IAF ने फाइटर जेट खरीदने के अपने प्लान में किया बदलाव, जानें क्या होगा असर

भारतीय वायुसेना को अपने बेड़े में 114 फाइटर शामिल करने हैं. अब इस योजना में थोड़ा बदलाव किया गया है.

Last Modified:
Thursday, 23 June, 2022
फाइल फोटो

भारतीय वायुसेना द्वारा 114 फाइटर जेट्स खरीदने के लिए अपने 20 बिलियन डॉलर के मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोग्राम को विभिन्न खरीद मॉडल के तहत दो भागों में विभाजित किया जा रहा है. उच्च स्तरीय सैन्य सूत्रों ने यह जानकारी BW बिज़नेस वर्ल्ड को दी है.   

फ्लाईवे कंडीशन में मिलेंगे 18
संशोधित योजना के तहत, MRFA के पहले चरण में रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) की बाय ग्लोबल (भारत में निर्मित) श्रेणी के तहत 54 विदेशी जेट की खरीद शामिल होगी, जिसमें कॉन्ट्रैक्ट एक विदेशी OEM को दिया जाएगा. इनमें से 18 फ्लाईवे कंडीशन यानी कि उड़ने के लिए तैयार अवस्था में खरीदे जाएंगे, जबकि 36 का निर्माण OEM द्वारा चुने गए स्थानीय पार्टनर द्वारा भारत में किया जाएगा. यह पार्टनर प्राइवेट सेक्टर से होगा.

फेज-2 का बाय मॉडल  
IAF रक्षा अधिग्रहण परिषद से चरण- I के लिए Acceptance of Necessity (AON) पर जोर दे रही है और उसका लक्ष्य 2022 के अंत तक RFP जारी करने का है. सूत्रों के अनुसार, MRFA के चरण-2 को अभी प्रोग्राम नहीं बल्कि कांसेप्ट यानी अवधारणा कहना सही रहेगा. इसमें चरण-1 के लिए ओईएम द्वारा चुने गए इंडियन प्रोडक्शन पार्टनर से 60 जेट्स की खरीद शामिल है. चरण-2 का खरीद मॉडल बाय इंडियन होगा, जिसमें भारतीय उत्पादन एजेंसी कॉन्ट्रैक्ट जारी करने के लिए प्रमुख होगी.

ये कंपनियों पूल में
आधिकारिक सूत्रों ने अनिश्चितता और अस्पष्टता को स्वीकार करते हुए कहा कि चरण- 2 एक कांसेप्ट है जो सात या आठ साल बाद प्रोग्राम में तब्दील हो सकता है. IAF ने खरीद प्रक्रिया की योजना में संशोधन किया है. जेट्स की आवश्यकता को पूरा करने के लिए यूएस के बोइंग और लॉकहीड मार्टिन, फ्रांस के डसॉल्ट, यूरोप के यूरोफाइटर कंसोर्टियम, स्वीडन के साब और रूस के सुखोई और मिग IAF को सिलेक्शन पूल में रखा गया है.

OEMs में नहीं उत्साह
जिस OEM से BW ने बात की वो चरण-2 को लेकर ज्यादा उत्साहजनक नहीं है. OEM के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'फेज़-2 को लेकर अनिश्चितता है, जिसका मतलब है कि भारत में असेंबली लाइन स्थापित करने की लागत की भरपाई 114 के बजाये केवल 54 एयरक्राफ्ट से ही करनी होगी, उसमें से भी केवल 36 ही भारत में बनाए जाएंगे. इसकी वजह से लागत काफी बढ़ जाएगी और भारत में MRFA बेहद महंगा हो जाएगा. बिज़नेस की संभावना केवल चरण 1 में ही है, इसलिए 114 के बजाये हमें केवल 54 जेट्स के बारे में ही सोचना होगा’.   

MRFA प्रोग्राम में दूसरा बदलाव
MRFA प्रोग्राम में दूसरा बड़ा बदलाव है IAF द्वारा स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप (SP) मॉडल को नामंजूर करना. इसका सबसे बड़ा कारण है SP मॉडल के अंतर्गत किए गए नेवल यूटिलिटी हेलीकाप्टर (NUH) प्रोग्राम और प्रोजेक्ट 75 सबमरीन प्रोजेक्ट का असंतोषजनक अनुभव. NUH को लेकर अनुभव इसलिए अच्छा नहीं रहा क्योंकि लम्बे समय तक सरकार ये तय नहीं कर पाई कि जो मॉडल मिलिट्री प्लेटफ़ॉर्म के लिए प्राइवेट निर्माताओं के लिए बनाया गया था उसमें पब्लिक सेक्टर को आने देना चाहिए या नहीं. वहीं, प्रोजेक्ट 75 में OEM द्वारा इंडियन स्ट्रेटेजिक पार्टनर को टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर करने में हिचकिचाहट दिखाई गई थी.

कई गुना बढ़ेगी कॉस्ट 
एक दूसरे OEM ने कहा, ‘IAF अभी भी अपनी आवश्यकताओं को ठीक से परिभाषित नहीं कर पाई है और अपने ऑपरेटिंग मॉडल को तय करने में भी उसे परेशानी हो रही है. इसकी वजह से एक बिज़नेस मॉडल बनाने में अनिश्चितता का माहौल है’. उन्होंने आगे कहा कि आवश्यकता को विभाजित करके, और पहले चरण के बाद की अस्पष्टता की वजह से भारत के लिए इन जेट्स की लागत कई गुना बढ़ सकती है. 
 


