बाजार में लिक्विडिटी और कीमतों की खोज बेहतर करने के लिए सेबी ने एफपीआई को गैर-कृषि इंडेक्स और फिजिकली सेटल्ड कमोडिटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स (ETCD) में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भागीदारी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत एफपीआई को गैर-कृषि इंडेक्स डेरिवेटिव्स और फिजिकली सेटल्ड गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग की अनुमति देने का प्रस्ताव है. सेबी का मानना है कि इससे कमोडिटी बाजार में भागीदारों का आधार बढ़ेगा, लिक्विडिटी में सुधार होगा और कीमतों की बेहतर खोज में मदद मिलेगी.
गैर-कृषि इंडेक्स डेरिवेटिव्स में भागीदारी का प्रस्ताव
सेबी द्वारा मंगलवार को जारी परामर्श पत्र के अनुसार, पहले प्रस्ताव के तहत एफपीआई को गैर-कृषि इंडेक्स डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स में भाग लेने की अनुमति देने की बात कही गई है. इसमें यह मायने नहीं रखेगा कि इन कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़े अंडरलाइंग कॉन्ट्रैक्ट्स का निपटान नकद में होता है या नहीं. फिलहाल एफपीआई केवल ऐसे गैर-कृषि डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स में हिस्सा ले सकते हैं, जिनसे जुड़े अंडरलाइंग कॉन्ट्रैक्ट्स का निपटान नकद में होता है.
सेबी ने कहा कि इंडेक्स डेरिवेटिव्स का निपटान हमेशा नकद में होता है, चाहे उनकी अंडरलाइंग एसेट्स का निपटान नकद में हो या नहीं. इसलिए ऐसे कॉन्ट्रैक्ट्स में एफपीआई की भागीदारी की अनुमति देने से डिलिवरी से जुड़ी कोई समस्या नहीं होगी. कमोडिटी डेरिवेटिव एडवाइजरी कमेटी (CDAC) ने भी इस प्रस्ताव पर सहमति जताई है.
फिजिकली सेटल्ड कमोडिटी डेरिवेटिव्स में भी एंट्री
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेबी के दूसरे प्रस्ताव में एफपीआई को घरेलू एक्सचेंजों पर उपलब्ध ऐसे गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव्स में भाग लेने की अनुमति देने की बात कही गई है, जिनका निपटान नकद के बजाय वास्तविक डिलिवरी के जरिए होता है. इसमें कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, सोना, चांदी और बेस मेटल्स जैसी कमोडिटीज से जुड़े डेरिवेटिव्स शामिल हैं. ये कमोडिटीज वैश्विक बेंचमार्क से भी गहराई से जुड़ी हुई हैं.
सेबी के मुताबिक, इन सेगमेंट में एफपीआई की भागीदारी से बाजार में प्रतिभागियों का आधार बढ़ेगा. इसके साथ ही लिक्विडिटी बेहतर होगी, डेरिवेटिव्स और फिजिकल कमोडिटी मार्केट के बीच तालमेल मजबूत होगा और भारतीय कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार को वैश्विक कमोडिटी बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी.
डिलिवरी से पहले निवेश बेचना या रोलओवर करना होगा
प्रस्ताव के तहत एफपीआई को टेंडर अवधि शुरू होने से पहले अपनी पोजीशन बेचनी या रोलओवर करनी होगी. यह अवधि एक्सपायरी से तीन दिन पहले यानी T-3 से शुरू होती है. अगर एफपीआई ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उनकी ओपन पोजीशन को किसी ट्रेडिंग मेंबर (TM) या ट्रेडिंग-कम-क्लियरिंग मेंबर (TCM) के प्रोपराइटरी खातों में अपने आप ट्रांसफर करने का प्रस्ताव है.
डिलिवरी को लेकर क्यों है नियम?
यह सुरक्षा उपाय इसलिए प्रस्तावित किया गया है क्योंकि भारत में एफपीआई का कोई स्थायी कारोबारी ठिकाना नहीं होता और उन्हें कमोडिटी की डिलिवरी लेने या देने की अनुमति नहीं है.
सेबी के मुताबिक, भले ही कोई एफपीआई अपनी ओर से कमोडिटी की डिलिवरी लेने या देने के लिए किसी ट्रेडिंग मेंबर या ब्रोकर को नियुक्त करे, फिर भी भारत में कमोडिटी की खरीद या बिक्री के लिए उसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन की जरूरत पड़ सकती है. इसी वजह से सेबी ने एफपीआई के लिए निवेश की बिक्री या पोजीशन रोलओवर करने का नियम प्रस्तावित किया है. हालांकि, नियामक ने यह भी माना है कि केवल निवेश की बिक्री का यह सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हो सकता, क्योंकि इसकी सफलता पूरी तरह एफपीआई की ओर से समय पर उठाए गए कदमों पर निर्भर करेगी.
बाजार में क्या होगा असर?
सेबी का प्रस्ताव लागू होने पर भारतीय कमोडिटी डेरिवेटिव्स बाजार में विदेशी निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है. इससे खासकर गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव्स में कारोबार और लिक्विडिटी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. साथ ही, घरेलू डेरिवेटिव्स बाजार का वैश्विक कमोडिटी बाजार के साथ जुड़ाव और मजबूत हो सकता है.
बिना जांचे, बिना ऑडिट के, बेलगाम: भारत की चार सर्वशक्तिशाली एजेंसियां. ये मनमाने ढंग से आपकी जिंदगी को रोक सकती हैं, लेकिन एक छिपा हुआ कानूनी चक्र उनकी विफलताओं को पूरी तरह सार्वजनिक नजरों से दूर रखता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
चार बेहद शक्तिशाली एजेंसियां पूरी तरह एक तरह की भरोसे की व्यवस्था पर काम करती हैं, संपत्तियां और स्वतंत्रता जब्त करते हुए भी अपने वास्तविक प्रदर्शन को जनता से छिपाए रखती हैं. इन चार एजेंसियों में प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो शामिल हैं. सामूहिक रूप से इनके पास तलाशी लेने, संपत्ति जब्त करने, संपत्ति कुर्क करने और लोगों को जेल भेजने की व्यापक शक्तियां हैं. फिर भी इनमें से किसी एक का भी इस बात को लेकर उचित सार्वजनिक ऑडिट नहीं हुआ है कि इनमें से कोई भी काम वास्तव में कितना प्रभावी है.
ईडी
सबसे पहले प्रवर्तन निदेशालय से शुरुआत करते हैं. 2021-22 से 2025-26 के पांच वर्षों में इसने मनी लॉन्ड्रिंग के 4,622 मामले दर्ज किए. वित्त मंत्रालय ने खुद यह आंकड़ा राज्यसभा के सामने रखा. इनमें से केवल 43 मामलों में दोषसिद्धि हुई. 43 प्रतिशत नहीं. 43 मामले. सौ में एक से भी कम.
इसी अवधि में एजेंसी ने 2,444 अभियोजन शिकायतें दाखिल कीं और 1,243 लोगों को गिरफ्तार किया. इनमें से हर गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत जमानत की कड़ी दोहरी शर्त वाली कसौटी से गुजरी, जो आरोपी व्यक्ति को यह साबित करने के लिए मजबूर करती है कि वह संभवतः निर्दोष है, तभी वह घर जा सकता है. घरों की तलाशी ली गई. बैंक खाते फ्रीज किए गए. एक ही न्यूज साइकिल में करियर और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा. और लंबी प्रक्रिया के अंत में: 43 दोषसिद्धियां.
