रिपोर्ट के अनुसार, कई संरचनात्मक कारक महिलाओं के वित्तीय परिणामों को सीमित कर रहे हैं. महिलाएं पुरुषों की तुलना में लगभग 73 रुपये प्रति 100 रुपये कम कमा रही हैं, जबकि 60% से अधिक महिलाएं असंगठित क्षेत्र में काम कर रही हैं, जहाँ आय अस्थिर होती है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत लगभग 40 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त GDP क्षमता खोल सकता है अगर महिलाएं लंबी अवधि के वित्तीय निवेश में अधिक सक्रिय भागीदारी निभाएँ, यह निष्कर्ष Lxme और EY इंडिया की नई रिपोर्ट में सामने आया है.
रिपोर्ट का शीर्षक है “Unlocking Her Wealth: The Untapped Economy – Redesigning Financial Systems for Women from Inclusion Metrics to Ownership Outcomes”. इसमें भारत का पहला Women’s Financial Prosperity Index (WFPI) पेश किया गया है, जिसमें भारत को 100 में से 28.1 अंक मिले हैं. यह बताता है कि वित्तीय समावेशन में तेजी के बावजूद महिलाएं लंबी अवधि की संपत्ति सृजन की दिशा में अभी भी काफी पीछे हैं.
वित्तीय पहुंच बढ़ी, लेकिन संपत्ति निर्माण पीछे
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने दुनिया में सबसे तेजी से वित्तीय समावेशन विस्तार किया है. वर्तमान में 89% से अधिक महिलाएं बैंक खाताधारक हैं और डिजिटल भुगतान रोज़मर्रा के वित्तीय लेन-देन में तेजी से शामिल हो रहे हैं. हालांकि, वित्तीय प्रणाली तक पहुंच और अर्थव्यवस्था में सार्थक भागीदारी के बीच एक अंतर मौजूद है. महिलाएं अधिक वित्तीय प्रणाली में शामिल हो रही हैं, लेकिन यह पहुंच लंबी अवधि की संपत्ति निर्माण या वित्तीय स्वामित्व में तब्दील नहीं हुई है.
रिपोर्ट के निष्कर्ष राष्ट्रीय डेटा, वैश्विक बेंचमार्क, EY द्वारा 1,033 उत्तरदाताओं पर किए गए सर्वे और Lxme के एक मिलियन से अधिक उपयोगकर्ताओं के प्लेटफॉर्म डेटा पर आधारित हैं.
संरचनात्मक बाधाएँ महिलाओं की भागीदारी को सीमित करती हैं
रिपोर्ट के अनुसार, कई संरचनात्मक कारक महिलाओं के वित्तीय परिणामों को सीमित कर रहे हैं. महिलाएं पुरुषों की तुलना में लगभग 73 रुपये प्रति 100 रुपये कम कमा रही हैं, जबकि 60% से अधिक महिलाएं असंगठित क्षेत्र में काम कर रही हैं, जहाँ आय अस्थिर होती है.
महिलाओं की श्रम बल भागीदारी 41.7% है, जबकि पुरुषों की यह दर 78.8% है. निवेश में भी अंतर है: केवल 8.6% महिलाएं म्यूचुअल फंड या इक्विटी में निवेश करती हैं, जबकि पुरुषों की यह दर 22.3% है. महिलाएं म्यूचुअल फंड फोलियो में सिर्फ 25% हिस्सेदारी रखती हैं और निवेश शुरू करने की उम्र पुरुषों की तुलना में लगभग पांच साल बाद होती है.
पेंशन और भविष्य निधि में भी अंतर है. केवल 14.2% महिलाएं पेंशन या PF खाता रखती हैं, जबकि पुरुषों की यह दर 32.8% है. परिणामस्वरूप महिलाएं पुरुषों द्वारा अर्जित सेवानिवृत्ति संपत्ति का केवल 60% ही रखती हैं.
वित्तीय साक्षरता भी चुनौती बनी हुई है, केवल 21% महिलाएं वित्तीय रूप से साक्षर मानी जाती हैं.
बड़ा आर्थिक अवसर
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि महिलाओं की लंबी अवधि के निवेश में अधिक भागीदारी से लगभग 40 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक अवसर पैदा हो सकता है. यह वृद्धि पूंजी बाजार में गहरी भागीदारी, उच्च घरेलू बचत और सतत लंबी अवधि के निवेश के माध्यम से आएगी.
Lxme की सह-संस्थापक प्रीति राठी गुप्ता ने कहा कि भारत ने मजबूत वित्तीय समावेशन संरचना बनाई है, लेकिन केवल समावेशन पर्याप्त नहीं है. उन्होंने कहा कि जब महिलाओं को सही माहौल, आत्मविश्वास, समुदाय और उनकी जरूरतों के अनुरूप उत्पाद दिए जाते हैं, तो वे वित्तीय बाजार में सक्रिय रूप से भाग लेती हैं और संपत्ति सृजन में योगदान देती हैं.
EY इंडिया फाइनेंशियल सर्विसेज पार्टनर सौरभ चंद्र ने कहा कि निष्कर्ष दिखाते हैं कि महिलाओं की आर्थिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए वित्तीय प्रणाली और नीतियों की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि महिलाओं का वित्तीय सशक्तिकरण भारत की व्यापक आर्थिक वृद्धि रणनीति का एक अहम हिस्सा होना चाहिए.
समावेशन से स्वामित्व तक
रिपोर्ट में निष्कर्ष दिया गया है कि वित्तीय पहुंच और वित्तीय स्वामित्व के बीच अंतर को पाटने के लिए रेगुलेटर्स, वित्तीय संस्थान, फिनटेक प्लेटफ़ॉर्म और नीति निर्माताओं के बीच समन्वित प्रयास जरूरी हैं.
महिलाओं की आय पैटर्न, करियर चक्र और निवेश व्यवहार को ध्यान में रखते हुए वित्तीय उत्पाद और प्रणाली डिजाइन करना महत्वपूर्ण है. रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं की वित्तीय क्षमता को अनलॉक करना केवल लिंग समावेशन का मुद्दा नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि के लिए रणनीतिक प्राथमिकता है.
विजय सरकार ने वर्ष 2035 तक तमिलनाडु को 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है. इसी दिशा में शुरुआती महीनों में कई बड़े निवेश समझौते किए गए हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय की सरकार ने राज्य में बड़े निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं. करीब 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक के चार बड़े औद्योगिक और बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स से राज्य में 93 हजार से अधिक रोजगार पैदा होने की उम्मीद है. सरकार का दावा है कि ये परियोजनाएं तमिलनाडु को विनिर्माण, हरित ऊर्जा और समुद्री उद्योग का बड़ा केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी.
मुख्यमंत्री बनने के बाद निवेश पर बड़ा फोकस
अभिनेता से नेता बने और फिर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने सी. जोसेफ विजय (थलपति विजय) ने चुनाव प्रचार के दौरान राज्य में निवेश आकर्षित करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने का वादा किया था. सरकार बनने के बाद उन्होंने औद्योगिक निवेश को प्राथमिकता देते हुए कई बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है. राज्य सरकार ने वर्ष 2035 तक तमिलनाडु को 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा है. इसी दिशा में शुरुआती महीनों में कई बड़े निवेश समझौते किए गए हैं.
L&T के साथ 18,600 करोड़ रुपये की मेगा डील
विजय सरकार के कार्यकाल की सबसे बड़ी शुरुआती औद्योगिक डील इंजीनियरिंग कंपनी L&T के साथ हुई है. राज्य सरकार ने 18,600 करोड़ रुपये के निवेश वाले समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. इस निवेश के तहत तीन प्रमुख परियोजनाएं विकसित की जाएंगी:
1. कांचीपुरम में 15,000 करोड़ रुपये का हाइपरस्केल और एज एआई डेटा सेंटर.