रूस से तेल आयात में आई बड़ी गिरावट, अप्रैल में 20% टूटा भारत का खरीद आंकड़ा: रिपोर्ट

मार्च 2026 में भारत ने रूस से लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा था, लेकिन अप्रैल में यह आंकड़ा घटकर औसतन 15.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया.

Last Modified:
Tuesday, 28 April, 2026
BWHindia

मध्य पूर्व में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच भारत के लिए राहत माने जा रहे रूसी कच्चे तेल के आयात में अप्रैल महीने में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. मार्च में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची खरीद अब करीब 20 फीसदी घट गई है. इससे संकेत मिल रहे हैं कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता अब भारत की खरीद रणनीति को भी प्रभावित कर रही है.

मार्च के मुकाबले अप्रैल में कम हुआ आयात

मार्च 2026 में भारत ने रूस से लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा था. लेकिन अप्रैल में यह आंकड़ा घटकर औसतन 15.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया. यानी एक ही महीने में खरीद में तेज गिरावट दर्ज हुई है.

मार्च में भारत ने अवसर का फायदा उठाते हुए बड़ी मात्रा में तेल खरीदा था, क्योंकि उस समय मध्य पूर्व से सप्लाई बाधित होने लगी थी.

मार्च में क्यों बढ़ी थी खरीद

मार्च के दौरान अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट के कारण कई देशों को तेल आपूर्ति को लेकर चिंता थी. ऐसे समय भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से उपलब्ध फ्लोटिंग कार्गो यानी समुद्र में पहले से मौजूद तेल खेपों की खरीद तेज कर दी थी. इसके अलावा कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी राहत मिलने से भी रूसी तेल खरीदना आसान हुआ था.

अप्रैल में गिरावट की 3 बड़ी वजहें

विश्लेषकों के अनुसार अप्रैल में आयात घटने के पीछे तीन प्रमुख कारण रहे.

1. निर्यात टर्मिनल पर हमला: रूस के एक बड़े निर्यात टर्मिनल पर यूक्रेनी हमले के बाद लोडिंग प्रभावित हुई, जिससे सप्लाई धीमी पड़ी.

2. फ्लोटिंग कार्गो खत्म हुए: मार्च में जो तैयार तेल खेप उपलब्ध थीं, वे अप्रैल तक लगभग समाप्त हो गईं.

3. रिफाइनरियों में मेंटेनेंस: भारत की कुछ रिफाइनरियों में रखरखाव कार्य और शटडाउन के कारण मांग कम रही.

किस कंपनी ने खरीदा सबसे ज्यादा तेल

अप्रैल में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा. कंपनी ने कुल रूसी तेल खरीद का 42 फीसदी हिस्सा अकेले लिया.

1. इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन. 6.7 लाख बैरल प्रतिदिन
2. रिलायंस इंडस्ट्रीज. 2.63 लाख बैरल प्रतिदिन
3. भारत पेट्रोलियम. 1.36 लाख बैरल प्रतिदिन
4. हिंदुस्तान पेट्रोलियम. 83 हजार बैरल प्रतिदिन

नायरा एनर्जी की खरीद में भारी गिरावट

नायरा एनर्जी की खरीद मार्च के 3.15 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर अप्रैल में सिर्फ 28 हजार बैरल प्रतिदिन रह गई. कंपनी ने 9 अप्रैल से 35 दिन के मेंटेनेंस शटडाउन की शुरुआत की थी, जिसका असर खरीद पर पड़ा.

भारत के लिए क्यों जरूरी है रूसी तेल

रूस से मिलने वाला सस्ता कच्चा तेल भारत की ऊर्जा लागत नियंत्रित रखने में मदद करता है. इससे पेट्रोल-डीजल कीमतों और महंगाई पर दबाव कम होता है. अगर होर्मुज संकट लंबा खिंचता है और मध्य पूर्व से सप्लाई प्रभावित रहती है, तो भारत दोबारा रूसी तेल खरीद बढ़ा सकता है. हालांकि रूस पर प्रतिबंध, युद्ध और लॉजिस्टिक्स चुनौतियां भविष्य में जोखिम बनी रहेंगी.


वैश्विक सैन्य खर्च ने बनाया नया रिकॉर्ड, भारत ने रक्षा बजट में की 8.9 प्रतिशत बढ़ोतरी: रिपोर्ट

रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में सबसे अधिक सैन्य खर्च करने वाले पांच देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी और भारत शामिल रहे. इन पांच देशों का कुल रक्षा खर्च वैश्विक सैन्य व्यय का करीब 58 प्रतिशत हिस्सा रहा.

Last Modified:
Tuesday, 28 April, 2026
BWHindia

दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध और सुरक्षा चुनौतियों के बीच वर्ष 2025 में वैश्विक सैन्य खर्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. इसी दौरान भारत ने भी अपने रक्षा बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत का रक्षा खर्च 8.9 प्रतिशत बढ़कर 92.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया.

लगातार 11वें साल बढ़ा वैश्विक सैन्य खर्च

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 में दुनिया का कुल सैन्य खर्च बढ़कर 2,887 अरब डॉलर हो गया. यह लगातार 11वां वर्ष है जब रक्षा बजट में वृद्धि दर्ज की गई है. बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण देशों ने अपनी सैन्य ताकत मजबूत करने पर जोर दिया है.

