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YearEnder नई उम्‍मीदों बीच MSME सेक्‍टर के लिए कैसा रहा वर्ष 2022

MSME को भारत की अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत स्‍तंभ के तौर पर देखा जाता है. क्योंकि यह रोजगार और इनकम ग्रोथ में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

MSME सेक्टर के लिए वर्ष 2022 की शुरुआत यूनियन बजट 2022 से उम्मीदों के साथ शुरू हुई थी, क्योंकि यह इंडस्ट्री कोविड-19 की बुरी लहर के बाद रिकवर कर रही थी. कोविड-19 ने छोटे व्यवसाय के लिए अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया था. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बजट में उद्योग को भारत के आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में दिखाया गया जो कुल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर विनिर्माण उत्पादन का लगभग 45% है.मौजूदा समय में भारत में 63 मिलियन एमएसएमई देश के सकल घरेलू उत्पाद के 30% के बराबर योगदान देते हैं. हालांकि जैसे-जैसे वर्ष समाप्त हुआ तो अलग-अलग विशेषज्ञों की 2022 को लेकर अलग-अलग तरह की राय सामने आई है.  कुछ का कहना है कि ये भारत में डिजिटल ऋण देने के लिए एक उल्लेखनीय वर्ष था जबकि कुछ अन्य कहते हैं कि ये साल इस सेक्टर के लिए मिलाजुला साल रहा है. लेकिन एक बात जो सभी के बीच में कॉमन है वह यह है कि पिछले वर्ष में इस सेक्टर में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखे हैं.

Niro कंपनी के को फाउंडर एंड सीईओ संकल्प माथुर ने कहा की 2022 की शुरुआत में हमने देखा कि इंडस्ट्री के डिजिटल टेक्नोलॉजी को अडॉप्ट करने में 50% तक की वृद्धि देखी गई. इससे भारत में लगातार बढ़ते इंटरनेट का भी एक बड़ा योगदान रहा. इसके चलते देश फाइनेंशियल इंक्लूजन की तरफ आगे बढ़ता हुआ भी दिखाई दिया. बावजूद इन प्रयासों के अभी भी भारत के टियर दो शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में समान रूप से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बीच अंतर पाटने के लिए संघर्ष कर रहा है.
साथ ही वर्ष 2022 केंद्र सरकार द्वारा घोषित कई नीतिगत उपायों का वर्ष भी रहा. इनमें से कुछ योजनाएं पहले से मौजूदा योजनाओं का विस्तार थी जबकि कुछ नई थी. मोदी सरकार ने अपने बजट भाषण में यह घोषणा की कि 1,30,0000 एमएसएमई को इमरजेंसी क्रेडिट लिंक गारंटी स्कीम के तहत अतिरिक्त धन मुहैया कराया जाएगा, जिसे उन्होंने मार्च 2023 तक बढ़ा दिया. इस बजट भाषण में यह भी कहा गया कि अगले 5 वर्षों में सरकार 6000 करोड़  रुपए रेटिंग स्कीम को लागू किया जाएगा. यही नहीं सरकार ने इसके दायरे को बढ़ाते हुए 50 हजार करोड रुपए से बढ़ाकर 5 लाख करोड़ रुपए तक हो गया.

राष्ट्रीय MSME पॉलिसी
Indifi Technologies के सीईओ आलोक मित्तल कहते हैं कि जबकि भारत के पास अभी कोई MSME पॉलिसी नहीं है ऐसे में सरकार फरवरी में अपने बजट के साथ कई सारे प्रपोजल लेकर आई, जिसमें क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने और क्लस्टर डेवलपमेंट, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन और MSME प्रोडक्ट के प्रति और मेंट पर जोर देने की बात कही गई. इसमें भारतीय बाजार के लचीले पन के कारण सभी व्यापारिक क्षेत्रों ने अच्छा व्यापार भी किया और बाद में विकास भी किया. इस क्षेत्र में विकास और विस्तार पूंजी की आवश्यकता के साथ आया, जिसके कारण इस क्षेत्र में टेक्नोलॉजी अपग्रेड हुई और डिजिटल क्षमता है लगातार बढ़ती रही. इसके कारण पहली बार ऐसा हुआ कि डिजिटल क्रेडिट किसी विदेशी कॉन्‍सेप्‍ट से बाहर निकल कर वास्तविकता में व्यापार और उद्योग को आगे बढ़ाने में मददगार साबित हुआ है.

RAMP स्कीम
मार्च में केंद्रीय कैबिनेट ने MSME सेक्टर की परफॉर्मेंस को सुधारने के लिए 6062.45 करोड रुपए अप्रूव किए. इस स्कीम का कुल बजट 6062.45 करोड था, जिसमें 3750 करोड़ रुपये का विश्व बैंक ने मंजूर किया जबकि बाकी 2312.45 करोड केंद्र सरकार ने अपनी तरफ से लगाने का फैसला किया.

PMEGP एक्सटेंशन
मई महीने में केंद्र सरकार ने एंप्लॉयमेंट जनरेशन प्रोग्राम के तहत 15 वे वित्त कमीशन के माध्यम से 2021-22 से लेकर 2025-26 तक कुल 13554.42 करोड़ रुपए के कार्यक्रम का ऐलान किया. इस इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए इस प्रोजेक्ट की मौजूदा राशि 25 लाख करोड़ से बढ़कर 50,00000 करोड़ तक पहुंच गई, जिसका फायदा अब 10 लाख से बढ़कर 20 लाख यूनिट तक पहुंच गया.

नॉन टैक्‍स बेनीफिट एक्‍सटेंशन 
अक्टूबर में, केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) ने कहा कि अगर उनकी श्रेणी में ऊपर की ओर परिवर्तन होता है पंजीकृत MSME पिछले वर्ष की तुलना में तीन साल की विस्तारित अवधि के लिए नॉन क्रेडिट बेनीफिट का लाभ उठा सकते हैं. मंत्रालय ने कहा कि यह निर्णय MSME हितधारकों के साथ उचित विचार-विमर्श के बाद लिया गया है. जोकि आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप है. 
विनोद कुमार अध्‍यक्ष MSME फोरम ने कहा कि नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी और ऑनलाइन सेलर्स के लिए जीएसटी समानता ने उन लोगों को बहुत सक्षम किया है जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं. जबकि 2023 में आर्थिक मंदी की भविष्यवाणी की गई है, जिसे भारत के MSME सेक्‍टर के लिए एक बड़े अवसर के तौर पर देखा जा रहा है. एक अनुकूल विदेश व्यापार नीति जो भारत के "छोटे व्यवसायों को पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ ई-कॉमर्स के माध्यम से क्‍वॉलिटी प्रोडक्‍ट के सामान निर्यात करने में सक्षम बनाता है. 

राष्‍ट्रीय लॉजिस्टिक पॉलिसी 
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई, नेशनल लॉजिस्टिक पॉलिसी देश की लॉजिस्टिक क्षमता से देश के लॉजिस्टिक सेक्‍टर में बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे पूरे देश में कच्‍चे माल के सुचारू लाने ले जाने में आसानी होगी. इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य लॉजिस्टिक कॉस्‍ट को भारत के सकल घरेलू उत्पाद के मौजूदा 13-14 प्रतिशत से घटाकर विश्‍व स्‍तर के 7 प्रतिशत लाना है. माना ये भी जा रहा है कि ये पॉलिसी देश के MSME सेक्‍टर के लिए मददगार साबित होगी और क्रॉस बॉर्डर व्‍यापार को बढ़ाने में मददगार साबित होगी.


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