आम आदमी, छोटे कारोबारी सरकार तक अपने इन सामान और सर्विस को आसानी से पहुंचा सकें, इसलिए सरकार ने ई-मार्केटप्लेस (GeM) जैसा पोर्टल बनाया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
अगर आप कोई बिजनेस करते हैं, किसी वस्तु या सर्विस की सप्लाई करते हैं, तो आपके लिए एक खुशखबरी है. दरअसल, ऑनलाइन पोर्टल GeM पर अब आपके लिए सरकार को अपना सामान या सर्विस बेचना आसान हो जाएगा. तो चलिए जानते हैं क्या है GeM पोर्टल और इससे कारोबारियों को क्या फायदा होगा?
GeM पोर्टल पर मिलती है ये सुविधा
देश में सरकार को कई तरह के सामान और सर्विसेस की जरूरत होती है. आम आदमी, छोटे कारोबारी सरकार तक अपने इन सामान और सर्विस को आसानी से पहुंचा सकें, इसलिए सरकार ने ई-मार्केटप्लेस (GeM) जैसा पोर्टल बनाया है. अब इस पोर्टल पर बिजनेस करना काफी आसान होने वाला है क्योंकि सरकार ने इससे जुड़े एक बड़े चार्ज को घटा दिया है.
10 लाख रुपये तक के सभी ऑर्डर पर जीरो ट्रांजेक्शन फीस
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सार्वजनिक खरीद के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ‘GeM’ ने अब पोर्टल पर विक्रेताओं और सर्विस प्रोवाइडर्स पर लगाए जाने वाले ट्रांजेक्शन शुल्क में बड़ी कटौती की है. ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने और अधिक समावेशी अर्थव्यवस्था बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता के साथ तालमेल बिठाते हुए GeM ने हाल ही में नई रेवेन्यू पॉलिसी लागू की है. इसके हिसाब से अब 10 लाख रुपये तक के सभी ऑर्डर पर जीरो ट्रांजेक्शन फीस लगेगी. पहले ये लिमिट 5 लाख रुपये की थी.
10 लाख से ज्यादा के ऑर्डर पर लगेगा इतना शुल्क
वहीं, 10 लाख रुपये से 10 करोड़ रुपये तक के ऑर्डर पर कुल ऑर्डर मूल्य का 0.30 प्रतिशत लेनदेन शुल्क लगाया जाएगा, जबकि पहले यह भी 0.45 प्रतिशत था. उन्होंने कहा कि 10 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर पर अब तीन लाख रुपये का एक समान शुल्क देना होगा, जो पहले 72.5 लाख रुपये तक के लेनदेन पर लगने वाले शुल्क से काफी कम है.
नए बदलावों के बाद GeM पोर्टल पर लगभग 97 प्रतिशत लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. जबकि शेष पर 10 लाख रुपये से अधिक के ऑर्डर मूल्य का 0.30 प्रतिशत शुल्क लगेगा. वह भी अधिकतम तीन लाख रुपये तक होगा.
इन्हें होगा फायदा
उन्होंने कहा कि नई लेनदेन शुल्क संरचना का उद्देश्य छोटे एवं मझोले कारोबारियों को फायदा पहुंचाना है. बता दें, GeM एक एकीकृत डिजिटल मंच है जो विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, राज्यों के विभागों, सार्वजनिक उद्यमों, स्वायत्त निकायों, पंचायतों, राज्य सहकारी समितियों द्वारा वस्तुओं और सेवाओं की खरीद की सुविधा देता है. इसकी शुरुआत वर्ष 2016 में की गई थी.
कंपनी का लोकप्रिय क्रिकेट गेम 'हिटविकेट' अब तक 120 देशों में 2 करोड़ से ज्यादा यूजर्स तक पहुंच चुका है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर ने मोबाइल आधारित प्रतिस्पर्धी स्पोर्ट्स गेमिंग कंपनी मेटास्पोर्ट्स इंटरएक्टिव (Metasports Interactive) में रणनीतिक निवेश किया है. कंपनी के प्रमुख गेम 'हिटविकेट' (Hitwicket) को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने की योजना है. इसके तहत अगले तीन वर्षों में गेम के डाउनलोड की संख्या 10 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.
कश्यप रेड्डी और कीर्ति सिंह द्वारा स्थापित मेटास्पोर्ट्स इंटरएक्टिव का गेम हिटविकेट साल 2020 में लॉन्च हुआ था. कंपनी के मुताबिक, लॉन्च के बाद से अब तक 120 देशों में इसके 2 करोड़ से अधिक यूजर्स हो चुके हैं. पिछले छह महीनों में गेम के रेवेन्यू में 100 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके खिलाड़ी औसतन हर दिन 51 मिनट इस गेम पर बिताते हैं.
रणनीति पर आधारित है हिटविकेट गेम
हिटविकेट एक मल्टीप्लेयर क्रिकेट गेम है, जिसमें खिलाड़ियों को केवल बल्लेबाजी और गेंदबाजी के बजाय रणनीति के आधार पर फैसले लेने होते हैं. इसमें गेंदबाज की रणनीति को समझना, फील्डिंग के अनुसार शॉट चुनना और हर गेंद के हिसाब से खेल की योजना बनाना जैसे पहलुओं पर जोर दिया गया है.
कंपनी के मुताबिक, गेम में क्रिकेट की रणनीतिक बारीकियों को शामिल करने की यही खासियत सचिन तेंदुलकर को पसंद आई और उन्होंने इसमें निवेश का फैसला किया. तेंदुलकर गेम के इन-गेम अनुभव, कंटेंट और ब्रांड से जुड़ी गतिविधियों में भी नजर आएंगे.
सचिन बोले- क्रिकेट की रणनीति को गेम में उतारा गया
इस साझेदारी पर सचिन तेंदुलकर ने कहा कि हिटविकेट में क्रिकेट के पीछे छिपी रणनीतिक सोच को गेम के रूप में पेश किया गया है. क्रिकेट में हर गेंद पर गेंदबाज को समझना, फील्डिंग का आकलन करना और सही रणनीति चुनना जरूरी होता है. हिटविकेट इन फैसलों को गेम का हिस्सा बनाता है.
उन्होंने कहा कि यह गेम केवल तेज रिफ्लेक्स पर निर्भर नहीं है, बल्कि मैदान पर एक क्रिकेटर जिस तरह सोचता है, उसे भी दर्शाता है. उन्हें यह गेम खेलना पसंद आया और कंपनी की योजना पर भरोसा है. इसी वजह से यह साझेदारी उन्हें स्वाभाविक लगी.