रक्षा खर्च में शीर्ष पांच देशों का दबदबा

दुनिया में सबसे अधिक सैन्य खर्च करने वाले पांच देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन, रूस, जर्मनी और भारत शामिल रहे. इन पांच देशों का कुल रक्षा खर्च वैश्विक सैन्य व्यय का करीब 58 प्रतिशत हिस्सा रहा.

भारत-पाकिस्तान तनाव का असर

रिपोर्ट में कहा गया है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव और सैन्य गतिविधियों का असर भारत के रक्षा बजट पर पड़ा. इस दौरान लड़ाकू विमान, ड्रोन और मिसाइलों के इस्तेमाल जैसी घटनाओं ने सुरक्षा तैयारियों को और मजबूत करने की जरूरत बढ़ाई. वहीं पाकिस्तान ने भी अपना रक्षा बजट 11 प्रतिशत बढ़ाकर 11.9 अरब डॉलर कर दिया. इसके पीछे चीन से हथियार खरीद और पुराने रक्षा सौदों का भुगतान प्रमुख कारण बताया गया है.

यूरोप और एशिया में तेज बढ़ोतरी

रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप में सैन्य खर्च 14 प्रतिशत बढ़ा, जबकि एशिया और ओशिआनिया क्षेत्र में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. यूक्रेन युद्ध और नाटो देशों की बढ़ती सैन्य तैयारी इसके बड़े कारण माने जा रहे हैं.

अमेरिका और चीन का खर्च

अमेरिका का रक्षा खर्च 2025 में 7.5 प्रतिशत घटकर 954 अरब डॉलर रह गया. बताया गया कि यूक्रेन के लिए नई सहायता मंजूर नहीं होने का असर इसमें दिखा. दूसरी ओर चीन ने अपना रक्षा बजट 7.4 प्रतिशत बढ़ाकर 336 अरब डॉलर कर लिया. यह लगातार 31वां वर्ष है जब चीन के सैन्य खर्च में बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

आगे भी जारी रह सकता है रक्षा खर्च में इजाफा

विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया में बढ़ते संघर्ष, सीमाई विवाद और राजनीतिक अस्थिरता के चलते आने वाले वर्षों में भी सैन्य खर्च बढ़ने की संभावना बनी रहेगी. भारत सहित कई देश सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर लगातार निवेश कर रहे हैं.


Coal India के शेयर में जोरदार तेजी, मजबूत Q4 नतीजों और डिविडेंड से निवेशकों में जोश

पिछले 6 महीनों में स्टॉक करीब 20% चढ़ा है. वहीं 3 साल की अवधि में इसने निवेशकों का पैसा लगभग दोगुना कर दिया है, जिससे यह एक मजबूत लॉन्ग टर्म पिक बना हुआ है.

Last Modified:
Tuesday, 28 April, 2026
BWHindia

सरकारी कोयला कंपनी कोल इंडिया (Coal India Limited) के शेयरों में 28 अप्रैल को जोरदार तेजी देखने को मिली. बेहतर तिमाही नतीजों और फाइनल डिविडेंड के ऐलान के बाद निवेशकों की खरीदारी बढ़ी, जिससे स्टॉक में 4% से ज्यादा की उछाल दर्ज हुई.

शेयर में जोरदार तेजी, इंट्राडे में नया हाई

सोमवार के कारोबार में Coal India का शेयर BSE पर 473.90 रुपये तक पहुंच गया, जो करीब 4.6% की तेजी को दर्शाता है. खबर लिखे जाने के दौरान शेयर 3.94% की तेजी के साथ 470.35 रुपये पर कारोबार कर रहा था. एक दिन पहले घोषित Q4 नतीजों के बाद बाजार ने मंगलवार को सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और स्टॉक में मजबूत खरीदारी देखी गई.

Q4 में मुनाफा और रेवेन्यू दोनों में बढ़त

जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा 11.1% बढ़कर 10,839.18 करोड़ रुपये हो गया. पिछले साल इसी अवधि में यह 9,751.64 करोड़ रुपये था. इस दौरान ऑपरेशंस से रेवेन्यू बढ़कर 46,490.03 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि खर्च भी बढ़कर 37,107.07 करोड़ रुपये हो गया.

पूरे वित्त वर्ष में मुनाफे में गिरावट

हालांकि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का प्रदर्शन थोड़ा कमजोर रहा. सालाना शुद्ध मुनाफा घटकर 31,094.29 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले साल 35,505.79 करोड़ रुपये था. रेवेन्यू भी हल्की गिरावट के साथ 1,68,400.29 करोड़ रुपये रहा.

डिविडेंड का बड़ा ऐलान

कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 5.25 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड मंजूर किया है. इससे पहले कंपनी पहले ही दो अंतरिम डिविडेंड घोषित कर चुकी है. अंतिम मंजूरी अब वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों से ली जाएगी.

मजबूत मार्केट पोजिशन और योगदान

Coal India देश के कुल घरेलू कोयला उत्पादन का लगभग 80% और कोयले आधारित बिजली उत्पादन का करीब 75% हिस्सा देती है. कंपनी का कुल बिजली उत्पादन में भी महत्वपूर्ण योगदान है और यह देश की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा आधार बनी हुई है. इसका मार्केट कैप अब लगभग 3 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है.

लंबी अवधि में मजबूत रिटर्न

पिछले 6 महीनों में स्टॉक करीब 20% चढ़ा है. वहीं 3 साल की अवधि में इसने निवेशकों का पैसा लगभग दोगुना कर दिया है, जिससे यह एक मजबूत लॉन्ग टर्म पिक बना हुआ है.

