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कार कंपनियों पर सरकार का सख्त रुख: नियमों का उल्लंघन करने पर लगेगा भारी जुर्माना

सरकार का यह कदम न सिर्फ प्रदूषण नियंत्रण में मदद करेगा, बल्कि भारत में ग्रीन और सस्टेनेबल मोबिलिटी को बढ़ावा देने का भी काम करेगा. वाहन निर्माता कंपनियों के लिए अब नियमों का पालन करना और ज्यादा जरूरी हो गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

सरकार ने ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है. अब वाहन निर्माता कंपनियों को कार्बन उत्सर्जन और ईंधन दक्षता के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा, वरना उन्हें भारी जुर्माने का सामना करना पड़ेगा. यह कदम "ग्रीन मोबिलिटी" और "सस्टेनेबल ऑटोमोबाइल" की दिशा में भारत के स्पष्ट इरादे को दर्शाता है. आइए जानते हैं आखिर सरकार ने यह फैसला क्यों लिया है?

दिन-ब-दिन बढ़ रहा प्रदूषण, सरकार का कड़ा रुख

दरअसल, देश में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे निपटने के लिए केंद्र सरकार ने वाहन उत्सर्जन (emission) नियमों के उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है. नए ड्राफ्ट कानून के तहत अब इन कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा.

नया ड्राफ्ट कानून: क्या है इसके मुख्य नियम?

सरकार ने "एनर्जी कंजर्वेशन (कम्प्लायंस एनफोर्समेंट) रूल्स, 2025" का मसौदा पेश किया है, जिसके तहत:

- भारत की ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) को अधिकार मिलेगा कि वह कंपनियों की फ्यूल एफिशिएंसी की जांच कर सके.
- यदि कोई कंपनी निर्धारित उत्सर्जन और फ्यूल एफिशिएंसी मानकों से कम प्रदर्शन करती है, तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा.
- यह नियम कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी (CAFE) नॉर्म्स के तहत लागू होगा.

फिलहाल, 2022 में संशोधित "एनर्जी कंजर्वेशन एक्ट" में जुर्माना लगाने की अनुमति थी, लेकिन कोई स्पष्ट प्रक्रिया नहीं थी. अब सरकार इस प्रक्रिया को प्रभावी रूप देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है.

जुर्माने की राशि और वितरण का तरीका

ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के अनुसार जुर्माने की राशि कंपनी की उत्सर्जन और फ्यूल खपत के मानकों से दूरी पर निर्भर करेगी. इस राशि का 90% हिस्सा उन राज्यों को मिलेगा जहां उस वाहन की बिक्री हुई थी, जबकि बाकी 10% केंद्र सरकार के "सेंट्रल एनर्जी कंजर्वेशन फंड" (CECF) में जमा होगा. अगर किसी कंपनी को जुर्माने के खिलाफ आपत्ति हो, तो राज्य की बिजली नियामक संस्था (SERC) विवाद का निपटारा करेगी.

किन कंपनियों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 में Kia, Renault और Mahindra & Mahindra जैसी बड़ी वाहन निर्माता कंपनियां निर्धारित उत्सर्जन मानकों का उल्लंघन कर चुकी हैं. इन कंपनियों के वाहनों की फ्यूल खपत औसतन 4.78 लीटर प्रति 100 किमी से अधिक और CO2 उत्सर्जन 113 ग्राम प्रति किमी से ऊपर दर्ज किया गया.

इन कंपनियों पर कुल मिलाकर ₹7,300 करोड़ तक का जुर्माना लगने का अनुमान है. हालांकि कंपनियों का कहना है कि ये कड़े नियम 1 जनवरी 2023 से लागू हुए हैं, इसलिए पूरे 2022-23 के वित्त वर्ष पर जुर्माना लगाना अनुचित होगा.

CAFE नॉर्म्स का तीसरा संस्करण

सरकार CAFE नॉर्म्स के तीसरे संस्करण की तैयारी कर रही है, जो अप्रैल 2027 से लागू होगा. इसके तहत एक स्पष्ट और प्रभावी ढांचा तैयार किया जाएगा ताकि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में सख्त कार्रवाई हो सके.

 


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