2. कोयंबटूर में 2,500 करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम मैन्युफैक्चरिंग प्लांट.
3. तिरुवल्लुर के कट्टुपल्ली में 1,100 करोड़ रुपये की लागत से शिपबिल्डिंग और ऑफशोर विंड इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार.
इन परियोजनाओं से 8,200 से अधिक स्थानीय रोजगार सृजित होने की संभावना है.
थूथुकुडी में बनेगा 38 हजार करोड़ का शिपबिल्डिंग हब
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दक्षिण कोरियाई कंपनी HD हुंडई ने थूथुकुडी में लगभग 38,000 करोड़ रुपये की लागत से मेगा शिपबिल्डिंग और मरीन इंजीनियरिंग क्लस्टर विकसित करने की योजना बनाई है. तमिलनाडु की नई शिपबिल्डिंग नीति 2026 के तहत प्रस्तावित इस परियोजना से करीब 15,000 रोजगार मिलने की उम्मीद है. सरकार का मानना है कि यह प्रोजेक्ट राज्य के दक्षिणी तट को वैश्विक समुद्री उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है.
ग्रीन एनर्जी और पावर सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा
औद्योगिक विकास के लिए बिजली आपूर्ति को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सरकार ने 231 बिजली परियोजनाओं के लिए 15,032 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है. इसके अलावा चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै, तिरुचिरापल्ली और तिरुनेलवेली में पांच नवीकरणीय ऊर्जा जोन विकसित किए जाएंगे. इन क्षेत्रों में सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाएगा. इन परियोजनाओं से लगभग 15,058 नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान है.
शिपयार्ड परियोजनाओं से मिल सकते हैं 55 हजार रोजगार
कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड की ओर से तमिलनाडु में दो ग्रीनफील्ड कमर्शियल शिपयार्ड स्थापित करने की योजना है. इन परियोजनाओं में लगभग 30,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है. हालांकि इन परियोजनाओं से जुड़े समझौते पूर्व सरकार के दौरान हुए थे, लेकिन वर्तमान सरकार इन्हें आगे बढ़ाने में रुचि दिखा रही है. इन प्रोजेक्ट्स से लगभग 55,000 रोजगार सृजित होने की संभावना है.
निवेशकों को मिलेगी सिंगल विंडो सुविधा
निवेश प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए राज्य सरकार ने तमिलनाडु इन्वेस्टर प्रमोशन कमीशन के गठन की घोषणा की है. इस आयोग की अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे. सरकार के अनुसार, 200 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करने वाली या 5,000 से अधिक स्थानीय रोजगार देने वाली कंपनियों को सिंगल विंडो फास्ट-ट्रैक क्लीयरेंस की सुविधा प्रदान की जाएगी.
राज्य को औद्योगिक हब बनाने की तैयारी
सरकार का मानना है कि डेटा सेंटर, शिपबिल्डिंग, हरित ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्र में होने वाले ये बड़े निवेश तमिलनाडु की अर्थव्यवस्था को नई गति देंगे. साथ ही रोजगार के बड़े अवसर पैदा कर राज्य को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्रों में शामिल करने में मदद करेंगे.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लोगों की प्रमुख चिंताओं में बेरोजगारी, वित्तीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार, अपराध और हिंसा, शिक्षा, गरीबी तथा सामाजिक असमानता शामिल हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
इप्सोस की ‘व्हाट वरीज द वर्ल्ड’ रिपोर्ट (मई 2026) के अनुसार, शहरी भारतीयों का देश की दिशा और अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसा मजबूत बना हुआ है. रिपोर्ट में 73 फीसदी शहरी भारतीयों ने माना कि देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि 78 फीसदी लोगों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक राय व्यक्त की.
यह आंकड़े भारत को दुनिया के सबसे आशावादी देशों में शामिल करते हैं. सिंगापुर में 81 फीसदी, मलेशिया में 70 फीसदी और हंगरी में 62 फीसदी लोगों ने अपने देशों की दिशा और आर्थिक स्थिति को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया. इन देशों को भविष्य को लेकर मजबूत विश्वास रखने वाले देशों के समूह में देखा जा रहा है.
वैश्विक तस्वीर से अलग दिखा भारत
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 30 देशों में औसतन केवल 39 फीसदी लोगों का मानना है कि उनका देश सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि सिर्फ 37 फीसदी लोग अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक हैं.
दुनिया के कई हिस्सों में निराशावाद बढ़ता दिखाई दे रहा है. फ्रांस इस सूची में सबसे नीचे रहा, जहां 88 फीसदी लोगों ने माना कि उनका देश गलत दिशा में जा रहा है. यह विकसित देशों में बढ़ती असंतुष्टि को दर्शाता है.
शासन और अर्थव्यवस्था पर भरोसा
इप्सोस इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेश रामालिंगम ने कहा कि शहरी भारतीयों में शासन व्यवस्था और आर्थिक दिशा को लेकर लगातार भरोसा दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा, "ये निष्कर्ष न केवल संस्थागत स्थिरता को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि नागरिक जटिल वैश्विक परिस्थितियों के बीच खुद को ढालने और चुनौतियों का सामना करने में सक्षम हैं. लोग सतर्क जरूर हैं, लेकिन उन्हें अपने हितों की रक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों पर भरोसा है."
भारत की प्रमुख चिंताएं
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लोगों की प्रमुख चिंताओं में बेरोजगारी, वित्तीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार, अपराध और हिंसा, शिक्षा, गरीबी तथा सामाजिक असमानता शामिल हैं. रोजगार को लेकर चिंता पर वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं और उनके रोजगार बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव का भी असर दिखाई देता है.
दुनिया की सबसे बड़ी चिंता बनी महंगाई
वैश्विक स्तर पर महंगाई लोगों की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है. इसके बाद अपराध और हिंसा, बेरोजगारी, गरीबी और सामाजिक असमानता तथा वित्तीय और राजनीतिक भ्रष्टाचार प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं. रिपोर्ट बताती है कि भारत की चिंताएं मुख्य रूप से रोजगार और आर्थिक दबावों से जुड़ी हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत लोगों को सबसे अधिक प्रभावित कर रही है. सुरेश रामालिंगम ने कहा, "भारत में लोगों की चिंताएं उनके वास्तविक जीवन के अनुभवों से जुड़ी हुई हैं. रोजगार, भ्रष्टाचार और वित्तीय दबाव लोगों की प्रमुख चिंताएं हैं. हालांकि ये स्थानीय चुनौतियां हैं, लेकिन इन पर वैश्विक परिस्थितियों का भी प्रभाव पड़ रहा है."
सर्वे में 30 देशों के लोगों को किया गया शामिल
यह सर्वेक्षण इप्सोस के ग्लोबल एडवाइजर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर 24 अप्रैल से 8 मई 2026 के बीच किया गया. भारत में 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के 500 लोगों से बातचीत की गई. सर्वे में कुल 30 देशों के लोगों को शामिल किया गया. भारत सहित कई विकासशील देशों के नमूने मुख्य रूप से शहरी, शिक्षित और अपेक्षाकृत समृद्ध वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं. इसलिए इन देशों के परिणामों को अधिक जुड़े हुए और जागरूक आबादी के दृष्टिकोण के रूप में देखा जाना चाहिए.
भारत के लिए सकारात्मक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि रिपोर्ट के निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद शहरी भारतीयों का देश की आर्थिक दिशा और भविष्य को लेकर भरोसा कायम है. हालांकि रोजगार, भ्रष्टाचार और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियां अभी भी चिंता का विषय बनी हुई हैं, लेकिन नागरिकों में भविष्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण देखने को मिल रहा है.
