मार्च 2026 तक हाईवे बैकलॉग खत्म करने की तैयारी में सरकार, जानें अर्थव्यवस्था पर इसका असर

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लंबित कामों का निपटारा न केवल सड़क और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को सुदृढ़ करेगा, बल्कि इससे रोजगार, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था में व्यापक सकारात्मक बदलाव आएगा.

रितु राणा by
Published - Wednesday, 03 December, 2025
Last Modified:
Wednesday, 03 December, 2025
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देश में हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के पूरे बैकलॉग को खत्म करने का लक्ष्य तय किया है. यह कदम न केवल देशभर में सड़क और हाईवे नेटवर्क को आधुनिक रूप देने में अहम भूमिका निभाएगा, बल्कि इसके व्यापक आर्थिक प्रभाव भी देखने को मिलेंगे. निर्माण गतिविधियों में तेजी, रोजगार के नए अवसर, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन में सुधार, निवेश का बेहतर प्रवाह और क्षेत्रीय विकास, इन सभी पर इस पहल का बड़ा असर पड़ने वाला है. सरकार के इस फैसले से उद्योग, रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में नई उम्मीदें जगी हैं. आइए विशेषज्ञों की नजर से समझते हैं कि इसका देश की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा.

लंबित परियोजनाओं का इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्थव्यवस्था पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों के लंबित कामों को पूरा करने से इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश और निर्माण गतिविधियों में तेज़ी आएगी. यह कदम छोटे और बड़े व्यवसायों, गिग इकॉनमी और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देगा. एयू रियल एस्टेट डायरेक्टर आशीष अग्रवाल का कहना है कि नेशनल हाईवे के लंबित कामों को पूरा करने का सरकार का निर्णय देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा मोड़ साबित होगा. जैसे‑जैसे सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होती है, उद्योग तेजी से बढ़ते हैं और नए विकास क्षेत्रों में हाउसिंग, कमर्शियल और रिटेल स्पेस की मांग बढ़ जाती है. दिल्ली‑मेरठ NH‑24 ने उदाहरण के तौर पर एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ पूरे क्षेत्र का रूप बदल दिया. बेहतर सड़कें स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और जीवनशैली सुविधाओं के विकास को भी बढ़ावा देती हैं. 

निर्माण उद्योग और उपकरण कंपनियों को नया उत्साह

सरकार के इस फैसले से कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट इंडस्ट्री में भी नई रफ्तार आ गई है. इससे मशीनरी की मांग बढ़ेगी, उपकरणों का बेहतर उपयोग होगा और प्रोजेक्ट्स की गति तेज होगी. एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (ACE) क्रेन्स के सीईओ मनीष माथुर का कहना है कि साल 2026 तक नेशनल हाईवे से जुड़े लंबित कामों को तेजी से निपटाने के सरकार के फैसले ने कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट इंडस्ट्री को नई रफ़्तार दे दी है. यह कदम बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर बढ़ाएगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा. कुल मिलाकर, यह फैसला इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई दिशा देगा और भारत की ग्रोथ स्टोरी को आगे बढ़ाने का शक्तिशाली कदम साबित होगा. उन्होंने कहा है कि अगर प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होते हैं, तो न केवल भूमि, मजदूर और मशीनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स, सामुदायिक सुविधाओं आदि क्षेत्रों में समन्वित विकास संभव हो सकेगा.

प्रमुख परियोजनाओं को मिलेगा लाभ

रोड & हाईवेज, रॉडिक कंसल्टेंट्स के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रो. (डॉ.) होश राम यादव का कहना है कि सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के लंबित कामों को पूरा करना है, जो भारत में बुनियादी ढाँचे की तेजी से वृद्धि और विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है। सड़कें और राजमार्ग देश के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये कनेक्टिविटी को मजबूत करते हैं, औद्योगिक और आर्थिक विकास को बढ़ावा देते हैं, पर्यटन क्षमता को बढ़ाते हैं और समग्र आर्थिक प्रगति में बड़ी भूमिका निभाते हैं। रुकी हुई परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने से काम की बाधाएँ कम होंगी, निवेश और पूंजी का बेहतर उपयोग होगा, गिग और कॉन्ट्रैक्ट आधारित रोजगार के नए अवसर बनेंगे और इससे छोटे व्यवसायों और स्वरोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। तेज गति से होने वाले इस विकास से लॉजिस्टिक व्यवस्था बेहतर होगी, माल ढुलाई तेज होगी, बाजारों तक पहुंच आसान होगी और आर्थिक मंदी का असर कम करने में मदद मिलेगी। जैसे-जैसे परियोजनाओं का क्रियान्वयन तेज होगा, भारत का इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम सस्टेनेबल, हाई-इम्पैक्ट ग्रोथ देने के लिए बेहतर स्थिति में होगा।"

रियल एस्टेट, व्यवसाय और स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा

रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को भी इस पहल से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है. देरी से चल रहे प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने से लागत बढ़ने से रोका जा सकेगा, कैश फ्लो मजबूत होगा और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा. अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड के CFO और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संतोष अग्रवाल ने कहा है कि सरकार द्वारा मार्च 2026 तक नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स के लंबित कामों को पूरा करने की तेज कोशिश से रोजगार बढ़ेगा, स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा मिलेगा और सप्लाई‑चेन ज्यादा प्रभावी बनेगी. डेवलपर्स के लिए लगभग 60 प्रतिशत देरी से चल रहे प्रोजेक्ट को जल्दी मंजूरी और समय पर फंड जारी करके पूरा करना आसान होगा. इससे रेजिडेंशियल और कमर्शियल डेवलपमेंट की मांग बढ़ेगी और रोज़ाना निर्माण की गति भी तेज होगी. बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से न सिर्फ बड़े शहरों और औद्योगिक हब्स को लाभ होगा, बल्कि ग्रामीण एवं उपशहरी इलाके भी तेजी से जुड़े होंगे, जिससे सप्लाई चेन, रोजगार, बाजार पहुंच और सामाजिक सुविधाओं में सुधार संभव होगा.

मौजूदा स्थिति: नेटवर्क, निर्माण की रफ्तार और महत्व

जानकारी के अनुसार 2014 में भारत का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क करीब 91,287 किलोमीटर था; अब (2025 तक) यह बढ़कर लगभग 1,46,204 किलोमीटर हो चुका है, करीब 60 % की वृद्धि दर्ज हुई है. देश में लगभग 1,240 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ निर्माणाधीन हैं, जो कुल मिलाकर लगभग 29,400 किलोमीटर लंबी हैं, और इनपर अनुमानित लागत ₹7.8 लाख करोड़ है. वित्त वर्ष 2024–25 में, NHAI ने 5,614 किलोमीटर राजमार्ग बनाए, जो कि उस वर्ष के लिए लक्ष्य से भी अधिक था. इसके अलावा, एक्सप्रेसवे/ हाई‑स्पीड कॉरिडोर नेटवर्क में भी विस्तार हुआ है, 2014 में मात्र 93 किलोमीटर था, जो अब लगभग 5,110 किलोमीटर हो गया है.

इन तथ्यों से स्पष्ट है कि लंबे समय से जारी हाईवे‑विस्तार कार्यक्रम ने अब तक महत्वपूर्ण प्रगति की है; लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट्स अधूरे (backlog) हैं, जिन्हें 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.


