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सेमीकंडक्टर चिप के लिए नहीं ताकना होगा दूसरों का मुंह, सरकार ने उठाया एक और कदम
केंद्र सरकार ने एक और चिप प्लांट को मंजूरी दे दी है. इसी के साथ देश में स्थापित होने वाले सेमीकंडक्टर चिप प्लांट की संख्या बढ़कर 4 हो गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
चिप मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सरकार ने एक और कदम बढ़ाया है. सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता केनेस (Kaynes) के सेमीकंडक्टर पैकेजिंग प्लांट लगाने के 3300 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस प्लांट में प्रतिदिन 60 लाख चिप बनाए जाएंगे. Kaynes का प्रस्तावित प्लांट भी गुजरात के साणंद में स्थापित किया जाएगा. इससे पहले, साणंद के लिए 76,000 करोड़ रुपए के दो अन्य चिपमेकिंग प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है.
इन सेक्टर्स में होगा इस्तेमाल
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, केनेस प्लांट की क्षमता 6.3 मिलियन चिप्स प्रतिदिन है. 46 एकड़ में बनने वाले इस प्लांट के उत्पादन का बड़ा हिस्सा केनेस इंडस्ट्रीज को जाएगा, जिसकी बुकिंग पहले ही हो चुकी है. केनेस के प्लांट में बनाए जाने वाले सेमीकंडक्टर चिप इंडस्ट्रियल, ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रिक वाहन, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स,टेलीकॉम, स्मार्टफोन आदि से जुड़ी इंडस्ट्री में इस्तेमाल होंगे.
4 यूनिट्स पर चल रहा काम
जून 2023 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुजरात के साणंद में सेमीकंडक्टर यूनिट स्थापित करने के पहले प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. इसके बाद फरवरी, 2024 में टाटा और सीजी पावर के प्लांट को मंजूरी दी गई. टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स गुजरात के धोलेरा में एक सेमीकंडक्टर फैब और असम में एक सेमीकंडक्टर यूनिट शुरू कर रही है. जबकि सीजी पावर गुजरात के साणंद में सेमीकंडक्टर इकाई स्थापित करेगी. इस तरह देश में 4 सेमीकंडक्टर यूनिट्स स्थापित होने वाली हैं. इन 4 इकाइयों में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए का निवेश आएगा. इनकी कुल क्षमता प्रतिदिन लगभग 7 करोड़ चिप की होगी.
अभी ताइवान का दबदबा
सेमीकंडक्टर चिप का उत्पादन शुरू होने से भारत एक तरह से दुनिया की चिप संबंधी जरूरतों को भी पूरा करने की स्थिति में आ जाएगा. सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में फिलहाल ताइवान का दबदबा है. 2020 में इस इंडस्ट्री के वैश्विक रिवेन्यु में ताइवान की कंपनियों की हिस्सेदारी 60% से अधिक थी. Taiwan Semiconductor Manufacturing Co. (TSMC) दुनिया की सबसे बड़ी चिपमेकर कंपनी है. कोरोना महामारी से पहले तक TSMC ग्लोबल मार्केट की 92 फीसदी डिमांड को पूरा कर रही थी. TSMC के क्लाइंट में Apple, Qualcomm, Nvidia, Microsoft, Sony, Asus, Yamaha, Panasonic जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं. ताइवान की UMC भी इस सेक्टर की लीडर है. बता दें कि भारत अब तक अपनी चिप संबंधी ज़रूरतें दूसरे देशों से पूरी करता आया है.
हमें मिलेंगे कई लाभ
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू होने से कई लाभ होंगे. पहला, हमारी प्रतिभाओं में इस इंडस्ट्री की अच्छी समझ विकसित होगी. उन्हें अवसरों की तलाश में बाहर नहीं जाना होगा. इसके साथ ही विदेशों से जो भारतीय इंजीनियर घर वापसी का मौका तलाश रहे हैं, उनकी तलाश भी पूरी होगी. इसके अलावा, भारत दूसरे देशों की चिप जरूरतों को पूरा करने की स्थिति में भी आ जाएगी. सरल शब्दों में कहें तो भारत अपनों के हाथ मजबूत करने के साथ ही दूसरों की जरूरतों को भी पूरा कर पाएगा. बता दें कि यह बाजार लगातार बड़ा होता जा रहा है. 2027 तक सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के 726.73 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है.
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