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FY26 में ऊर्जा अवसंरचना क्षेत्र का दृष्टिकोण स्थिर, नवीकरणीय और थर्मल क्षमता में वृद्धि से मिलेगी रफ्तार

इंड-रा ने मजबूत मांग, दीर्घकालिक राजस्व और बेहतर तरलता को रेटिंग आउटलुक का आधार बताया

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत के ऊर्जा अवसंरचना क्षेत्र का रेटिंग आउटलुक स्थिर बनाए रखा है. एजेंसी ने कहा कि मजबूत मांग के अनुमान, बिजली खरीद समझौतों (PPAs) से दीर्घकालिक राजस्व की स्पष्टता और उत्पादन, प्रसारण व स्मार्ट मीटरिंग खंडों में तरलता में सुधार इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं.

Ind-Ra के FY26 मिड-ईयर एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर आउटलुक में कहा गया है कि नीतिगत समर्थन, मध्यम अवधि में स्थिर मांग वृद्धि और नियामकीय ढांचा राज्य वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) से नियमित राजस्व वसूली सुनिश्चित करता है. एसोसिएट डायरेक्टर दिव्या चारण सी ने कहा, “स्थिर रेटिंग आउटलुक दीर्घकालिक राजस्व दृश्यता, स्थिर मध्यम अवधि की मांग वृद्धि और मजबूत नीतिगत व नियामकीय ढांचे पर आधारित है, जो डिस्कॉम से नियमित वसूली सुनिश्चित करते हैं, साथ ही उनके स्वास्थ्य में सुधार के प्रयासों पर भी केंद्रित है.”

एजेंसी को उम्मीद है कि मानसून के बाद बिजली की मांग तेज होगी और FY32 की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नवीकरणीय और थर्मल दोनों तरह की क्षमता वृद्धि गति पकड़ेगी. संसाधन पर्याप्तता अध्ययनों के अनुसार, राज्यों को बड़ी मात्रा में बिजली अनुबंध करने होंगे, जिससे नियामक आयोग थर्मल और नवीकरणीय क्षमता के नए PPAs को मंजूरी देंगे.

पहली तिमाही में सौर और पवन ऊर्जा की 12.2 गीगावाट क्षमता जुड़ी, जबकि पूरे FY25 में 28 गीगावाट का इजाफा हुआ था. बड़े निर्माणाधीन प्रोजेक्ट पाइपलाइन से यह रफ्तार बरकरार रहने की संभावना है, साथ ही हाइब्रिड, स्टोरेज और राउंड-द-क्लॉक क्षमता की ओर रुझान बढ़ रहा है, ताकि औद्योगिक व वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की जरूरत पूरी की जा सके. डिस्कॉम्स द्वारा अंतर दर (डिफरेंशियल टैरिफ) अपनाने से डेवलपर्स विंड और स्टोरेज को जोड़कर उपभोक्ताओं के लिए लागत बचत को अनुकूल बना रहे हैं. हालांकि, इंड-रा ने चेताया कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में वास्तविक और अनुमानित उत्पादन के बीच अंतर के कारण राजस्व प्रदर्शन का सही आकलन करने में कमीशनिंग के बाद दो-तीन साल लग सकते हैं.

नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के बावजूद थर्मल पावर बेस लोड प्रबंधन के लिए अहम बना हुआ है. FY25 और FY26 के पहले चार महीनों में 17 गीगावाट से अधिक नई थर्मल क्षमता के PPAs विभिन्न स्वीकृति चरणों में थे, जिनमें 2 गीगावाट पहले ही साइन हो चुके हैं. FY26 की पहली तिमाही में थर्मल पावर का कुल उत्पादन में योगदान 71.5% रहा, और FY26 व FY27 के लिए संयंत्र लोड फैक्टर 69-70% रहने का अनुमान है, जिसे पर्याप्त कोयला स्टॉक का समर्थन प्राप्त है. पहली तिमाही में थर्मल क्षमता में 2.3 गीगावाट की वृद्धि हुई, जबकि पूरे वर्ष का लक्ष्य 12.86 गीगावाट है. गैर-सौर घंटों के दौरान मर्चेंट पावर की कीमतें मानसून में नरम रहीं, लेकिन सितंबर-अक्टूबर से इनके मजबूत होने की संभावना है.

Ind-Ra के पोर्टफोलियो में शामिल प्रसारण परियोजनाएं मानक उपलब्धता से ऊपर परिचालित हो रही हैं, जिससे उन्हें पूर्ण राजस्व प्राप्ति हो रही है. पहली तिमाही में अंतर-राज्यीय प्रसारण परिसंपत्तियों की संग्रह दक्षता 92% रही, जो मौसमी रुझानों के अनुरूप है, और पूरे वर्ष के लिए इसके 98% से ऊपर रहने का अनुमान है. महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में धीमी शुरुआत के बाद अंतराज्यीय संग्रह में सुधार की उम्मीद है. अंतर-राज्यीय प्रसारण प्रणाली परियोजनाओं की पाइपलाइन 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, जो इंटर-रीजनल ट्रांसफर और नवीकरणीय ऊर्जा निकासी जरूरतों को पूरा करेगी.

स्मार्ट मीटर स्थापना की गति भी तेज हुई है, जुलाई 2025 में 31.7 लाख मीटर लगाए गए. मौजूदा रफ्तार से पहले से आवंटित मीटर लगाने में 34 महीने लगेंगे, हालांकि इंड-रा को उम्मीद है कि साल के दौरान यह दर और बढ़ेगी.


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