बेहतर तिमाही नतीजे, मजबूत डिविडेंड और स्थिर बिजनेस मॉडल के चलते Coal India के शेयर में निवेशकों की रुचि बढ़ी है. हालांकि सालाना मुनाफे में हल्की गिरावट के बावजूद कंपनी का ऑपरेशनल प्रदर्शन बाजार में भरोसा बनाए हुए है.
 


चीन ने रोकी Meta की $2 अरब AI डील, Manus अधिग्रहण पर ब्रेक

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका चीन की एडवांस चिप्स और AI तकनीक तक पहुंच को सीमित करने के लिए निर्यात प्रतिबंध कड़े कर रहा है.

Last Modified:
Tuesday, 28 April, 2026
BWHindia

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते तकनीकी तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. चीन ने अमेरिकी टेक कंपनी मेटा (Meta Platforms) की लगभग 2 अरब डॉलर की AI स्टार्टअप खरीद डील को रोकने का आदेश दिया है. यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षेत्र में दोनों देशों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा को और गहरा करता है.

चीन ने रोकी AI डील

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन की नेशनल डेवलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन ने मेटा और चीनी AI स्टार्टअप मानुस (Manus) के बीच होने वाली डील को रद्द करने का निर्देश दिया है. यह अब तक के सबसे हाई-प्रोफाइल हस्तक्षेपों में से एक माना जा रहा है, खासकर क्रॉस-बॉर्डर AI डील्स के मामले में.

टेक्नोलॉजी और AI टैलेंट पर सख्त रुख

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका चीन की एडवांस चिप्स और AI तकनीक तक पहुंच को सीमित करने के लिए निर्यात प्रतिबंध कड़े कर रहा है. इसके जवाब में चीन भी अपने देश की उभरती AI तकनीक और टैलेंट को अमेरिकी कंपनियों के हाथों जाने से रोकने की कोशिश कर रहा है.

Meta की बड़ी AI रणनीति को झटका

मेटा जोकि फेसबुक की मूल कंपनी है, ने दिसंबर में Manus को 2 अरब डॉलर से अधिक में खरीदने पर सहमति जताई थी. कंपनी का लक्ष्य AI “एजेंट्स” विकसित करना था, जो बिना ज्यादा मानव हस्तक्षेप के जटिल काम कर सकें और पारंपरिक चैटबॉट्स से कहीं अधिक सक्षम हों.

रेगुलेटरी जांच और यात्रा प्रतिबंध

मार्च में इस डील पर जांच और तेज हो गई थी, जब मानुस के सीईओ शियाओ हॉंग (Xiao Hong) और मुख्य वैज्ञानिक जी यीचाओ (Ji Yichao) को चीन छोड़ने से रोक दिया गया था. अधिकारियों द्वारा डील की समीक्षा के चलते यह कदम उठाया गया था.

Manus और चीन की AI दौड़

मानुस ने पिछले साल तब सुर्खियां बटोरी थीं जब उसने खुद को दुनिया का पहला जनरल AI एजेंट बताया था. इसके बाद इसे चीन के उभरते डीपसीक (DeepSeek) जैसे AI प्रोजेक्ट्स का संभावित प्रतिद्वंदी माना जाने लगा था.

बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए Manus ने हाल ही में अपना मुख्यालय सिंगापुर स्थानांतरित कर दिया है. यह कदम उन चीनी टेक कंपनियों की बढ़ती प्रवृत्ति का हिस्सा है जो अमेरिका-चीन तनाव से बचने के लिए ऑफशोर बेस बना रही हैं.

इस फैसले ने अमेरिका और चीन के बीच पहले से जारी टेक और AI प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है. साथ ही यह संकेत भी देता है कि भविष्य में AI और हाई-टेक डील्स पर भू-राजनीतिक प्रभाव और बढ़ सकता है.
 


ऋण वृद्धि जमा से आगे निकली, मार्च के बाद मौसमी सुस्ती के बावजूद क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी

बैंकों की कुल जमा राशि 15 अप्रैल 2026 तक ₹256.5 लाख करोड़ रही, जो साल-दर-साल 12.2% की वृद्धि दर्शाती है. लेकिन तिमाही आधार पर जमा में ₹5.8 लाख करोड़ यानी 2.2% की गिरावट दर्ज की गई.

Last Modified:
Tuesday, 28 April, 2026
BWHindia

भारत में बैंकिंग सेक्टर की स्थिति मजबूत बनी हुई है, भले ही मार्च के बाद मौसमी सामान्यीकरण के चलते तिमाही आधार पर आंकड़ों में गिरावट देखी गई हो. एक रिपोर्ट के अनुसार, साल-दर-साल आधार पर बैंक क्रेडिट ग्रोथ अभी भी जमा वृद्धि से आगे चल रही है.

क्रेडिट ग्रोथ में सालाना मजबूती बरकरार

केयरएज (CareEdge Ratings) की रिपोर्ट के अनुसार, 15 अप्रैल 2026 तक कुल बैंक ऋण ₹209.2 लाख करोड़ तक पहुंच गया. यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 15.0% की वृद्धि दर्शाता है, जबकि पिछले वर्ष यह वृद्धि 10.3% थी. हालांकि तिमाही आधार पर देखें तो बैंक क्रेडिट में ₹4.40 लाख करोड़ यानी 2.1% की गिरावट दर्ज की गई. यह गिरावट मार्च के अंत में लोन ग्रोथ के तेज उछाल के बाद सामान्यीकरण का परिणाम है.

