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देश में पहली बार बनेगा हेलियम रिकवरी प्लांट, ONGC और EIL के बीच समझौता
यह परियोजना न केवल भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगी, बल्कि अंतरिक्ष, चिकित्सा, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक मजबूती भी प्रदान करेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago
तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ONGC) की अनुसंधान और विकास इकाई ओएनजीसी एनर्जी सेंटर ट्रस्ट (OECT) ने इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) के साथ एक औपचारिक समझौता किया है. यह समझौता तमिलनाडु के कावेरी एसेट स्थित ओएनजीसी की कूथालम गैस कलेक्शन स्टेशन में हेलियम रिकवरी डेमोन्स्ट्रेशन प्लांट की स्थापना के लिए किया गया है.
इस समझौते के तहत डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR), बेसिक इंजीनियरिंग डिजाइन पैकेज (BEDP) की तैयारी और EPCM और सप्लाई मॉडल के माध्यम से परियोजना का क्रियान्वयन शामिल है, जिसमें डिजाइन, इंजीनियरिंग, खरीद, निर्माण, कमीशनिंग और परफॉर्मेंस टेस्टिंग शामिल है.
यह परियोजना सीएसआईआर– इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (CSIR-IIP) द्वारा विकसित तकनीकी पैकेज पर आधारित है और इसका उद्देश्य प्राकृतिक गैस से 99.995% शुद्धता वाला ग्रेड-A हेलियम पुनर्प्राप्त करना है. यह डेमो प्लांट 750 Nm³/घंटा प्राकृतिक गैस को संसाधित करेगा और इसकी क्षमता को 110% तक संचालित करने के लचीलेपन के साथ डिज़ाइन किया गया है.
परियोजना का कुल समझौता मूल्य ₹39.42 करोड़ (जीएसटी अतिरिक्त) है और इसे 18 महीनों के भीतर पूरा किया जाना है. हेलियम एक महत्वपूर्ण गैस है जिसका उपयोग अंतरिक्ष अनुसंधान, सेमीकंडक्टर निर्माण, क्रायोजेनिक्स, फाइबर ऑप्टिक्स और चिकित्सा तकनीकों में किया जाता है. भारत अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए वर्तमान में हेलियम आयात करता है, ऐसे में देश के भीतर हेलियम पुनर्प्राप्ति की क्षमता विकसित करना रणनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है.
यह डेमोन्स्ट्रेशन प्लांट ओएनजीसी की उच्च-मूल्य गैसों में स्वदेशी क्षमताओं के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. यह पहल आत्मनिर्भर भारत के विजन को सशक्त बनाती है और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा एवं तकनीकी सुरक्षा में योगदान देती है.
इस सहयोग के माध्यम से, OECT और EIL अपनी विशेषज्ञता को मिलाकर भारत में अपनी तरह की पहली परियोजना को क्रियान्वित करेंगे, जिससे ओएनजीसी की "एनर्जी नाउ एंड नेक्स्ट" की प्रतिबद्धता को मजबूती मिलेगी, जहां अत्याधुनिक अनुसंधान को व्यावहारिक औद्योगिक अनुप्रयोग से जोड़ा जाएगा.
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