हाल ही में ट्विटर पर वर्ल्ड ऑफ स्टेटिस्टिक्स में दुनियाभर के सभी देशों के गोल्ड रिजर्व की एक लिस्ट जारी की गयी है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
मंदी की आशंकाओं और अमेरिकी डॉलर के कम होते वर्चस्व की बदौलत इस वक्त बहुत से देशों के केंद्रीय बैंक जमकर सोना खरीद रहे हैं. देश के केंद्रीय बैंकों द्वारा अपने फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को संतुलित बनाये रखने के लिए भी सोने का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं दुनिया में सबसे ज्यादा सोना किस देश के पास है और भारत के पास कितना सोना है?
किसके पास है सबसे ज्यादा सोना?
हाल ही में ट्विटर पर वर्ल्ड ऑफ स्टेटिस्टिक्स में दुनियाभर के सभी देशों के गोल्ड रिजर्व की एक लिस्ट जारी की गयी है. ट्विटर पर जारी की गयी इस रिपोर्ट की मानें तो दुनिया में सबसे ज्यादा सोने के भंडार अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के पास हैं. अमेरिका के पास 8,133 मीट्रिक टन गोल्ड रिजर्व मौजूद है. इस लिस्ट में अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर जर्मनी का नाम आता है. रिपोर्ट के अनुसार जर्मनी के पास 3,355 मीट्रिक टन का गोल्ड रिजर्व मौजूद है. इसके बाद इस लिस्ट में इटली का नाम आता है जिसके पास 2,452 मीट्रिक टन के गोल्ड रिजर्व मौजूद हैं.
कहां है भारत?
भारत के पड़ोसी देश चीन की बात करें तो इसके पास 2,011 मीट्रिक टन का गोल्ड रिजर्व मौजूद है और इटली के बाद यह सबसे ज्यादा गोल्ड रिजर्व वाला दुनिया का चौथा देश है. इसके बाद लिस्ट में स्विट्जरलैंड का नाम आता है जिसके पास 1,040 मीट्रिक टन गोल्ड रिजर्व मौजूद है और स्विट्जरलैंड के बाद लिस्ट में अगला नाम जापान का है जिसके पास 846 मीट्रिक टन का गोल्ड रिजर्व मौजूद है. अब आप सोच रहे होंगे, कि भारत कौनसे स्थान पर है? दरअसल इस लिस्ट में भारत अभी 9वें स्थान पर मौजूद है और भारत के केंद्रीय बैंक यानी RBI के पास 787 मीट्रिक टन का गोल्ड रिजर्व है.
डॉलर बड़ा या सोना?
आपने ये तो जान लिया कि किस देश के पास कितना सोना मौजूद है लेकिन ध्यान रखें कि देशों के सोने के भंडारों में उतार चढ़ाव भी आता रहता है और इसीलिए इस लिस्ट में भी बदलाव होता रहता है. पिछले कुछ समय से मंदी के चलते सोने की कीमतों में लगातार वृद्धि देखने को मिली है. लेकिन सोने के बढ़ते दामों के बावजूद बहुत से देशों के केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं. विश्व गोल्ड परिषद की मानें तो इसका कारण डॉलर की कम होती पसंद है. दरअसल रूस और युक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के दौरान रूस पर पूरी दुनिया द्वारा आर्थिक दबाव बनाने के लिए डॉलर का इस्तेमाल किया गया था जिसकी वजह से डॉलर की पसंद कम हो गयी और इसीलिए देश के केंद्रीय बैंकों ने जमकर सोना खरीदना शुरू कर दिया.
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पर्सनलाइज्ड मार्केटिंग और एआई-आधारित कस्टमर एंगेजमेंट को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ग्राहक जुड़ाव और मार्केटिंग ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म मोएंगेज (MoEngage) ने सैन फ्रांसिस्को स्थित एआई इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Aampe का अधिग्रहण कर लिया है. इस रणनीतिक सौदे के जरिए कंपनी ने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ग्राहक जुड़ाव क्षमताओं को मजबूत करने और पर्सनलाइज्ड मार्केटिंग के क्षेत्र में अपनी पकड़ बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. हालांकि दोनों कंपनियों ने इस सौदे की वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इस अधिग्रहण के तहत Aampe के रिइनफोर्समेंट लर्निंग इंजन को मोएंगेज के प्लेटफॉर्म में एकीकृत किया जाएगा.
हर ग्राहक के लिए अलग रणनीति तैयार करेगा एआई
इस तकनीकी एकीकरण के बाद ब्रांड्स को प्रत्येक ग्राहक के व्यवहार के आधार पर संदेश की सामग्री, समय, संचार माध्यम और संदेश भेजने की आवृत्ति को स्वचालित रूप से तय करने में मदद मिलेगी. कंपनी के अनुसार, इससे मार्केटर्स प्रत्येक उपभोक्ता के लिए व्यक्तिगत स्तर पर बेहतर अनुभव तैयार कर सकेंगे और ग्राहक जुड़ाव को अधिक प्रभावी बना पाएंगे.
मर्लिन एआई प्लेटफॉर्म को मिलेगी नई ताकत
यह अधिग्रहण मोएंगेज के मौजूदा एआई प्लेटफॉर्म ‘Merlin AI’ को भी मजबूती देगा. कंपनी का कहना है कि संयुक्त प्लेटफॉर्म मार्केटर्स को केवल अभियान के लक्ष्य और दिशा-निर्देश तय करने की सुविधा देगा, जबकि एआई एजेंट खुद यह निर्णय लेंगे कि किस ग्राहक से कब, कैसे और किस माध्यम से जुड़ना सबसे प्रभावी रहेगा. साथ ही, ये एआई एजेंट लगातार ग्राहकों की प्रतिक्रिया और परिणामों के आधार पर अपनी सिफारिशों को बेहतर बनाते रहेंगे.
