127 साल पुराने गोदरेज समूह का हाल ही में बंटवारा हो गया है. समूह की प्रॉपर्टी को दो हिस्सों में बांटा गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
गोदरेज समूह (Godrej Group) का हाल ही में बंटवारा हुआ है. 27 साल पुराने गोदरेज समूह को संस्थापक परिवार की दो शाखाओं के बीच बांटा गया है. एक हिस्सा 82 वर्षीय आदि गोदरेज और उनके 73 साल के भाई नादिर को मिलेगा. दूसरा हिस्सा उनके चचेरे भाई-बहन जमशेद गोदरेज और स्मिता गोदरेज को मिलेगा. गोदरेज समूह की 5 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्टेड हैं. जबकि गोदरेज एंड बॉयस फिलहाल बाजार में सूचीबद्ध नहीं है. बंटवारे की खबर का असर समूह की लिस्टेड कंपनियों पर भी पड़ा है.
इनमें आई इतनी गिरावट
समूह की प्रमुख कंपनी Godrej Industries को शायद बंटवारा रास नहीं आया है. कंपनी के शेयरों में आज जबरदस्त गिरावट देखने को मिली है. शुरुआती कारोबार में कंपनी के शेयर सात प्रतिशत से ज्यादा लुढ़क चुके हैं. खबर लिखे जाने तक गोदरेज इंडस्ट्रीज के शेयर करीबी 68 रुपए के नुकसान के साथ 892.90 रुपए पर कारोबार कर रहे थे. जबकि बीते 5 सत्रों में यह शेयर 4.67% और इस साल अब तक 15.01% का रिटर्न दे चुका है. इसी तरह, Godrej Properties के शेयरों में भी गिरावट आई है. आज दोपहर साढ़े 12 बजे तक यह 4 प्रतिशत से अधिक की नरमी के साथ 2,520.60 रुपए पर पहुंच गए थे. इस साल अब तक ये शेयर 25.90% चढ़ चुका है.
इन्हें मिला बंटवारे से बूस्ट
गोदरेज समूह की Astec LifeSciences भी स्टॉक मार्केट में लाल निशान पर कारोबार कर रही है. कंपनी के शेयर करीब 3% की गिरावट के साथ 1,253.50 रुपए पर कारोबार कर रहे हैं. इस साल अब तक इस शेयर ने अपने निवेशकों को 16.28% का रिटर्न दिया है. इसका 52 वीक का हाई लेवल 1,541.65 रुपए है. हालांकि, समूह की दो कंपनियों को बंटवारे से बूस्ट मिलता नजर आ रहा है. Godrej Consumer Products के शेयरों में अब तक 1.01% की तेजी आ चुकी है. 1,231.80 रुपए के भाव वाले इस शेयर ने पिछले पांच सत्रों में 2 प्रतिशत से अधिक की छलांग लगाई है. इसी तरह, Godrej Agrovet के शेयर भी मजबूती के साथ कारोबार कर रहे हैं. खबर लिखे जाने तक यह शेयर 3.65% चढ़कर 564 रुपए पर पहुंच गया था.
यह अभी भी एक सवाल है
बंटवारे के तहत आदि गोदरेज और नादिर के हिस्से में जहां गोदरेज इंडस्ट्रीज आई है. वहीं, आदि गोदरेज के चचेरे भाई-बहन जमशेद और स्मिता को नॉन-लिस्टेड कंपनी गोदरेज एंड बॉयस का मालिकाना हक मिला है. जमशेद और स्मिता के हिस्से में गोदरेज एंड बॉयस से जुड़ी कंपनियों के साथ ही मुंबई में एक प्लॉट और दूसरी महत्वपूर्ण संपत्ति भी मिलेगी. गोदरेज ग्रुप का कारोबार साबुन, होम अप्लायंस से लेकर रियल एएस्टेट तक फैला हुआ है. हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि गोदरेज एंड बॉयस के तहत समूह की 3000 करोड़ रुपए से अधिक की रियल एस्टेट संपत्ति को दोनों पक्षों के बीच कैसे विभाजित किया जाएगा.
रेडिफ्यूजन ब्रांड सॉल्यूशंस का प्रतिनिधित्व करने वाले डॉ. संदीप गोयल AAAI के अध्यक्ष हैं, जबकि अनदर आइडिया के जयदीप गांधी उपाध्यक्ष के रूप में बोर्ड में शामिल हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने 2026-27 के लिए अपने नए बोर्ड की घोषणा की है. इसमें स्वतंत्र विज्ञापन एजेंसियों, क्षेत्रीय कंपनियों, क्रिएटिव विशेषज्ञों और प्रमुख विज्ञापन एवं मीडिया नेटवर्क के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है. एसोसिएशन का उद्देश्य विज्ञापन उद्योग में विभिन्न आकार और विशेषज्ञता वाली एजेंसियों को अधिक प्रतिनिधित्व देना और उनके बीच सहयोग को मजबूत करना है. डॉ. संदीप गोयल को अध्यक्ष और जयदीप गांधी को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है.
संदीप गोयल अध्यक्ष, जयदीप गांधी उपाध्यक्ष
रेडिफ्यूजन ब्रांड सॉल्यूशंस का प्रतिनिधित्व करने वाले डॉ. संदीप गोयल AAAI के अध्यक्ष हैं, जबकि अनदर आइडिया के जयदीप गांधी उपाध्यक्ष के रूप में बोर्ड में शामिल हैं. नए बोर्ड में स्वतंत्र एजेंसियों और क्षेत्रीय विज्ञापन कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों को जगह दी गई है, ताकि उद्योग से जुड़े अलग-अलग दृष्टिकोणों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जा सके.
स्वतंत्र एजेंसियों की ओर से रतन बत्रा प्राइवेट लिमिटेड के पुनीत बत्रा, पैम एडवरटाइजिंग के सुनील छाबड़ा, 3 ब्रदर्स एंड फिल्स के हेमेंद्र पारेख, नवनीतलाल एंड कंपनी के देवांग एम. गांधी और सिचुएशंस एडवरटाइजिंग एंड मार्केटिंग के अंजन चटर्जी बोर्ड में शामिल हैं.
क्षेत्रीय विज्ञापन कारोबार का प्रतिनिधित्व स्टैंडर्ड पब्लिसिटी की प्रियंका चटर्जी, स्लोका एडवरटाइजिंग के के. श्रीनिवास, मैत्री एडवरटाइजिंग के सी. मुथु और क्रेयॉन्स एडवरटाइजिंग के कुनाल ललानी करेंगे.
अंजन चटर्जी को बोर्ड में सह-चयनित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है. विज्ञापन क्षेत्र में अनुभव के साथ उन्होंने Oh! Calcutta और Mainland China जैसे रेस्तरां ब्रांड भी विकसित किए हैं. उनका अनुभव ब्रांड निर्माण, उद्यमिता और उपभोक्ता अनुभव से जुड़े पहलुओं को बोर्ड के विचार-विमर्श में शामिल करेगा.
क्रिएटिव और मीडिया विशेषज्ञता को मिलेगी मजबूती
नए बोर्ड में विज्ञापन जगत के अनुभवी नामों को भी शामिल किया गया है. BBDO India के जोसी पॉल और ऑर्चर्ड एडवरटाइजिंग के अमितेश राव क्रिएटिव और रणनीतिक विशेषज्ञता को मजबूत करेंगे. वहीं, लियो बर्नेट के ललाटेंदु दास मीडिया क्षेत्र का अनुभव लेकर बोर्ड से जुड़ेंगे.
