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रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक उछाल, 25 गुना बढ़ोतरी से डिफेंस कंपनियों के लिए खुले नए अवसर

भारत में निर्मित रक्षा उपकरण अब दुनिया के 80 से ज्यादा देशों को निर्यात किए जा रहे हैं. इनमें रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार सिस्टम, मिसाइल, गोला-बारूद, एयरोस्पेस कंपोनेंट्स और नौसैनिक उपकरण प्रमुख हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 months ago

भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से वैश्विक पहचान बना रहा है. 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने की नीति अब ठोस परिणाम देती नजर आ रही है. वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा निर्यात 63 प्रतिशत की वृद्धि के साथ रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यह वित्त वर्ष 2016-17 की तुलना में करीब 25 गुना अधिक है. बढ़ते निर्यात और सरकारी प्रोत्साहन से रक्षा क्षेत्र की कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिस पर निवेशकों की भी पैनी नजर है.

80 से अधिक देशों तक पहुंच रहे भारतीय रक्षा उत्पाद

भारत में निर्मित रक्षा उपकरण अब दुनिया के 80 से ज्यादा देशों को निर्यात किए जा रहे हैं. इनमें रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार सिस्टम, मिसाइल, गोला-बारूद, एयरोस्पेस कंपोनेंट्स और नौसैनिक उपकरण प्रमुख हैं.

रक्षा निर्यात में इस तेज बढ़ोतरी के पीछे सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में कुल रक्षा निर्यात में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSU) की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले 43.8 प्रतिशत थी. वहीं निजी क्षेत्र का योगदान 45 प्रतिशत रहा, जो रक्षा उद्योग में उसकी बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है.

FY29 तक 50,000 करोड़ रुपये निर्यात का लक्ष्य

सरकार ने वित्त वर्ष 2028-29 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है. इसके लिए स्वदेशी तकनीक के विकास, स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.

उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय रक्षा कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं, जिससे इस क्षेत्र की विकास गति और तेज हो सकती है.

Astra Microwave पर बढ़ी बाजार की नजर

रक्षा और एयरोस्पेस इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स् (Astra Microwave Products) इस उभरते अवसर का लाभ उठाने की स्थिति में दिखाई दे रही है. कंपनी रडार, टैक्टिकल सिस्टम और स्पेस इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्माण करती है तथा अमेरिका, इजराइल और सिंगापुर समेत कई देशों को निर्यात करती है.

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के कुल राजस्व का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा निर्यात से आया. कंपनी अब कम मार्जिन वाले कारोबार से हटकर बौद्धिक संपदा (IP) आधारित उत्पादों और उच्च मूल्य वाले प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रही है.

31 मार्च 2026 तक कंपनी की ऑर्डर बुक 2,600 करोड़ रुपये की थी. इसी अवधि में उसका राजस्व 10.6 प्रतिशत बढ़कर 1,163 करोड़ रुपये और EBITDA 24 प्रतिशत बढ़कर 334 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

निवेशकों के लिए क्यों अहम है डिफेंस सेक्टर

विश्लेषकों के अनुसार, रक्षा निर्यात में लगातार वृद्धि, आत्मनिर्भरता पर सरकार का जोर और वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग भारतीय डिफेंस सेक्टर के लिए लंबी अवधि के मजबूत अवसर तैयार कर रही है.

ऐसे में रक्षा कंपनियों के शेयर निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. यदि सरकार अपने निर्यात लक्ष्यों को हासिल करने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में डिफेंस सेक्टर भारतीय शेयर बाजार के सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में शामिल हो सकता है.

 


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