कंपनी ने क्या कहा
मोएंगेज के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी रवितेजा डोड्डा ने कहा, "हर मार्केटर चाहता है कि वह सही समय पर, सही संदेश के साथ, सही ग्राहक तक पहुंचे. चुनौती हमेशा महत्वाकांक्षा की नहीं बल्कि तकनीकी ढांचे की रही है." उन्होंने कहा कि Aampe की तकनीक व्यक्तिगत स्तर पर कंटेंट, समय, संचार चैनल और संदेशों की आवृत्ति को लगातार बेहतर बनाती रहती है. वहीं, Aampe के सह-संस्थापक और सीईओ पॉल मीनशाउज़ेन ने कहा कि कंपनी की सोच हमेशा "हर उपयोगकर्ता के लिए एक एजेंट" विकसित करने की रही है, न कि केवल ग्राहक समूहों के लिए एक मॉडल बनाने की.
संस्थापक टीम मोएंगेज में होगी शामिल
अधिग्रहण के तहत Aampe की संस्थापक टीम पॉल मीनशाउज़ेन, शॉन व्हीलर और सामी अब्बूद, अब मोएंगेज के साथ जुड़कर कंपनी की एजेंटिक डिसीजनिंग पहल का नेतृत्व करेगी.
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि Aampe के मौजूदा ग्राहकों को बिना किसी व्यवधान के सेवाएं मिलती रहेंगी. साथ ही उन्हें मोएंगेज की इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और कस्टमर सक्सेस टीमों का अतिरिक्त सहयोग भी मिलेगा.
कई बड़े ब्रांड पहले से कर रहे हैं इस्तेमाल
कंपनी के मुताबिक, Aampe के एआई एजेंट्स का उपयोग वर्तमान में ZenBusiness, Taxfix, Grab और Swiggy जैसे ब्रांड कर रहे हैं. यह प्लेटफॉर्म सैकड़ों करोड़ एआई एजेंट संचालित करता है और हर सप्ताह 200 अरब से अधिक निर्णयों को प्रोसेस करता है. मोएंगेज का कहना है कि इस अधिग्रहण के बाद अन्य ग्राहक जुड़ाव प्लेटफॉर्म का उपयोग करने वाले ब्रांड भी बिना अपनी मौजूदा मार्केटिंग व्यवस्था बदले Aampe की एआई क्षमताओं का लाभ उठा सकेंगे.
एआई आधारित मार्केटिंग की ओर बढ़ता उद्योग
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अधिग्रहण ऐसे समय में हुआ है जब कंपनियां ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने के लिए तेजी से एआई और डेटा-आधारित निर्णय प्रणालियों को अपना रही हैं. मोएंगेज और Aampe का यह एकीकरण एआई आधारित पर्सनलाइज्ड मार्केटिंग के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकता है.
कंपनी के अनुसार, क्विक कॉमर्स की अगली वृद्धि देश के उभरते बाजारों से आ रही है. टियर-2 और टियर-3 शहरों में पिछले एक वर्ष के दौरान 42 गुना वृद्धि दर्ज की गई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में क्विक कॉमर्स बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है और फ्लिपकार्ट मिनट्स ने इस क्षेत्र में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है. लॉन्च के दो साल से भी कम समय में कंपनी ने 1,000 माइक्रो फुलफिलमेंट सेंटर का नेटवर्क खड़ा कर लिया है. 130 से अधिक शहरों और 8,000 से ज्यादा पिनकोड तक पहुंच बनाने के साथ प्लेटफॉर्म पर ऑर्डर्स में पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है. खास बात यह है कि टियर-2 और टियर-3 शहरों तथा जेन-जेड उपभोक्ताओं ने इस तेजी को नई दिशा दी है.
फ्लिपकार्ट मिनट्स ने बनाया नया रिकॉर्ड
बेंगलुरु फ्लिपकार्ट की क्विक कॉमर्स सेवा फ्लिपकार्ट मिनट्स ने लॉन्च के दो साल से भी कम समय में 1,000 माइक्रो फुलफिलमेंट सेंटर स्थापित करने का बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है. कंपनी द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2024 में शुरू हुई यह सेवा अब 130 से अधिक शहरों और 8,000 से ज्यादा पिनकोड तक पहुंच चुकी है. नेटवर्क विस्तार के साथ कंपनी के ऑर्डर्स में सालाना आधार पर पांच गुना वृद्धि दर्ज की गई है.
टियर-2 और टियर-3 शहरों से मिली सबसे बड़ी ताकत
कंपनी के अनुसार, क्विक कॉमर्स की अगली वृद्धि देश के उभरते बाजारों से आ रही है. टियर-2 और टियर-3 शहरों में पिछले एक वर्ष के दौरान 42 गुना वृद्धि दर्ज की गई है. अंबाला, आरा, बोकारो, दरभंगा, जोरहाट, ओंगोल, पूर्णिया, सहरसा और तेनाली जैसे शहरों से मांग में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है. पिछले एक वर्ष में फ्लिपकार्ट मिनट्स ने 90 से अधिक नए शहरों में अपनी सेवाओं का विस्तार किया है, जिससे कंपनी की पहुंच और ग्राहक आधार दोनों तेजी से बढ़े हैं.
जेन-जेड बना सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन
फ्लिपकार्ट मिनट्स का सबसे तेजी से बढ़ने वाला ग्राहक वर्ग जेन-जेड बनकर उभरा है. कंपनी के कुल ग्राहक आधार में इस वर्ग की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है. यह वर्ग केवल दैनिक जरूरतों के सामान तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्यूटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, वेलनेस और लाइफस्टाइल उत्पादों की भी तेजी से खरीदारी कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि जेन-ज़ेड क्विक कॉमर्स को सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि ऑन-डिमांड शॉपिंग की नई आदत के रूप में अपना रहा है.
किराना से आगे बढ़ा क्विक कॉमर्स
फ्लिपकार्ट मिनट्स पर अब ग्राहक केवल किराना सामान ही नहीं, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्यूटी, वेलनेस और लाइफस्टाइल उत्पादों की भी खरीदारी कर रहे हैं. फलों और सब्जियों की औसत ऑर्डर वैल्यू में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि रिपीट परचेज में 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कंपनी के अनुसार, 120 से अधिक नई श्रेणियों में बढ़ती मांग यह संकेत देती है कि क्विक कॉमर्स अब एक मल्टी-कैटेगरी रिटेल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित हो रहा है.