इसके अलावा, आर.के. स्वामी के श्रीनिवासन के. स्वामी, मैडिसन कम्युनिकेशंस के सैम बलसारा, WPP मीडिया के प्रशांत कुमार, मैट्रिक्स पब्लिसिटीज एंड मीडिया इंडिया के विष्णुदास हरदसानी, FCB उल्का एडवरटाइजिंग के धीरज सिन्हा, ओगिल्वी एंड माथर की हेप्जिबा पाठक, इनोशन वर्ल्डवाइड कम्युनिकेशन के संतोष कुमार, एवरेस्ट ब्रांड सॉल्यूशंस की तान्या गोयल, प्लेटिनम एडवरटाइजिंग के अजीत वर्गीज, ओम्निकॉम मीडिया के कार्तिक शर्मा, हवास मीडिया के मोहित जोशी और पब्लिसिस कम्युनिकेशंस की अनुप्रिया आचार्य बोर्ड में अपनी भूमिका जारी रखेंगे. शशि सिन्हा और विक्रम सखूजा को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है.
प्रमुख विज्ञापन और मीडिया नेटवर्क की भागीदारी
नए बोर्ड में ओगिल्वी, रेडिफ्यूजन, इनोशन और साची एंड साची जैसी प्रमुख फुल-सर्विस विज्ञापन एजेंसियों का प्रतिनिधित्व बना रहेगा. मीडिया कारोबार की ओर से WPP मीडिया, ओम्निकॉम मीडिया, हवास मीडिया, पब्लिसिस मीडिया और मैडिसन कम्युनिकेशंस की विशेषज्ञता भी बोर्ड को मिलेगी.
एसोसिएशन के मुताबिक, बोर्ड में व्यापक प्रतिनिधित्व का उद्देश्य उद्योग के भीतर सहयोग बढ़ाना और प्रतिभा विकास, कारोबार की वृद्धि तथा तकनीकी बदलाव से पैदा हो रहे अवसरों पर काम करना है.
क्रिएटिव, मीडिया और AI पर नई पहल की तैयारी
AAAI के अध्यक्ष डॉ. संदीप गोयल ने कहा कि नए बोर्ड में अनुभवी उद्योग नेतृत्व, स्वतंत्र उद्यमियों की ऊर्जा और विज्ञापन क्षेत्र की प्रतिभाओं को एक साथ लाया गया है. उन्होंने कहा कि एसोसिएशन का लक्ष्य उद्योग की विविधता को प्रतिबिंबित करना और स्वतंत्र एजेंसियों को अधिक प्रभावी भूमिका तथा भागीदारी के अवसर देना है.
गोयल के मुताबिक, एसोसिएशन आने वाले सप्ताह में क्रिएटिव, मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक्नोलॉजी से जुड़ी कुछ नई पहलों की घोषणा करेगा. इन पहलों में स्वतंत्र विज्ञापन एजेंसियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
रेडिफ्यूजन ब्रांड सॉल्यूशंस का प्रतिनिधित्व करने वाले डॉ. संदीप गोयल AAAI के अध्यक्ष हैं, जबकि अनदर आइडिया के जयदीप गांधी उपाध्यक्ष के रूप में बोर्ड में शामिल हैं.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एडवरटाइजिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (AAAI) ने 2026-27 के लिए अपने नए बोर्ड की घोषणा की है. इसमें स्वतंत्र विज्ञापन एजेंसियों, क्षेत्रीय कंपनियों, क्रिएटिव विशेषज्ञों और प्रमुख विज्ञापन एवं मीडिया नेटवर्क के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है. एसोसिएशन का उद्देश्य विज्ञापन उद्योग में विभिन्न आकार और विशेषज्ञता वाली एजेंसियों को अधिक प्रतिनिधित्व देना और उनके बीच सहयोग को मजबूत करना है. डॉ. संदीप गोयल को अध्यक्ष और जयदीप गांधी को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है.
संदीप गोयल अध्यक्ष, जयदीप गांधी उपाध्यक्ष
रेडिफ्यूजन ब्रांड सॉल्यूशंस का प्रतिनिधित्व करने वाले डॉ. संदीप गोयल AAAI के अध्यक्ष हैं, जबकि अनदर आइडिया के जयदीप गांधी उपाध्यक्ष के रूप में बोर्ड में शामिल हैं. नए बोर्ड में स्वतंत्र एजेंसियों और क्षेत्रीय विज्ञापन कारोबार से जुड़े प्रतिनिधियों को जगह दी गई है, ताकि उद्योग से जुड़े अलग-अलग दृष्टिकोणों को निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जा सके.
स्वतंत्र एजेंसियों की ओर से रतन बत्रा प्राइवेट लिमिटेड के पुनीत बत्रा, पैम एडवरटाइजिंग के सुनील छाबड़ा, 3 ब्रदर्स एंड फिल्स के हेमेंद्र पारेख, नवनीतलाल एंड कंपनी के देवांग एम. गांधी और सिचुएशंस एडवरटाइजिंग एंड मार्केटिंग के अंजन चटर्जी बोर्ड में शामिल हैं.
क्षेत्रीय विज्ञापन कारोबार का प्रतिनिधित्व स्टैंडर्ड पब्लिसिटी की प्रियंका चटर्जी, स्लोका एडवरटाइजिंग के के. श्रीनिवास, मैत्री एडवरटाइजिंग के सी. मुथु और क्रेयॉन्स एडवरटाइजिंग के कुनाल ललानी करेंगे.
अंजन चटर्जी को बोर्ड में सह-चयनित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है. विज्ञापन क्षेत्र में अनुभव के साथ उन्होंने Oh! Calcutta और Mainland China जैसे रेस्तरां ब्रांड भी विकसित किए हैं. उनका अनुभव ब्रांड निर्माण, उद्यमिता और उपभोक्ता अनुभव से जुड़े पहलुओं को बोर्ड के विचार-विमर्श में शामिल करेगा.
क्रिएटिव और मीडिया विशेषज्ञता को मिलेगी मजबूती
नए बोर्ड में विज्ञापन जगत के अनुभवी नामों को भी शामिल किया गया है. BBDO India के जोसी पॉल और ऑर्चर्ड एडवरटाइजिंग के अमितेश राव क्रिएटिव और रणनीतिक विशेषज्ञता को मजबूत करेंगे. वहीं, लियो बर्नेट के ललाटेंदु दास मीडिया क्षेत्र का अनुभव लेकर बोर्ड से जुड़ेंगे.
इसके अलावा, आर.के. स्वामी के श्रीनिवासन के. स्वामी, मैडिसन कम्युनिकेशंस के सैम बलसारा, WPP मीडिया के प्रशांत कुमार, मैट्रिक्स पब्लिसिटीज एंड मीडिया इंडिया के विष्णुदास हरदसानी, FCB उल्का एडवरटाइजिंग के धीरज सिन्हा, ओगिल्वी एंड माथर की हेप्जिबा पाठक, इनोशन वर्ल्डवाइड कम्युनिकेशन के संतोष कुमार, एवरेस्ट ब्रांड सॉल्यूशंस की तान्या गोयल, प्लेटिनम एडवरटाइजिंग के अजीत वर्गीज, ओम्निकॉम मीडिया के कार्तिक शर्मा, हवास मीडिया के मोहित जोशी और पब्लिसिस कम्युनिकेशंस की अनुप्रिया आचार्य बोर्ड में अपनी भूमिका जारी रखेंगे. शशि सिन्हा और विक्रम सखूजा को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल किया गया है.