एजेंसी आपको बताएगी कि उसकी दोषसिद्धि दर 93 प्रतिशत से अधिक है. यह आंकड़ा भी सही है. लेकिन इसमें एक पेंच है. इसकी गणना केवल उन मामलों पर की जाती है जो वास्तव में अंतिम फैसले तक पहुंचे हैं. एक प्रतिशत से कम का आंकड़ा उन सभी मामलों पर आधारित है जिन्हें एजेंसी ने खुद दर्ज करने का फैसला किया. वही एजेंसी, वही वर्ष, दो बिल्कुल अलग कहानियां. ईडी के बाहर कोई यह तय नहीं करता कि इनमें से कौन सा आंकड़ा ईमानदार है, क्योंकि किसी स्वतंत्र संस्था ने कभी दोनों का ऑडिट नहीं किया.
हाई-प्रोफाइल मामलों पर करीब से नजर डालें. दस वर्षों में ईडी ने मौजूदा और पूर्व सांसदों, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और अन्य राजनीतिक हस्तियों के खिलाफ 193 मामले दर्ज किए. दोषसिद्धियां: दो. अकेले हाल के पांच वर्षों में इसने राजनेताओं के खिलाफ 125 नए मामले दर्ज किए और एक भी दोषसिद्धि हासिल नहीं की. लगभग कुछ भी पूरा नहीं हो रहा है.
सीबीआई
सीबीआई की अपनी समस्याएं हैं. भारत की प्रमुख जांच एजेंसी में 1,502 अधिकारी कम हैं. केंद्रीय सतर्कता आयोग की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, 7,300 पदों की स्वीकृत संख्या है और वास्तव में केवल 5,798 लोग तैनात हैं. अदालतें जिन सबसे संवेदनशील मामलों के लिए इस एजेंसी का रुख करती हैं, वहां पांच में से एक से अधिक पद खाली हैं.
जो काम यह कर भी पाती है, वह भी अक्सर लंबित पड़ा रहता है. 2024 के अंत में 46 सरकारी संगठनों से जुड़े सीबीआई के 200 मामले अभियोजन की मंजूरी के इंतजार में अटके हुए थे यह उस आरोपी अधिकारी के अपने मंत्रालय से मिलने वाली औपचारिक अनुमति है, जिसके आधार पर उसे मुकदमे का सामना करने के लिए अदालत में पेश किया जा सके. इनमें से आधे से अधिक मामलों में कानूनी समयसीमा पहले ही पार हो चुकी थी. अदालतों में सीबीआई के 6,900 से अधिक भ्रष्टाचार के मामले लंबित थे. इनमें से 361 मामले 20 वर्षों से अधिक समय से लंबित थे. 2005 में आरोपी बनाया गया कोई क्लर्क अब सेवानिवृत्त हो चुका हो सकता है या उसकी मृत्यु भी हो चुकी हो, फिर भी उसका नाम विचाराधीन मामले में दर्ज हो सकता है.
सीवीसी ने खुद सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ लंबित 60 विभागीय मामलों को भी दर्ज किया. इनमें से 22 मामले चार वर्षों से अधिक समय से अनसुलझे थे. जिस एजेंसी को भ्रष्टाचार खत्म करने की जिम्मेदारी दी गई है, वह अपने ही लोगों के खिलाफ मामलों को उचित समय में बंद नहीं कर पा रही है.
एसएफआईओ, एनसीबी
गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय से पूछें कि उसने कितनी दोषसिद्धियां हासिल की हैं तो जवाब में आमतौर पर भेजे गए मामलों या दाखिल की गई शिकायतों की संख्या बताई जाती है. वास्तविक दोषसिद्धि दर गायब है. इसलिए नहीं कि यह गोपनीय है, बल्कि इसलिए कि व्यवस्था ने कभी किसी को इसकी गणना करने के लिए बाध्य ही नहीं किया.
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के प्रवर्तन कार्य को लेकर कभी प्रकाशित सीएजी प्रदर्शन ऑडिट नहीं हुआ है. रिकॉर्ड में इसके सबसे करीब 2014 की एक पुरानी समीक्षा है, लेकिन उसमें किसी और चीज को देखा गया था, राजस्व विभाग के अफीम संबंधी संचालन को. हम अंदाजा लगा सकते हैं कि वास्तविक ऑडिट में क्या सामने आ सकता है, क्योंकि सीएजी ने राज्य स्तर पर इसी तरह का काम किया है और नतीजे गंभीर थे. पंजाब में एक वर्ष में मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में बरी हुए 756 लोगों में से 532 इसलिए रिहा हो गए क्योंकि उन्हीं पुलिस अधिकारियों की गवाही में समस्याएं थीं, जिन्होंने उन्हें गिरफ्तार किया था. 70 प्रतिशत बरी होने के मामले जांच करने वाली एजेंसी की ओर से कमजोर सबूतों तक सीमित रहे. जब्त किए गए नमूने अक्सर 23 से 476 दिनों की देरी से फोरेंसिक प्रयोगशालाओं तक पहुंचे. सबूत अलमारियों में पड़े रहे और लोग जेलों में.
यह एक राज्य के मादक पदार्थ प्रवर्तन का एक ऑडिट था. समस्या को उन चार राष्ट्रीय एजेंसियों के साथ जोड़कर देखिए, जिन्हें कभी इसी तरह की जांच का सामना नहीं करना पड़ा.
अन्य देश नियमित रूप से ऐसा करते हैं. अमेरिका में न्याय विभाग का इंस्पेक्टर जनरल और गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस एफबीआई और डीईए की जांच करते हैं. ब्रिटेन में निरीक्षकों के लिए नेशनल क्राइम एजेंसी की जांच करना कानूनी दायित्व है. ऑस्ट्रेलिया का ऑडिट कार्यालय फेडरल पुलिस की जांच करता है, जिसमें यह भी शामिल है कि वे अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कैसे करते हैं.
कम ऑडिट
भारत में ऐसा कुछ भी तुलनीय नहीं है. सीएजी को सार्वजनिक धन का इस्तेमाल करने वाली किसी भी संस्था का प्रदर्शन ऑडिट करने की अनुमति है, लेकिन इन एजेंसियों के लिए ऐसा करना अनिवार्य नहीं है. चारों संगठन अलग-अलग मंत्रालयों और अलग-अलग संसदीय समितियों को जवाब देते हैं, इसलिए कोई एक जगह पूरी तस्वीर नहीं देख पाती या एक एजेंसी के नतीजों की दूसरी एजेंसी से तुलना नहीं कर पाती. केंद्रीय सतर्कता आयोग केवल सीबीआई को देखता है और वह भी केवल सतर्कता के नजरिए से, जांच की समग्र गुणवत्ता के नजरिए से नहीं. सीबीआई, ईडी और एनसीबी सूचना का अधिकार अधिनियम की एक विशेष अनुसूची में शामिल हैं, जो प्रदर्शन से जुड़े ज्यादातर आंकड़ों को सार्वजनिक नजरों से दूर रखती है.
पैसों के पक्ष का सावधानी से ऑडिट किया जाता है, वेतन, वाहन, कार्यालय का किराया, हर चीज का हिसाब आखिरी रुपये तक संतुलित किया जाता है. केवल एक चीज की गिनती कभी नहीं होती कि वास्तव में किसी को न्याय के कटघरे तक पहुंचाया गया या नहीं.
