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IMF की MD ने क्रिप्टोकरंसी पर किया भारत का समर्थन, जानिए क्या है पूरा मामला
IMF की MD ने यह भी कहा कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों के लोन रिस्ट्रक्चर के मुद्दे पर राष्ट्रों के बीच कुछ मतभेद हैं. हालांकि उन्होंने देशों के नाम नहीं लिए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने प्राइवेट क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल संपत्तियों पर भारत के रुख का समर्थन किया और कहा कि ऐसी संपत्तियों के लिए ग्लोबल रेग्यूलेशन पर एक मजबूत दबाव की आवश्यकता है. IMF की MD जॉर्जीवा ने बेंगलुरू में वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों (FMCGB) की जी-20 बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए ये बात कही. उन्होंने कहा कि निम्न और मध्यम आय वाले देशों के ऋण पुनर्गठन के मुद्दे पर कुछ देशों के बीच मतभेद हैं.
हमें करेंसी में अंतर करना होगा
उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंकों को डिजिटल मुद्राओं के बीच अंतर करना होगा. उन्होंने कहा एक ओर सरकारों द्वारा जारी की जाने वाली करेंसी है तो दूसरी ओर क्रिप्टो संपत्ति है जो निजी तौर पर जारी की जाती हैं. दूसरा, रेग्यूलेशन के लिए बहुत कड़े नियम होने चाहिए, और तीसरा, यदि रेग्यूलेशन विफल रहता है, और आप इसे करने में धीमे हैं, तो हमें टेबल से हटना नहीं चाहिए या उन संपत्तियों पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि वे वित्तीय स्थिरता जोखिम पैदा कर सकते हैं. वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक में भारतीय अधिकारियों ने तर्क दिया है कि निजी क्रिप्टो संपत्तियों के लिए मजबूत वैश्विक नियमों की आवश्यकता है अगर कुछ मामलों में उन्हें प्रतिबंधित करना पड़े तो इससे भी पीछे नहीं रहना चाहिए. जॉर्जीवा ने कहा कि अपेक्षित वैश्विक विकास मंदी के कारण 2023 एक चुनौतीपूर्ण वर्ष होगा, और उन्होंने यूक्रेन में चल रहे युद्ध को 'अनिश्चितता का गंभीर स्रोत' कहा है.
लोन रीस्ट्रक्चर पर क्या बोली जॉर्जीवा
आईएमएफ की एमडी ने कहा कि लोन रीस्ट्रक्चर करने के मुद्दे पर, कुछ असहमति थी, लेकिन उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया, यह कहते हुए कि राष्ट्रों के बीच मतभेदों को भंग करने की प्रतिबद्धता है. उन्होंने कहा कि वो किसी का नाम नहीं लेंगी. जॉर्जीवा की टिप्पणी उनके, विश्व बैंक के निवर्तमान अध्यक्ष डेविड मलपास और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा ग्लोबल सॉवरेन डेट राउंड-टेबल की बैठक की सह-अध्यक्षता करने के ठीक बाद आया है. उसके बाद स्पेन की उप राष्ट्रपति नादिया कैल्विनो, जो वहां की अर्थव्यवस्था मंत्री भी हैं, उन्होंने भी इसका समर्थन किया.
लोन मैनेजमेंट और लोन रीस्ट्रक्चर, लोन राहत पर एक व्यापक सहमति है कि ये सबसे कमजोर देशों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण साधन है. कैल्विनो ने कहा कि चर्चाएँ चल रही हैं और मुझे लगता है कि हम यह सुनिश्चित करने की इच्छाशक्ति के साथ आगे बढ़ रहे हैं कि कैसे इस मामले पर सबको साथ लेते हुए आगे बढ़ा जा सकता है.
कई देश जूझ रहे हैं लोन क्राइसेस से
इससे पहले सप्ताह में, आईएमएफ प्रमुख ने कहा था कि लगभग 15 प्रतिशत कम आय वाले देश लोन क्राइसेस से जूझ रहे हैं जबकि 45 प्रतिशत देश लोन संकट के हाई रिस्क में हैं. उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में, लगभग 25 प्रतिशत उच्च जोखिम में हैं और डिफ़ॉल्ट-जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव जेनेट येलेन ने भी कुछ दिनों पहले कहा था कि अमेरिका चीन सहित सभी द्विपक्षीय आधिकारिक लेनदारों को विकासशील देशों और संकट में उभरते बाजारों के लिए लोन ट्रीटमेंट की इस प्रोसेस में भाग लेने के लिए वो जोर देंगे.
तकनीकी प्रमुखों से मिलीं येलेन
इस बीच, येलेन ने FMCGB बैठक के मौके पर भारतीय और अमेरिकी तकनीकी कंपनियों के प्रमुखों के साथ नाश्ते पर बैठक करने के बाद कहा कि अमेरिका ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इनवेस्टमेंट के लिए अपनी 200 अरब डॉलर की साझेदारी के हिस्से के रूप में भारत में डिजिटल प्रौद्योगिकियों में निवेश कर रहा है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने जलवायु-स्मार्ट कृषि उत्पादन को सक्षम करने के लिए कृषि-प्रौद्योगिकी में और सूक्ष्म उद्यमियों के लिए डिजिटल भुगतान प्रणालियों में निवेश की घोषणा की है.
इंफोसिस के नंदन नीलेकणी, आईबीएम के संदीप पटेल, इंटेल के निव्रुति राय, विप्रो के ऋषद प्रेमजी, फॉक्सकॉन के जोश फोल्गर, जीई के विक्रम राय और एक्सेंचर की रेखा मेनन शामिल थे. नीलेकणि ने कहा कि इंफोसिस ने छह अलग-अलग अमेरिकी राज्यों में नए केंद्र खोले हैं और पिछले छह वर्षों में वहां 25,000 श्रमिकों को काम पर रखा है.
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