आखिर चीन से कैसे खिलौनों के निर्माण में आगे निकल रहा है भारत ? 

सरकार के आत्‍मनिर्भर भारत का उदाहरण खिलौना इंडस्‍ट्री में देखा जा सकता है. इस उद्योग में आज देश इसके सबसे बड़े उत्‍पादक चीन से आगे निकल चुका है जिससे मैन्‍युफैक्‍चरिंग में भी बढ़ोतरी हुई है. 

ललित नारायण कांडपाल by
Published - Saturday, 17 June, 2023
Last Modified:
Saturday, 17 June, 2023
Toy Industry

किसी जमाने में दिल्‍ली का सदर बाजार जो चीन से आने वाले खिलौनों से पटा रहता था लेकिन आज तस्‍वीर बदल चुकी है. पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से भारत के बच्चों को सलाम करते हुए कहा था कि मैं 5 से 7 साल के छोटे बच्चों को सलाम करना चाहता हूं. उन्‍होंने कहा था कि देश की चेतना जागी है. मैंने अनगिनत परिवारों से सुना है कि 5-7 साल के बच्चे अपने माता-पिता से कहते हैं कि वे विदेशी खिलौनों से नहीं खेलना चाहते हैं.  

इस क्षेत्र में दिखी है आत्‍मनिर्भरता 
भारत में मौजूदा समय में स्मार्टफोन क्षेत्र के बाद, टॉय इंडस्‍ट्री ऐसी है जो सरकार की आत्‍मनिर्भर भारत की स्‍टोरी का शोपीस बन सकती है. इसके तहत आज हम अपने लिए और दुनिया के लिए खिलौने बना रहे हैं. इस इंडस्‍ट्री के लिए सबसे बेहतर ये रहा है कि सरकार ने इसे प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना में शामिल किया है जो इस उद्योग की लंबे समय से चली आ रही मांग में शामिल है.

भारत सरकार बाजी मार रहा है
प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के खिलाफ एक ऐसे क्षेत्र में धीमी गति से युद्ध छेड़ा जिसमें उसका हमारे देश में एकाधिकार का था. देश की हर दुकान में आने वाले खिलौने चीन से ही आया करते थे. चीन के सामान से भारत की हर दुकान पटी हुई थी. खिलौनों की दुकानें उन पहले क्षेत्रों में से एक थीं जहां सस्ते चीनी सामान ने लगभग एकाधिकार बनाया.

कैसे भारत ने मारी बाजी 
पीएम मोदी ने जल्दी ही महसूस कर लिया था कि सस्ते प्लास्टिक और कपड़े के खिलौनों का निर्माण भारत में उतना मुश्किल नहीं है, जितना कि इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए, जिसमें इनपुट, कच्चे माल, तकनीक और प्रशिक्षित श्रम की आवश्यकता होती है, और ये सब कम आपूर्ति में मौजूद था. इसलिए भारत सरकार ने खिलौना निर्माताओं को महत्त्वाकांक्षी बनने के लिए प्रेरित किया. (उन्होंने अपने मन की बात रेडियो प्रसारण में कई बार खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने का प्रयास किया. एक दशक से भी कम समय में, मोदी के खिलौना प्रचारवाद ने परिणाम दिखाने शुरू कर दिए.

भारत ने बढ़त हासिल करना शुरू कर दिया है. चीनी आयात सिकुड़ रहा है और स्थानीय विनिर्माण बढ़ रहा है. सिर्फ पांच साल पहले, दिल्ली का सदर बाजार, एक बड़ा खिलौना केंद्र, एक वास्तविक चीनी बाजार था क्योंकि अधिकांश खिलौने चीन से आयात किए जाते थे. बेचे गए खिलौनों में से केवल 20% देश में बने थे. बाकी में चीन की 75% हिस्सेदारी थी. सदर बाजार से अब चाइनीज लेबल गायब हो रहे हैं. कुछ साल पहले तक भारत खिलौनों का शुद्ध आयातक था.

सरकार की भूमिका रही है अहम 
भारत ने अपने खिलौनों के व्यापार को कैसे बदल दिया? इसका सच तो यह है कि भारत का खिलौना बाजार के चीन या दूसरे देशों के मुकाबले नॉन कॉम्‍पिटिटिव बना हुआ है. खिलौना के निर्यात में हुई बढ़ोतरी काफी हद तक सरकार के मजबूत संरक्षणवादी उपायों के कारण हुई है. भारत का खिलौना उद्योग अभी भी अपने दम पर चीन के सामने टिक नहीं पा रहा है. साथ ही, भारत का निर्यात तब बढ़ा जब महामारी के दौरान चीन का विशाल उद्योग सुस्त पड़ रहा था. लेकिन जैसे-जैसे चीनी अर्थव्यवस्था महामारी की मंदी से बाहर निकल रही है, इसका निर्माण इंजन एक साल में वापस पटरी पर आने लगा. 

सरकार ने आयात पर बढ़ाई ड्यूटी 
सरकार की ओर से इस इंडस्‍ट्री को बढ़ावा देने के लिए टॉयकैथॉन 2021 में, क्राउड-सोर्स इनोवेटिव टॉयज और गेम्स आइडियाज की एक पहल का आयोजन किया गया. पीएम मोदी ने कहा था कि 100 बिलियन डॉलर के ग्लोबल टॉय मार्केट में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 1.5 बिलियन डॉलर थी, जबकि चीन की हिस्सेदारी 55-70% होने का अनुमान है. फरवरी 2020 में सरकार ने खिलौनों पर आयात शुल्क 20 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी कर दिया. अब यह बढ़कर 70 फीसदी हो गया है. उच्च शुल्क, जिसने यह सुनिश्चित किया है कि चीनी आयात बहुत कम व्यापारिक समझ में आता है, ने भारतीय उद्योग के विकास और पैमाने को प्राप्त करने के लिए एक जगह बनाई.
 


LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया की ऑटो सेक्टर में एंट्री, आंध्र प्रदेश में बनाएगी ADAS और इंफोटेनमेंट सिस्टम

कंपनी श्री सिटी स्थित अपनी आगामी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में इन-व्हीकल इंफोटेनमेंट सिस्टम, ऑटोमोटिव डिस्प्ले, टेलीमैटिक्स और एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) का निर्माण करेगी. विस्तार योजना के लिए शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 November, 2026
Last Modified:
Thursday, 05 November, 2026
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एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया (LG Electronics India) अब ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी सेक्टर में कदम रखने की तैयारी कर रही है. कंपनी आंध्र प्रदेश के श्री सिटी (Sri City) में अपनी आगामी तीसरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में वाहनों से जुड़े कई तकनीकी उपकरणों का निर्माण करेगी. इसके साथ ही कंपनी का कारोबार होम अप्लायंसेज और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से आगे बढ़कर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी विस्तार करेगा.

