ने की अलग रणनीति तैयार करनी चाहिए. सरकार का फोकस एक ओर किसानों तक औपचारिक ऋण की पहुंच बढ़ाने पर है, तो दूसरी ओर नई पीढ़ी को बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने पर भी है.
मंगलवार के कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 492.70 अंक यानी 0.63 प्रतिशत गिरकर 77,235.46 अंक पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 भी 132.75 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,154.90 अंक पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को निवेशकों की नजर बाजार की आगे की चाल पर रहेगी. मंगलवार को सेंसेक्स लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी में लगातार छठे दिन कमजोरी देखने को मिली. ऐसे में आज बाजार खुलने पर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की चाल और रुपये की स्थिति पर निवेशकों की खास नजर रहेगी. साथ ही RailTel, Paytm, BPCL, Exide Industries और PC Jeweller समेत कई कंपनियों के अहम अपडेट शेयरों में हलचल ला सकते हैं.
कल बाजार का क्या रहा हाल?
मंगलवार के कारोबारी सत्र में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 492.70 अंक यानी 0.63 प्रतिशत गिरकर 77,235.46 अंक पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 भी 132.75 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,154.90 अंक पर बंद हुआ. सेंसेक्स में यह लगातार तीसरे दिन गिरावट रही, जबकि निफ्टी लगातार छठे कारोबारी सत्र में कमजोर रहा. मंगलवार को रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 95.68 के स्तर पर पहुंच गया. इससे पहले पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.6025 पर बंद हुआ था.
इन शेयरों ने बढ़ाया बाजार पर दबाव
सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 22 मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए. एशियन पेंट्स में सबसे ज्यादा 2.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा इन्फोसिस, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, टीसीएस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो और आईटीसी जैसे बड़े शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली. दूसरी ओर एक्सिस बैंक, पावरग्रिड, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, बजाज फिनसर्व और एनटीपीसी के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए.
सेक्टोरल मोर्चे पर आईटी और रियल्टी पर दबाव
मंगलवार को निफ्टी आईटी, रियल्टी और पीएसयू बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली. वहीं, निफ्टी ऑटो इंडेक्स ने बेहतर प्रदर्शन किया. ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप 0.43 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप लगभग सपाट बंद हुआ. अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि लगातार बिकवाली के बाद बाजार में रिकवरी आती है या पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें दबाव बनाए रखती हैं.
आज इन शेयरों पर रहेगी नजर
आज के कारोबार में RailTel, Paytm, Exide Industries, BPCL, Hindustan Zinc, HCC, PC Jeweller, Eicher Motors और ONGC समेत कई शेयरों पर निवेशकों की नजर रहेगी. RailTel को EPFO से 166.8 करोड़ रुपये का वर्क ऑर्डर मिला है, जबकि Paytm की पैरेंट कंपनी One 97 Communications में करीब 2,948.94 करोड़ रुपये की बड़ी ब्लॉक डील हुई है. Exide Industries ने अपनी सब्सिडियरी Exide Energy Solutions में 200 करोड़ रुपये का निवेश किया है और BPCL ने 5,000 करोड़ रुपये तक फंड जुटाने को मंजूरी दी है. Hindustan Zinc ने रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ाने की जानकारी दी है, वहीं HCC को 800 करोड़ रुपये तक पूंजी जुटाने की मंजूरी मिली है. PC Jeweller ने एक और कंसोर्टियम बैंक का पूरा कर्ज चुकाया है. इसके अलावा Royal Enfield के नए Classic 350 Gorkha Edition लॉन्च के चलते Eicher Motors और असम में नई गैस सुविधाएं शुरू करने के कारण ONGC के शेयर भी फोकस में रह सकते हैं.
बाजार के लिए क्या रहेंगे अहम संकेत?
आज के कारोबारी सत्र में निवेशकों की नजर मुख्य रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और वैश्विक बाजारों के संकेतों पर रहेगी. मंगलवार की गिरावट के बाद बाजार में शॉर्ट-कवरिंग या निचले स्तरों पर खरीदारी से कुछ रिकवरी भी देखने को मिल सकती है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
Ind-Ra का नया अनुमान मई में जारी किए गए 6.7 प्रतिशत के पूर्वानुमान से थोड़ा अधिक है. हालांकि, एजेंसी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से पैदा हुई अनिश्चितता चालू वित्त वर्ष में महंगाई और आर्थिक वृद्धि के लिए बड़ा जोखिम बनी हुई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. एजेंसी के मुताबिक, ईंधन और खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और एल नीनो के कारण कृषि उत्पादन पर पड़ने वाला संभावित असर आर्थिक वृद्धि के लिए प्रमुख जोखिम बन सकते हैं.
