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कॉमर्स मंत्रालय ने अब इस खाद्य पदार्थ के निर्यात को किया बैन
देश में इस साल कई राज्यों में बारिश न होने के चलते धान का रकबा कम होने के कारण कॉमर्स मंत्रालय ने ब्रोकन राइस के निर्यात पर बैन लगा दिया है. ये अधिसूचना बीती रात से लागू हो गई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
देश में इस साल कई राज्यों में बारिश न होने के चलते धान का रकबा कम होने के कारण कॉमर्स मंत्रालय ने ब्रोकन राइस के निर्यात पर बैन लगा दिया है. देर रात जारी हुई इस अधिसूचना में मंत्रालय की ओर से ये भी बताया गया है कि ये अधिसूचना बीती रात से लागू हो गई है. जिसके बाद अब ब्रोकन राइस को निर्यात नहीं किया जा सकेगा.
9 सितंबर से लागू हो चुका है बैन
कॉमर्स मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में साफ तौर पर कहा गया है कि ब्रोकन राइस को आज से निर्यात नहीं किया जा सकेगा. दरअसल एक ओर जहां देश में कई जगहों पर बाढ़ आई हैं वहीं दूसरी ओर कईं राज्यों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो रही है. जिसे देखते हुए चावल की पैदावार कम होने की संभावना है। इन परिस्थितियों को देखते हुए कॉमर्स मंत्रालय ने ब्रोकन राइस के निर्यात पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है.
India bans the export of broken rice with effect from today. pic.twitter.com/faHTKdwGOi
— ANI (@ANI) September 9, 2022
पोर्ट पर पहुंच चुका चावल हो सकेगा निर्यात
कॉमर्स मंत्रालय ने अपने इस नोटिफिकेशन में ये भी बताया है कि जो चावल पोर्ट पर पहुंच चुका है और नोटिफिकेशन जारी होने से पहले लोड हो चुका है वो निर्यात किया जा सकेगा.
- ये भी कहा गया है कि शिपिंग बिल जारी हो चुका हो, और जिस शिप से उसे जाना है वो भारतीय पोर्ट पर आ चुका हो और उसका रोटेशन नंबर भी एलोकेट हो चुका हो, ऐसी स्थिति में चावल एक्सपोर्ट किया जा सकता है.
- या ब्रोकन राइस का कंसाइंमेंट नोटिफिकेशन जारी होने से पहले कस्टमर को जारी किया जा चुका हो, वो निर्यात किया जा सकता है.
भारत चावल का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक
मौजूदा समय में अगर देखें तो चीन के बाद भारत ऐसा देश है जो चावल का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है. वैश्विक पटल पर भारत की हिस्सेदारी चावल पैदा करने वाले देशों में 40 प्रतिशत की है। दुनिया के कईं देशों से भारत का चावल निर्यात किया जाता है. सरकार के इस एहतियाती कदम से देश में चावल के दामों में कमी आने की उम्मीद है. भारत ने पिछले साल 2.12 करोड़ टन चावल का निर्यात किया था. इसमें 39.4 करोड़ टन बासमती चावल था। जबकि गैर बासमती 6.11 अरब डॉलर रहा था.
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