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Go First का IPO क्यों नहीं हो पा रहा Take Off, आखिर किस बात का है इंतजार?
वाडिया ग्रुप के स्वामित्व वाली एयरलाइन Go First ने अपना IPO लाने की योजना नवंबर तक के लिए टाल दी है. बार बार IPO टालने की वजह क्या है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्ली: वाडिया ग्रुप की कंपनी Go First ने लगातार तीसरी बार अपना IPO लाने का विचार टाल दिया है, एयरलाइन अब नवंबर के बाद ही अपना IPO लेकर आएगी. माना जा रहा है कि 3600 करोड़ रुपये के इस IPO को एविएशन शेयरों में कंज्यूमर सेंटीमेंट्स खराब होने की वजह से टाल दिया गया है.
Go First को किस बात का इंतजार
मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि Go First को ये सलाह दी गई है कि IPO को लाने से पहले वो सरकार की ओर से आने वाली ATF प्राइसिंग मैकेनिज्म का इंतजार करे, जिसके बाद एविएशन सेक्टर के सेंटीमेंट्स में सुधार देखने को मिल सकता है. ATF के दाम मई 2021 से लेकर अबतक 120 परसेंट तक बढ़ चुके हैं और ये जून में 141,232.87 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था.
दोबारा दाखिल करने होंगे IPO पेपर
आपको बता दें कि Go First अपना IPO इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में लेकर आने वाली थी, लेकिन कमजोर अप्रैल-जून तिमाही और ATF की बढ़ती कीमतों ने एयरलाइन को अपना IPO टालने पर मजबूर कर दिया. Go First का DRHP (Draft Red Herring Prospectus) 26 अगस्त को एक्सपायर हो चुका है, इसलिए एयरलाइन को अब नए सिरे से SEBI में IPO के लिए पेपर दाखिल करने होंगे. दरअसल SEBI के नियमों के मुताबिक - कोई भी पब्लिक इश्यू या राइट्स इश्यू को ऑब्जरवेशन जारी होने के 12 महीने के अंदर लाना होता है. महामारी की वजह से इस अवधि को 6 महीने के लिए बढ़ाया गया था, लेकिन अब इसे नहीं बढ़ाया गया है.
तीसरी बार टाला IPO
ये तीसरी बार है कि पिछले से लेकर अबतक Go First अपना IPO लाने की योजना को तीन बार टाल चुका है. एयरलाइन को IPO लाने की मंजूरी पिछले साल मिली थी, लेकिन पहली बार एयरलाइन ने अगस्त 2021 में अपने कदम पीछे खींचे, जब SEBI ने प्रमोटर्स को बकाया जांच के लिए बुलाया और दूसरी बार दिसंबर 2021 में टाला, जब ओमिक्रॉन का प्रकोप बढ़ा. Go First साल 2015 से लिस्टिंग की योजना बना रही है जब वो GoAir के नाम से जानी जाती थी.
क्या है नया ATF प्राइस मैकेनिज्म
ATF की कीमतों को काबू करने के लिए सरकार ने तेल मार्केटिंग कंपनियों से MOPAG (Mean of Platts Arab Gulf)-बेस्ड प्रासिंग सिस्टम पर शिफ्ट करने को कहा है, जबकि अभी डुअल प्राइसिंग मैकेनिज्म पर ATF की कीमतें तय होती हैं. नए मैकेनिज्म से एयरलाइंस को कीमतों की चाल का अनुमान लगाने में मदद मिलेगी और ग्लोबल क्रूड की कीमतें बढ़ने का अंदाजा होने पर वो अपनी तैयारी को पहले से दुरुस्त रखेंगी.
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