कंपनी के बोर्ड ने 5 नवंबर को इस नए कारोबार में प्रवेश के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. नियामकीय फाइलिंग के मुताबिक, कंपनी इन-व्हीकल इंफोटेनमेंट सिस्टम, ऑटोमोटिव डिस्प्ले, टेलीमैटिक्स, व्हीकल कंप्यूटिंग सॉल्यूशंस, एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) और ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में काम करेगी.

शेयरधारकों की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी योजना

इस नए कारोबार के लिए कंपनी ने अपने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MOA) में संशोधन का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत कंपनी को ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से जुड़ी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति मिलेगी. इस संशोधन के लिए पोस्टल बैलेट के जरिए शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी.

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के मुताबिक, इस कारोबार में निवेश चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. निवेश की राशि कारोबार के विस्तार, टेक्नोलॉजी, उपकरणों की जरूरत और बाजार की मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर तय होगी. हालांकि, कंपनी ने फिलहाल इस योजना के लिए कुल निवेश का खुलासा नहीं किया है.

ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी सेक्टर में कंपनी की एंट्री ऐसे समय में हो रही है, जब वाहनों में कनेक्टेड टेक्नोलॉजी, डिजिटल डिस्प्ले और एडवांस्ड सेफ्टी सिस्टम की मांग बढ़ रही है. इस विस्तार से कंपनी को वाहन निर्माण से जुड़े तकनीकी उपकरणों और कनेक्टेड मोबिलिटी के बढ़ते बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा.

दूसरी तिमाही में मुनाफा 25.7 फीसदी बढ़ा

इस बीच, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 25.7 फीसदी बढ़कर 489 करोड़ रुपये हो गया. इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू भी 19.5 फीसदी बढ़कर 7,380 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

कंपनी का ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले का मुनाफा (EBITDA) 28 फीसदी बढ़कर 701 करोड़ रुपये रहा. वहीं, EBITDA मार्जिन पिछले साल की समान तिमाही के 8.9 फीसदी से बढ़कर 9.5 फीसदी हो गया.

होम अप्लायंसेज कारोबार की रेवेन्यू ग्रोथ 20.9 फीसदी

कंपनी के बड़े कारोबार होम अप्लायंसेज एंड एयर सॉल्यूशन सेगमेंट का रेवेन्यू 20.9 फीसदी बढ़कर 4,772 करोड़ रुपये रहा. वहीं, होम एंटरटेनमेंट सेगमेंट का रेवेन्यू 17.2 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 2,608 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कंपनी ने मिड-टीन्स में रेवेन्यू ग्रोथ और शुरुआती डबल-डिजिट EBITDA मार्जिन का अपना अनुमान बरकरार रखा है.

कंपनी ने यह भी बताया कि श्री सिटी स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में कंप्रेसर का उत्पादन वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है. यह यूनिट भारत में कंपनी की व्यापक विनिर्माण विस्तार योजना का हिस्सा है.

 


कैबिनेट का बड़ा फैसला, 14,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी; 92 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता होगी विकसित

सरकार के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना, बिजली ग्रिड की स्थिरता मजबूत करना और उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे भरोसेमंद एवं किफायती बिजली उपलब्ध कराना है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 November, 2026
Last Modified:
Thursday, 05 November, 2026
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केंद्र सरकार ने देश में बड़े स्तर पर ऊर्जा भंडारण प्रणाली (Energy Storage Systems) विकसित करने के लिए 14,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता योजना को मंजूरी दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार, 4 नवंबर को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding - VGF) योजना को स्वीकृति दी गई. इसके तहत देशभर में 92 गीगावॉट घंटे (GWh) की नई ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित की जाएगी. इस योजना की अवधि वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक होगी.

सरकार के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर इस्तेमाल को बढ़ावा देना, बिजली ग्रिड की स्थिरता मजबूत करना और उपभोक्ताओं को चौबीसों घंटे भरोसेमंद एवं किफायती बिजली उपलब्ध कराना है. इससे देश में ऊर्जा भंडारण से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी गति मिलेगी.

97,600 करोड़ रुपये का होगा कुल निवेश

इस योजना के तहत कुल 97,600 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से ऊर्जा भंडारण परियोजनाएं विकसित की जाएंगी. इसमें 60 GWh क्षमता की हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं (PSP), 30 GWh क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) और उभरती हुई वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों के जरिए 2 GWh क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है.

सरकार की ओर से दी जाने वाली 14,500 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता से इन परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता बेहतर होगी और इनके निर्माण एवं संचालन को गति मिलेगी.

2031-32 तक 411 GWh क्षमता का लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2031-32 तक देश में 411 GWh की ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करना है. इस योजना के तहत तैयार होने वाली 92 GWh की नई क्षमता देश में मौजूदा ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता की तुलना में लगभग 170 फीसदी अतिरिक्त होगी. इससे भविष्य में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को संभालने में मदद मिलेगी.

बैटरी निर्माण में घरेलू कंपनियों को मिलेगा बढ़ावा

योजना का एक अहम उद्देश्य ऊर्जा भंडारण क्षेत्र में घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करना और आयात पर निर्भरता कम करना है. इसके लिए बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाओं में कम से कम 40 फीसदी घरेलू सामग्री का इस्तेमाल अनिवार्य होगा. इस प्रावधान से देश में बैटरी और उससे जुड़े उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. साथ ही भारतीय कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर और रोजगार सृजन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.

ऊर्जा भंडारण से चौबीसों घंटे बिजली आपूर्ति संभव

जैक्सन ग्रीन (Jakson Green) के मैनेजिंग डायरेक्टर कन्नन कृष्णन ने कहा कि 92 GWh की ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता के लिए 14,500 करोड़ रुपये की VGF योजना को मंजूरी भारत की ऊर्जा यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है. भारत अब नवीकरणीय ऊर्जा से आगे बढ़कर भरोसेमंद ऊर्जा व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. ऊर्जा भंडारण से सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोतों से मिलने वाली बिजली को चौबीसों घंटे उपलब्ध कराना संभव होगा.

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तीसरे चरण और ऊर्जा भंडारण की व्यवस्था मिलकर स्वच्छ बिजली के पारेषण और उसकी उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करेंगे. वहीं, बैटरी परियोजनाओं में 40 फीसदी घरेलू सामग्री की अनिवार्यता और महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने से घरेलू विनिर्माण मजबूत होगा तथा आयात पर निर्भरता घटेगी. इससे देश की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा दोनों को मजबूती मिलेगी.

