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सरकार ने बदल दी 'छोटी कंपनियों' की परिभाषा, जानिए इससे क्या होगा फायदा

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने यह बदलाव इसलिए किया है ताकि व्यापारियों को कारोबार करने में और आसानी हो सके.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: व्यापारी वर्ग को मोदी सरकार ने आज एक बड़ी राहत दी है. सरकार ने छोटी कंपनियों की परिभाषा में बदलाव किया है. सरकार के इस बदलाव के बाद अब कई कंपनियां इस श्रेणी में आ जाएंगी. सरकार के इस फैसले के बाद कई कंपनियों का Compliance Burden (अनुपालन बोझ) कम हो जाएगा.

परिभाषा में क्यों किया गया बदलाव
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने यह बदलाव इसलिए किया है ताकि व्यापारियों को कारोबार करने में और आसानी हो सके. छोटी कंपनियों की नई परिभाषा के अनुसार पेड-अप कैपिटल 2 करोड़ रुपये बढ़ाकर 4 करोड़ रुपये कर दिया गया है. इसके अलावा कारोबार की सीमा 20 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 40 करोड़ रुपये कर दी गई है. यानी जिस कंपनी का पेड-अप कैपिटल 4 करोड़ रुपये से कम और कारोबार 40 करोड़ रुपये से कम है, वह छोटी कंपनी के दायरे में आएगी.

इससे क्या होगा फायदा
आपको बता दें कि जो छोटी कंपनियां होती हैं, उन्हें वित्तीय लेखा-जोखा के अंग के रूप में नकदी प्रवाह का लेखा-जोखा तैयार करने की जरूरत नहीं होती है. इसके अलावा, छोटी कंपनियों के वार्षिक रिटर्न पर कंपनी सेक्रेटरी भी हस्ताक्षर कर सकता है. यदि कंपनी का सेक्रेटरी न हो तो कंपनी का निदेशक भी हस्ताक्षर कर सकता है. इसके अलावा छोटी कंपनियों पर जुर्माने की राशि भी कम है. सरकार की नई परिभाषा के बाद अब कई कंपनियां इस दायरे में आ जाएंगी, जिससे उनकी परेशानी काफी हद तक कम हो जाएगी.

पेड-अप कैपिटल क्या है
किसी कंपनी की कुल पूंजी में प्रमोटर्स का निवेश, लोन की राशि, शेयर जारी करके ली गई राशि आदि शामिल होती है. यदि कंपनी ने शेयर जारी करके पूंजी अर्जित की है तो उसे ही पेड-अप कैपिटल कहा जाता है. यह एक ऐसा कैपिटल होता है, जो यह दिखाता है कि उसे उधार नहीं लिया गया है. यह तब बनाया जाता है, जब कोई भी कंपनी अपने शेयर सीधे प्राइमरी मार्केट में निवेशकों को बेच देती है.

चीन पर बढ़ी निर्भरता
आपको बता दें कि वाणिज्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में भारत ने चीन से इंपोर्ट ज्यादा किया है, जबकि एक्सपोर्ट सिर्फ 1.26 बिलियन डॉलर किया है. भारत की चीन पर निर्भरता ज्यादा बढ़ गई है. अप्रैल से जुलाई के डेटा के अनुसार, चीन के साथ भारत का एक्सपोर्ट पिछले साल के मुकाबले करीब 33 प्रतिशत गिरा है, जबकि इंपोर्ट सिर्फ जून के मुकाबले 16 प्रतिशत बढ़ा है. भारत ने जून में चीन से 8.8 बिलियन डॉलर का इंपोर्ट किया था. भारत सरकार ने PLI स्कीम के तहर पिछले 2 सालों से यह कोशिश कर रही है कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाई जाई और चीन से इंपोर्ट की निर्भरता कम की जाए, लेकिन यह प्रयास कारगर नहीं दिख रहा है.

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