यह ऋषिकेश का पहला समर्पित कॉन्ट्रास्ट थेरेपी सर्किट होगा, जिसमें सॉना, आइस बाथ और गर्म पानी के पूल का अनुभव एक क्रमबद्ध थर्मल यात्रा के रूप में दिया जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
योग, आयुर्वेद और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध ऋषिकेश को जल्द ही एक नई वेलनेस सुविधा मिलने जा रही है. आव्या राइज (Aavya Rise) 4 जुलाई को ‘तपस: फायर एंड आइस’ नामक कॉन्ट्रास्ट थेरेपी सर्किट लॉन्च करने जा रहा है. यह ऋषिकेश का पहला समर्पित कॉन्ट्रास्ट थेरेपी सर्किट होगा, जिसमें सॉना, आइस बाथ और गर्म पानी के पूल का अनुभव एक क्रमबद्ध थर्मल यात्रा के रूप में दिया जाएगा.
अपर तपोवन के जंगलों के बीच विकसित इस सर्किट का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है. ऋषिकेश में पहले से ही सैकड़ों योग स्कूल, आश्रम और आयुर्वेद केंद्र मौजूद हैं, लेकिन अब तक यहां कोई समर्पित कॉन्ट्रास्ट थेरेपी सर्किट उपलब्ध नहीं था.
‘तपस’ शब्द संस्कृत से लिया गया है, जिसका अर्थ ‘ऊष्मा’ या ‘ताप’ होता है. व्यापक रूप से यह निरंतर साधना और तीव्रता के माध्यम से होने वाले परिवर्तन का प्रतीक है. इसी अवधारणा को ध्यान में रखते हुए इस सर्किट को तैयार किया गया है.
आव्या राइज के संस्थापक आशीष खंडेलवाल ने कहा, "यह बिल्कुल स्वाभाविक लगा कि ऋषिकेश में इस तरह की सुविधा होनी चाहिए. यहां पहले से ही बड़ी संख्या में लोग फिटनेस, योग और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आते हैं. कॉन्ट्रास्ट थेरेपी उस कड़ी की तरह है, जिसकी यहां कमी महसूस की जा रही थी."
यह सर्किट 5 जुलाई से आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा. इसका लाभ आव्या राइज में ठहरने वाले रिट्रीट मेहमानों के साथ-साथ पूर्व बुकिंग कराने वाले डे विजिटर्स भी उठा सकेंगे.
जो लोग इस अनुभव को अधिक गहराई से लेना चाहते हैं, उनके लिए 9 जुलाई 2026 से ‘इनॉगरल फायर एंड आइस तपस रिट्रीट’ की शुरुआत होगी. यह बहुदिवसीय कार्यक्रम पूरी तरह से थर्मल सर्किट अनुभव पर आधारित होगा.
जुलाई में आयोजित होंगे ये कार्यक्रम
1. 2-3 जुलाई : मूवर्स एंड शेकर्स (वेलनेस समुदाय और चुनिंदा पत्रकार)
2. 4 जुलाई : उद्घाटन समारोह
3. 5 जुलाई : आम लोगों के लिए शुरुआत
4. 9 से 13 जुलाई : इनॉगरल फायर एंड आइस तपस रिट्रीट
कैसा होगा अनुभव
यह सर्किट पारंपरिक कॉन्ट्रास्ट थेरेपी क्रम का पालन करेगा. इसमें पहले शरीर को गर्मी के माध्यम से खोला जाएगा, फिर ठंडे पानी के जरिए शरीर की अनुकूलन क्षमता को सक्रिय किया जाएगा और अंत में गर्म पानी में विश्राम कराया जाएगा.
हर चरण को सांस, एकाग्रता और जागरूकता के अभ्यास के साथ जोड़ा गया है. यह सुविधा आव्या राइज की अपर तपोवन स्थित वन क्षेत्र की संपत्ति में विकसित की गई है, जहां योगशाला, स्पा, पॉटरी स्टूडियो, रिकॉर्डिंग स्टूडियो और कैफे जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं.
CCPA ने स्टोरिया फूड्स के उन विज्ञापनों का स्वतः संज्ञान लिया, जिनमें '100% टेंडर कोकोनट वॉटर' और '100% अनार', '100% आम', '100% मिक्स्ड फ्रूट' जैसे दावे किए गए थे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर सख्ती दिखाते हुए सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने दो प्रमुख फूड कंपनियों पर कार्रवाई की है. अथॉरिटी ने स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड और मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज लिमिटेड पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. CCPA ने पाया कि दोनों कंपनियां अपने उत्पादों के प्रचार में '100%' शब्द का इस्तेमाल इस तरह कर रही थीं, जिससे उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक संरचना और गुणवत्ता को लेकर भ्रमित किया जा रहा था.
भ्रामक विज्ञापनों पर CCPA की सख्ती
मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाली अथॉरिटी ने दोनों कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने उत्पादों की पैकेजिंग, वेबसाइट और डिजिटल प्लेटफॉर्म से ऐसे सभी दावे तुरंत हटाएं. यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम संबंधी दिशा-निर्देश, 2022 के तहत की गई है.
स्टोरिया के '100% नारियल पानी' दावे पर उठे सवाल
CCPA ने स्टोरिया फूड्स के उन विज्ञापनों का स्वतः संज्ञान लिया, जिनमें '100% टेंडर कोकोनट वॉटर' और '100% अनार', '100% आम', '100% मिक्स्ड फ्रूट' जैसे दावे किए गए थे. ये दावे कंपनी की वेबसाइट, पैकेजिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे अमेजन, फ्लिपकार्ट, बिगबास्केट, ब्लिंकिट, जियोमार्ट और जेप्टो पर भी दिखाई दिए.
जांच के दौरान पाया गया कि उत्पाद में केवल 9.6 प्रतिशत कोकोनट वॉटर कंसंट्रेट था, जिसे पानी के साथ मिलाकर तैयार किया गया था. 'रीकॉन्स्टिट्यूटेड' शब्द को पैकेजिंग पर बेहद छोटे अक्षरों में लिखा गया था. इसके अलावा उत्पाद में प्रिजर्वेटिव INS 202 का इस्तेमाल भी किया गया था, जिससे '100% नेचुरल' होने का दावा कमजोर पड़ गया.
इंग्लिश ओवन ब्रेड के दावों पर भी कार्रवाई
CCPA ने 'इंग्लिश ओवन' ब्रांड की ब्रेड के विज्ञापनों की भी जांच की. इनमें '100% आटा ब्रेड', '100% होल व्हीट ब्रेड' और '100% होल-व्हीट आटे से भरपूर' जैसे दावे किए गए थे. इन विज्ञापनों को विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 50 लाख से अधिक बार देखा गया था.
सुनवाई के दौरान कंपनी ने स्वीकार किया कि उसके ब्रेड उत्पादों में केवल 87 प्रतिशत होल व्हीट आटा इस्तेमाल किया गया था. अथॉरिटी ने पाया कि यह आंकड़ा '100%' के दावे से मेल नहीं खाता.
'जीरो मैदा' और '100% होल व्हीट' के दावे पर आपत्ति
CCPA ने पैकेजिंग पर '100% होल व्हीट ब्रेड' और 'जीरो मैदा' जैसे दावों के एक साथ इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया. अथॉरिटी का मानना है कि इससे उपभोक्ताओं के मन में यह धारणा बन सकती है कि उत्पाद पूरी तरह गेहूं के आटे से बना है.