प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए होगा परियोजनाओं का आवंटन

ऊर्जा भंडारण क्षमता का आवंटन टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा. बैटरी ऊर्जा भंडारण और हाइड्रो पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनियां वित्तीय सहायता पाने की पात्र होंगी. वहीं, वैकल्पिक ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर आधारित परियोजनाओं को सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियां लागू कर सकेंगी.

सरकार का मानना है कि बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण सुविधाएं विकसित होने से सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों से बनने वाली बिजली का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा. इससे बिजली आपूर्ति में स्थिरता आएगी और मांग के अनुसार बिजली उपलब्ध कराने के लिए पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी. यह पहल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के साथ आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाएगी.


आज बाजार में आएगी तेजी की सुनामी? गिफ्ट निफ्टी 1.4% चढ़ा, कच्चे तेल में 10% की गिरावट

बुधवार को सेंसेक्स 383.55 अंक चढ़कर 77,301.40 पर और निफ्टी 149.75 अंक बढ़कर 23,960.60 पर बंद हुआ था. बाजार में यह लगातार पांचवें सत्र की तेजी थी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 November, 2026
Last Modified:
Thursday, 05 November, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को जोरदार तेजी के साथ कारोबार शुरू होने के संकेत हैं. गिफ्ट निफ्टी करीब 340 अंक यानी 1.4 फीसदी उछलकर 24,300 के पार पहुंच गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 फीसदी की गिरावट, अमेरिकी बाजारों में तेजी और विदेशी निवेशकों की खरीदारी से घरेलू बाजार को मजबूती मिल सकती है. बुधवार को सेंसेक्स 383.55 अंक चढ़कर 77,301.40 पर और निफ्टी 149.75 अंक बढ़कर 23,960.60 पर बंद हुआ था. बाजार में यह लगातार पांचवें सत्र की तेजी थी.

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 93 डॉलर प्रति बैरल पर फिसल गया है. अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद वैश्विक बाजारों में निवेशकों की धारणा मजबूत हुई है. वहीं, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 7,284 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की.

निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर अहम

तकनीकी संकेतों के मुताबिक, निफ्टी में तेजी का रुझान बना हुआ है. इंडेक्स लगातार पांच सत्रों से बुलिश कैंडल बना रहा है और हायर हाई व हायर लो दर्ज कर रहा है. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी 24,000 के ऊपर टिकता है तो यह 24,400 और फिर 24,700 के स्तर तक पहुंच सकता है. निफ्टी का 200-दिन का सिंपल मूविंग एवरेज करीब 24,003 है. अगर इंडेक्स 24,000 से 24,150 के ऊपर बना रहता है तो तेजी जारी रह सकती है. वहीं, इस स्तर से नीचे फिसलने पर शुरुआती बढ़त कमजोर पड़ सकती है.

अमेरिकी बाजारों में तेजी, एशिया में मिला-जुला रुख

बुधवार को अमेरिकी बाजारों में जोरदार तेजी रही. डाउ जोंस 3 फीसदी, एसएंडपी 500 में 1.58 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 0.91 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. हालांकि, गुरुवार सुबह एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार रहा. जापान का निक्केई करीब 1 फीसदी और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3 फीसदी से ज्यादा नीचे कारोबार कर रहा था.

FIIs ने खरीदे 7,284 करोड़ रुपये के शेयर

विदेशी निवेशकों की वापसी भी घरेलू शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है. बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार में 7,284 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की. विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है. इसके अलावा विदेशी निवेशकों की खरीदारी से भी बाजार को समर्थन मिल सकता है. हालांकि, कारोबारी सत्र के दौरान यह देखना अहम होगा कि बाजार शुरुआती तेजी को बरकरार रख पाता है या नहीं. अगर प्रमुख इंडेक्स ऊपरी स्तरों पर टिके रहते हैं, तो बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है.

इन शेयरों पर रहेगी नजर

बीएसई, नायका, अरबिंदो फार्मा, अपोलो हॉस्पिटल्स, लेंसकार्ट, डाबर इंडिया और अपोलो टायर्स के शेयर चर्चा में रहेंगे. सितंबर तिमाही में बीएसई का नेट प्रॉफिट 44.9 फीसदी बढ़कर 809.1 करोड़ रुपये, नायका का 206.8 फीसदी बढ़कर 101.2 करोड़ रुपये और अरबिंदो फार्मा का 32.7 फीसदी बढ़कर 1,126.1 करोड़ रुपये रहा. अपोलो हॉस्पिटल्स का मुनाफा 33.5 फीसदी और लेंसकार्ट का 122.1 फीसदी बढ़ा. डाबर और अपोलो टायर्स ने भी मुनाफे में बढ़त दर्ज की.

शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, प्रीमियर एनर्जीज, एक्साइड इंडस्ट्रीज, एनएचपीसी, हुडको, फिजिक्सवाला, टोरेंट पावर और निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस के शेयरों पर भी नजर रहेगी. पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन, जेके लक्ष्मी सीमेंट और एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर के कमजोर नतीजे भी निवेशकों के रडार पर रहेंगे.

अडानी पावर ने उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन के साथ 1,234 मेगावाट बिजली आपूर्ति के लिए 25 साल का समझौता किया है. एचडीएफसी बैंक को कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम के तहत जमा स्वीकार करने की मंजूरी मिली है. स्विगी ने इंस्टामार्ट के 25 केंद्रों पर बैटरी स्वैपिंग स्टेशन शुरू किए हैं. क्यूपिड, केएसएच इंटरनेशनल, इंडियन होटल्स, पेट्रोनेट एलएनजी, एक्सिस बैंक और मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज भी कारोबारी घोषणाओं के कारण चर्चा में रहेंगे.

अजमेरा रियल्टी में निवेशक मुकुल अग्रवाल ने अपनी पूरी 1.93 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी है. वहीं, गणेश कंज्यूमर प्रोडक्ट्स में पीजीआईएम इंडिया फंड ने अतिरिक्त 0.6 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है.