जमा में भी दिखा मौसमी असर

बैंकों की कुल जमा राशि 15 अप्रैल 2026 तक ₹256.5 लाख करोड़ रही, जो साल-दर-साल 12.2% की वृद्धि दर्शाती है. लेकिन तिमाही आधार पर जमा में ₹5.8 लाख करोड़ यानी 2.2% की गिरावट दर्ज की गई. यह गिरावट आम तौर पर मार्च के अंत में कॉरपोरेट और सरकारी फंड मूवमेंट के बाद देखी जाती है.

लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो बढ़ा

क्रेडिट ग्रोथ जमा से तेज रहने के कारण लोन-टू-डिपॉजिट रेशियो बढ़कर 81.6% हो गया, जो पिछले फोर्टनाइट में 81.4% था. हालांकि यह मार्च के मध्य के 83% के उच्च स्तर से नीचे है, लेकिन सालाना आधार पर अभी भी ऊंचा बना हुआ है.

रिटेल और MSME लोन से मिला सपोर्ट

रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रेडिट ग्रोथ को मुख्य रूप से रिटेल लोन से सपोर्ट मिला है, खासकर गोल्ड और वाहन ऋणों से. इसके अलावा MSME सेक्टर में फाइनेंसिंग, NBFC को बैंक एक्सपोजर और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में भी स्थिर वृद्धि देखने को मिली है.

जमा संरचना में बदलाव

टाइम डिपॉजिट, जो कुल जमा का 87.4% हिस्सा है, 10.9% बढ़कर ₹224.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया. वहीं, डिमांड डिपॉजिट में तेज उछाल देखा गया और यह 22.1% बढ़कर एक साल पहले के 7.3% की तुलना में काफी मजबूत रहा.

बाजार में लिक्विडिटी स्थिति स्थिर

मनी मार्केट में वेटेड एवरेज कॉल रेट 5.08% पर रहा, जो रेपो रेट से नीचे है. इससे संकेत मिलता है कि सिस्टम में लिक्विडिटी की स्थिति फिलहाल आरामदायक बनी हुई है.

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च के बाद बैंक बैलेंस शीट में मौसमी नरमी दिख रही है, लेकिन मूल रूप से क्रेडिट ग्रोथ अभी भी जमा से तेज बनी हुई है. इससे संकेत मिलता है कि नए वित्तीय वर्ष में भी बैंकिंग सिस्टम में लोन डिमांड मजबूत बनी रह सकती है.
 


रुपये की वैश्विक चाल पर RBI की कड़ी नजर: विदेशी सौदों की होगी मॉनिटरिंग, 2027 से लागू होंगे नए नियम

रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी केवल भारतीय बैंकों तक सीमित नहीं रहेगी. विदेशी शाखाओं और सहयोगी संस्थाओं को भी सीधे डेटा देने की अनुमति दी गई है.

Last Modified:
Tuesday, 28 April, 2026
BWHindia

भारत की मुद्रा को वैश्विक बाजारों में अधिक स्थिर और पारदर्शी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है. अब सिर्फ देश के भीतर ही नहीं, बल्कि विदेशों में होने वाले रुपये से जुड़े सौदों पर भी नजर रखी जाएगी. जुलाई 2027 से लागू होने वाले नए नियम फॉरेक्स मार्केट की तस्वीर बदल सकते हैं.

ऑफशोर डील्स पर भी होगी निगरानी

अब तक RBI की निगरानी मुख्य रूप से घरेलू बाजार तक सीमित थी, लेकिन नए नियमों के तहत विदेशों में होने वाले रुपये-आधारित डेरिवेटिव सौदे भी दायरे में आ जाएंगे. खासतौर पर नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) जैसे सेगमेंट, जहां बड़े स्तर पर ट्रेडिंग होती है, अब रेगुलेटरी निगाह में रहेंगे. इससे रुपये की वास्तविक कीमत तय करने में मदद मिलेगी और विदेशी बाजारों के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा.

बैंकों को देनी होगी हर बड़ी डील की जानकारी

RBI ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे अपने ग्रुप या विदेशी शाखाओं द्वारा किए गए हर महत्वपूर्ण डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की जानकारी साझा करें. इसमें कॉन्ट्रैक्ट की नॉशनल वैल्यू, मैच्योरिटी अवधि, काउंटरपार्टी की जानकारी और करेंसी स्ट्रक्चर जैसी अहम जानकारियां शामिल होंगी. इस विस्तृत रिपोर्टिंग से यह स्पष्ट हो सकेगा कि रुपये से जुड़ा जोखिम कहां पैदा हो रहा है और कैसे फैल रहा है.

छोटे सौदों को राहत

नए नियमों में कुछ राहत भी दी गई है. 1 मिलियन डॉलर से कम के सौदों को रिपोर्टिंग से बाहर रखा गया है और बैक-टू-बैक ट्रांजैक्शंस को भी छूट दी गई है. यह कदम बैंकों पर अतिरिक्त बोझ को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है.

विदेशी संस्थाओं की भी होगी भागीदारी

रिपोर्टिंग की जिम्मेदारी केवल भारतीय बैंकों तक सीमित नहीं रहेगी. विदेशी शाखाओं और सहयोगी संस्थाओं को भी सीधे डेटा देने की अनुमति दी गई है. इससे ऑफशोर बाजार की गतिविधियों को बेहतर तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा और पूरी प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी.

चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे नियम

RBI ने इन नियमों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई है. जुलाई 2027 तक कुल FX डेरिवेटिव ट्रांजैक्शन का 70% डेटा रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा, जनवरी 2028 तक यह 80% तक बढ़ेगा और जुलाई 2028 तक इसे 100% कर दिया जाएगा. इस धीरे-धीरे लागू होने वाली प्रक्रिया से सिस्टम को नए ढांचे में ढलने का पर्याप्त समय मिलेगा.

विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक रुपये की कीमत का बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों में तय होता रहा है, जिससे घरेलू नीतियों का प्रभाव सीमित रह जाता था. नए नियम इस अंतर को कम करेंगे और ऑनशोर व ऑफशोर बाजारों के बीच संतुलन स्थापित करने में मदद करेंगे. कुल मिलाकर यह कदम रुपये की स्थिरता, पारदर्शिता और वैश्विक विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है.
 


विदेश में मिला ‘काला सोना’: ऑयल इंडिया की लीबिया में बड़ी खोज, भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा बूस्ट

ऑयल इंडिया ने यह महत्वपूर्ण खोज लीबिया के गदामेस बेसिन में की है, जो हाइड्रोकार्बन संसाधनों के लिए जाना जाता है. कंपनी ने ऑनशोर एक्सप्लोरेशन ब्लॉक 95/96 में ड्रिलिंग के दौरान तेल और गैस के नए भंडार का पता लगाया.

Last Modified:
Tuesday, 28 April, 2026
BWHindia

ऊर्जा के मोर्चे पर भारत को बड़ी अंतरराष्ट्रीय कामयाबी मिली है. दरअसल, ऑयल इंडिया (Oil India Limited) ने अफ्रीकी देश लीबिया (Libya) में तेल और गैस का नया भंडार खोज निकाला है. यह खोज ऐसे समय में सामने आई है जब भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है.

लीबिया के रेगिस्तान में मिला तेल-गैस का भंडार

ऑयल इंडिया ने यह महत्वपूर्ण खोज लीबिया के गदामेस बेसिन में की है, जो हाइड्रोकार्बन संसाधनों के लिए जाना जाता है. कंपनी ने ऑनशोर एक्सप्लोरेशन ब्लॉक 95/96 में ड्रिलिंग के दौरान तेल और गैस के नए भंडार का पता लगाया. इस प्रोजेक्ट में इंडिया ऑयल कॉर्पोरेशन (Indian Oil Corporation) के साथ मिलकर एक भारतीय कंसोर्टियम काम कर रहा है, जिसमें ऑयल इंडिया की 25% हिस्सेदारी है. करीब 6,630 वर्ग किलोमीटर के इस बड़े क्षेत्र का संचालन SIPEX कर रही है.

छठे कुएं ने दिलाई बड़ी सफलता

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के तहत कुल 8 खोजी कुओं की खुदाई की योजना है. इससे पहले 5 कुओं की ड्रिलिंग हो चुकी थी, जिनमें से 4 में 2012–2014 के बीच तेल और गैस के संकेत मिले थे.हाल ही में छठे कुएं (A1-96/02) की ड्रिलिंग के दौरान एक नए भंडार की खोज हुई है, जिसने इस पूरे प्रोजेक्ट को नई रफ्तार दे दी है. शुरुआती परीक्षणों के बाद लीबिया की नेशनल ऑयल कॉर्पोरेशन (National Oil Corporation) ने इसे इस ब्लॉक की पांचवीं बड़ी खोज घोषित किया है.

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा सहारा

यह खोज भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है. देश अभी भी अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. ऐसे में विदेशी जमीन पर भारतीय कंपनियों द्वारा संसाधनों की खोज भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव का मजबूत आधार तैयार करती है. इस तरह की परियोजनाएं भारत को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में मदद करती हैं.

शेयर बाजार में भी दिखा असर

इस खबर का असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला. सोमवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर ऑयल इंडिया का शेयर हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ. कारोबार के अंत में शेयर 2.50 रुपये यानी 0.53% चढ़कर 476.20 रुपये पर पहुंच गया. पिछले पांच कारोबारी सत्रों में इसमें करीब 1.05% की तेजी दर्ज की गई है.

लीबिया में यह नई खोज न सिर्फ ऑयल इंडिया के वैश्विक विस्तार को मजबूत करती है, बल्कि भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति को भी मजबूती देती है. आने वाले समय में इस ब्लॉक में और खोज व उत्पादन गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है, जिससे भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजार में बेहतर स्थिति हासिल करने में मदद मिल सकती है.
 

TAGS bw-hindi

भारत के डेटा सेक्टर में बड़ा दांव: मुकेश अंबानी का 1.6 लाख करोड़ का निवेश

यह प्रोजेक्ट भारत का सबसे बड़ा डेटा सेंटर क्लस्टर होगा, जो आकार में Google के 1 गीगावाट प्रोजेक्ट से भी बड़ा बताया जा रहा है. राज्य सरकार की निवेश प्रोत्साहन समिति से इसे मंजूरी मिल चुकी है.

Last Modified:
Tuesday, 28 April, 2026
BWHindia

डिजिटल और AI की तेज होती दौड़ में भारत को वैश्विक ताकत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है. मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में 1.6 लाख करोड़ रुपये का निवेश कर देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर क्लस्टर स्थापित करने जा रही है, जो भारत के डेटा इकोसिस्टम को नई ऊंचाई दे सकता है.