Happy Birthday Sunil Grover: 'गुत्थी' से बने विज्ञापन जगत के 'मार्केटिंग गोल्ड', जानें कितनी है नेटवर्थ

आज के दौर में, जब विज्ञापन जगत तेजी से इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग की ओर बढ़ रहा है, सुनील ग्रोवर अपनी अभिनय क्षमता और किरदारों के दम पर अलग पहचान बनाए हुए हैं. उनकी खासियत यह है कि दर्शक उनके निभाए किरदार को भी याद रखते हैं और उससे जुड़े ब्रांड को भी नहीं भूलते.

Last Modified:
Monday, 03 August, 2026
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टीवी के लोकप्रिय किरदार 'गुत्थी' और 'डॉ. मशहूर गुलाटी' से दर्शकों का दिल जीतने वाले कॉमेडियन और अभिनेता सुनील ग्रोवर आज यानी 03 अगस्त को अपना जन्मदिन मना रहे हैं. अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और अलग-अलग किरदारों में ढलने की कला के दम पर उन्होंने न सिर्फ मनोरंजन जगत, बल्कि विज्ञापन की दुनिया में भी खास पहचान बनाई है. यही वजह है कि कई बड़े ब्रांड उन्हें अपने विज्ञापन अभियानों का चेहरा बनाते हैं. उनके जन्मदिन के इस खास मौके पर जानते हैं उनकी अनुमानित नेटवर्थ, कमाई के प्रमुख स्रोत और उन यादगार विज्ञापनों के बारे में, जिन्होंने उन्हें विज्ञापन जगत का 'मार्केटिंग गोल्ड' बना दिया. 

कितनी है सुनील ग्रोवर की नेटवर्थ, कहां-कहां से होती है कमाई?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुनील ग्रोवर की अनुमानित नेटवर्थ 21 से 25 करोड़ रुपये के बीच है. हालांकि, उनकी कुल संपत्ति को लेकर आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. उनकी कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा टीवी शो, फिल्मों, वेब सीरीज, लाइव कॉमेडी परफॉर्मेंस, ब्रांड एंडोर्समेंट और विज्ञापनों से आता है. इसके अलावा वह सोशल मीडिया प्रमोशन, स्टेज शो और कॉर्पोरेट इवेंट्स में परफॉर्मेंस के जरिए भी अच्छी आय अर्जित करते हैं. हाल के वर्षों में 'द ग्रेट इंडियन कपिल शो' में वापसी और कई बड़े ब्रांड्स के साथ किए गए विज्ञापन अभियानों ने उनकी कमाई और लोकप्रियता दोनों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. आइए जानते हैं उन पांच विज्ञापन अभियानों के बारे में, जिन्होंने सुनील ग्रोवर को विज्ञापन जगत का 'मार्केटिंग गोल्ड' बना दिया.

1. फिगारो ऑलिव ऑयल: एक विज्ञापन में पांच किरदार

इस साल फिगारो ऑलिव ऑयल ने अपनी नई ब्रांड पहचान के साथ एक नया कैंपेन लॉन्च किया, जिसमें सुनील ग्रोवर एक साथ पांच अलग-अलग किरदार निभाते नजर आए. विज्ञापन का संदेश था कि जिस तरह ग्रोवर आसानी से अलग-अलग किरदार निभा लेते हैं, उसी तरह फिगारो ऑलिव ऑयल भी खाना बनाने से लेकर पर्सनल केयर तक कई कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है.

यह अभियान कंपनी डियोलियो (Deoleo) की नई ब्रांडिंग रणनीति का हिस्सा था. कंपनी के अनुसार, भारत में फिगारो के कारोबार का करीब 48% हिस्सा मल्टीपर्पज कैटेगरी से आता है.

2. गोआईबिबो की 'डीलपंती': जब बने डोनाल्ड ट्रंप

गोआईबिबो के 'डीलपंती' कैंपेन में सुनील ग्रोवर ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मजेदार नकल की. विज्ञापन में वह होटल की कीमतों पर बहस करते नजर आते हैं, जिसके बाद क्रिकेटर ऋषभ पंत ब्रांड का ऑफर पेश करते हैं.

इस डिजिटल अभियान की खास बात यह थी कि इसमें कॉमेडियन कीकू शारदा भी शामिल थे. दोनों ने अपने हास्य अभिनय से ट्रैवल डील्स को भी मनोरंजक बना दिया.

3. एयरटेल-एडोबी एक्सप्रेस: डिजाइनिंग को बनाया आसान

'झटपट फटाफट' कैंपेन में सुनील ग्रोवर एक ऐसे पारिवारिक ज्योतिषी की भूमिका में दिखे, जो शादी के कार्ड की डिजाइन पर टिप्पणी करता है और फिर Adobe Express से खुद तैयार किया गया निमंत्रण पत्र दिखाता है.

इस अभियान का उद्देश्य Airtel ग्राहकों को Adobe Express Premium की सुविधा से परिचित कराना था. बाद में इसे जन्मदिन की शुभकामनाओं, मीम्स, व्हाट्सऐप क्रिएटिव, पार्टी इनविटेशन और छोटे कारोबारों के प्रमोशनल मटेरियल तक भी विस्तार दिया गया.

4. मेंटोस का 'एंग्री चिकन डैड': जो मीम बन गया

परफेटी वैन मेल (Perfetti Van Melle) के मेंटोस #FarakPadega अभियान में सुनील ग्रोवर ने गुस्सैल मुर्गे की आवाज दी थी. विज्ञापन का डायलॉग, "इनको फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन आपको #FarakPadega", इतना लोकप्रिय हुआ कि बाद में सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम रील्स पर मीम के रूप में खूब वायरल हुआ.

इस विज्ञापन की खासियत यह थी कि इसमें उत्पाद को समस्या का जादुई समाधान नहीं बताया गया, बल्कि हास्य के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया गया.

5. कुरकुरे: जूही चावला के साथ बनाई अलग पहचान

OTT और सोशल मीडिया के दौर से पहले ही सुनील ग्रोवर कुरकुरे के टीवी विज्ञापनों में जूही चावला के साथ नजर आ चुके थे. इन विज्ञापनों में उन्होंने आम लोगों से जुड़े मजेदार किरदार निभाए, जिसने ब्रांड की चुलबुली और मनोरंजक छवि को और मजबूत किया. इन शुरुआती अभियानों ने यह साबित कर दिया कि सुनील ग्रोवर ऐसे कलाकार हैं, जो ब्रांड से ध्यान हटाए बिना विज्ञापन को यादगार बना सकते हैं.

 


भारत और कनाडा के बीच CEPA वार्ता अंतिम चरण में, साल के अंत तक समझौते का लक्ष्य

विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित CEPA के तहत वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में टैरिफ तथा अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम या समाप्त किया जाएगा और व्यापार को चरणबद्ध तरीके से उदार बनाया जाएगा.

Last Modified:
Monday, 03 August, 2026
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भारत और कनाडा ने प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement-CEPA) पर वार्ता को वर्ष 2026 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है. केंद्र सरकार ने राज्यसभा में इसकी जानकारी दी. यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ शुल्क (टैरिफ) और अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि अब तक CEPA पर वार्ता के तीन दौर पूरे हो चुके हैं. ताजा दौर 6 जुलाई से 10 जुलाई 2026 के बीच कनाडा की राजधानी ओटावा में आयोजित किया गया था. उन्होंने कहा कि वार्ता के विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक प्रगति हुई है और दोनों देश 2026 के अंत तक बातचीत को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं.

क्या है CEPA?