आज इन कंपनियों के आएंगे नतीजे

ओएनजीसी, भारती एयरटेल, टाइटन, महिंद्रा एंड महिंद्रा, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया, एलआईसी, भारत फोर्ज, फोर्टिस हेल्थकेयर, ग्लेनमार्क फार्मा, एम्फैसिस और संवर्धन मदरसन समेत कई कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित करेंगी. निवेशकों की नजर इनके मुनाफे, रेवेन्यू और मार्जिन पर रहेगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


मोबावेन्यू के रेवेन्यू में 48.6% की बढ़ोतरी, पहली छमाही में मुनाफा 72.2% उछला

एडटेक कंपनी मोबावेन्यू ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही (H1 FY27) के वित्तीय नतीजे जारी किए हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 04 November, 2026
Last Modified:
Wednesday, 04 November, 2026
BWHindia

एडटेक कंपनी मोबावेन्यू (Mobavenue) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है. इस दौरान कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू सालाना आधार पर 48.6 फीसदी बढ़कर 149.6 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, कंपनी के शुद्ध मुनाफे (PAT) में 72.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

कंपनी का टैक्स के बाद मुनाफा (PAT) बढ़कर करीब 22.9 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह इससे कम था. इस दौरान कंपनी का EBITDA भी 59.6 फीसदी बढ़कर करीब 31.6 करोड़ रुपये हो गया.

कंपनी ने वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में भी मजबूत प्रदर्शन किया. इस दौरान उसका रेवेन्यू सालाना आधार पर 41 फीसदी बढ़ा. वहीं, EBITDA में करीब 47 फीसदी और PAT में लगभग 55 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई. तिमाही के दौरान कंपनी का EBITDA मार्जिन 20 फीसदी से ऊपर बना रहा.

कंपनी के आउटकम-बेस्ड रेवेन्यू मॉडल में भी सुधार देखने को मिला. इसके तहत प्रति आउटकम रेवेन्यू में सालाना आधार पर करीब 10.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. यह कंपनी के विज्ञापन और कंज्यूमर ग्रोथ सॉल्यूशंस से मिलने वाली वैल्यू में वृद्धि को दर्शाता है.

अंतरराष्ट्रीय बाजारों से बढ़ा योगदान

मोबावेन्यू के कारोबार की वृद्धि में अंतरराष्ट्रीय बाजारों की अहम भूमिका रही. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कंपनी के कुल रेवेन्यू में विदेशी बाजारों की हिस्सेदारी 22.3 फीसदी रही. वहीं, दूसरी तिमाही में यह बढ़कर 23.8 फीसदी हो गई, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह 12.3 फीसदी थी.

फिलहाल कंपनी 13 देशों में अपने ग्राहकों को सेवाएं दे रही है. दक्षिण-पूर्व एशिया में सिंगापुर को कंपनी ने अपना प्रमुख केंद्र बनाया है. इसके अलावा, अमेरिका समेत उभरते और विकसित बाजारों में अपनी टीम का विस्तार किया जा रहा है.

कंपनी भारत में अपने टेक्नोलॉजी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) को भी मजबूत कर रही है, ताकि अंतरराष्ट्रीय कारोबार को बेहतर तकनीकी सहयोग मिल सके.

AI आधारित विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर फोकस

आने वाले समय में मोबावेन्यू का लक्ष्य खुद को वैश्विक स्तर पर AI आधारित विज्ञापन और कंज्यूमर ग्रोथ प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करना है. इसके लिए कंपनी प्रति आउटकम रेवेन्यू बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करने और मुनाफे के साथ कारोबार की वृद्धि बनाए रखने पर ध्यान दे रही है.

कंपनी का आउटकम-बेस्ड विज्ञापन मॉडल डिजिटल मार्केटिंग इंडस्ट्री में बदलते रुझानों को भी दर्शाता है. अब विज्ञापनदाता अपने मीडिया निवेश के बदले केवल पहुंच और व्यूज के बजाय मापने योग्य कारोबारी नतीजों को अधिक महत्व दे रहे हैं.

मोबावेन्यू ने कहा है कि वह कारोबार के विस्तार के साथ अनुशासित क्रियान्वयन और शेयरधारकों, ग्राहकों तथा भागीदारों के लिए लंबी अवधि में वैल्यू तैयार करने पर अपना ध्यान बनाए रखेगी.


सोने पर अभी और बढ़ेगी मंदी की मार, 11% तक गिर सकते हैं दाम: रिपोर्ट

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का अनुमान है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव गिरकर 3,500 डॉलर प्रति औंस तक आ सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 04 November, 2026
Last Modified:
Wednesday, 04 November, 2026
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सोने की कीमतों में तेजी के बाद अब गिरावट का दौर जारी है. साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड तेजी के साथ 5,500 डॉलर प्रति औंस का स्तर पार करने वाला सोना अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया है. इस साल अब तक सोने की कीमतों में 8 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी है. बाजार में लगातार हो रही मुनाफावसूली के बीच अब ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने सोने की कीमतों में और गिरावट का अनुमान जताया है.

11% तक और सस्ता हो सकता है सोना

नोमुरा ने अपने ताजा रिसर्च नोट में अनुमान लगाया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत गिरकर 3,500 डॉलर प्रति औंस तक आ सकती है. फिलहाल सोना करीब 3,947 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा है. इस लिहाज से मौजूदा स्तर से कीमतों में करीब 11 फीसदी की और गिरावट की संभावना है.

भारतीय बाजार के लिहाज से देखें तो फिलहाल 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 1.39 लाख रुपये है. अगर नोमुरा का अनुमान सही साबित होता है और कीमतों में 11 फीसदी की गिरावट आती है, तो सोना करीब 15,290 रुपये तक सस्ता हो सकता है. ऐसे में 10 ग्राम सोने का भाव घटकर लगभग 1.23 लाख रुपये के स्तर पर आ सकता है.

मुनाफावसूली से सोने की कीमतों पर दबाव

सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे लगातार हो रही मुनाफावसूली को एक बड़ी वजह माना जा रहा है. एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी और रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, निवेशकों की ओर से लगातार बिकवाली किए जाने से सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है. भारी बिकवाली के चलते सोना अब ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है.

उनका कहना है कि सोने की कीमतों में टिकाऊ रिकवरी के लिए बाजार में नई खरीदारी जरूरी है. इसके साथ ही वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संकेतों का अनुकूल होना भी अहम रहेगा.

अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर

आने वाले दिनों में सोने की दिशा तय करने में अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों की अहम भूमिका हो सकती है. जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, बाजार की नजर अमेरिका के चुनाव, बेरोजगारी के आंकड़ों और नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर रहेगी. इन आंकड़ों से अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं.

तकनीकी नजरिए से देखें तो भारतीय बाजार में 1,42,000 रुपये का स्तर सोने के लिए अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है. उनके मुताबिक, जब तक सोना इस स्तर के ऊपर टिककर कारोबार नहीं करता, तब तक निकट अवधि में मजबूत तेजी की संभावना सीमित रह सकती है.