Ind-Ra का नया अनुमान मई में जारी किए गए 6.7 प्रतिशत के पूर्वानुमान से थोड़ा अधिक है. हालांकि, एजेंसी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से पैदा हुई अनिश्चितता चालू वित्त वर्ष में महंगाई और आर्थिक वृद्धि के लिए बड़ा जोखिम बनी हुई है.
तिमाही आधार पर कैसी रहेगी GDP ग्रोथ?
रेटिंग एजेंसी के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में GDP ग्रोथ 6.9 प्रतिशत, जुलाई-सितंबर तिमाही में 6.6 प्रतिशत, अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 6.7 प्रतिशत और जनवरी-मार्च तिमाही में 6.9 प्रतिशत रह सकती है. इसकी तुलना में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने इन्हीं तिमाहियों के लिए क्रमशः 7 प्रतिशत, 6.4 प्रतिशत, 6.5 प्रतिशत और 6.8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है.
कच्चे तेल के अनुमान में राहत
Ind-Ra ने FY27 के लिए औसत कच्चे तेल की कीमत का अनुमान घटाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है, जो मई में 95 डॉलर प्रति बैरल था. एजेंसी का मानना है कि कच्चे तेल की कम कीमतों से भारत के व्यापार घाटे और चालू खाते के घाटे को कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, मौसम से जुड़े जोखिमों के कारण खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका है, जिससे आर्थिक वृद्धि को मिलने वाला फायदा सीमित हो सकता है.
Ind-Ra के मुख्य अर्थशास्त्री और पब्लिक फाइनेंस प्रमुख देवेंद्र पंत ने कहा कि FY27 की जून तिमाही में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमत 101.31 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान यह 96.49 डॉलर प्रति बैरल थी. उन्होंने कहा कि पूरे साल के लिए कच्चे तेल की कम कीमत का अनुमान अर्थव्यवस्था को सहारा दे सकता है, लेकिन एल नीनो का महंगाई पर असर इस सकारात्मक प्रभाव को सीमित कर सकता है.
रुपये पर बना रह सकता है दबाव
रेटिंग एजेंसी ने FY27 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की औसत विनिमय दर 93.98 रुपये रहने का अनुमान लगाया है. इससे पहले एजेंसी ने 94.28 रुपये प्रति डॉलर का अनुमान जताया था. नया अनुमान साल-दर-साल रुपये में करीब 6.4 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है और इससे संकेत मिलता है कि भारतीय मुद्रा पर दबाव बना रह सकता है.
Ind-Ra ने विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) जमा यानी FCNR(B) और बाहरी वाणिज्यिक उधारी यानी ECB के जरिए 70 अरब डॉलर के पूंजी प्रवाह का अनुमान लगाया है. एजेंसी का मानना है कि ये प्रवाह चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति को सहारा दे सकते हैं.
महंगाई और चालू खाते का घाटा बढ़ने का अनुमान
Ind-Ra के अनुसार, FY27 में खुदरा महंगाई औसतन 4.9 प्रतिशत रह सकती है, जबकि FY26 में यह 2 प्रतिशत थी. एजेंसी ने कहा कि एल नीनो के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होने की स्थिति में खाद्य महंगाई बढ़ सकती है.
वहीं, चालू खाते का घाटा FY26 के 0.6 प्रतिशत से बढ़कर FY27 में GDP के 1.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है. यह स्थिति कच्चे तेल की कम कीमतों से आयात बिल में मिलने वाली राहत के बावजूद देखने को मिल सकती है.
राजकोषीय घाटे के लक्ष्य पर भी चुनौती
Ind-Ra ने कहा कि सरकार के FY27 के लिए GDP के 4.3 प्रतिशत राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करना भी चुनौतीपूर्ण बना रह सकता है. तरलीकृत पेट्रोलियम गैस यानी LPG और उर्वरक सब्सिडी पर अधिक खर्च से सरकारी वित्त पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है.
देवेंद्र पंत के अनुसार, प्रत्यक्ष कर संग्रह और गैर-कर राजस्व में मजबूत वृद्धि सरकार को अपने राजकोषीय लक्ष्य के करीब पहुंचने में मदद कर सकती है. हालांकि, अप्रत्यक्ष कर संग्रह कमजोर रहने पर राजकोषीय समेकन पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है.
