NGOs के लिए स्टॉक एक्सचेंज लाने की तैयारी तेज, जानिए SEBI के नियम, इससे आपको क्या फायदा?

सोशल स्टॉक एक्सचेंज से सोशल इंटरप्राइेजज के लिए बाजार से फंड जुटाना आसान होगा, सेबी ने जुलाई में इसके लिए नोटिफिकेशन जारी किया था.

Last Modified:
Tuesday, 20 September, 2022
SEBI

नई दिल्ली: देश में जल्द ही सोशल स्टॉक एक्सचेंज (SSE) की शुरुआत होने वाली है, इसके लिए मार्केट रेगुलेटर (Sebi) ने एक विस्तृत फ्रेमवर्क पेश किया है. इस फ्रेमवर्क में मार्केट रेगुलेटर ने बताया है कि जो भी Not-for-Profit Organisation (NPO) संस्थाएं SSE में रजिस्टर होना चाहती हैं उनके लिए क्या क्राइटेरिया होगा.  

सोशल स्टॉक एक्सचेंज के लिए नए नियम
अपने सर्कुलर में, मार्केट रेगुलेटर ने SSE के साथ रजिस्ट्रेशन के लिए NPO द्वारा पूरी की जाने वाली न्यूनतम जरूरतों को बताया है, NPO के लिए शून्य-कूपन शून्य प्रिंसिपल इंस्ट्रूमेंट्स जारी करके पैसे जुटाने की जरूरत और एक्सचेंज पर NPO की ओर से किए जाने वाले सालाना डिस्क्लोजर भी जरूरी किया है. लिस्टेड NPO को तिमाही के अंत से 45 दिनों के भीतर एSSE ये बताना होगा कि उसने पैसों का कहां इस्तेमाल किया, उसका पूरा ब्यौरा देना होगा. इसके साथ ही, SEBI ने SSE का इस्तेमाल करके पैसा जुटाने वाले सोशल एंटरप्राजेस को वित्त वर्ष के अंत से 90 दिनों के भीतर वार्षिक प्रभाव रिपोर्ट (AIR) को डिस्क्लोज करने को भी अनिवार्य किया है. 

क्या है सोशल स्टॉक एक्सचेंज 
सोशल स्टॉक एक्सचेंज से सोशल इंटरप्राइेजज के लिए बाजार से फंड जुटाना आसान होगा, सेबी ने जुलाई में इसके लिए नोटिफिकेशन जारी किया था. सोशल स्टॉक 
एक्सचेंज को आसान भाषा में समझें, तो यह एक तरह से सामाजिक क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों (NGO) को बाजार से फंड जुटाने में मदद करेगा. जिस तरह से निजी कंपनियां अभी बाजार से पैसे जुटाती हैं, ठीक वैसे ही सोशल इंटरप्राइजेज (NGOs) भी खुद को शेयर बाजार में रजिस्टर्ड कराकर पैसे जुटा सकेंगे. इसके बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने पहले बजट भाषण में (साल 2019-20 के लिए) जिक्र किया था. 

रिटेल निवेशकों के लिए क्या फायदा 
Social Stock Exchange (SSE) की जब शुरुआत होगी तो ठीक वैसे ही काम करेगा जैसे कि BSE, NSE काम करते हैं. समाज के लिए काम कर रही संस्थाएं इस पर लिस्ट होंगी, उनके शेयरों की ट्रेडिंग होगी और कोई भी आम निवेशक  NGO के शेयरों को खरीद और बेच सकेगा, जैसा कि शेयर बाजार में कोई भी रिटेल निवेशक इस समय करता है 

नया नहीं है SSE
भारत में भले ही सोशल स्टॉक एक्सचेंज नया हो, लेकिन दुनिया में यूरोप, अमेरिकी देशों, यूके, कनाडा, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, जमैका और केन्या में पहले से चल रहे हैं.

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भारतीय बॉन्ड बाजार में लौटी रौनक, एशिया में सबसे बेहतर प्रदर्शन; FIIs ने खरीदे ₹5,200 करोड़ के बॉन्ड

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) ने इस हफ्ते करीब 5,200 करोड़ रुपये के बॉन्ड की शुद्ध खरीदारी की है. यह जुलाई के बाद किसी एक हफ्ते में उनकी सबसे बड़ी खरीदारी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Friday, 06 November, 2026
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Friday, 06 November, 2026
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भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में इस हफ्ते जोरदार तेजी देखने को मिली है. कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से भारतीय बॉन्ड को सहारा मिला है. इसका असर विदेशी निवेशकों की खरीदारी में भी दिखाई दिया. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FIIs) ने इस हफ्ते करीब 5,200 करोड़ रुपये के बॉन्ड की शुद्ध खरीदारी की है. यह जुलाई के बाद किसी एक हफ्ते में उनकी सबसे बड़ी खरीदारी है. इस प्रदर्शन के साथ भारतीय सरकारी बॉन्ड उभरते एशियाई बाजारों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले बॉन्ड बन गए हैं.

सरकारी बॉन्ड की यील्ड में 22 बेसिस पॉइंट की गिरावट

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इंडोनेशिया, फिलीपींस, चीन, मलेशिमया और थाईलैंड जैसे बाजारों की तुलना में इस हफ्ते भारतीय बॉन्ड का प्रदर्शन बेहतर रहा. शुक्रवार, 6 नवंबर को सुबह 11:40 बजे भारत के बेंचमार्क 6.94 फीसदी वाले 2036 में मैच्योर होने वाले सरकारी बॉन्ड की यील्ड 7.1973 फीसदी पर थी.

दिन के कारोबार के दौरान यील्ड में 2.5 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन पूरे सप्ताह में इसमें करीब 22 बेसिस पॉइंट की गिरावट दर्ज की गई. अप्रैल के बाद यह बॉन्ड बाजार का सबसे अच्छा साप्ताहिक प्रदर्शन हो सकता है. गौरतलब है कि बॉन्ड की यील्ड में गिरावट का मतलब उसकी कीमतों में बढ़ोतरी होता है.

FIIs ने एक हफ्ते में खरीदे ₹5,200 करोड़ के बॉन्ड

भारतीय बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने लगी है. इस हफ्ते FIIs ने करीब 5,200 करोड़ रुपये के बॉन्ड की शुद्ध खरीदारी की. जुलाई के बाद यह किसी एक सप्ताह में उनकी सबसे बड़ी खरीदारी है.

इसकी प्रमुख वजह अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में आई गिरावट है. अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड इस हफ्ते करीब 10 बेसिस पॉइंट नीचे आई है. इससे भारतीय बॉन्ड विदेशी निवेशकों के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा आकर्षक हो गए हैं. विशेषज्ञों के अनुसार,रुपये की स्थिरता, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदें भारतीय बॉन्ड बाजार के लिए अहम हैं. इन परिस्थितियों के कारण भारत वैश्विक बॉन्ड निवेशकों के रडार पर तेजी से आ रहा है.

कच्चे तेल की कीमतों में 15% की गिरावट से रुपये को सहारा

कच्चे तेल की कीमतों में इस हफ्ते करीब 15 फीसदी की गिरावट आई है. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीद से तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है. अप्रैल 2020 के बाद यह कच्चे तेल की कीमतों में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट बताई जा रही है.

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक देश है. ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट से देश को कई मोर्चों पर राहत मिल सकती है. इससे आयात बिल और महंगाई का दबाव कम होने के साथ रुपये को भी मजबूती मिल सकती है.

इस सप्ताह रुपया करीब 1 फीसदी मजबूत होकर 94.10 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. वहीं, निफ्टी 50 भी सप्ताह के दौरान 6.7 फीसदी चढ़कर 24,612 के स्तर पर पहुंच गया. विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की संभावनाओं ने भारतीय बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है. हालांकि, उनका मानना है कि 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड में आगे और गिरावट के लिए ईरान संकट का समाधान होना और कच्चे तेल की कीमतों का 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आना जरूरी होगा.