अमेरिका और ईरान पर भी रहेगी नजर

कोटक महिंद्रा एएमसी के फंड मैनेजर सतीश डोंडापति का सोने की कीमतों को लेकर कहा, पिछले एक सप्ताह के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में डॉलर के लिहाज से करीब 3 फीसदी की गिरावट आई है. इस दौरान सोना लगभग एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गया. अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर की कमजोरी से सोने की कीमतों को समर्थन मिलना चाहिए, लेकिन फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की आशंका ने कीमतों पर दबाव बना रखा है. वहीं, ईरान में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो रहे हैं. इससे कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और महंगाई बढ़ने की चिंताएं भी गहरा रही हैं.

भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई से जुड़े जोखिमों के बावजूद सोने की कीमतों को समर्थन नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि बाजार का पूरा ध्यान फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर आगे की रणनीति पर है. हालांकि, कीमतों में आई हालिया गिरावट से सोने में लंबी अवधि के निवेश का आधार नहीं बदलता है. खासकर इसलिए क्योंकि ऊंची ब्याज दरों को लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो सकता है.

निकट अवधि में सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है और इनमें उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है. ऐसे में निवेशकों को मौजूदा स्तरों पर एकमुश्त पूरी रकम निवेश करने से बचना चाहिए. इसके बजाय कीमतों में गिरावट आने पर चरणबद्ध तरीके से निवेश करने पर विचार करना चाहिए. अनिश्चितता से बचाव और निवेश पोर्टफोलियो में विविधता लाने के लिहाज से सोना लंबी अवधि के पोर्टफोलियो का हिस्सा बना रह सकता है.


चार दिन की तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली के संकेत, गिफ्ट निफ्टी टूटा; आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

मंगलवार को बीएसई सेंसेक्स 1,225.07 अंक यानी 1.62 फीसदी उछलकर 76,917.85 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 370.05 अंक यानी 1.58 फीसदी की बढ़त के साथ 23,810.85 पर पहुंच गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 04 November, 2026
Last Modified:
Wednesday, 04 November, 2026
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भारतीय शेयर बाजार के लिए बुधवार, 4 नवंबर का कारोबारी सत्र अहम रहने वाला है. मंगलवार को जोरदार तेजी के साथ बंद हुए बाजार में आज मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है. कारोबार शुरू होने से पहले गिफ्ट निफ्टी करीब 60-70 अंक टूटकर 23,700 के आसपास पहुंच गया था. इससे घरेलू बाजार की कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं.

दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत घटकर 103 डॉलर प्रति बैरल के करीब आ गई है. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक मानी जा रही है. इसके अलावा विदेशी निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और रुपये की मजबूती से भी बाजार को समर्थन मिल सकता है.

सेंसेक्स 1,225 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,800 के पार

मंगलवार को शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही. बीएसई सेंसेक्स 1,225.07 अंक यानी 1.62 फीसदी उछलकर 76,917.85 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 370.05 अंक यानी 1.58 फीसदी की बढ़त के साथ 23,810.85 पर पहुंच गया.

मिडकैप इंडेक्स में 0.8 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.3 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. सेक्टोरल इंडेक्स में एफएमसीजी 2.5 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा. रियल्टी, प्राइवेट बैंक और ऑटो शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली. दूसरी ओर, पीएसयू बैंक और एनर्जी इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए.

आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बुधवार को सितंबर तिमाही के नतीजों और कारोबारी घोषणाओं के चलते एमसीएक्स, ल्यूपिन, लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी, बाटा इंडिया और मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर के शेयर फोकस में रहेंगे. एमसीएक्स का मुनाफा 130.2 फीसदी बढ़कर 454.6 करोड़ रुपये रहा, जबकि ल्यूपिन के मुनाफे में 22.2 फीसदी की गिरावट आई. लॉयड्स मेटल्स का मुनाफा 88 फीसदी और मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर का 42.7 फीसदी बढ़ा. इसके अलावा जेएनके इंडिया को 300-600 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है, जबकि हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को 198.3 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स, हिंदुस्तान जिंक और पतंजलि फूड्स की कॉरपोरेट घोषणाओं पर भी निवेशकों की नजर रहेगी. बल्क डील के चलते एसएफसी एनवायरनमेंटल टेक्नोलॉजीज, वुमनकार्ट और वर्धमान पॉलीटेक्स के शेयरों में हलचल रह सकती है.

आज इन कंपनियों के आएंगे तिमाही नतीजे

बुधवार को अपोलो हॉस्पिटल्स, लेंसकार्ट, नायका, फिजिक्सवाला, अपोलो टायर्स, अरबिंदो फार्मा, बायोकॉन, डाबर इंडिया, कमिंस इंडिया, टोरेंट पावर और जायडस लाइफसाइंसेज समेत कई कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. निवेशकों की नजर इन कंपनियों के मुनाफे, रेवेन्यू और भविष्य के कारोबारी अनुमानों पर रहेगी.

इन कंपनियों के शेयरों की होगी लिस्टिंग

आज एमके सन्स फाइन ज्वेल्स के शेयर बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे. इसके अलावा एसएमई प्लेटफॉर्म पर कार्वर रोबोवेल्ड और अजवा प्रोजेक्ट्स के शेयरों की भी लिस्टिंग होगी.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


भारत में कारोबार बढ़ाने की तैयारी में डुमारे, EV और AI टेक्नोलॉजी पर रहेगा फोकस

डुमारे ग्रुप भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने के साथ इंजन की दक्षता बढ़ाने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कंट्रोल सिस्टम और क्लीन मोबिलिटी सॉल्यूशंस पर काम कर रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 03 November, 2026
Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
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ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग क्षेत्र की कंपनी डुमारे इंडिया (Dumarey India) ने भारत में अपने नए कारोबार की शुरुआत की है. कंपनी इस नई सुविधा के जरिए भारत के ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग इकोसिस्टम में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के साथ सस्टेनेबल मोबिलिटी के क्षेत्र में अपनी भूमिका बढ़ाना चाहती है. कंपनी का लक्ष्य पारंपरिक इंजन के साथ इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड, हाइड्रोजन और इथेनॉल आधारित तकनीकों में भी अपनी क्षमताएं बढ़ाना है. बिजनेस वर्ल्ड से बातचीत में डुमारे इंडिया के प्रमुख अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि कंपनी ऑटोमोबाइल के अलावा डेटा सेंटर, निर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी तकनीकी समाधान विकसित कर रही है.