इससे पहले RBI ने भी FY27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया था. केंद्रीय बैंक ने घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का हवाला देते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए अपेक्षाकृत मजबूत वृद्धि का अनुमान बरकरार रखा है.
रक्षाबंधन पर ₹25 हजार करोड़ के राखी कारोबार का अनुमान, उपहार और अन्य उत्पादों को मिलाकर व्यापार ₹30 हजार करोड़ के पार पहुंचने की उम्मीद
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रक्षाबंधन के मौके पर इस बार बाजारों में स्वदेशी राखियों की चमक और बढ़ गई है. पारंपरिक डिजाइन के साथ-साथ ‘विकसित भारत’, ‘मोदी गारंटी’, ‘ब्रह्मोस’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी थीम वाली राखियां लोगों को खूब पसंद आ रही हैं. कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का अनुमान है कि इस वर्ष देशभर में केवल राखियों का कारोबार करीब ₹25 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है, जबकि मिठाई, उपहार, कपड़े और अन्य त्योहार संबंधी उत्पादों को मिलाकर कुल व्यापार ₹30 हजार करोड़ से अधिक होने की संभावना है.
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी उत्पादों और राष्ट्रभावना के उत्सव के रूप में भी उभरकर सामने आया है. उनके अनुसार, पिछले वर्ष देशभर में करीब ₹17 हजार करोड़ का राखी कारोबार हुआ था, जबकि 2023 में यह आंकड़ा लगभग ₹12 हजार करोड़ था.
‘वोकल फॉर लोकल’ का दिख रहा असर
प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भारतीय उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं का बढ़ता भरोसा और ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों का असर इस बार राखी बाजार में साफ दिखाई दे रहा है.
उन्होंने बताया कि पारंपरिक राखियों के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं, राष्ट्रीय उपलब्धियों और विकसित भारत के संकल्प से प्रेरित राखियों की मांग तेजी से बढ़ी है. बाजार में ‘विकसित भारत राखी’, ‘मोदी गारंटी राखी’, ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘आत्मनिर्भर भारत राखी’, ‘वोकल फॉर लोकल राखी’, ‘भारत गौरव राखी’, ‘नारी वंदन राखी’, ‘लखपति दीदी राखी’, ‘नमामि गंगे राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘अमृतकाल राखी’ खास तौर पर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं.
युवाओं और बच्चों में ‘ब्रह्मोस’ राखी का क्रेज
कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया ने कहा कि इन राखियों के जरिए बहनें सिर्फ रक्षा सूत्र नहीं बांध रही हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, महिला सशक्तिकरण, स्वदेशी अभियान, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी भावनाएं भी व्यक्त कर रही हैं. उन्होंने कहा कि युवाओं और बच्चों के बीच ‘ब्रह्मोस राखी’, ‘राष्ट्र रक्षा सूत्र राखी’ और ‘विकसित भारत राखी’ को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है.
अलग-अलग राज्यों की राखियों को भी मिल रही पहचान
देश के विभिन्न हिस्सों की कला, संस्कृति और स्थानीय उत्पादों से जुड़ी राखियां भी बाजार में अपनी अलग पहचान बना रही हैं. नागपुर की खादी राखी, जयपुर की सांगानेरी कला राखी, पुणे की सीड या बीज राखी, असम की चाय पत्ती राखी, कोलकाता की जूट राखी, मुंबई की सिल्क राखी, बिहार की मधुबनी राखी, बेंगलुरु की पुष्प राखी और जनजातीय हस्तकला से बनी बांस की राखियां उपभोक्ताओं को खूब पसंद आ रही हैं.
कैट का कहना है कि इन उत्पादों की बढ़ती मांग से छोटे कारीगरों, हस्तशिल्प से जुड़े लोगों, महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारोबारियों को बड़ा बाजार मिल रहा है.
चीनी राखियों की मांग लगभग न के बराबर
कैट के मुताबिक, इस वर्ष भी बाजारों में चीनी राखियों की मांग नहीं के बराबर है. व्यापारियों और उपभोक्ताओं का रुझान पूरी तरह भारतीय निर्मित राखियों की ओर है, जिससे स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिल रही है.
कैट के राष्ट्रीय चेयरमैन बृजमोहन अग्रवाल ने देशभर के व्यापारियों और उपभोक्ताओं से अपील की कि रक्षाबंधन के साथ-साथ आगामी त्योहारों में भी भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दी जाए और ‘स्वदेशी अपनाओ, भारत बढ़ाओ’ अभियान को मजबूत बनाया जाए.