कंपनी ने बताया 2 करोड़ खिलाड़ियों का आंकड़ा
मेटास्पोर्ट्स इंटरएक्टिव के सह-संस्थापक और सीईओ कश्यप रेड्डी ने कहा कि हिटविकेट ने क्रिकेट गेमिंग में अपनी अलग पहचान बनाई है. इसमें रणनीतिक फैसलों को गेमिंग अनुभव का मुख्य हिस्सा बनाया गया है और सचिन तेंदुलकर ने भी इसकी इसी खासियत को पहचाना है.
उन्होंने कहा कि सचिन के साथ बातचीत से कंपनी को यह समझने में मदद मिल रही है कि शीर्ष स्तर के क्रिकेटर मैदान पर किस तरह सोचते हैं. इससे गेम को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. कंपनी के 2 करोड़ खिलाड़ी हर दिन औसतन 51 मिनट गेम पर बिताते हैं, जो इसके प्रति यूजर्स की दिलचस्पी को दिखाता है.
अप्रैल में जुटाए थे 2 करोड़ डॉलर
मेटास्पोर्ट्स इंटरएक्टिव की यह साझेदारी अप्रैल 2026 में लंदन स्थित कंपनी मेटिका (Metica) से मिली 2 करोड़ डॉलर की फंडिंग के बाद हुई है. यह फंडिंग यूजर अधिग्रहण यानी नए खिलाड़ियों को गेम से जोड़ने के लिए जुटाई गई थी.
कंपनी के मुताबिक, हिटविकेट के रेवेन्यू, खिलाड़ियों को लंबे समय तक गेम से जोड़े रखने की क्षमता और यूजर अधिग्रहण से जुड़े आंकड़ों ने मेटिका को बड़े स्तर पर निवेश के लिए भरोसा दिया. हिटविकेट ने एक भारतीय क्रिकेट गेम से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर रणनीति आधारित गेम के रूप में अपनी पहचान बनाई है.
आंकड़ों के मुताबिक, 1950 तक देश के केवल 0.7 फीसदी रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण हुआ था. 1961 में यह आंकड़ा 1.3 फीसदी और 2001 तक 23.6 फीसदी पहुंचा. इसके बाद भी रफ्तार सीमित रही, लेकिन 2014 के बाद इलेक्ट्रिफिकेशन के काम में तेजी आई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में रेलवे नेटवर्क के विद्युतीकरण का काम तेजी से आगे बढ़ा है. साल 2014 तक देश के ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क का महज 33 फीसदी हिस्सा इलेक्ट्रिफाइड था, जो अब बढ़कर 99.7 फीसदी हो गया है. यानी पिछले 12 साल में रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन का दायरा करीब तीन गुना बढ़ा है. रेल मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अब देश के केवल तीन राज्यों में 191 रूट किलोमीटर रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण बाकी है. इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है. उससे आगे फिलहाल केवल स्विट्जरलैंड है.
30 सितंबर तक 70,311 किलोमीटर रेल नेटवर्क इलेक्ट्रिफाइड
रेल मंत्रालय के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक देश के कुल 70,502 किलोमीटर ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क में से 70,311 किलोमीटर का विद्युतीकरण पूरा हो चुका था. इस तरह देश का 99.7 फीसदी ब्रॉडगेज नेटवर्क इलेक्ट्रिफाइड हो गया है.
आंकड़ों के अनुसार, देश के 27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में रेलवे नेटवर्क का 100 फीसदी विद्युतीकरण हो चुका है. अब केवल असम, कर्नाटक और गोवा में कुछ हिस्सों पर काम बाकी है. कर्नाटक में 120 किलोमीटर, असम में 55 किलोमीटर और गोवा में 16 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण होना शेष है.
2014 के बाद तेजी से बढ़ा इलेक्ट्रिफिकेशन का काम
भारत में रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन की शुरुआत साल 1925 में हुई थी. देश की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन महाराष्ट्र में बॉम्बे विक्टोरिया टर्मिनस (अब छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस) से कुर्ला हार्बर के बीच चली थी. हालांकि, शुरुआती दशकों में इस दिशा में काम काफी धीमी गति से आगे बढ़ा.
आंकड़ों के मुताबिक, 1950 तक देश के केवल 0.7 फीसदी रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण हुआ था. 1961 में यह आंकड़ा 1.3 फीसदी और 2001 तक 23.6 फीसदी पहुंचा. इसके बाद भी रफ्तार सीमित रही, लेकिन 2014 के बाद इलेक्ट्रिफिकेशन के काम में तेजी आई.
साल 2015 में देश का 33.9 फीसदी रेल नेटवर्क इलेक्ट्रिफाइड था. 2019 तक यह बढ़कर 50.9 फीसदी और 2021 में 76.2 फीसदी हो गया. इसके बाद 2023 में यह आंकड़ा 84.7 फीसदी, 2024 में 90.8 फीसदी और 2025 में 99.4 फीसदी तक पहुंच गया. अब यह 99.7 फीसदी हो चुका है.
दुनिया में भारत से आगे सिर्फ स्विट्जरलैंड
रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन के मामले में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो गया है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, स्विट्जरलैंड अपने पूरे रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण करने वाला देश है. इस सूची में भारत 99.7 फीसदी इलेक्ट्रिफिकेशन के साथ दूसरे स्थान पर है.
दूसरी ओर, चीन में करीब 82 फीसदी रेल नेटवर्क इलेक्ट्रिफाइड है, जबकि दक्षिण अफ्रीका में यह आंकड़ा 81.1 फीसदी है. जापान का 75 फीसदी, स्पेन का 67 फीसदी और फ्रांस का 58 फीसदी रेल नेटवर्क इलेक्ट्रिफाइड है. वहीं, जर्मनी में 53 फीसदी और इटली में 49.7 फीसदी रेल नेटवर्क पर इलेक्ट्रिक ट्रेनें चलाने की सुविधा है.
नए रेल प्रोजेक्ट भी इलेक्ट्रिफिकेशन के साथ
रेल मंत्रालय के मुताबिक, रेलवे नेटवर्क को पूरी तरह इलेक्ट्रिफाइड बनाने की दिशा में काम जारी है. नई रेल लाइनें बिछाने और मौजूदा नेटवर्क पर मल्टीट्रैकिंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स में भी इलेक्ट्रिफिकेशन को शामिल किया जा रहा है. इससे आने वाले समय में शेष रेल नेटवर्क का विद्युतीकरण पूरा करने में मदद मिलेगी.