ऑटोमोबाइल से डेटा सेंटर तक कारोबार का विस्तार

बिजनेस वर्ल्ड से बातचीत में डुमारे इंडिया के प्रमुख अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि कंपनी का काम केवल पारंपरिक इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) तक सीमित नहीं है. डुमारे इंडिया ट्रैक्टर, ऑफ-हाईवे वाहन और निर्माण क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले वाहनों के लिए भी तकनीक और सेवाएं उपलब्ध कराती है.

उन्होंने कहा कि कंपनी बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और हाइब्रिड वाहनों के लिए भी काम कर रही है. इसके अलावा हाइड्रोजन, फ्लेक्स फ्यूल, इथेनॉल, लिथियम और यूरो-7 से जुड़े एप्लिकेशन पर भी काम किया जा रहा है. कंपनी के ग्राहकों में दोपहिया वाहन निर्माता कंपनियों से लेकर भारी वाणिज्यिक वाहन और निर्माण उपकरण बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं.

अग्रवाल के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा सेंटर के लिए ऊर्जा समाधान विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं. कंपनी बड़े इंजनों पर काम कर रही है, जिनका इस्तेमाल पहले जहाजों में किया जाता था. अब इन्हें डेटा सेंटर के लिए सीएनजी आधारित ऊर्जा स्रोत के रूप में इस्तेमाल करने के लिहाज से तैयार किया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि कंपनी ऐसे काइनेटिक सिस्टम भी विकसित कर रही है, जो बिजली की मांग में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को संभाल सकें. इसके साथ ही पूरी कम्बशन प्रणाली को बेहतर बनाने पर काम किया जा रहा है, ताकि इंजन की दक्षता 50 फीसदी तक पहुंचाई जा सके.

1 लीटर इंजन से 400 हॉर्सपावर तक की ताकत

कंपनी की भविष्य की योजनाओं पर बात करते हुए प्रतिनिधियों ने बताया कि डुमारे का प्रमुख लक्ष्य इंजन की दक्षता के मामले में अपनी तकनीकी क्षमता को बेहतर बनाना है. इसके लिए प्री-चैंबर कम्बशन (Pre-chamber Combustion) तकनीक पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

कंपनी के मुताबिक, उसके ज्यादातर इंजन टर्बोचार्ज्ड होंगे. कुछ इंजन एक लीटर क्षमता में 400 हॉर्सपावर तक की ताकत देने में सक्षम हैं. कंपनी पहले एक सिलेंडर के आधार पर तकनीक विकसित करती है और फिर उसी तकनीक को बड़े इंजनों में इस्तेमाल करती है.

इस तकनीक को औद्योगिक क्षेत्र में 60 लीटर क्षमता वाले V20 इंजन तक और दूसरी ओर 1.6 लीटर क्षमता वाले V6 इंजन तक इस्तेमाल किया जा सकता है. कंपनी का मानना है कि कम्बशन तकनीक में सुधार से अलग-अलग श्रेणियों के इंजनों की दक्षता बढ़ाई जा सकती है.

इंजन मैनेजमेंट और डायग्नोस्टिक्स में AI का इस्तेमाल

डुमारे भविष्य में अपने कंट्रोल सिस्टम और सॉफ्टवेयर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी कर रही है. कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि आधुनिक इंजन और वाहन लगातार अधिक जटिल होते जा रहे हैं. ऐसे में इंजन की स्थिति, उसकी उम्र, संभावित खराबियों और प्रदर्शन का अनुमान लगाने के लिए उन्नत एल्गोरिदम की जरूरत है.

कंपनी ने इसके लिए एक अलग बिजनेस यूनिट बनाई है, जो पूरी तरह AI पर केंद्रित है. यह यूनिट कंट्रोलर, डायग्नोस्टिक्स, इंजन मैनेजमेंट, कम्बशन और आफ्टर-ट्रीटमेंट जैसे क्षेत्रों में काम करेगी.

इसके अलावा कंपनी अपने ग्राहकों को भी AI आधारित सेवाएं उपलब्ध कराना चाहती है. इन सेवाओं के जरिए ग्राहक वाहनों और इंजनों से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण कर सकेंगे और उनके प्रदर्शन में समय के साथ होने वाले बदलावों का अनुमान लगा सकेंगे.

कंपनी के मुताबिक, इस तकनीक से किसी उत्पाद को बाजार में लाने में लगने वाला समय कम करने में मदद मिलेगी. साथ ही इंजन की पूरी जीवन अवधि के दौरान उसकी कार्यक्षमता और संभावित खराबियों का पहले से अनुमान लगाया जा सकेगा. इसका इस्तेमाल भारी ट्रकों, बसों और यात्री कारों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जा सकता है.

इलेक्ट्रिक और पारंपरिक इंजन के बीच तकनीक का मिश्रण जरूरी

भारतीय ग्राहकों के लिए संदेश देते हुए कंपनी के प्रतिनिधियों ने कहा कि किसी वाहन या इंजन की तकनीक का आकलन केवल उसमें इस्तेमाल होने वाले ईंधन के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए. इसके बजाय यह देखना जरूरी है कि एक किलोमीटर की दूरी तय करने में कितनी ऊर्जा खर्च होती है और पूरे जीवनकाल में उसकी वास्तविक लागत कितनी रहती है.

उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में अलग-अलग तकनीकों का मिश्रण देखने को मिलेगा. इलेक्ट्रिफिकेशन को लेकर मौजूदा धारणाओं का भी अगले 10 वर्षों में दोबारा आकलन करना पड़ सकता है.

कंपनी के प्रतिनिधियों ने तकनीक के पूरे जीवन चक्र (Cradle to Cradle) के आधार पर उसके पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन करने पर जोर दिया. इसमें किसी तकनीक के निर्माण से लेकर उसके इस्तेमाल, कार्बन उत्सर्जन और अंत में रिसाइक्लिंग तक के सभी पहलुओं को शामिल करना जरूरी है.

उन्होंने बैटरी रिसाइक्लिंग को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया. उनके मुताबिक, बाजार में कई तरह की बैटरियां उपलब्ध हैं, लेकिन उन्हें रिसाइकिल करना उतना आसान नहीं है, जितना आमतौर पर माना जाता है. अगर इस चुनौती का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ी मात्रा में बैटरी कचरा लैंडफिल तक पहुंच सकता है.

