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कर्ज महंगा करके कैसे कंट्रोल होगी महंगाई? समझिए पूरा गणित
महंगाई सीधे तौर पर डिमांड और सप्लाई के अंतर की वजह से चढ़ती है और इस अंतर की एक वजह है पर्चेजिंग पावर बढ़ना.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
महंगाई के दौर में कर्ज भी महंगा हो गया है. रिजर्व बैंक के रेपो रेट में बढ़ोत्तरी के तुरंत बाद बैंकों ने लोन पर ब्याज दर बढ़ाना शुरू कर दिया है. यानी आपको अब पहले से ज्यादा EMI देनी होगी. RBI ने यह कदम महंगाई को कम करने के लिए उठाया है. ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि कर्ज महंगा करके महंगाई कैसे कंट्रोल होगी? चलिए इस पूरे गणित को सरल शब्दों में समझते हैं.
ऐसे चढ़ती है महंगाई
महंगाई सीधे तौर पर डिमांड और सप्लाई के अंतर की वजह से चढ़ती है और इस अंतर की एक वजह है पर्चेजिंग पावर बढ़ना. यानी आपके हाथ में यदि ज्यादा पैसा होगा, तो आप खुलकर खर्च करेंगे. इस खर्च के चलते डिमांड बढ़ेगी और यदि सप्लाई पूरी नहीं हो पाई तो महंगाई बढ़ेगी. रेपो रेट बढ़ाकर RBI ने कोशिश की है कि आपके हाथ अतिरिक्त पैसा न पहुंचे. जब ज्यादा पैसा नहीं होगा, तो आप ज्यादा खर्च नहीं करेंगे. न डिमांड बढ़ेगी और न मांग और आपूर्ति के बीच अंतर आएगा.
इस तरह भी समझें
इसे दूसरी तरह से भी समझते हैं. ब्याज दरें कम होने से बाजार में अतिरिक्त लिक्विडिटी बढ़ जाती है. कहने का मतलब है कि लोग बिना ज़रूरत के सामान खरीदने के लिए लोन आदि लेने लगते हैं. इससे डिमांड में एकदम से इजाफा होता है, सप्लाई सीमित होने की वजह यह महंगाई का रूप ले लेता है. रिजर्व बैंक के रेपो रेट बढ़ाने से बैंक कर्ज महंगा करेंगे, जिससे लिक्विडिटी या अतिरिक्त पैसा घटने लगेगा. ऐसे में लोग जो बिना जरूरत के सामान खरीदने लगते हैं, उनकी खरीदारी कम हो जाएगी और महंगाई पर लगाम लग जाएगी.
घटेगी Artificial Demand
RBI का मानना है कि बाजार से लिक्विडिटी कम करने से Artificial Demand को कंट्रोल करने में मदद मिलती है. इससे मांग घटती है, जो महंगाई को नियंत्रित करने का काम करती है. वैसे ये फ़ॉर्मूला केवल भारत ही नहीं अमेरिका जैसे देशों में भी अपनाया जाता है. हालांकि, ये बात अलग है कि कई एक्सपर्ट्स इसे ज्यादा कारगर नहीं मानते. उनका कहना है कि पैसे और महंगाई के बीच का ये रिश्ता ऐसा नहीं है, जिसे रेपो रेट में बदलाव से नियंत्रित किया जा सकता है. पूर्व के वर्षों में रिजर्व बैंक के इस तरह के फैसलों से महंगाई रोकने में खास सफलता नहीं मिली है. इस बार RBI का यह फैसला आसमान पर जा पहुंची महंगाई को नीचे लाने में कारगर होगा या नहीं ये देखने वाली बात होगी.
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