प्रमुख विज्ञापन और मीडिया नेटवर्क की भागीदारी
नए बोर्ड में ओगिल्वी, रेडिफ्यूजन, इनोशन और साची एंड साची जैसी प्रमुख फुल-सर्विस विज्ञापन एजेंसियों का प्रतिनिधित्व बना रहेगा. मीडिया कारोबार की ओर से WPP मीडिया, ओम्निकॉम मीडिया, हवास मीडिया, पब्लिसिस मीडिया और मैडिसन कम्युनिकेशंस की विशेषज्ञता भी बोर्ड को मिलेगी.
एसोसिएशन के मुताबिक, बोर्ड में व्यापक प्रतिनिधित्व का उद्देश्य उद्योग के भीतर सहयोग बढ़ाना और प्रतिभा विकास, कारोबार की वृद्धि तथा तकनीकी बदलाव से पैदा हो रहे अवसरों पर काम करना है.
क्रिएटिव, मीडिया और AI पर नई पहल की तैयारी
AAAI के अध्यक्ष डॉ. संदीप गोयल ने कहा कि नए बोर्ड में अनुभवी उद्योग नेतृत्व, स्वतंत्र उद्यमियों की ऊर्जा और विज्ञापन क्षेत्र की प्रतिभाओं को एक साथ लाया गया है. उन्होंने कहा कि एसोसिएशन का लक्ष्य उद्योग की विविधता को प्रतिबिंबित करना और स्वतंत्र एजेंसियों को अधिक प्रभावी भूमिका तथा भागीदारी के अवसर देना है.
गोयल के मुताबिक, एसोसिएशन आने वाले सप्ताह में क्रिएटिव, मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक्नोलॉजी से जुड़ी कुछ नई पहलों की घोषणा करेगा. इन पहलों में स्वतंत्र विज्ञापन एजेंसियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
AIMRA) के मुताबिक, स्मार्टफोन की कमजोर मांग का असर केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है. नवरात्रि शुरू होने के बाद से ऑफलाइन दुकानों पर स्मार्टफोन की बिक्री में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
त्योहारी सीजन में स्मार्टफोन की बिक्री बढ़ने की उम्मीदों को झटका लगा है. नवरात्रि के दौरान ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर स्मार्टफोन की बिक्री में 16 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि ऑफलाइन बाजार में भी बिक्री करीब 20 फीसदी तक घटी है. फोन की बढ़ती कीमतें, मेमोरी चिप महंगी होने और त्योहारी ऑफर्स में मिलने वाली छूट कम होने से ग्राहक खरीदारी टाल रहे हैं. इसका असर मोबाइल कंपनियों से लेकर रिटेलर्स तक के कारोबार पर पड़ रहा है. कई ग्राहक नया फोन खरीदने के बजाय पुराने फोन की मरम्मत करा रहे हैं या सेकंड हैंड फोन का विकल्प चुन रहे हैं. हालांकि, 45,000 रुपये से अधिक कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग अब भी बनी हुई है.
कम डिस्काउंट और बढ़ती कीमतों से घटी मांग
मार्केट रिसर्च फर्म काउंटरपॉइंट रिसर्च के मुताबिक, ई-कॉमर्स कंपनियों की नवरात्रि सेल के दौरान स्मार्टफोन की बिक्री में 16 फीसदी की गिरावट आई है. रिपोर्ट के अनुसार, ग्राहकों में फोन खरीदने की दिलचस्पी है, लेकिन बढ़ती कीमतों के कारण उनका बजट खरीदारी में बाधा बन रहा है. अमेजन, फ्लिपकार्ट और जियोमार्ट जैसे प्लेटफॉर्म के लिए त्योहारी सीजन अहम होता है, लेकिन इस बार स्मार्टफोन की बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं रही.
पहले त्योहारी सेल में ग्राहकों को 25 से 40 फीसदी तक की छूट मिल जाती थी, लेकिन इस बार डिस्काउंट घटकर करीब 10 से 25 फीसदी रह गया है. इसकी प्रमुख वजह स्मार्टफोन बनाने की लागत में बढ़ोतरी है. मेमोरी चिप की कीमतें दो से तीन गुना तक बढ़ने के साथ रुपये की कमजोरी और माल ढुलाई की लागत ने भी कंपनियों पर दबाव बढ़ाया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन वजहों से स्मार्टफोन की कीमतों में औसतन 35 से 40 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. लागत बढ़ने के कारण कंपनियां पहले की तरह भारी छूट देने से बच रही हैं.
ऑफलाइन बाजार में भी बिक्री सुस्त
स्मार्टफोन की कमजोर मांग का असर केवल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है. ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) के मुताबिक, नवरात्रि शुरू होने के बाद से ऑफलाइन दुकानों पर स्मार्टफोन की बिक्री में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई है. संगठन ने त्योहारी सीजन में कुल रिटेल बिक्री पिछले साल के मुकाबले 15 फीसदी से अधिक घटने की आशंका जताई है.
AIMRA के फाउंडर चेयरमैन कैलाश लख्यानी के मुताबिक, महंगाई के कारण सितंबर में दुकानों पर आने वाले ग्राहकों की संख्या में भी 40 से 50 फीसदी तक की कमी देखी गई थी. कमजोर मांग के चलते कुछ ब्रांड अपने स्टॉक को निकालने के लिए सेल की अवधि बढ़ा रहे हैं.
नया फोन खरीदने के बजाय पुराने से चला रहे काम
स्मार्टफोन की बढ़ती कीमतों का असर ग्राहकों के खरीदारी के फैसलों पर भी दिख रहा है. रिटेल बाजार में बड़ी संख्या में फोन किस्तों यानी कंज्यूमर फाइनेंसिंग के जरिए बेचे जाते हैं, लेकिन बढ़ते खर्च के कारण ग्राहक अब नई खरीदारी को टाल रहे हैं. कई लोग पुराने फोन की मरम्मत कराकर उसका इस्तेमाल जारी रख रहे हैं, जबकि कुछ ग्राहक सेकंड हैंड स्मार्टफोन खरीद रहे हैं. इससे नए स्मार्टफोन की मांग प्रभावित हो रही है.
प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग बरकरार
बाजार में सुस्ती के बावजूद 45,000 रुपये से अधिक कीमत वाले प्रीमियम स्मार्टफोन की मांग बनी हुई है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के शुरुआती आठ महीनों में स्मार्टफोन की कुल बिक्री में 10 फीसदी की गिरावट आई, लेकिन बिक्री के मूल्य में 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. इसकी एक वजह फोन की औसत बिक्री कीमत (ASP) में इजाफा होना है.
रिटेलर्स के अनुसार, एप्पल, सैमसंग, वीवो, ओप्पो और शाओमी जैसे ब्रांड के स्मार्टफोन की औसत कीमत अब 35,000 से 37,000 रुपये के बीच पहुंच गई है. यानी कम संख्या में फोन बिकने के बावजूद बढ़ी हुई कीमतों के कारण कंपनियों की कुल बिक्री के मूल्य में गिरावट सीमित रही है.
दिवाली के बाद महंगे हो सकते हैं स्मार्टफोन
जानकारों को उम्मीद है कि दिवाली के आसपास स्मार्टफोन की बिक्री में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है, लेकिन पूरे त्योहारी सीजन में बिक्री पर दबाव बने रहने की आशंका है. वहीं, मेमोरी चिप की बढ़ती कीमतों और अन्य लागतों के कारण दिवाली के बाद स्मार्टफोन की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हो सकती है. यदि ऐसा होता है, तो बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है.
