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भारत बनेगा शिपबिल्डिंग हब, सरकार ने मैरीटाइम फंड बढ़ाकर ₹70,000 करोड़ किया
सरकार के इस कदम से भारत के समुद्री क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन की संभावना है. बढ़ा हुआ फंड न केवल जहाज निर्माण को बढ़ावा देगा, बल्कि रोजगार, वैश्विक निवेश और इन्फ्रास्ट्रक्चर के नए अवसर भी पैदा करेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
केंद्र सरकार ने समुद्री क्षेत्र के विकास को तेज़ गति देने के लिए मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (MDF) को बढ़ाकर ₹70,000 करोड़ कर दिया है. यह राशि पहले घोषित फंड का लगभग 2.8 गुना है. सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक भारत को वैश्विक शिपबिल्डिंग हब के रूप में स्थापित करना है.
जहाज निर्माण से लेकर तटीय शिपिंग तक होगा निवेश
सरकार के इस फैसले के तहत जहाज निर्माण, मरम्मत, बंदरगाहों से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर, सहायक उद्योग, और तटीय शिपिंग में बड़े पैमाने पर निवेश किया जाएगा. यह फंड समुद्री क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन को दीर्घकालिक और सस्ती पूंजी उपलब्ध कराएगा.
सरकार और निजी भागीदारी से तैयार होगा फंड स्ट्रक्चर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस फंड में 49% हिस्सा सरकार और सरकारी बंदरगाहों से रियायती पूंजी के रूप में आएगा. बाकी 51% पूंजी बहुपक्षीय, द्विपक्षीय कर्जदाताओं और सॉवरेन फंड्स से जुटाई जाएगी. फंड को व्यय वित्त समिति (EFC) से मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही इसे कैबिनेट की स्वीकृति मिलने की उम्मीद है.
2030 तक 11 लाख नौकरियों का लक्ष्य
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, यह फंड वर्ष 2030 तक 1.3 से 1.5 लाख करोड़ रुपए तक का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष निवेश आकर्षित कर सकता है. इसके माध्यम से करीब 11 लाख नौकरियां उत्पन्न होने की भी संभावना है.
2047 तक 900 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के समुद्री क्षेत्र को 2047 तक 885 से 940 अरब डॉलर के निवेश की आवश्यकता होगी. यह राशि विभिन्न उद्देश्यों के लिए प्रस्तावित है:
- 388 अरब डॉलर: शिपिंग टनेज बढ़ाने के लिए
- 260 अरब डॉलर: हरित (ग्रीन) जहाजों के लिए
- 224 अरब डॉलर: आधुनिक बंदरगाहों के विकास के लिए
- 18 अरब डॉलर: ग्लोबल शिपबिल्डिंग और रिपेयरिंग हब के लिए
- 8.82 अरब डॉलर: तटीय और अंतर्देशीय शिपिंग में भागीदारी बढ़ाने के लिए
- 1.65 अरब डॉलर: क्रूज टूरिज्म को प्रोत्साहित करने के लिए
भारत का इरादा है कि वह 2030 तक दुनिया के टॉप-10 और 2047 तक टॉप-5 शिपबिल्डिंग देशों में शामिल हो, जिसमें उसका मुकाबला दक्षिण कोरिया, जापान और चीन से होगा.
समुद्री कानूनों और नीतियों में बड़ा बदलाव
हाल ही में संसद के मॉनसून सत्र में समुद्री क्षेत्र से जुड़े कई विधेयक पास किए गए, जिसमें मर्चेंट शिपिंग बिल, कोस्टल शिपिंग बिल, कैरिज ऑफ गुड्स बिल और बिल्स ऑफ लैडिंग बिल शामिल हैं. इसके साथ ही, 117 साल पुराने इंडियन पोर्ट्स एक्ट, 1908 को हटाकर नया इंडियन पोर्ट्स बिल लाया गया, जिसे लोकसभा से मंजूरी मिल चुकी है.
इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा दर्जा, क्लस्टर और क्रेडिट सिस्टम पर जोर
EFC ने जहाज निर्माण के लिए वित्तीय सहायता योजनाओं को पुनर्गठित करने की मंजूरी दी है. इसके अलावा:
- इंडियन यार्ड्स में शिप ब्रेकिंग के लिए क्रेडिट नोट सिस्टम लागू किया जाएगा
- शिपबिल्डिंग क्लस्टर्स विकसित किए जाएंगे
- बड़े जहाजों को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया जाएगा
उत्तर-पूर्व को मिलेगा विशेष समर्थन
सरकार उत्तर-पूर्व भारत में भी समुद्री और अंतर्देशीय जलमार्गों पर ध्यान दे रही है. जुलाई 2025 में ₹5,000 करोड़ की परियोजनाओं की घोषणा की गई, जिनमें शामिल हैं:
- ₹1,000 करोड़ की अंतर्देशीय जलमार्ग परियोजनाएं
- 299 करोड़ की पर्यटक जेटी
- 85 सामुदायिक जेटी
2030 और 2047 जैसे रणनीतिक लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए, यह योजना भारत को समुद्री महाशक्ति के रूप में स्थापित कर सकती है.
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