कंपनी ने सुनवाई के दौरान यह भी स्वीकार किया कि इस प्रकार की दोहरी जानकारी उपभोक्ताओं के लिए भ्रम पैदा कर सकती है.
तकनीकी दलीलों को CCPA ने किया खारिज
मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशलिटीज ने तर्क दिया कि '100% आटा' का आशय केवल यह बताना था कि उत्पाद में उपयोग किया गया अनाज गेहूं है. हालांकि CCPA ने इस दलील को खारिज कर दिया.
अथॉरिटी ने कहा कि किसी भी विज्ञापन का मूल्यांकन एक सामान्य और समझदार उपभोक्ता के दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए. यदि कोई दावा उपभोक्ता को भ्रमित करता है, तो बाद में दी गई तकनीकी व्याख्याएं स्वीकार्य नहीं हो सकतीं.
उपभोक्ताओं को गुमराह करने वालों पर जारी रहेगी कार्रवाई
CCPA ने स्पष्ट किया कि उत्पाद की गुणवत्ता, संरचना, पोषण या स्वास्थ्य संबंधी किसी भी दावे को तथ्यात्मक, प्रमाणित और भ्रामकता से मुक्त होना चाहिए. अथॉरिटी ने कहा कि यदि किसी भी उत्पाद के बारे में उपभोक्ताओं को गुमराह किया जाता है, तो भविष्य में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
भारत में तेजी से बढ़ता विनिर्माण आधार और अमेरिका में बढ़ती मांग इस बात का संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में देश वैश्विक स्मार्टफोन सप्लाई चेन में और मजबूत भूमिका निभा सकता है
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत से अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात में लगातार तेजी देखने को मिल रही है. अप्रैल 2026 में भारत का स्मार्टफोन निर्यात सालाना आधार पर 47.24 फीसदी बढ़कर 2.43 अरब डॉलर के पार पहुंच गया. इस वृद्धि में एप्पल (Apple) की अहम भूमिका रही है. खास बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में दर्ज की गई है, जब चीन के मुकाबले भारत को मिलने वाला आयात शुल्क लाभ समाप्त हो चुका है.
अमेरिकी बाजार में मजबूत हुई भारत की हिस्सेदारी
अप्रैल 2025 में भारत ने अमेरिका को 1.65 अरब डॉलर के स्मार्टफोन निर्यात किए थे, जो एक साल बाद बढ़कर 2.43 अरब डॉलर से अधिक हो गए. अप्रैल 2026 में अमेरिका को भारत के कुल 8.47 अरब डॉलर के निर्यात में अकेले स्मार्टफोन की हिस्सेदारी 29 फीसदी रही. वहीं, अमेरिका के कुल स्मार्टफोन आयात में भारत की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी तक पहुंच गई, जो इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत को दर्शाता है.
Apple की रणनीति ने बढ़ाई निर्यात की रफ्तार
अमेरिकी बाजार के लिए भारत से स्मार्टफोन निर्यात बढ़ाने में एप्पल की रणनीति को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है. पिछले कुछ महीनों से यह आशंका जताई जा रही थी कि चीन के मुकाबले भारत को मिलने वाला शुल्क लाभ खत्म होने के बाद कंपनी की उत्पादन शिफ्टिंग की गति धीमी पड़ सकती है. हालांकि, ताजा आंकड़े बताते हैं कि कंपनी अब भी भारत को अपने वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
वित्त वर्ष 2025-26 में 86 फीसदी बढ़ा निर्यात
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात 10.56 अरब डॉलर से बढ़कर 19.67 अरब डॉलर पर पहुंच गया. यह सालाना आधार पर 86.2 फीसदी की मजबूत वृद्धि को दर्शाता है. इस अवधि में भारत में निर्मित iPhone के कुल निर्यात मूल्य का लगभग 78 फीसदी हिस्सा अमेरिका भेजा गया. एप्पल के अलावा लेनेवो (Lenovo) जैसी कंपनियां भी अमेरिका को भारत से स्मार्टफोन निर्यात कर रही हैं.
ड्यूटी लाभ खत्म होने के बाद भी बनी बढ़त
ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में चीन से आयात होने वाले स्मार्टफोन पर 20 फीसदी शुल्क लगाया गया था, जबकि भारत से आने वाले स्मार्टफोन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं था. इससे भारत को बड़ा प्रतिस्पर्धी लाभ मिला. हालांकि बाद में अमेरिका और चीन के बीच हुए अंतरिम समझौते के तहत शुल्क में कटौती की गई और बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस शुल्क को अवैध करार दे दिया. इसके बाद भारत और चीन दोनों से आयात होने वाले स्मार्टफोन पर शुल्क का अंतर समाप्त हो गया.
इसके बावजूद भारत लागत और सरकारी प्रोत्साहनों के कारण वैश्विक कंपनियों के लिए एक आकर्षक विनिर्माण केंद्र बना हुआ है.
भारत में उत्पादन बढ़ाने पर कायम है एप्पल
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) का अनुमान है कि आने वाले वर्षों में एप्पल अपने वैश्विक iPhone उत्पादन का 30 फीसदी से अधिक हिस्सा भारत में तैयार कर सकता है. वित्त वर्ष 2025-26 में यह हिस्सेदारी 25 फीसदी थी.
वित्त वर्ष 2026-27 तक कंपनी के भारत में विदेशी मुद्रा के लिहाज से नेट पॉजिटिव होने की संभावना भी जताई जा रही है. इसके लिए कंपनी को भारत में बनने वाले iPhone उत्पादन का करीब 85 फीसदी निर्यात करना होगा. वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा 83 फीसदी रहा था.
अगले कुछ वर्षों में दोगुना हो सकता है उत्पादन
विश्लेषकों का मानना है कि यदि एप्पल मौजूदा उत्पादन स्तर को बनाए रखता है, तो अगले तीन वित्त वर्षों में भारत में उसका उत्पादन मूल्य दोगुना हो सकता है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2022 से 2026 के बीच भारत में करीब 70 अरब डॉलर का उत्पादन मूल्य हासिल किया है. भारत में तेजी से बढ़ता विनिर्माण आधार और अमेरिका में बढ़ती मांग इस बात का संकेत हैं कि आने वाले वर्षों में देश वैश्विक स्मार्टफोन सप्लाई चेन में और मजबूत भूमिका निभा सकता है.
शुक्रवार को सेंसेक्स 607.08 अंक यानी 0.78 फीसदी की गिरावट के साथ 76,802.90 अंक पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 154.90 अंक यानी 0.64 फीसदी टूटकर 24,013.10 अंक पर बंद हुआ था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पिछले कारोबारी सत्र में घरेलू शेयर बाजार पांच दिनों की लगातार तेजी के बाद गिरावट के साथ बंद हुआ था. आईटी शेयरों में बिकवाली और मुनाफावसूली के दबाव से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में कमजोरी देखने को मिली. अब सोमवार को बाजार खुलने से पहले निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, आईटी सेक्टर की चाल और जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO से जुड़ी खबरों पर रहेगी.
पिछले सत्र में टूटी पांच दिनों की तेजी
शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार में लगातार पांच सत्रों से जारी तेजी का सिलसिला थम गया था. कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेज (BSE) सेंसेक्स 900 अंकों से अधिक टूट गया था, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 24,000 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया था. हालांकि बाजार निचले स्तरों से कुछ संभला और अंत में सेंसेक्स 607.08 अंक यानी 0.78 फीसदी की गिरावट के साथ 76,802.90 अंक पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी 154.90 अंक यानी 0.64 फीसदी टूटकर 24,013.10 अंक पर बंद हुआ.