किसानों, ब्रांड्स और रोजगार को भी मिला लाभ
फ्लिपकार्ट मिनट्स करीब 500 डी2सी ब्रांड्स के साथ काम कर रहा है. इसके अलावा कंपनी के ‘समर्थ कृषि’ कार्यक्रम के तहत 3,000 से अधिक किसानों को बाजार से जोड़ने का काम किया गया है. एफपीओ और फार्म-टू-डोर मॉडल के जरिए किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है. साथ ही वेयरहाउसिंग, सप्लाई चेन और लास्ट-माइल डिलीवरी के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं.
ग्रीन डिलीवरी पर भी फोकस
कंपनी ने पिछले एक वर्ष में अपने इलेक्ट्रिक वाहन बेड़े को दोगुना किया है. वर्तमान में 10 प्रतिशत से अधिक डिलीवरी ग्रीन माध्यमों से की जा रही हैं. इसके अलावा 20 प्रतिशत ग्राहकों ने पुन: उपयोग योग्य बैग का विकल्प चुना है, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में मदद मिल रही है. फ्लिपकार्ट का मानना है कि आने वाले समय में टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल डिलीवरी मॉडल क्विक कॉमर्स की नई पहचान बनेंगे.
इस अधिग्रहण के बाद होनासा कंज्यूमर अपनी नई सहायक कंपनी ‘होनासा हेल्थ’ की स्थापना करेगी. इस इकाई के माध्यम से कंपनी उपभोक्ताओं के लिए पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों का पोर्टफोलियो तैयार करेगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मामाअर्थ की पैरेंट कंपनी होनासा कंज्यूमर ने विज्ञान-आधारित न्यूट्रास्यूटिकल्स कंपनी फ्लुएंस फार्मा में 58 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने का फैसला किया है. कंपनी ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया कि यह सौदा 135 करोड़ रुपये के एंटरप्राइज वैल्यू पर किया जा रहा है. यह रणनीतिक अधिग्रहण होनासा कंज्यूमर की तेजी से बढ़ रहे न्यूट्रास्यूटिकल्स सेक्टर में औपचारिक एंट्री है. कंपनी को उम्मीद है कि अगले दो महीनों में यह सौदा पूरा हो जाएगा.
‘होनासा हेल्थ’ के जरिए हेल्थ कैटेगरी में विस्तार
इस अधिग्रहण के बाद होनासा कंज्यूमर अपनी नई सहायक कंपनी ‘होनासा हेल्थ’ की स्थापना करेगी. इस इकाई के माध्यम से कंपनी उपभोक्ताओं के लिए पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों का पोर्टफोलियो तैयार करेगी. कंपनी फ्लुएंस फार्मा की पेटेंट आधारित क्लीनिकल साइंस और डॉक्टरों के बीच स्थापित भरोसे को अपने ब्रांड निर्माण, उपभोक्ता समझ और डिजिटल डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के साथ जोड़कर नए उत्पादों को बाजार में उतारेगी.
तेजी से बढ़ रहा है न्यूट्रास्यूटिकल्स बाजार
भारत में न्यूट्रास्यूटिकल्स उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है. उपभोक्ताओं के बीच ‘ब्यूटी फ्रॉम इनसाइड’ यानी भीतर से सुंदरता और समग्र स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ने से इस क्षेत्र में मांग लगातार बढ़ रही है. होनासा कंज्यूमर का मानना है कि स्किन और हेयर केयर के साथ विज्ञान आधारित पोषण उत्पादों का संयोजन आने वाले वर्षों में बड़ा ट्रेंड बनने जा रहा है.
अगले दशक में बढ़ेगी न्यूट्रिशन और ब्यूटी की साझेदारी
होनासा कंज्यूमर के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी वरुण अलाघ ने कहा कि ब्यूटी और पर्सनल केयर उद्योग एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां उपभोक्ता समस्याओं के मूल कारणों को दूर करने वाले समग्र समाधानों की तलाश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि पिछले दशक में टॉपिकल एक्टिव्स का दौर था, जबकि आने वाला दशक विज्ञान आधारित स्किन और हेयर केयर तथा न्यूट्रास्यूटिकल्स के मजबूत संयोजन का होगा.
अगले 5 से 7 वर्षों में खरीदेगी शेष हिस्सेदारी
कंपनी अगले पांच से सात वर्षों के दौरान दो चरणों में फ्लुएंस फार्मा की शेष 42 प्रतिशत हिस्सेदारी भी खरीदेगी. यह प्रक्रिया शेयर खरीद समझौते और शेयरधारक समझौते के तहत पूरी की जाएगी.
फ्लुएंस फार्मा को मिलेगा बड़ा वितरण नेटवर्क
फ्लुएंस फार्मा के सीईओ और सह-संस्थापक अमित भुसारी ने कहा कि कंपनी के वैज्ञानिक शोध और क्लीनिकल समाधानों को बड़े उपभोक्ता वर्ग तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत साझेदार की आवश्यकता थी. उन्होंने कहा कि होनासा कंज्यूमर की डिजिटल क्षमता, उपभोक्ता डेटा की समझ और नए ब्रांड्स को तेजी से आगे बढ़ाने का अनुभव कंपनी के विस्तार में मदद करेगा.