IPO में पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित किए गए हैं. वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व होंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सर्विसेज कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के बहुप्रतीक्षित आईपीओ की तारीख तय हो गई है. कंपनी का पब्लिक इश्यू 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. इसके जरिए करीब 30,200 करोड़ रुपये जुटाने की योजना है. आईपीओ में पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये और रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व रखे गए हैं. कंपनी ने 14 अक्टूबर को रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर दिया है.
19 अक्टूबर को एंकर निवेशकों के लिए खुलेगी बोली
जियो प्लेटफॉर्म्स ने अहमदाबाद स्थित गुजरात के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास आरएचपी जमा किया है. आईपीओ में एंकर निवेशक 19 अक्टूबर को बोली लगा सकेंगे. करीब 30,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावित आकार के साथ यह इश्यू भारत के सबसे बड़े आईपीओ में शामिल हो सकता है. फिलहाल यह रिकॉर्ड हुंडई मोटर इंडिया के नाम है, जिसने अक्टूबर 2024 में अपना आईपीओ पेश किया था.
₹1,065 से ₹1,119 होगा प्राइस बैंड
कंपनी ने आईपीओ के लिए प्रति शेयर 1,065 से 1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है. एक लॉट में 12 शेयर होंगे. ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से एक लॉट के लिए निवेशकों को 13,428 रुपये लगाने होंगे. यह राशि पात्र कर्मचारियों को मिलने वाली छूट से पहले की है. आईपीओ में पात्र कर्मचारियों को प्रति शेयर 54 रुपये की छूट दी जाएगी. प्रत्येक शेयर का फेस वैल्यू 10 रुपये है.
रिलायंस के शेयरधारकों के लिए ₹2,500 करोड़ तक रिजर्व
आईपीओ में पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये तक के शेयर आरक्षित किए गए हैं. वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज के पात्र शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये तक के शेयर रिजर्व होंगे. इस तरह दोनों श्रेणियों के लिए कुल 3,000 करोड़ रुपये तक के शेयर रखे गए हैं.
रिलायंस इंडस्ट्रीज के वे व्यक्तिगत निवेशक और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) इस श्रेणी के लिए पात्र हो सकते हैं, जिनके पास 14 अक्टूबर को कंपनी के शेयर थे. हालांकि, पात्रता के लिए आईपीओ में निर्धारित शर्तों और नियामकीय नियमों का पालन करना होगा.
27 करोड़ तक नए शेयर जारी करेगी कंपनी
रेगुलेटरी फाइलिंग के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ के तहत 27 करोड़ तक नए शेयर जारी करेगी. यह फ्रेश इश्यू होगा, यानी कंपनी नए शेयर जारी करके पूंजी जुटाएगी. कंपनी ने 19 जून को अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया था. इसके बाद 28 अगस्त को उसे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से ऑब्जर्वेशन लेटर मिला.
जियो के कारोबार पर निवेशकों की नजर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि, जियो प्लेटफॉर्म्स के तहत रिलायंस जियो का टेलीकॉम और डिजिटल सर्विसेज कारोबार आता है. यह रिलायंस इंडस्ट्रीज की उपभोक्ता-केंद्रित कंपनियों के कारोबार की वैल्यू सामने लाने की रणनीति का अहम हिस्सा है. आईपीओ के आरएचपी में कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार से जुड़े जोखिम, इश्यू की शर्तों और अन्य जरूरी जानकारियों का विवरण दिया गया है. निवेशकों को बोली लगाने से पहले इन जानकारियों का अध्ययन करना चाहिए.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
बुधवार को घरेलू शेयर बाजार में मुनाफावसूली के चलते गिरावट दर्ज की गई.सेंसेक्स 251.89 अंक यानी 0.34 फीसदी गिरकर 72,781.89 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 99.25 अंक यानी 0.44 फीसदी टूटकर 22,622.70 पर रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. अमेरिकी और एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली, उम्मीद से ज्यादा अमेरिकी महंगाई और गिफ्ट निफ्टी में गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. इससे पहले बुधवार को सेंसेक्स 252 अंक और निफ्टी करीब 99 अंक टूटकर बंद हुए थे, जबकि मंगलवार को सेंसेक्स में 1,109 अंकों की जोरदार तेजी आई थी. आज निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों के रुख, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजों पर रहेगी. रिलायंस इंडस्ट्रीज, IDBI बैंक, BHEL, ICICI लोम्बार्ड और टाटा टेक्नोलॉजीज समेत कई कंपनियों के शेयर भी कारोबारी गतिविधियों के लिहाज से अहम रहेंगे.
गिफ्ट निफ्टी से कमजोर संकेत, एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली
गुरुवार, 15 अक्टूबर को गिफ्ट निफ्टी करीब 40 अंक गिरकर 22,600 के आसपास कारोबार कर रहा था. इससे घरेलू बाजार में कमजोर शुरुआत की आशंका है. एशियाई बाजारों में भी सुबह तेज गिरावट देखने को मिली. जापान का निक्केई करीब 4 फीसदी और दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 8 फीसदी तक फिसल गया, जबकि हांगकांग और चीन के बाजार भी दबाव में रहे.
इससे पहले बुधवार को अमेरिकी बाजारों में भी बिकवाली देखने को मिली थी. अमेरिका में सितंबर की उपभोक्ता महंगाई दर सालाना आधार पर बढ़कर 3.7 फीसदी पहुंच गई, जबकि अगस्त में यह 3.4 फीसदी थी. यह बाजार के 3.6 फीसदी के अनुमान से अधिक रही. इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनाए रखने की आशंका बढ़ गई है. इसका असर खासकर टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर पड़ा. बुधवार को नैस्डैक 1.88 फीसदी और S&P 500 इंडेक्स 1.11 फीसदी गिरकर बंद हुआ, जबकि डाओ जोन्स में 0.09 फीसदी की गिरावट रही.
सेंसेक्स 252 अंक टूटा, निफ्टी भी गिरावट के साथ बंद
बुधवार, 14 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में मुनाफावसूली के चलते गिरावट दर्ज की गई. कारोबार के दौरान निफ्टी 22,558.95 के निचले स्तर तक फिसल गया, हालांकि आईटी और एफएमसीजी शेयरों में खरीदारी से नुकसान कुछ कम हुआ. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 251.89 अंक यानी 0.34 फीसदी गिरकर 72,781.89 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 99.25 अंक यानी 0.44 फीसदी टूटकर 22,622.70 पर रहा.
सेंसेक्स और निफ्टी के टॉप गेनर्स-लूजर्स
बुधवार को सेंसेक्स के टॉप गेनर्स में इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, TCS, हिंदुस्तान यूनिलीवर और NTPC शामिल रहे. इन्फोसिस का शेयर 2.51 फीसदी, टेक महिंद्रा का 2.20 फीसदी, TCS का 1.54 फीसदी, हिंदुस्तान यूनिलीवर का 1.15 फीसदी और NTPC का 0.87 फीसदी चढ़ा. दूसरी ओर, बजाज फाइनेंस 2.55 फीसदी गिरकर सेंसेक्स का टॉप लूजर रहा. महिंद्रा एंड महिंद्रा में 2.24 फीसदी, बजाज फिनसर्व में 1.99 फीसदी, इटरनल में 1.68 फीसदी और ICICI बैंक में 1.54 फीसदी की गिरावट आई.