संसद एक ही सत्र में इसे बदल सकती है. वह केंद्रीय जांच एजेंसियों के प्रदर्शन का केंद्रित ऑडिट करने के लिए सीएजी से कह सकती है. वह जोर दे सकती है कि प्रत्येक एजेंसी समान दोषसिद्धि दर की परिभाषा का इस्तेमाल करते हुए एक स्पष्ट वार्षिक प्रदर्शन विवरण प्रकाशित करे. वह एसएफआईओ और एनसीबी को अपनी पारदर्शी बजट मदें दे सकती है, ताकि लागत और नतीजों की तुलना की जा सके. वह चारों एजेंसियों पर अधिकार रखने वाली एक संयुक्त समिति या उचित निरीक्षण संस्था बना सकती है.
जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक चार शक्तिशाली एजेंसियां, जो किसी व्यक्ति का घर, बैंक खाता और स्वतंत्रता छीन सकती हैं, भरोसे की व्यवस्था पर काम करती रहेंगी. वे अपने ही होमवर्क को खुद जांचती हैं और वही आंकड़ा पेश करती हैं जो सबसे अच्छा दिखाई देता है.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
मंगलवार को सेंसेक्स 388.19 अंक यानी 0.49 फीसदी की गिरावट के साथ 78,154.25 अंक पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 में 112.10 अंक यानी 0.46 फीसदी की गिरावट के साथ 24,471.70 अंक पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार, 11 अगस्त को गिरावट देखने को मिली. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर निवेशकों के सेंटीमेंट पर पड़ा. कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 400 अंक से ज्यादा फिसला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 50 भी 24,500 के स्तर से नीचे चला गया. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 388.19 अंक यानी 0.49 फीसदी की गिरावट के साथ 78,154.25 अंक पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 में 112.10 अंक यानी 0.46 फीसदी की गिरावट रही और यह 24,471.70 अंक पर बंद हुआ. हालांकि, आज सुबह गिफ्ट निफ्टी करीब 24,545-24,560 के आसपास कारोबार कर रहा है, जो मंगलवार के बंद स्तर से हल्की बढ़त दिखा रहा है. ऐसे में भारतीय बाजार की शुरुआत फ्लैट से मामूली तेजी के साथ होने के संकेत हैं.
30 में से 25 शेयर लाल निशान में
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 25 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए. अल्ट्राटेक सीमेंट का शेयर सबसे ज्यादा 2.75 फीसदी टूटा. इसके अलावा एक्सिस बैंक, इंडिगो, भारती एयरटेल, बजाज फाइनेंस, पावरग्रिड, आईटीसी, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा स्टील, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स और अडानी पोर्ट्स में भी गिरावट रही. दूसरी ओर, इटरनल का शेयर 2.01 फीसदी चढ़कर सबसे ज्यादा बढ़त में रहा. इंफोसिस, टाइटन, एचसीएल टेक और टीसीएस के शेयर भी तेजी के साथ बंद हुए.
ब्रॉडर मार्केट में कैसी रही चाल
ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.02 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.22 फीसदी की तेजी रही. सेक्टोरल आधार पर सीमेंट, एफएमसीजी, रियल्टी और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला. वहीं, निफ्टी फार्मा ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया.
कच्चे तेल की तेजी से बढ़ी चिंता
बाजार की नजर फिलहाल पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है. 12 अगस्त की सुबह ब्रेंट क्रूड करीब 89-90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था. पिछले पांच कारोबारी सत्रों में इसमें करीब 12 फीसदी की तेजी आ चुकी है. स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अनिश्चितता बनी रहने से भारतीय बाजार में भी उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका है.
आज इन शेयरों में दिख सकती है हलचल
12 अगस्त को कई कंपनियों के तिमाही नतीजों और कॉरपोरेट अपडेट्स के चलते कुछ शेयर फोकस में रह सकते हैं. Tata Motors, Hindustan Aeronautics (HAL), Grasim Industries, Apollo Hospitals, Lenskart Solutions, GMR Airports और IRCTC के आज Q1 FY27 नतीजे आने हैं. ऐसे में इन शेयरों में कारोबारी गतिविधि बढ़ सकती है. BEML को HAL से 184.25 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है, जिससे कंपनी के शेयर में हलचल देखने को मिल सकती है. L&T का L&T Network Services में अपनी पूरी हिस्सेदारी Vyoma को बेचने का फैसला भी बाजार के रडार पर रहेगा.
Manappuram Finance के पहली तिमाही के मुनाफे में चार गुना से ज्यादा बढ़ोतरी हुई है, जबकि Bata India का मुनाफा 23.1 फीसदी बढ़ा है. इन अपडेट्स के चलते दोनों शेयरों में भी हलचल देखने को मिल सकती है. Glenmark Pharmaceuticals भी आज फोकस में रह सकता है. उसकी अमेरिकी सब्सिडियरी ने Humana के साथ मुकदमे के निपटारे के लिए 15.28 मिलियन डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई है.
कच्चे तेल की कीमत करीब 90 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने के कारण Indian Oil, BPCL और HPCL जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां भी निवेशकों के रडार पर रहेंगी. इसके अलावा Tenneco Clean Air India, RHI Magnesita India, Senco Gold, TBZ, HG Infra Engineering, Zydus Lifesciences और Metropolis Healthcare के शेयरों में भी कॉरपोरेट अपडेट्स के चलते हलचल देखने को मिल सकती है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
छह साल पहले मुखबिरों को 10 करोड़ रुपये तक इनाम देने का वादा हुआ था, लेकिन सेबी की पिछली दो रिपोर्टों में किसी को इनाम नहीं मिला.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
पलक शाह
सेबी की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के पृष्ठ 207 पर "अन्य मामले" शीर्षक के तहत अंदरूनी कारोबार की जानकारी देने वाले मुखबिरों से जुड़ा सालभर का आंकड़ा दिया गया है.
पच्चीस फॉर्म
सेबी को अंदरूनी कारोबार से जुड़ी जानकारी देने वाले मुखबिरों से इस साल सिर्फ 25 शिकायतें या फॉर्म मिले. इनमें से 14 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, जबकि 12 मामलों की अभी जांच चल रही है. खास बात यह है कि देश में 22.5 करोड़ से ज्यादा डीमैट खाते हैं और अंदरूनी कारोबार की शिकायतों के बावजूद मुखबिरों के लिए बनाई गई सेबी की गोपनीय व्यवस्था के जरिए बहुत कम जानकारी सामने आई है.
और यह तेजी का साल है
पिछले साल की रिपोर्ट के पृष्ठ 245 पर जाएं. पूरे 2024-25 में, मुखबिर संरक्षण कार्यालय को चार फॉर्म मिले, चार और उन चार में से "मूल जानकारी" जिस पर वास्तव में कार्रवाई की जा सकती थी, ठीक एक में मौजूद थी. बाकी तीन को कुछ भी शामिल नहीं होने के कारण बंद कर दिया गया. भारत की अंदरूनी कारोबार सूचना लाइन ने एक पूरे वित्तीय वर्ष में एक उपयोगी सूचना दी.