40 करोड़ रुपये का राजस्व और मजबूत मुनाफा
फ्लुएंस फार्मा ने पिछले वित्त वर्ष में 40 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया था और कंपनी का एबिटडा मार्जिन 20 प्रतिशत से अधिक रहा. होनासा कंज्यूमर के अनुसार, यह निवेश भारत के 16,000 करोड़ रुपये से अधिक के न्यूट्रास्यूटिकल्स बाजार में कंपनी की मजबूत उपस्थिति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
सहकारिता मंत्री ने कहा कि फसल खरीद के बाद किसानों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने निर्देश दिया कि खरीद के 48 घंटे के भीतर किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान किया जाए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
किसानों की आय बढ़ाने और बिचौलियों की भूमिका खत्म करने के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने नाफेड (NAFED) और एनसीसीएफ (NCCF) को निर्देश दिया है कि वे किसानों से दलहन और तिलहन की पूरी उपज सीधे खरीदें. साथ ही, फसल खरीद के 48 घंटे के भीतर किसानों के बैंक खातों में भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया है. इसके अलावा नाफेड की चार नई डिजिटल और कल्याणकारी पहलों की भी शुरुआत की गई है.
किसानों से सीधे होगी खरीद
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि देश की प्रमुख सहकारी संस्थाएं नाफेड और एनसीसीएफ अब किसानों से सीधे दलहन और तिलहन की खरीद करेंगी. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसानों की उपज का एक-एक दाना खरीदा जाए और खरीद प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका को समाप्त किया जाए. उनका कहना था कि इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी.
48 घंटे में खाते में पहुंचेगा पैसा
सहकारिता मंत्री ने कहा कि फसल खरीद के बाद किसानों को भुगतान के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने निर्देश दिया कि खरीद के 48 घंटे के भीतर किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान किया जाए. इस व्यवस्था से किसानों की नकदी संबंधी समस्याएं कम होंगी और उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी.
दो साल में देशभर में लागू होगी व्यवस्था
अमित शाह ने इस योजना के लिए दो वर्ष की समयसीमा तय की है. उनका लक्ष्य है कि अगले दो वर्षों के भीतर देश का हर किसान अपनी दलहन और तिलहन की फसल सीधे नाफेड और एनसीसीएफ को बेच सके. इस प्रक्रिया में किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं होगी और भुगतान सीधे किसानों के खातों में पहुंचेगा.
MSP मिलने से बढ़ेगी दलहन की खेती
अमित शाह ने कहा कि किसानों को जब न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसल बेचने का भरोसा मिलेगा तो दलहन और तिलहन की खेती का रकबा भी बढ़ेगा. उन्होंने विश्वास जताया कि इससे देश दालों के मामले में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी.
नाफेड की चार नई पहलों की शुरुआत
किसानों और सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अमित शाह ने नाफेड की चार नई डिजिटल और कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की.
1. NAFEX.in पोर्टल- यह डिजिटल ऑक्शन प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए खरीदी गई दलहन और तिलहन की पारदर्शी और ऑनलाइन नीलामी की जा सकेगी.
2. DRISHTI पोर्टल- यह रियल-टाइम इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम है. इसके माध्यम से देशभर में दालों और तिलहन के स्टॉक, भंडारण और उपलब्धता की निगरानी की जा सकेगी.
3. ERP पोर्टल- यह पोर्टल नाफेड के आंतरिक कामकाज और संसाधन प्रबंधन को मजबूत करेगा. इससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा.
4. NAFED-KALYAN फंड-इस योजना के तहत नाफेड अपने शुद्ध लाभ का एक प्रतिशत हिस्सा किसान परिवारों के बच्चों की उच्च शिक्षा और छात्रवृत्ति पर खर्च करेगा.
नाफेड की बदली तस्वीर
अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2014 में नाफेड आर्थिक संकट से जूझ रहा था और बंद होने की स्थिति में पहुंच गया था. लेकिन सरकार के प्रयासों से संस्था ने मजबूत वापसी की है. उन्होंने बताया कि नाफेड का वार्षिक कारोबार अब 30,000 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है, जबकि शुद्ध लाभ 405 करोड़ रुपये को पार कर गया है. वर्तमान में 74 लाख से अधिक किसान इससे जुड़े हुए हैं.
50,000 करोड़ रुपये टर्नओवर का लक्ष्य
सरकार ने नाफेड के लिए 50,000 करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार का लक्ष्य तय किया है. सरकार का मानना है कि डिजिटल सुधार, पारदर्शी खरीद व्यवस्था और किसानों से सीधे जुड़ाव के जरिए यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका 65 प्रतिशत समर्थन के साथ पहले स्थान पर रहा. वहीं भारत 56 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और सप्लाई चेन में बदलाव के दौर में भारत दुनिया की बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए दूसरा सबसे आकर्षक कारोबारी बाजार बनकर उभरा है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ताजा रिपोर्ट में भारत को अमेरिका के बाद दूसरा स्थान मिला है. रिपोर्ट के मुताबिक, तेज आर्थिक वृद्धि, विशाल घरेलू बाजार और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियां भारत को वैश्विक कंपनियों की पहली पसंद बना रही हैं.
WEF रिपोर्ट में भारत को बड़ी कामयाबी
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ‘चीफ इकोनॉमिस्ट्स आउटलुक मई 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, भारत बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए दुनिया का दूसरा सबसे आकर्षक कारोबारी माहौल बनकर उभरा है. रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब दुनिया भू-राजनीतिक संघर्ष, महंगाई और सप्लाई चेन में बदलाव जैसी चुनौतियों से जूझ रही है. सर्वे में शामिल प्रमुख वैश्विक संस्थानों के 38 मुख्य अर्थशास्त्रियों में से 56 प्रतिशत ने भारत को अगले 12 महीनों के लिए अपनी शीर्ष तीन पसंदीदा कारोबारी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल किया.
अमेरिका पहले, भारत दूसरे स्थान पर
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका 65 प्रतिशत समर्थन के साथ पहले स्थान पर रहा. वहीं भारत 56 प्रतिशत समर्थन के साथ दूसरे स्थान पर रहा. दक्षिण-पूर्व एशिया को 50 प्रतिशत, यूरोप को 44 प्रतिशत और चीन को 35 प्रतिशत समर्थन मिला. इस तरह भारत ने कई प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ते हुए निवेशकों का भरोसा हासिल किया है.