मेगा निवेश से बदलेगा डिजिटल परिदृश्य

भारत के डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज ने विशाखापट्टनम में गीगा-स्केल AI डेटा सेंटर क्लस्टर बनाने की योजना तैयार की है. इस प्रोजेक्ट के तहत करीब 1.5 गीगावाट क्षमता का डेटा सेंटर और कैप्टिव सोलर-बैटरी स्टोरेज सिस्टम विकसित किया जाएगा. यह निवेश तेजी से बढ़ती AI, क्लाउड और डिजिटल सेवाओं की मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा और भारत को ग्लोबल डेटा हब बनने की दिशा में आगे बढ़ाएगा.

देश का सबसे बड़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट

यह प्रोजेक्ट भारत का सबसे बड़ा डेटा सेंटर क्लस्टर होगा, जो आकार में Google के 1 गीगावाट प्रोजेक्ट से भी बड़ा बताया जा रहा है. राज्य सरकार की निवेश प्रोत्साहन समिति से इसे मंजूरी मिल चुकी है, जिससे आंध्र प्रदेश डेटा सेंटर हब बनने के अपने लक्ष्य के और करीब पहुंच गया है.

तीन चरणों में होगा विकास

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को तीन चरणों में विकसित किया जाएगा.

1. पहले चरण में पोलिपल्ली गांव में 500 मेगावाट का डेटा सेंटर बनाया जाएगा, जो अक्टूबर 2028 तक शुरू हो सकता है.
2. दूसरे चरण में 1 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता 2030 तक जोड़ी जाएगी.
3. पूरा क्लस्टर भोगापुरम के नए एयरपोर्ट के पास स्थापित होगा.

जमीन, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा फोकस

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी ने इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 935 एकड़ जमीन की मांग की है. इसमें डेटा सेंटर के साथ केबल लैंडिंग स्टेशन और डीसैलिनेशन प्लांट भी शामिल होंगे. कुल निवेश में से लगभग 1.08 लाख करोड़ रुपये डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे, जबकि करीब 51,300 करोड़ रुपये नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं पर लगाए जाएंगे.

विशाखापट्टनम बन रहा डेटा हब

विशाखापट्टनम तेजी से डेटा सेंटर निवेश का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है. यहां Sify Technologies, Digital Connexion और Anant Raj जैसी कंपनियां भी बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं. राज्य सरकार की डेटा सेंटर पॉलिसी 4.0 के तहत कंपनियों को GST रिइम्बर्समेंट, कैपिटल सब्सिडी और डायरेक्ट पावर परचेज जैसे कई प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं.

रोजगार और AI इकोनॉमी को मिलेगा बूस्ट

यह मेगा प्रोजेक्ट न सिर्फ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा. साथ ही AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा सर्विसेज के क्षेत्र में तेजी आएगी. भारत में बढ़ती डेटा खपत और डिजिटल सेवाओं की मांग को देखते हुए, यह निवेश देश को वैश्विक डेटा और AI हब बनाने की दिशा में एक गेमचेंजर साबित हो सकता है.
 

TAGS bw-hindi

बाजार में वापसी: सेंसेक्स-निफ्टी में उछाल, आज इन स्टॉक्स में दिखेगा एक्शन

सोमवार को BSE बीएसई सेंसेक्स 639.42 अंक की बढ़त के साथ 77,303.63 पर बंद हुआ. वहीं, NSE इंडेक्स 194.75 अंक चढ़कर 24,092.70 के स्तर पर पहुंच गया.

Last Modified:
Tuesday, 28 April, 2026
BWHindia

वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने राहत की सांस ली है. निवेशकों की सतर्कता के बावजूद पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेतों ने बाजार में भरोसा लौटाया, जिससे हफ्ते की शुरुआत सकारात्मक रही और प्रमुख सूचकांकों में मजबूत रिकवरी देखने को मिली.

लगातार तीन कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद सोमवार को शेयर बाजार में जोरदार वापसी हुई. दिनभर के कारोबार के दौरान बाजार में खरीदारी हावी रही, जिससे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) बीएसई सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक उछल गया. अंत में सेंसेक्स 639.42 अंक यानी 0.83% की बढ़त के साथ 77,303.63 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) इंडेक्स 194.75 अंक यानी 0.81% चढ़कर 24,092.70 के स्तर पर पहुंच गया.

प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन 
सेंसेक्स के 30 में से 22 शेयर हरे निशान में बंद हुए, जो बाजार की मजबूती को दर्शाता है. फार्मा सेक्टर में जबरदस्त तेजी देखने को मिली, जहां सन फार्मा के शेयर करीब 7% तक उछल गए. इसके अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, अडानी पोर्ट्स, एनटीपीसी, टेक महिंद्रा, टीसीएस, एचसीएल टेक और महिंद्रा एंड महिंद्रा में भी अच्छी खरीदारी रही. हालांकि, कुछ शेयरों में दबाव बना रहा. एक्सिस बैंक, बीईएल, ट्रेंट, आईसीआईसीआई बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अल्ट्राटेक सीमेंट और बजाज फिनसर्व गिरावट के साथ बंद हुए. मुद्रा बाजार में भी हल्की मजबूती दिखी और रुपया डॉलर के मुकाबले 0.06% चढ़कर 94.19 पर बंद हुआ.