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, प्रस्तावित CEPA का उद्देश्य भारत और कनाडा के बीच एक मुक्त व्यापार क्षेत्र (Free Trade Area) स्थापित करना है. इसके तहत वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में टैरिफ तथा अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम या समाप्त किया जाएगा और व्यापार को चरणबद्ध तरीके से उदार बनाया जाएगा.

सरकार का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के लिए अधिक पारदर्शी एवं पूर्वानुमान योग्य ढांचा तैयार करेगा. साथ ही आर्थिक सहयोग और दोनों देशों के लोगों के बीच संबंधों को भी मजबूती मिलेगी.

भारत के लिए अहम बाजार है कनाडा

साल 2025 के अनुमान के अनुसार कनाडा की आबादी लगभग 4.16 करोड़ (41.65 मिलियन) है. क्रय शक्ति समता (Purchasing Power Parity-PPP) के आधार पर उसकी अर्थव्यवस्था का आकार करीब 2.34 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है. ऐसे में कनाडा भारत के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात बाजार और निवेश गंतव्य माना जाता है.

रिश्तों में सुधार के साथ तेज हुई वार्ता

भारत और कनाडा के बीच CEPA वार्ता ऐसे समय तेज हुई है, जब दोनों देश पिछले कुछ समय से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव के बाद अपने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं. नई कनाडाई सरकार के साथ संबंधों में सुधार के प्रयासों के बीच व्यापार समझौते को नई गति मिली है.

प्रधानमंत्री मोदी के कनाडा दौरे की उम्मीद

सरकार को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वर्ष के अंत में कनाडा की यात्रा कर सकते हैं. माना जा रहा है कि यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को और गति देने के साथ-साथ CEPA वार्ता को अंतिम रूप तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है.


SEBI के आदेश से ₹3,144 करोड़ की फंड जुटाने की योजना पर नहीं पड़ेगा असर: ZEE

कंपनी के अनुसार, इस फंड जुटाने का उद्देश्य उसकी वित्तीय स्थिति को और मजबूत करना तथा हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करना है.

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Monday, 03 August, 2026
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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) के हालिया आदेश के बावजूद ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्रस्तावित ₹3,144 करोड़ की फंड जुटाने की योजना पर इसका कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ेगा. कंपनी ने कहा कि वह सेबी के अंतिम आदेश का कानूनी विशेषज्ञों के साथ अध्ययन कर रही है और आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार करेगी. कंपनी के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा, "कंपनी को सेबी का आदेश प्राप्त हो गया है और इस संबंध में कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली जा रही है."

फंड जुटाने की प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी

जी ने दोहराया कि सेबी का आदेश उसके पूंजी जुटाने के प्रस्ताव से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं है. कंपनी ने कहा कि 31 जुलाई 2026 को आयोजित असाधारण आम बैठक (EGM) में शेयरधारकों की मंजूरी और स्टॉक एक्सचेंजों से आवश्यक नियामकीय स्वीकृतियां मिलने के बाद अब वह फंड जुटाने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी.

कंपनी के अनुसार, इस फंड जुटाने का उद्देश्य उसकी वित्तीय स्थिति को और मजबूत करना तथा हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजित करना है.

हितधारकों के हितों की रक्षा के लिए उठाए जाएंगे कानूनी कदम

जी ने कहा कि कंपनी और उसके प्रमोटरों पर लगाए गए आरोपों के संबंध में वह कानून के अनुरूप आवश्यक कदम उठाएगी ताकि सभी हितधारकों के हितों की रक्षा की जा सके.

क्या है पूरा मामला?

यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में सेबी ने ज़ी की हैदराबाद स्थित संपत्ति को प्रमोटर समूह से जुड़ी एस्सेल ग्रुप की कंपनियों द्वारा लिए गए ऋण के लिए बिना अनुमति गिरवी रखने के मामले में अंतिम आदेश जारी किया है.

सेबी ने जी एंटरटेनमेंट को दो महीने तक प्रतिभूति बाजार में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया है. वहीं कंपनी के संस्थापक एवं चेयरमैन एमेरिटस सुभाष चंद्र और प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (MD & CEO) पुनीत गोयनका पर एक-एक वर्ष तक प्रतिभूति बाजार में भाग लेने पर रोक लगा दी गई है. इसके अलावा कंपनी और दोनों अधिकारियों पर मौद्रिक जुर्माना भी लगाया गया है.

बिना मंजूरी गिरवी रखी गई थी संपत्ति

सेबी के अनुसार, ज़ी की हैदराबाद स्थित संपत्ति को निदेशक मंडल, ऑडिट समिति या शेयरधारकों की मंजूरी के बिना ऋण के लिए संपार्श्विक (Collateral) के रूप में गिरवी रखा गया था. साथ ही इस लेनदेन का पर्याप्त खुलासा भी नहीं किया गया, जो नियामकीय नियमों का उल्लंघन माना गया.


आज से शेयर बाजार में लागू हुए नए नियम, ट्रेडिंग टाइम से क्लोजिंग प्राइस तक बड़े बदलाव

नए नियमों के तहत F&O शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन शुरू होगा, इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग का समय बढ़ेगा और प्री-ओपनिंग सेशन का शेड्यूल भी बदल जाएगा.

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Monday, 03 August, 2026
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अगर आप शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग करते हैं, तो आज से लागू हुए नए नियमों की जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 3 अगस्त से शेयर बाजार के ट्रेडिंग ढांचे में कई अहम बदलाव लागू कर दिए हैं. नए नियमों के तहत F&O शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन शुरू होगा, इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग का समय बढ़ेगा और प्री-ओपनिंग सेशन का शेड्यूल भी बदल जाएगा. इन बदलावों का मकसद बाजार को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना है.

F&O शेयरों की क्लोजिंग का तरीका बदला

आज से F&O सेगमेंट में शामिल शेयरों की क्लोजिंग प्रक्रिया पूरी तरह बदल गई है. इन शेयरों में सामान्य खरीद-बिक्री दोपहर 3:15 बजे तक होगी. इसके बाद शाम 3:20 बजे से 3:30 बजे तक क्लोजिंग ऑक्शन सेशन चलेगा, जिसमें निवेशक अपने ऑर्डर दर्ज कर सकेंगे. फिर 3:30 बजे से 3:35 बजे तक ऑर्डर मैचिंग होगी और इसी प्रक्रिया से तय हुई कीमत को उस शेयर की आधिकारिक क्लोजिंग प्राइस माना जाएगा.

F&O ट्रेडिंग का समय 10 मिनट बढ़ा

SEBI ने इक्विटी डेरिवेटिव्स यानी F&O सेगमेंट की ट्रेडिंग अवधि भी बढ़ा दी है. अब इस सेगमेंट में कारोबार दोपहर 3:40 बजे तक किया जा सकेगा. हालांकि, यह बदलाव केवल F&O सेगमेंट पर लागू होगा. नकद बाजार (Cash Market) के वे शेयर जो F&O में शामिल नहीं हैं, उनमें पहले की तरह दोपहर 3:30 बजे तक ही ट्रेडिंग होगी.

प्री-ओपनिंग सेशन का नया शेड्यूल

बाजार खुलने से पहले होने वाले प्री-ओपनिंग सेशन के समय में भी बदलाव किया गया है. नए नियमों के अनुसार सुबह 9:00 बजे से 9:07 बजे तक ऑर्डर एंट्री होगी. इसके बाद 9:07 बजे से 9:15 बजे तक ऑर्डर मैचिंग की जाएगी. हालांकि, नियमित ट्रेडिंग का समय पहले की तरह सुबह 9:15 बजे से ही रहेगा.