इस साल की रिपोर्ट, संयोग से, यह नहीं बताती कि 25 फॉर्म में से कितनों में मूल जानकारी थी. पिछले साल की रिपोर्ट में यह जानकारी थी. वह विवरण चुपचाप हटा दिया गया है, इसलिए हमें पता है कि 25 लिफाफे पहुंचे और हमें बिल्कुल पता नहीं कि उनमें से कोई खोलने लायक भी था या नहीं.
अब पैसे की बात. 2021 में सेबी ने मुखबिर के अधिकतम पुरस्कार को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दिया था और इसे इस तरह पेश किया गया था मानो बाढ़ के द्वार खुलने वाले हों. यह योजना 24 दिसंबर 2019 को लागू हुई थी, छह साल से भी अधिक समय पहले. 10 करोड़ रुपये को ऐसी जानकारी की कीमत के तौर पर प्रचारित किया गया था, जो अंदरूनी कारोबार के किसी बड़े मामले को उजागर कर सके.
पिछली दो वार्षिक रिपोर्टों में से किसी में भी किसी एक मुखबिर को एक रुपये का भुगतान दर्ज नहीं है.
यहां बताया गया है कि उन्हीं रिपोर्टों में क्या दर्ज है. धारा 13.4.6, सम्मान और पुरस्कार: 25 साल की सेवा के लिए नौ कर्मचारियों का सम्मान और 10वीं और 12वीं कक्षा में शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए कर्मचारियों के 26 बच्चों को पुरस्कार.
स्पष्ट कर दें, यह एक नियोक्ता के लिए करने के लिए बिल्कुल अच्छी बात है और किसी को भी 16 साल के बच्चे को प्रमाणपत्र मिलने पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए. बच्चे मुद्दा नहीं हैं. मुद्दा यह है कि सेबी एक ऐसे पुरस्कार कार्यक्रम का संचालन करता है जो दस्तावेजीकृत है, प्रशासित है, जिसका प्रिंट में जश्न मनाया जाता है और जो स्पष्ट रूप से काम कर रहा है और वह रिपोर्ट कार्ड के लिए है. दूसरा वाला, जो बाजार में कदाचार की परतें खोलने के लिए बनाया गया था, उसका कोई दर्ज आउटपुट ही नहीं है.
सेबी ने शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 26 बच्चों को पुरस्कृत किया. उसकी वार्षिक रिपोर्टों से पता चलता है कि उसने अंदरूनी कारोबार के किसी भी मुखबिर को पुरस्कृत नहीं किया है.
आसपास की अर्थव्यवस्था यह संकेत नहीं देती कि यह कोई दुर्घटना है. पूरे 2025-26 में, सेबी के निर्णयन अधिकारियों ने अंदरूनी कारोबार के लिए 12 संस्थाओं पर कुल 1.4 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया, तालिका 10.19. इस बीच नियामक ने खुद अंदरूनी कारोबार से जुड़ी 221 जांच शुरू कीं और 202 पूरी कीं. यह हमेशा की तरह इन मामलों का पता लगाता है: निगरानी, एक्सचेंज अलर्ट, अपनी खुद की सूंघने की क्षमता. मुखबिर चैनल कोई स्रोत नहीं है. यह सिर्फ एक संकेत-पट्ट है.
जिससे तीन सवाल बचते हैं, जो किसी को सेबी से लिखित में पूछने चाहिए. मुखबिर संरक्षण कार्यालय को चलाने में कितना खर्च आता है? इसके वैधानिक वार्षिक रिपोर्ट कहां हैं, जिन्हें ढांचे के अनुसार सार्वजनिक किया जाना है? और छह साल में, क्या इसने कभी किसी को कुछ भी भुगतान किया है?
स्टॉपवॉच लेकर आएं.
स्रोत: सेबी की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26, धारा 13.14, पृष्ठ 207; तालिका 10.19 और तालिका 10.4, अध्याय 10; धारा 13.4.6. सेबी की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25, धारा 13.14(ए), पृष्ठ 245. पुरस्कार की अधिकतम सीमा, 2021 में संशोधित सेबी (अंदरूनी कारोबार का निषेध) विनियमों के अनुसार.
पलक शाह, BW रिपोर्टर्स
(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के लेखक हैं. लगभग दो दशकों के अनुभव के साथ, उन्होंने मुंबई में जमीनी रिपोर्टिंग करते हुए पैसे, ताकत और नियमों के गठजोड़ को उजागर किया है. उनके लेख The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line जैसे प्रमुख प्रकाशनों में प्रकाशित हुए हैं. 19 साल की उम्र में अपराध पत्रकारिता से शुरुआत करने वाले पलक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के गैंगवार अब कॉरपोरेट अपराध में बदल चुके हैं. इसी ने उन्हें वित्तीय पत्रकारिता की ओर मोड़ा, जहां उन्होंने बाजार हेरफेर और सिस्टम की खामियों को उजागर किया.)
जुलाई में ₹500 प्रति 14.2 किलो सिलेंडर था घाटा, सरकार पर अब भी ₹59,000 करोड़ से ज्यादा की सब्सिडी देनदारी
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को सब्सिडी वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बिक्री पर होने वाला घाटा अगस्त में काफी घट गया है. पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को संसद में बताया कि अगस्त में 14.2 किलो के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर तेल कंपनियों का राजस्व नुकसान घटकर ₹188 प्रति सिलेंडर रह गया, जबकि जुलाई में यह ₹500 था.
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL) दिल्ली में जून से 14.2 किलो का घरेलू एलपीजी सिलेंडर ₹942 में बेच रही हैं. सब्सिडी वाली कीमत और कंपनियों की लागत के बीच के अंतर की भरपाई सरकार करती है, हालांकि इसका भुगतान कुछ देरी से किया जाता है.
सरकार ने ₹30,000 करोड़ जारी किए
संसद में लिखित जवाब में सुरेश गोपी ने बताया कि सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 और 2026-27 के लिए एलपीजी सब्सिडी के बकाये के तौर पर ₹30,000 करोड़ जारी किए हैं. इसके बावजूद 31 जुलाई 2026 तक सरकारी तेल कंपनियों को सब्सिडी वाले एलपीजी की बिक्री के लिए सरकार से मिलने वाली कुल बकाया राशि ₹59,000 करोड़ से ज्यादा थी.
जून में ₹29 महंगा हुआ था घरेलू सिलेंडर
दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 7 जून को ₹29 बढ़ाकर ₹942 कर दी गई थी. इससे पहले इसकी कीमत ₹913 थी. तीन महीने के भीतर यह दूसरी बढ़ोतरी थी. उस समय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा था कि भारत में घरेलू उपभोक्ता अभी भी दुनिया के कई देशों की तुलना में कम कीमत पर खाना पकाने की गैस प्राप्त कर रहे हैं.
उज्ज्वला लाभार्थियों को ₹300 की सब्सिडी
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के पात्र लाभार्थियों को एक वित्त वर्ष में पहले चार रिफिल पर प्रति सिलेंडर ₹300 की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) सब्सिडी मिलती है. इस सब्सिडी के बाद उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए 14.2 किलो के सिलेंडर की प्रभावी कीमत ₹642 रह जाती है. मंत्रालय के मुताबिक, यह प्रभावी कीमत पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में घरेलू एलपीजी की मौजूदा कीमतों की तुलना में कम है.
