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महंगाई को काबू में करने के लिए सरकार ने उठाया बड़ा कदम, लिया ये फैसला
2021-22 में, भारत ने 246 मिलियन डॉलर (लगभग 1967 करोड़ रुपये) के गेहूं के आटे का निर्यात किया था. चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जून के दौरान निर्यात लगभग 128 मिलियन डॉलर (लगभग 1023 करोड़ रुपये) रहा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: गेहूं की लगातार बढ़ रही महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने गेहूं का आटा, मैदा, सूजी और होलमील आटे के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. इससे पहले मई में केंद्र ने गेहूं के निर्यात पर भी बैन लगा दिया था. सरकार ने इसके लिए नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है, हालांकि विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने कहा है कि कुछ मामलों में भारत सरकार की अनुमति के अधीन इन वस्तुओं के निर्यात की अनुमति दी जाएगी.
सरकार के इस फैसले से क्या होगा?
नियम सख्त होने से मैदा, सूजी और होलमील आटे के निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ेगा. इससे घरेलू बाजार में इनके दामों में गिरावट आने की संभावना है, जिससे जनता को महंगाई से थोड़ी राहत मिलेगी. उल्लेखनीय है कि सूजी में रवा और सिरगी भी शामिल हैं. होलमील आटा गेहूं का आटा ही होता है, लेकिन इसमें चोकर भी शामिल होता है और सामान्य आटा के मुकाबले ज्यादा पौष्टिक माना जाता है.
क्यों बढ़ रही है गेहूं की कीमत?
दरअसल रूस और यूक्रेन गेहूं के प्रमुख निर्यातक हैं. इन दोनों देशों की वैश्विक गेहूं व्यापार में लगभग एक-चौथाई हिस्सेदारी है. दोनों देशों के बीच युद्ध से गेहूं की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे भारतीय गेहूं की मांग बढ़ी है. इसकी वजह से गेहूं की कीमत में तेजी देखने को मिल रही है. देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने मई में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था. हालांकि, इससे गेहूं के आटे की विदेशी मांग में उछाल आया. विदेशों में गेहूं के आटे की बढ़ती मांग की वजह से घरेलू बाजार में इसकी कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई. 2021-22 में, भारत ने 246 मिलियन डॉलर (लगभग 1967 करोड़ रुपये) के गेहूं के आटे का निर्यात किया था. वहीं, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से जून के दौरान ही निर्यात लगभग 128 मिलियन डॉलर (लगभग 1023 करोड़ रुपये) का हो गया.
कितनी है गेहूं की कीमत?
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 22 अगस्त को गेहूं की अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य 22 फीसदी बढ़कर 31.04 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि एक साल पहले की अवधि में इसका दाम 25.41 रुपये प्रति किलोग्राम था. गेहूं के आटे का औसत खुदरा मूल्य 17 फीसदी बढ़कर 35.17 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया है, जो पहले 30.04 रुपये था. गर्मी के कारण गेहूं के उत्पादन में गिरावट का अनुमान है. पंजाब और हरियाणा में अनाज सूख गया है. घरेलू उत्पादन में लगभग 3 फीसदी की गिरावट से थोक और खुदरा दोनों बाजारों में गेहूं की कीमत प्रभावित हुई है.
25 अगस्त को सरकार ने लिया था अहम निर्णय
इससे पहले 25 अगस्त को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में कमोडिटी के बढ़ते दामों को रोकने के लिए गेहूं या मेसलिन के आटे के एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध लगाने का फैसला लिया गया था. एक आधिकारिक बयान में कहा गया था, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने गेहूं या मेसलिन आटे के निर्यात पर प्रतिबंध से छूट की नीति में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.'
VIDEO : फेस्टिव सीजन में और महंगा होगा आटा, गेहूं की कीमतों में हुई बढ़ोतरी
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