निफ्टी में नेस्ले इंडिया 3.69 फीसदी की बढ़त के साथ टॉप गेनर रहा. टाटा कम्युनिकेशंस में 2.91 फीसदी, इन्फोसिस में 2.44 फीसदी, TCS में 2.11 फीसदी और कोल इंडिया में 2.08 फीसदी की तेजी रही. वहीं, श्रीराम फाइनेंस 3.85 फीसदी गिरकर टॉप लूजर रहा. HDFC लाइफ में 2.85 फीसदी, बजाज फाइनेंस में 2.62 फीसदी, महिंद्रा एंड महिंद्रा में 2.47 फीसदी और SBI लाइफ में 2.20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी नजर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतें बाजार के लिए अहम बनी हुई हैं. हालांकि, गुरुवार सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 104 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जिससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है. भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आयात बिल और महंगाई बढ़ा सकती है. इसके अलावा कंपनियों की लागत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहेंगी.
RIL, IDBI बैंक और BHEL समेत इन शेयरों पर रहेगी नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आज रिलायंस इंडस्ट्रीज, IDBI बैंक, BHEL, ICICI लोम्बार्ड, बजाज कंज्यूमर केयर और टाटा टेक्नोलॉजीज के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स का 30,187.6 करोड़ रुपये का IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा. इसके लिए 1,065 से 1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है. वहीं, IDBI बैंक में सरकार और LIC की कुल 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने के लिए 52,878 करोड़ रुपये के सौदे को मंजूरी मिली है. इस सौदे के तहत सरकार अपनी 30.48 फीसदी और LIC अपनी 30.24 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी.
BHEL का सितंबर तिमाही में मुनाफा सालाना आधार पर 375 करोड़ रुपये से बढ़कर 821 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी की आय 23.8 फीसदी बढ़कर 9,300 करोड़ रुपये रही. ICICI लोम्बार्ड का मुनाफा 15.5 फीसदी बढ़कर 946.4 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि शुद्ध अर्जित प्रीमियम आय 17.7 फीसदी बढ़कर 6,651.87 करोड़ रुपये रही. कंपनी ने प्रति शेयर 7 रुपये का अंतरिम लाभांश देने की भी घोषणा की है. बजाज कंज्यूमर केयर का मुनाफा 65.9 फीसदी बढ़कर 70.2 करोड़ रुपये रहा और आय 25.5 फीसदी बढ़कर 333 करोड़ रुपये पहुंच गई. दूसरी ओर, टाटा टेक्नोलॉजीज का मुनाफा पिछली तिमाही के मुकाबले 5.2 फीसदी घटकर 171 करोड़ रुपये रह गया, हालांकि कंपनी की आय 2 फीसदी बढ़कर 1,699 करोड़ रुपये रही.
इसके अलावा हुंडई मोटर इंडिया ने महाराष्ट्र के तालेगांव में अपना नया वाहन निर्माण कारखाना शुरू किया है. कंपनी इस परियोजना में अलग-अलग चरणों में करीब 11,000 करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बना रही है. ट्राइडेंट ने राहुल रूंगटा को दोबारा समूह का मुख्य वित्त अधिकारी नियुक्त किया है.
आज इन कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी नजर
गुरुवार को एंजेल वन, HDFC AMC, HDFC लाइफ, DB कॉर्प, IIFL, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, इंडियन बैंक, IRFC, पॉलीकैब, नेस्ले इंडिया, ओरिएंट इलेक्ट्रिक और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स समेत कई कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. निवेशकों की नजर इन कंपनियों की आय, मुनाफे, मार्जिन और भविष्य के कारोबारी अनुमानों पर रहेगी. इसके अलावा आनंद राठी वेल्थ के शेयर भी अंतरिम लाभांश की एक्स-डेट पर कारोबार करेंगे. कंपनी ने 5 रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक शेयर पर 4 रुपये का अंतरिम लाभांश घोषित किया है.
कुल मिलाकर, गुरुवार को घरेलू बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, अमेरिकी महंगाई और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की धारणा, कच्चे तेल की कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों से तय हो सकती है. ऐसे में कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
प्रस्तावित शर्तों के मुताबिक, IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री का सौदा मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है. हालांकि, इसकी अंतिम प्रक्रिया संबंधित मंजूरियों और नियामकीय आवश्यकताओं पर निर्भर करेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार ने IDBI बैंक के निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को बैंक की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी Fairfax Financial Holdings को 52,878.08 करोड़ रुपये में बेचने की मंजूरी दे दी. इस सौदे के तहत केंद्र सरकार अपनी 30.48 फीसदी और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) अपनी 30.24 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगा. Fairfax ने प्रति शेयर 81 रुपये की बोली लगाई है, जो स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर तय 75.99 रुपये के मानक मूल्य से अधिक है.
सरकार और LIC के पास कितनी हिस्सेदारी बचेगी?
इस सौदे के पूरा होने के बाद केंद्र सरकार के पास IDBI बैंक की 15 फीसदी हिस्सेदारी बनी रहेगी, जबकि LIC के पास 19 फीसदी हिस्सेदारी होगी. इस तरह दोनों की संयुक्त हिस्सेदारी घटकर 34 फीसदी रह जाएगी. बिक्री प्रक्रिया से पहले सरकार और LIC के पास बैंक की कुल 94.71 फीसदी हिस्सेदारी थी.
इस सौदे के जरिए Fairfax को बैंक का बहुमत स्वामित्व हासिल होगा, जबकि सरकार और LIC की इसमें अल्पमत हिस्सेदारी बनी रहेगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस लेनदेन को रणनीतिक विनिवेश के बजाय रणनीतिक पुनर्गठन बताया है.
2022 में शुरू हुई थी बिक्री प्रक्रिया
IDBI बैंक की हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया वर्ष 2022 में शुरू हुई थी. हालांकि, शुरुआती बोलियां तय आरक्षित मूल्य पर खरी नहीं उतरने के कारण इस प्रक्रिया में देरी हुई. बाद में सरकार ने बिक्री प्रक्रिया को दोबारा आगे बढ़ाया. जुलाई 2026 में Fairfax और Emirates NBD ने संशोधित बोलियां जमा की थीं. इनमें Fairfax सफल बोलीदाता के रूप में उभरी.
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब यह सौदा पूरा होने की दिशा में आगे बढ़ेगा. इसके लिए बाकी प्रक्रियागत और नियामकीय औपचारिकताओं को पूरा करना होगा.
मार्च 2027 तक पूरा हो सकता है सौदा
प्रस्तावित शर्तों के मुताबिक, IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री का सौदा मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है. हालांकि, इसकी अंतिम प्रक्रिया संबंधित मंजूरियों और नियामकीय आवश्यकताओं पर निर्भर करेगी.
रिपोर्ट्स के अनुसार, Fairfax को सौदे की शर्तों के तहत कम से कम तीन साल तक IDBI बैंक का नाम बनाए रखना होगा. यह लेनदेन भारत के वित्तीय क्षेत्र में होने वाली बड़ी रणनीतिक हिस्सेदारी बिक्री में से एक है.
बैंक की ओर से स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के मुताबिक, सितंबर तिमाही में कुल आय सालाना आधार पर 6.04% बढ़कर ₹40,931 करोड़ हो गई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केनरा बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया है. सितंबर तिमाही में बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 8.40% बढ़कर ₹5,175 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह ₹4,774 करोड़ था. बैंक की शुद्ध ब्याज आय में भी 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई. बेहतर नतीजों के बीच शेयर बाजार में केनरा बैंक के शेयर इंट्राडे कारोबार के दौरान 5% से अधिक चढ़ गए.