LPG की मांग और कीमतों में सुधार से घाटा घटा
प्रति सिलेंडर नुकसान में कमी ऐसे समय आई है जब एलपीजी की सप्लाई की स्थिति में सुधार हुआ है और मांग भी नरम हुई है. ICICI Securities की जुलाई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर मौजूदा कीमतें बनी रहती हैं तो सितंबर तिमाही में IOC, BPCL और HPCL का एलपीजी घाटा करीब आधा हो सकता है.
ब्रोकरेज ने अनुमान लगाया था कि दूसरी तिमाही में एलपीजी घाटे की तिमाही रन रेट ₹12,000 करोड़ से नीचे आ सकती है, जबकि पहली तिमाही में यह करीब ₹22,000 करोड़ थी.
घरेलू LPG उत्पादन में 40% से ज्यादा बढ़ोतरी
एलपीजी की उपलब्धता में सुधार को घरेलू उत्पादन में तेज बढ़ोतरी से भी समर्थन मिला है. पश्चिम एशिया में संघर्ष के शुरुआती महीनों के दौरान भारतीय रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन में 40 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी की.
इससे अप्रैल और मई में घरेलू एलपीजी की उपलब्धता बढ़कर करीब 15-16 लाख टन प्रति माह हो गई. इस दौरान घरेलू उत्पादन देश की कुल एलपीजी मांग का 65 फीसदी से ज्यादा पूरा करने में सक्षम रहा, जिससे आयात पर निर्भरता कम हुई.
LPG आयात पर निर्भरता भी घटी
इस अवधि में भारत का एलपीजी आयात करीब 10 लाख टन प्रति माह रहने का अनुमान था, जो कुल खपत का लगभग 38 फीसदी था. हालिया भू-राजनीतिक संघर्ष से पहले भारत की एलपीजी जरूरत का 62 फीसदी से ज्यादा हिस्सा आयात से पूरा होता था. उस समय हर महीने औसतन करीब 17 लाख टन एलपीजी का आयात किया जाता था.
प्रति सिलेंडर राजस्व नुकसान में आई कमी से सरकारी तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव कम हो सकता है. हालांकि, सब्सिडी के रूप में सरकार पर जमा बकाया देनदारी अब भी ₹59,000 करोड़ से अधिक बनी हुई है.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने संसद में दी जानकारी, घरेलू स्तर पर मौजूद अतिरिक्त इथेनॉल क्षमता के इस्तेमाल का भी मिलेगा मौका; पेट्रोल में 20% ब्लेंडिंग की सीमा फिलहाल बरकरार
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत सरकार खाना पकाने के ईंधन के तौर पर इथेनॉल के इस्तेमाल की संभावनाओं पर विचार कर रही है. इसका मकसद घरेलू रसोई में एलपीजी की जगह वैकल्पिक और अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना और आयातित एलपीजी पर देश की निर्भरता कम करना है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) ने संसद को यह जानकारी दी है.
मंत्रालय के मुताबिक, इस पहल से देश में मौजूद अतिरिक्त इथेनॉल उत्पादन क्षमता के लिए भी नया इस्तेमाल तैयार हो सकता है. सरकार का उद्देश्य घरेलू खाना पकाने के लिए वैकल्पिक ईंधनों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना है.
इथेनॉल आधारित कुकिंग सॉल्यूशन विकसित करने में जुटी एजेंसियां
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन की संयुक्त पहल LPG Equipment Research Centre (LERC) सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के साथ मिलकर इथेनॉल आधारित खाना पकाने के समाधान विकसित करने पर काम कर रहा है. यह पहल घरेलू खाना पकाने के लिए वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की सरकार की व्यापक रणनीति का हिस्सा है.
पेट्रोल में 20% से ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग पर अभी फैसला नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग की मौजूदा 20 फीसदी सीमा बढ़ाने को लेकर अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह भी कहा कि डीजल में इथेनॉल मिलाने का प्रयोग व्यावहारिक साबित नहीं हुआ है. परीक्षणों के दौरान इथेनॉल मिश्रित डीजल निर्धारित फ्लैश प्वाइंट की शर्तों को पूरा नहीं कर सका. इथेनॉल की मौजूदगी के कारण डीजल का फ्लैश प्वाइंट काफी कम हो गया था.
अमेरिका से इथेनॉल आयात की खबरों को सरकार ने बताया गलत
इथेनॉल नीति को लेकर सरकार का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब भारत में घरेलू इथेनॉल की उपलब्धता और आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में इसकी भूमिका को लेकर चर्चा जारी है.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने उन रिपोर्टों को भी खारिज किया है जिनमें दावा किया गया था कि भारत ने पेट्रोल में ब्लेंडिंग के लिए अमेरिका से बड़ी मात्रा में इथेनॉल आयात करने पर सहमति जताई है.
मंत्रालय ने इन रिपोर्टों को “बेबुनियाद और तथ्यात्मक रूप से गलत” बताया. सरकार के मुताबिक, Ethanol Blended with Petrol Programme (EBP) के लिए जरूरी इथेनॉल पूरी तरह घरेलू उत्पादकों से खरीदा जाता है और पेट्रोल ब्लेंडिंग में अमेरिका से आयातित इथेनॉल का इस्तेमाल नहीं हो रहा है.
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता के दौरान ईंधन ब्लेंडिंग के लिए इथेनॉल आयात को लेकर भारत ने कोई रियायत या प्रतिबद्धता नहीं दी है. देश में इथेनॉल की खरीद और ब्लेंडिंग नीति घरेलू जरूरतों के आधार पर तय की जाती है.
E20 पेट्रोल की गुणवत्ता पर OMCs ने दी सफाई
इस बीच, सरकारी तेल कंपनियों ने E20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है. E20 पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल और बाकी पेट्रोल होता है. इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल में ज्यादा नमी और क्लोराइड संदूषण होने की मीडिया रिपोर्ट्स के बाद देशभर में E20 की व्यापक जांच की गई. इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने कहा कि जांच में ईंधन सप्लाई चेन के अलग-अलग चरणों को शामिल किया गया और गुणवत्ता निर्धारित मानकों के भीतर पाई गई.
तेल कंपनियों के मुताबिक, उपभोक्ता E20 पेट्रोल का इस्तेमाल भरोसे के साथ जारी रख सकते हैं. OMC नेटवर्क के जरिए उपलब्ध कराया जा रहा ईंधन निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है और पूरी सप्लाई चेन में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और जांच की मजबूत व्यवस्था मौजूद है.
परिवहन से आगे बढ़ सकता है इथेनॉल का इस्तेमाल
सरकार का खाना पकाने के ईंधन के तौर पर इथेनॉल के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशना इस जैव ईंधन की भूमिका को परिवहन क्षेत्र से आगे बढ़ाने की दिशा में कदम है. फिलहाल पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग की सीमा 20 फीसदी पर बरकरार है और इसके लिए घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल पर ही निर्भरता जारी है.
सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू में 16% की मजबूत ग्रोथ, लेकिन विज्ञापन से कमाई 11.5% घटी; खर्च बढ़ने का भी पड़ा असर
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जी एंटरटेन्मेंट (Zee Entertainment Enterprises) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में परिचालन आय में 5 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की है. हालांकि, इस दौरान कंपनी के मुनाफे में करीब 48 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है. 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड ऑपरेटिंग रेवेन्यू बढ़कर ₹1,907.3 करोड़ हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹1,821 करोड़ था.
कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) घटकर ₹743 करोड़ रह गया, जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में यह ₹1,437 करोड़ था. वहीं, कंपनी की कुल आय ₹1,993.5 करोड़ रही, जो पिछले साल की जून तिमाही में ₹1,849.8 करोड़ थी.
सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू में 16% की बढ़ोतरी
जी की कमाई में इस तिमाही के दौरान सब्सक्रिप्शन कारोबार ने बेहतर प्रदर्शन किया. कंपनी का सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू करीब 16 फीसदी बढ़कर ₹1,136.9 करोड़ हो गया. पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹980.6 करोड़ था. इसके विपरीत, विज्ञापन से होने वाली कमाई पर दबाव देखने को मिला. कंपनी का एडवर्टाइजिंग रेवेन्यू करीब 11.5 फीसदी घटकर ₹671.4 करोड़ रह गया, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹758.5 करोड़ था. अन्य बिक्री और सेवाओं से होने वाली आय भी बढ़कर ₹99 करोड़ हो गई, जबकि एक साल पहले यह ₹84.6 करोड़ थी.
बढ़े कंपनी के कुल खर्च
तिमाही के दौरान Zee का कुल खर्च बढ़कर ₹1,864.4 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹1,652.7 करोड़ था. ऑपरेशनल कॉस्ट ₹971 करोड़ से बढ़कर ₹1,031.7 करोड़ हो गई. वहीं, विज्ञापन और पब्लिसिटी पर कंपनी का खर्च भी काफी बढ़ा. यह पिछले साल के ₹275.3 करोड़ से बढ़कर ₹446.8 करोड़ हो गया. हालांकि, कर्मचारी लाभ पर खर्च ₹220.1 करोड़ से घटकर ₹213.6 करोड़ रहा. कंपनी का एक्सेप्शनल आइटम और टैक्स से पहले का मुनाफा ₹741 करोड़ रहा, जबकि जून 2025 तिमाही में यह ₹1,972 करोड़ था.
कंटेंट और निवेश के ढांचे में बदलाव
तिमाही के दौरान जी ने अपने कंटेंट और निवेश ढांचे में भी कई बदलाव किए. कंपनी ने Phantom Digital Effects की ओर से जारी कंपल्सरी कन्वर्टिबल डिबेंचर्स में ₹115.7 करोड़ का निवेश किया. इन डिबेंचर्स पर सालाना 0.1 फीसदी कूपन है और इन्हें निवेश वाली कंपनी के इक्विटी शेयरों में बदला जा सकता है. इसके अलावा जी ने Culture of Real Experiences में कंपल्सरी कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयरों के जरिए ₹10 करोड़ का निवेश किया और कंपनी में 33.33 फीसदी फुली डायल्यूटेड हिस्सेदारी हासिल की.
कंटेंट सिंडिकेशन कारोबार सब्सिडियरी को ट्रांसफर
जी ने 1 अप्रैल 2026 से अपने कंटेंट की सिंडिकेशन और लाइसेंसिंग से जुड़े कारोबार को अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी ZI-IPL Enterprises को ट्रांसफर कर दिया है. इसके साथ संबंधित एसेट्स, देनदारियां और कमर्शियल राइट्स भी ट्रांसफर किए गए हैं.
यह ट्रांसफर स्लंप सेल के जरिए किया गया और ट्रांसफर किए गए नेट एसेट्स का मूल्य ₹490.2 करोड़ आंका गया है. इसके बराबर की रिसीवेबल राशि Zee की किताबों में दर्ज की गई है.
पिछले वित्त वर्ष में भी हुआ था इन्वेंट्री एडजस्टमेंट
यह पुनर्गठन ऐसे समय में हुआ है जब कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में कंटेंट इन्वेंट्री से जुड़े अनुमान में बदलाव किया था. जी ने प्रीमियर फिल्मों की इन्वेंट्री के इस्तेमाल से जुड़े अपने अनुमानों को संशोधित किया था. इसके चलते मार्च 2026 तिमाही और पूरे वित्त वर्ष में ₹39.2 करोड़ का अतिरिक्त ऑपरेशनल कॉस्ट चार्ज दर्ज किया गया था.
TRAI ने वॉयस कॉल के जरिए होने वाली धोखाधड़ी और फर्जी पहचान के मामलों पर लगाम लगाने के लिए 1601 नंबर सीरीज शुरू की है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मोबाइल पर आने वाली अनजान और फर्जी कॉल से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है. दरअसल, भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने 1601 नंबर सीरीज की नई व्यवस्था लागू कर दी है. इसके तहत बिजली, पानी, गैस, कूरियर और पार्सल डिलीवरी जैसी सेवाओं से जुड़ी संस्थाएं खास 1601 सीरीज के नंबरों से ग्राहकों को कॉल करेंगी. इससे लोगों के लिए असली सेवा प्रदाता और संभावित ठगों के बीच अंतर करना आसान होगा.
क्या है TRAI की नई 1601 नंबर सीरीज?
TRAI ने वॉयस कॉल के जरिए होने वाली धोखाधड़ी और फर्जी पहचान के मामलों पर लगाम लगाने के लिए 1601 नंबर सीरीज शुरू की है. इसके पहले चरण में यूटिलिटी और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को शामिल किया गया है. यानी बिजली वितरण कंपनियां, जल सेवा प्रदाता, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियां और एलपीजी वितरण संस्थाएं इस सीरीज का इस्तेमाल कर सकेंगी. इसके अलावा कूरियर, एक्सप्रेस लॉजिस्टिक्स और पार्सल डिलीवरी कंपनियां भी 1601 नंबर से ग्राहकों को कॉल कर सकेंगी.
बैंक और सरकारी कॉल के लिए 1600 सीरीज
बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, बीमा और सरकारी संस्थाओं से जुड़ी जरूरी कॉल के लिए 1600 नंबर सीरीज की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी. इससे अलग-अलग तरह की महत्वपूर्ण सेवाओं से आने वाली कॉल की पहचान करना उपभोक्ताओं के लिए आसान होगा.
टेलीकॉम कंपनियों को मिला 90 दिन का समय
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, TRAI ने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स (TSPs) को नई व्यवस्था लागू करने के लिए 90 दिनों का समय दिया है. पात्र संस्थाओं का माइग्रेशन और ऑनबोर्डिंग इसी अवधि के भीतर पूरा करना होगा. 1601 सीरीज के नंबर उचित सत्यापन के बाद सीधे पात्र संस्थाओं को आवंटित किए जाएंगे. नंबर आवंटन की प्रक्रिया में बिचौलियों और एग्रीगेटरों को शामिल नहीं किया जाएगा.
1601 नंबर से नहीं होगी प्रचार वाली कॉल
TRAI ने साफ किया है कि 1601 सीरीज का इस्तेमाल केवल जरूरी सेवा और ट्रांजैक्शन से जुड़ी वॉयस कॉल के लिए किया जाएगा. इन नंबरों से किसी तरह की प्रमोशनल या प्रचारात्मक कॉल करने की अनुमति नहीं होगी. नंबर जारी करने से पहले संबंधित संस्थाओं से इस संबंध में वचन-पत्र भी लिया जाएगा.
ग्राहकों को क्या फायदा होगा?