भारत को बताया अहम ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग बाजार

डुमारे ग्रुप के फाउंडर गुइडो डुमारे ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग बाजारों में से एक है. गुरुग्राम में नए कॉरपोरेट ऑफिस में निवेश कंपनी की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

उन्होंने कहा कि यूरोप की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता को भारत की तकनीकी प्रतिभा और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं के साथ जोड़कर कंपनी स्वच्छ, अधिक कुशल और टिकाऊ पावरट्रेन सॉल्यूशंस की दिशा में काम करेगी. उन्होंने कहा कि भारत में नए ऑफिस की शुरुआत स्थानीय जरूरतों के अनुरूप इंजीनियरिंग समाधान उपलब्ध कराने की कंपनी की प्रतिबद्धता का हिस्सा है. घरेलू स्तर पर कुशल कर्मचारियों और मजबूत सप्लायर नेटवर्क के साथ कंपनी अपने ऑरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEM) पार्टनर्स की बदलती जरूरतों को पूरा करने की दिशा में काम करेगी.

 

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बच्चों पर सोशल मीडिया के असर को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मेटा के फेसबुक-इंस्टाग्राम पर उठे सवाल

याचिका में आरोप लगाया गया है कि फेसबुक और इंस्टाग्राम के एल्गोरिदम बच्चों को लंबे समय तक स्क्रीन पर सक्रिय रहने के लिए प्रेरित करते हैं. याचिकाकर्ता ने बच्चों की मानसिक सेहत, निजता और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भारत में विशेष सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 03 November, 2026
Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
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बच्चों की मानसिक सेहत और ऑनलाइन सुरक्षा पर सोशल मीडिया के कथित दुष्प्रभावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मेटा (Meta) के प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है. यह याचिका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम और उनके जरिए बच्चों के बीच बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर चिंता जताते हुए दायर की गई है.

संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अधिवक्ता और लीगल-टेक्नोलॉजी उद्यमी श्रीरूपा चौधरी ने यह जनहित याचिका दायर की है. इसमें आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल होने वाले एल्गोरिदम आधारित फीचर्स बच्चों को लगातार कंटेंट देखने और लंबे समय तक प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.

सोशल मीडिया के किन फीचर्स पर उठाए सवाल?

याचिका में इनफिनिट स्क्रॉलिंग, ऑटोप्ले रील्स, पर्सनलाइज्ड रिकमेंडेशन और यूजर्स के व्यवहार की प्रोफाइलिंग जैसे फीचर्स पर सवाल उठाए गए हैं. याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन फीचर्स को इस तरह तैयार किया गया है कि यूजर्स अधिक से अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताएं.

याचिका में कहा गया है कि इसका बच्चों पर गंभीर असर पड़ सकता है. इनमें सोशल मीडिया की लत, चिंता, अवसाद, नींद की कमी, शरीर की छवि को लेकर असंतोष और ऑनलाइन ग्रूमिंग जैसे खतरे शामिल हैं. इसके अलावा बच्चों के चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल (CSAM) के संपर्क में आने की आशंका भी जताई गई है.

भारत में फेसबुक-इंस्टाग्राम के करोड़ों यूजर्स

याचिका में भारत में मेटा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बड़े यूजर बेस का भी उल्लेख किया गया है. DataReportal की रिपोर्ट 'Digital 2026: India' का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत में इंस्टाग्राम के करीब 48.05 करोड़ और फेसबुक के लगभग 40.3 करोड़ यूजर्स हैं.

याचिकाकर्ता के मुताबिक, भारत मेटा का दुनिया में सबसे बड़ा राष्ट्रीय बाजार है. यहां इन दोनों प्लेटफॉर्म के यूजर्स की संख्या अमेरिका के मुकाबले 2 से 2.6 गुना तक है.

याचिका में तर्क दिया गया है कि भारत में सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले बच्चों की बड़ी संख्या को देखते हुए देश के लिए अलग और मजबूत चाइल्ड सेफ्टी उपायों की जरूरत है. भारतीय बच्चों को ऑनलाइन सुरक्षा के मामले में पश्चिमी देशों के बच्चों की तुलना में कम संरक्षण नहीं मिलना चाहिए.

बच्चों की सुरक्षा के लिए अलग फंड बनाने की मांग

याचिका में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नेशनल चाइल्ड ऑनलाइन सेफ्टी एंड वेलफेयर फंड बनाने की मांग की गई है. इसके लिए मेटा से कथित नुकसान के अनुपात में मुआवजा लेने का प्रस्ताव रखा गया है.

इसके अलावा याचिकाकर्ता ने नाबालिग यूजर्स की संख्या और बच्चों की सुरक्षा के लिए मौजूदा व्यवस्थाओं से जुड़ी भारत-विशिष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है. इसमें सुरक्षा के डिफॉल्ट विकल्प मजबूत करने, एल्गोरिदम पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने और बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों को रोकने के लिए पर्याप्त सरकारी दिशा-निर्देश बनाने की मांग भी शामिल है.

मेटा से 18 अरब डॉलर के बराबर मुआवजे की मांग

याचिका में मुआवजे की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई है. याचिकाकर्ता ने प्रस्तावित फंड में कम से कम उतनी राशि जमा कराने की मांग की है, जितनी मेटा ने अन्य देशों में इसी तरह के मामलों में समझौतों के तहत देने की बात कही है.

इस संबंध में अगस्त 2026 में अमेरिका में कई राज्यों के साथ हुए कम से कम 18 अरब डॉलर के कथित समझौते का हवाला दिया गया है.

याचिकाकर्ता का तर्क है कि भारत में फेसबुक और इंस्टाग्राम का यूजर बेस अमेरिका से काफी बड़ा है. ऐसे में भारतीय बच्चों को हुए कथित नुकसान के लिए मुआवजे की राशि भी यहां के यूजर बेस और भारतीय बाजार से मेटा को होने वाले कारोबारी लाभ के अनुपात में तय होनी चाहिए.

NCPCR से स्वतंत्र जांच की मांग

जनहित याचिका में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) से इस मामले की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की गई है. साथ ही भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बच्चों की मानसिक सेहत पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर अलग से शोध कराने का अनुरोध किया गया है.

याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि यह मुकदमा जनहित में यानी प्रो बोनो पब्लिको (Pro Bono Publico) के तहत दायर किया गया है. इसमें उनका कोई व्यक्तिगत या व्यावसायिक हित नहीं है.

 


टाटा ग्रुप के विवाद पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सलाह, आपसी बातचीत से सुलझाएं मतभेद

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा ग्रुप के नेतृत्व से आंतरिक मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने और समूह में सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप भारतीय अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है और इस विवाद का सार्वजनिक रूप से जारी रहना ठीक नहीं है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 03 November, 2026
Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा ग्रुप में चल रहे विवाद को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने की अपील की है. उन्होंने संकेत दिया कि फिलहाल सरकार इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत नहीं समझती है. 2 नवंबर को एक कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि विवाद से जुड़े पक्षों को आपसी बातचीत के जरिए अपने मतभेद दूर करने चाहिए.