बैंक की ओर से स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के मुताबिक, सितंबर तिमाही में कुल आय सालाना आधार पर 6.04% बढ़कर ₹40,931 करोड़ हो गई. पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में बैंक ने ₹38,598 करोड़ की कुल आय दर्ज की थी. वहीं, शुद्ध ब्याज आय (NII) 20.39% बढ़कर ₹11,005 करोड़ पहुंच गई, जो एक साल पहले ₹9,141 करोड़ थी.
बैंक का वैश्विक कारोबार भी मजबूत हुआ है. सितंबर 2026 के अंत तक कुल वैश्विक कारोबार 15.88% की सालाना बढ़ोतरी के साथ ₹30.72 लाख करोड़ हो गया. इसमें वैश्विक जमा ₹16.97 लाख करोड़ और वैश्विक कर्ज ₹13.75 लाख करोड़ रहा.
खराब कर्ज में आई कमी
केनरा बैंक के एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर भी सुधार देखने को मिला. सितंबर 2026 में बैंक का ग्रॉस एनपीए अनुपात घटकर 1.33% रह गया, जबकि जून 2026 में यह 1.57% और सितंबर 2025 में 2.35% था. इसी तरह, नेट एनपीए अनुपात एक साल पहले के 0.54% से घटकर 0.30% पर आ गया.
बैंक का ग्रॉस एनपीए सितंबर तिमाही में ₹18,299 करोड़ रहा, जो जून तिमाही में ₹20,354 करोड़ और पिछले साल की समान अवधि में ₹27,040 करोड़ था. हालांकि, खराब कर्ज में आई पूरी कमी को नकद वसूली नहीं माना जा सकता. इसमें ₹719 करोड़ की नकद वसूली, ₹452 करोड़ के खातों का दोबारा सामान्य होना और ₹2,800 करोड़ के कर्ज को बट्टे खाते में डालना भी शामिल है.
तिमाही के दौरान ₹1,844 करोड़ के नए कर्ज खराब कर्ज की श्रेणी में आए. जून तिमाही में यह आंकड़ा ₹1,781 करोड़ था. वहीं, प्रोविजन कवरेज रेश्यो बढ़कर 95.34% हो गया, जो पिछले साल सितंबर में 93.59% था.
कर्ज और जमा में कितनी बढ़ोतरी?
बैंक के वैश्विक कर्ज में सालाना आधार पर 19.46% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹13.75 लाख करोड़ पर पहुंच गया. दूसरी ओर, वैश्विक जमा 13.13% बढ़कर ₹16.97 लाख करोड़ हो गई. इससे स्पष्ट है कि बैंक के कर्ज में बढ़ोतरी जमा की तुलना में तेज रही.
खुदरा कर्ज में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली. यह सालाना आधार पर 31.61% बढ़कर ₹3.31 लाख करोड़ हो गया. आवास कर्ज 17.35% बढ़कर ₹1.35 लाख करोड़ और वाहन कर्ज 25.50% बढ़कर ₹29,326 करोड़ पर पहुंच गया. छोटे एवं मझोले कारोबारों को दिया गया कर्ज 15.49% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ रहा, जबकि कृषि और संबंधित क्षेत्रों का कर्ज 14.26% बढ़कर ₹3.04 लाख करोड़ हो गया.
कर्ज की तेज वृद्धि के बीच बैंक का वैश्विक क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात बढ़कर 81.01% हो गया. जून तिमाही में यह 80.25% और पिछले साल सितंबर में 76.72% था.
शुद्ध ब्याज मार्जिन में भी सुधार
सितंबर तिमाही में बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन (NIM) बढ़कर 2.55% हो गया. जून तिमाही में यह 2.52% और पिछले वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में 2.50% था. शुद्ध ब्याज मार्जिन बैंक की ब्याज से होने वाली कमाई और ब्याज पर किए जाने वाले खर्च के बीच के अंतर को दर्शाता है.
हालांकि, कम लागत वाली जमा के मोर्चे पर बैंक को अभी और सुधार करना है. घरेलू चालू और बचत खातों की जमा (CASA) सालाना आधार पर 4.85% बढ़कर ₹4,48,889 करोड़ हो गई. घरेलू जमा में इसकी हिस्सेदारी 29% रही, जबकि बैंक ने मार्च 2027 तक इसे 30-32% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है.
गैर-ब्याज आय में गिरावट
कुछ मोर्चों पर बैंक का प्रदर्शन कमजोर भी रहा. गैर-ब्याज आय सालाना आधार पर 18.17% घटकर ₹5,772 करोड़ रह गई. ट्रेजरी आय में 68.48% की गिरावट आई और यह ₹499 करोड़ रही. निवेश बेचने से होने वाला मुनाफा भी पिछले साल के ₹1,217 करोड़ से घटकर ₹153 करोड़ रह गया.
वहीं, शुल्क आधारित आय 6.54% बढ़कर ₹2,755 करोड़ पहुंच गई. कुल प्रावधान और कर संबंधी मदों का आंकड़ा सालाना आधार पर 6.06% घटकर ₹3,583 करोड़ रहा.
पूंजी की स्थिति मजबूत, पूरे साल के लक्ष्य से आगे कारोबार
सितंबर 2026 में बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 17.19% रहा, जो पिछले साल की समान अवधि में 16.20% था. मुख्य इक्विटी पूंजी अनुपात 12.80% दर्ज किया गया.
बैंक का वैश्विक कारोबार, कर्ज और जमा में वृद्धि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तय लक्ष्यों से आगे चल रही है. मार्च 2027 तक वैश्विक कारोबार में 10-11%, वैश्विक कर्ज में 11-12% और वैश्विक जमा में 9-10% वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है. सितंबर तक इनकी सालाना वृद्धि दर क्रमशः 15.88%, 19.46% और 13.13% रही.
खराब कर्ज के मामले में भी बैंक की स्थिति तय लक्ष्यों से बेहतर है. मार्च 2027 तक ग्रॉस एनपीए 1.50%, नेट एनपीए 0.40% और क्रेडिट कॉस्ट 0.75% तक रखने का लक्ष्य है. सितंबर तिमाही में ये आंकड़े क्रमशः 1.33%, 0.30% और 0.47% रहे.
नतीजों के बाद शेयर में तेजी
केनरा बैंक के तिमाही नतीजों के बाद शेयर में खरीदारी बढ़ी. खबर लिखे जाने तक शेयर 3.55% की तेजी के साथ ₹124.72 पर कारोबार कर रहा था, जबकि इंट्राडे कारोबार के दौरान इसमें 5% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. बैंक के मुनाफे, शुद्ध ब्याज आय और एसेट क्वालिटी में सुधार ने निवेशकों का ध्यान खींचा. खबर लिखे जाने के दौरान यह 3.19 प्रतिशत की तेजी पर कारोबार कर रहा था.
सितंबर के थोक महंगाई के आंकड़े संशोधित सूचकांक सीरीज के तहत जारी किए गए हैं. इस सीरीज में 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है, ताकि अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सके.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई ने भी चिंता बढ़ा दी है. सितंबर 2026 में थोक महंगाई दर बढ़कर 11.39% हो गई, जो अगस्त में 9.92% थी. सितंबर 2022 के बाद पहली बार थोक महंगाई दोहरे अंकों में पहुंची है. कच्चे तेल, ईंधन और बिजली की कीमतों में तेजी के साथ खाद्य पदार्थों और विनिर्मित उत्पादों की महंगाई ने भी इस बढ़ोतरी में योगदान दिया है.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर सालाना आधार पर 11.39% रही. यह अर्थशास्त्रियों के 10.18% के अनुमान से भी अधिक है. इससे पहले अगस्त में थोक महंगाई दर 9.92% दर्ज की गई थी. वहीं, इस सप्ताह जारी आंकड़ों के अनुसार, खुदरा महंगाई दर भी अगस्त के 4.83% से बढ़कर सितंबर में 5.54% पर पहुंच गई. खाद्य पदार्थों, खासकर सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी को इसकी प्रमुख वजह माना गया.
