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सरकार बनाएगी बैंकों के जरिए गांवों में अपनी पैठ, दिसंबर तक होने जा रहा है ये बड़ा काम
ऐसे गांवों में केंद्र सरकार ने दिसंबर 2022 तक 300 ब्रांचेज खोलने की अनुमति बैंकों को दे दी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः केंद्र सरकार बैंकों के जरिए गांवों में अपनी पैठ को और मजबूत करने का प्लान तैयार कर चुकी है. इसके लिए सितंबर तक सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों को ऐसे गांवों में बैंक की शाखाएं खोलने के लिए कहा गया है, जहां पर फिलहाल एक भी ब्रांच किसी भी बैंक की मौजूद नहीं है.
300 ब्रांच खोलने का प्रस्ताव
ऐसे गांवों में केंद्र सरकार ने दिसंबर 2022 तक 300 ब्रांचेज खोलने की अनुमति बैंकों को दे दी है. ये शाखाएं ऐसे गांवों में खोली जाएंगी, जहां की आबादी 3,000 से ज्यादा है. ज्यादातर बैंक की ब्रांचेज एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा की खोली जाएंगी. इसके लिए हर राज्य में कितनी शाखाएं खोली जाएंगी इसकी लिस्ट भी जारी कर दी गई है.
इन राज्यों में खोली जाएंगी नई शाखाएं
राजस्थान में सर्वाधिक 95 शाखाएं और मध्य प्रदेश में 54 शाखाएं खोली जाएंगी. गुजरात में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 38, महाराष्ट्र में 33, झारखंड में 32 और यूपी में 31 शाखाएं खुलेंगी. बैंक ऑफ बड़ौदा इन क्षेत्रों में 76 और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की 60 शाखाएं खोलेगा.
आईडीबीआई में सरकार बेचेगी पूरी हिस्सेदारी
दूसरी ओर, सरकार की योजना आईडीबीआई बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की है. इसके लिए सितंबर के अंत तक बोलियां आमंत्रित की जा सकती हैं. सूत्रों के मुताबिक इस पर आरबीआई से बातचीत अंतिम चरण में है. कुछ मुद्दों पर आरबीआई और सेबी के साथ चर्चा करने की जरूरत है. फिलहाल आईडीबीआई बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 45.48 फीसदी है. इसमें भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) की 49.24 फीसदी हिस्सेदारी है.
वित्त मंत्रालय, बैंक ने नहीं दिया जवाब
इस बीच, ब्लूमबर्ग न्यूज ने बताया है कि भारतीय रिजर्व बैंक निवेशकों को 40% से अधिक हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति देगा. हालांकि, भारत के वित्त मंत्रालय और आईडीबीआई बैंक के प्रतिनिधियों ने मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है. वहीं, एलआईसी के प्रतिनिधि ने अभी जवाब देने से इनकार कर दिया है.
प्रबंधन का नियंत्रण सौंप सकती है सरकार
सरकार फिलहाल आईडीबीआई बैंक में अपनी और एलआईसी की कम-से-कम कुछ हिस्सेदारी बेचने के साथ उसका प्रबंधन नियंत्रण सौंपने की तैयारी में है. इस सीमा में छूट से संभावित खरीदारों की संख्या बढ़ सकती है. इससे सरकार की निजीकरण योजना को रफ्तार मिल सकती है. सरकार ने इस साल 65,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा है. इसमें से एक तिहाई एलआईसी के आईपीओ से जुटाए जा चुके हैं.
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