गौतम अडानी के नेतृत्व वाला अडानी ग्रुप अब ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के पारंपरिक कारोबार से आगे बढ़कर डिजिटल क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर जोर दे रहा है. प्रस्तावित फंडिंग इसी रणनीति का हिस्सा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग के बीच अडानी ग्रुप अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार का विस्तार करने की तैयारी में है. इसके लिए समूह करीब 1.5 अरब डॉलर (करीब 12,500 करोड़ रुपये) का विदेशी कर्ज जुटाने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय बैंकों से बातचीत कर रहा है. कंपनी ने 2035 तक डेटा सेंटर और अन्य डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में 100 अरब डॉलर निवेश करने का लक्ष्य रखा है.
गौतम अडानी के नेतृत्व वाला अडानी ग्रुप अब ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के पारंपरिक कारोबार से आगे बढ़कर डिजिटल क्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत करने पर जोर दे रहा है. प्रस्तावित फंडिंग इसी रणनीति का हिस्सा है. मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह कर्ज विदेशी बाजारों से जुटाया जाएगा. हालांकि, अभी इसकी ब्याज दर और अन्य शर्तों को अंतिम रूप नहीं दिया गया है.
इन वैश्विक बैंकों से चल रही है बातचीत
इस फंडिंग की जिम्मेदारी अडानी ग्रुप की संयुक्त उद्यम कंपनी अडानीकॉनेक्स प्राइवेट (AdaniConneX Pvt.) संभाल रही है. यह कंपनी डेटा सेंटर ऑपरेटर एजकॉनेक्स (EdgeConneX) के साथ मिलकर बनाई गई है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अडानीकॉनेक्स इस कर्ज के लिए डीबीएस ग्रुप होल्डिंग्स (DBS Group Holdings), फर्स्ट अबू धाबी बैंक (FAB) और मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप (MUFG) समेत कई बड़े बैंकों के संपर्क में है.
इसके अलावा नैटिक्सिस (Natixis SA), आईएनजी बैंक (ING Bank NV) और सोसाइटी जनरले (Societe Generale SA) जैसे अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं के साथ भी बातचीत की जा रही है. प्रस्तावित कर्ज की अवधि पांच से सात साल हो सकती है. हालांकि, अभी तक इसकी शर्तें तय नहीं हुई हैं.
पहले भी 800 मिलियन डॉलर का कर्ज जुटा चुकी है कंपनी
अडानीकॉनेक्स ने कुछ महीने पहले ही डेटा सेंटर कारोबार के लिए 800 मिलियन डॉलर का कर्ज हासिल किया था. यह कर्ज 18 महीने की अवधि के लिए लिया गया था. अब कंपनी 1.5 अरब डॉलर की नई फंडिंग जुटाने की कोशिश कर रही है, जिससे डेटा सेंटर कारोबार के विस्तार को गति मिल सके.
समूह ने 2035 तक डेटा सेंटर समेत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में करीब 100 अरब डॉलर निवेश करने की योजना बनाई है. ऐसे में नई फंडिंग कंपनी की दीर्घकालिक विस्तार रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है.
रिलायंस भी AI इंफ्रास्ट्रक्चर में करेगी 110 अरब डॉलर का निवेश
भारत के डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार में अडानी ग्रुप के सामने रिलायंस इंडस्ट्रीज भी बड़ी तैयारी कर रही है. मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस ने अगले सात साल में AI से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में 110 अरब डॉलर तक निवेश करने की योजना बनाई है.
AI और क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण डेटा सेंटर की जरूरत तेजी से बढ़ रही है. इन तकनीकों को संचालित करने के लिए बड़े स्तर पर कंप्यूटिंग क्षमता, स्टोरेज और डिजिटल नेटवर्क की आवश्यकता होती है. यही वजह है कि देश के बड़े कारोबारी समूह इस क्षेत्र में निवेश बढ़ा रहे हैं.
2030 तक 8 गीगावाट हो सकती है भारत की डेटा सेंटर क्षमता
भारत में डेटा सेंटर बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, अगस्त 2026 में देश की कुल डेटा सेंटर क्षमता करीब 1.57 गीगावाट थी. अनुमान है कि 2030 तक यह बढ़कर लगभग 8 गीगावाट हो सकती है.
इस क्षेत्र में अगले सात से आठ वर्षों के दौरान करीब 200 अरब डॉलर का निवेश आने की संभावना जताई जा रही है. AI, क्लाउड सेवाओं, डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन कारोबार के विस्तार से डेटा स्टोरेज और प्रोसेसिंग की मांग बढ़ रही है. ऐसे में अडानी ग्रुप और रिलायंस जैसे बड़े कारोबारी समूहों का निवेश भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बाजार के विस्तार में अहम भूमिका निभा सकता है.
डिज्नी पिछले कई वर्षों से लागत घटाने और कारोबार के पुनर्गठन की प्रक्रिया में जुटी है. इस दौरान कंपनी हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी है और अरबों डॉलर के खर्च में कटौती की है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दुनिया की दिग्गज एंटरटेनमेंट कंपनी वॉल्ट डिज्नी (Walt Disney) एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी की तैयारी कर रही है. कंपनी अपने कारोबार के कुछ हिस्सों में सालाना खर्च 20 फीसदी तक कम करना चाहती है. इसके लिए हजारों कर्मचारियों की नौकरियां जा सकती हैं. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने कुछ मैनेजरों को खर्च घटाने के संभावित उपायों की पहचान करने को कहा है. इसमें कर्मचारियों की संख्या कम करने के साथ-साथ परिचालन खर्च में कटौती भी शामिल हो सकती है.
रिपोर्ट के अनुसार, छंटनी का असर डिज्नी के सभी कारोबार पर एक जैसा नहीं होगा. कंपनी के थीम पार्क, टेलीविजन नेटवर्क और फिल्म स्टूडियो जैसे कारोबार पर इसका अपेक्षाकृत अधिक असर पड़ सकता है. हालांकि, कंपनी की ओर से छंटनी की अंतिम संख्या या इसकी समयसीमा को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
कहां होगा बचाए गए पैसों का इस्तेमाल?