चार साल के उच्च स्तर पर पहुंची थोक महंगाई
सितंबर 2022 के बाद पहली बार थोक महंगाई दर 10% के पार पहुंची है. उस समय यह 10.70% दर्ज की गई थी. सितंबर 2026 का आंकड़ा पिछले चार वर्षों में थोक महंगाई का सबसे ऊंचा स्तर है. इसके साथ ही थोक महंगाई में लगातार दूसरे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
इससे पहले नवंबर 2025 से जून 2026 तक थोक महंगाई में लगातार इजाफा हुआ था, जबकि जुलाई में मामूली गिरावट आई थी. अब एक बार फिर महंगाई में तेजी ने अर्थव्यवस्था और आम लोगों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है.
ईंधन और बिजली की महंगाई में सबसे ज्यादा तेजी
आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में ईंधन और बिजली की महंगाई दर बढ़कर 25.85% हो गई, जो अगस्त में 22.93% थी. इसी तरह, विनिर्मित उत्पादों की महंगाई दर अगस्त के 8.37% से बढ़कर सितंबर में 9.76% पर पहुंच गई.
प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई दर भी 7.76% से बढ़कर 8.67% हो गई. इस श्रेणी में खाद्य पदार्थों के अलावा गैर-खाद्य वस्तुएं और खनिज शामिल हैं. वहीं, खाद्य पदार्थों और विनिर्मित खाद्य उत्पादों को मिलाकर तैयार थोक खाद्य सूचकांक की महंगाई दर सितंबर में 8.66% रही, जबकि अगस्त में यह 7.05% थी.
मंत्रालय के मुताबिक, थोक महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में खनिज तेल, खाद्य पदार्थ, कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस, कोयला, लिग्नाइट, बुनियादी धातुएं, रसायन, कपड़ा, रबर एवं प्लास्टिक उत्पाद और बिजली के उपकरण शामिल रहे.
कच्चे तेल की कीमतें कैसे बढ़ा रही हैं महंगाई?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता. इससे परिवहन, खेती, सिंचाई और माल ढुलाई की लागत भी बढ़ सकती है. जब कंपनियों की उत्पादन और परिवहन लागत बढ़ती है, तो उसका असर उत्पादों की थोक कीमतों पर पड़ सकता है.
इसके अलावा, प्राकृतिक गैस की ऊंची कीमतों से उर्वरकों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है. भारत खाद्य तेलों के आयात पर भी काफी निर्भर है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर पड़ सकता है. पैकेजिंग, फसल सुरक्षा और माल ढुलाई की बढ़ती लागत भी खाद्य पदार्थों की कीमतों को प्रभावित कर सकती है.
इस तरह ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंच सकता है. यदि कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालती हैं, तो आने वाले समय में खुदरा कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है.
खाद्य महंगाई पर अल नीनो और कमजोर मानसून का खतरा
अर्थशास्त्रियों ने खाद्य महंगाई के लिए अल नीनो और मानसून की असमान बारिश को प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है. मौसम में बदलाव से खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित होने और रबी की बुआई में देरी की आशंका बढ़ सकती है.
ICRA की अदिति नायर और ANZ के धीरज निम के मुताबिक, जलाशयों में पानी का स्तर औसत से कम रहना सर्दियों की फसलों के लिए चिंता का विषय है. हालांकि, खाद्य पदार्थों की कीमतों पर इसका वास्तविक असर फसल उत्पादन और आगे मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा.
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा और अन्य जिंसों की कीमतें बढ़ने से भी खाद्य पदार्थों की लागत पर दबाव पड़ सकता है. ऐसे में आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा तय करने में घरेलू फसल उत्पादन और वैश्विक कमोडिटी कीमतों की अहम भूमिका रहेगी.
महंगाई के मोर्चे पर RBI की चुनौती बढ़ी
थोक और खुदरा, दोनों तरह की महंगाई में बढ़ोतरी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए भी चुनौती बढ़ा सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर की शुरुआत में RBI ने बेंचमार्क रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% कर दिया था. फरवरी 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी बताई गई है. गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी संकेत दिया था कि महंगाई और उसके अनुमान पिछले साल की तुलना में उतने अनुकूल नहीं हैं.
हालांकि, थोक महंगाई में बढ़ोतरी का खुदरा कीमतों पर कितना और कब असर पड़ेगा, यह कंपनियों की लागत, मांग और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. यदि कच्चे तेल और अन्य इनपुट की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो उत्पादन लागत के साथ उपभोक्ताओं पर भी महंगाई का दबाव बढ़ सकता है.
नई आधार वर्ष वाली सीरीज में जारी हुए आंकड़े
सितंबर के थोक महंगाई के आंकड़े संशोधित सूचकांक सीरीज के तहत जारी किए गए हैं. इस सीरीज में 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है, ताकि अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सके.
नई सीरीज में वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है. इसमें सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा जैसे ऊर्जा के नए स्रोतों को भी शामिल किया गया है. इससे थोक कीमतों में होने वाले बदलावों का आकलन पहले की तुलना में अधिक व्यापक आधार पर किया जा सकेगा.
घरेलू म्यूचुअल फंड में निवेश 25% बढ़कर ₹59,200 करोड़ पहुंचा, सितंबर में निफ्टी 50 में 6.1% की गिरावट
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने सितंबर में भारतीय शेयर बाजार से 4.1 अरब डॉलर की निकासी की. इसके साथ ही उन्होंने पिछले दो महीनों के दौरान की गई खरीदारी का करीब 84% हिस्सा वापस निकाल लिया. उभरते बाजारों की तुलना में भारतीय शेयर बाजार के कमजोर प्रदर्शन के बीच विदेशी निवेशकों ने यह कदम उठाया. हालांकि, इस दौरान वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में उनकी हिस्सेदारी बढ़ी और इस क्षेत्र को लेकर उनका रुख तटस्थ हो गया. वहीं, घरेलू म्यूचुअल फंड में निवेश सितंबर में 25% बढ़कर ₹59,200 करोड़ पहुंच गया. ब्रोकरेज फर्म CLSA की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है.
सितंबर में 6.1% गिरा निफ्टी 50
सितंबर में निफ्टी 50 इंडेक्स 6.1% की गिरावट के साथ बंद हुआ. अमेरिकी डॉलर के लिहाज से इसका प्रदर्शन उभरते बाजारों और जापान को छोड़कर एशिया के अन्य बाजारों की तुलना में करीब छह प्रतिशत अंक कमजोर रहा. महीने के दौरान सभी सेक्टर गिरावट के साथ बंद हुए. सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और ऑटोमोबाइल शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई, जबकि दूरसंचार और हेल्थकेयर क्षेत्र के शेयरों में अपेक्षाकृत कम कमजोरी रही.
CLSA की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है. महीने में अब तक वे भारतीय शेयर बाजार से 3.6 अरब डॉलर की निकासी कर चुके हैं.
सितंबर में भारत पर विशेष रूप से निवेश करने वाले सक्रिय फंडों के अलावा अन्य सक्रिय फंडों ने 9 अरब डॉलर के शेयर बेचे. हालांकि, भारत पर केंद्रित नहीं रहने वाले निष्क्रिय फंडों की ओर से 5.8 अरब डॉलर की खरीदारी ने इस बिकवाली के असर को कुछ हद तक कम किया.