पिछले पांच कारोबारी सत्रों में दोनों प्रमुख सूचकांक पांच फीसदी से अधिक की तेजी दर्ज कर चुके थे, ऐसे में बाजार में मुनाफावसूली भी देखने को मिली.
आईटी शेयरों में बिकवाली से बढ़ा दबाव
पिछले सत्र में सेंसेक्स के 30 में से 17 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए थे. इन्फोसिस में सबसे अधिक 6.41 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा टीसीएस, एचसीएल टेक, एचडीएफसी बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, रिलायंस इंडस्ट्रीज, कोटक महिंद्रा बैंक, एसबीआई, हिंदुस्तान यूनिलीवर और टाटा स्टील के शेयरों में भी कमजोरी रही. दूसरी ओर इटरनल, भारती एयरटेल, पावरग्रिड, ट्रेंट, एनटीपीसी और आईटीसी के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली.
ब्रॉडर मार्केट में भी दिखी कमजोरी
पिछले सत्र में ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव देखने को मिला. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.22 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.42 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए थे. सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. इसके अलावा रियल्टी, ऑटो और ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी कमजोरी रही. वहीं फार्मा शेयरों में खरीदारी का रुख देखने को मिला.
आज बाजार की दिशा किन कारकों से तय होगी?
विश्लेषकों के अनुसार, सोमवार को बाजार की चाल वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, आईटी शेयरों की स्थिति और कॉर्पोरेट घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी. यदि आईटी शेयरों में स्थिरता लौटती है और वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो घरेलू बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है. हालांकि यदि आईटी सेक्टर पर दबाव बना रहता है और निवेशकों की मुनाफावसूली जारी रहती है, तो बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर भी जारी रह सकता है. ऐसे में निवेशकों की नजर आज के कारोबार में शुरुआती रुझानों और सेक्टर आधारित गतिविधियों पर रहेगी.
इन शेयरों पर रखें नजर
विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में आज कई कंपनियां अपने कारोबारी अपडेट, बड़े ऑर्डर, अधिग्रहण और कॉरपोरेट घोषणाओं के चलते निवेशकों के रडार पर रहेंगी. रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स ने IPO के लिए सेबी के पास DRHP दाखिल किया है, जबकि विप्रो ने Aggne Global IT Services में अतिरिक्त 20 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण पूरा कर लिया है. सन फार्मा ने 271.2 करोड़ रुपये में Innovcare Lifesciences के अधिग्रहण की घोषणा की है, वहीं एम्बर एंटरप्राइजेज की इकाई Ascent में IL Jin Electronics 328 करोड़ रुपये का निवेश करेगी.
रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) को NMDC से 2,977 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है, जबकि भारत फोर्ज ने भारतीय नौसेना के लिए गैस टर्बाइन जनरेटर की आपूर्ति हेतु रक्षा मंत्रालय के साथ 425 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है. टाटा मोटर्स को 3,400 से अधिक इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं, जो देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की बढ़ती मांग को दर्शाते हैं. वहीं किर्लोस्कर ऑयल इंजन्स को डेटा सेंटर सेक्टर से बड़ा ऑर्डर मिला है.
इसके अलावा यूको बैंक के कार्यकारी निदेशक राजेंद्र कुमार साबू को बैंक के MD और CEO का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. दूसरी ओर पतंजलि फूड्स को झटका लगा है, क्योंकि केरल में ज्वार के आटे के एक बैच की बिक्री पर रोक लगा दी गई है. इन घटनाक्रमों के चलते आज कई शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
AGS Health और PGP Glass मिलकर करीब ₹8,600 करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं. वहीं, Jio Platforms के संभावित मेगा IPO ने भी बाजार की उत्सुकता बढ़ा दी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में आईपीओ गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं. बाजार नियामक SEBI ने AGS Health, PGP Glass, Shreni Shares और SRIT India के पब्लिक इश्यू को मंजूरी दे दी है. इनमें AGS Health और PGP Glass मिलकर करीब ₹8,600 करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं. वहीं, Jio Platforms के संभावित मेगा IPO ने भी बाजार की उत्सुकता बढ़ा दी है.
SEBI ने चार कंपनियों को दी IPO की मंजूरी
कैपिटल मार्केट रेगुलेटर SEBI ने AGS Health, PGP Glass, Shreni Shares और SRIT India के आईपीओ प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी है. इन कंपनियों के बाजार में उतरने से प्राथमिक बाजार में निवेशकों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है. खास बात यह है कि AGS Health और PGP Glass ने मार्च 2026 में कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग रूट के जरिए अपने ड्राफ्ट दस्तावेज जमा किए थे.
AGS Health और PGP Glass जुटाएंगी ₹8,600 करोड़
SEBI की मंजूरी मिलने के बाद AGS Health करीब ₹4,500 करोड़ और PGP Glass लगभग ₹4,100 करोड़ का आईपीओ लाने की तैयारी में है. इस तरह दोनों कंपनियां मिलकर बाजार से लगभग ₹8,600 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखती हैं. इन बड़े इश्यूज से प्राथमिक बाजार में गतिविधियां और तेज होने की संभावना है.
क्या है कॉन्फिडेंशियल फाइलिंग रूट?**
कॉन्फिडेंशियल प्री-फाइलिंग व्यवस्था कंपनियों को अपने वित्तीय और कारोबारी विवरण सार्वजनिक किए बिना IPO प्रक्रिया आगे बढ़ाने की सुविधा देती है. इस व्यवस्था के तहत कंपनियां संवेदनशील कारोबारी जानकारियां और वित्तीय आंकड़े गोपनीय रख सकती हैं. साथ ही बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अपने आईपीओ प्लान में बदलाव या जरूरत पड़ने पर उसे वापस लेने का विकल्प भी उनके पास रहता है. इसके विपरीत, पारंपरिक DRHP फाइलिंग के बाद दस्तावेज सार्वजनिक हो जाते हैं.
Shreni Shares का फोकस विस्तार और पूंजी जरूरतों पर
ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के अनुसार, स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी Shreni Shares के आईपीओ में 69 लाख नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि 82 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) भी शामिल होगा. कंपनी इस इश्यू से जुटाई गई राशि का उपयोग वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने, कुछ कर्ज चुकाने और सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी.
SRIT India जुटाएगी विकास के लिए पूंजी
SRIT India के प्रस्तावित आईपीओ में 1.68 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे और इसमें कोई ऑफर फॉर सेल शामिल नहीं होगा. कंपनी इस फंड का उपयोग अपने मौजूदा उत्पादों के आधुनिकीकरण और पुनर्विकास, वर्किंग कैपिटल जरूरतों, संभावित अधिग्रहणों के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रोथ और अन्य कॉर्पोरेट कार्यों के लिए करने की योजना बना रही है.
Jio Platforms के मेगा IPO पर टिकी बाजार की नजर
इस बीच Jio Platforms ने भी अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ के लिए दस्तावेज SEBI के पास जमा कर दिए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी करीब 4 अरब डॉलर यानी लगभग ₹37,700 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है. यदि यह इश्यू बाजार में आता है, तो यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है.
IPO बाजार में बढ़ रही रफ्तार
SEBI की मंजूरी के साथ AGS Health, PGP Glass, Shreni Shares और SRIT India अब लिस्टिंग की दिशा में एक कदम आगे बढ़ गई हैं. लगातार बढ़ते आईपीओ और कंपनियों की मजबूत पूंजी जुटाने की योजनाएं यह संकेत देती हैं कि भारतीय प्राथमिक बाजार में निवेशकों और कंपनियों दोनों का भरोसा मजबूत बना हुआ है.