SEBI ने क्यों किए ये बदलाव?

SEBI का कहना है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन लागू करने का उद्देश्य शेयरों की क्लोजिंग प्राइस को अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाना है. इससे बाजार में उपलब्ध लिक्विडिटी बेहतर तरीके से एकत्र होगी, सभी निवेशकों को समान अवसर मिलेगा और पैसिव फंड्स की ट्रैकिंग एरर कम होगी. साथ ही, भारतीय शेयर बाजार की कार्यप्रणाली वैश्विक मानकों के और करीब पहुंचेगी.

निवेशकों और ट्रेडर्स पर क्या होगा असर?

नए नियमों के बाद F&O ट्रेडर्स को अपनी ट्रेडिंग रणनीति और ऑर्डर प्लेसमेंट के समय में बदलाव करना होगा. क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के कारण अंतिम कीमत अधिक पारदर्शी तरीके से तय होगी, जबकि डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के लिए अतिरिक्त 10 मिनट मिलने से निवेशकों को अपनी पोजिशन मैनेज करने का अधिक समय मिलेगा. वहीं, प्री-ओपनिंग सेशन के नए शेड्यूल के कारण शुरुआती ऑर्डर प्रक्रिया भी पहले से अधिक व्यवस्थित होगी.
 


ट्रंप के फैसले से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, ब्रेंट 84 डॉलर के नीचे; ईरान तनाव कम होने की उम्मीद

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली. इसकी मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर प्रस्तावित बड़े सैन्य हमले को फिलहाल टालने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का फैसला रहा.

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Monday, 03 August, 2026
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला टालने और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने के फैसले से वैश्विक कच्चे तेल बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. सोमवार को ब्रेंट क्रूड 4% से अधिक टूटकर 84 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड 5% से ज्यादा फिसलकर 81 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार करने लगा. निवेशकों को उम्मीद है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से तेल आपूर्ति पर मंडरा रहा खतरा भी घट सकता है.

ट्रंप के फैसले से टूटा तेल बाजार

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को तेज गिरावट देखने को मिली. इसकी मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान पर प्रस्तावित बड़े सैन्य हमले को फिलहाल टालने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का फैसला रहा.

ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब समेत पश्चिम एशिया के कई सहयोगी देशों ने सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देने की अपील की थी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोलने की दिशा में प्रगति होती है तो बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा.

तेल की कीमतों में क्यों आई गिरावट?

ट्रंप के बयान के बाद बाजार को भरोसा मिला कि पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है और वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होने का जोखिम घटेगा. इसी उम्मीद के चलते ब्रेंट क्रूड 4% से ज्यादा टूटकर 84 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि WTI क्रूड 5% से अधिक गिरकर 81 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार करने लगा.

जुलाई में रहा भारी उतार-चढ़ाव

हालांकि तेल बाजार में अस्थिरता अभी भी बनी हुई है. जुलाई के दौरान ब्रेंट क्रूड करीब 25% चढ़ा था, जो मार्च के बाद इसकी सबसे बड़ी मासिक बढ़त रही. युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण पिछले महीने ब्रेंट में करीब 32 डॉलर प्रति बैरल का उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया.

तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ

शुरुआती गिरावट के बाद तेल की कीमतों में कुछ रिकवरी भी देखने को मिली. इसकी वजह ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर के निकट हुए विस्फोट की खबर रही. इस घटना ने संकेत दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सुरक्षा संबंधी जोखिम अभी भी बने हुए हैं.

दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है. ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है.

OPEC बढ़ाएगा उत्पादन, सप्लाई को मिलेगा सहारा

इस बीच OPEC के प्रमुख देशों ने उत्पादन बढ़ाने की योजना को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है. यदि पश्चिम एशिया में तनाव और कम होता है तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ सकती है. वहीं, इराक और तुर्किये ने अपनी तेल पाइपलाइन समझौते को एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है, जिससे प्रतिदिन लगभग 7.5 लाख बैरल तेल का निर्यात संभव होगा.

ईरान-ओमान के बीच भी जारी है बातचीत

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि ईरान और ओमान के बीच बातचीत अंतिम चरण में है. दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े नए शिपिंग रूट पर चर्चा कर रहे हैं. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब जलडमरूमध्य को खोलने या बंद करने पर कोई अंतिम फैसला नहीं है.
 


शेयर बाजार में बुल्स का दबदबा, सेंसेक्स 78,000 के पार; आज फोकस में रहेंगे ये शेयर

बीते कारोबारी सत्र यानी शुक्रवार को सेंसेक्स 166.49 अंक यानी 0.21% बढ़कर 78,094.64 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी50 इंडेक्स 66.45 अंक यानी 0.27% की बढ़त के साथ 24,383.60 पर बंद हुआ.

Last Modified:
Monday, 03 August, 2026
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घरेलू शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सत्र में लगातार तीसरे दिन बढ़त दर्ज की थी. मजबूत वैश्विक संकेतों और ऑटो व वित्तीय शेयरों में खरीदारी के दम पर बीएसई सेंसेक्स 166.49 अंक की बढ़त के साथ 78,094.64 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी50 24,383.60 के स्तर पर पहुंच गया. इस तेजी के बीच बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व सबसे बड़े गेनर रहे. आज के कारोबार में भी कई कंपनियों के तिमाही नतीजों, नए ऑर्डर और नियामकीय घटनाक्रमों के चलते चुनिंदा शेयरों पर निवेशकों की नजर रहेगी.

तीसरे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुआ था बाजार

घरेलू शेयर बाजार ने शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया. मजबूत वैश्विक संकेतों के बीच बाजार की शुरुआत हल्की बढ़त के साथ हुई और पूरे दिन सीमित दायरे में कारोबार चलता रहा. कारोबार के अंत में ऑटो और फाइनेंशियल सर्विसेज शेयरों में खरीदारी के दम पर बीएसई सेंसेक्स 166.49 अंक यानी 0.21% बढ़कर 78,094.64 पर बंद हुआ. वहीं, एनएसई का निफ्टी50 इंडेक्स 66.45 अंक यानी 0.27% की बढ़त के साथ 24,383.60 पर पहुंच गया.

बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व ने दिखाई दमदार तेजी

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 14 बढ़त के साथ बंद हुए. सबसे ज्यादा तेजी बजाज फाइनेंस में 8.04% और बजाज फिनसर्व में 6.60% दर्ज की गई. इनके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, अडानी पोर्ट्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), टाइटन और भारती एयरटेल के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली.

आईटी शेयरों में बिकवाली हावी रही

दूसरी ओर, आईटी और कुछ दिग्गज शेयरों में दबाव बना रहा. टीसीएस, इटरनल, इन्फोसिस, आईटीसी, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, इंडिगो और सन फार्मा के शेयर गिरावट के साथ बंद हुए.

रुपये ने भी दिखाई मजबूती

मुद्रा बाजार में भी रुपये ने मजबूती दिखाई. सप्ताह के दौरान रुपया 1.2% मजबूत होकर बंद हुआ, जो मार्च के बाद इसका सबसे अच्छा साप्ताहिक प्रदर्शन रहा.

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी

निफ्टी50 में बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व और जियो फाइनेंशियल सर्विसेज सबसे अधिक बढ़त वाले शेयर रहे. व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप दोनों 0.44% की बढ़त के साथ बंद हुए.