वित्तीय क्षेत्र में एफआईआई का रुख हुआ तटस्थ
भारतीय शेयर बाजार में व्यापक बिकवाली के बावजूद विदेशी निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में सेक्टर के हिसाब से बदलाव किए. उन्होंने वित्तीय क्षेत्र में अपनी सापेक्ष हिस्सेदारी 56 आधार अंक बढ़ाई. इसके साथ ही लगातार तीन महीनों तक इस क्षेत्र में कम निवेश रखने के बाद उनका रुख तटस्थ हो गया.
विदेशी निवेशकों ने ऊर्जा क्षेत्र में अपनी कम हिस्सेदारी 35 आधार अंक और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में 20 आधार अंक कम की. वहीं, आईटी सेक्टर में अपनी सापेक्ष हिस्सेदारी 18 आधार अंक बढ़ाई. इससे आईटी क्षेत्र में उनका कम निवेश वाला रुख घटकर 1.2 प्रतिशत अंक के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया.
इन बदलावों के लिए विदेशी निवेशकों ने उपभोक्ता विवेकाधीन क्षेत्र (ऑटोमोबाइल को छोड़कर) और हेल्थकेयर में अपनी अधिक हिस्सेदारी कम की. इन दोनों क्षेत्रों में उनकी सापेक्ष हिस्सेदारी क्रमशः 47 आधार अंक और 30 आधार अंक घटी. इसके अलावा, कम्युनिकेशन सर्विसेज में आठ आधार अंक और यूटिलिटी सेक्टर में छह आधार अंक की कमी आई.
रिपोर्ट के मुताबिक, औद्योगिक क्षेत्र विदेशी संस्थागत निवेशकों के पोर्टफोलियो में अब भी सबसे अधिक वरीयता वाला सेक्टर बना हुआ है. इसमें उनकी हिस्सेदारी बेंचमार्क से 1.8 प्रतिशत अंक अधिक है.
घरेलू म्यूचुअल फंड में निवेश 25% बढ़ा
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू म्यूचुअल फंड भारतीय शेयर बाजार को सहारा देते रहे. एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) सहित घरेलू म्यूचुअल फंड में सितंबर के दौरान निवेश मासिक आधार पर 25% बढ़कर ₹59,200 करोड़ हो गया.
सक्रिय फंडों में निवेश 21% बढ़कर ₹40,900 करोड़ रहा, जबकि निष्क्रिय फंडों में निवेश 35% की बढ़ोतरी के साथ ₹18,300 करोड़ पहुंच गया.
एसआईपी निवेश रिकॉर्ड स्तर पर, लेकिन बंद होने वाले प्लान की संख्या बढ़ी
सितंबर में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए मासिक निवेश रिकॉर्ड ₹32,500 करोड़ पर पहुंच गया. हालांकि, एसआईपी बंद करने वाले निवेशकों की संख्या और नए एसआईपी की संख्या के अनुपात में बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है.
अगस्त में यह अनुपात 81% था, जो सितंबर में बढ़कर 116% हो गया. यह पिछले 18 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. इससे संकेत मिलता है कि खुदरा निवेशकों की भागीदारी को लंबे समय तक बनाए रखने की चुनौती बढ़ सकती है.
मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंडों में भी निवेश बढ़ा. सितंबर में मिड-कैप फंडों में ₹7,800 करोड़ और स्मॉल-कैप फंडों में ₹9,000 करोड़ का निवेश आया, जो इन दोनों श्रेणियों के लिए अब तक का उच्चतम स्तर है.
इसके विपरीत, लार्ज-कैप फंडों में केवल ₹860 करोड़ का निवेश आया. इससे पहले लगातार दो महीनों तक इन फंडों से शुद्ध निकासी दर्ज की गई थी.
कुल मिलाकर, आंकड़े दिखाते हैं कि विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेशक बाजार को सहारा दे रहे हैं. हालांकि, एसआईपी बंद होने के अनुपात में बढ़ोतरी पर नजर रखना जरूरी होगा, क्योंकि यह घरेलू निवेश प्रवाह की स्थिरता और खुदरा निवेशकों के भरोसे का एक अहम संकेतक है.
सड़क, रेलवे समेत कई बुनियादी ढांचा क्षेत्रों की परियोजनाओं का आकलन कर रहा नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 58 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों समेत सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों का डेटा उपलब्ध
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
केंद्र सरकार की पीएम गतिशक्ति पहल के तहत ₹20.23 लाख करोड़ की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को समीक्षा के दायरे में लाया गया है. इनमें से 400 परियोजनाओं का नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप (एनपीजी) मंजूरी के लिए आकलन कर चुका है. इन परियोजनाओं में सड़क, रेलवे और अन्य बुनियादी ढांचा क्षेत्र शामिल हैं. इस पहल का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की योजना को एकीकृत करना, विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना और लॉजिस्टिक्स की लागत कम करना है.
बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की एकीकृत योजना पर जोर
पीएम गतिशक्ति की शुरुआत 13 अक्टूबर 2021 को हुई थी. इसके तहत विभिन्न क्षेत्रों की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की योजना और विकास को एक साझा ढांचे में लाने पर जोर दिया गया है. इस पहल के अंतर्गत ₹500 करोड़ से अधिक के निवेश वाली लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी संबंधी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप आकलन करता है.
एनपीजी परियोजनाओं की योजना का मूल्यांकन पीएम गतिशक्ति के निर्धारित सिद्धांतों के आधार पर करता है. इसका उद्देश्य अलग-अलग सरकारी विभागों और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है, ताकि परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन में समन्वय बढ़ाया जा सके.
हालांकि, ₹20.23 लाख करोड़ की परियोजनाओं को समीक्षा के दायरे में शामिल किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सभी परियोजनाओं को अंतिम मंजूरी या वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है.
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 1,800 से अधिक डेटा लेयर
पीएम गतिशक्ति के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 1,800 से अधिक डेटा लेयर एकीकृत की गई हैं. इसमें 58 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के साथ सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का डेटा शामिल है.
इस प्लेटफॉर्म पर भूमि रिकॉर्ड, बंदरगाहों, जंगलों, स्कूलों, रेलवे स्टेशनों, जल निकायों, दूरसंचार टावरों और राजमार्गों से संबंधित जानकारी उपलब्ध है. इसका उद्देश्य बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े विभिन्न आंकड़ों को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है, जिससे परियोजनाओं की योजना और आकलन में मदद मिल सके.
इस व्यवस्था के जरिए परिवहन नेटवर्क, सार्वजनिक सुविधाओं, भूमि रिकॉर्ड और दूरसंचार बुनियादी ढांचे से जुड़ी जानकारियों को एक साथ देखा जा सकता है.
65 से अधिक सॉफ्टवेयर मॉड्यूल और 100 से ज्यादा ऐप विकसित
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, पीएम गतिशक्ति पहल के तहत 65 से अधिक सॉफ्टवेयर मॉड्यूल और टूल विकसित कर एकीकृत किए गए हैं. इसके अलावा 100 से अधिक मोबाइल और वेब एप्लिकेशन भी तैयार किए गए हैं.
ये डिजिटल संसाधन विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और क्षेत्रों से संबंधित बुनियादी ढांचे के आंकड़ों को एक साझा ढांचे में लाने में मदद करते हैं. सरकार की इस पहल का व्यापक उद्देश्य बुनियादी ढांचा विकास में बेहतर समन्वय स्थापित करना और लॉजिस्टिक्स की दक्षता बढ़ाना है.