महादेव के काले अरबों रुपये वैश्विक वित्तीय प्रणाली के हर प्रहरी को चकमा देने में सफल रहे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
अगस्त 2024 में, भारत की कंपनी Eraaya Lifespaces ने अमेरिकी दिवालियापन प्रक्रिया के माध्यम से अटलांटा, जॉर्जिया स्थित और NASDAQ में सूचीबद्ध टेक्नोलॉजी कंपनी EBIX Inc. की 97.58 प्रतिशत हिस्सेदारी 138.577 मिलियन अमेरिकी डॉलर में खरीदी.
अब भारत का प्रवर्तन निदेशालय (ED) आरोप लगा रहा है कि इस अधिग्रहण में इस्तेमाल किया गया पैसा दुबई से संचालित अवैध क्रिकेट सट्टेबाजी सिंडिकेट से आया था.
सिर्फ यह एक लेन-देन ही बताता है कि यह कहानी कितनी दूर तक फैली हुई है.
सौरभ चंद्राकर का पालन-पोषण छत्तीसगढ़ के भिलाई में हुआ. वर्ष 2020 तक वह दुबई में थे और जांच एजेंसियों के अनुसार भारत के सबसे परिष्कृत अवैध सट्टेबाजी नेटवर्कों में से एक का निर्माण कर रहे थे. उनके साझेदार रवि उप्पल थे. उनके द्वारा बनाए गए प्लेटफॉर्म का नाम 'महादेव ऑनलाइन बुक' था .
न कोई कार्यालय था. न कोई पंजीकृत संस्था. न कोई ऐसा दस्तावेजी रिकॉर्ड जो सीधे किसी व्यक्ति तक पहुंचता हो. केवल मोबाइल नंबरों का एक नेटवर्क था और हर नंबर के पीछे किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर खुला बैंक खाता.
अपने चरम पर यह नेटवर्क हर महीने लगभग 450 करोड़ रुपये उत्पन्न कर रहा था. ईडी के आदेश में दर्ज अनुमान के अनुसार महादेव, SkyExchange, Lotus365 और उनसे जुड़े प्लेटफॉर्म्स का संयुक्त नेटवर्क सालाना 4,000 करोड़ से 5,000 करोड़ रुपये के बीच कारोबार कर रहा था. यह आंकड़ा किसी मध्यम आकार की वैध कंपनी के टर्नओवर जैसा दिखाई देता है, न कि भूमिगत जुए से होने वाली कमाई जैसा.
इसका संचालन ढांचा बेहद व्यवस्थित था.
चंद्राकर और उप्पल सीधे सट्टेबाजों को नहीं संभालते थे. वे "पैनल" बेचते थे, जो प्रभावी रूप से फ्रेंचाइजी यूनिट्स की तरह काम करते थे. अपने चरम पर लगभग 2,000 पैनल एक साथ संचालित हो रहे थे. प्रत्येक के पास एक सुपरवाइजर, चार कर्मचारी, कई मोबाइल नंबर और ऐसे बैंक खाते थे जो अक्सर उन लोगों के नाम पर खोले गए थे जिन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी.
छत्तीसगढ़ के एक सब्जी विक्रेता को मोबाइल सिम योजना का प्रस्ताव दिया गया. उसने अपना आधार और पैन विवरण जमा किया. कुछ ही हफ्तों में उसके नाम के खाते से करोड़ों रुपये का लेन-देन हो गया. उसे इसकी जानकारी तब मिली जब उसका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया.
एक वेल्डर के पूर्व नियोक्ता ने उसके और उसकी पत्नी के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और डेबिट कार्ड तथा मोबाइल नंबर अपने पास रख लिए. बाद में इन खातों का इस्तेमाल सट्टेबाजी लेन-देन में किया गया. दोनों खाते फ्रीज कर दिए गए. दोनों का इस गतिविधि से कोई संबंध नहीं था.
ईडी के आदेश में ऐसे कई उदाहरण दर्ज हैं. यह कोई संयोग नहीं था, बल्कि पूरा कारोबारी मॉडल इसी तरह बनाया गया था.
दुबई में चंद्राकर और उप्पल द्वारा संचालित कॉल सेंटर में छत्तीसगढ़ के पड़ोसी जिलों से आए लगभग एक हजार युवा काम करते थे. इनमें से कई लोग सामान्य बिक्री संबंधी नौकरी की उम्मीद लेकर पहुंचे थे.
इस नेटवर्क में SkyExchange भी शामिल था, जिसे कोलकाता के कारोबारी हरि शंकर तिबरेवाल अलग से संचालित करते थे. दस्तावेजों के अनुसार इस प्लेटफॉर्म ने 178 सप्ताह के दौरान प्रति सप्ताह 22 करोड़ रुपये की कमाई की, जो कुल मिलाकर लगभग 4,000 करोड़ रुपये बैठती है.
हर आपराधिक नेटवर्क की तरह एक समय के बाद इनके सामने भी वही समस्या आती है जो वैध व्यवसायों के सामने आती है—संचित पूंजी.
इतनी बड़ी मात्रा में नकदी नकदी के रूप में नहीं रह सकती. उसे कहीं स्थानांतरित करना पड़ता है. उसका रूप बदलना पड़ता है. और इसके लिए एक वित्तीय ढांचे की जरूरत होती है.
तिबरेवाल के पास वही ढांचा मौजूद था.
उनके नेटवर्क ने दुबई, मॉरीशस और ब्रिटेन में शेल कंपनियां बनाई हुई थीं. भारत से पैसा बाहर भेजा जाता, इन संस्थाओं के माध्यम से घुमाया जाता और फिर विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, QIP पूंजी या FCCB फंडिंग के रूप में वापस लाया जाता. कागजों पर यह वैध विदेशी निवेश जैसा ही दिखाई देता था.
यह पैसा दिल्ली के कारोबारी विकास गर्ग की कंपनियों, Eraaya Lifespaces, Vikas Lifecare और Vikas Ecotech में पहुंचा. ये सभी सूचीबद्ध कंपनियां हैं, जिनके बोर्ड, वैधानिक ऑडिटर और वार्षिक खुलासे मौजूद हैं.
गर्ग को इस मार्ग से 765.77 करोड़ रुपये प्राप्त हुए. ईडी की पूछताछ में गर्ग ने स्वीकार किया कि धन तिबरेवाल के सट्टेबाजी नेटवर्क से आया था. इसके बावजूद उन्होंने इसे स्वीकार किया.
इसके बाद पैसा एक बार फिर भारत से बाहर गया. यहीं से यह मामला असाधारण बन जाता है.
यह धन अमेरिका पहुंचा, वहां एक दिवालियापन अदालत की जांच प्रक्रिया से गुजरा और अंततः एक सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध टेक्नोलॉजी कंपनी की नियंत्रक हिस्सेदारी के रूप में सामने आया.
EBIX Inc. की भारत में 25 सहायक कंपनियां थीं, जो बीमा कंपनियों, बैंकों, एयरलाइंस और भुगतान नेटवर्कों को सेवाएं देती थीं. इसके दस्तावेज अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) के पास जमा थे और इसके शेयर NASDAQ पर कारोबार करते थे.
अगस्त 2024 में Eraaya Lifespaces ने यह अधिग्रहण पूरा किया. यहीं से यह मामला संगठित अपराध से आगे बढ़कर वित्तीय प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करने लगता है.
भारतीय बैंकों ने लेन-देन को संसाधित किया. विदेशी निवेश संरचनाओं ने धन के मार्ग उपलब्ध कराए. कॉरपोरेट फंड जुटाने के माध्यमों ने पूंजी को समाहित किया. ऑडिटरों ने खुलासों पर हस्ताक्षर किए. विभिन्न देशों के नियामकों को कुछ भी असामान्य नहीं लगा. अमेरिकी दिवालियापन अदालत ने अधिग्रहण को मंजूरी दे दी. और सौदा पूरा होने के बाद ही जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि मूल पूंजी आपराधिक स्रोतों से आई थी.