प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि कैट विभिन्न शहरों में विशेष स्वदेशी मेले भी आयोजित करने की तैयारी कर रहा है, जहां महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार राखियों और अन्य उत्पादों की बिक्री की जाएगी. खंडेलवाल ने कहा, “आज स्वदेशी राखी केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत और राष्ट्र गौरव का प्रतीक बन चुकी है.”
शीर्ष अदालत ने Aptel के आदेश में दखल देने से किया इनकार. कर्नाटक की बिजली कंपनियों को झटका, अब तीन महीने में होगा मामले का अंतिम निपटारा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अडानी पावर (Adani Power) को ₹1,005 करोड़ के भुगतान विवाद में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अडानी पावर की ओर से जारी चालान और भुगतान आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (Aptel) के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए मामले में तीन महीने के भीतर अंतिम फैसला सुनाने का निर्देश दिया है.
₹1,005 करोड़ के चालान को लेकर पहुंचा था मामला
विवाद बिजली खरीद से जुड़े बकाया भुगतान का है. अडानी पावर ने एक सरकारी पोर्टल पर करीब ₹1,005 करोड़ का चालान अपलोड किया था, जिसके खिलाफ कर्नाटक की बिजली वितरण कंपनियां अदालत पहुंची थीं.
जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने Aptel के उस आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें चालान पर रोक लगाने की मांग खारिज की गई थी. Aptel ने केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग यानी CERC के उस आदेश को भी बरकरार रखा था, जिसमें डिस्कॉम को अडानी पावर की ओर से दावा की गई राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था.
2023 के CERC आदेश से शुरू हुआ विवाद
दरअसल, CERC ने 2023 में कर्नाटक डिस्कॉम को अंतर राशि का भुगतान वहन लागत और लेट पेमेंट सरचार्ज के साथ करने के लिए उत्तरदायी ठहराया था. भुगतान छह किस्तों में किया जाना था. आदेश में यह भी कहा गया था कि तय शर्तों का पालन नहीं होने पर बिजली उत्पादक लेट पेमेंट सरचार्ज का हकदार होगा. इसके बाद अडानी पावर ने डिस्कॉम पर आदेश का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए आयोग का रुख किया.
डिस्कॉम ने कहा- कोई बकाया नहीं
कर्नाटक की बिजली कंपनियों ने अपनी याचिका में दावा किया कि उनके ऊपर अडानी पावर का कोई बकाया नहीं है. उन्होंने तर्क दिया कि Aptel ने मामले के गुण-दोष पर विचार किए बिना CERC के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया.
डिस्कॉम ने यह भी कहा कि विवादित राशि का भुगतान करने से उनकी वित्तीय स्थिति पर असर पड़ सकता है और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो सकता है. कंपनियों ने बिजली आपूर्ति में संभावित बाधा और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर का भी हवाला दिया.
तीन महीने में आएगा अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक डिस्कॉम की याचिका खारिज करते हुए Aptel को मामले में तीन महीने के भीतर अंतिम आदेश सुनाने का निर्देश दिया है. फिलहाल इस फैसले को अडानी पावर के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि भुगतान विवाद पर अंतिम फैसला अब अपीलीय न्यायाधिकरण करेगा.
पेटीएम में करीब 1.92 करोड़ शेयरों की ₹2,949 करोड़ की ब्लॉक डील हुई है. रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट बीवी को संभावित विक्रेता बताया जा रहा है. डील की खबर के बाद पेटीएम के शेयर में करीब 2 फीसदी की गिरावट आई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पेटीएम (Paytm) की मूल कंपनी वन97 कम्युनिकेशंस के शेयरों में मंगलवार को दबाव देखने को मिला. कंपनी के करीब 1.92 करोड़ शेयरों की बड़ी ब्लॉक डील हुई, जिसकी कुल कीमत करीब ₹2,949 करोड़ बताई जा रही है. इस सौदे में पेटीएम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय शेखर शर्मा से पूरी तरह जुड़ी कंपनी रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट बीवी को संभावित विक्रेता बताया जा रहा है.
डील के बाद पेटीएम के शेयर करीब 2 फीसदी तक गिरकर ₹1,557 के आसपास पहुंच गए. ब्लॉक डील में शेयरों के लिए ₹1,535.10 प्रति शेयर का न्यूनतम मूल्य तय किया गया था, जो पेटीएम के पिछले बंद भाव ₹1,580.20 से करीब 3 फीसदी कम है.