ब्रॉडर मार्केट में बेहतर प्रदर्शन
बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले व्यापक बाजार में ज्यादा तेजी देखने को मिली. निफ्टी मिडकैप 1.47% और स्मॉलकैप 1.90% तक उछले. सेक्टर के लिहाज से फार्मा, रियल्टी और आईटी शेयरों में मजबूती रही, जबकि प्राइवेट बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर दबाव में रहे. इस बीच, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रही. ब्रेंट क्रूड 2.30% चढ़कर 107.80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो आगे बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकता है.

आज इन शेयरों पर रहेगी नजर
आज बाजार में कई कंपनियों के तिमाही नतीजे और कॉर्पोरेट अपडेट्स के चलते हलचल देखने को मिल सकती है. मारुति सुजुकी, बंधन बैंक, कास्ट्रोल इंडिया, सीएट, डालमिया भारत, पिरामल फार्मा, आरईसी और स्टार हेल्थ जैसी कंपनियां अपने नतीजे जारी करेंगी.

इसके अलावा कुछ अहम कॉर्पोरेट गतिविधियां भी फोकस में रहेंगी. समवर्धना मदरसन इंटरनेशनल जापान की कंपनी से हिस्सेदारी खरीद रही है. रेलटेल को 145.5 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है. महिंद्रा एंड महिंद्रा ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, जिससे कंपनी की पकड़ मजबूत होगी. मेटास्पोर्ट्स इंटरएक्टिव ने 20 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है, जिससे उसके विस्तार को गति मिलेगी.

बाजार में आई यह तेजी फिलहाल राहत का संकेत है, लेकिन वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की कीमतें और कंपनियों के नतीजे आगे की दिशा तय करेंगे. निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रहने और खबरों पर नजर बनाए रखने का है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)

TAGS bw-hindi

MobiKwik को RBI से NBFC लाइसेंस, शेयरों में की जोरदार छलांग

नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस मिलने के बाद मोबिक्विक अब अपनी फाइनेंशियल सर्विसेज को बड़े स्तर पर विस्तार दे सकेगी.

Last Modified:
Monday, 27 April, 2026
BWHindia

फिनटेक कंपनी वन मोबिक्विक (One MobiKwik Systems) के लिए बड़ी खबर सामने आई है. कंपनी को भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) से NBFC लाइसेंस मिल गया है. इस ऐलान के बाद शेयर बाजार में कंपनी के स्टॉक में जबरदस्त तेजी देखने को मिली और यह करीब 16% तक उछल गया. अब कंपनी लोन और क्रेडिट बिजनेस में सीधे उतरने की तैयारी में है.

NBFC लाइसेंस मिलने का क्या मतलब

नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस मिलने के बाद मोबिक्विक अब अपनी फाइनेंशियल सर्विसेज को बड़े स्तर पर विस्तार दे सकेगी. कंपनी “मोबिक्विक फाइनेंशियल सर्विसेज” के जरिए ग्राहकों और छोटे कारोबारियों को सीधे लोन ऑफर कर पाएगी. इसमें सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड दोनों तरह के लोन शामिल होंगे.

लेंडिंग बिजनेस में मिलेगा बड़ा फायदा

अब तक मोबिक्विक को लेंडिंग के लिए पार्टनर संस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन NBFC लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी अपने क्रेडिट ऑपरेशंस को इन-हाउस ला सकेगी. इससे कंपनी का मार्जिन बेहतर होगा और लोन प्रोडक्ट्स को तेजी से लॉन्च करने में मदद मिलेगी. साथ ही ग्राहकों को अधिक कस्टमाइज्ड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स भी मिल सकेंगे.

शेयर बाजार में दिखा जबरदस्त असर

इस बड़ी खबर का सीधा असर शेयर बाजार में देखने को मिला. बीएसई पर कंपनी का शेयर 203 रुपये के आसपास खुला और कारोबार के दौरान उछलकर 243 रुपये तक पहुंच गया और बाद में शेयर में थोड़ी गिरावट देखी गई और यह 11. 26 प्रतिशत की तेजी के साथ 224.94 रुपये पर बंद हुआ. पिछले सत्र में यह करीब 202.55 रुपये पर बंद हुआ था. स्टॉक का 52 हफ्तों का उच्च स्तर 333.95 रुपये और निचला स्तर 151.95 रुपये रहा है.

कब शुरू होगा लेंडिंग ऑपरेशन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी को कुछ जरूरी शर्तें पूरी करने के बाद केंद्रीय बैंक से सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन (CoR) मिलेगा. इसके बाद ही मोबिक्विक आधिकारिक तौर पर नॉन-बैंक लेंडिंग ऑपरेशंस शुरू कर पाएगी.

डिजिटल वॉलेट से फुल-फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म की ओर

मोबिक्विक पहले से डिजिटल वॉलेट और पेमेंट सर्विसेज में सक्रिय है. इसके अलावा कंपनी क्रेडिट और निवेश जैसे सेगमेंट में भी धीरे-धीरे अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है. NBFC लाइसेंस मिलने के बाद कंपनी अब खुद को एक फुल-स्टैक फाइनेंशियल सर्विस प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगी.

मोबिक्विक के लिए NBFC लाइसेंस एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है. इससे कंपनी के बिजनेस मॉडल, रेवेन्यू और ग्रोथ संभावनाओं को नई मजबूती मिलेगी. बाजार की सकारात्मक प्रतिक्रिया भी इसी भरोसे को दर्शाती है.