RBI की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका घटी

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी की आशंका भी कम हुई है. एक निजी बैंक के ट्रेडर के मुताबिक, पहले बाजार में RBI की ओर से कुल 125 बेसिस पॉइंट तक ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना जताई जा रही थी. अब यह अनुमान घटकर 50 से 75 बेसिस पॉइंट रह गया है.

इसका असर ब्याज दरों से जुड़े ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप (OIS) बाजार में भी देखने को मिला है. एक साल की OIS दर इस हफ्ते 32 बेसिस पॉइंट घटकर 6.40 फीसदी पर आ गई. वहीं, दो साल की दर 34 बेसिस पॉइंट गिरकर 6.40 फीसदी और पांच साल की दर 37 बेसिस पॉइंट घटकर 6.49 फीसदी रह गई. OIS दरों में आई गिरावट से संकेत मिलता है कि बाजार अब भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर पहले के मुकाबले कम आशंकित है.

 


गाड़ियों की बिक्री में 24% की गिरावट, अक्टूबर में बिके 31.72 लाख वाहन; EV की हिस्सेदारी रिकॉर्ड स्तर पर

FADA के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2026 में देशभर में कुल 31,72,000 से अधिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ, जबकि पिछले साल इसी महीने बिक्री का आंकड़ा इससे काफी अधिक था.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Friday, 06 November, 2026
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Friday, 06 November, 2026
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देश में ऑटोमोबाइल की खुदरा बिक्री अक्टूबर में सालाना आधार पर 23.8 फीसदी घटकर करीब 31.72 लाख यूनिट रह गई. दोपहिया और यात्री वाहनों की बिक्री में आई गिरावट ने कुल आंकड़ों को प्रभावित किया. हालांकि, फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के मुताबिक, बिक्री में इस गिरावट की प्रमुख वजह त्योहारी कैलेंडर में बदलाव है. इस बीच, इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की कुल रिटेल बिक्री में हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 11.5 फीसदी पर पहुंच गई.

FADA के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2026 में देशभर में कुल 31,72,000 से अधिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन हुआ, जबकि पिछले साल इसी महीने बिक्री का आंकड़ा इससे काफी अधिक था. दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. इस श्रेणी में बिक्री सालाना आधार पर 28.35 फीसदी घटकर 23.21 लाख यूनिट रह गई. वहीं, यात्री वाहनों की बिक्री 4.23 फीसदी गिरकर करीब 5.08 लाख यूनिट पर आ गई.

त्योहारों की तारीखों में बदलाव का असर

FADA के मुताबिक, अक्टूबर में बिक्री के आंकड़ों में गिरावट की एक बड़ी वजह इस साल त्योहारों का नवंबर में पड़ना है. पिछले साल नवरात्रि और दिवाली दोनों अक्टूबर में थे, जबकि इस साल नवरात्रि अक्टूबर में और धनतेरस व दिवाली नवंबर में मनाई जा रही है.

FADA के अध्यक्ष साई गिरिधर ने कहा कि अक्टूबर भारत में ऑटोमोबाइल खुदरा बिक्री के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण महीनों में से एक होता है. इसलिए इस साल के आंकड़ों को त्योहारी कैलेंडर में हुए बदलाव के संदर्भ में देखना जरूरी है. उनके मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर में नवरात्रि और दिवाली एक साथ पड़ने के अलावा, 22 सितंबर 2025 को GST दरों में कटौती के बाद लंबे समय से रुकी मांग भी बाजार में आई थी. इस वजह से पिछले साल का बिक्री आधार काफी ऊंचा था.

ग्रामीण इलाकों में दोपहिया वाहनों की बिक्री ज्यादा घटी

FADA के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में ग्रामीण क्षेत्रों में दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री 33.97 फीसदी घट गई, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह गिरावट 20.77 फीसदी रही. दूसरी ओर, इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री करीब 3.55 लाख यूनिट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. कुल वाहन बिक्री में EV की हिस्सेदारी पिछले साल के करीब 6 फीसदी से बढ़कर इस साल 11.5 फीसदी हो गई.

एक और अहम बदलाव वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों की बढ़ती मांग के रूप में सामने आया. अक्टूबर में CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की संयुक्त हिस्सेदारी कुल बिक्री में 41.83 फीसदी रही, जो पेट्रोल वाहनों की 41.6 फीसदी हिस्सेदारी से अधिक थी.

कमर्शियल वाहन, तिपहिया और ट्रैक्टर की बिक्री में बढ़ोतरी

जहां दोपहिया और यात्री वाहनों की बिक्री में गिरावट रही, वहीं अन्य वाहन श्रेणियों का प्रदर्शन बेहतर रहा. अक्टूबर में कमर्शियल वाहनों की खुदरा बिक्री 2.29 फीसदी बढ़कर करीब 1.15 लाख यूनिट हो गई. तिपहिया वाहनों की बिक्री 3.97 फीसदी बढ़कर 1.41 लाख यूनिट और ट्रैक्टरों की बिक्री 3.10 फीसदी बढ़कर 79,285 यूनिट पर पहुंच गई.

निर्माण उपकरणों की बिक्री में भी 22.07 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 7,434 यूनिट रही. साई गिरिधर के मुताबिक, कुल मिलाकर अक्टूबर अब तक का दूसरा सबसे अच्छा महीना रहा. वहीं, कमर्शियल वाहनों, तिपहिया वाहनों और ट्रैक्टरों के लिए यह अब तक का सबसे बेहतर अक्टूबर साबित हुआ.

नवंबर में बिक्री को लेकर डीलरों को उम्मीद

FADA ने बताया कि सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में वाहन बिक्री में करीब 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जो त्योहारी मांग का संकेत देती है. डीलरों को नवंबर में बिक्री बेहतर रहने की उम्मीद है, क्योंकि इस महीने 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली है.

एसोसिएशन के मुताबिक, नवंबर में त्योहारी खरीदारी से ऑटो बाजार को सहारा मिल सकता है. हालांकि, दिसंबर और जनवरी में बिक्री का रुख साल के अंत में मिलने वाले डिस्काउंट, नए मॉडल की लॉन्चिंग और ग्राहकों की मांग के अनुरूप वाहनों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा.

 


2030 तक स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में 220 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश की उम्मीद: प्रह्लाद जोशी

भारत ने अब तक 310 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता स्थापित की है. 2030 तक 500 गीगावाट का लक्ष्य हासिल करने के लिए 190 गीगावाट क्षमता और जोड़नी होगी.

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Published - Friday, 06 November, 2026
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Friday, 06 November, 2026
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भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 2030 तक 220 अरब डॉलर की अनुमानित निवेश जरूरत से अधिक पूंजी आने की उम्मीद है. केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुरुवार को यह भरोसा जताया. उन्होंने कहा कि देश में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता का विस्तार तेजी से हो रहा है और इस क्षेत्र में घरेलू के साथ-साथ विदेशी निवेशकों की भी दिलचस्पी बढ़ रही है.

भारत मंडपम में आयोजित भारत रिन्यूएबल एनर्जी (BRE) समिट एंड एक्सपो 2026 से इतर बातचीत में जोशी ने बताया कि देश ने अब तक 310 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता स्थापित कर ली है. सरकार ने 2030 तक इसे बढ़ाकर 500 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा है. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अगले चार वर्षों में 190 गीगावाट अतिरिक्त क्षमता जोड़नी होगी.

जोशी ने कहा कि सरकार को भरोसा है कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 220 अरब डॉलर की अनुमानित निवेश जरूरत से अधिक पूंजी जुटाई जा सकेगी. भारत का स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.

दो साल में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में आया 7 लाख करोड़ रुपये का निवेश

मंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में करीब 7 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है. इसमें घरेलू निवेश के साथ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) भी शामिल है. यह निवेश देश में स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार और इस क्षेत्र में बढ़ते भरोसे को दर्शाता है.

जोशी ने भारत में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ने की रफ्तार का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि देश को शुरुआती 100 गीगावाट स्वच्छ ऊर्जा क्षमता स्थापित करने में 10 साल लगे थे. इसके बाद अगली 100 गीगावाट क्षमता जोड़ने में सात साल का समय लगा. वहीं, हाल की 100 गीगावाट क्षमता सिर्फ दो वर्षों में स्थापित की गई है.

उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षमता विस्तार की यह रफ्तार आगे भी तेज बनी रहेगी और भारत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल कर लेगा.

2030 के बाद 300 गीगावाट क्षमता जोड़ने की तैयारी

जोशी ने कहा कि सरकार 2030 के लक्ष्य से आगे की योजना पर भी काम कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के अनुरूप अतिरिक्त 300 गीगावाट क्षमता जोड़ने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी. इसका उद्देश्य आने वाले वर्षों में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन को और बढ़ाना है.

उन्होंने यह भी कहा कि भारत आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाओं से निपटने की तैयारी मजबूत कर रहा है. पहले आई चुनौतियों से मिले अनुभव के आधार पर सरकार ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर काम कर रही है, जिससे नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार के दौरान आपूर्ति में रुकावटों का असर कम किया जा सके.

वैश्विक निवेशकों की भागीदारी बढ़ने का दावा

BRE समिट एंड एक्सपो 2026 में नीति निर्माता, निवेशक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और नवाचार से जुड़े विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं. जोशी के मुताबिक, पहली बार नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े तीन अहम आयोजनों को एक साथ आयोजित किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि इस आयोजन में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों की मौजूदगी भारत के स्वच्छ ऊर्जा विस्तार और ऊर्जा बदलाव में उसकी भूमिका को लेकर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दिखाती है.


धनतेरस पर शेयर बाजार में मुनाफावसूली के संकेत, गिफ्ट निफ्टी 130 अंक टूटा; इन शेयरों पर रहेगी नजर

गुरुवार को बीएसई सेंसेक्स 2,008.61 अंक यानी 2.60 फीसदी की बढ़त के साथ 79,310.01 पर बंद हुआ था. वहीं, एनएसई निफ्टी 576 अंक यानी 2.40 फीसदी चढ़कर 24,536.60 के स्तर पर पहुंच गया था.

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Published - Friday, 06 November, 2026
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Friday, 06 November, 2026
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धनतेरस के दिन शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रहने के संकेत हैं. गुरुवार को सेंसेक्स और निफ्टी में 2 फीसदी से ज्यादा की जोरदार तेजी के बाद आज मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिल सकता है. गिफ्ट निफ्टी 130 अंक से ज्यादा टूट गया है, वहीं अमेरिकी बाजारों में भारी बिकवाली के बाद एशियाई बाजारों में भी हाहाकार मचा है. इस बीच कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है. बाजार की इस हलचल के बीच निवेशकों की नजर भारती एयरटेल, टाइटन, ओएनजीसी और ब्रिटानिया समेत तिमाही नतीजे जारी करने वाली कंपनियों के शेयरों पर रहेगी. वहीं, आज कई कंपनियां सितंबर तिमाही के नतीजे भी घोषित करेंगी. 

गुरुवार को सेंसेक्स 2,008 अंक उछला था

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार (5 नवंबर) को जबरदस्त तेजी देखने को मिली थी. बीएसई सेंसेक्स 2,008.61 अंक यानी 2.60 फीसदी की बढ़त के साथ 79,310.01 पर बंद हुआ था. वहीं, एनएसई निफ्टी 576 अंक यानी 2.40 फीसदी चढ़कर 24,536.60 के स्तर पर पहुंच गया था.

इस तेजी के साथ बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 500 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया था. एक कारोबारी सत्र में निवेशकों की संपत्ति में करीब 8 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ था.

हालांकि, व्यापक बाजार में तेजी का प्रदर्शन कुछ कमजोर रहा. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.8 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.5 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुए थे. 

FIIs की लगातार पांचवें दिन खरीदारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की खरीदारी घरेलू बाजार के लिए राहत की खबर है. विदेशी निवेशक लगातार पांच कारोबारी सत्रों से भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदार बने हुए हैं. 5 नवंबर को उन्होंने भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध रूप से 14,975 करोड़ रुपये का निवेश किया.

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट

अमेरिका के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड घटकर करीब 4.83 फीसदी पर आ गई है. शेयर बाजारों में भारी बिकवाली के बीच निवेशकों के सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करने से बॉन्ड यील्ड में गिरावट आई है.

एचएसटी वेल्थ के फाउंडर और सीईओ हरिसेल्वन राधाकृष्णन के मुताबिक, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से भारत जैसे उभरते बाजारों को फायदा मिल सकता है. हालांकि, इसके लिए वैश्विक बाजारों में निवेशकों का भरोसा मजबूत होना जरूरी है.

इन शेयरों पर रखें नजर

तिमाही नतीजों और कारोबारी अपडेट के चलते आज भारती एयरटेल, टाइटन, ओएनजीसी, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज, बीकाजी फूड्स, रूबिकॉन रिसर्च, अशोका बिल्डकॉन, सास्केन टेक्नोलॉजीज और टेक्समैको रेल के शेयरों में हलचल रह सकती है. भारती एयरटेल का सितंबर तिमाही में कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 31 फीसदी बढ़कर 8,887 करोड़ रुपये रहा, जबकि प्रति ग्राहक औसत रेवेन्यू (ARPU) 264 रुपये से बढ़कर 271 रुपये पहुंच गया. टाइटन कंपनी का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू 10 फीसदी बढ़कर 20,614 करोड़ रुपये और नेट प्रॉफिट दोगुने से ज्यादा बढ़कर 2,393 करोड़ रुपये हो गया. ओएनजीसी का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट 57.3 फीसदी की बढ़त के साथ 15,488.6 करोड़ रुपये और रेवेन्यू 32.8 फीसदी बढ़कर 43,875.2 करोड़ रुपये रहा. वहीं, ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज का रेवेन्यू 15.6 फीसदी बढ़कर 5,597.8 करोड़ रुपये और नेट प्रॉफिट 10.2 फीसदी बढ़कर 721 करोड़ रुपये पहुंच गया. बीकाजी फूड्स का रेवेन्यू 13 फीसदी बढ़कर 921 करोड़ रुपये रहा, हालांकि कंपनी का एबिटा 9.7 फीसदी घटकर 102 करोड़ रुपये और नेट प्रॉफिट 11.3 फीसदी गिरकर 71 करोड़ रुपये रह गया. दूसरी ओर, रूबिकॉन रिसर्च ने मजबूत प्रदर्शन करते हुए रेवेन्यू में 39.8 फीसदी, एबिटा में 52.1 फीसदी और नेट प्रॉफिट में 66.7 फीसदी की बढ़त दर्ज की. कंपनी का नेट प्रॉफिट 90 करोड़ रुपये रहा. कारोबारी अपडेट की बात करें तो अशोका बिल्डकॉन को 865.90 करोड़ रुपये की एनएचएआई परियोजना के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी (L-1) घोषित किया गया है. यह परियोजना वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के करवाद-जुजुवा खंड में आठ लेन की सड़क बनाने से जुड़ी है. इसके अलावा सास्केन टेक्नोलॉजीज को यूरोप की एक प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी से कई वर्षों का इंजीनियरिंग कॉन्ट्रैक्ट मिला है, जबकि टेक्समैको रेल एंड इंजीनियरिंग को घरेलू बाजार में 428.55 करोड़ रुपये के तीन नए ऑर्डर मिले हैं.

आज इन कंपनियों के आएंगे सितंबर तिमाही के नतीजे

शुक्रवार को कई अन्य कंपनियां भी वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे घोषित करेंगी. इनमें हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, होनासा कंज्यूमर, सीमेंस, एस्टर डीएम हेल्थकेयर, ब्लू डार्ट एक्सप्रेस, बॉम्बे डाइंग, सीएमआर ग्रीन टेक्नोलॉजीज, कोहांस लाइफसाइंसेज, कोरमंडल इंटरनेशनल, ग्लैंड फार्मा, जुबिलेंट फूडवर्क्स, नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट और वोल्टास शामिल हैं.