ऑटो और वित्तीय शेयरों ने बाजार को दिया सहारा

सेक्टोरल इंडेक्स में ऑटो और वित्तीय शेयरों ने बाजार की बढ़त में अहम योगदान दिया, जबकि आईटी और एफएमसीजी शेयरों में कमजोरी रही. वैश्विक चिप कंपनियों के शेयरों में तेजी के बावजूद निफ्टी आईटी का लगातार पांच कारोबारी सत्रों से जारी बढ़त का सिलसिला टूट गया.

आज इन शेयरों पर रहेगी बाजार की नजर

आज के कारोबार में कई कंपनियों के शेयर खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं. जाइडस लाइफसाइंसेज को अहमदाबाद स्थित इंजेक्टेबल यूनिट के लिए USFDA से एस्टैब्लिशमेंट इंस्पेक्शन रिपोर्ट (EIR) मिली है. डॉ. रेड्डीज को अमेरिका में Rituximab बायोसिमिलर के विपणन की मंजूरी मिली है.

अफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर ने करीब 900 करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट हासिल किए हैं. वहीं, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) को 847 करोड़ रुपये और एनसीसी को 1,052.71 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले हैं. मारुति सुजुकी के बोर्ड ने 561 करोड़ रुपये की चार कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जबकि कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CONCOR) ने अजीत कुमार पांडा को नया CMD नियुक्त किया है.

इसके अलावा, मूडीज ने JSW स्टील को Baa3 रेटिंग के साथ 'स्थिर' आउटलुक दिया है. दूसरी ओर, सेबी ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े मामले में जी एंटरटेनमेंट, पुनीत गोयनका और सुभाष चंद्र पर बाजार से प्रतिबंध लगाने के साथ 1.48 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. ONGC ने अपने दो संयुक्त उपक्रमों में 50% हिस्सेदारी बरकरार रखने का फैसला किया है. वहीं, इंडिगो 25 अक्टूबर 2026 को Norse Atlantic Airways के साथ अपना वाइड-बॉडी डैम्प लीज समझौता समाप्त करेगी. 

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)

 


जुलाई में GST कलेक्शन ने दिखाई अर्थव्यवस्था की मजबूती, 15.4% बढ़कर 2.11 लाख करोड़ रुपये पहुंचा

वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में सकल GST कलेक्शन 8.43 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 7.66 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 10.1% अधिक है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 01 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 01 August, 2026
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देश की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत देते हुए जुलाई 2026 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह 15.4% की सालाना बढ़ोतरी के साथ 2.11 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. घरेलू कारोबार में तेजी और आयात पर बढ़े टैक्स कलेक्शन के दम पर सरकार की कमाई में यह उछाल दर्ज किया गया. हरियाणा, गुजरात और तेलंगाना जैसे राज्यों ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि कुछ राज्यों में GST संग्रह में गिरावट भी देखने को मिली.

घरेलू कारोबार से GST संग्रह 1.31 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, आयात से मिलने वाला GST 28.8% की तेज बढ़ोतरी के साथ 66,511 करोड़ रुपये पहुंच गया. पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद देश में आर्थिक गतिविधियों और उपभोक्ता मांग पर खास असर नहीं पड़ा.

रिफंड में भी दो अंकों की बढ़ोतरी

जुलाई के दौरान कारोबारियों को 29,968 करोड़ रुपये का GST रिफंड जारी किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13.1% अधिक है. वहीं, ICEGATE के जरिए प्रोसेस किए गए निर्यात रिफंड में 22.7% की वृद्धि दर्ज की गई और यह 12,288 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.

नेट GST कलेक्शन 1.81 लाख करोड़ रुपये

रिफंड समायोजित करने के बाद सरकार का नेट GST कलेक्शन जुलाई में 1.81 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में 15.8% अधिक है. इसमें घरेलू कारोबार से मिलने वाला नेट GST 1.27 लाख करोड़ रुपये और आयात से मिलने वाला नेट GST 54,223 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 30.3% की वृद्धि दर्ज की गई.

GST 2.0 का असर दिखने लगा

विशेषज्ञों का मानना है कि GST 2.0 लागू होने के बाद टैक्स संग्रह में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है. हर महीने 7-8% की स्थिर वृद्धि इस बात का संकेत है कि टैक्स अनुपालन बेहतर हुआ है. हालांकि, आयात से मिलने वाले टैक्स की वृद्धि घरेलू कारोबार की तुलना में अधिक रहने से यह भी संकेत मिलता है कि उपभोक्ता गैर-जरूरी खर्चों को लेकर अभी सतर्क हैं.

अप्रैल-जुलाई में 8.43 लाख करोड़ रुपये का संग्रह

वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल-जुलाई) में सकल GST कलेक्शन 8.43 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 7.66 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 10.1% अधिक है. इसी अवधि में नेट GST कलेक्शन 9.2% बढ़कर 7.21 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

हरियाणा सबसे आगे, कई राज्यों में शानदार प्रदर्शन

राज्यों की बात करें तो जुलाई में GST संग्रह वृद्धि के मामले में हरियाणा 25% की बढ़ोतरी के साथ शीर्ष पर रहा. इसके बाद गुजरात और तेलंगाना में 19-19%, पंजाब और केरल में 16%, उत्तर प्रदेश में 15%, महाराष्ट्र में 13%, कर्नाटक में 12% और दिल्ली में 8% की वृद्धि दर्ज की गई.

हालांकि, कुछ राज्यों में GST संग्रह कमजोर रहा. हिमाचल प्रदेश में 22%, उत्तराखंड में 18%, पुडुचेरी में 17%, मध्य प्रदेश में 10%, आंध्र प्रदेश में 5% और तमिलनाडु में 1% की गिरावट दर्ज की गई.
 


यील्ड के दिग्गज: कोटक-रॉबी की जंग

10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड: 4.70%. लगातार बढ़ती हुई. 30 साल की यील्ड: 5.20%. और फेडरल रिजर्व अभी ब्याज दरों में बदलाव भी नहीं कर रहा था.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 01 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 01 August, 2026
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पलक शाह

ये आंकड़े वैश्विक वित्त बाजार के लिए खतरे की घंटी की तरह सामने आए. 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड: 4.70%. लगातार बढ़ती हुई. 30 साल की यील्ड: 5.20%. और फेडरल रिजर्व अभी ब्याज दरों में बदलाव भी नहीं कर रहा था.

मुंबई के क्षितिज को निहारते अपने शानदार ऑफिस में बैठे उदय कोटक, एक बैंकिंग साम्राज्य के निर्माता, वह शख्स जिसने हर संकट, हर मोड़ और मौद्रिक नीति के हर उतार-चढ़ाव को संभाला था, अब उसने इसे महसूस किया. वह ठंडी निश्चितता. भूकंप से पहले आने वाली कंपन.

उन्होंने देर नहीं की. उन्होंने ट्वीट किया.

"वैश्विक वित्त के लिए सबसे कमजोर कड़ी अमेरिकी बॉन्ड यील्ड है."

सरल और प्रभावी, लेकिन डरावना.

इसलिए नहीं कि ये आंकड़े उन लोगों के लिए चौंकाने वाले थे जो रोजाना बाजार को देखते हैं. बल्कि इसलिए क्योंकि कोटक, एक स्थापित बैंकर, वह व्यक्ति जिसने यह समझते हुए अपनी संपत्ति बनाई कि केंद्रीय बैंक कैसे सोचते हैं, कैसे कदम उठाते हैं और कैसे दुनिया को सहारा देते हैं, अब खतरे की घंटी बजा रहे थे.

