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2023-दुनिया के लिए सबसे खराब वर्ष! पर भारत से हैं उम्मीद: गीता गोपीनाथ,IMF

2023 के लिए IMF की डिप्टी डायरेक्टर ने जो अनुमान लगाया है वो डराने वाला है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्लीः दुनिया के आगामी वर्ष 2023 काफी खराब हो सकता है, क्योंकि वित्तीय तौर पर बहुत सारी ऐसी चीजें एक साथ हो रही हैं, जो इस ओर संकेत देती हैं. इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड की डिप्टी डायरेक्टर गीता गोपीनाथ ने कहा कि दुनिया भर की उम्मीदें इस बार मंदी की आहट के बीच भारत पर टिकी हैं. उन्होंने एक मीडिया हाउस से बात करते हुए वैश्विक मंदी, चीन की इकोनॉमी में गिरावट, भारत द्वारा जी 20 की अध्यक्षता को संभालना, क्रिप्टोकरेंसी और जीडीपी की ग्रोथ पर बात की.

 भारत की जीडीपी लगातार बढ़ रही है

गीता गोपीनाथ ने कहा कि वैश्विक स्तर को देखते हुए जहां ज्यादार देशों की जीडीपी गिर रही है, वहीं भारत की जीडीपी कोविड के बाद से लगातार ग्रोथ कर रही है. अभी भी यह 4-6 फीसदी के स्तर पर है, जिससे लग रहा है कि लॉकडाउन के बाद से स्थितियों में सुधार हो रहा है. भारत में निजी खपत में अच्छी तरह से सुधार देखा है, निवेश अच्छा कर रहा है और हम उम्मीद करते हैं कि निवेश आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण इंजन होगा. 

दुनिया के सामने लगातार चुनौतियां

ग्लोबल लेवल पर सभी इकोनॉमी में इस वक्त कई सारी चुनौतियों की भरमार है. खाद्य, एनर्जी और लोन का मुद्दा सबसे बड़ा है. क्रिप्टोकरेंसी के साथ जो हुआ वो सब देख रहे हैं. यूक्रेन संकट के चलते दुनिया भर में इस वक्त एनर्जी क्राइसेस देखने को मिल रही है. विकसित देश भी इससे काफी ज्यादा प्रभावित हैं. 

कम आय वाले देशों में लोन का संकट 

गोपीनाथ ने कहा कि लगभग 60% कम आय वाले देश या तो पहले से ही लोन न मिलने से तनाव में हैं या लोन के तनाव के उच्च जोखिम में हैं. जी20 इस लोन की समस्या को हल करने में देशों की मदद करने के लिए सामान्य रूपरेखा तैयार करता है और कुछ देशों के साथ प्रगति हुई है. लेकिन बहुत कुछ करने की जरूरत है और भारत इन देशों के लिए बहुत तेजी से लोन समाधान प्राप्त करने के लिए ठोस कार्रवाई करने में सबसे आगे है.

चीन में आई गिरावट चिंता का विषय

अक्टूबर की तुलना में अमेरिका और यूरोप के लिए इस साल की तीसरी तिमाही कुछ अन्य देशों के लिए भी उम्मीद से बेहतर रही. इसलिए वैश्विक दृष्टिकोण कुछ अर्थों में ऊपर की ओर मूल्यांकन किया गया था, लेकिन चौथी तिमाही के हाई फ्रिक्वेंसी डेटा उस धीमी गति के अनुरूप है जिसे अगले वर्ष के लिए पेश कर रहे हैं और जिस देश के लिए हमारे दृष्टिकोण में सबसे महत्वपूर्ण गिरावट आई है वह चीन है. गोपनीथ ने आगे कहा कि में लगता है कि अगला साल इस साल से भी बुरा होने वाला है.ऊर्जा बाजार अभी भी एक जोखिम का स्रोत हैं, हम कीमतों को ऊपर या नीचे जाते हुए देख सकते हैं, बहुत अधिक अस्थिरता है जो चीन की अर्थव्यवस्था के माध्यम से आ सकती है.

अमेरिका में आ सकती है मंदी

गोपीनाथ ने अमेरिकी इकोनॉमी पर पूछे गए सवाल के बारे में जवाब देते हुए कहा कि अमेरिका में विकास कुछ और धीमा होगा और हम उम्मीद करते हैं कि बेरोजगारी कुछ बढ़ जाएगी. अब यह मंदी के क्षेत्र में होगा या नहीं यह निर्धारित किया जाना बाकी है. इसका असर यूरोप पर भी पड़ेगा और वहां के ज्यादातर देश एक इकोनॉमिक क्राइसेस से जूझ रहे हैं. गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से सब बेहाल हैं. यूरोप के लिए जो अधिक हालिया डेटा आया था, वह उस अनुमान के अनुरूप बहुत कमजोर था जो हमारे पास है. लगभग आधे यूरो देशों की चौथी तिमाही में नकारात्मक वृद्धि हुई है. इसलिए यह उनके लिए कठिन समय है.

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