भारत की विकास कहानी बना रही आकर्षण का केंद्र
WEF ने कहा कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, विशाल उपभोक्ता बाजार और नीतिगत सुधारों ने उसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत लगातार व्यापार और निवेश के नए रास्ते खोल रहा है तथा आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा रहा है. नई व्यापारिक साझेदारियों और वैश्विक आर्थिक एकीकरण की दिशा में भारत के प्रयासों ने भी निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है.
भू-राजनीतिक तनाव बदल रहे निवेश के फैसले
रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने निवेश गंतव्यों पर दोबारा विचार कर रही हैं. कंपनियां अब केवल तेज विकास दर ही नहीं, बल्कि स्थिरता, सप्लाई चेन की मजबूती और रणनीतिक लचीलापन भी देख रही हैं. WEF ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं से निपटने में सक्षम अर्थव्यवस्थाओं को कंपनियां अधिक प्राथमिकता दे रही हैं और भारत इस मामले में मजबूत स्थिति में दिखाई देता है.
सप्लाई चेन बदलाव से दक्षिण-पूर्व एशिया को भी फायदा
रिपोर्ट में कहा गया है कि सप्लाई चेन के विविधीकरण से दक्षिण-पूर्व एशिया को भी लाभ मिल रहा है. करीब आधे अर्थशास्त्रियों ने अगले एक वर्ष में क्षेत्र में मध्यम वृद्धि की उम्मीद जताई है, जबकि 21 प्रतिशत ने मजबूत वृद्धि की संभावना व्यक्त की.
हालांकि ऊर्जा और खाद्य आयात से जुड़ी महंगाई तथा सस्ते चीनी उत्पादों के बढ़ते आयात को क्षेत्र के लिए चुनौती बताया गया है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल
WEF ने चेतावनी दी है कि जारी वैश्विक संघर्ष और व्यापार मार्गों में व्यवधान कई क्षेत्रों में आर्थिक जोखिम बढ़ा रहे हैं. मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के लिए आर्थिक दृष्टिकोण काफी कमजोर हुआ है.
रिपोर्ट के अनुसार, 88 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने इस क्षेत्र में अगले एक वर्ष के दौरान कमजोर या बेहद कमजोर वृद्धि की आशंका जताई है. वहीं, जापान और कई उभरते बाजारों में भी विकास दर को लेकर चिंता बनी हुई है.
निवेश और विस्तार के लिए भारत बना उम्मीद की किरण
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक ऐसे रणनीतिक बाजार के रूप में उभर रहा है, जो उन्हें विकास के अवसरों के साथ-साथ मजबूत सप्लाई चेन और स्थिर कारोबारी माहौल भी उपलब्ध करा सकता है. जैसे-जैसे कंपनियां अपनी वैश्विक रणनीतियों में बदलाव कर रही हैं, भारत अंतरराष्ट्रीय निवेश और कॉरपोरेट विस्तार का बड़ा केंद्र बनने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है.
पारंपरिक बिजली उत्पादन के अलावा अडानी समूह अब स्वच्छ और दीर्घकालिक ऊर्जा स्रोतों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में तेजी से बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए अडानी समूह ने ऊर्जा क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी निवेश योजनाओं में से एक का ऐलान किया है. समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने बताया कि अडानी पावर अगले पांच वर्षों में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी. इस निवेश के जरिए कंपनी अपनी बिजली उत्पादन क्षमता को 45 गीगावाट तक पहुंचाने के साथ-साथ परमाणु और जलविद्युत ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़े कदम उठाएगी.
बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर फोकस
देश में बढ़ती गर्मी, औद्योगिक विस्तार और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की तेज रफ्तार के बीच बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है. इसी बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए अडानी समूह ने बड़ा विस्तार कार्यक्रम तैयार किया है. समूह की वार्षिक आम बैठक (AGM) में गौतम अडानी ने घोषणा की कि अडानी पावर अगले पांच वर्षों में 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी. इस निवेश का मुख्य उद्देश्य कंपनी की उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर 45 गीगावाट तक पहुंचाना है.
अगले पांच वर्षों के लिए तैयार हुआ मेगा प्लान
अडानी समूह ऊर्जा, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में लगातार विस्तार कर रहा है. हाल ही में समाप्त वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान समूह ने करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) किया है. कंपनी का मानना है कि आने वाले वर्षों में औद्योगिक गतिविधियों, शहरीकरण और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के कारण बिजली की मांग में और तेजी आएगी. ऐसे में उत्पादन क्षमता बढ़ाना उसकी दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा है.
परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी बड़ी एंट्री
पारंपरिक बिजली उत्पादन के अलावा अडानी समूह अब स्वच्छ और दीर्घकालिक ऊर्जा स्रोतों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है. गौतम अडानी ने बताया कि समूह ने ‘अडानी एटॉमिक एनर्जी’ के माध्यम से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में कदम रखा है. इसके लिए कंपनी ने उपयुक्त भूमि की पहचान भी कर ली है. कंपनी ने वर्ष 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु बिजली उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है.
भूटान के साथ हाइड्रो पावर परियोजनाएं
अडानी समूह नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है. कंपनी ने भूटान की ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर हिमालयी क्षेत्र में 5,000 मेगावाट की जलविद्युत परियोजनाएं विकसित करने की योजना बनाई है. इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना और क्षेत्रीय ऊर्जा सहयोग को मजबूत करना है.
रिकॉर्ड कमाई से मिली निवेश की ताकत
इतने बड़े निवेश कार्यक्रम के पीछे समूह की मजबूत वित्तीय स्थिति भी बड़ी वजह है. वित्त वर्ष 2025-26 में अडानी समूह का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर 2.92 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इस दौरान समूह का EBITDA 94,834 करोड़ रुपये रहा, जबकि कर भुगतान के बाद मुनाफा करीब 13.9 प्रतिशत बढ़कर 46,376 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी के पास लगभग 67,995 करोड़ रुपये का मजबूत नकदी प्रवाह भी मौजूद है.