डिज्नी के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जोश डी'अमारो (Josh D'Amaro) लागत में कटौती से बचाई गई रकम का एक हिस्सा कंपनी के दूसरे कारोबार में दोबारा निवेश करना चाहते हैं. इसमें फिल्म और टेलीविजन कंटेंट, टेक्नोलॉजी, थीम पार्क और क्रूज शिप कारोबार शामिल हैं.
कंपनी का उद्देश्य परिचालन को अधिक प्रभावी बनाना और उन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना है, जहां भविष्य में कारोबार की संभावनाएं बेहतर हैं.
पहले भी हजारों कर्मचारियों की जा चुकी है नौकरी
डिज्नी पिछले कई वर्षों से लागत घटाने और कारोबार के पुनर्गठन की प्रक्रिया में जुटी है. इस दौरान कंपनी हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी है और अरबों डॉलर के खर्च में कटौती की है.
पहले किए गए पुनर्गठन का असर ABC, Pixar, ESPN, फिल्म स्टूडियो और कंपनी के एक्सपीरियंस बिजनेस समेत कई डिवीजनों पर पड़ा था. कंपनी के पिछले वित्त वर्ष के अंत तक दुनियाभर में करीब 2.31 लाख कर्मचारी थे.
यह ताजा कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है, जब डिज्नी ने चालू वित्त वर्ष में एडजस्टेड प्रति शेयर आय (Adjusted EPS) में दोहरे अंकों की वृद्धि का लक्ष्य रखा है. कंपनी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लागत पर नियंत्रण और कारोबार की दक्षता बढ़ाने पर जोर दे रही है.
टीवी कारोबार के पुनर्गठन की भी तैयारी
इससे पहले 1 अक्टूबर को वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि डिज्नी अपने टेलीविजन डिवीजन का पुनर्गठन करने की योजना बना रही है. इसके साथ ही कंपनी की लीगल और ग्लोबल अफेयर्स यूनिट में भी कर्मचारियों की संख्या घटाई जा सकती है.
एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में बढ़ रहा छंटनी का दबाव
डिज्नी का यह फैसला पूरी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में हो रहे बदलावों के बीच आया है. पारंपरिक टेलीविजन से होने वाली कमाई में गिरावट और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के सब्सक्राइबर बढ़ने की रफ्तार धीमी होने से कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है.
इसके अलावा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन वीडियो सर्विस और टेक्नोलॉजी कंपनियों के स्ट्रीमिंग कारोबार से प्रतिस्पर्धा भी तेज हो गई है. दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने और कमाई के नए मॉडल विकसित करने की चुनौती के बीच कई कंपनियां अपने खर्च कम कर रही हैं.
नेटफ्लिक्स, सोनी पिक्चर्स एंटरटेनमेंट, स्काईडांस के स्वामित्व वाली पैरामाउंट और वार्नर ब्रदर्स जैसी कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या घटाने के कदम उठा चुकी हैं. ऐसे में डिज्नी की नई लागत कटौती योजना को एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में जारी व्यापक बदलावों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है.
कंपनी ने बताया कि विस्तार के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा के क्षेत्र में विशेष क्षमताएं विकसित की जाएंगी. इसके अलावा हेल्थकेयर और लाइफ साइंसेज, हाईटेक, ऑटोमोटिव और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जाएगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनी NTT DATA कर्नाटक के मंगलुरु में अपने कारोबार का विस्तार करने की तैयारी कर रही है. कंपनी की योजना 2027 के अंत तक यहां कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर 2,500 से अधिक करने की है. फिलहाल मंगलुरु में कंपनी के करीब 900 कर्मचारी काम कर रहे हैं. इस विस्तार के जरिए कंपनी बेंगलुरु से आगे कर्नाटक के अन्य शहरों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है.
कंपनी ने बताया कि विस्तार के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डेटा के क्षेत्र में विशेष क्षमताएं विकसित की जाएंगी. इसके अलावा हेल्थकेयर और लाइफ साइंसेज, हाईटेक, ऑटोमोटिव और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जाएगा.
यह घोषणा कंपनी के वैश्विक नेतृत्व और कर्नाटक के आईटी एवं बायोटेक्नोलॉजी मंत्री प्रियांक खड़गे के बीच बेंगलुरु में हुई बैठक के बाद की गई.
Niveus Solutions के अधिग्रहण से मंगलुरु में हुई एंट्री
NTT DATA ने Niveus Solutions का अधिग्रहण करने के बाद मंगलुरु में अपना कारोबार शुरू किया था. अब कंपनी इस तटीय शहर को बेंगलुरु के साथ टेक्नोलॉजी और डिजिटल टैलेंट के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है.
प्रस्तावित विस्तार से ऐसे पेशेवरों की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिनके पास AI और डेटा से जुड़ी विशेषज्ञता के साथ-साथ अलग-अलग उद्योगों की जरूरतों के मुताबिक तकनीकी जानकारी हो.
बेंगलुरु से बाहर भी टेक्नोलॉजी हब विकसित करने की तैयारी
कर्नाटक सरकार बेंगलुरु के अलावा राज्य के दूसरे शहरों में भी टेक्नोलॉजी हब विकसित करने की दिशा में काम कर रही है. इसके लिए सरकार दूसरे क्षेत्रों में उपलब्ध प्रतिभाओं और शैक्षणिक संस्थानों की क्षमता का इस्तेमाल करना चाहती है.
कर्नाटक के आईटी एवं बायोटेक्नोलॉजी मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा, "कर्नाटक के विकास का अगला अध्याय बेंगलुरु से आगे लिखा जा रहा है और मंगलुरु इस कहानी का नेतृत्व कर रहा है."
बैठक के दौरान कंपनी और राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच प्रतिभा विकास, बुनियादी ढांचे, निवेश को बढ़ावा देने और स्टार्टअप एवं शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.
AI और डेटा में स्किल डेवलपमेंट पर जोर
प्रतिभा विकास को लेकर राज्य सरकार ने उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव रखा. इन कार्यक्रमों में AI और डेटा से जुड़ी विशेषज्ञता के साथ-साथ संबंधित उद्योगों की जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षण देने पर जोर होगा. इसके लिए क्षेत्र के इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों की मदद लेने की योजना है.
इसके अलावा सरकार ने मंगलुरु में बेहतर ऑफिस स्पेस और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराने पर भी चर्चा की. इसमें राज्य की सस्टेनेबल डेटा सेंटर नीति के तहत डेटा सेंटर में निवेश को बढ़ावा देना शामिल है.