ग्लोबल बाजारों में गिरावट, कच्चा तेल भी चढ़ा

वैश्विक बाजारों में बिकवाली का असर घरेलू शेयर बाजार पर पड़ सकता है. गिफ्ट निफ्टी 130 अंक यानी 0.53 फीसदी गिरकर 24,467.50 पर कारोबार कर रहा था. जापान का निक्केई 225 करीब 8 फीसदी और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 8.8 फीसदी तक टूट गया. कोस्पी में तेज गिरावट के कारण सर्किट ब्रेकर भी लगाना पड़ा. इससे पहले गुरुवार को अमेरिकी बाजारों में एसएंडपी 500 में 4.4 फीसदी, डाउ जोंस में 3.4 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 5.5 फीसदी की गिरावट आई थी. इस बीच पश्चिम एशिया में तेल टैंकरों पर नए हमलों की खबरों से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई. ब्रेंट क्रूड 1.2 फीसदी बढ़कर 99.50 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 0.98 फीसदी चढ़कर 91.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से भारत के आयात बिल और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
 


अडानी पोर्ट्स का यूरोप में बड़ा दांव, €2.56 अरब में Evos का अधिग्रहण करेगी कंपनी

नीदरलैंड की कंपनी Evos में 100% हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी APSEZ, यूरोप के 5 देशों में 8 पोर्ट टर्मिनल मिलेंगे; सौदे से कंपनी की वैश्विक मौजूदगी 10 देशों में 28 बंदरगाहों और टर्मिनल तक पहुंचेगी.

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Published - Thursday, 05 November, 2026
Last Modified:
Thursday, 05 November, 2026
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अडानी समूह (Adani) की कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार का विस्तार करने जा रही है. कंपनी ने यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी स्वतंत्र लिक्विड स्टोरेज ऑपरेटर Evos B.V. में 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए समझौता किया है. यह सौदा 2.56 अरब यूरो (करीब 2.56 बिलियन यूरो) के एंटरप्राइज वैल्यू पर ऑल-कैश आधार पर होगा. नीदरलैंड मुख्यालय वाली Evos को खरीदने के बाद APSEZ को यूरोप के पांच देशों में मौजूद आठ पोर्ट टर्मिनल का कारोबार मिलेगा. इस अधिग्रहण से कंपनी की वैश्विक मौजूदगी बढ़कर 10 देशों में 28 बंदरगाहों और टर्मिनल तक पहुंच जाएगी.

कंपनी की ओर से 5 नवंबर 2026 को जारी बयान के मुताबिक, Evos की इक्विटी वैल्यू 1.18 अरब यूरो आंकी गई है. यह सौदा वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के आधार पर 11.7 गुना EV/EBITDA मल्टीपल पर किया जा रहा है. Evos ने कैलेंडर वर्ष 2025 में 39.2 करोड़ यूरो का राजस्व और 21.9 करोड़ यूरो का EBITDA दर्ज किया था. कंपनी का EBITDA मार्जिन 56 फीसदी रहा. प्रस्तावित अधिग्रहण नियामकीय मंजूरियों और वर्क्स काउंसिल से परामर्श की प्रक्रिया पूरी होने के अधीन है.

 यूरोप के 5 देशों में मिलेगा 8 पोर्ट टर्मिनल का नेटवर्क

Evos के पास कुल 63 लाख क्यूबिक मीटर की लिक्विड स्टोरेज क्षमता है. कंपनी नीदरलैंड, जर्मनी, स्पेन, बेल्जियम और माल्टा में आठ बंदरगाह आधारित टर्मिनल संचालित करती है. इसके टर्मिनल यूरोप के प्रमुख ऊर्जा और औद्योगिक केंद्रों में स्थित हैं. इनमें एम्स्टर्डम-रॉटरडैम-एंटवर्प (ARA) क्षेत्र, हैम्बर्ग और भूमध्यसागरीय क्षेत्र शामिल हैं.

कंपनी के नेटवर्क में 452 स्टोरेज टैंक और जहाजों व बार्ज के लिए 63 बर्थ शामिल हैं. इसके अलावा कई एकीकृत पाइपलाइन कनेक्टिविटी भी हैं, जिनमें एम्स्टर्डम शिफोल एयरपोर्ट और सेंट्रल यूरोप पाइपलाइन सिस्टम से जुड़ाव शामिल है. Evos ने कैलेंडर वर्ष 2025 में 37 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) कार्गो का संचालन किया था.

99% कमर्शियल ऑक्यूपेंसी, 56% EBITDA मार्जिन

Evos का कारोबार पारंपरिक ईंधन के साथ ऊर्जा संक्रमण से जुड़े नए ईंधनों के भंडारण और संचालन तक फैला हुआ है. इसके उत्पादों में पेट्रोल, गैस ऑयल, समुद्री ईंधन और जेट फ्यूल शामिल हैं. इसके अलावा कंपनी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF), बायोफ्यूल, मेथनॉल और बायोएथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधनों के कारोबार में भी मौजूद है.

कंपनी का औसत कमर्शियल ऑक्यूपेंसी स्तर 99 फीसदी है. इसके राजस्व का एक बड़ा हिस्सा टेक-ऑर-पे (Take-or-Pay) अनुबंधों और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट के तहत आता है. इस तरह कंपनी को अपेक्षाकृत स्थिर राजस्व और नकदी प्रवाह मिलता है. Evos के ग्राहक आधार में वैश्विक ऊर्जा कंपनियां, प्रमुख औद्योगिक और केमिकल कंपनियां तथा कमोडिटी ट्रेडर्स शामिल हैं.

अडानी पोर्ट्स के कारोबार को मिलेगा विस्तार

APSEZ के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अडानी ने कहा कि Evos का अधिग्रहण कंपनी की वैश्विक एकीकृत परिवहन प्लेटफॉर्म बनाने की रणनीति में एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे कंपनी को दुनिया के प्रमुख लिक्विड स्टोरेज और ऊर्जा केंद्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का मौका मिलेगा. उन्होंने कहा कि कंपनी यूरोप के ऊर्जा बदलाव में भागीदारी करने और दीर्घकालिक मूल्य सृजित करने की दिशा में काम करेगी.

कंपनी के मुताबिक, इस अधिग्रहण से उसके लिक्विड कारोबार का विस्तार होगा और भौगोलिक स्तर पर विविधता बढ़ेगी. इसके अलावा यूरोप में नए ऊर्जा ईंधनों की ओर बढ़ते बदलाव से जुड़े अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी. Evos का 56 फीसदी EBITDA मार्जिन APSEZ के अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कारोबार के वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही के 44.8 फीसदी मार्जिन से अधिक है. इससे संयुक्त कारोबार के मार्जिन को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.

कर्ज के जरिए होगा सौदे का वित्तपोषण, FY27 तक घटेगा डेट रेशियो

इस अधिग्रहण के लिए APSEZ कर्ज के जरिए फंडिंग करेगी. कंपनी के मुताबिक, APSEZ और Evos के वित्तीय आंकड़ों के आधार पर संयुक्त इकाई का प्रो-फॉर्मा नेट डेट-टू-EBITDA अनुपात 2.76 गुना रहेगा. वित्त वर्ष 2027 तक इसके करीब 2.5 गुना होने का अनुमान है.

प्रस्तावित सौदे के लिए MUFG ने एकमात्र अंडरराइटर के रूप में 2.8 अरब यूरो तक की फाइनेंसिंग प्रतिबद्धता दी है. APSEZ के लिए Linklaters और Cyril Amarchand Mangaldas ने क्रमशः अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कानूनी सलाहकार के रूप में काम किया है.

अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कारोबार में भी बढ़ी कंपनी की गतिविधियां

APSEZ के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 को समाप्त वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही तक कंपनी के पास 12,502 करोड़ रुपये का नकद बैलेंस था. अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कारोबार ने वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में 3,586 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व और 1,608 करोड़ रुपये का EBITDA दर्ज किया. इस दौरान EBITDA मार्जिन भी रिकॉर्ड 44.8 फीसदी रहा.