भारत के ऊर्जा भविष्य पर बड़ा दांव
अडानी समूह का यह निवेश केवल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने तक सीमित नहीं है. कंपनी पारंपरिक, परमाणु और नवीकरणीय ऊर्जा के जरिए भारत की भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की तैयारी कर रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना तय समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ती है, तो यह देश के बिजली क्षेत्र में निजी निवेश का सबसे बड़ा उदाहरण बन सकती है.
नए नियमों के तहत अब स्टॉक ब्रोकर, म्यूचुअल फंड हाउस, इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और पोर्टफोलियो मैनेजर अपने कॉरपोरेट ब्रांड के प्रचार के लिए सेलिब्रिटी की सेवाएं ले सकेंगे.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेश क्षेत्र के विज्ञापन नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है. नए प्रस्ताव के तहत स्टॉक ब्रोकर, म्यूचुअल फंड हाउस, निवेश सलाहकार और पोर्टफोलियो मैनेजर अब अपने ब्रांड के प्रचार के लिए सेलिब्रिटी और ब्रांड एंबेसडर नियुक्त कर सकेंगे. हालांकि, ये हस्तियां किसी विशेष निवेश उत्पाद, स्कीम या शेयर में निवेश की सलाह नहीं दे सकेंगी.
सेबी ने विज्ञापन नियमों में किया बड़ा बदलाव
सेबी ने कॉमन एडवरटाइजमेंट कोड (CAC) के तहत विज्ञापन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है. इसका उद्देश्य विभिन्न वित्तीय संस्थाओं के लिए विज्ञापन संबंधी नियमों को एक समान बनाना, अनुपालन प्रक्रिया को आसान करना और निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है. नए नियमों के तहत अब स्टॉक ब्रोकर, म्यूचुअल फंड हाउस, इन्वेस्टमेंट एडवाइजर और पोर्टफोलियो मैनेजर अपने कॉरपोरेट ब्रांड के प्रचार के लिए सेलिब्रिटी की सेवाएं ले सकेंगे.
केवल ब्रांड प्रमोशन की होगी अनुमति
सेबी के प्रस्ताव के अनुसार, सेलिब्रिटी केवल किसी कंपनी या ब्रांड का प्रचार कर सकेंगे. वे किसी विशेष म्यूचुअल फंड स्कीम, शेयर, निवेश योजना या वित्तीय उत्पाद में निवेश करने की सलाह नहीं दे पाएंगे. यानी कोई सेलिब्रिटी यह नहीं कह सकेगा कि निवेशक किसी विशेष फंड, स्टॉक या स्कीम में पैसा लगाएं. इस तरह सेबी निवेशकों को भ्रामक प्रचार से बचाने की कोशिश कर रहा है.
फिलहाल सिर्फ म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को थी अनुमति
अभी तक केवल म्यूचुअल फंड उद्योग को सीमित दायरे में सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट की अनुमति थी. इसके लिए भी पहले सेबी की मंजूरी लेना जरूरी होता था. नए प्रस्ताव के लागू होने के बाद यह सुविधा अन्य बाजार मध्यस्थों जैसे स्टॉक ब्रोकर, निवेश सलाहकार और पोर्टफोलियो मैनेजर को भी मिल सकती है.
विज्ञापन के लिए पहले मंजूरी की जरूरत नहीं
सेबी ने विज्ञापन प्रक्रिया को सरल बनाने का भी प्रस्ताव दिया है. इसके तहत स्टॉक ब्रोकर, ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म, निवेश सलाहकार और रिसर्च एनालिस्ट को विज्ञापन जारी करने से पहले नियामकीय मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी. हालांकि, विज्ञापन जारी होने के 24 घंटे के भीतर उसकी जानकारी संबंधित संस्था को देनी होगी.
रेटिंग और रैंकिंग पर भी सख्त नियम
नए प्रस्ताव के अनुसार कंपनियां अपने विज्ञापनों में रेटिंग या रैंकिंग का इस्तेमाल तभी कर सकेंगी, जब वह किसी मान्यता प्राप्त संस्था से प्राप्त हुई हो. इसके साथ ही विज्ञापन में स्पष्ट रूप से यह बताना अनिवार्य होगा कि किसी निवेश उत्पाद के चयन के लिए केवल रेटिंग या रैंकिंग ही एकमात्र आधार नहीं हो सकती.
छोटे विज्ञापनों के लिए आसान होंगे नियम
सेबी ने एसएमएस, पॉप-अप, नोटिफिकेशन और अन्य छोटे डिजिटल विज्ञापनों के लिए भी नियमों में राहत देने का प्रस्ताव रखा है. चूंकि इन माध्यमों में जगह सीमित होती है, इसलिए पूरी जोखिम चेतावनी लिखने की बजाय एक लिंक देना पर्याप्त होगा, जिस पर क्लिक करके निवेशक विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेंगे.
निवेशकों की सुरक्षा और पारदर्शिता पर फोकस
सेबी का मानना है कि कॉमन एडवरटाइजमेंट कोड से बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी वित्तीय संस्थानों के लिए समान मानक लागू होंगे. साथ ही निवेशकों को प्रचार और वास्तविक निवेश सलाह के बीच स्पष्ट अंतर समझने में भी मदद मिलेगी.
नए नियमों का उद्देश्य कंपनियों को ब्रांड निर्माण की सुविधा देना है, जबकि निवेशकों को भ्रामक या प्रभाव आधारित निवेश निर्णयों से बचाना भी है.
अदालत ने नीरव मोदी को लगभग 10.7 मिलियन डॉलर यानी करीब 100 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है. यह रकम उन कर्जों से जुड़ी है, जिनकी व्यक्तिगत गारंटी नीरव मोदी ने दी थी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
लंदन (UK) की एक अदालत ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बड़ा झटका देते हुए बैंक ऑफ इंडिया (BOI) के पक्ष में फैसला सुनाया है. अदालत ने उन्हें बैंक ऑफ इंडिया को करीब 10.7 मिलियन डॉलर (लगभग 100 करोड़ रुपये) चुकाने का आदेश दिया है. यह मामला उन कर्जों से जुड़ा है, जिनकी व्यक्तिगत गारंटी नीरव मोदी ने दी थी. इस फैसले के बीच भारत प्रत्यर्पण को लेकर उनकी कानूनी लड़ाई भी जारी है.