इसका संकेत बिल्कुल साफ था: कुछ टूट चुका है. इक्विटी बाजारों के लिए यह संगीत कभी भी बंद हो सकता है. फेड अब इसे ठीक नहीं कर सकता.

तभी एंट्री होती है केविन वार्श की, नए फेड चेयर की, जिन्हें अब तक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी व्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है. वार्श ऐसे व्यक्ति हैं जो छोटे देशों के आकार जितनी बड़ी बैलेंस शीट में विश्वास नहीं रखते. उनका मानना है कि तरलता (लिक्विडिटी) को कम करना कोई समस्या नहीं बल्कि व्यवस्था का हिस्सा है.

और अचानक 14 साल का दौर 2008 से 2021 तक मुफ्त पैसे, शून्य ब्याज दरों और 24/7 चलने वाली मनी प्रिंटिंग मशीनों का दौर आधिकारिक तौर पर खत्म हो गया.

कोटक का ट्वीट एक बैंकर की प्रार्थना थी. कृपया कोई इस स्थिति को संभाल ले... कम से कम कोशिश तो करे.

रिंग में उतरता स्ट्रीट फाइटर

कोटक के मुंबई ऑफिस से करीब 500 किलोमीटर दूर, अहमदाबाद के शांतिग्राम स्थित एक और शानदार ऑफिस में जुगे‍शिंदर "रॉबी" सिंह ने इसे पढ़ा... शायद वह हंसे भी होंगे.

रॉबी सिंह विनम्र वित्तीय दुनिया के लिए नहीं बने हैं. उन्होंने अपना पूरा करियर अडानी ग्रुप में बिताया है, भारत के सबसे आक्रामक, महत्वाकांक्षी और विवादित कारोबारी समूहों में से एक को कठिन परिस्थितियों से निकालते हुए.

राजनीतिक तूफान, मीडिया हमले, नियामकीय चुनौतियां. रॉबी ने नियामकों, विश्लेषकों, शॉर्ट सेलर्स और उन आलोचकों का सामना किया जिन्होंने कहा कि उनके बॉस बहुत जोखिम भरे, बहुत बड़े और अछूते हैं.

रॉबी सिर्फ इन लड़ाइयों से बचे नहीं. वह इनसे मजबत हुए. वह एक बात जानते हैं जो ज्यादातर बैंकर नहीं जानते: आराम मजबूती का दुश्मन है.

इसलिए जब उदय कोटक, भारतीय बैंकिंग के सुनहरे सितारे, वह व्यक्ति जिसे 2008 से भारत के केंद्रीय बैंक की उदार नीतियों का फायदा मिला बॉन्ड यील्ड को लेकर चिंता जता रहे थे, तो रॉबी ने इसे अलग नजरिए से देखा.

उन्होंने कमजोरी देखी. उन्होंने निर्भरता देखी. उन्होंने ऐसे मनी मैनेजरों की पूरी पीढ़ी देखी जो भूल चुके थे कि असली पूंजीवाद कैसा महसूस होता है.

उन्होंने अपना X ऐप खोला और बिना किसी हिचक के जवाब दिया.

सड़क से आया संदेश

"4.70% ट्रेजरी यील्ड को लेकर घबराहट पूरी तरह हास्यास्पद है."

ये छह शब्द एक चुनौती थे. कोटक की सोच को सीधी चुनौती.

रॉबी ने शब्दों को नहीं तौला. उन्होंने ऐसे लिखा जैसे कोई व्यक्ति जिसने दो दशक संघर्ष के मैदान में बिताए हों, जिसने बोर्ड में टकराव देखे हों, नियामकों को अपनी कंपनी पर कार्रवाई करते देखा हो और फिर भी मजबूती से खड़ा रहा हो.

उन्होंने सीधे निशाना साधा.

"मनी मैनेजरों की पूरी एक पीढ़ी 2008-2021 की फेड लिक्विडिटी की आदी हो गई. उन्हें लगता है कि शून्य ब्याज दर सामान्य है. ऐसा नहीं है. यह एक कृत्रिम असामान्यता थी जिसने आलसी पूंजी और आलसी बैंकरों को सब्सिडी दी."

हां, इसे दोबारा पढ़िए.

आलसी पूंजी. आलसी बैंकर.

यह सिर्फ आलोचना नहीं थी. यह तंज था. यह एक स्ट्रीट फाइटर की आवाज थी जो स्थापित व्यवस्था से कह रहा था कि उन्होंने एक भ्रम चलाया और अब जब वह खत्म हो रहा है तो वे शिकायत कर रहे हैं.

इसके बाद रॉबी ने आंकड़े पेश किए, एक बड़ा प्रहार:

"1990 से 2008 तक आधुनिक विकास का सबसे स्थिर दौर, 10 साल की यील्ड औसतन 5.68% थी (मीडियन करीब 5.35%). हम संकट में नहीं हैं; हम ऐतिहासिक सामान्य स्थिति में लौट रहे हैं."

मतलब साफ था: उदय कोटक, आप उस चीज को लेकर घबरा रहे हैं जो 18 वर्षों तक सामान्य स्थिति थी. आपकी पीढ़ी मुफ्त पैसे की इतनी आदी हो गई कि आप भूल गए कि वास्तविक बाजार कैसे दिखते हैं.

फिर आया अंतिम वार. वह लाइन जिसने दिग्गजों और पर्यटकों के बीच अंतर कर दिया:

"अगर आपका बिजनेस मॉडल सिर्फ इसलिए चलता है क्योंकि केंद्रीय बैंक आपके लिए लिक्विडिटी में हेरफेर करता रहे, तो आपके पास बिजनेस नहीं है—आप एक चैरिटी केस हैं."

सबटेक्स्ट: भारत के भविष्य को लेकर दो नजरिए

यहां ज्यादातर लोग एक महत्वपूर्ण बात को नजरअंदाज कर गए.

यह सिर्फ बॉन्ड यील्ड को लेकर बहस नहीं थी. यह उस सवाल पर मूलभूत मतभेद था कि उस दुनिया में पूंजीवाद कैसा दिखेगा, जहां केंद्रीय बैंक अब सहारा देने वाली भूमिका में नहीं होंगे.

कोटक का नजरिया: बैंकर की प्रार्थना

उदय कोटक ने अपना साम्राज्य ऐसे दौर में बनाया जब फेड लगातार बाजार को सहारा देता रहा.

वित्तीय संकट आया? फेड ने पैसा छापा.
महामारी आई? फेड ने हस्तक्षेप किया.

उनकी पूरी सोच इस धारणा पर आधारित रही कि केंद्रीय बैंक हमेशा गिरते बाजार को संभालने के लिए मौजूद रहेंगे.

कोटक बैंक की तरह ज्यादातर भारतीय बैंक भी इसी आधारभूत धारणा पर निर्भर हो गए थे. कम ब्याज दरों का मतलब था आसान कर्ज. फेड की लिक्विडिटी का मतलब था कि वैश्विक पूंजी उभरते बाजारों की ओर आती रहे.

पूरा ढांचा वैल्यूएशन, लीवरेज और रिटर्न की उम्मीदें, इस नींव पर खड़ा था कि "केंद्रीय बैंक हमेशा हस्तक्षेप करेंगे."

जब कोटक "एकिलीज हील" की बात कर रहे हैं, तो उनका वास्तविक मतलब है:

"अगर फेड लिक्विडिटी देना बंद कर देता है तो हमारा मॉडल टूट जाएगा."