अंतरराष्ट्रीय पोर्ट कारोबार का वॉल्यूम वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही के 17 मिलियन मीट्रिक टन से बढ़कर वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में 47 मिलियन मीट्रिक टन हो गया. इसमें कोलंबो वेस्ट इंटरनेशनल टर्मिनल, तंजानिया के परिचालन और ऑस्ट्रेलिया के NQXT कारोबार का योगदान रहा.

भारत में 27% पोर्ट कार्गो वॉल्यूम संभालती है APSEZ

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन अडानी समूह का हिस्सा है. कंपनी भारत के पश्चिमी, दक्षिणी और पूर्वी तट पर 16 बंदरगाह और टर्मिनल संचालित करती है. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, कोलंबो, इजरायल और तंजानिया में चार अंतरराष्ट्रीय पोर्ट भी हैं.

कंपनी की मौजूदा कार्गो हैंडलिंग क्षमता 671 मिलियन टन सालाना है और भारत के कुल पोर्ट वॉल्यूम में इसकी हिस्सेदारी करीब 27 फीसदी है. कंपनी ने वित्त वर्ष 2031 तक अपने कार्गो थ्रूपुट को बढ़ाकर 1 अरब टन करने का लक्ष्य रखा है. Evos का अधिग्रहण इसी वैश्विक विस्तार रणनीति का हिस्सा है.


अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों से भारत पर तेल और व्यापार का जोखिम बरकरार, टैरिफ से जल्द राहत की उम्मीद नहीं: रिपोर्ट

अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण बढ़ने से ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत को मिल सकता है बढ़ावा, लेकिन रूसी तेल की खरीद और अमेरिकी व्यापार नीतियों को लेकर भारत की चुनौतियां बनी रहेंगी

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 November, 2026
Last Modified:
Thursday, 05 November, 2026
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अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों से भारत को फिलहाल आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रूस से तेल खरीदने पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों और व्यापार शुल्क (टैरिफ) को लेकर अनिश्चितता भारत के लिए चुनौती बनी रह सकती है. केयरएज रेटिंग्स (CareEdge Ratings) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण मजबूत होने से ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर कूटनीतिक बातचीत का दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, इसका भारत के व्यापार और आर्थिक संभावनाओं पर तत्काल बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है.

रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव के नतीजों का भारत पर असर मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी व्यापार नीतियों और विदेशी निवेश के प्रवाह के जरिए देखने को मिल सकता है. जहां कमजोर अमेरिकी डॉलर और विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव से भारतीय रुपये को कुछ समर्थन मिल सकता है, वहीं रूस से कच्चे तेल की खरीद और अमेरिका की ओर से अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का जोखिम बना रहेगा.

कच्चे तेल और प्रतिबंधों से जुड़ा जोखिम बरकरार

केयरएज रेटिंग्स ने कच्चे तेल की कीमतों को चुनाव के नतीजों का भारत पर पड़ने वाला सबसे तात्कालिक असर बताया है. इसकी वजह यह है कि तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा प्रभाव महंगाई, चालू खाता घाटे, राजकोषीय घाटे और वित्तीय बाजारों पर पड़ता है.

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद बुधवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 8.7 फीसदी की गिरावट आई और यह 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. गुरुवार को रिपोर्ट तैयार किए जाने के समय यह 0.86 फीसदी गिरकर 93.81 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.

हालांकि, रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि कच्चे तेल की कीमतें होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े घटनाक्रम और ऊर्जा आपूर्ति में संभावित रुकावटों के प्रति संवेदनशील बनी रहेंगी. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. इससे भारत की आयात लागत ऊंची बनी रहने का खतरा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत होने से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के सैन्य खर्चों की जांच-पड़ताल भी बढ़ सकती है. जनवरी 2027 में नई कांग्रेस के कामकाज शुरू करने के बाद सांसद सैन्य अभियानों के लिए अतिरिक्त फंडिंग पर शर्तें लगा सकते हैं. इससे ईरान के साथ संघर्ष का कूटनीतिक समाधान निकालने का दबाव बढ़ने की संभावना है. हालांकि, उस समय तक पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने का जोखिम बना रहेगा.

भारत को अमेरिकी टैरिफ से जल्द राहत मिलने की उम्मीद कम

अमेरिकी कांग्रेस में सत्ता का संतुलन बदलने के बावजूद भारत को व्यापार शुल्क के मोर्चे पर तत्काल राहत मिलने की संभावना नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति के पास टैरिफ तय करने और उनमें बदलाव करने के व्यापक अधिकार हैं. इसलिए कांग्रेस में डेमोक्रेटिक पार्टी का नियंत्रण बढ़ने से भारत पर लगाए गए शुल्कों में तुरंत बदलाव होना मुश्किल है.

वित्त वर्ष 2026 में अमेरिका को भारत का वस्तुओं का निर्यात करीब 90 अरब डॉलर रहा था. ऐसे में अमेरिकी व्यापार नीतियों में किसी भी तरह का बदलाव भारतीय निर्यातकों के लिए अहम होगा.

इसके अलावा रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने का खतरा भी बना हुआ है. अमेरिका के 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट' के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगा सकते हैं.

केयरएज के मुताबिक, 16 अक्टूबर को जारी की गई छूट की कोई निश्चित समयसीमा नहीं है और अमेरिकी प्रशासन इसे कभी भी वापस ले सकता है. ऐसे में यदि अमेरिका अपनी मौजूदा नीति में बदलाव करता है, तो भारतीय निर्यातकों पर दोबारा व्यापारिक दबाव बढ़ सकता है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नई अमेरिकी कांग्रेस भारत की ओर से रूस से कच्चे तेल और रक्षा उपकरणों की खरीद की ज्यादा जांच-पड़ताल कर सकती है. इससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में अनिश्चितता बढ़ सकती है.

रुपये को मिल सकता है सहारा, FPI निवेश में बदलाव की संभावना

रिपोर्ट में अमेरिकी चुनाव के नतीजों का भारतीय रुपये और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) पर असर हल्का सकारात्मक बताया गया है. कमजोर अमेरिकी डॉलर से भारतीय मुद्रा को मजबूती मिल सकती है. इसके अलावा वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में निवेश की रफ्तार धीमी पड़ने की स्थिति में विदेशी निवेशक अपने निवेश का कुछ हिस्सा भारत जैसे दूसरे बाजारों में लगा सकते हैं.

हालांकि, एच-1बी वीजा नियमों और रणनीतिक संबंधों पर चुनाव के नतीजों का असर लगभग तटस्थ रहने की उम्मीद है. रिपोर्ट के अनुसार, इन मुद्दों पर फैसले मुख्य रूप से अमेरिकी व्हाइट हाउस और वहां की अदालतों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.

भारत के लिए जोखिम का संतुलन बदला, चुनौतियां अभी बरकरार

केयरएज रेटिंग्स ने अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों को भारत के लिए किसी बड़े बदलाव के बजाय जोखिमों के संतुलन में बदलाव बताया है. रिपोर्ट के मुताबिक, डेमोक्रेटिक पार्टी का दोनों सदनों में नियंत्रण मजबूत होने से कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, लेकिन इससे भारत को तेल और व्यापार के मोर्चे पर तत्काल राहत मिलने की उम्मीद नहीं है.

आने वाले समय में भारत पर इसका व्यापक आर्थिक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिकी प्रशासन टैरिफ, रूस से तेल खरीद और पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर क्या फैसले लेता है.