धन शोधन रोकने वाली प्रणालियां, KYC अनुपालन, सीमा-पार पूंजी निगरानी, प्रतिभूति नियमन, पेशेवर निगरानी तंत्र और अदालत की देखरेख में की गई जांच—ऐसा प्रतीत होता है कि इन सभी को सफलतापूर्वक पार कर लिया गया.
शायद यही इस पूरी कहानी का सबसे चौंकाने वाला पहलू है.
5 जून 2026 को प्रवर्तन निदेशालय ने अस्थायी कुर्की आदेश संख्या 16/2026 जारी किया, जिसके तहत विकास गर्ग से जुड़ी 940.77 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त कर ली गईं. इनमें EBIX Inc. के 12,84,000 शेयर, अतिरिक्त 2,13,200 शेयर और गोवा, दिल्ली, उत्तराखंड तथा राजस्थान में स्थित 12 अचल संपत्तियां शामिल हैं.
EBIX प्रबंधन को सूचित किया गया कि 893 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का हस्तांतरण नहीं किया जा सकता.
रायपुर स्थित ईडी के एक क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा जारी आदेश अब NASDAQ में कारोबार करने वाली कंपनी से जुड़ी संपत्तियों को प्रभावित कर रहा था.
महादेव मामले में यह दसवां ऐसा आदेश था. इससे पहले नौ आदेशों के तहत 2,825 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी थीं. कुल कुर्की राशि अब 3,765 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है.
दूसरी ओर, चंद्राकर और उप्पल कई समनों के बावजूद ईडी के सामने पेश नहीं हुए हैं. वे अब भी यूएई में हैं और कथित तौर पर वानुआतु के यात्रा दस्तावेजों का उपयोग कर रहे हैं.
जांचकर्ताओं को मिले सबूतों में सुनील भंडारी के फोन से बरामद एक संदेश भी शामिल था. भंडारी उन लोगों में से एक थे जो तिबरेवाल के धन को वित्तीय प्रणाली के माध्यम से स्थानांतरित करने में शामिल थे.
इस संदेश में SkyExchange का यूजर आईडी, पासवर्ड और पांच करोड़ सट्टेबाजी अंक मौजूद थे. भंडारी ने स्वीकार किया कि उन्होंने इन्हीं क्रेडेंशियल्स का उपयोग कर चैंपियंस ट्रॉफी और IPL मैचों पर अवैध सट्टेबाजी की थी और भुगतान नकदी कुरियर नेटवर्क के जरिए किया था.
जो व्यक्ति धन को इधर-उधर पहुंचाने में मदद कर रहा था, वही उस प्लेटफॉर्म पर सट्टा भी लगा रहा था जो यह धन पैदा कर रहा था.
आज रात भी कहीं न कहीं एक ऐसा क्रिकेट सट्टा लगाया जा रहा होगा जो ऐसे नंबर से जुड़ा होगा जिसका कोई वास्तविक मालिक नहीं है.
अधिकांश लोग अब भी मानते हैं कि अवैध सट्टेबाजी केवल कानून-व्यवस्था की समस्या है, जुआ, कर चोरी या संगठित अपराध.
लेकिन यह मामला कहीं अधिक गंभीर संकेत देता है.
जांचकर्ताओं का आरोप है कि भारतीय सट्टेबाजी सिंडिकेट से पैदा हुआ धन ऑफशोर शेल कंपनियों के माध्यम से गुजरा, कई देशों की विनियमित वित्तीय प्रणालियों में प्रवेश किया और अंततः एक सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध अमेरिकी कंपनी के अधिग्रहण को वित्तपोषित करने में इस्तेमाल हुआ.
सबसे चिंताजनक बात सिर्फ यह नहीं है कि ऐसा हुआ.
बल्कि यह है कि इसे रोकने के लिए बनाई गई लगभग हर प्रणाली इसे होने से रोकने में विफल दिखाई देती है.
और यही एक बड़ा सवाल खड़ा करता है,
वैश्विक वित्तीय प्रणाली में हर दिन होने वाले कितने ऐसे लेन-देन हैं जो पूरी तरह वैध दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में वैध नहीं हैं?
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय उपभोक्ता अब वैज्ञानिक रूप से विकसित स्किनकेयर उत्पादों, प्रीमियम ब्यूटी ब्रांड्स और वैश्विक ट्रेंड्स से प्रेरित उत्पादों पर अधिक खर्च कर रहे हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के ई-कॉमर्स बाजार में ब्यूटी और पर्सनल केयर सेगमेंट तेजी से विस्तार कर रहा है. फ्लिपकार्ट ने ग्लैम अप फेस्ट 2026 के दौरान खुलासा किया कि उसके ब्यूटी और पर्सनल केयर कारोबार में सालाना आधार पर 50% की वृद्धि दर्ज की गई है. इस बढ़त में सबसे बड़ा योगदान Gen Z उपभोक्ताओं और टियर-2 व टियर-3 शहरों के ग्राहकों का रहा है. कंपनी के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर होने वाली कुल ब्यूटी खरीदारी में करीब 60% हिस्सेदारी Gen Z ग्राहकों की है, जबकि हर तीन में से दो ब्यूटी सर्च गैर-मेट्रो शहरों से आ रही हैं.
सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित ग्लैम अप फेस्ट 2026 के चौथे संस्करण में 100 से अधिक प्रमुख ब्यूटी ब्रांड्स और 6,000 से ज्यादा क्रिएटर्स, इन्फ्लुएंसर्स तथा सेलिब्रिटीज ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम में उद्योग के बदलते रुझानों, उपभोक्ता व्यवहार और नई तकनीकों पर चर्चा की गई.
Annual Beauty Trends Report 2.0 में सामने आए नए रुझान
ग्लैम अप फेस्ट के दौरान फ्लिपकार्ट ने Quantum Consumer Solutions के साथ मिलकर तैयार की गई Annual Beauty Trends Report 2.0 भी जारी की. रिपोर्ट के अनुसार भारतीय उपभोक्ता अब वैज्ञानिक रूप से विकसित स्किनकेयर उत्पादों, प्रीमियम ब्यूटी ब्रांड्स और वैश्विक ट्रेंड्स से प्रेरित उत्पादों पर अधिक खर्च कर रहे हैं. ग्राहक अपनी व्यक्तिगत पहचान और पसंद को दर्शाने के लिए नए प्रयोगों के प्रति अधिक खुले नजर आ रहे हैं.
टेक्नोलॉजी बना रही खरीदारी को आसान
फ्लिपकार्ट का ब्यूटी प्लेटफॉर्म Virtual Try-On और Live Video Commerce जैसी सुविधाओं से लैस है. कंपनी का दावा है कि ये फीचर्स ग्राहकों को अधिक जानकारीपूर्ण और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान करते हैं, जिससे उत्पाद चयन और खरीदारी का फैसला आसान हो जाता है.
छोटे शहरों से बढ़ रही ब्यूटी बाजार की ताकत
फ्लिपकार्ट के मुताबिक कटक, बर्धमान, गोरखपुर, कोट्टायम, गुंटूर, जामनगर और सांगली जैसे शहर अब देश में ब्यूटी ट्रेंड्स और खरीदारी के पैटर्न को प्रभावित कर रहे हैं. कंपनी का मानना है कि इन शहरों में प्रीमियम और विशेष ब्यूटी उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिससे पूरे सेगमेंट को नई गति मिल रही है.
