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पड़ोसी चीन से फिर आगे निकला भारत, अब इस मामले में छोड़ा पीछे

मोदी सरकार का फोकस इस समय स्टार्टअप्स पर है. ये कंपनियां काफी तेजी से विकसित हो रही हैं और विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भी ऐसी कंपनियों में काफी ज्यादा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

बुरे दौर से गुजर रहा चीन यूनिकॉर्न जोड़ने के मामले में भारत से पीछे हो गया है. जनवरी-जुलाई 2022 के बीच नए यूनिकॉर्न जोड़ने में भारत अपने इस पड़ोसी से आगे निकल गया है. 2022 की पहली छमाही में भारत के 14 स्टार्टअप ने एक अरब डॉलर से अधिक का वैल्यूएशन हासिल किया, यानी वो यूनिकॉर्न बने. जबकि इस अवधि में चीन में केवल 11 स्टार्टअप ही यूनिकॉर्न बन पाए.

दुनिया में बने 254 यूनिकॉर्न
हुरून ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2022 की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, साल की पहली छमाही में पूरी दुनिया में 254 यूनिकॉर्न बने. अमेरिका में सबसे ज्यादा 138 स्टार्टअप ने यह मुकाम हासिल किया. वैसे यह कोई पहला मौका नहीं है जब भारत ने इस मामले में अपने पड़ोसी चीन को पीछे छोड़ा है. वित्त वर्ष 2021 की तीसरी तिमाही में भारत के 10 स्टार्टअप यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हुए थे, जबकि चीन में यह संख्या 7 थी. बता दें कि यूनिकॉर्न की कुल संख्या के लिहाज से अमेरिका और चीन के बाद भारत का नंबर आता है.

सरकार कर रही मदद
मोदी सरकार का फोकस इस समय स्टार्टअप्स पर है. ये कंपनियां काफी तेजी से विकसित हो रही हैं और विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी भी ऐसी कंपनियों में काफी ज्यादा है. सरकार स्टार्टअप्स के लिए हेल्दी इकोसिस्टम बनाने पर काम कर रही है. सरकार ने IT सेक्टर की 100 स्टार्ट-अप कंपनियों को समर्थन के लिए एक कार्यक्रम की भी शुरुआत की है. इसके तहत सरकार का लक्ष्य 100 यूनिकॉर्न तैयार करना है. इस कार्यक्रम के तहत स्टार्ट-अप को शुरुआती पूंजी, संरक्षण और बाजार पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी.

क्या होता है यूनिकॉर्न?
यूनिकॉर्न उन स्टार्टअप को कहा जाता है, जिनकी वैल्यू 1 बिलियन डॉलर से अधिक हो चुकी है. यूनिकॉर्न के मामले में भारत दुनिया के टॉप 3 देशों में शामिल है. पहले इंग्लैंड तीसरे नंबर पर हुआ करता था, लेकिन भारत ने उसे पछाड़ कर यह स्थान हासिल कर लिया है. यूनिकॉर्न स्टार्टअप को इस बात का प्रतीक समझा जाता है कि विश्व में किस देश की कंपनियां कितनी अधिक समृद्ध हैं, और वहां की सरकार स्टार्टअप को कितना समर्थन दे रही है.
 


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