यह सिर्फ कोटक बैंक की बात नहीं है. यह उन सभी कंपनियों और कारोबारों की बात है चाहे वे भारतीय हों या वैश्विक, जो पूरी तरह कर्ज पर निर्भर हैं, जो कैरी ट्रेड (कम ब्याज पर उधार लेकर कहीं और ज्यादा रिटर्न के लिए निवेश करना) से पैसा कमा रहे हैं और जो लगभग शून्य उधारी लागत और ज्यादा एसेट रिटर्न के अंतर पर टिके हुए हैं.

सिंह का नजरिया: डार्विनियन बदलाव

रॉबी सिंह अलग मिट्टी के बने हैं.

अडानी ग्रुप में उन्होंने देखा है कि जब समूह पर लगातार दबाव बना तो पूंजी महंगी होती गई.

जब आप पोर्ट, पावर प्लांट, एयरपोर्ट और LNG टर्मिनल बना रहे होते हैं, जब आपका पूरा मॉडल 30 साल तक शून्य ब्याज वाले कर्ज पर निर्भर नहीं होता, तो आप वास्तविक रिटर्न और वास्तविक बिजनेस मॉडल पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं.

इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि आप केंद्रीय बैंकों के मूड में बदलाव से प्रभावित नहीं होते.

रॉबी सिंह का संदेश है:

"अच्छा है. अब कमजोर खत्म होंगे. अब गेहूं और भूसे में अंतर होगा. हमने 14 वर्षों तक अक्षमता को सब्सिडी दी है. वह दौर खत्म हो गया है. वास्तविक बिजनेस, जिनके पास असली प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त, वास्तविक कैश फ्लो और मजबूत आर्थिक आधार हैं, ठीक रहेंगे. कमजोर कंपनियां खत्म हो जाएंगी."

यह एक स्ट्रीट फाइटर की मानसिकता है.

बॉक्सिंग मुकाबले में जब आपका प्रतिद्वंद्वी थक चुका हो, जब रेफरी उसका पक्ष लेना बंद कर दे और नियम निष्पक्ष होने वाले हों, तो आप शिकायत नहीं करते. आप मौके का फायदा उठाते हैं.

सिंह कह रहे हैं: "हम इसके लिए तैयार हैं. हमने वास्तविक बाजार में अपनी चोटें खाकर अनुभव हासिल किया है. अब बाकी सभी को भी यही करना होगा."

असली मायने: 4.70% यील्ड वास्तव में क्या संकेत देती है?

आइए स्पष्ट करते हैं कि सतह के नीचे वास्तव में क्या हो रहा है.

क्या फेड खेल से बाहर हो रहा है?

ऐसा लगता है कि नए फेड चेयर केविन वार्श वही नहीं करेंगे जो बर्नांके, येलेन या पॉवेल ने किया.

वह पहली परेशानी पर पैसा नहीं छापेंगे.
वह पहले से ब्याज दरों में कटौती नहीं करेंगे.
वह बाजार को गिरावट से बचाने के लिए तुरंत हस्तक्षेप नहीं करेंगे.

इसका मतलब क्या है?

पूंजी की अब एक कीमत होगी.

अगर आप 100 मिलियन डॉलर उधार लेना चाहते हैं, तो उसकी लागत वास्तविक जोखिम को दर्शाएगी—फेड द्वारा दी गई कृत्रिम राहत को नहीं.

कैरी ट्रेड का दौर खत्म हो सकता है

पूरी व्यवस्था, जिसमें "2% पर डॉलर में उधार लो और 6% रिटर्न देने वाली उभरती बाजार की संपत्तियों में निवेश करो" जैसी रणनीति शामिल थी, अब कमजोर पड़ रही है.

अब आपको वास्तविक प्रतिस्पर्धा के बीच 4% रिटर्न कमाना होगा, सिर्फ फेड की नीति का फायदा उठाकर नहीं.

## कमजोर कंपनियां खत्म होंगी

हर वह बिजनेस मॉडल जो सिर्फ इसलिए चल रहा था क्योंकि ब्याज दरें लगभग शून्य थीं, अब सामने आएगा.

ऐसी लाखों कंपनियां हैं.

वास्तविक पूंजी दुर्लभ और मूल्यवान होगी

जिन कंपनियों के पास वास्तविक कमाई क्षमता, प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त और मजबूत नकदी प्रवाह है, उन्हें महत्व मिलेगा. वहीं, जिन कंपनियों को लगातार केंद्रीय बैंक के सहारे की जरूरत है, वे कमजोर पड़ जाएंगी.

छिपा हुआ सम्मान

इस बहस में लोग एक बात भूल रहे हैं.

रॉबी सिंह ने पूरे भारतीय वित्तीय प्रतिष्ठान को चुनौती दी है.

कोटक की चिंता गलत नहीं है.

उनका बैंक और ज्यादातर भारतीय बैंक एक खास मौद्रिक व्यवस्था के आदी हो चुके हैं.

आसान ब्याज दरें, ज्यादा डिपॉजिट जुटाने की होड़, कम फंडिंग लागत और वर्षों तक बढ़ती संपत्ति कीमतों के बीच कमजोर क्रेडिट फैसलों को छिपाने की क्षमता.

जब 4.70% ट्रेजरी यील्ड उभरते बाजारों से पूंजी बाहर निकालने लगेगी, जब वैश्विक निवेशकों को अचानक महसूस होगा कि वे बिना जोखिम के 5% कमा सकते हैं, तो खेल तेजी से बदल जाएगा.

कोटक एक उचित चेतावनी दे रहे हैं.

लेकिन रॉबी का कहना है:

"हां, खेल बदल रहा है. अच्छा है. खुद को मजबूत बनाओ."

और एक अजीब तरीके से यही सलाह वास्तव में आपको बचा सकती है.

टकराव की भविष्यवाणी

यह वास्तव में दो तरह के बिजनेस लीडर्स के बीच का अंतर है:

बैंकर (कोटक): वह चिंता करते हैं कि बाहरी परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहेंगी. उनकी उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक उस व्यवस्था को जारी रखेंगे जिसने उन्हें सफल बनाया.

स्ट्रीट फाइटर (रॉबी): वह मानते हैं कि बाहरी परिस्थितियां कभी अनुकूल नहीं होंगी. उनकी उम्मीद है कि उन्होंने इतनी आंतरिक ताकत बनाई है कि वे किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकें.

एक की सोच इस उम्मीद पर आधारित है कि व्यवस्था आपकी रक्षा करेगी.

दूसरे की सोच इस विश्वास पर आधारित है कि आप किसी भी परिस्थिति में टिक सकते हैं.

जब 4.70% ट्रेजरी यील्ड आई, तो कोटक ने इसमें कमजोरी देखी.

लेकिन रॉबी ने इसमें अवसर देखा.

यही अंतर, सोच का मूलभूत अंतर और शायद एक पीढ़ीगत अंतर, इस टकराव का असली मतलब है.

पुराना बनाम नया.

आगे क्या होगा

अब बाजार फैसला करेगा.

वे कंपनियां और नेता जिन्होंने पिछले 14 वर्षों में वास्तव में निर्माण किया है मुश्किल फैसले लिए हैं, कठिन प्रतिस्पर्धियों से मुकाबला किया है और वास्तविक प्रतिस्पर्धात्मक ताकत बनाई है , वे आगे बढ़ेंगे.