अधिकारियों के मुताबिक, निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए एक विशेष सिंगल-विंडो टीम भी बनाई जाएगी. इसके साथ ही स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों, कर्नाटक के स्टार्टअप और डीप-टेक इकोसिस्टम के साथ साझेदारी की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी.
अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए कंपनियों ने कुल 84,400 करोड़ रुपये जुटाए, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में जुटाए गए 64,900 करोड़ रुपये के मुकाबले 30 फीसदी अधिक है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत के प्राथमिक बाजार में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही के दौरान आईपीओ के जरिए पूंजी जुटाने में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए कंपनियों ने कुल 84,400 करोड़ रुपये जुटाए, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में जुटाए गए 64,900 करोड़ रुपये के मुकाबले 30 फीसदी अधिक है. इस दौरान सितंबर महीने में ही कुल फंड का करीब 94 फीसदी हिस्सा जुटाया गया. ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है.
सितंबर में 32 कंपनियों ने लॉन्च किए आईपीओ
ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट 'इंडिया आईपीओ मार्केट: एच1 एफवाई27 एंड क्यू2 एफवाई27 रिव्यू' के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में कुल 71 कंपनियों ने शेयर बाजार में कदम रखा. पिछले साल की समान अवधि में यह संख्या 55 थी.
जुलाई से सितंबर के बीच आईपीओ बाजार में गतिविधियां काफी तेज रहीं. सितंबर सबसे व्यस्त महीना रहा, जब 32 कंपनियों ने अपने आईपीओ लॉन्च किए और इनके जरिए कुल 40,400 करोड़ रुपये जुटाए. इससे पता चलता है कि पहली छमाही के दौरान आईपीओ से जुटाई गई अधिकांश पूंजी सितंबर में आई.
निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी, लिस्टिंग पर औसतन 18% का रिटर्न
आईपीओ बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी भी बढ़ी है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में आईपीओ की लिस्टिंग के दिन औसतन 18 फीसदी का रिटर्न मिला, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 10 फीसदी था.
वहीं, खुदरा निवेशकों की ओर से औसत ओवरसब्सक्रिप्शन भी बढ़कर 28 गुना हो गया, जो एक साल पहले 25 गुना था. इससे नए आईपीओ में खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ने का संकेत मिलता है.
फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर की सबसे बड़ी हिस्सेदारी
सेक्टर के लिहाज से देखें तो आईपीओ के जरिए जुटाई गई कुल पूंजी में फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही. इस सेक्टर ने कुल फंड जुटाने में 43 फीसदी योगदान दिया. वहीं, आईपीओ की संख्या के मामले में कैपिटल गुड्स सेक्टर सबसे आगे रहा. इस क्षेत्र की 15 कंपनियों ने पहली छमाही के दौरान आईपीओ लॉन्च किए.
घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को दिया सहारा
जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने शेयर बाजार में 1.69 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया. इसके मुकाबले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का शुद्ध निवेश 13,900 करोड़ रुपये रहा.
रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने बाजार की मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद बड़ी संख्या में शेयर जारी करने में मदद की. इस दौरान सितंबर में निफ्टी 50 में 5.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई.
IPO बाजार में आगे भी बनी हुई है बड़ी तैयारी
ग्रांट थॉर्नटन भारत में पार्टनर और कैपिटल मार्केट्स एडवाइजरी लीडर करण मारवाह ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में भारत का आईपीओ बाजार सतर्कता से तेजी की ओर बढ़ा, जिससे पहली छमाही में रिकॉर्ड फंड जुटाने में मदद मिली.
उन्होंने कहा कि आईपीओ के जरिए बड़ी मात्रा में पूंजी जुटाया जाना दिखाता है कि बाजार नई कंपनियों के शेयर जारी करने की क्षमता रखता है. हालांकि, निवेशकों की मांग अब चुनिंदा कंपनियों तक सीमित होती जा रही है और वे कंपनियों के बुनियादी प्रदर्शन, आईपीओ की कीमत, कॉरपोरेट गवर्नेंस और जुटाई गई पूंजी के इस्तेमाल जैसे पहलुओं पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, आईपीओ बाजार में आगे भी गतिविधियां जारी रहने की संभावना है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में 100 मेनबोर्ड कंपनियों और 159 छोटे एवं मझोले उद्यमों (SME) ने आईपीओ लाने के लिए ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट दाखिल किए हैं.
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ड्राफ्ट दस्तावेज दाखिल करने का मतलब यह नहीं है कि सभी कंपनियां आईपीओ लेकर आएंगी. नियामकीय मंजूरी मिलने में लगने वाला समय, आवश्यक मंजूरियों में देरी और कंपनियों की तैयारी जैसे कारक इन आईपीओ के बाजार में आने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
नए नियमों में हवाई टिकटों की कीमतों को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है. इसके तहत एयरलाइंस को बुकिंग के दौरान और टिकट जारी करते समय यात्रियों को कुल भुगतान की जाने वाली राशि स्पष्ट रूप से बतानी होगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
कच्चे तेल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच हवाई टिकट महंगे होने की आशंकाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने विमानन क्षेत्र के नियमों में बदलाव किया है. नए नियमों के तहत असाधारण परिस्थितियों में सरकार एयरलाइंस के टिकट किराए को लेकर सीधे हस्तक्षेप कर सकेगी. केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से अधिसूचित 'भारतीय वायुयान नियम, 2026' के अनुसार, जनहित को ध्यान में रखते हुए सरकार एयरलाइंस को किराए के संबंध में निर्देश जारी कर सकती है. हालांकि, यह हस्तक्षेप विशेष परिस्थितियों में और एक निश्चित समय सीमा के लिए ही किया जा सकेगा.
एयरलाइंस को किराए का ब्योरा DGCA को देना होगा
नए नियमों के नियम 192 के तहत नियमित हवाई सेवाएं संचालित करने वाली एयरलाइंस को अपनी परिचालन लागत समेत अन्य संबंधित कारकों के आधार पर टिकटों का किराया तय करना होगा. साथ ही, उन्हें किराए का पूरा विवरण नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) को देना होगा. यदि सरकार को लगता है कि कोई असाधारण परिस्थिति पैदा हुई है और जनहित में हस्तक्षेप जरूरी है, तो वह एयरलाइंस को लिखित निर्देश जारी कर सकती है.
इसके अलावा, एयरलाइंस को अपनी वेबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर टिकटों का किराया प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा. DGCA इन कंपनियों द्वारा तय किए जाने वाले किराए की निगरानी भी करेगा.
