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अल-नीनो की मार, देश में मानसून 40% कमजोर; खेती, उद्योग और अर्थव्यवस्था पर खतरा

बारिश की भारी कमी से धान और सोयाबीन की बुआई प्रभावित, सूखे की आशंका ने बढ़ाई सरकार और किसानों की चिंता

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago

देश में मानसून की शुरुआत उम्मीदों के विपरीत बेहद कमजोर रही है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 18 जून तक देशभर में मानसूनी बारिश सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम दर्ज की गई है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि विकसित हो रहा अल-नीनो प्रभाव मानसून को कमजोर कर रहा है, जिससे कृषि उत्पादन, जल आपूर्ति और औद्योगिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ने की आशंका है.

शुरुआती मानसून ने बढ़ाई चिंता

जून से सितंबर तक चलने वाला मानसून भारत की वार्षिक वर्षा का प्रमुख स्रोत है. लेकिन इस बार मानसून की कमजोर शुरुआत ने किसानों और नीति-निर्माताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है. धान, सोयाबीन और मूंगफली जैसी खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है, जबकि निर्माण क्षेत्र समेत कई उद्योगों की गतिविधियों पर भी असर पड़ने लगा है.

सबसे शक्तिशाली अल-नीनो में से एक बनने के संकेत

अंतरराष्ट्रीय मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा अल-नीनो हाल के वर्षों के सबसे मजबूत अल-नीनो में से एक साबित हो सकता है. विभिन्न मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि जुलाई और अगस्त में भी उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य से कम बारिश हो सकती है.

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल ऐसा कोई मजबूत संकेत नहीं दिख रहा है जिससे देशभर में वर्षा की कमी की भरपाई हो सके. अगले कुछ दिनों में कुछ क्षेत्रों में बारिश बढ़ सकती है, लेकिन इससे पूरे देश में मानसून की स्थिति सामान्य होने की उम्मीद नहीं है.

कृषि और खाद्य सुरक्षा पर मंडराया खतरा

भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल, चीनी और कपास उत्पादक देशों में शामिल है. देश का कृषि क्षेत्र बड़े पैमाने पर मानसूनी बारिश पर निर्भर करता है. यदि बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है.

विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर उत्पादन की स्थिति में सरकार को कुछ कृषि उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं, ताकि घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.

जल संकट के संकेत भी दिखने लगे

कमजोर मानसून का असर अब शहरी क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है. मुंबई की जलापूर्ति एजेंसी ने निर्माण स्थलों को पानी की आपूर्ति रोक दी है. पिछले 12 वर्षों में यह पहली बार है जब ऐसा कदम उठाया गया है. इसके अलावा व्यवसायों, कारखानों और खेल क्लबों के लिए जल आपूर्ति में कटौती की गई है, जबकि स्विमिंग पूलों को पानी देना भी बंद कर दिया गया है.

अगले सप्ताह बारिश में सुधार की उम्मीद

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले सप्ताह कुछ क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. दक्षिण-पश्चिमी नम हवाएं मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करेंगी और इसके जुलाई की शुरुआत तक उत्तर भारत तक पहुंचने की संभावना है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के समग्र प्रदर्शन को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है और व्यापक मौसम परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल नहीं दिख रही हैं.

सोयाबीन और मूंगफली उत्पादक क्षेत्रों में सूखे की चेतावनी

कृषि मौसम विशेषज्ञों ने देश के प्रमुख सोयाबीन और मूंगफली उत्पादक इलाकों के लिए गंभीर सूखे की चेतावनी जारी की है. उनका मानना है कि यदि जुलाई तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो सोयाबीन की बुआई में देरी हो सकती है और फसल की वृद्धि अवधि भी कम हो सकती है.

खरीफ सीजन के लिए निर्णायक साबित होंगे अगले कुछ सप्ताह

वर्तमान में किसान साल के सबसे बड़े बुआई सीजन के बीच हैं. ऐसे में अगले कुछ सप्ताह खरीफ फसलों के भविष्य के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं. यदि जल्द बारिश में सुधार होता है तो स्थिति संभल सकती है, लेकिन मौसम विभाग और वैश्विक एजेंसियों के पूर्वानुमान एक दशक से अधिक समय में सबसे कमजोर मानसून की आशंका जता रहे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत होता अल-नीनो भारतीय मानसून को कमजोर और असमान बना सकता है, जिससे कृषि उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ने का जोखिम बढ़ गया है.

 


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