धनतेरस से पहले बाजार में तेजी, सेंसेक्स उछला; निवेशकों की संपत्ति में ₹8 लाख करोड़ बढ़े

BSE का मार्केट कैप पहली बार 500 लाख करोड़ रुपये के पार, निफ्टी भी 24,500 के ऊपर बंद; कच्चे तेल में गिरावट, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और रुपये में मजबूती से बाजार को मिला सहारा

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 November, 2026
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Thursday, 05 November, 2026
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धनतेरस से पहले भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली. गुरुवार, 5 नवंबर को घरेलू शेयर बाजार में चौतरफा खरीदारी के चलते सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार उछाल दर्ज किया गया. सेंसेक्स 2,008.61 अंक यानी 2.60 फीसदी की बढ़त के साथ 79,310.01 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 576 अंक यानी 2.40 फीसदी चढ़कर 24,536.60 के स्तर पर पहुंच गया. इस तेजी के साथ निफ्टी ने 7 अगस्त के बाद पहली बार 24,500 के ऊपर क्लोजिंग दी. बाजार में आई तेजी से बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में करीब 8 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ और यह पहली बार 500 लाख करोड़ रुपये के पार निकल गया.

शेयर बाजार में लगातार छठे कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की गई. नवंबर 2025 के बाद यह बाजार की सबसे लंबी लगातार तेजी वाली अवधि है. इस दौरान निवेशकों का भरोसा मजबूत होने के पीछे कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारण रहे. कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार खरीदारी, अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी और भारतीय रुपये में मजबूती ने बाजार को सहारा दिया. खास बात यह रही कि गुरुवार को तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ऑटो, बैंकिंग, रियल एस्टेट और आईटी जैसे कई सेक्टरों में भी खरीदारी देखने को मिली.

BSE का मार्केट कैप पहली बार 500 लाख करोड़ रुपये के पार

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, शेयर बाजार में तेजी का सबसे बड़ा असर कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर दिखाई दिया. बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप पहली बार 500 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया. पिछले कारोबारी सत्र में बाजार बंद होने के समय यह करीब 493.44 लाख करोड़ रुपये था. गुरुवार की तेजी के बाद इसमें लगभग 8 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

इस तरह भारतीय शेयर बाजार ने एक बार फिर 5 लाख करोड़ डॉलर के बाजार पूंजीकरण का स्तर हासिल कर लिया. बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों की संपत्ति में भी बड़ा इजाफा किया. हालांकि, मार्केट कैप में बढ़ोतरी को निवेशकों का वास्तविक मुनाफा नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि यह सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार मूल्य में बदलाव को दर्शाता है.

ऑटो और बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा खरीदारी

गुरुवार को बाजार में तेजी का नेतृत्व ऑटो और बैंकिंग सेक्टर ने किया. सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब 4.14 फीसदी उछलकर सबसे आगे रहा. वहीं, निफ्टी बैंक में 3.33 फीसदी, रियल्टी, सरकारी बैंक और निजी बैंक इंडेक्स में करीब 3 फीसदी की तेजी दर्ज की गई. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और आईटी सेक्टर के शेयर भी 2 फीसदी से ज्यादा चढ़े.

निफ्टी 50 में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, इंटरग्लोब एविएशन, मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे. दूसरी ओर, अपोलो हॉस्पिटल्स, ओएनजीसी, एनटीपीसी, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और कोल इंडिया के शेयरों में गिरावट रही.

हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी रही, लेकिन इनका प्रदर्शन बड़े शेयरों के मुकाबले कमजोर रहा. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.8 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.5 फीसदी चढ़कर बंद हुआ. इस बीच 120 से ज्यादा शेयरों ने अपने 52 सप्ताह के उच्चतम स्तर को छुआ.

विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार को मिला सहारा

भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने भी तेजी को मजबूती दी है. विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को करीब 7,284 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की थी. यह अक्टूबर 2025 के बाद भारत में विदेशी निवेशकों की सबसे बड़ी एकदिवसीय खरीदारी में से एक रही. इसके साथ ही नवंबर में विदेशी निवेशकों का कुल निवेश करीब 1.57 अरब डॉलर तक पहुंच गया.

विदेशी निवेशकों की वापसी को घरेलू बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. लंबे समय तक बिकवाली के बाद उनकी खरीदारी से बाजार में लिक्विडिटी बढ़ती है और निवेशकों का भरोसा मजबूत होता है. हालांकि, आने वाले सत्रों में इस खरीदारी का जारी रहना बाजार की तेजी के लिए अहम होगा.

ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर के नीचे, चार दिन से जारी है गिरावट

भारतीय शेयर बाजार को मजबूती देने वाले सबसे बड़े कारकों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट शामिल रही. ब्रेंट क्रूड की कीमतें पिछले कारोबारी सत्र में करीब 8.7 फीसदी टूटकर 94.62 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई थीं. गुरुवार को भी इसमें गिरावट जारी रही और कीमतें 94 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं. वहीं, अमेरिकी कच्चे तेल डब्ल्यूटीआई (WTI) का भाव 87 डॉलर प्रति बैरल के करीब रहा.

अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगा है और डेमोक्रेट्स की स्थिति मजबूत हुई है. इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के जल्द खत्म होने और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिला.

रुपये में भी मजबूती, दो सप्ताह के उच्चतम स्तर पर बंद

शेयर बाजार के साथ भारतीय मुद्रा के मोर्चे पर भी राहत देखने को मिली. गुरुवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 17 पैसे मजबूत होकर 94.47 पर बंद हुआ. इससे पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 94.64 प्रति डॉलर पर था. Reuters के मुताबिक, रुपया करीब दो सप्ताह के सबसे मजबूत क्लोजिंग स्तर पर पहुंच गया.

रुपये में मजबूती के पीछे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की खरीदारी को अहम कारण माना जा रहा है. तेल की कीमतें कम होने से भारत का आयात बिल घटने की उम्मीद बढ़ती है, जबकि विदेशी पूंजी के प्रवाह से डॉलर की उपलब्धता को भी सहारा मिलता है.

अमेरिकी बाजारों की तेजी और वैश्विक संकेतों ने बढ़ाया भरोसा

भारतीय बाजार को वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक संकेत मिले. बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में जोरदार तेजी दर्ज की गई थी. डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज करीब 3 फीसदी चढ़कर बंद हुआ, जबकि एसएंडपी 500 में 1.58 फीसदी और नैस्डैक कंपोजिट में 0.91 फीसदी की बढ़त रही.

इसके अलावा पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतों में गिरावट से निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान बढ़ा. इन सभी कारकों का असर भारतीय बाजार पर दिखाई दिया. हालांकि, बाजार की मौजूदा तेजी कितनी टिकाऊ रहती है, यह आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
 


महिंद्रा एंड महिंद्रा का मुनाफा 25% बढ़कर ₹4,588 करोड़, ऑटो कारोबार ने दिखाई दमदार ग्रोथ

जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू भी 25% बढ़कर ₹57,553 करोड़ पहुंचा. ऑटो कारोबार का मुनाफा 55% बढ़ा, जबकि ट्रैक्टर कारोबार की बिक्री में 6% की गिरावट दर्ज की गई.

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Published - Thursday, 05 November, 2026
Last Modified:
Thursday, 05 November, 2026
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महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है. जुलाई-सितंबर 2026 के दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 25% बढ़कर 4,588 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 3,673 करोड़ रुपये था. इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू भी 25% बढ़कर 57,553 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो एक साल पहले 46,106 करोड़ रुपये था.

कंपनी के कुल प्रदर्शन में ऑटो कारोबार की अहम भूमिका रही. इस सेगमेंट में मुनाफा 55% बढ़ा, जबकि वाहनों की बिक्री में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई. दूसरी ओर, ट्रैक्टर और कृषि उपकरण कारोबार को त्योहारों के समय में बदलाव और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का दबाव झेलना पड़ा. इसके चलते इस कारोबार की बिक्री और मुनाफे में गिरावट आई. समूह की फाइनेंशियल सर्विसेज और टेक्नोलॉजी कारोबार ने भी बेहतर प्रदर्शन किया.

ऑटो कारोबार का मुनाफा 55% बढ़ा

महिंद्रा एंड महिंद्रा के ऑटो कारोबार ने दूसरी तिमाही में मजबूत प्रदर्शन किया. इस सेगमेंट का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 55% बढ़कर 2,388 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, रेवेन्यू 39% की बढ़ोतरी के साथ 37,756 करोड़ रुपये रहा.