टिकट बुकिंग के दौरान बतानी होगी पूरी कीमत
नए नियमों में हवाई टिकटों की कीमतों को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है. इसके तहत एयरलाइंस को बुकिंग के दौरान और टिकट जारी करते समय यात्रियों को कुल भुगतान की जाने वाली राशि स्पष्ट रूप से बतानी होगी. इसमें मूल किराया (बेस फेयर), टैक्स, अन्य शुल्क, टिकट कैंसिलेशन चार्ज और रिफंड की शर्तों का अलग-अलग विवरण देना होगा.
इससे यात्रियों को यह समझने में आसानी होगी कि टिकट की मूल कीमत कितनी है और अन्य शुल्कों के रूप में उनसे कितनी रकम वसूली जा रही है. नियमों का उद्देश्य एयरलाइंस द्वारा लिए जाने वाले विभिन्न शुल्कों और सरकारी टैक्स के बीच अंतर भी स्पष्ट करना है.
1994 से एयरलाइंस को किराया तय करने की आजादी
भारत में वर्ष 1994 में हवाई किराए तय करने की प्रक्रिया को नियंत्रण मुक्त (डिरिगुलेट) कर दिया गया था. इसके बाद एयरलाइंस को बाजार की परिस्थितियों के अनुसार टिकटों की कीमतें तय करने की छूट मिल गई. आमतौर पर कंपनियां यात्रियों की मांग, परिचालन लागत और टिकट बुकिंग के समय के आधार पर किराया निर्धारित करती हैं. इसी वजह से एक ही फ्लाइट में अलग-अलग समय पर टिकट बुक करने वाले यात्रियों को अलग-अलग कीमत चुकानी पड़ सकती है.
सरकार के अधिकारों में क्या हुआ बदलाव?
पहले लागू एयरक्राफ्ट रूल्स, 1937 के नियम 135(4) के तहत DGCA को एविएशन सेक्टर में अत्यधिक या अनुचित कीमतों और कंपनियों की मिलीभगत जैसी स्थितियों में निर्देश जारी करने का अधिकार था. नए भारतीय वायुयान नियम, 2026 के नियम 192 में किराए की निगरानी का प्रावधान बरकरार रखा गया है. हालांकि, इसमें सरकार के हस्तक्षेप का आधार असाधारण परिस्थितियों और जनहित की जरूरत को बनाया गया है.
इस तरह नए नियमों के तहत केंद्र सरकार को विशेष परिस्थितियों में एयरलाइन किराए को लेकर निर्देश जारी करने का अधिकार मिला है. इससे हवाई किराए और टिकट बुकिंग से जुड़ी जानकारी में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ यात्रियों के हितों की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया है.
सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 1,233.25 अंक यानी 1.66 फीसदी की बढ़त के साथ 75,692.78 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 387.70 अंक यानी 1.68 फीसदी चढ़कर 23,440.80 के स्तर पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में तेजी जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं. कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और गिफ्ट निफ्टी में मजबूती से बाजार को सहारा मिल सकता है. गिफ्ट निफ्टी करीब 120 अंक उछलकर 23,525 के आसपास पहुंच गया है. हालांकि, एशियाई बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी टेक शेयरों में बिकवाली के चलते निवेशक सतर्क रह सकते हैं. आज बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक संकेतों के साथ कंपनियों के सितंबर तिमाही के नतीजे भी अहम होंगे. खासतौर पर एसबीआई, बजाज फिनसर्व और एनएसई के नतीजों पर निवेशकों की नजर रहेगी.
सोमवार को सेंसेक्स 1,233 अंक उछला
सप्ताह के दूसरे कारोबारी सत्र से पहले सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली. बीएसई सेंसेक्स 1,233.25 अंक यानी 1.66 फीसदी की बढ़त के साथ 75,692.78 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई निफ्टी 387.70 अंक यानी 1.68 फीसदी चढ़कर 23,440.80 के स्तर पर पहुंच गया. हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में तेजी प्रमुख सूचकांकों के मुकाबले सीमित रही. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 1 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.7 फीसदी बढ़कर बंद हुआ.
सोमवार के कारोबार में रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा स्टील, श्रीराम फाइनेंस, कोल इंडिया और जेएसडब्ल्यू स्टील निफ्टी के टॉप गेनर्स रहे. दूसरी ओर, इंफोसिस, अदाणी पोर्ट्स, सन फार्मा, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी लाइफ के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई. सेक्टोरल आधार पर एनर्जी, पीएसयू बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटो और ऑयल एंड गैस सेक्टर में 1 से 4.6 फीसदी तक की तेजी रही, जबकि आईटी, मीडिया और फार्मा इंडेक्स करीब 0.5 फीसदी टूटकर बंद हुए.
कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट
भारतीय शेयर बाजार के लिए कच्चे तेल की कीमतों में नरमी एक सकारात्मक संकेत है. सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 7.6 फीसदी गिरकर 104.77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई थी. वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड 96.46 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत में प्रगति की उम्मीद से तेल की कीमतों में गिरावट आई.
हालांकि, मंगलवार सुबह तेल की कीमतों में हल्की रिकवरी देखने को मिली. ईरान के क़ेशम द्वीप पर अमेरिकी हमले की खबर के बाद ब्रेंट क्रूड करीब 105.25 डॉलर और WTI क्रूड 96.93 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. इससे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है. भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतें अहम हैं, क्योंकि इनके बढ़ने से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है.
विदेशी निवेशकों ने की 3,115 करोड़ रुपये की खरीदारी
सोमवार को विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने भी घरेलू बाजार को सहारा दिया. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 3,115 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की. हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने इस दौरान करीब 392 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की. विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार में निवेशकों का भरोसा मजबूत होने की उम्मीद है.
अमेरिकी बाजारों में मिला-जुला कारोबार
सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला. डाउ जोंस 213.67 अंक यानी 0.41 फीसदी की बढ़त के साथ 51,983.98 पर बंद हुआ. दूसरी ओर, S&P 500 में 0.51 फीसदी की गिरावट आई और यह 7,541.40 पर आ गया. टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली के कारण नैस्डैक 1.07 फीसदी टूटकर 25,164.32 पर बंद हुआ.
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर टेक कंपनियों के बढ़ते खर्च और उनके ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ रही हैं. इसका असर अमेरिकी टेक शेयरों पर देखने को मिला. इसके अलावा अमेरिका में मिडटर्म चुनावों से पहले भी निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं.