प्रीमियम ब्यूटी और पुरुष ग्रूमिंग में जबरदस्त उछाल
फ्लिपकार्ट के आंकड़ों के अनुसार प्रीमियम ब्यूटी श्रेणी में सालाना आधार पर 60% से अधिक वृद्धि दर्ज की गई. वहीं परफ्यूम श्रेणी में 45% से ज्यादा की बढ़ोतरी देखने को मिली. पुरुषों की ग्रूमिंग सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट बनकर उभरा, जहां 65% की वृद्धि दर्ज की गई. "Men’s Sunscreen", "Men’s Facewash" और "Men’s Hair Serum" जैसी श्रेणियों की खोज में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है. यह संकेत देता है कि पुरुष उपभोक्ता भी अब व्यक्तिगत देखभाल और वेलनेस पर अधिक ध्यान दे रहे हैं.
हर सेकंड बिक रहे 12 ब्यूटी प्रोडक्ट
फ्लिपकार्ट ने बताया कि उसके प्लेटफॉर्म पर हर सेकंड 12 ब्यूटी उत्पादों की बिक्री हो रही है. वहीं क्विक कॉमर्स सेवा Flipkart Minutes में ब्यूटी श्रेणी पिछले एक वर्ष में पांच गुना बढ़ी है और यह प्लेटफॉर्म की शीर्ष प्रदर्शन करने वाली तीन श्रेणियों में शामिल हो चुकी है. फ्लिपकार्ट सॉफ्टलाइंस, ग्रोसरी एवं मार्केटप्लेस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और हेड साकैत चौधरी ने कहा, भारत में ब्यूटी श्रेणी को Gen Z उपभोक्ता आकार दे रहे हैं. वे अधिक जागरूक हैं, ट्रेंड्स को लेकर सजग हैं और उन्होंने ब्यूटी को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बना लिया है. साथ ही, हम भारत के विभिन्न शहरों से आने वाले ग्राहकों के बीच मजबूत मांग देख रहे हैं, जहां पारंपरिक श्रेणियों से आगे बढ़कर प्रीमियम, विशेष और वैश्विक प्रेरणा वाले उत्पादों की लोकप्रियता बढ़ रही है. यह बदलाव ब्रांड्स के लिए ग्राहकों से अधिक प्रभावी तरीके से जुड़ने के नए अवसर पैदा कर रहा है और उत्पाद खोज को खरीदारी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा है. फ्लिपकार्ट का ग्लैम अप फेस्ट इन्हीं बदलावों को दर्शाता है, जहां ब्रांड्स, क्रिएटर्स और उपभोक्ता एक मंच पर आकर उभरते ट्रेंड्स और नवाचारों का उत्सव मनाते हैं.
लॉन्च हुआ Global Luxe Beauty Store
कार्यक्रम के दौरान अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने फ्लिपकार्ट के नए Global Luxe Beauty Store का उद्घाटन किया. इस स्टोर के जरिए भारतीय ग्राहकों को K-Beauty, डर्मा केयर और अंतरराष्ट्रीय फ्रेगरेंस ब्रांड्स तक पहुंच मिलेगी. इस प्लेटफॉर्म पर Calvin Klein, Gucci, Nautica, Eucerin, Medicube, D'Alba, Cetaphil, CeraVe, Beauty of Joseon, SKIN1004 और Tir Tir जैसे 100 से अधिक वैश्विक ब्रांड उपलब्ध होंगे.
गैर-मेट्रो शहरों तक पहुंचेगा ग्लैम अप फेस्ट
इस ऑफलाइन आयोजन के बाद फ्लिपकार्ट ऐप पर 19 से 27 जून, 2026 तक Glam Up Sale आयोजित की जाएगी. इसमें सीमित समय के ऑफर, चुने हुए कलेक्शंस, नए लॉन्च और ब्यूटी व पर्सनल केयर श्रेणियों में ट्रेंड आधारित सुझाव उपलब्ध होंगे. साथ ही फ्लिपकार्ट ने यह घोषणा भी की है कि वह इस वर्ष ग्लैम अप फेस्ट को टियर-2 और टियर-3 शहरों तक विस्तारित करेगा. इसकी शुरुआत गुवाहटी में आयोजित कार्यक्रम से हुई, जहां 600 से अधिक कंटेंट क्रिएटर्स ने भाग लिया और प्रमुख ब्यूटी ब्रांड्स के साथ संवाद किया. कंपनी का कहना है कि सकारात्मक प्रतिक्रिया को देखते हुए आने वाले महीनों में देश के कई अन्य गैर-मेट्रो शहरों में भी ऐसे आयोजन किए जाएंगे.
एक सप्ताह में करीब 10 अरब डॉलर घटा भारत का फॉरेक्स रिजर्व, गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 10.75 अरब डॉलर की कमी; विदेशी मुद्रा आस्तियों में हालांकि बढ़ोतरी दर्ज
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक सप्ताह के भीतर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 12 जून 2026 को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 10 अरब डॉलर घटकर 671.63 अरब डॉलर रह गया. यह गिरावट मुख्य रूप से सोने की कीमतों में आई नरमी के कारण हुई है, जिससे RBI के गोल्ड रिजर्व के मूल्य में भारी कमी दर्ज की गई.
एक सप्ताह में 9.98 अरब डॉलर घटा फॉरेक्स रिजर्व
RBI द्वारा जारी साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार, 12 जून को समाप्त सप्ताह में भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 9.985 अरब डॉलर घट गया. इससे पहले वाले सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 711 मिलियन डॉलर की कमी आई थी.
इस गिरावट के बाद देश का कुल विदेशी मुद्रा भंडार 671.625 अरब डॉलर पर पहुंच गया है. गौरतलब है कि 27 फरवरी 2026 को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचा था.
विदेशी मुद्रा आस्तियों में दर्ज हुई बढ़ोतरी
हालांकि कुल विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट के बीच विदेशी मुद्रा आस्तियों (FCA) में बढ़ोतरी देखने को मिली है. समीक्षा सप्ताह के दौरान FCA में 846 मिलियन डॉलर का इजाफा हुआ और यह बढ़कर 544.290 अरब डॉलर पर पहुंच गया. FCA विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होता है. इसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और येन जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मूल्य में उतार-चढ़ाव का प्रभाव भी शामिल होता है.
सोने के भंडार की वैल्यू में 10.75 अरब डॉलर की गिरावट
विदेशी मुद्रा भंडार में आई बड़ी गिरावट की सबसे बड़ी वजह गोल्ड रिजर्व का मूल्य कम होना रहा. बीते सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में नरमी के चलते RBI के स्वर्ण भंडार की वैल्यू 10.754 अरब डॉलर घट गई.
इसके बाद देश के गोल्ड रिजर्व का मूल्य घटकर 100.112 अरब डॉलर रह गया. मार्च 2026 के अंत तक RBI के पास 880.52 टन सोना था, जो कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 16.7 प्रतिशत हिस्सा है.
SDR और IMF रिजर्व में भी मामूली कमी
RBI के आंकड़ों के मुताबिक समीक्षा सप्ताह के दौरान स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में 66 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई. वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे भारत के रिजर्व की वैल्यू भी 11 मिलियन डॉलर घट गई. वर्तमान में IMF के पास भारत का रिजर्व 4.815 अरब डॉलर है.
क्यों महत्वपूर्ण है विदेशी मुद्रा भंडार?
विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश की वित्तीय मजबूती का अहम संकेतक माना जाता है. इसका उपयोग आयात भुगतान, मुद्रा विनिमय दर को स्थिर रखने और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं से निपटने में किया जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया गिरावट मुख्य रूप से गोल्ड रिजर्व के मूल्यांकन में बदलाव का असर है, जबकि विदेशी मुद्रा आस्तियों में बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है.