₹2,949 करोड़ की बेस डील, 4.98% तक हिस्सेदारी बेचने का विकल्प
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट बीवी की ओर से करीब 1.92 करोड़ शेयर बेचने की पेशकश की गई थी. यह पेटीएम की कुल हिस्सेदारी का करीब 3 फीसदी है. ₹1,535.10 प्रति शेयर के न्यूनतम मूल्य के आधार पर इस सौदे का मूल्य करीब ₹2,949 करोड़ है.
इस सौदे में 1.27 करोड़ अतिरिक्त शेयर बेचने का विकल्प भी शामिल है. अगर इस विकल्प का पूरी तरह इस्तेमाल किया जाता है, तो कुल 3.19 करोड़ शेयर बेचे जा सकते हैं. ऐसे में पेटीएम की करीब 4.98 फीसदी हिस्सेदारी का सौदा होगा और इसकी कुल कीमत करीब ₹4,895 करोड़ तक पहुंच सकती है.
कौन है रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट?
रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट बीवी नीदरलैंड्स स्थित कंपनी है, जिसका पूरा स्वामित्व पेटीएम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय शेखर शर्मा के पास है. पेटीएम की ओर से की गई पूर्व सूचना के मुताबिक, रेजिलिएंट ने एंटफिन से पेटीएम में करीब 10.20 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की थी.
यह हिस्सेदारी एंटफिन को जारी किए गए वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर के बदले हासिल की गई थी. इस सौदे के तहत रेजिलिएंट को शेयरों का स्वामित्व और मतदान अधिकार मिले थे, जबकि एंटफिन के पास शेयरों का आर्थिक मूल्य बना रहा. 30 जून 2026 तक विजय शेखर शर्मा के पास व्यक्तिगत रूप से पेटीएम में 9 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी थी.
पेटीएम को नहीं मिलेगा ब्लॉक डील का पैसा
यह सौदा पूरी तरह द्वितीयक बाजार का लेनदेन है. इसका मतलब है कि शेयरों की बिक्री से मिलने वाला पैसा पेटीएम के खाते में नहीं जाएगा, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा शेयरधारक को मिलेगा. इस सौदे के लिए गोल्डमैन सैक्स इंडिया सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड प्लेसमेंट एजेंट है. शेयरों की बिक्री भारतीय शेयर बाजारों के स्क्रीन-आधारित कारोबार मंच के जरिए एक या उससे अधिक लेनदेन में की जाएगी. सौदे की शर्तों के मुताबिक, बिक्री पूरी होने के बाद विक्रेता पर 90 दिनों तक आगे शेयर बेचने की रोक रहेगी.
पेटीएम के शेयर में क्यों आई गिरावट?
ब्लॉक डील के लिए तय ₹1,535.10 का न्यूनतम मूल्य पेटीएम के पिछले बंद भाव ₹1,580.20 से करीब 3 फीसदी कम था. आमतौर पर बड़ी हिस्सेदारी की बिक्री और बाजार में अतिरिक्त शेयरों की उपलब्धता से निवेशकों की धारणा पर दबाव पड़ सकता है. यही वजह है कि मंगलवार को पेटीएम के शेयर में शुरुआती कारोबार में गिरावट देखने को मिली.
एक साल में 35% से ज्यादा चढ़ा पेटीएम का शेयर
हालिया दबाव के बावजूद पेटीएम के शेयर ने इस साल अच्छा प्रदर्शन किया है. पिछले एक सप्ताह में शेयर करीब 1 फीसदी कमजोर हुआ है, जबकि एक महीने में इसमें 17 फीसदी से अधिक की तेजी आई है. 2026 में अब तक पेटीएम का शेयर 22 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुका है.
मार्च में ₹930.60 के 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचने के बाद शेयर में तेज रिकवरी हुई और यह पिछले सप्ताह ₹1,657.60 के 52-सप्ताह के उच्च स्तर तक पहुंच गया था. इस तरह निचले स्तर से शेयर में करीब 78 फीसदी की तेजी आई.
एक साल की अवधि में पेटीएम के शेयर ने करीब 35 फीसदी और तीन साल में करीब 84 फीसदी का रिटर्न दिया है. हालांकि, शेयर अभी भी 2021 के आईपीओ मूल्य से नीचे कारोबार कर रहा है. कंपनी का बाजार पूंजीकरण ₹1.01 लाख करोड़ से अधिक है.