एशियाई बाजारों में कमजोरी
मंगलवार को एशियाई बाजारों में कमजोरी देखने को मिल रही है. दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 3 फीसदी से ज्यादा गिर गया. टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव और AI सेक्टर में बढ़ते निवेश को लेकर चिंताएं इसकी प्रमुख वजह हैं. वहीं, जापान का निक्केई 225 नेशनल हॉलिडे के कारण बंद है. वैश्विक बाजारों से मिल रहे इन मिले-जुले संकेतों के बीच भारतीय बाजार में निवेशकों की नजर शुरुआती कारोबार पर रहेगी.
सोने-चांदी की कीमतों में हल्की तेजी
मंगलवार को शुरुआती एशियाई कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में हल्की तेजी देखने को मिली. कॉमैक्स पर सोना करीब 3,952 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था. वहीं, चांदी की कीमत 50 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई. निवेशक वैश्विक तनाव और अमेरिकी आर्थिक संकेतों के बीच सुरक्षित निवेश विकल्पों पर भी नजर बनाए हुए हैं.
आज इन शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मंगलवार को भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बजाज फिनसर्व और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) समेत कई कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. इसके बजाज होल्डिंग्स एंड इन्वेस्टमेंट, बाटा इंडिया, एमसीएक्स, महानगर गैस, मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर और उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक के नतीजों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी. वहीं, आईटीसी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 18.5 फीसदी घटकर 4,229.3 करोड़ रुपये रहा, जबकि नाल्को का मुनाफा 28.3 फीसदी बढ़कर 1,835 करोड़ रुपये और मारिको का मुनाफा 29.2 फीसदी बढ़कर 558 करोड़ रुपये पहुंच गया. दूसरी ओर, केईसी इंटरनेशनल का मुनाफा 81.5 फीसदी गिरकर 29.7 करोड़ रुपये और कंटेनर कॉरपोरेशन का मुनाफा 6.9 फीसदी घटकर करीब 353 करोड़ रुपये रहा. अमारा राजा एनर्जी के 2,320 करोड़ रुपये के निवेश, ट्राइडेंट की 4,650 करोड़ रुपये की विस्तार योजना और कंटेनर कॉरपोरेशन के 1.90 रुपये प्रति शेयर के अंतरिम डिविडेंड के ऐलान से भी संबंधित शेयर फोकस में रहेंगे.
इसके अलावा ल्यूपिन को अमेरिकी दवा नियामक यूएसएफडीए से एमिफैम्प्रिडीन की 10 एमजी टैबलेट के जेनेरिक वर्जन के लिए मंजूरी मिली है. एनबीसीसी ने बिहार में करीब 2,000 करोड़ रुपये की चार रीडेवलपमेंट परियोजनाओं के लिए समझौता किया है. वहीं, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स को भारतीय नौसेना से करीब 32,000 करोड़ रुपये के पांच युद्धपोत बनाने का ऑर्डर मिला है. आज एसएफसी एनवायरनमेंटल टेक्नोलॉजीज और बीएलएस पॉलिमर्स की मेनबोर्ड सेगमेंट में, जबकि विस्कॉन इंडस्ट्रीज की एसएमई सेगमेंट में लिस्टिंग प्रस्तावित है.
क्या आज भी जारी रहेगी बाजार में तेजी?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार की आगे की चाल कई अहम कारकों पर निर्भर करेगी. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार को सहारा दे सकते हैं. हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, अमेरिकी टेक शेयरों में बिकवाली और एशियाई बाजारों की कमजोरी निवेशकों की चिंता बढ़ा सकती है. ऐसे में निवेशकों की नजर गिफ्ट निफ्टी के संकेतों के साथ-साथ वैश्विक घटनाक्रम और घरेलू कंपनियों के नतीजों पर बनी रहेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
सोमवार, 2 नवंबर को बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों में जोरदार तेजी दर्ज की गई. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 75,692 और निफ्टी 23,440 के स्तर को पार कर गए. दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार को बड़ी राहत दी. रिलायंस इंडस्ट्रीज के मजबूत तिमाही नतीजों के बाद शेयरों में जोरदार खरीदारी ने बाजार की तेजी को और बल दिया. सेंसेक्स 1,233 अंक उछल गया, जबकि बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 8 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया.
भारतीय शेयर बाजार में कारोबारी सप्ताह की शुरुआत शानदार रही. सोमवार, 2 नवंबर को बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी दोनों में जोरदार तेजी दर्ज की गई. कारोबार के दौरान सेंसेक्स 75,692 और निफ्टी 23,440 के स्तर को पार कर गए. दोनों प्रमुख सूचकांक लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए. बाजार में खरीदारी का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दिखाई दिया. दोनों सूचकांकों में करीब 1 फीसदी तक की तेजी रही.
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में जोरदार उछाल
सोमवार को बाजार की तेजी में रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) के शेयरों की सबसे अहम भूमिका रही. सितंबर तिमाही के उम्मीद से बेहतर नतीजों के बाद कंपनी के शेयरों में जबरदस्त खरीदारी देखने को मिली. शेयर करीब 9.41 फीसदी उछलकर बंद हुआ. अप्रैल 2020 के बाद यह कंपनी के शेयरों में एक दिन की सबसे बड़ी तेजी बताई जा रही है.
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोमवार को बाजार में आई तेजी के पीछे रिलायंस इंडस्ट्रीज का सबसे बड़ा योगदान रहा. कंपनी के शेयरों में तेजी के चलते एनर्जी इंडेक्स 3.9 फीसदी से अधिक चढ़ गया.
इन सेक्टरों में दिखी सबसे ज्यादा खरीदारी
निफ्टी के शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा स्टील सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों में शामिल रहे. दूसरी ओर, इंफोसिस और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली.
सेक्टर के लिहाज से ऑयल एंड गैस, मेटल और पीएसयू बैंक शेयरों में अच्छी खरीदारी रही. वहीं, आईटी और मीडिया सेक्टर दबाव में रहे.
बड़ी कंपनियों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी का रुख बना रहा. निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.19 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.71 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ. बाजार में तेजी का दायरा भी व्यापक रहा. निफ्टी 500 में शामिल 391 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 105 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई.