डायमंड FZE को दिए गए कर्ज से जुड़ा मामला
यह मामला जुलाई 2012 में बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दुबई स्थित कंपनी डायमंड FZE को दिए गए कर्ज से जुड़ा है. यह कंपनी नीरव मोदी के नियंत्रण में थी. अगस्त 2013 में नीरव मोदी ने इन कर्जों के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी. हालांकि, लंदन सर्किट कमर्शियल कोर्ट में नीरव मोदी ने दलील दी कि यह गारंटी लागू नहीं की जा सकती और उन्हें बैंक की ओर से कोई वैध मांग नोटिस नहीं मिला था.
कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के दावे को माना वैध
मामले की सुनवाई करते हुए जज साइमन टिंकलर ने बैंक ऑफ इंडिया के दावे को वैध और लागू करने योग्य माना. अदालत ने कहा कि नीरव मोदी व्यक्तिगत गारंटी के तहत 4.1 मिलियन डॉलर की मूल बकाया राशि के लिए जिम्मेदार हैं.
कोर्ट ने यह भी कहा कि इस राशि पर ब्याज भी जोड़ा जाएगा. जज ने अपने आदेश में कहा कि नीरव मोदी ऐसा कोई ठोस बचाव पेश नहीं कर सके, जिससे यह साबित हो सके कि बैंक इस रकम का हकदार नहीं है.
भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ जारी है कानूनी लड़ाई
नीरव मोदी को मार्च 2019 में ब्रिटेन में गिरफ्तार किया गया था. वह फिलहाल लंदन की जेल में बंद हैं और भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. भारत सरकार लगातार उनके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है. विदेश मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि भारत सरकार भगोड़े आर्थिक अपराधियों को वापस लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस मामले में ब्रिटिश अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है.
हाई कोर्ट भी खारिज कर चुका है अपील
मार्च 2026 में यूके हाई कोर्ट ने नीरव मोदी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने अपने प्रत्यर्पण मामले को दोबारा खोलने की मांग की थी. अदालत ने भारतीय सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों को पर्याप्त माना था. इसके बाद अप्रैल में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स ने भी उनके मामले को सार्वजनिक सुनवाई से हटाकर उन्हें गुमनामी की सुविधा प्रदान की थी.
13,000 करोड़ रुपये के पीएनबी घोटाले का आरोपी
55 वर्षीय नीरव मोदी पर अपने मामा मेहुल चोकसी के साथ मिलकर पंजाब नेशनल बैंक में लगभग 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है. सीबीआई के अनुसार, इस घोटाले में अकेले नीरव मोदी पर करीब 6,498 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है. वर्ष 2021 में उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन इसके बाद से वह विभिन्न कानूनी विकल्पों के जरिए भारत भेजे जाने की प्रक्रिया को चुनौती दे रहे हैं.
व्हाट्सऐप, क्रेड और भारतीय उपभोक्ताओं के डेटा को लेकर सोशल मीडिया पर तेज हुई चर्चा
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मेटा द्वारा कथित तौर पर 4.5 अरब डॉलर में क्रेड के अधिग्रहण और कुणाल शाह को व्हाट्सऐप का ग्लोबल सीईओ बनाए जाने की खबरों के बाद भारत में डेटा स्वामित्व, गोपनीयता और नियामकीय निगरानी को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. मुंबई के उद्यमी अर्नब मित्रा की एक लिंक्डइन पोस्ट ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया और स्टार्टअप जगत में चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
अर्नब मित्रा ने उठाए डेटा स्वामित्व से जुड़े सवाल
LIQVD ASIA के प्रबंध निदेशक और DigiBoxx के निदेशक अर्नब मित्रा ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि इस सौदे के जश्न के बीच सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे को नजरअंदाज किया जा रहा है. उनके अनुसार असली सवाल यह है कि मेटा ने आखिर खरीदा क्या है. मित्रा ने कहा कि यह केवल एक कारोबारी अधिग्रहण नहीं हो सकता, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं के बड़े डेटा बेस तक पहुंच का मामला भी हो सकता है. उनका मानना है कि इस सौदे के पीछे डेटा की अहम भूमिका हो सकती है.
फ्रीचार्ज का उदाहरण देकर समझाया अपना पक्ष
अपने तर्क को मजबूत करने के लिए अर्नब मित्रा ने फ्रीचार्ज का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि कंपनी ने 269 करोड़ रुपये खर्च कर केवल 35 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था, लेकिन इसके बावजूद वर्ष 2015 में इसे 2,800 करोड़ रुपये में बेच दिया गया. बाद में यह कंपनी मात्र 370 करोड़ रुपये में एक्सिस बैंक को हस्तांतरित कर दी गई. उनके अनुसार यह दर्शाता है कि कई बार कंपनियों का मूल्यांकन केवल राजस्व के आधार पर नहीं, बल्कि उनके डेटा और उपभोक्ता आधार के आधार पर भी किया जाता है.
क्रेड के 2.5 करोड़ यूजर्स बने चर्चा का केंद्र
मित्रा ने कहा कि क्रेड ने एक अरब डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटाई है और कंपनी ने 1,457 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया है. उनके मुताबिक, क्रेड भले ही क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं के लिए एक लॉयल्टी प्लेटफॉर्म हो, लेकिन इसकी सबसे बड़ी संपत्ति इसके करोड़ों सत्यापित और उच्च आय वर्ग के उपभोक्ताओं का डेटा हो सकता है. उन्होंने दावा किया कि मेटा के लिए क्रेड के 2.5 करोड़ सत्यापित उपभोक्ताओं की क्रेडिट प्रोफाइल सबसे बड़ा आकर्षण हो सकती हैं.
