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'हमारे स्टॉक गिराकर मुनाफा कमाना था उसका मकसद', जानें Adani ने किसके लिए कही ये बात
गौतम अडानी ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को गलत करार देते हुए कहा है कि उसका मकसद समूह की प्रतिष्ठा खराब करना था.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
अमेरिका से आई बुरी खबर के बीच गौतम अडानी (Gautam Adani) ने एक बार फिर निवेशकों का भरोसा जीतने की कोशिश की है. उन्होंने इसके लिए उस 'हिंडनबर्ग' पर निशाना साधा है, जिसके चलते अडानी समूह (Adani Group) को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा. अडानी ने कहा कि अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने गलत रिपोर्ट जारी की. उसका उद्देश्य अडानी समूह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना और समूह के शेयरों में गिरावट के जरिए से मुनाफा कमाना था. अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने कहा कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पूरी तरह से भ्रामक थी.
ये था हिंडनबर्ग का उद्देश्य
अडानी समूह की फ्लैगशिप कंपनी एंटरप्राइजेज (Adani Enterprises) की सलाना रिपोर्ट में गौतम अडानी ने कहा कि समूह अपने गवर्नेंस और डिस्क्लोजर स्टैंडर्ड को लेकर आश्वस्त है. अडानी ने शेयरधारकों को अपने संदेश में कहा कि गणतंत्र दिवस से ठीक एक दिन पहले अमेरिकी शॉर्टसेलर हिंडनबर्ग ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की. यह रिपोर्ट उस वक्त जारी की गई जब हम भारत के इतिहास में सबसे बड़ी फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफरिंग यानी FPO लॉन्च करने की योजना बना रहे थे. हिंडनबर्ग का उद्देश्य हमारी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना और हमारे स्टॉक की कीमतों में जानबूझकर गिरावट के माध्यम से मुनाफा कमाना था.
FPO वापस लेने का फैसला सही
FPO वापस लेने के अपने फैसले को सही करार देते हुए अडानी ने कहा कि निवेशकों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया गया था. गौतम अडानी ने आगे कहा, 'इस रिपोर्ट के चलते कई प्रतिकूल परिणाम हुए, जिनका हमें सामना करना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेषज्ञ पैनल को अडानी समूह में कोई नियामक विफलता नहीं मिली. समिति की रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय बाजारों को संगठित रूप से अस्थिर करने के विश्वसनीय आरोप थे'. उन्होंने यह भी कहा कि सेबी ने अभी तक अपनी रिपोर्ट जमा नहीं की है, लेकिन वे अपने गवर्नेंस और डिस्क्लोजर स्टैंडर्ड को लेकर आश्वस्त हैं.
इस तरह हुआ असर
बता दें कि हिंडनबर्ग ने जनवरी में अडानी समूह को लेकर एक रिपोर्ट जारी की थी. इस रिपोर्ट में समूह पर स्टॉक में हेरफेर, धोखाधड़ी वाले लेनदेन और कई अन्य आरोप लगाए गए थे. हिंडनबर्ग का ये भी कहना था कि अडानी की कंपनियों के शेयर ओवरवैल्यूड हैं यानी उनकी जितनी कीमत होनी चाहिए, उससे कहीं अधिक पर ट्रेड कर रहे हैं. इस रिपोर्ट के बाद समूह की सभी कंपनियों के शेयर आसमान से सीधे जमीन पर आ गए और अब तक इनमें पहले वाली तेजी देखने को नहीं मिली है. इस रिपोर्ट की वजह से अडानी की दौलत का पहाड़ भी दरक गया. वह दुनिया भर के अरबपतियों की लिस्ट में टॉप 10 से भी बाहर हो गए हैं.
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