निवेशकों की दौलत में 8 लाख करोड़ रुपये का इजाफा
शेयर बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों को एक ही दिन में करीब 8 लाख करोड़ रुपये का फायदा हुआ. बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण बढ़कर करीब 482.41 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. शुक्रवार, 30 अक्टूबर को बाजार बंद होने के समय यह आंकड़ा 474.37 लाख करोड़ रुपये था. इस तरह एक कारोबारी सत्र में बाजार पूंजीकरण में करीब 8.04 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई.
110 डॉलर के नीचे आया ब्रेंट क्रूड
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत की वजह बनी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज होने से निवेशकों की धारणा में सुधार आया है.
दरअसल, कतर और ईरान के अधिकारियों के बीच लगातार तीसरे दिन बातचीत जारी रही. इन चर्चाओं का मकसद अमेरिका और इजरायल के ईरान के खिलाफ जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए समझौते का रास्ता तलाशना है. हालांकि, क्षेत्र में तनाव और अमेरिका की ओर से संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर अनिश्चितता अभी बनी हुई है.
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए राहत लेकर आती है. इससे तेल आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव कम होने की उम्मीद रहती है.
विदेशी निवेशकों की खरीदारी से भी मिला सहारा
घरेलू शेयर बाजार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी से भी समर्थन मिला. उपलब्ध प्रोविजनल आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने 30 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में 3,598 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे. इससे बाजार की धारणा को मजबूती मिली.
निफ्टी के लिए 23,600 का स्तर अहम
विशेषज्ञों के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,250 से 23,270 का स्तर तत्काल सपोर्ट जोन है. वहीं, ऊपर की तरफ 23,600 का स्तर अहम रेजिस्टेंस रहेगा. उनका कहना है कि अगर निफ्टी मजबूती के साथ 23,600 के ऊपर निकलता है तो बाजार में शॉर्ट कवरिंग बढ़ सकती है. इससे मौजूदा तेजी को और मजबूती मिल सकती है और निफ्टी 23,750 के स्तर तक पहुंच सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
इस प्रस्ताव का उद्देश्य निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करना है. मौजूदा व्यवस्था में एक स्कीम से दूसरी स्कीम में स्विच करने को यूनिट्स की बिक्री माना जाता है और इस पर लागू नियमों के अनुसार कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और घरेलू निवेशकों के घटते रिटर्न के बीच भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सरकार को दो अहम टैक्स राहत देने की सिफारिश की है. इसके तहत विदेशी निवेशकों पर लगने वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स खत्म करने और घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को एक स्कीम से दूसरी स्कीम में निवेश ट्रांसफर करने पर टैक्स छूट देने का प्रस्ताव है. हालांकि, इन सिफारिशों पर अंतिम फैसला केंद्र सरकार को लेना है.
बजट से पहले सरकार को भेजे गए सुझाव
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों के हवाले से बताया कि सेबी ने ये सुझाव फरवरी 2027 में पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले सरकार को दिए हैं. हालांकि, सेबी की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं हैं और इन्हें लागू करने का फैसला सरकार को करना है.
बताया जा रहा है कि सेबी ने पिछले दो वर्षों में विदेशी निवेशकों के साथ हुई कई बैठकों के बाद ये प्रस्ताव तैयार किए हैं. इन बैठकों में विदेशी निवेशकों ने भारत में लागू टैक्स व्यवस्था को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं. लगातार विदेशी बिकवाली के कारण भारतीय रुपये पर भी दबाव पड़ा है.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली रोकने की कोशिश
भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन पिछले दो वर्षों में कई अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले कमजोर रहा है. इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में रिकॉर्ड 31 अरब डॉलर की बिकवाली की है. वहीं, घरेलू शेयर बाजार से मिलने वाला रिटर्न ठहरने के कारण खुदरा निवेशकों का विदेशों में निवेश बढ़ा है.
सूत्रों के मुताबिक, सेबी के प्रस्ताव का उद्देश्य विदेशी निवेशकों पर शुरुआती टैक्स बोझ कम करना और भारतीय बाजार में निवेश को आकर्षक बनाना है.
फिलहाल भारत में एक साल से अधिक समय तक रखे गए शेयरों और अन्य पात्र प्रतिभूतियों पर 12.5 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है. वहीं, एक साल या उससे कम समय तक रखी गई प्रतिभूतियों की बिक्री से होने वाले मुनाफे पर 20 फीसदी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) टैक्स देना पड़ता है. इसके अलावा शेयरों की खरीद-बिक्री पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और लाभांश पर टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) भी लागू होता है.
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने हाल ही में जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कैपिटल गेन टैक्स में कटौती से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार का आकर्षण बढ़ सकता है और निवेश को समर्थन मिल सकता है. वहीं, ब्रोकरेज फर्म IIFL का अनुमान है कि कैपिटल गेन टैक्स खत्म होने से विदेशी निवेशकों का रिटर्न 2.3 प्रतिशत अंक तक बढ़ सकता है.
म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी मिल सकती है टैक्स राहत
सेबी ने घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए भी टैक्स राहत का प्रस्ताव दिया है. इसके तहत अगर कोई निवेशक अपनी म्यूचुअल फंड स्कीम की यूनिट्स को दूसरी स्कीम में ट्रांसफर करता है, तो इसे टैक्स के दायरे में आने वाली बिक्री नहीं माना जाना चाहिए. हालांकि, इस छूट का लाभ तभी मिल सकता है, जब निवेशक ने संबंधित यूनिट्स को एक साल से अधिक समय तक अपने पास रखा हो.
इस प्रस्ताव का उद्देश्य निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करना है. मौजूदा व्यवस्था में एक स्कीम से दूसरी स्कीम में स्विच करने को यूनिट्स की बिक्री माना जाता है और इस पर लागू नियमों के अनुसार कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है.
बाजार के कमजोर प्रदर्शन के बीच प्रस्ताव
पिछले दो वर्षों में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में कमजोर रहा है. इस दौरान निफ्टी 50 में 4.8 फीसदी की गिरावट आई, जबकि MSCI इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में 40 फीसदी की तेजी दर्ज की गई.
म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी इक्विटी स्कीमों से अपेक्षित रिटर्न नहीं मिला है. फंड रिसर्च कंपनी मॉर्निंगस्टार के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में लार्जकैप शेयरों में निवेश करने वाले फंड्स का औसत रिटर्न 1.6 फीसदी घटा है.
भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के पास फिलहाल 82.6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति प्रबंधन के तहत है. इस उद्योग में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिये हर महीने औसतन 3,000 करोड़ रुपये का निवेश आता है.