तिमाही के दौरान कंपनी ने अपनी सहायक कंपनियों सहित कुल 3,30,896 वाहन बेचे, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 26% अधिक है. कंपनी की यूटिलिटी व्हीकल बिक्री करीब 1.83 लाख यूनिट रही. एसयूवी की बिक्री में भी सालाना आधार पर 26% की वृद्धि दर्ज की गई.

एसयूवी बाजार में रेवेन्यू के आधार पर कंपनी की हिस्सेदारी 24.3% रही. वहीं, इलेक्ट्रिक एसयूवी सेगमेंट में उसकी बाजार हिस्सेदारी 30.1% पहुंच गई. इसके अलावा 3.5 टन से कम वजन वाले हल्के कमर्शियल वाहनों के बाजार में महिंद्रा की हिस्सेदारी 52.3% और इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों में 36.2% रही.

ऑटो कारोबार का स्टैंडअलोन ब्याज और टैक्स से पहले मुनाफा (PBIT) 15% बढ़कर 2,614 करोड़ रुपये रहा. इसका पीबीआईटी मार्जिन 7.7% दर्ज किया गया. इलेक्ट्रिक एसयूवी की कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग व्यवस्था के प्रभाव को हटाने पर यह मार्जिन 9.1% रहा.

कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और ऑटो एवं फार्म सेक्टर के सीईओ राजेश जेजुरिकर ने कहा कि एसयूवी की मजबूत मांग से ऑटो कारोबार को फायदा मिला है. ऑटो कारोबार का कंसॉलिडेटेड पीबीआईटी मार्जिन पिछली तिमाही के मुकाबले 1.1 प्रतिशत अंक बढ़कर 8.8% हो गया.

ट्रैक्टर कारोबार पर दबाव, बिक्री 6% घटी

ऑटो कारोबार की मजबूत ग्रोथ के उलट कृषि उपकरण कारोबार का प्रदर्शन कमजोर रहा. दूसरी तिमाही में महिंद्रा ने 1,16,027 ट्रैक्टर बेचे, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 1,22,936 यूनिट था. इस तरह ट्रैक्टर बिक्री में सालाना आधार पर 6% की गिरावट आई.

कृषि उपकरण कारोबार का कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू भी 6% घटकर 9,572 करोड़ रुपये रह गया. वहीं, इस सेगमेंट का नेट प्रॉफिट 9% गिरकर 1,053 करोड़ रुपये रहा. हालांकि, घरेलू ट्रैक्टर बाजार में कंपनी ने 41.5% हिस्सेदारी के साथ अपनी नंबर एक स्थिति बरकरार रखी.

इस कारोबार का स्टैंडअलोन पीबीआईटी 1,441 करोड़ रुपये रहा. वहीं, पीबीआईटी मार्जिन पिछले साल के मुकाबले 3 प्रतिशत अंक घटकर 16.8% रह गया.

कंपनी के मुताबिक, त्योहारों के समय में बदलाव से ट्रैक्टरों की मांग प्रभावित हुई. इसके अलावा कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी ने भी मुनाफे पर दबाव डाला. हालांकि, पिछली तिमाही के मुकाबले कृषि उपकरण कारोबार के कंसॉलिडेटेड पीबीआईटी मार्जिन में 0.2 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ.

महिंद्रा फाइनेंस और टेक महिंद्रा का प्रदर्शन भी सुधरा

समूह के सर्विसेज कारोबार का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट दूसरी तिमाही में 18% बढ़कर 1,147 करोड़ रुपये हो गया. वहीं, रेवेन्यू भी 18% बढ़कर 11,821 करोड़ रुपये रहा.

महिंद्रा फाइनेंस के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 15% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. कंपनी का ग्रॉस स्टेज-3 एसेट अनुपात 3.42% रहा. वहीं, महिंद्रा एंड महिंद्रा के हिस्से में आने वाला महिंद्रा फाइनेंस का मुनाफा 61% बढ़ा.

टेक महिंद्रा के प्रदर्शन में भी सुधार हुआ. महिंद्रा एंड महिंद्रा के हिस्से में आने वाला टेक महिंद्रा का मुनाफा 33% बढ़ा. कंपनी का एबिट मार्जिन पिछले साल के मुकाबले 2.6 प्रतिशत अंक बढ़कर 14.8% हो गया.

महिंद्रा लाइफस्पेसेज की प्री-सेल्स 41% बढ़ी

समूह की रियल एस्टेट कंपनी महिंद्रा लाइफस्पेसेज की रेजिडेंशियल प्री-सेल्स दूसरी तिमाही में 41% बढ़कर 1,100 करोड़ रुपये पहुंच गई. कंपनी ने इस दौरान 1,500 करोड़ रुपये की ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू वाले नए प्रोजेक्ट भी जोड़े.

महिंद्रा हॉलिडेज का ऑक्यूपेंसी रेट बढ़कर 76% हो गया, जो पिछले साल के मुकाबले 2.2 प्रतिशत अंक अधिक है. कंपनी के पास कुल 5,762 कमरों की क्षमता रही.

वहीं, महिंद्रा लॉजिस्टिक्स का रेवेन्यू 24% बढ़कर 2,095 करोड़ रुपये पहुंच गया. महिंद्रा एंड महिंद्रा के हिस्से में आने वाले मुनाफे के आधार पर कंपनी घाटे से निकलकर मुनाफे में आ गई. समूह के उभरते कारोबारों, जिन्हें कंपनी 'ग्रोथ जेम्स' कहती है, का कुल मुनाफा तीन गुना हो गया.

मैनेजमेंट ने क्या कहा?

महिंद्रा एंड महिंद्रा के ग्रुप सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर अनीश शाह ने कहा कि दूसरी तिमाही में कंसॉलिडेटेड मुनाफे में 25% की बढ़ोतरी समूह के विभिन्न कारोबारों की मजबूती को दिखाती है. ग्राहकों की मजबूत मांग से ऑटो कारोबार में अच्छी ग्रोथ दर्ज की गई, जबकि त्योहारों के समय में बदलाव के कारण कृषि उपकरण कारोबार में गिरावट आई.

उन्होंने कहा कि महिंद्रा फाइनेंस ने अपनी ग्रोथ बरकरार रखी है और टेक महिंद्रा के प्रदर्शन में भी सुधार हुआ है. आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद कंपनी का ध्यान मुनाफे के साथ कारोबार बढ़ाने पर है.

समूह के मुख्य वित्त अधिकारी अमरज्योति बरुआ ने कहा कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन किया है. मजबूत बैलेंस शीट और नकदी की उपलब्धता से समूह को भविष्य में नए कारोबारों में निवेश करने में मदद मिलेगी.

 


टेलीकॉम कंपनियों पर TRAI की सख्ती, इंटरकनेक्शन में देरी पर लगेगा 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना

टेलीकॉम रेगुलेटर ने इंटरकनेक्शन नियमों में संशोधन करते हुए जुर्माने का नया ढांचा पेश किया है. रिपोर्टिंग में देरी पर 25 लाख रुपये और इंटरकनेक्शन से जुड़े उल्लंघनों पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा. नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 November, 2026
Last Modified:
Thursday, 05 November, 2026
BWHindia

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी और नियमों के उल्लंघन पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी की है. अब इंटरकनेक्शन की सुविधा देने में देरी करने, अनुरोध ठुकराने या इंटरकनेक्शन समझौता नहीं करने पर टेलीकॉम ऑपरेटरों को प्रति लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र में 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है. नियामक ने रिपोर्टिंग संबंधी नियमों के उल्लंघन पर भी रोजाना के हिसाब से जुर्माने का प्रावधान किया है.

ट्राई ने टेलीकम्युनिकेशन इंटरकनेक्शन रेगुलेशंस में तीसरे संशोधन के तहत ये बदलाव किए हैं. इनका उद्देश्य अलग-अलग टेलीकॉम नेटवर्क के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना और नियमों का पालन नहीं करने वाली कंपनियों की जवाबदेही तय करना है. संशोधित प्रावधान 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे.