वहीं वे कंपनियां जो फेड की नीतियों का फायदा उठाकर चल रही थीं, कर्ज पर सवार, कैरी ट्रेड पर निर्भर और शून्य ब्याज दरों वाली उधारी तथा ऊंचे रिटर्न वाली संपत्तियों के अंतर से पैसा बना रही थीं, उन्हें बड़ा झटका लग सकता है.

कोटक की चेतावनी कुछ हद तक सही साबित होगी:

दर्द होगा और बदलाव कठिन हो सकता है.

लेकिन रॉबी की भविष्यवाणी ज्यादा टिकाऊ साबित हो सकती है:

यह स्वस्थ बदलाव है. यही वास्तविक पूंजीवाद का तरीका है और मजबूत बिजनेस मॉडल वाली कंपनियां ही टिकती हैं.

4.70% ट्रेजरी यील्ड कोई "एकिलीज हील" नहीं है.

यह एक रीसेट बटन है.

और भारतीय वित्त जगत के दिग्गजों के लिए सवाल यह नहीं है कि वे इससे बच पाएंगे या नहीं.

सवाल यह है कि क्या वे इसके लिए पहले से तैयारी कर रहे थे?

ऐसा लगता है कि रॉबी सिंह कर रहे थे.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
 


RBL बैंक को पहली बार मिली मूडीज की इन्वेस्टमेंट ग्रेड रेटिंग, आउटलुक स्थिर

वैश्विक रेटिंग एजेंसी ने बैंक को Baa2/P-2 रेटिंग दी, मजबूत पूंजी स्थिति और कारोबार में वृद्धि की उम्मीद को बताया आधार

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 01 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 01 August, 2026
BWHindia

वैश्विक रेटिंग एजेंसी Moody’s Ratings ने RBL बैंक को पहली बार इन्वेस्टमेंट ग्रेड इश्यूअर रेटिंग प्रदान की है. Moody’s (मूडीज) ने बैंक को Baa2/P-2 रेटिंग दी है और इसका आउटलुक स्थिर (Stable) रखा है. रेटिंग एजेंसी ने यह रेटिंग बैंक की मजबूत फ्रेंचाइजी, बेहतर पूंजी स्थिति और अगले दो से तीन वर्षों में कारोबार में निरंतर वृद्धि की उम्मीदों के आधार पर दी है. Moody’s ने कहा कि यह रेटिंग बैंक की वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की पर्याप्त क्षमता और बेहतर होते क्रेडिट प्रोफाइल को दर्शाती है.

मजबूत पूंजी स्थिति बनी रेटिंग का आधार

Moody’s के अनुसार, RBL बैंक की बढ़ती बाजार पहुंच, कारोबार विस्तार की संभावनाएं और मजबूत पूंजीकरण स्तर इस रेटिंग के प्रमुख आधार हैं. स्थिर आउटलुक से संकेत मिलता है कि रेटिंग एजेंसी को उम्मीद है कि RBL बैंक अपनी एसेट क्वालिटी, पूंजी बफर और लाभप्रदता को मजबूत बनाए रखेगा और बैलेंस शीट को और बेहतर करेगा.

रेटिंग में दो पायदान का अतिरिक्त लाभ (Two-notch uplift) बैंक के सबसे बड़े शेयरधारक Emirates NBD Bank से मिलने वाले संभावित रणनीतिक समर्थन को ध्यान में रखते हुए दिया गया है. Moody’s ने कहा कि यह समर्थन बैंक की वित्तीय मजबूती को लेकर अतिरिक्त भरोसा पैदा करता है.

वैश्विक फंडिंग तक पहुंच होगी आसान

RBL बैंक की पहली अंतरराष्ट्रीय इन्वेस्टमेंट ग्रेड रेटिंग से बैंक की वैश्विक फंडिंग बाजारों तक पहुंच मजबूत होने और निवेशकों का भरोसा बढ़ने की उम्मीद है. ऐसी रेटिंग को विदेशी निवेशकों और डेट मार्केट से जुड़े प्रतिभागियों द्वारा बारीकी से देखा जाता है, क्योंकि इसका असर फंडिंग लागत और अंतरराष्ट्रीय पूंजी जुटाने की क्षमता पर पड़ता है.

बैंकिंग सेक्टर में मजबूत हो रही पूंजी स्थिति

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भारतीय बैंक लगातार अपनी पूंजी स्थिति को मजबूत कर रहे हैं और स्थिर क्रेडिट ग्रोथ के बीच फंडिंग स्रोतों में विविधता ला रहे हैं. RBL बैंक के लिए यह रेटिंग बाजार में अपनी छवि सुधारने और लंबे समय तक कारोबार विस्तार को समर्थन देने की दिशा में एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है.
 


कमर्शियल LPG सिलेंडर 209 रुपये तक सस्ता, होटल-रेस्टोरेंट और कारोबारियों को राहत

1 अगस्त से लागू हुई नई कीमतें, लगातार दूसरे महीने कम हुए व्यावसायिक गैस सिलेंडर के दाम; घरेलू LPG की कीमतों में कोई बदलाव नहीं

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 01 August, 2026
Last Modified:
Saturday, 01 August, 2026
BWHindia

व्यावसायिक उपयोग वाले LPG सिलेंडर की कीमतों में 209 रुपये तक की कटौती की गई है. तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने 1 अगस्त से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के नए दाम लागू कर दिए हैं. इस कटौती से होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग कंपनियों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो बड़े पैमाने पर LPG का इस्तेमाल करते हैं.

यह कमर्शियल LPG कीमतों में लगातार दूसरी मासिक कटौती है. हालांकि, घरेलू रसोई गैस सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

दिल्ली में 202 रुपये और कोलकाता में 209 रुपये की कटौती

तेल विपणन कंपनियों ने 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में दिल्ली में 202 रुपये और कोलकाता में 209 रुपये की कमी की है. मुंबई, चेन्नई और अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी तरह की कटौती की गई है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली है.

होटल-रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों को फायदा

कमर्शियल LPG की कीमतों में कमी से उन कारोबारों की परिचालन लागत कम होने की उम्मीद है, जहां ईंधन का इस्तेमाल काफी अधिक होता है. खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट, कैटरर्स और छोटे फूड आउटलेट्स को इसका सीधा लाभ मिलेगा.

इससे पहले जुलाई में भी कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में कटौती की गई थी. साल 2026 की शुरुआत में वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति संबंधी बाधाओं के कारण कमर्शियल LPG की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई थी. ऐसे में लगातार दो महीनों में हुई कटौती कारोबारियों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है.

घरेलू LPG सिलेंडर के दाम स्थिर

जहां कमर्शियल LPG उपभोक्ताओं को राहत मिली है, वहीं घरेलू उपयोग वाले 14.2 किलोग्राम LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है. तेल विपणन कंपनियां हर महीने LPG कीमतों की समीक्षा करती हैं. कीमतों में बदलाव मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों, आयात लागत और विदेशी मुद्रा दरों के आधार पर किया जाता है.

कारोबारियों को आगे भी राहत की उम्मीद

कमर्शियल LPG कीमतों में कटौती ऐसे समय में हुई है जब कारोबारी बढ़ती इनपुट लागत को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं. कम ईंधन लागत से हॉस्पिटैलिटी और फूड सर्विस सेक्टर को फायदा मिलने की उम्मीद है.

हालांकि, वैश्विक कच्चे तेल और LPG कीमतों पर अभी भी भू-राजनीतिक घटनाओं और आपूर्ति की स्थिति का असर बना हुआ है. अगर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता जारी रहती है तो आने वाले महीनों में कमर्शियल ईंधन कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है.