सीतारमण ने टाटा ग्रुप के नेतृत्व से एक-दूसरे के साथ बातचीत करने और समूह में सामान्य स्थिति बहाल करने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. देश के औद्योगिक विकास में समूह के योगदान और इसकी ब्रांड वैल्यू को देखते हुए विवाद का जल्द समाधान जरूरी है.

टाटा संस को लेकर क्या है विवाद?

टाटा ग्रुप में मौजूदा विवाद टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के बीच मतभेदों से जुड़ा है. यह विवाद होल्डिंग कंपनी के संचालन, भविष्य की योजनाओं और गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों पर है. इसमें टाटा संस की संभावित शेयर बाजार में लिस्टिंग और चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का मामला भी शामिल है.

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि शापूरजी पलोनजी ग्रुप की इसमें लगभग 18.4 फीसदी हिस्सेदारी है. शापूरजी पलोनजी ग्रुप लंबे समय से टाटा संस में अपने निवेश का मूल्य हासिल करने के लिए कंपनी की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग का रास्ता तलाश रहा है.

चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर बढ़े मतभेद

यह विवाद 17 सितंबर को हुई टाटा संस के बोर्ड की बैठक के बाद और गहरा गया. इस बैठक में एन चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के कार्यकाल के लिए दोबारा चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी दी गई थी. साथ ही नियामकीय आवश्यकताओं के अनुसार कंपनी की लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला लिया गया था. नोएल टाटा ने इन फैसलों का विरोध किया था.

दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस को अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के रूप में वर्गीकृत किया है. इसके तहत कंपनी पर सख्त नियामकीय नियम लागू होते हैं, जिनमें शेयर बाजार में लिस्टिंग की अनिवार्यता भी शामिल है.

टाटा संस ने इस वर्गीकरण से बाहर निकलने की कोशिश की है, लेकिन आरबीआई ने लिस्टिंग का मुद्दा अभी बरकरार रखा है.

26 नवंबर की बैठक पर नजर

टाटा ग्रुप में मतभेद अब टाटा ट्रस्ट्स के कामकाज और गवर्नेंस तक भी पहुंच गए हैं. ट्रस्टियों ने प्रशासनिक मामलों और नेतृत्व से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए हैं. अब इस मामले में अगला बड़ा घटनाक्रम 26 नवंबर को होने वाली टाटा संस के बोर्ड की बैठक में देखने को मिल सकता है. इस बैठक में होल्डिंग कंपनी के प्रस्तावित पुनर्गठन और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.

 


2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा उत्पादन का लक्ष्य, 50 हजार करोड़ रुपये के निर्यात पर सरकार की नजर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- सेना के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर है जोर, रक्षा बजट बढ़कर रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये हुआ

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 03 November, 2026
Last Modified:
Tuesday, 03 November, 2026
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भारत ने साल 2029 तक रक्षा उत्पादन को बढ़ाकर 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि मौजूदा और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए सेना का आधुनिकीकरण तेज करने और देश की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाने की जरूरत है.

राजस्थान के जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की 'भारतीय सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण' विषय पर आयोजित सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए राजनाथ सिंह ने ये बातें कहीं. बैठक में युद्ध के बदलते तौर-तरीकों, तकनीकी विकास और थलसेना, नौसेना तथा वायुसेना की परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, बैठक में छह प्रमुख क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया. इनमें सैन्य क्षमताओं का विकास और आधुनिकीकरण, तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, स्वदेशी रक्षा विनिर्माण, उभरती तकनीक, रक्षा अनुसंधान एवं नवाचार और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल शामिल हैं.

राजनाथ सिंह ने कहा कि तकनीक आधारित युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार बजटीय सहायता, रक्षा खरीद, तकनीकी विकास और सैन्यकर्मियों के कौशल पर विशेष ध्यान दे रही है.

रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये हुआ रक्षा बजट

रक्षा मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट बढ़ाकर रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है. इसमें सेना के आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

उन्होंने कहा कि देश का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 के 46,429 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया है. वहीं, वर्ष 2014 में 2,000 करोड़ रुपये से कम रहने वाला रक्षा निर्यात बढ़कर करीब 40,000 करोड़ रुपये पहुंच गया है.

राजनाथ सिंह ने कहा, "हमारा लक्ष्य 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 50 हजार करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करना है."

उन्होंने रक्षा क्षेत्र में विदेशी स्रोतों पर भारत की रणनीतिक निर्भरता कम करने की जरूरत पर भी जोर दिया. इसके लिए घरेलू स्तर पर अनुसंधान, डिजाइन, विकास और विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकार निजी कंपनियों, स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी भी बढ़ा रही है.

रक्षा क्षेत्र में AI और ऑटोनॉमस सिस्टम पर जोर

बैठक में भविष्य के युद्धों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऑटोनॉमस सिस्टम, मानवरहित प्लेटफॉर्म, साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और आधुनिक संचार तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा हुई.

रक्षा मंत्री ने उन्नत हथियारों, मिसाइलों और सैन्य प्रणालियों के विकास में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के योगदान को रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि अनुसंधान को सैन्य इस्तेमाल के योग्य क्षमताओं में बदलने के लिए तीनों सेनाओं, DRDO, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, निजी उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना जरूरी है.

सेना के जवानों की तैयारी और कौशल बढ़ाने पर भी जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि सैन्य आधुनिकीकरण का मतलब केवल नए हथियार और उपकरण खरीदना नहीं है, बल्कि सेना के जवानों की क्षमताओं और परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाना भी है.

उन्होंने भारतीय सेना में शुरू की गई नई टुकड़ियों असनी, भैरव और शक्तिबाण प्लाटून का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ये नई टुकड़ियां मौजूदा सैन्य जरूरतों को पूरा करने में प्रभावी साबित हो रही हैं.

बैठक में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय, संयुक्त सैन्य योजना और अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध सैन्य क्षमताओं के एकीकृत इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया.

इस विचार-विमर्श में लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों ने भी अपने सुझाव दिए. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, बैठक में महत्वपूर्ण सैन्य क्षमताओं को प्राथमिकता देने, विभिन्न पक्षों के बीच समन्वय बढ़ाने, रक्षा खरीद और विकास की प्रक्रियाओं को सरल बनाने और तय लक्ष्यों की समय-समय पर समीक्षा करने का रोडमैप तैयार किया गया.