'राष्ट्रीय स्तर पर डेटा आर्बिट्रेज' का लगाया आरोप
अर्नब मित्रा ने इस संभावित अधिग्रहण को "राष्ट्रीय स्तर पर डेटा आर्बिट्रेज" करार दिया. उन्होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में विदेशी कंपनियों द्वारा संवेदनशील तकनीकी कंपनियों के अधिग्रहण पर कड़ी निगरानी रखी जाती है.
उनका मानना है कि भारत में भी इस तरह के सौदों को केवल कारोबारी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए.
डेटा प्रोटेक्शन कानून के पालन पर भी उठे सवाल
मित्रा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस सौदे में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के प्रावधानों का पालन किया गया है. उनके अनुसार यदि किसी विदेशी कंपनी को उपभोक्ताओं का वित्तीय डेटा हस्तांतरित किया जाता है तो इसके लिए स्पष्ट सहमति आवश्यक हो सकती है. उन्होंने कहा कि या तो क्रेड ने अपने उपयोगकर्ताओं से ऐसी अनुमति प्राप्त की होगी या फिर इस पहलू की पर्याप्त जांच नहीं हुई होगी.
कुणाल शाह की सराहना, लेकिन व्यवस्था पर सवाल
हालांकि अर्नब मित्रा ने कुणाल शाह की कारोबारी क्षमता की सराहना भी की. उन्होंने कहा कि कुणाल शाह ने अपने व्यवसाय को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है और उन्होंने खेल को बेहतरीन तरीके से खेला है. मित्रा ने स्पष्ट किया कि उनकी नाराजगी किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि उस व्यवस्था से है जिसमें ऐसे महत्वपूर्ण सवालों पर पर्याप्त चर्चा नहीं होती.
डेटा स्वामित्व पर बहस हुई तेज
सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है. अब चर्चा केवल स्टार्टअप वैल्यूएशन, फंडिंग और संस्थापकों की सफलता तक सीमित नहीं रही है. डेटा स्वामित्व, सीमा पार डेटा हस्तांतरण, उपभोक्ता की सहमति और नागरिकों के डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में देखने जैसे मुद्दे अब इस बहस के केंद्र में आ गए हैं. आने वाले समय में यह मुद्दा भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और डेटा नियमन से जुड़ी नीतियों पर भी असर डाल सकता है.
मंगलवार को BSE सेंसेक्स 893.39 अंक गिरकर 76,200.68 पर बंद हुआ था. वहीं NSE एनएसई निफ्टी 278.80 अंक टूटकर 23,824.10 के स्तर पर पहुंच गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को आई भारी गिरावट के बाद बुधवार को बाजार खुलने से पहले निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और आईटी शेयरों पर बनी हुई है. पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स करीब 900 अंक टूटा था, जबकि निफ्टी भी 23,850 के नीचे फिसल गया था. विशेषज्ञों का मानना है कि आज के कारोबार में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति और आईटी सेक्टर की चाल पर निर्भर करेगी.
मंगलवार को आई थी बड़ी गिरावट
मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 893.39 अंक गिरकर 76,200.68 पर बंद हुआ था. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) एनएसई निफ्टी 278.80 अंक टूटकर 23,824.10 के स्तर पर पहुंच गया था. इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई थी.
ग्लोबल संकेतों पर रहेगी नजर
एशियाई बाजारों में कमजोरी और दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स में आई तेज गिरावट ने वैश्विक बाजारों की धारणा को प्रभावित किया था. ऐसे में आज भी निवेशक एशियाई बाजारों की चाल पर नजर रखेंगे. अगर अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो घरेलू बाजार में कुछ राहत देखने को मिल सकती है.
अमेरिकी फेड और कच्चे तेल की कीमतें अहम
मध्य पूर्व में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं. साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि वैश्विक महंगाई का दबाव बना रहता है तो विदेशी निवेशकों की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है.
आईटी शेयरों पर रहेगी नजर
पिछले कारोबारी सत्र में टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक जैसे आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली थी. वैश्विक आईटी खर्च को लेकर चिंताओं के कारण इस सेक्टर पर दबाव बना हुआ है. आज के कारोबार में भी आईटी शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
रुपये और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां महत्वपूर्ण
डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. निवेशकों की नजर आज एफआईआई और डीआईआई के आंकड़ों पर भी रहेगी. विश्लेषकों का मानना है कि मंगलवार की बड़ी गिरावट के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है. यदि वैश्विक संकेतों में सुधार आता है तो निचले स्तरों से खरीदारी देखने को मिल सकती है. हालांकि निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और चुनिंदा शेयरों में ही निवेश करने की सलाह दी जा रही है.
इन शेयरों पर रखें नजर
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजार में आज कई बड़ी कंपनियों से जुड़ी अहम कारोबारी घोषणाओं के चलते निवेशकों की नजर चुनिंदा शेयरों पर रहेगी. आईटी कंपनी इंफोसिस ने ग्लोबलफाउंड्रीज के साथ अपनी एआई आधारित साझेदारी को मजबूत किया है, जबकि मामाअर्थ की पैरेंट कंपनी होनासा कंज्यूमर ने फ्लुएंस फार्मा में 58 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदकर न्यूट्रास्यूटिकल्स क्षेत्र में प्रवेश किया है. वहीं सरकार 24 और 25 जून को ऑफर फॉर सेल के जरिए आईआरएफसी में 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने जा रही है. सिटी यूनियन बैंक ने 500 करोड़ रुपये जुटाने की मंजूरी दी है. दूसरी ओर वेदांता की प्रमोटर कंपनी ट्विन स्टार होल्डिंग्स ने 6.5 करोड़ शेयर बेचे हैं, जबकि डेल्हीवरी में नेक्सस वेंचर्स ने भी अपनी हिस्सेदारी घटाई है. इसके अलावा स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स के प्रमोटरों ने भी हिस्सेदारी बिक्री की है. इन सभी घटनाक्रमों के कारण आज इंफोसिस, होनासा कंज्यूमर, आईआरएफसी, सिटी यूनियन बैंक, वेदांता, डेल्हीवरी और स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स के शेयर निवेशकों के फोकस में रह सकते हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)