15 दिन बाद बढ़ जाएगा रोजाना जुर्माना

नए नियमों के तहत रिपोर्टिंग से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन करने पर पहले 15 दिनों तक रोजाना 50,000 रुपये का वित्तीय जुर्माना लगेगा. यदि देरी 15 दिनों से अधिक जारी रहती है, तो जुर्माने की राशि बढ़कर प्रतिदिन 1 लाख रुपये हो जाएगी. हालांकि, प्रत्येक उल्लंघन के लिए कुल जुर्माने की अधिकतम सीमा प्रति सेवा क्षेत्र 25 लाख रुपये तय की गई है.

ट्राई के मुताबिक, पहले एक समान जुर्माने की व्यवस्था होने से कम अवधि की देरी और लंबे समय तक नियमों का पालन नहीं करने के बीच अंतर स्पष्ट नहीं हो पाता था. इसलिए अब उल्लंघन की अवधि के आधार पर जुर्माने की अलग-अलग दरें तय की गई हैं. इसका उद्देश्य कंपनियों को जल्द से जल्द सुधारात्मक कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करना है.

इंटरकनेक्शन में देरी पर 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना

इंटरकनेक्शन उपलब्ध कराने में देरी, अनुरोध स्वीकार नहीं करने, इंटरकनेक्शन समझौता नहीं करने या इंटरकनेक्शन प्वाइंट को बंद करने अथवा उसे सरेंडर करने जैसे मामलों में कंपनियों पर ज्यादा जुर्माना लगेगा.

ऐसे उल्लंघनों के लिए पहले 15 दिनों तक रोजाना 1 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा. यदि उल्लंघन 15 दिनों से अधिक जारी रहता है, तो यह राशि बढ़कर प्रतिदिन 2 लाख रुपये हो जाएगी. प्रत्येक मामले में जुर्माने की अधिकतम सीमा प्रति लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र 1 करोड़ रुपये होगी.

नियामक की ओर से निर्धारित वित्तीय जुर्माने का भुगतान 21 दिनों के भीतर या प्राधिकरण की ओर से तय समयसीमा में करना होगा.

तीन साल में IP आधारित इंटरकनेक्शन व्यवस्था अपनानी होगी

ट्राई ने इंटरकनेक्शन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) आधारित सिस्टम अपनाना भी अनिवार्य किया है. नए इंटरकनेक्शन समझौते अब IP आधारित सिस्टम के जरिए ही किए जाएंगे.

वहीं, टेलीकॉम कंपनियों को अपने मौजूदा इंटरकनेक्शन सिस्टम को जनवरी 2027 से तीन साल के भीतर IP आधारित व्यवस्था में बदलना होगा. इस बदलाव का उद्देश्य नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाना, कॉल की गुणवत्ता सुधारना और कॉल ड्रॉप की समस्या कम करना है.

इसके अलावा, ट्राई ने इंटरकनेक्शन व्यवस्था को मौजूदा लॉन्ग डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (LDCA) और शॉर्ट डिस्टेंस चार्जिंग एरिया (SDCA) के ढांचे से धीरे-धीरे लाइसेंस्ड सर्विस एरिया (LSA) स्तर पर स्थानांतरित करने का भी प्रावधान किया है.

बैंक गारंटी के मौजूदा नियम बरकरार

ट्राई ने इंटरकनेक्शन समझौते के लिए बैंक गारंटी से जुड़े मौजूदा प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया है. इसके तहत कोई टेलीकॉम सेवा प्रदाता इंटरकनेक्शन समझौते की मांग करता है, तो दूसरा सेवा प्रदाता शुरुआती इंटरकनेक्शन स्थापित होने के बाद छह महीने की अवधि को कवर करने वाली बैंक गारंटी मांग सकता है.

यह शर्त तभी लागू होगी, जब दूसरा सेवा प्रदाता बैंक गारंटी की मांग करेगा. इसकी राशि भी उसी के आधार पर तय की जाएगी. ट्राई के इन संशोधनों से टेलीकॉम कंपनियों के बीच इंटरकनेक्शन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के साथ नेटवर्क की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलने की उम्मीद है.

 


LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया की ऑटो सेक्टर में एंट्री, आंध्र प्रदेश में बनाएगी ADAS और इंफोटेनमेंट सिस्टम

कंपनी श्री सिटी स्थित अपनी आगामी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में इन-व्हीकल इंफोटेनमेंट सिस्टम, ऑटोमोटिव डिस्प्ले, टेलीमैटिक्स और एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) का निर्माण करेगी. विस्तार योजना के लिए शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 05 November, 2026
Last Modified:
Thursday, 05 November, 2026
BWHindia

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया (LG Electronics India) अब ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी सेक्टर में कदम रखने की तैयारी कर रही है. कंपनी आंध्र प्रदेश के श्री सिटी (Sri City) में अपनी आगामी तीसरी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में वाहनों से जुड़े कई तकनीकी उपकरणों का निर्माण करेगी. इसके साथ ही कंपनी का कारोबार होम अप्लायंसेज और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से आगे बढ़कर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी विस्तार करेगा.

कंपनी के बोर्ड ने 5 नवंबर को इस नए कारोबार में प्रवेश के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. नियामकीय फाइलिंग के मुताबिक, कंपनी इन-व्हीकल इंफोटेनमेंट सिस्टम, ऑटोमोटिव डिस्प्ले, टेलीमैटिक्स, व्हीकल कंप्यूटिंग सॉल्यूशंस, एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) और ऑटोमोटिव सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में काम करेगी.

शेयरधारकों की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगी योजना

इस नए कारोबार के लिए कंपनी ने अपने मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MOA) में संशोधन का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत कंपनी को ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से जुड़ी गतिविधियां संचालित करने की अनुमति मिलेगी. इस संशोधन के लिए पोस्टल बैलेट के जरिए शेयरधारकों की मंजूरी ली जाएगी.

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के मुताबिक, इस कारोबार में निवेश चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. निवेश की राशि कारोबार के विस्तार, टेक्नोलॉजी, उपकरणों की जरूरत और बाजार की मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर तय होगी. हालांकि, कंपनी ने फिलहाल इस योजना के लिए कुल निवेश का खुलासा नहीं किया है.

ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी सेक्टर में कंपनी की एंट्री ऐसे समय में हो रही है, जब वाहनों में कनेक्टेड टेक्नोलॉजी, डिजिटल डिस्प्ले और एडवांस्ड सेफ्टी सिस्टम की मांग बढ़ रही है. इस विस्तार से कंपनी को वाहन निर्माण से जुड़े तकनीकी उपकरणों और कनेक्टेड मोबिलिटी के बढ़ते बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा.

दूसरी तिमाही में मुनाफा 25.7 फीसदी बढ़ा

इस बीच, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है. कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 25.7 फीसदी बढ़कर 489 करोड़ रुपये हो गया. इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू भी 19.5 फीसदी बढ़कर 7,380 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

कंपनी का ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले का मुनाफा (EBITDA) 28 फीसदी बढ़कर 701 करोड़ रुपये रहा. वहीं, EBITDA मार्जिन पिछले साल की समान तिमाही के 8.9 फीसदी से बढ़कर 9.5 फीसदी हो गया.

होम अप्लायंसेज कारोबार की रेवेन्यू ग्रोथ 20.9 फीसदी

कंपनी के बड़े कारोबार होम अप्लायंसेज एंड एयर सॉल्यूशन सेगमेंट का रेवेन्यू 20.9 फीसदी बढ़कर 4,772 करोड़ रुपये रहा. वहीं, होम एंटरटेनमेंट सेगमेंट का रेवेन्यू 17.2 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 2,608 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कंपनी ने मिड-टीन्स में रेवेन्यू ग्रोथ और शुरुआती डबल-डिजिट EBITDA मार्जिन का अपना अनुमान बरकरार रखा है.

कंपनी ने यह भी बताया कि श्री सिटी स्थित मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में कंप्रेसर का उत्पादन वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में शुरू होने की उम्मीद है. यह यूनिट भारत में कंपनी की व्यापक विनिर्माण विस्तार योजना का हिस्सा है.