अक्सर साइबर ठग बिजली बिल, गैस कनेक्शन, कूरियर डिलीवरी या अन्य सेवाओं के नाम पर आम 10 अंकों वाले मोबाइल नंबरों से लोगों को कॉल करते हैं. नई व्यवस्था लागू होने के बाद वैध सेवा प्रदाताओं की कॉल के लिए एक अलग नंबर सीरीज होने से ग्राहकों को कॉल की पहचान करने में मदद मिलेगी. हालांकि, किसी भी कॉल पर बैंकिंग डिटेल, ओटीपी, यूपीआई पिन या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा करने से पहले हमेशा सावधानी बरतना जरूरी होगा.
संसद ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 को मंजूरी दे दी है. बिल के तहत सरकार को इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के ऐसे माध्यम और ट्रांजैक्शन तय करने का अधिकार मिलेगा, जिन पर कोई शुल्क नहीं लगाया जा सकेगा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
संसद ने सोमवार को कराधान और अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 (Taxation and Other Laws (Amendment) को मंजूरी दे दी. राज्यसभा ने संक्षिप्त चर्चा और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के जवाब के बाद इसे ध्वनिमत से पारित किया. लोकसभा पहले ही पिछले सप्ताह इस बिल को मंजूरी दे चुकी है. बिल का उद्देश्य डिजिटल भुगतान से जुड़े नियमों को कानूनी आधार देना और सरकार को यह तय करने की शक्ति देना है कि कौन से इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड और ट्रांजैक्शन शुल्क-मुक्त रहेंगे.
UPI पर नहीं लगेगा कोई चार्ज
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया कि इस कानून का मतलब यह नहीं है कि UPI यूजर्स से ट्रांजैक्शन चार्ज लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि UPI की शुरुआत से ही ग्राहकों के लिए यह सुविधा मुफ्त रही है और आगे भी लोग बिना किसी ट्रांजैक्शन शुल्क के इसका इस्तेमाल कर सकेंगे. उन्होंने कहा कि ग्राहक को UPI ट्रांजैक्शन के लिए कोई चार्ज नहीं देना होगा. यानी आम लोगों के लिए UPI के जरिए तत्काल डिजिटल भुगतान पहले की तरह मुफ्त बना रहेगा.
सरकार को मिलेगी इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड तय करने की शक्ति
नए कानून के तहत केंद्र सरकार को नोटिफिकेशन के जरिए ऐसे इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड या ट्रांजैक्शन निर्धारित करने का अधिकार मिलेगा, जिन्हें शुल्क-मुक्त रखना जरूरी होगा. यह बदलाव Payment and Settlement Systems Act को इनकम टैक्स एक्ट से अलग करने के लिए किया गया है. मौजूदा व्यवस्था के तहत बैंक और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर UPI और RuPay डेबिट कार्ड के जरिए किए गए ट्रांजैक्शन पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से यूजर्स से शुल्क नहीं ले सकते. हालांकि, नया कानून UPI यूजर्स पर कोई नया ट्रांजैक्शन चार्ज लागू नहीं करता. इसके बजाय यह एक वैधानिक व्यवस्था तैयार करता है, जिसके तहत सरकार यह अधिसूचित कर सकेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यमों और ट्रांजैक्शन को शुल्क-मुक्त रखना है.
MDR को लेकर बहस के बीच आया बदलाव
यह प्रावधान Merchant Discount Rate यानी MDR को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच आया है. MDR डिजिटल पेमेंट की प्रोसेसिंग लागत को पेमेंट सिस्टम से जुड़े अलग-अलग पक्षों के बीच बांटने से संबंधित है. बिल के प्रावधानों से सरकार को मौजूदा जीरो-MDR व्यवस्था को लेकर ज्यादा लचीलापन मिलेगा. हालांकि, वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि इससे ग्राहकों के लिए UPI भुगतान पर कोई शुल्क लागू नहीं होगा.
विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की भी कोशिश
टैक्स बिल में डिजिटल पेमेंट के अलावा विदेशी निवेश आकर्षित करने और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं. साथ ही विदेशी क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स को भारतीय डेटा सेंटर का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करने का भी प्रावधान है.
बिल 5 जून को जारी किए गए उस अध्यादेश की जगह लेता है, जिसके तहत सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs को मिलने वाली ब्याज आय और कैपिटल गेन पर इनकम टैक्स छूट दी गई थी.
भारत में फंड मैनेजरों को लाने की कोशिश
इस कानून में निवेश फंड्स से जुड़ी कुछ शर्तों को भी आसान बनाने का प्रावधान है. इसका उद्देश्य फंड मैनेजरों को भारत में स्थानांतरित होने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि कुछ परिस्थितियों में उनके वैश्विक आय पर भारत में टैक्स लगाने का जोखिम कम हो.
दोनों सदनों से बिल पारित होने के बाद अब केंद्र सरकार के पास इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के उन माध्यमों और ट्रांजैक्शन को अधिसूचित करने का कानूनी ढांचा है, जिन्हें शुल्क-मुक्त रखना होगा. हालांकि, UPI को लेकर वित्त मंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि आम ग्राहकों से कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लिया जाएगा.
अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद गौतम अडानी और समूह के वरिष्ठ अधिकारियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है. मामले में आरोप हटाए जाने के बाद अडानी ने कहा कि मुश्किल दौर में भी उनका सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में भरोसा अटूट रहा.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
अडानी ग्रुप (Adani Group) के चेयरमैन गौतम अडानी को अमेरिका से बड़ी कानूनी राहत मिली है. अमेरिकी अदालत ने उनके और समूह के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले में आरोप हटा दिए हैं. यह मामला कथित रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी से जुड़ा था और सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट्स हासिल करने के दौरान अमेरिकी निवेशकों को कथित तौर पर गुमराह करने के आरोप लगाए गए थे. फैसले के बाद गौतम अडानी ने न्यायिक प्रक्रिया में अपना भरोसा दोहराते हुए इसे सच्चाई और कानून के शासन में विश्वास की जीत बताया है.
गौतम अडानी ने क्या कहा?
अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद गौतम अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना बयान साझा किया. उन्होंने कहा कि वह अदालत के फैसले का विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वागत करते हैं. अडानी ने कहा कि मुश्किल दौर में भी सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में उनका भरोसा अटूट रहा. उन्होंने उन लोगों का भी आभार जताया, जिन्होंने इस पूरे मामले के दौरान अडानी समूह, कानूनी प्रक्रिया और भारत की न्याय व्यवस्था पर अपना विश्वास बनाए रखा.
I welcome the US court’s decision with humility and deep respect for the judicial process.
— Gautam Adani (@gautam_adani) August 10, 2026
Throughout this challenging period, our faith in truth, fairness and the rule of law remained unwavering.
My deepest gratitude to those who never lost faith in us, in the system and in…
क्या था अडानी के खिलाफ मामला?
गौतम अडानी और अडानी ग्रीन एनर्जी से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों पर अमेरिका में सोलर पावर कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए कथित रिश्वतखोरी और अमेरिकी निवेशकों को कथित तौर पर गुमराह करने के आरोप लगाए गए थे. अडानी समूह ने शुरुआत से ही इन आरोपों को खारिज किया था और कहा था कि समूह ने सभी लागू कानूनों और नियामकीय मानकों का पालन किया है. अब अमेरिकी जिला अदालत के फैसले के बाद इस आपराधिक मामले में अडानी और संबंधित अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है.
Adani Group के शेयरों पर भी नजर
अमेरिका में कानूनी मामले से जुड़ी यह राहत अडानी समूह की कंपनियों के लिए अहम मानी जा रही है. फैसले से निवेशकों के बीच सेंटीमेंट मजबूत होने की उम्मीद है और अडानी समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है. हालांकि, शेयरों की वास्तविक चाल बाजार के व्यापक रुख और अन्य कारोबारी संकेतकों पर भी निर्भर करेगी.
ग्लोबल बिजनेस के लिए क्यों अहम है फैसला?
अडानी समूह के लिए यह फैसला सिर्फ कानूनी राहत तक सीमित नहीं है. अमेरिकी मामले का निपटारा समूह के लिए वैश्विक निवेशकों और कारोबारी साझेदारों के बीच भरोसे के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इससे समूह की अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजनाओं, संभावित निवेश और फंडिंग गतिविधियों को लेकर धारणा में सुधार आ सकता है.
सोमवार को सेंसेक्स 43.27 अंक यानी 0.06 फीसदी की बढ़त के साथ 78,542.44 अंक पर बंद हुआ. वहीं निफ्टी50 13.15 अंक यानी 0.05 फीसदी बढ़कर 24,583.80 अंक पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार, 11 अगस्त का कारोबारी सत्र सतर्कता भरा रह सकता है. GIFT Nifty में कमजोरी के संकेत मिल रहे हैं और यह करीब 43 अंक गिरकर 24,617.50 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की उम्मीद कमजोर पड़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ी है. वहीं कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बाजार के लिए दबाव का कारण बन सकती है. ऐसे में निवेशकों की नजर आज बाजार की शुरुआती चाल के साथ-साथ कई कंपनियों से जुड़े अहम कॉरपोरेट अपडेट्स पर रहेगी.
सोमवार को मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ था बाजार
सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में पूरे कारोबारी सत्र के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण निवेशकों का सेंटीमेंट प्रभावित रहा. हालांकि, आखिरी घंटे में खरीदारी लौटने से बाजार मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ. बीएसई सेंसेक्स 43.27 अंक यानी 0.06 फीसदी की बढ़त के साथ 78,542.44 अंक पर बंद हुआ. वहीं एनएसई का निफ्टी50 13.15 अंक यानी 0.05 फीसदी बढ़कर 24,583.80 अंक पर पहुंच गया.
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 19 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए. टाइटन का शेयर सबसे ज्यादा 3.14 फीसदी चढ़ा. बजाज फाइनेंस में 1.93 फीसदी, बजाज फिनसर्व में 1.15 फीसदी, टाटा स्टील में 1.09 फीसदी और एशियन पेंट्स में 1.07 फीसदी की तेजी रही. दूसरी ओर बैंकिंग शेयरों पर दबाव देखने को मिला. SBI का शेयर 2.19 फीसदी टूटकर सेंसेक्स का सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा. इटरनल, NTPC, ITC, TCS, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल और रिलायंस इंडस्ट्रीज भी गिरावट में बंद हुए. सेक्टरों में निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स करीब 2 फीसदी गिरकर सबसे कमजोर रहा, जबकि निफ्टी रियल्टी इंडेक्स ने बेहतर प्रदर्शन किया.
एशियाई बाजारों में तेजी, अमेरिकी बाजार कमजोर
मंगलवार को एशियाई बाजारों में मिलाजुला रुख देखने को मिला. हांगकांग का Hang Seng करीब 0.42 फीसदी ऊपर था, जबकि दक्षिण कोरिया का Kospi 0.32 फीसदी की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा था. निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया की स्थिति और अमेरिकी बाजारों के प्रदर्शन पर बनी हुई है. अमेरिकी बाजारों में सोमवार को हल्की गिरावट रही. Dow Jones Industrial Average 0.11 फीसदी, S&P 500 0.06 फीसदी और Nasdaq Composite 0.32 फीसदी गिरकर बंद हुआ.
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में गतिरोध की आशंका के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है. अमेरिकी पेट्रोलियम भंडार 300 मिलियन बैरल से नीचे पहुंच गया है, जिसे 1983 के बाद का सबसे निचला स्तर बताया जा रहा है. इससे आने वाले समय में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज पर अगस्त वायदा 0.09 फीसदी बढ़कर 87.80 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. इसके अलावा सोने और चांदी के वायदा भाव में भी तेजी रही. सोना 1.51 फीसदी और चांदी 2.02 फीसदी चढ़ी.
इन शेयरों पर रहेगी नजर
मंगलवार को कई कंपनियों से जुड़े बड़े कॉरपोरेट अपडेट्स सामने आए हैं, जिनका असर शेयरों पर देखने को मिल सकता है. Bharat Electronics (BEL) को 31 जुलाई के बाद से अब तक करीब 541 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऑर्डर मिले हैं. वहीं RailTel को डाक विभाग से करीब 119 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है. Prestige Estates की हॉस्पिटैलिटी यूनिट में CPPIB 3,000 करोड़ रुपये तक निवेश कर सकता है और कंपनी में 28 फीसदी तक हिस्सेदारी हासिल कर सकता है. TVS Motor ने प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए 1,000 करोड़ रुपये के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर जारी किए हैं. PC Jeweller के बोर्ड ने QIP के जरिए 1,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी दी है. Adani Enterprises, Adani Energy Solutions, Adani Green Energy, Adani Ports, Adani Power, Adani Total Gas, Ambuja Cements और ACC के शेयर भी फोकस में रहेंगे. वहीं Bharat Forge ने अपनी सहयोगी कंपनी Kalyani Strategic Systems में 241 करोड़ रुपये अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दी है.
BSE के शेयरों पर भी नजर रहेगी. NSE Nifty 50 इंडेक्स में BSE, Wipro की जगह शामिल होगा और यह बदलाव 30 सितंबर 2026 से प्रभावी होगा. इसके अलावा JSW Energy ने अप्रैल 2026 से अब तक 1,166 MW नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ी है. Maruti Clean Coal and Power के अधिग्रहण के बाद कंपनी की कुल स्थापित क्षमता 14,920 MW हो गई है. फार्मा कंपनी Lupin को अमेरिकी FDA से Sodium Zirconium Cyclosilicate ओरल सस्पेंशन के लिए मंजूरी मिली है. इस दवा का इस्तेमाल वयस्कों में हाइपरकलेमिया यानी शरीर में पोटैशियम का स्तर बढ़ने के इलाज में किया जाता है. इसके चलते Lupin का शेयर भी निवेशकों के रडार पर रहेगा.
आज कई कंपनियां जारी करेंगी Q1 नतीजे
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मंगलवार को कई कंपनियां वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी करेंगी. इनमें Arkade Developers, Ashiana Housing, Ashoka Buildcon, Balrampur Chini Mills, Bata India, Borana Weaves, AvenuesAI, DAM Capital Advisors, Delta Corp, EPL, Finolex Cables, Gokaldas Exports, IFCI, Manappuram Finance, MRF, NBCC India, PI Industries, Rail Vikas Nigam, Senco Gold, Siemens, SKF India, TARC, TD Power Systems, Unichem Laboratories, Venky’s India और Zydus Lifesciences समेत कई कंपनियां शामिल हैं.
आज बाजार की दिशा तय करने में GIFT Nifty, कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया में तनाव, अमेरिकी बाजारों का रुख और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां अहम रहेंगी. इसके अलावा Q1 नतीजों और कंपनियों के ऑर्डर, फंड जुटाने और कारोबार विस्तार से जुड़े अपडेट्स के कारण चुनिंदा शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)